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                <title>Kapil Sibal - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Kapil Sibal RSS Feed</description>
                
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                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी? आप का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177431/aaps-big-claim-is-that-membership-of-7-mps-including"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई जानकारों, देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य ने साफ़ कर दिया है कि आप को तोड़कर बीजेपी में विलय करने का फ़ैसला लेने वाले सात लोगों की सदस्यता ख़त्म होगी। ये बहुत साफ़ तौर पर है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संजय सिंह ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे संविधान के जानकारों की राय लेकर राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक याचिका भेजी है जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक इन सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए, इसके बारे में अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सभापति महोदय से मांग की है कि इसकी जल्द से जल्द सुनवाई करके अपनी ओर से न्यायपूर्ण फैसला दें। संविधान की 10वीं अनुसूची में भी साफ़ तौर पर लिखा गया है कि इस तरह की किसी भी तोड़फोड़ की इजाजत भारत का संविधान नहीं देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के पूर्व राज्‍यसभा उपनेता राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि पार्टी के 10 में से 7 राज्‍यसभा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा है, इसलिए वे एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून से बच सकते हैं।बागी सांसदों में राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हो गए। स्वाति मालीवाल ने शनिवार को बीजेपी जॉइन करने की पुष्टि की।आप के इन सात सांसदों की बगावत के बाद अब आप के पास राज्‍यसभा में सिर्फ 3 सांसद बचे हैं- संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सात सांसदों की बगावत पर आप के वरिष्ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने पहले ही कहा था, 'यह गैरकानूनी, गलत, असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। हम इनकी पूरी सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।'संजय सिंह ने कहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग रहे हैं और वे पंजाब से चुने गए 6 बागी सांसदों को वापस बुलाने की मांग करेंगे। हालांकि, संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।वरिष्ठ वकील और संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल ने एचटी से कहा कि पार्टी खुद पहले मर्जर का फैसला नहीं ले ले तब तक कोई भी खुद से मर्जर नहीं कर सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी स्तर पर रेजॉल्यूशन पास करना ज़रूरी है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एचटी से कहा कि ये 7 सांसद अयोग्यता से बच नहीं सकते। हालाँकि, सांसदों को वापस बुलाने यानी हटाने के अधिकार पर पूर्व पंजाब एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने साफ़ किया कि 'राइट टू रिकॉल' यानी वोटर द्वारा सांसद को बीच में हटाने का अधिकार संविधान में कहीं नहीं है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:32:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>'भगवान ही बचाए इस देश को', रेप पर इलाहबाद हाईकोर्ट  की टिप्पणी से भड़के कपिल सिब्बल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>यौन अपराध से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी की कानून विशेषज्ञों ने शुक्रवार (22 मार्च, 2025) को निंदा की है. हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का मामला नहीं माना जा सकता.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'भगवान ही इस देश को बचाए, क्योंकि पीठ में इस तरह के न्यायाधीश विराजमान हैं! सुप्रीम कोर्ट गलती करने वाले जजों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150242/god-should-save-this-country-kapil-sibal-raging-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(6)6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>यौन अपराध से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी की कानून विशेषज्ञों ने शुक्रवार (22 मार्च, 2025) को निंदा की है. हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का मामला नहीं माना जा सकता.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'भगवान ही इस देश को बचाए, क्योंकि पीठ में इस तरह के न्यायाधीश विराजमान हैं! सुप्रीम कोर्ट गलती करने वाले जजों से निपटने के मामले में बहुत नरम रहा है.'कपिल सिब्बल ने कहा कि जजों, खासकर हाईकोर्ट के जजों को ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इस तरह की विवादास्पद टिप्पणी करना अनुचित है, क्योंकि मौजूदा समय में न्यायाधीश जो कुछ भी कहते हैं, उससे समाज में एक संदेश जाता है. अगर न्यायाधीश, खासतौर पर हाईकोर्ट के जज, इस तरह की टिप्पणियां करते हैं, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून विशेषज्ञों ने जजों से संयम बरतने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से ज्यूडिशियरी में लोगों का भरोसा कम होता है. सीनियर एडवोकेट और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि मौजूदा दौर में, खासतौर पर सतीश बनाम महाराष्ट्र राज्य जैसे मामलों के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने बलात्कार के प्रयास जैसे जघन्य अपराध को कमतर करके आंका है, जो न्याय का उपहास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिंकी आनंद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, 'लड़की के निजी अंगों को पकड़ने, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ने, उसे घसीटकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश करने और सिर्फ हस्तक्षेप के बाद ही भागने जैसे तथ्यों के मद्देनजर यह मामला पूरी तरह से बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है, जिसमें 11 साल की लड़की के साथ बलात्कार की मंशा से हर संभव हरकत की गई।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब पुन: जागृत होने का समय आ गया है. पिंकी आनंद ने कहा, 'कानून का उल्लंघन करने वालों और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता और यह फैसला स्पष्ट रूप से गलत है, क्योंकि यह इस बात को नजरअंदाज करता है. मुझे पूरा भरोसा है कि इस तरह के फैसले को उचित तरीके से पलटा जाएगा और न्याय होगा.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की व्याख्या, बलात्कार के प्रयास की संकीर्ण परिभाषा देकर एक चिंताजनक मिसाल कायम करती प्रतीत होती है. विकास पाहवा ने कहा, 'इस तरह के फैसलों से यौन हिंसा के पीड़ितों की सुरक्षा के प्रति न्यायिक प्रणाली की प्रतिबद्धता में जनता का विश्वास कम होने का खतरा है. ऐसे फैसले पीड़ितों को आगे आने से भी हतोत्साहित कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें डर होगा कि उनके साथ हुई हरकतों को कमतर आंका जाएगा या खारिज कर दिया जाएगा।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'यह जरूरी है कि न्यायपालिका अधिक पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाए और यह सुनिश्चित करे कि दुष्कर्म की मंशा दर्शाने वाली हरकतों को उचित रूप से पहचाना जाए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए, ताकि न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास बना रहे और संभावित अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकास पाहवा ने कहा कि समन जारी करने के चरण में अदालतें आमतौर पर सबूतों के विश्लेषण पर गहराई से विचार किए बिना यह आकलन करती हैं कि आरोपों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. उन्होंने कहा, 'इस प्रारंभिक चरण में अपराध की प्रकृति का पुनर्मूल्यांकन करके हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है, क्योंकि इस तरह का मूल्यांकन आमतौर पर सुनवाई के चरण में होता है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ अधिवक्ता पीके दुबे ने विकास पाहवा की राय से सहमति जताते हुए कहा कि इस तरह की व्याख्या उचित नहीं थी. उन्होंने कहा, 'न्यायाधीश के निजी विचारों के लिए कोई जगह नहीं है और उन्हें स्थापित कानून और न्यायशास्त्र का पालन करना चाहिए.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीके दुबे ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में इस बात पर विचार किया जाता है कि क्या किसी भी रूप में यौन मंशा जाहिर हुई, साथ ही यह तथ्य भी देखा जाता है कि उक्त कृत्य से क्या पीड़ित को चोट पहुंची. उन्होंने कहा, 'यौन प्रवेशन जरूरी नहीं है और इस तरह की हरकतें भी यौन कृत्य के बराबर हैं, जिनके लिए व्यक्ति को सजा दी जा सकती है. पीड़िता के निजी अंग को छूना ही काफी है और यह बलात्कार के बराबर है.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 साल की एक लड़की से जुड़ा है, जिस पर 2021 में दो लोगों ने हमला किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने फैसला सुनाया कि केवल निजी अंगों को पकड़ना और पायजामा का नाड़ा तोड़ना बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, बल्कि ऐसा अपराध किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल प्रयोग के दायरे में आता है<strong>।</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 12:29:05 +0530</pubDate>
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