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                <title>allahabad highcourt - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>allahabad highcourt RSS Feed</description>
                
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                <title>शैक्षणिक संस्थानों की संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को सर्कुलर जारी करने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश में कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में शैक्षणिक संस्थानों की अचल संपत्तियों जिनमें उनके खेल के मैदान भी शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किसी भी परिस्थिति में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वाणिज्यिक उद्देश्यों जैसे प्रदर्शनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार मेलों या बिक्री के लिए नहीं किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक महीने के भीतर एक स्पष्ट और असंदिग्ध सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें राज्य भर के स्कूल और कॉलेज परिसरों में ऐसे गैर-शैक्षणिक उपयोग को प्रतिबंधित किया जाए। को</span><span lang="hi" xml:lang="hi">र्ट</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157722/commercial-use-of-properties-of-educational-institutions-completely-banned-allahabad"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/download-(2)3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश में कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में शैक्षणिक संस्थानों की अचल संपत्तियों जिनमें उनके खेल के मैदान भी शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग किसी भी परिस्थिति में </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वाणिज्यिक उद्देश्यों जैसे प्रदर्शनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार मेलों या बिक्री के लिए नहीं किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक महीने के भीतर एक स्पष्ट और असंदिग्ध सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें राज्य भर के स्कूल और कॉलेज परिसरों में ऐसे गैर-शैक्षणिक उपयोग को प्रतिबंधित किया जाए। को</span><span lang="hi" xml:lang="hi">र्ट ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों को संबद्धता या मान्यता देने के लिए अपना खेल का मैदान होना एक अनिवार्य विशेषता है। न्यायालय ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान के साथ खेल के मैदान के महत्व को किसी भी परिस्थिति में कम नहीं किया जा सकता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने के लिए होते हैं। इसलिए ऐसी संस्थाओं से संबंधित भूमि और भवन जिनमें उनके खेल के मैदान भी शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">को किसी भी नाम से वाणिज्यिक गतिविधियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे प्रदर्शनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार मेलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेलों या वस्तुओं की बिक्री आदि के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> कोर्ट ने कहा कि इन संस्थानों के बुनियादी ढांचे का उपयोग सख्ती से शैक्षिक गतिविधियों और उनसे जुड़ी गतिविधियों जैसे खेल आयोजनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक और अंतर-स्कूल प्रतियोगिताओं के लिए ही किया जाना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट का यह आदेश हमीरपुर जिले के राठ स्थित ब्रह्मानंद डिग्री कॉलेज (सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान) के परिसर में एक व्यावसायिक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">आयोजित किए जाने के खिलाफ गिरजा शंकर द्वारा दायर जनहित याचिका (</span>PIL) <span lang="hi" xml:lang="hi">पर आया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि क्योंकि यह कॉलेज सरकारी सहायता प्राप्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसकी भूमि का उपयोग निजी या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पाया कि कॉलेज के खेल के मैदान में लगे मुख्य गेट के साइन बोर्ड विजय द्वार ब्रह्मानंद महाविद्यालय खेल स्थल को भी स्वामी ब्रह्मानंद मेला महोत्सव के होर्डिंग से ढक दिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे परिसर का वास्तविक शैक्षणिक उद्देश्य छिपा दिया गया। संलग्न तस्वीरों में खेल के मैदान पर वाणिज्यिक स्टॉल झूले और कपड़े आदि बेचने वाली दुकानें दिखाई गई थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकार ने यह कहकर स्पष्टीकरण देने की कोशिश की कि एस.डी.एम. (उप-विभागीय मजिस्ट्रेट) राठ ने संस्थान के मैदान का अन्य गतिविधियों के लिए उपयोग करने के प्रतिबंध से अनभिज्ञ होकर मेले की अनुमति दी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को पूरी तरह से भ्रामक करार देते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि एसडीएम ने अनुमति देने के लिए जिस </span>2011<span lang="hi" xml:lang="hi"> के सरकारी आदेश का हवाला दिया। वह केवल विरोध प्रदर्शनों और रैलियों से संबंधित था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अनुमति प्रारूप में आंदोलन और राजनीतिक कार्यक्रम जैसे शब्दों को प्रदर्शनी से बदल दिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि एक ढोंग था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कोई भी सांविधिक कानून शैक्षणिक संपत्ति के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं देता है। यह मामला महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों से जुड़ा है। इसलिए कोर्ट ने राज्य को जिला प्रशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों के सभी स्तरों पर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया। रजिस्ट्री को भी आदेश की एक प्रति अनुपालन के लिए मुख्य सचिव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश को भेजने का निर्देश दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 19 Oct 2025 17:01:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टूटेगी संभल की मस्जिद, इलाहबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को झटका, याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश के संभल जिले की गौसुलवरा मस्जिद पर चल रहे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमिटी द्वारा दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार कर दिया है. संभल की गौसुलवरा मस्जिद कमेटी ने याचिका दाखिल की थी. प्रशासन की तरफ से मस्जिद कमिटी पर आरोप है कि यह मस्जिद तालाब की जमीन पर बनाई गई है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ध्वस्तीकरण पर रोक के लिए याची को ट्रायल कोर्ट में अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट में लगातार आज दूसरे दिन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156567/sambhals-mosque-will-be-broken-by-allahabad-high-court-dismissed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश के संभल जिले की गौसुलवरा मस्जिद पर चल रहे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमिटी द्वारा दायर की गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इंकार कर दिया है. संभल की गौसुलवरा मस्जिद कमेटी ने याचिका दाखिल की थी. प्रशासन की तरफ से मस्जिद कमिटी पर आरोप है कि यह मस्जिद तालाब की जमीन पर बनाई गई है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ध्वस्तीकरण पर रोक के लिए याची को ट्रायल कोर्ट में अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट में लगातार आज दूसरे दिन छुट्टी के दिन अर्जेंट बेंच बैठी और मामले की सुनवाई की गई. सुनवाई के दौरान मस्जिद कमेटी की ओर से जमीन से जुड़े दस्तावेज पेश किया गया. हाईकोर्ट ने शुक्रवार की सुनवाई में मस्जिद की जमीन से जुड़े दस्तावेज मांगे थे. याची के अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी के मुताबिक कोर्ट की हस्तक्षेप के बाद उन्हें ध्वस्तीकरण का आदेश भी मिला है. बगैर ध्वस्तीकरण आदेश दिए मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही थी.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका निस्तारित कर दी है. हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मस्जिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बारात घर और अस्पताल के खिलाफ पारित ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने की मांग में की गई है. याचिका पर जस्टिस दिनेश पाठक की सिंगल बेंच में सुबह 10:00 बजे हुई सुनवाई. मसाजिद शरीफ गोसुलबारा रावां बुजुर्ग और मस्जिद के मुतवल्ली मिंजर की ओर से याचिका दाखिल की गई है. हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अर्जेंट बेसिस पर सुनवाई की मांग की गई थी. मस्जिद पक्ष की ओर से दलील दी गई की बारात घर को ध्वस्त कर दिया गया है. ध्वस्तीकरण के लिए 2 अक्टूबर गांधी जयंती और दशहरे का दिन चुना गया.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बुलडोजर कार्रवाई के दौरान भीड़ की वजह से कोई बड़ा हादसा या बवाल भी हो सकता था. आरोप है कि बारात घर तालाब की जमीन पर बना हुआ था. जबकि मस्जिद का कुछ हिस्सा सरकारी जमीन पर बना हुआ है. हालांकि मस्जिद कमेटी की ओर से अवैध हिस्से को खुद हथौड़े से तोड़ा जा रहा है. याचिका में राज्य सरकार</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">डीएम व एसपी संभल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एडीएम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया है.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 19:44:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो साल से शिक्षक विहीन है चित्रकूट का यह विद्यालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज - </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो वर्षों से शिक्षक विहीन चित्रकूट के रैपुरा जूनियर हाईस्कूल को लेकर राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है. कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि संसद द्वारा पारित शिक्षा के अधिकार अधिनियम </span>2009<span lang="hi" xml:lang="hi">  के तहत </span>6-14<span lang="hi" xml:lang="hi">  साल के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध होना मौलिक अधिकार है. इसके बावजूद चित्रकूट के मानिकपुर तहसील अंतर्गत रैपुरा गांव स्थित जूनियर हाईस्कूल में पिछले करीब दो साल से एक भी अध्यापक नहीं है.।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रैपुरा गांव के राहुल सिंह पटेल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका पर मुख्य</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156287/this-school-of-chitrakoot-is-devoid-of-teacher-for-two"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/download-(5)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज - </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो वर्षों से शिक्षक विहीन चित्रकूट के रैपुरा जूनियर हाईस्कूल को लेकर राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है. कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि संसद द्वारा पारित शिक्षा के अधिकार अधिनियम </span>2009<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत </span>6-14<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध होना मौलिक अधिकार है. इसके बावजूद चित्रकूट के मानिकपुर तहसील अंतर्गत रैपुरा गांव स्थित जूनियर हाईस्कूल में पिछले करीब दो साल से एक भी अध्यापक नहीं है.।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रैपुरा गांव के राहुल सिंह पटेल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">याची के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला का कहना था कि रैपुरा गांव में सरदार बल्लभभाई पटेल जूनियर हाईस्कूल विद्यालय है. जो राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एडेड स्कूल है और सरदार बल्लभभाई पटेल प्रबंध समिति द्वारा संचालित है. विद्यालय के प्रबंधक बद्री विशाल सिंह हैं. स्कूल में शिक्षकों के </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> पद स्वीकृत हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पिछले करीब दो साल एक भी अध्यापक नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विद्यालय में शैक्षिक सत्र </span>2025-26<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कक्षा </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>35, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>46<span lang="hi" xml:lang="hi"> और कक्षा </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>65<span lang="hi" xml:lang="hi"> बच्चों का दाखिला है. इस तरह कुल </span>141<span lang="hi" xml:lang="hi"> बच्चे पढ़ रहे हैं. विद्यालय में </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> चपरासी के पद स्वीकृत हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> रिक्त हैं. सिर्फ रामभवन नाम का एक चपरासी कार्यरत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी के भरोसे विद्यालय चल रहा है. </span><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिका में कहा गया कि </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">अगस्त को चित्रकूट के जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी से गांव के कई लोगों ने मिलकर विद्यालय में विगत दो साल से एक भी अध्यापक नहीं होने से अवगत कराया गया था और ज्ञापन सौंपा. रजिस्टर्ड पोस्ट द्वारा भी भेजा. </span>14 <span lang="hi" xml:lang="hi">अगस्त </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">को प्रदेश सरकार की समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली/आई जीआरएस/ पर भी शिकायत दर्ज कराई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह में इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 19:43:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिख पगड़ी टिप्पणी विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहुल की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक बड़ा झटका दिया है। इसने राहुल की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सिख समुदाय के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ एक शिकायत को स्वीकार किया गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस फ़ैसले के बाद अब वाराणसी की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने सितंबर 2024 में अमेरिका में दिए एक बयान में सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156035/rahuls-petition-from-allahabad-high-court-dismisses-sikh-turban-comment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/allahabad-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक बड़ा झटका दिया है। इसने राहुल की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सिख समुदाय के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ एक शिकायत को स्वीकार किया गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस फ़ैसले के बाद अब वाराणसी की विशेष अदालत में इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने सितंबर 2024 में अमेरिका में दिए एक बयान में सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान को साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला क़रार देकर उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई गई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह विवाद सितंबर 2024 में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान शुरू हुआ। 10 सितंबर 2024 को वर्जीनिया में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में लड़ाई इस बात की है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी पहनने की इजाजत होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या एक सिख को कड़ा पहनने की इजाजत होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या क्या एक सिख को गुरुद्वारे जाने की अनुमति होगी। यह लड़ाई सिर्फ सिखों के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सभी धर्मों के लिए है।</span>'</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ वाराणसी की मजिस्ट्रेट अदालत में एक याचिका दायर की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। मिश्रा ने आरोप लगाया कि राहुल का बयान भड़काऊ था और इससे साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल के ख़िलाफ़ दायर याचिका को 28 नवंबर 2024 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज कुमार त्रिपाठी ने खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा कि चूंकि कथित बयान विदेशी धरती पर दिया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना इसकी जांच या सुनवाई नहीं हो सकती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मिश्रा ने इस फैसले को विशेष एमपी/एमएलए सत्र न्यायालय में चुनौती दी। 21 जुलाई 2025 को विशेष सत्र न्यायाधीश यजुर्वेद विक्रम सिंह ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया और मामले की नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया। कोर्ट ने माना कि मजिस्ट्रेट ने याचिका को केवल केंद्र सरकार की स्वीकृति के अभाव में खारिज कर गलती की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की। उनके वकीलों ने तर्क दिया कि राहुल गांधी के बयान को गलत संदर्भ में लिया गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का इरादा सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवाज उठाना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना। इसके अलावा उन्होंने यह भी तर्क दिया कि याचिका दुर्भावनापूर्ण इरादे से दायर की गई थी और मजिस्ट्रेट का प्रारंभिक आदेश सही था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 18:25:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी धर्म परिवर्तन सर्टिफिकेट से की गई शादी को अमान्य ठहराया; वकील पर लगाया जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी धर्म परिवर्तन प्रमाणपत्र के सहारे सुरक्षा की मांग करने आए युगल के विवाह को अमान्य करार दिया है. कोर्ट ने दोनों को विशेष विवाह कानून के तहत प्रयागराज में बिना धर्म परिवर्तन किए शादी रजिस्टर्ड कराने के निर्देश दिए हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोहम्मद बिन कासिम उर्फ अकबर मुस्लिम और जैनब परवीन उर्फ चंद्रकांता ने धर्म परिवर्तन के फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे शादी की थी. कोर्ट ने चंद्रकांता के परिवार के साथ जाने से इनकार करने पर उसे पंजीकरण प्रमाणपत्र मिलने तक नारी संरक्षण गृह में रखने के निर्देश दिए हैं. अब तक वह याची के साथ रह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155863/allahabad-high-court-imposed-a-penalty-on-lawyer-for-marriage"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/allahabad-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी धर्म परिवर्तन प्रमाणपत्र के सहारे सुरक्षा की मांग करने आए युगल के विवाह को अमान्य करार दिया है. कोर्ट ने दोनों को विशेष विवाह कानून के तहत प्रयागराज में बिना धर्म परिवर्तन किए शादी रजिस्टर्ड कराने के निर्देश दिए हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोहम्मद बिन कासिम उर्फ अकबर मुस्लिम और जैनब परवीन उर्फ चंद्रकांता ने धर्म परिवर्तन के फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे शादी की थी. कोर्ट ने चंद्रकांता के परिवार के साथ जाने से इनकार करने पर उसे पंजीकरण प्रमाणपत्र मिलने तक नारी संरक्षण गृह में रखने के निर्देश दिए हैं. अब तक वह याची के साथ रह रही थी.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने याची के अधिवक्ता को भविष्य में बिना सत्यापन ऐसे फर्जी प्रमाणपत्र याचिका के साथ दाखिल न करने की चेतावनी भी दी है. साथ ही वकील पर </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार रुपये हर्जाना लगाया है. हर्जाना </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में जमा करने का निर्देश दिया है. हर्जाना जमा नहीं किया गया तो इसे डीएम के माध्यम से वसूला जाएगा.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">22<span lang="hi" xml:lang="hi"> फरवरी को धर्म परिवर्तन</span>, 26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को निकाह: यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने मोहम्मद बिन कासिम उर्फ अकबर व अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचियों का कहना था कि दोनों विपरीत धर्म के हैं. युवती ने अपनी मर्जी से गत </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> फरवरी को इस्लाम धर्म स्वीकार किया था. खानकाह आलिया अरीफिया ने धर्म परिवर्तन का प्रमाण पत्र जारी किया था. उसके बाद उन्होंने </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को निकाह किया. मांग की गई कि उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी के दखल पर रोक लगाई जाए.</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 19:54:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के 558 अनुदानित मदरसों की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही जाँच पर रोक लगाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों के खिaलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा की जा रही जाँच पर रोक लगा दी है।ईओडब्ल्यू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी निर्देश के तहत मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की जाँच कर रही थी। यह निर्देश मोहम्मद तल्हा अंसारी नामक व्यक्ति द्वारा इन मदरसों के खिलाफ की गई शिकायत पर आधारित था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश और चल रही जाँच को चुनौती देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें 28 फरवरी और 11 जून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के </span>NHRC <span lang="hi" xml:lang="hi">के</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155855/allahabad-high-court-stayed-the-investigation-being-conducted-by-eow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/download4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों के खिaलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा की जा रही जाँच पर रोक लगा दी है।ईओडब्ल्यू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी निर्देश के तहत मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की जाँच कर रही थी। यह निर्देश मोहम्मद तल्हा अंसारी नामक व्यक्ति द्वारा इन मदरसों के खिलाफ की गई शिकायत पर आधारित था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश और चल रही जाँच को चुनौती देते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें 28 फरवरी और 11 जून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के </span>NHRC <span lang="hi" xml:lang="hi">के आदेशों को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।याचिका में जाँच के लिए 23 अप्रैल के परिणामी सरकारी आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सोमवार को न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने आदेशों पर रोक लगाते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई की तारीख 17 नवंबर तय की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1993 की धारा 12 के अंतर्गत आयोग के कार्यों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।यह भी प्रस्तुत किया गया कि अधिनियम की धारा 36 में स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि आयोग मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले कथित कृत्य के घटित होने की तिथि से एक वर्ष की समाप्ति के बाद किसी भी मामले की जाँच नहीं करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया गया कि धारा 12-ए के अंतर्गत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयोग स्वप्रेरणा से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या पीड़ित या उसकी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत याचिका पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या किसी न्यायालय के किसी निर्देश या आदेश के आधार पर जाँच कर सकता है।हालाँकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान मामले में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धारा 12-ए के अंतर्गत निर्धारित कोई भी शर्त लागू नहीं होती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिका में आगे कहा गया है कि शिकायत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के कथित कृत्य की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चूँकि इसमें दिए गए कथन अस्पष्ट हैं और किसी विशिष्ट तारीख का खुलासा नहीं करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह पता लगाना संभव नहीं है कि शिकायत कथित उल्लंघन की तारीख से एक वर्ष के भीतर दर्ज की गई थी या नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रस्तुत किया गया है कि आयोग द्वारा की गई पूरी कार्रवाई अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर अपने-अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 19:46:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी: कन्नौज, सहारनपुर सहित कई मेडिकल कॉलेजों में नीट से हुए दाखिले रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कन्नौज, सहारनपुर ,अंबेडकर नगर, जालौन के सरकारी मेडिकल कालेजों में नीट 2025 परीक्षा के तहत हुए दाखिलों के शासनादेशों को रद्द कर दिए। कोर्ट ने आरक्षण अधिनियम 2006 के राहत मेडिकल की सीटें नए सिरे से भरने का राज्य सरकार को आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने इन मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए यूपी सरकार के विशेष आरक्षण शासनादेश को भी निरस्त कर दिया। इस मामले में इन मेडिकल कालेजों की सीटें भरने में  में, कानूनी निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देने के शसनादेशों को चुनौती दी गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति पंकज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154357/neet-admissions-canceled-in-many-medical-colleges-including-up-kannauj"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/download-(3).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज।</strong> इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कन्नौज, सहारनपुर ,अंबेडकर नगर, जालौन के सरकारी मेडिकल कालेजों में नीट 2025 परीक्षा के तहत हुए दाखिलों के शासनादेशों को रद्द कर दिए। कोर्ट ने आरक्षण अधिनियम 2006 के राहत मेडिकल की सीटें नए सिरे से भरने का राज्य सरकार को आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने इन मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए यूपी सरकार के विशेष आरक्षण शासनादेश को भी निरस्त कर दिया। इस मामले में इन मेडिकल कालेजों की सीटें भरने में  में, कानूनी निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देने के शसनादेशों को चुनौती दी गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह अहम फैसला नीट - 2025 की अभ्यर्थी सबरा अहमद की याचिका मंजूर करके दिया। याची ने अंबेडकर नगर, कन्नौज,जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए आरक्षण की स्वीकृत सीमा का मुद्दा उठाकर चुनौती दी थी। याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति और ओ बी सी अभ्यर्थियों को शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देने को आरक्षण अधिनियम - 2006 बनाया था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">याची का कहना था कि इस अधिनियम के तहत मेडिकल कालेजों में हुए दाखिलों में, अधिनियम में दी गई आरक्षण की निर्धारित सीमा 50 फीसदी का उल्लंघन करके सीटें भरी गईं। यानि कि शासनादेश जारी कर 50 फीसदी से अधिक आरक्षण दिया गया, जो कानून की मंशा के खिलाफ था। उधर, राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि आरक्षण की सीमा तय करने वाले राज्य सरकार के आदेश साफ तौर पर आरक्षण अधिनियम 2006 के खिलाफ हैं। कहा कि सरकार द्वारा आरक्षण की तय  सीमा 50 फीसदी के नियम का बगैर किसी कानूनी प्राधिकार के उल्लंघन नहीं किया जा सकता। ऐसे में इन शसनादेशो को तर्कसंगत नहीं ठराया जासकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरक्षण सीमा का उल्लंघन करने वाले वर्ष 2010 से 2015 के बीच जारी छह शसनादेशों को रद्द कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन चारों मेडिकल कालेजों की सीटें आरक्षण अधिनियम 2006 के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की सीटें भरी जाएं। कोर्ट को यह बताए जाने पर कि सीटें भर गई हैं, अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत इन सीटों को नए सिरे से भरने की करवाई करे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 15:20:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जस्टिस वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर के  विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए वकील </title>
                                    <description><![CDATA[<div>सरकारी आवास से बेहिसाब नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को लेकर विवाद बढ़ गया है. यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही साथ उनकाे इलाहाबाद हाईकोर्ट (मूल न्यायालय) फिर से वापस भेजने का आदेश दिया गया है.इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के इस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. इसके तहत मंगलवार से हाईकोर्ट के वकील अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।</div>
<div>  </div>
<div>बार एसोसिएशन ने सोमवार को बुलाई गई आपातकालीन आम सभा में यह 11 बिंदुओं पर प्रस्ताव पास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150397/lawyers-went-on-indefinite-strike-against-justice-vermas-allahabad-high"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(2)5.jpg" alt=""></a><br /><div>सरकारी आवास से बेहिसाब नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को लेकर विवाद बढ़ गया है. यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही साथ उनकाे इलाहाबाद हाईकोर्ट (मूल न्यायालय) फिर से वापस भेजने का आदेश दिया गया है.इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के इस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. इसके तहत मंगलवार से हाईकोर्ट के वकील अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।</div>
<div> </div>
<div>बार एसोसिएशन ने सोमवार को बुलाई गई आपातकालीन आम सभा में यह 11 बिंदुओं पर प्रस्ताव पास किया था. इसमें जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाए जाने, सीबीआई व ईडी जैसी जांच एजेंसियाें से एफआईआर दर्ज कर जांच कराने जैसी मांगें शामिल हैं।</div>
<div> </div>
<div>चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सोमवार को जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने के अपने निर्णय की पोस्ट की. शाम को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए प्रस्ताव में जस्टिस वर्मा को वापस भेजने को लेकर के केंद्र सरकार से की गई सिफारिश सार्वजनिक कर दी गई.प्रस्ताव में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने 20 मार्च 2024 को आयोजित बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की है।</div>
<div> </div>
<div>इसमें सबसे जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाए जाने, उनके खिलाफ लगे आरोपों की ईडी–सीबीआई द्वारा एफआई आर दर्ज कर जांच कराने की मांग शामिल थी. शाम को जैसे ही सुप्रीम कोर्ट कोजेजियम ने फिर से दिल्ली उच्च न्यायालय के जज यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट करने की सिफारिश की बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अपने आवास पर ही मीटिंग बुला ली.इस मीटिंग के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे जाने के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं।</div>
<div> </div>
<div>हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों का कहना है कि जस्टिस वर्मा को वह यहां कतई कार्यभार नहीं ग्रहण करने देंगे. अध्यक्ष अनिल तिवारी का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर आर–पार की लड़ाई का ऐलान करेंगे. पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहने के अलावा सड़कों पर भी आंदोलन करेंगे।</div>
<div> </div>
<div><strong>हाईकोर्ट बार ने आम सभा में पास किए 11 प्रस्ताव</strong></div>
<div>बार एसोसिएशन जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट या इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच या किसी अन्य हाईकोर्ट में ट्रांसफर का विरोध करता है।</div>
<div>मुख्य न्यायाधीश को सीबीआई, ईडी व अन्य जांच एजेंसियों द्वारा एफआईआर दर्ज करने और केस की निष्पक्ष जांच की तुरंत अनुमति देनी चाहिए।</div>
<div>जांच एजेंसियों को न्यायाधीश यशवंत वर्मा को यदि आवश्यक हो तो मुख्य न्यायाधीश की पूर्व अनुमति से उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाना चाहिए।</div>
<div>मुख्य न्यायाधीश को तुरंत सरकार से न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश करनी चाहिए।</div>
<div>भारत के राष्ट्रपति और सरकार को महाभियोग की कार्यवाही में नागरिक समाज के सदस्यों को शामिल करके प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तुरंत उपयुक्त कदम उठाने चाहिए।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>कॉलेजियम के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए. न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दिए गए सभी निर्णयों की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रणाली में "सार्वजनिक विश्वास" को पुनः प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों का विश्वास जगाया जा सके।</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिक्त पदों को यथाशीघ्र भरा जाए, क्योंकि हम न्यायाधीशों की कमी से जूझ रहे हैं और इस कारण से न्याय में देरी हो रही है तथा जनता का विश्वास प्रभावित हो रहा है. बार एसोसिएशन ने कहा कि "अंकल जज सिंड्रोम" के खिलाफ एक प्रस्ताव होना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम से अनुरोध है कि वह इस संबंध में तत्काल सुधार करे।</div>
<div> </div>
<div>महासभा में यह भी संकल्प लिया गया कि इस प्रस्ताव की एक प्रति सरकार के साथ-साथ देश के सभी बार एसोसिएशनों को भेजी जाए, ताकि पूरे देश को "भारत के लोगों" की दुर्दशा के बारे में पता चले. बार एसोसिएशन ने सभी विधिक समुदाय से अनुरोध किया है कि न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता के लिए आवाज उठाएं, ताकि संविधान के मूल ढांचे अर्थात न्यायपालिका की शक्ति मानव जीवन के सभी पहलुओं पर लागू हो तथा न्यायिक प्रणाली में भ्रष्टाचार समाप्त हो।</div>
<div> </div>
<div>बार एसोसिएशन को हमारे उद्देश्य के समर्थन में बड़ी संख्या में ईमेल और व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए हैं. यहां यह उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है कि ये ईमेल और संदेश केवल वकीलों से ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों से हैं, जिससे एसोसिएशन में यह विश्वास और भी बढ़ गया है कि हम सही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं. इस प्रस्ताव को उन सभी तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि वे हमारे आंदोलन में शामिल हो सकें।</div>
<div> </div>
<div><strong>वाराणसी के वकील भी विरोध में उतरे</strong></div>
<div>दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर अकूत संपत्ति मिलने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. आग बुझाने के बाद फायर फाइटिंग टीम को भारी मात्रा में जले हुए नकदी रुपए मिले थे. इसके बाद उनका ट्रांसफर यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया. जिसको लेकर अधिवक्ताओं में काफी रोष देखने को मिल रहा है।</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के विरोध के बाद मंगलवार को वाराणसी के अधिवक्ताओं ने झाड़ू लगाकर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के विरोध सफाई अभियान चलाकर प्रदर्शन किया. वाराणसी के अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायपालिका में गरीब एवं पीड़ित लोग इंसाफ पाने के लिए गुहार लगाते हैं. जबकि, यहां पर्याप्त भ्रष्टाचार व्याप्त है. जस्टिस वर्मा के खिलाफ झाड़ू लगाकर विरोध प्रदर्शन किया गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 13:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नकदी विवाद पर जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की सिफारिश की।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जो अपने आधिकारिक परिसर से नकदी बरामद होने के आरोपों पर आंतरिक जांच का सामना कर रहे हैं, को दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की आधिकारिक सिफारिश की है।न्यायमूर्ति वर्मा मूल रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के थे और उन्हें 2021 में दिल्ली लाया गया था।</div>
<div>  </div>
<div>मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एएस ओका वाले कॉलेजियम द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है:सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च 2025 को आयोजित अपनी बैठकों में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150314/the-supreme-court-collegium-recommended-the-transfer-of-justice-yashwant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(13)3.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जो अपने आधिकारिक परिसर से नकदी बरामद होने के आरोपों पर आंतरिक जांच का सामना कर रहे हैं, को दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की आधिकारिक सिफारिश की है।न्यायमूर्ति वर्मा मूल रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के थे और उन्हें 2021 में दिल्ली लाया गया था।</div>
<div> </div>
<div>मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एएस ओका वाले कॉलेजियम द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है:सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 20 और 24 मार्च 2025 को आयोजित अपनी बैठकों में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की है।</div>
<div> </div>
<div>न्यायमूर्ति वर्मा 21 मार्च को उस समय विवाद का केंद्र बन गए थे, जब यह खबर प्रकाशित हुई थी कि उनके सरकारी बंगले के बाहरी हिस्से में स्थित एक गोदाम में आग लगने के बाद नकदी से भरी बोरियां मिलीं।शनिवार को सीजेआई संजीव खन्ना ने आंतरिक प्रक्रिया के तहत मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। यह फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें कहा गया था कि मामले की गहन जांच की जरूरत है।</div>
<div> </div>
<div>शनिवार रात को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट, न्यायमूर्ति वर्मा का जवाब तथा दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा साझा की गई तस्वीरें और वीडियो प्रकाशित किए।आग की यह घटना 14 मार्च को न्यायमूर्ति वर्मा के आवासीय कार्यालय में उस समय घटित हुई जब वे शहर से बाहर थे।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय को 15 मार्च को शाम करीब 4:50 बजे दिल्ली पुलिस आयुक्त द्वारा न्यायमूर्ति वर्मा के बंगले में 14 मार्च की रात 11.30 बजे हुई आग के बारे में जानकारी दी गई।न्यायमूर्ति वर्मा ने नकदी रखने की बात से इनकार किया है और दावा किया है कि यह उनके खिलाफ साजिश है। 24 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में न्यायमूर्ति वर्मा से न्यायिक कार्य वापस ले लिया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 11:58:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'भगवान ही बचाए इस देश को', रेप पर इलाहबाद हाईकोर्ट  की टिप्पणी से भड़के कपिल सिब्बल।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>  प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>यौन अपराध से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी की कानून विशेषज्ञों ने शुक्रवार (22 मार्च, 2025) को निंदा की है. हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का मामला नहीं माना जा सकता.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'भगवान ही इस देश को बचाए, क्योंकि पीठ में इस तरह के न्यायाधीश विराजमान हैं! सुप्रीम कोर्ट गलती करने वाले जजों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150242/god-should-save-this-country-kapil-sibal-raging-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(6)6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>यौन अपराध से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी की कानून विशेषज्ञों ने शुक्रवार (22 मार्च, 2025) को निंदा की है. हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का मामला नहीं माना जा सकता.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'भगवान ही इस देश को बचाए, क्योंकि पीठ में इस तरह के न्यायाधीश विराजमान हैं! सुप्रीम कोर्ट गलती करने वाले जजों से निपटने के मामले में बहुत नरम रहा है.'कपिल सिब्बल ने कहा कि जजों, खासकर हाईकोर्ट के जजों को ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इस तरह की विवादास्पद टिप्पणी करना अनुचित है, क्योंकि मौजूदा समय में न्यायाधीश जो कुछ भी कहते हैं, उससे समाज में एक संदेश जाता है. अगर न्यायाधीश, खासतौर पर हाईकोर्ट के जज, इस तरह की टिप्पणियां करते हैं, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून विशेषज्ञों ने जजों से संयम बरतने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से ज्यूडिशियरी में लोगों का भरोसा कम होता है. सीनियर एडवोकेट और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि मौजूदा दौर में, खासतौर पर सतीश बनाम महाराष्ट्र राज्य जैसे मामलों के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने बलात्कार के प्रयास जैसे जघन्य अपराध को कमतर करके आंका है, जो न्याय का उपहास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिंकी आनंद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, 'लड़की के निजी अंगों को पकड़ने, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ने, उसे घसीटकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश करने और सिर्फ हस्तक्षेप के बाद ही भागने जैसे तथ्यों के मद्देनजर यह मामला पूरी तरह से बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है, जिसमें 11 साल की लड़की के साथ बलात्कार की मंशा से हर संभव हरकत की गई।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब पुन: जागृत होने का समय आ गया है. पिंकी आनंद ने कहा, 'कानून का उल्लंघन करने वालों और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता और यह फैसला स्पष्ट रूप से गलत है, क्योंकि यह इस बात को नजरअंदाज करता है. मुझे पूरा भरोसा है कि इस तरह के फैसले को उचित तरीके से पलटा जाएगा और न्याय होगा.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की व्याख्या, बलात्कार के प्रयास की संकीर्ण परिभाषा देकर एक चिंताजनक मिसाल कायम करती प्रतीत होती है. विकास पाहवा ने कहा, 'इस तरह के फैसलों से यौन हिंसा के पीड़ितों की सुरक्षा के प्रति न्यायिक प्रणाली की प्रतिबद्धता में जनता का विश्वास कम होने का खतरा है. ऐसे फैसले पीड़ितों को आगे आने से भी हतोत्साहित कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें डर होगा कि उनके साथ हुई हरकतों को कमतर आंका जाएगा या खारिज कर दिया जाएगा।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, 'यह जरूरी है कि न्यायपालिका अधिक पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाए और यह सुनिश्चित करे कि दुष्कर्म की मंशा दर्शाने वाली हरकतों को उचित रूप से पहचाना जाए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए, ताकि न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास बना रहे और संभावित अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके.'</div>
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<div style="text-align:justify;">विकास पाहवा ने कहा कि समन जारी करने के चरण में अदालतें आमतौर पर सबूतों के विश्लेषण पर गहराई से विचार किए बिना यह आकलन करती हैं कि आरोपों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. उन्होंने कहा, 'इस प्रारंभिक चरण में अपराध की प्रकृति का पुनर्मूल्यांकन करके हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है, क्योंकि इस तरह का मूल्यांकन आमतौर पर सुनवाई के चरण में होता है।'</div>
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<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ अधिवक्ता पीके दुबे ने विकास पाहवा की राय से सहमति जताते हुए कहा कि इस तरह की व्याख्या उचित नहीं थी. उन्होंने कहा, 'न्यायाधीश के निजी विचारों के लिए कोई जगह नहीं है और उन्हें स्थापित कानून और न्यायशास्त्र का पालन करना चाहिए.'</div>
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<div style="text-align:justify;">पीके दुबे ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में इस बात पर विचार किया जाता है कि क्या किसी भी रूप में यौन मंशा जाहिर हुई, साथ ही यह तथ्य भी देखा जाता है कि उक्त कृत्य से क्या पीड़ित को चोट पहुंची. उन्होंने कहा, 'यौन प्रवेशन जरूरी नहीं है और इस तरह की हरकतें भी यौन कृत्य के बराबर हैं, जिनके लिए व्यक्ति को सजा दी जा सकती है. पीड़िता के निजी अंग को छूना ही काफी है और यह बलात्कार के बराबर है.'</div>
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<div style="text-align:justify;">मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 साल की एक लड़की से जुड़ा है, जिस पर 2021 में दो लोगों ने हमला किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने फैसला सुनाया कि केवल निजी अंगों को पकड़ना और पायजामा का नाड़ा तोड़ना बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, बल्कि ऐसा अपराध किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल प्रयोग के दायरे में आता है<strong>।</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 12:29:05 +0530</pubDate>
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