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                <description>government House RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जस्टिस वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर के  विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए वकील </title>
                                    <description><![CDATA[<div>सरकारी आवास से बेहिसाब नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को लेकर विवाद बढ़ गया है. यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही साथ उनकाे इलाहाबाद हाईकोर्ट (मूल न्यायालय) फिर से वापस भेजने का आदेश दिया गया है.इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के इस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. इसके तहत मंगलवार से हाईकोर्ट के वकील अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।</div>
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<div>बार एसोसिएशन ने सोमवार को बुलाई गई आपातकालीन आम सभा में यह 11 बिंदुओं पर प्रस्ताव पास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150397/lawyers-went-on-indefinite-strike-against-justice-vermas-allahabad-high"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(2)5.jpg" alt=""></a><br /><div>सरकारी आवास से बेहिसाब नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को लेकर विवाद बढ़ गया है. यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही साथ उनकाे इलाहाबाद हाईकोर्ट (मूल न्यायालय) फिर से वापस भेजने का आदेश दिया गया है.इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के इस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. इसके तहत मंगलवार से हाईकोर्ट के वकील अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।</div>
<div> </div>
<div>बार एसोसिएशन ने सोमवार को बुलाई गई आपातकालीन आम सभा में यह 11 बिंदुओं पर प्रस्ताव पास किया था. इसमें जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाए जाने, सीबीआई व ईडी जैसी जांच एजेंसियाें से एफआईआर दर्ज कर जांच कराने जैसी मांगें शामिल हैं।</div>
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<div>चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सोमवार को जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजने के अपने निर्णय की पोस्ट की. शाम को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए गए प्रस्ताव में जस्टिस वर्मा को वापस भेजने को लेकर के केंद्र सरकार से की गई सिफारिश सार्वजनिक कर दी गई.प्रस्ताव में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने 20 मार्च 2024 को आयोजित बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की है।</div>
<div> </div>
<div>इसमें सबसे जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाए जाने, उनके खिलाफ लगे आरोपों की ईडी–सीबीआई द्वारा एफआई आर दर्ज कर जांच कराने की मांग शामिल थी. शाम को जैसे ही सुप्रीम कोर्ट कोजेजियम ने फिर से दिल्ली उच्च न्यायालय के जज यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट करने की सिफारिश की बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अपने आवास पर ही मीटिंग बुला ली.इस मीटिंग के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे जाने के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत हैं।</div>
<div> </div>
<div>हाईकोर्ट बार के पदाधिकारियों का कहना है कि जस्टिस वर्मा को वह यहां कतई कार्यभार नहीं ग्रहण करने देंगे. अध्यक्ष अनिल तिवारी का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर आर–पार की लड़ाई का ऐलान करेंगे. पूर्ण रूप से हड़ताल पर रहने के अलावा सड़कों पर भी आंदोलन करेंगे।</div>
<div> </div>
<div><strong>हाईकोर्ट बार ने आम सभा में पास किए 11 प्रस्ताव</strong></div>
<div>बार एसोसिएशन जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाईकोर्ट या इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच या किसी अन्य हाईकोर्ट में ट्रांसफर का विरोध करता है।</div>
<div>मुख्य न्यायाधीश को सीबीआई, ईडी व अन्य जांच एजेंसियों द्वारा एफआईआर दर्ज करने और केस की निष्पक्ष जांच की तुरंत अनुमति देनी चाहिए।</div>
<div>जांच एजेंसियों को न्यायाधीश यशवंत वर्मा को यदि आवश्यक हो तो मुख्य न्यायाधीश की पूर्व अनुमति से उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जाना चाहिए।</div>
<div>मुख्य न्यायाधीश को तुरंत सरकार से न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश करनी चाहिए।</div>
<div>भारत के राष्ट्रपति और सरकार को महाभियोग की कार्यवाही में नागरिक समाज के सदस्यों को शामिल करके प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए तुरंत उपयुक्त कदम उठाने चाहिए।</div>
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<div>कॉलेजियम के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए. न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान दिए गए सभी निर्णयों की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रणाली में "सार्वजनिक विश्वास" को पुनः प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर लोगों का विश्वास जगाया जा सके।</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिक्त पदों को यथाशीघ्र भरा जाए, क्योंकि हम न्यायाधीशों की कमी से जूझ रहे हैं और इस कारण से न्याय में देरी हो रही है तथा जनता का विश्वास प्रभावित हो रहा है. बार एसोसिएशन ने कहा कि "अंकल जज सिंड्रोम" के खिलाफ एक प्रस्ताव होना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम से अनुरोध है कि वह इस संबंध में तत्काल सुधार करे।</div>
<div> </div>
<div>महासभा में यह भी संकल्प लिया गया कि इस प्रस्ताव की एक प्रति सरकार के साथ-साथ देश के सभी बार एसोसिएशनों को भेजी जाए, ताकि पूरे देश को "भारत के लोगों" की दुर्दशा के बारे में पता चले. बार एसोसिएशन ने सभी विधिक समुदाय से अनुरोध किया है कि न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता के लिए आवाज उठाएं, ताकि संविधान के मूल ढांचे अर्थात न्यायपालिका की शक्ति मानव जीवन के सभी पहलुओं पर लागू हो तथा न्यायिक प्रणाली में भ्रष्टाचार समाप्त हो।</div>
<div> </div>
<div>बार एसोसिएशन को हमारे उद्देश्य के समर्थन में बड़ी संख्या में ईमेल और व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए हैं. यहां यह उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है कि ये ईमेल और संदेश केवल वकीलों से ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों से हैं, जिससे एसोसिएशन में यह विश्वास और भी बढ़ गया है कि हम सही उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं. इस प्रस्ताव को उन सभी तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि वे हमारे आंदोलन में शामिल हो सकें।</div>
<div> </div>
<div><strong>वाराणसी के वकील भी विरोध में उतरे</strong></div>
<div>दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर अकूत संपत्ति मिलने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. आग बुझाने के बाद फायर फाइटिंग टीम को भारी मात्रा में जले हुए नकदी रुपए मिले थे. इसके बाद उनका ट्रांसफर यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया. जिसको लेकर अधिवक्ताओं में काफी रोष देखने को मिल रहा है।</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के विरोध के बाद मंगलवार को वाराणसी के अधिवक्ताओं ने झाड़ू लगाकर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के विरोध सफाई अभियान चलाकर प्रदर्शन किया. वाराणसी के अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायपालिका में गरीब एवं पीड़ित लोग इंसाफ पाने के लिए गुहार लगाते हैं. जबकि, यहां पर्याप्त भ्रष्टाचार व्याप्त है. जस्टिस वर्मा के खिलाफ झाड़ू लगाकर विरोध प्रदर्शन किया गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 13:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूपयों का पहाड़ घर में छिपाकर रखने वाले जज साहब </title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा साथ ही फिलहाल उन्हें न्यायिक कार्य से विलग कर दिया गया है। </div>
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<div>आपको बता दें 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. वह शहर से बाहर थे. जज के निजी सचिव ने पीसीआर को बुलाया. इसके बाद आग पर तो काबू</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150327/judge-who-keeps-a-mountain-of-money-in-the-house%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(16)4.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। यह मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा साथ ही फिलहाल उन्हें न्यायिक कार्य से विलग कर दिया गया है। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई थी. वह शहर से बाहर थे. जज के निजी सचिव ने पीसीआर को बुलाया. इसके बाद आग पर तो काबू पा लिया गया लेकिन इस दौरान पुलिस और दमकल कर्मियों को बंगले के अंदर एक कमरे में कई बोरियों में बड़ी मात्रा में नोटों का ढेर दिखा. यह ढेर आधा जलकर खाक हो गया था. यह बात बड़े अधिकारियों तक पहुंची और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच गया.</div>
<div>जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इस मामले में एक्शन लेते हुए फौरन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई जिसमें जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट करने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी. अब तक जांच में जो कुछ सामने आया है, वह सब सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक डोमेन में उपलब्ध करा दिया है. इसमें नोटों के ढेर की अधजली तस्वीर भी शामिल है।</div>
<div> </div>
<div>14 मार्च की रात जज के निजी सचिव ने आग लगने की सूचना दी.फायर ब्रिगेड को अलग से कॉल नहीं किया गया.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने 15 मार्च की सुबह मामले की जानकारी दी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तब लखनऊ में थे.पुलिस कमिश्नर ने अधजले कैश की तस्वीरें और वीडियो भी हाई कोर्ट चीफ जस्टिस को भेजीं.कमिश्नर ने बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को यह भी बताया कि जज के बंगले के एक सिक्युरिटी गार्ड ने उन्हें बताया कि 15 मार्च को कमरे से मलबा साफ किया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इस के बाद मामले को दबाने झुठलाने का सिलसिला शुरू हो गया कभी फायर सर्विस के एक अधिकारी के बयान से कोई नकदी नहीं मिलने की बात कही गई कभी जज साब का स्थानांतरण नियमित प्रक्रिया में होने की बयान आए और मामले पर मिट्टी डाल कर जार जार हो रहे न्याय तंत्र की साख को बचाने की कोशिश की गई लेकिन सोशल मीडिया के जमाने में जज साहब के घर की आग में अधजले नोटों के बोरो की तस्वीर वायरल हो गई और अंततः जिम्मेदार बड़ी अदालत को इस सबको लेकर अपना नजरिया साफ करना पड़ा। </div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा से मुलाकात की तो जस्टिस वर्मा ने किसी कैश की जानकारी होने से इनकार किया. यह भी कहा कि वह कमरा सब इस्तेमाल करते हैं.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन्हें वीडियो दिखाया तो उन्होंने इसे साजिश बताया.दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भारत के मुख्य न्यायधीश को भेजी चिट्ठी में गहराई से जांच की जरूरत बताई है.भारत के मुख्य न्यायधीश के निर्देश पर जस्टिस वर्मा का 6 महीने कॉल रिकॉर्ड निकाला गया है.जस्टिस वर्मा से यह भी कहा गया है कि वह अपने फोन को डिस्पोज न करें, न ही चैट मिटाएं।</div>
<div> </div>
<div>रिपोर्ट के मुताबिक जब आग लगी, उस समय न्यायमूर्ति वर्मा शहर से बाहर थे। उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके बाद इस मामले की आधिकारिक एंट्री दर्ज की गई। स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद यह खबर सरकार के उच्च अधिकारियों तक पहुंची और अंततः सीजेआई को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही सीजेआई संजीव खन्ना ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई। कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट, इलाहाबाद स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति वर्मा को अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद से दिल्ली हाईकोर्ट में भेजा गया था।</div>
<div> </div>
<div>कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि केवल स्थानांतरण कर दिया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी और न्याय व्यवस्था से जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए। यदि वे इनकार करते हैं, तो संसद के माध्यम से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। संविधान के अनुसार, किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता या कदाचार के आरोपों की जांच के लिए 1999 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन-हाउस प्रक्रिया तैयार की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत, सीजेआई पहले संबंधित न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगते हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता या मामले में गहन जांच की जरूरत महसूस होती है, तो सीजेआइ सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और दो उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक इन-हाउस जांच समिति गठित कर सकते हैं।</div>
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<div> हालांकि फिलहाल केवल वर्मा के ट्रांसफर का फैसला लिया निलंबन नहीं किया है जांच के बाद जज वर्मा के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। खबर है कुछ जज इस मामले में सिर्फ तबादले की कार्रवाई को ठीक न मानते हुए न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. जजों का कहना है कि अगर वो इस्तीफा देने से मना करें तो सीजेआई उनके खिलाफ 1999 की प्रक्रिया के अनुसाज जांच शुरू कराएं. इस मामले में किसी भी जज के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच कराई जाती है. चलिए जानें कि ऐसे मामलों में कहां और कैसे एक्शन लिया जाता है।</div>
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<div>इस तरीके के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की 1999 में बनाई गई इन-हाउस प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है. जिसकी मांग बाकी के जज कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में न्यायालयों के जजों के खिलाफ गलत काम, अनुचित व्यवहार और भ्रष्टाचार जैसे आरोपों से निपटा जाता है. इस प्रक्रिया के तहत सीजेआई को किसी जज के खिलाफ शिकायत मिलने पर वह उससे जवाब मांगते हैं. अगर जवाब से सीजेआई संतुष्ट नहीं होते हैं या अगर उनको लगता है कि इस मामले की गंभीर तरीके से जांच की जानी चाहिए तो वह एक इन-हाउस जांच पैनल बनाते हैं. इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और हाई कोर्ट के दो मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।</div>
<div> </div>
<div>फिर जांच के नतीजों के अनुसार उनका इस्तीफा मांगा जाता है या फिर महाभियोग चलता है.जज के आवास से नकदी की बरामदगी से संबंधित मामला शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर एक व्यवस्थित चर्चा बहस कराने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सुबह के सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए न्यायिक जवाबदेही पर सभापति से जवाब मांगा और इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ महाभियोग के संबंध में लंबित नोटिस के बारे में याद दिलाया।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इस पर कुछ टिप्पणियां करें और न्यायिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रस्ताव के साथ आने के लिए सरकार को आवश्यक निर्देश दें।’ नकदी की कथित बरामदगी के मुद्दे पर धनखड़ ने कहा कि उन्हें जिस बात की चिंता है वह यह है कि यह घटना हुई लेकिन तत्काल सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना किसी राजनेता, नौकरशाह या उद्योगपति से जुड़ी होती तो संबंधित व्यक्ति तुरंत निशाना बन जाता। उन्होंने ऐसे मामलों में ऐसी प्रणालीगत प्रतिक्रिया की वकालत की जो पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी हो।</div>
<div> </div>
<div>सोचने वाली बात है कि किसी अन्य नौकरी में भ्रष्टाचार उजागर होने पर तुरंत निलंबन और जांच होती है। लेकिन यहाँ न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ताक पर रखकर केवल स्थानांतरण कर दिया गया। क्या जज वर्मा घर से बैंक चला रहे थे? या फिर कोई आर्थिक सेवा दे रहे थे?</div>
<div> </div>
<div>जब ऐसे फैसले लिए जाते हैं, तो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाज़मी है। अगर चीफ जस्टिस खुद न्यायपालिका की साख को बचाने की चिंता नहीं करेंगे, तो आम जनता किससे उम्मीद करे?</div>
<div>दरअसल देश मे भ्रष्टाचार चरम पर है और कई बार न्यायपालिका के फैसलों और न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और गतिविधियों पर भी सवाल किए जाते रहे हैं अब इन हालातों में जब रिश्वतखोर न्यायिक अधिकारी पैसे लेकर न्याय की बोली लगाकर फैसले दे रहे हैं तब समाज में कानून व्यवस्था को लेकर अविश्वास का माहौल पनपना स्वाभाविक है।</div>
<div> </div>
<div>और अब तो बाकायदा एक हाइकोर्ट के जज के आवास से नोटों के अधजले बंडल चीख चीख कर कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहराईयों तक पहुच चुकी है।न्याय की कुर्सी पर बैठ कर इस तरह अवैध अकूत संपदा एकत्र करने वाले व्यवस्था के सरमाएदार बने  लोग समाज में कितना गलत संदेश दे रहे हैं यह लोकतांत्रिक देश में न्याय पालिका की गैरजिम्मेदाराना स्थिति को बयान करती है। सरकार को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई सरकारी अधिकारी देश के आम आदमी के विश्वास से खिलवाड़ न करे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 12:50:28 +0530</pubDate>
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                <title>जस्टिस यशवंत वर्मा पर सीजेआई को  रिपोर्ट सौंपी गई।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपी है। अभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। होली की रात, 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में लगभग 11:35 बजे आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। लेकिन उसके बाद सुनियोजित तरीके से अफवाह फैली की जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के कथित तौर पर कैश बरामद हुआ है। </div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150240/the-report-was-submitted-to-the-cji-on-justice-yashwant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/images5.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपी है। अभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। होली की रात, 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में लगभग 11:35 बजे आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। लेकिन उसके बाद सुनियोजित तरीके से अफवाह फैली की जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के कथित तौर पर कैश बरामद हुआ है। </div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ एक आंतरिक जांच शुरू की है। इसके साथ ही, उनकी इलाहाबाद हाई कोर्ट में तबादले की सिफारिश को भी माना गया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ट्रांसफर का प्रस्ताव कॉलेजियम ने दिया था। इस घटना ने न्यायिक हलकों में हलचल मचा दी है। जस्टिस वर्मा वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट में सेवा दे रहे हैं और इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी कार्य कर चुके हैं। इस मामले में पारदर्शिता की मांग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट अब इस जांच रिपोर्ट की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगा।</div>
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<div> यह मामला न केवल न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, बल्कि इसकी गहन जांच की आवश्यकता को भी रेखांकित कर रहा है। इस घटनाक्रम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को उस व्यक्ति के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने ईडी की जांच पर अंकुश लगाते हुए फैसला सुनाया था कि केंद्रीय जांच एजेसी  मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा किसी अन्य अपराध की जांच नहीं कर सकती है। वो यह नहीं मान सकती है कि कोई अंतर्निहित अपराध किया गया है। जब तक कि आरोप साबित न हो जाएं।</div>
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<div>उन्होंने ऑक्सफैम इंडिया, केयर इंडिया जैसे एनजीओ से जुड़े कई मामलों को भी निपटाया। जनवरी 2024 में, उन्होंने दोनों एनजीओ की टैक्स छूट की स्थिति को रद्द करने वाले आयकर विभाग द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी। हालांकि इस साल फरवरी में उन्होंने समाचार पोर्टल न्यूज़ क्लिक द्वारा दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें आयकर विभाग के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे 2 मार्च को या उससे पहले बकाया कर मांग के रूप में ₹19 करोड़ से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने  जनवरी 2023 में नेटफ्लिक्स के पक्ष में फैसला सुनाया था, जबकि 1997 के उपहार सिनेमा त्रासदी पर आधारित फिल्म “ट्रायल बाय फायर” की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 12:18:26 +0530</pubDate>
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