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                <title>Lieutenant Governor Manoj Sinha - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Lieutenant Governor Manoj Sinha RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बिना वैध पंजीकरण अमरनाथ यात्रा पर न आएं श्रद्धालु: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीनगर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">    </span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मनोज सिन्हा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने श्री अमरनाथ जी यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल अपनी निर्धारित तिथि के लिए वैध पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराने के बाद ही यात्रा पर आएं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बिना पंजीकरण वाले श्रद्धालुओं के पहुंचने से यात्रा प्रबंधन प्रभावित हो रहा है और पंजीकृत यात्रियों को भी अनावश्यक इंतजार करना पड़ रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शनिवार को श्री अमरनाथ जी यात्रा-</span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपराज्यपाल ने यात्रा के समग्र प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धालुओं की आवाजाही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182723/devotees-should-not-come-on-amarnath-yatra-without-valid-registration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीनगर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मनोज सिन्हा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने श्री अमरनाथ जी यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे केवल अपनी निर्धारित तिथि के लिए वैध पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराने के बाद ही यात्रा पर आएं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बिना पंजीकरण वाले श्रद्धालुओं के पहुंचने से यात्रा प्रबंधन प्रभावित हो रहा है और पंजीकृत यात्रियों को भी अनावश्यक इंतजार करना पड़ रहा है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शनिवार को श्री अमरनाथ जी यात्रा-</span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपराज्यपाल ने यात्रा के समग्र प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धालुओं की आवाजाही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक नियंत्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंजीकरण व्यवस्था तथा अन्य लॉजिस्टिक तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना वैध यात्रा पंजीकरण के जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हैं। इस पर उपराज्यपाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल निर्धारित तिथि के लिए वैध यात्रा पंजीकरण परमिट रखने वाले श्रद्धालुओं को ही पवित्र गुफा मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनोज सिन्हा ने कहा कि श्री अमरनाथ जी यात्रा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप निर्धारित क्षमता के अनुसार संचालित की जा रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुविधा और यात्रा के सुचारु संचालन के लिए पंजीकरण कार्यक्रम का सख्ती से पालन आवश्यक है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने जिन श्रद्धालुओं ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे अपील की कि वे फिलहाल अपनी यात्रा कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दें और पहले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वैध यात्रा पंजीकरण परमिट प्राप्त करें। इससे उन्हें जम्मू-कश्मीर पहुंचने पर किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू सहित नागरिक प्रशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा बलों और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में यात्रा मार्गों की सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवास व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं की भी समीक्षा की गई।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपराज्यपाल ने सभी विभागों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने लंगर समितियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा प्रदाताओं तथा स्वयंसेवी संगठनों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि प्रत्येक श्रद्धालु के लिए श्री अमरनाथ जी यात्रा सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुगम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक बनी रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 21:48:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्री लाल शुक्ल साहित्य की आत्मा  उपन्यास और व्यंग  की ज्वाला भारत के  स्वाभिमान और भारत के पौरूष भी है,  उपराज्यपाल मनोज सिन्हा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>लखनऊ। </strong>जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि श्री लाल शुक्ला साहित्य की आत्मा थे उपन्यास और व्यंग  की ज्वाला थे भारत के  स्वाभिमान भी है   और भारत के पौरूष  भी।ऐसा लगता है कि वह भारत की रोशनी में भी हैं और दिग्दर्शनी में भी।</div>
</div>
<div>  </div>
<div>श्री सिन्हा महान साहित्य का र श्री लाल शुक्ला के जन्म सती समारोह में मुख्य अतिथि पद से एक भव्य समारोह को संबोधित कर रहे थे लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रेक्षा गृह  में आयोजित इस समारोह में उन्होंने कहा की दुनिया में कभी-कभी ऐसे व्यक्ति अवतरित होते हैं जिनके माध्यम से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150194/the-soul-novel-of-shri-lal-shukla-literature-and-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img_20250320_123441.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>लखनऊ। </strong>जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि श्री लाल शुक्ला साहित्य की आत्मा थे उपन्यास और व्यंग  की ज्वाला थे भारत के  स्वाभिमान भी है   और भारत के पौरूष  भी।ऐसा लगता है कि वह भारत की रोशनी में भी हैं और दिग्दर्शनी में भी।</div>
</div>
<div> </div>
<div>श्री सिन्हा महान साहित्य का र श्री लाल शुक्ला के जन्म सती समारोह में मुख्य अतिथि पद से एक भव्य समारोह को संबोधित कर रहे थे लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रेक्षा गृह  में आयोजित इस समारोह में उन्होंने कहा की दुनिया में कभी-कभी ऐसे व्यक्ति अवतरित होते हैं जिनके माध्यम से राष्ट्र अपना गीत गाता है। श्री लाल शुक्ला के विराट व्यक्तित्व के माध्यम से ग्रामीण भावनाओं  को स्वर  मिला।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि 1949में श्री लाल शुक्ल सरकारी सेवा में आए ।1947 में भारत आजाद हुआ दो वर्ष बाद भारत के विकास निर्माण की तैयारी शुरू हुई और 1952में भारतीय गणराज्य की स्थापना हुई। जिसमें भारतीय आर्थिक विकाश और आम नागरिक के जीवन के अधिकार और विकास के लिए प्रशासनिक आयोग का गठन सरदार पटेल के नेतृत्व में हुआ जिससे योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को मिले रुल ऑफ लॉ  से देश चले  इसकी व्यवस्था की कोशिश की गई।देश के विकाश में पहला कदम बढ़ा तो श्री शुक्ल साहित्य कार नहीं थे  और देश के विकास के निर्माण में एक सदस्य के रूप में सरकारी सेवक की सीट पर बैठकर रियल साइट व्यू ले रहे थे और बदलाव के साक्षी ही नहीं बने बने बल्कि बदलाव के एजेंट के रूप में स्वयं काम  किया। </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250320-wa0122.jpg" alt="IMG-20250320-WA0122" width="3480" height="2324"></img></div>
<div>श्री सिन्हा ने उनके जीवन पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि  सिविल सेवा के बाद समाज और राष्ट्र निर्माण का भी संयम उनका लगातार चल रहा था।उनकी चेतना में केवल शब्दों के रंग नहीं बल्कि अपने कर्त्तव्यों को निभाने में भी एक संयम था। राग दरबारी आज भी प्रासंगिक है या नहीं इस पर लेखकों  के विचार और मंच हो सकते है मै उसका नहीं हिस्सा हु न ही विचार रख सकता हूं। लेकिन इतना मै कह सकता हु कि किसी भी पाठक को राग दरबारी भूगोल और अर्थशास्त्र की दृष्टि से नहीं पढ़ना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>बल्कि इस जन्म सती समारोह में हमें संकल्प लेना चाहिए कि  उसके साथ शिवपालगंज गंज को भी पढ़े और भूगोल और अर्ध शास्त्र की दृष्टि से न पढ़ें।राग दरबारी के किसी के रूप में न देखे बल्कि उसे लक्षण के रूप में देखे। तो एक सिस्टम का लक्षण  विद्यमान दिखाई देगा।और उस काल खंड की व्यवस्था और का दृष्टि कोड भी देश के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे।श्री लाल शुक्ल ने यह जिम्मेदारी बखूभी निभाई थी।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250320-wa0134.jpg" alt="IMG-20250320-WA0134" width="3480" height="2324"></img></div>
<div>उन्होंने कहा कि उस दौर में देश की आबादी 65 करोड़ थी।जब रागदरबारी शुक्ल जी लिख रहे थे तो देश में दो जून की रोटी पेट भरने का पूरा नहीं हो रहा था  55 प्रतिशत आबादी गरीबों की रेखा के नीचे थी जिसके लिए 60 मिलियन टन भोजन की आवश्यकता थी देश में कुल 44 मिलियन टन ही अनाज पैदा होता था और 16 मिलियन टन विदेश के सहायता पर निर्भर थी।शिक्षा पर प्रति व्यक्ति परिवार पर एक ₹16 पैसे खर्च होते थे 100 करोड़ विदेशी मुद्रा कोष था 35 000 के लगभग उद्योग धंधे थे 12000 किलोमीटर केवल सड़के थी 72% आबादी के ऊपर कर्ज था ऐसी परिस्थित में राग दरबारी लिखा गया था उसमें भूगोल और अर्थशास्त्र के दृष्टि से देखना ठीक नहीं है ।</div>
<div> </div>
<div>राग दरबारी में अनेक तत्व हैं जिसे आज भी पहचाना नहीं जा सकता। शिवपाल गंज से जुड़े अनेक किस्से जो बदलती हुई दुनिया के हाथों में फिट नहीं होंगे उस कालखंड के सभी पात्रों का स्ट्रक्चर इसलिए जरूरी था क्योंकि उसके बिना राग दरबारी का भव्य भवन खड़ा नहीं हो सकता था ।इसलिए भौगोलिक और आर्थिक रूप से शिवपालगंज को भी देखना छोड़ दें तो  हर दूसरे चेहरे में वह रोपन बाबू प्रिंसिपल साहब और रघुनाथ की कार्बन कॉपी की खोज समाप्त करके इस उपन्यास को सिस्टम के नजरिया से देखें तो राग दरबारी की शाश्वत और सर्वव्यापी  नजर आएगा।</div>
<div> </div>
<div> अपराधियों के संरक्षण की व्यवस्था 1968 के शिवपालगंज के कस्बे में ही नहीं थी बल्कि अमेरिका जैसे विकसित दुनिया के फेडरल सरकार के उन शहरों के साथ टकराव चल रहा है जिसमें सेंचुरी सिटी  सेंचुरी सिटी हम कहते हैं  फेडरल सरकार का कहना है कि ऐसे शहरों को स्थानीय प्रशासन खुलेआम प्रश्रय दे रहा है ताकि वे अपराध कर सके।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250320-wa0113.jpg" alt="श्री लाल शुक्ल साहित्य की आत्मा  उपन्यास और व्यंग  की ज्वाला भारत के  स्वाभिमान और भारत के पौरूष भी है,  उपराज्यपाल मनोज सिन्हा" width="2324" height="3480"></img></div>
<div>पिछले दिनों एक खबर आई थी अमेरिका के दो शहरों में एक अपार्टमेंट को अपराधी गैंग ने कब्जा कर रखा है। विश्व में कई जगह में ऐसी कुछ उदाहरण मिल जाएंगे हमारे देश में भी मिलेंगे जहां ला एंड ऑर्डर की स्थिति को देखकर दरोगा जी की अक्सर याद आ जाती है। विश्व में आज भी ऐसे देश हैं जहां विद्यालय में 12 महीने पढ़ाई कम आंदोलन ही मिलेंगे ।</div>
<div> </div>
<div>इसी प्रकार गोपालगंज की गवर्नमेंट का उन समस्याओं का प्रस्तुतीकरण उस समय खिंच गया था जो  दूर तक सीमित थी सामाजिक क्रांति और 60 दशक के समावेशी विकास के पक्ष  हमें एक साथ तो नहीं मिलेगा लेकिन दूसरा शिवपालगंज हमें नहीं मिलेगा ।लेकिन शुक्ला जी ने राग दरबारी में इन लक्षणों के जिस सिस्टम की चर्चा की है वह भारत में किसी ने किसी प्रदेश और देश के एक हिस्से में जरूर दिखाई देगा।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा  हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषियों ने कहा था की सत्य का रास्ता बहुत सुगम होता है यह सोचकर नहीं कहा था कि जब 6000 साल बाद लोग इसे पढ़ेंगे तो इसमें मिल्टन को भी समझने की कोशिश करेंगे ।</div>
<div> </div>
<div>इसलिए 2007 में जब रात दरबारी का दूसरा संस्करण श्री शुक्ला जी लिख रहे थे उसकी प्रस्तावना में ही 40 वर्ष पहले लिखे गए। उस उपन्यास को आज से ज्यादा प्रासंगिक होने की बात कही थी। इसका दूसरा पहलू भी है की लेखन अस्तित्व से जुड़े संदेश का असली वॉक लेखक होता है। राग दरबारी को एक अलौकिक घटना कहा जा सकता है जिसमें श्री शुक्ल ने शिवपालगन के तमाम पात्रों को के जीवन की कहानी और मानव जीवन के चेतना को सुहातनी शरीर के अमीरपन छोड़ गए हैं ।</div>
<div> </div>
<div>अब  आप हम पर निर्भर करता है कि हम इसे पढ़ते कैसे हैं और यदि पढ़ने वाले इस सूत्र को समझ कर आनंदित होता है </div>
<div> </div>
<div> लंगड़ की कहानी से सिविल सेवा से जुड़ी कहानी से राजस्व से जोड़ा जा सकता है जम्मू कश्मीर में मेरी जमीन मेरी निगरानी का कार्यक्रम मैंने चलाया तो उसमें राग दरबारी के लंगड़ की कहानी  मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत था।</div>
<div> </div>
<div>श्री सिन्हा ने कहा की यकीनन जब लेखक अक्सर कुछ लिखता है वह  संसार में हो नहीं सकता। आलोचक किसी लेखक में अच्छा या बुरा कह सकते हैं लेकिन विचारों को नष्ट करने का दुनिया में कोई तरीका अभी तक निजात नहीं हो पाई है।</div>
<div> </div>
<div> उनके विचार राग दरबारी तक सीमित नहीं था। श्री सिन्हा ने कहा मैं लेखकों  के बारे में तो नहीं क  सकता लेकिन आम जनता के बारे में यह जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि उन्होंने राग दरबारी को जितनी बार पढ़ा है उसमें मौजूद विचार उपन्यास के पा त्र और उनकी उपस्थिति का वर्णन किताब के पन्नों से निकाल कर लोगों की चेतना में समाहित हो चुका है। आंकड़े बदलते हैं लेकिन भीतर की आंखों ने जो पढ़ा वह अस्तित्व को छुपाता है ।और जीवन पर्यंत चलता है ।</div>
<div> </div>
<div>राग दरबारी पुस्तक ऐसा उन्हें विश्वास है कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मददगार साबित होगी ऐसा मुझे विश्वास है उन्होंने अंत में से लाल शुक्ला को अपने श्रद्धांजलि अर्पित की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 13:15:22 +0530</pubDate>
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