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                <title>delhi highcourt - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>18 मार्च तक दिल्ली हाईकोर्ट ने दी अंतरिम जमानत, राजपाल यादव का 'संकट' टला</title>
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                        <![CDATA[<p>बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के लिए सोमवार का दिन कानूनी दांव-पेंचों और भारी तनाव के बीच आखिरकार राहत भरी खबर लेकर आया. चेक बाउंस मामले में फंसे अभिनेता को दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 मार्च, 2026 तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है. सोमवार सुबह सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख काफी सख्त था. न्यायमूर्ति ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि राजपाल यादव को अंतरिम जमानत चाहिए, तो उन्हें दोपहर 3 बजे तक प्रतिवादी के नाम पर 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD) जमा करना होगा. कोर्ट ने कहा था, ‘अगर आप DD जमा करते हैं, तो हम</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169918/delhi-high-court-grants-interim-bail-to-rajpal-yadav-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/download-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के लिए सोमवार का दिन कानूनी दांव-पेंचों और भारी तनाव के बीच आखिरकार राहत भरी खबर लेकर आया. चेक बाउंस मामले में फंसे अभिनेता को दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 मार्च, 2026 तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है. सोमवार सुबह सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख काफी सख्त था. न्यायमूर्ति ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि राजपाल यादव को अंतरिम जमानत चाहिए, तो उन्हें दोपहर 3 बजे तक प्रतिवादी के नाम पर 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट (DD) जमा करना होगा. कोर्ट ने कहा था, ‘अगर आप DD जमा करते हैं, तो हम रिहा कर देंगे, वरना कल सुनवाई होगी.’ हालांकि अभी तक यह जानकारी नहीं आई कि राजपाल यादव की टीम द्वारा 1.5 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट कोर्ट में जमा किया गया है या नहीं.</p>
<p>राजपाल यादव ने अपनी अद्भुत कॉमेडी और अभिनय क्षमता से बॉलीवुड में एक मजबूत साख बनाई है, लेकिन बार-बार कोर्ट-कचहरी के चक्करों ने उनकी ब्रांड वैल्यू पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. मनोरंजन उद्योग में ‘क्रेडिबिलिटी’ यानी विश्वसनीयता सबसे बड़ी पूंजी होती है, और चेक बाउंस जैसे गंभीर मामलों में संलिप्तता किसी भी कलाकार के पेशेवर भविष्य को प्रभावित कर सकती है. वर्तमान समय में सख्त होते कानून के बीच, यह मामला यह संदेश देता है कि वित्तीय अनुशासन में चूक की कीमत न केवल भारी जुर्माने, बल्कि निजी स्वतंत्रता खोकर भी चुकानी पड़ सकती है.</p>
<p><strong>राजपाल यादव का कानूनी चक्रव्यूह</strong><br />राजपाल यादव के मौजूदा कानूनी संकट की जड़ें साल 2010 में गहराई से जुड़ी हैं. यह वह दौर था जब उन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का निर्णय लिया. इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए उन्होंने दिल्ली स्थित एक कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और कर्ज अदायगी का संकट खड़ा हो गया. आरोप है कि अभिनेता ने भुगतान के लिए जो चेक दिए थे, वे बैंक में बाउंस हो गए, जिसके बाद यह मामला निचली अदालत की दहलीज से होता हुआ दिल्ली हाईकोर्ट तक जा पहुंचा. गौरतलब है कि राजपाल यादव को इस विवाद के चलते पहले भी जेल की हवा खानी पड़ी है,</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:50:03 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज करने की याचिका खारिज की।</title>
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                        <![CDATA[<div class="adn ads">
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 मार्च) को दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आधिकारिक परिसर में अवैध नकदी की कथित बरामदगी के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की मांग वाली रिट याचिका पर विचार करने से इनकार किया।जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की खंडपीठ ने कहा कि याचिका, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के निर्देशानुसार तीन जजों की समिति द्वारा की जा रही आंतरिक जांच को भी चुनौती दी गई, समय से पहले दायर की गई है।</div>
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<div>जस्टिस ओक ने शुरुआत में ही याचिकाकर्ता वकील एडवोकेट मैथ्यूज जे नेदुपमारा से कहा:"मिस्टर नेदुमपारा, हमने प्रार्थनाएं</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150553/the-supreme-court-dismissed-a-petition-to-register-an-fir"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/50.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (28 मार्च) को दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आधिकारिक परिसर में अवैध नकदी की कथित बरामदगी के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की मांग वाली रिट याचिका पर विचार करने से इनकार किया।जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की खंडपीठ ने कहा कि याचिका, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के निर्देशानुसार तीन जजों की समिति द्वारा की जा रही आंतरिक जांच को भी चुनौती दी गई, समय से पहले दायर की गई है।</div>
<div> </div>
<div>जस्टिस ओक ने शुरुआत में ही याचिकाकर्ता वकील एडवोकेट मैथ्यूज जे नेदुपमारा से कहा:"मिस्टर नेदुमपारा, हमने प्रार्थनाएं देखी हैं। आंतरिक जांच समाप्त होने के बाद कई विकल्प खुले हैं। चीफ जस्टिस रिपोर्ट की जांच करने के बाद  एफ़आईआर दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं या मामले को संसद को भेज सकते हैं। आज इस याचिका पर विचार करने का समय नहीं है। आंतरिक रिपोर्ट के बाद सभी विकल्प खुले हैं। याचिका समय से पहले है।"</div>
<div> </div>
<div>जजों को नियमित जांच से बचाने वाले निर्णयों की समीक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए नेदुमपारा ने कहा कि केरल में तत्कालीन हाईकोर्ट जज के खिलाफ़ पाक्सो मामले का आरोप था; हालांकि, पुलिस ने एफ़ाआइआर दर्ज नहीं की। नेदुमपारा ने कहा कि जांच न्यायालय का काम नहीं है। इसे पुलिस पर छोड़ देना चाहिए। आंतरिक समिति एक वैधानिक प्राधिकरण नहीं है और यह विशेष एजेंसियों द्वारा की जाने वाली आपराधिक जांच का विकल्प नहीं हो सकती।</div>
<div> </div>
<div>जस्टिस ओक ने दोहराया,"आज हम इस चरण में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। आंतरिक प्रक्रिया पूरी होने दें और उसके बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पास सभी विकल्प खुले हैं।"</div>
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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 14:37:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज भी हड़ताल; कैट के वकीलों ने भी काम रोका ।</title>
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                        <![CDATA[<div><strong> प्रयागराज। </strong>दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की हड़ताल आज बुधवार को दूसरे दिन भी जारी है. हड़ताल के कारण मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है. अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन भी हाईकोर्ट में काम काज ठप है. प्रदेशभर से ऐसे फरियादी जिन्हें हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं हो पाई थी वो लौट रहे हैं. बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 के बाहर टेंट लगाकर धरना दे रहे हैं और सभा कर रहे हैं. उधर, कैट बार एसाेसिएशन ने भी हड़ताल शुरू कर दी है. वहां</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150433/even-today-the-lawyers-of-the-strike-in-allahabad-high"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/013.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> प्रयागराज। </strong>दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की हड़ताल आज बुधवार को दूसरे दिन भी जारी है. हड़ताल के कारण मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है. अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन भी हाईकोर्ट में काम काज ठप है. प्रदेशभर से ऐसे फरियादी जिन्हें हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं हो पाई थी वो लौट रहे हैं. बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हाईकोर्ट के गेट नंबर 3 के बाहर टेंट लगाकर धरना दे रहे हैं और सभा कर रहे हैं. उधर, कैट बार एसाेसिएशन ने भी हड़ताल शुरू कर दी है. वहां भी काम काज ठप हो गया है।</div>
<div> </div>
<div>बार के पदाधिकारी और अधिवक्ता मंच से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं और ज्यूडीशरी में इसे कतई बर्दाश्त न करने की बात कह रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसाेसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी मांग करप्शन फ्री न्यायपालिका की है।</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की कमी है, इसका कतई यह मतलब नहीं है कि आप हमें कूड़ा करकट दे देंगे. जब तक जस्टिस यशवंत वर्मा को क्लीनचिट न मिल जाए उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ही क्यों नहीं रहने दिया</div>
<div>जाता. हमने ईडी और सीबीआई जांच की मांग की है।</div>
<div> </div>
<div>ये एजेंसियां अगर जस्टिस वर्मा को क्लीनचिट दे देती हैं तो उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया जाए. हमें कोई आपत्ति नहीं है. अगर बिना जांच के जस्टिस यशवंत वर्मा अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट आएंगे तो उनका विरोध होगा. उनकी बेंच का बहिष्कार होगा।</div>
<div> </div>
<div>सरकार को चाहिए कि वो जस्टिस यशवंत वर्मा का इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर रद कर दें. उन्हें किसी और स्टेट में भेज दें. बता दें कि सरकारी आवास से नकदी मिलने के बाद जांच का सामना कर रहे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लेने के साथ ही साथ उनकाे इलाहाबाद हाईकोर्ट (मूल न्यायालय) फिर से भेजने का आदेश दिया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. हड़ताल का आज दूसरा दिन है. बार एसोसिएशन ने सोमवार को बुलाई आपातकालीन आम सभा में 11 बिंदुओं पर प्रस्ताव पास किया था।</div>
<div> </div>
<div>इसमें जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग चलाए जाने, सीबीआई व ईडी जैसी जांच एजेंसियाें से एफआईआर दर्ज कर जांच कराने जैसी मांगें शामिल हैं. उधर, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में भारी मात्रा में नकदी मिलने की जांच शुरू कर दी है।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना के निर्देश पर बनी समिति के सदस्यों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शीलू नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया, कर्नाटक हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनु शिवरामन मंगलवार को दिल्ली के 30 तुगलक क्रीसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के घर पहुंचे. करीब 40 मिनट तक घर के अंदर जांच समिति ने समय बिताया।</div>
<div> </div>
<div>जांच समिति उस स्टोर में भी गई जहां, 500–500 रुपए के अधजले नोट बोरियों में रखे मिले थे. जस्टिस वर्मा  के घर 14 मार्च की रात आग लग गई थी, जिसके बाद अग्निशमन अधिकारियों ने नकदी मिलने का खुलासा किया था. इसके बाद जांच के लिए चीफ जस्टिस ने तीन सदस्य जांच समिति का गठन किया है।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि जस्टिस यशवंत वर्मा ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि इस नकदी का उनके परिवार से कोई लेना-देना नहीं है. उनके परिवार का कोई भी सदस्य स्टोर रूम में कभी नहीं जाता और ना ही वह घर का हिस्सा है. नकदी कहां से आई उन्हें नहीं पता।</div>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 13:04:48 +0530</pubDate>
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                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली हाईकोर्ट ने  जस्टिस यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य वापस लिया ।</title>
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                        <![CDATA[<div>दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (24 मार्च, 2025) को घोषणा की कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जिनके आधिकारिक आवास से आग लगने के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, से न्यायिक कार्य अगले आदेश तक “तत्काल प्रभाव” से वापस ले लिया गया है।यह घोषणा उच्च न्यायालय द्वारा जारी एक नोट में की गई।</div>
<div>  </div>
<div>एक अन्य नोट में कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच-III के कोर्ट मास्टर आज से पहले सूचीबद्ध मामलों में तारीखें देंगे।रजिस्ट्रार (लिस्टिंग) के नाम से अदालत की वेबसाइट पर जारी नोट में कहा गया है, "हाल की घटनाओं के</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150313/the-delhi-high-court-withdrew-judicial-work-from-justice-yashwant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(12)3.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (24 मार्च, 2025) को घोषणा की कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा, जिनके आधिकारिक आवास से आग लगने के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, से न्यायिक कार्य अगले आदेश तक “तत्काल प्रभाव” से वापस ले लिया गया है।यह घोषणा उच्च न्यायालय द्वारा जारी एक नोट में की गई।</div>
<div> </div>
<div>एक अन्य नोट में कहा गया कि न्यायमूर्ति वर्मा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच-III के कोर्ट मास्टर आज से पहले सूचीबद्ध मामलों में तारीखें देंगे।रजिस्ट्रार (लिस्टिंग) के नाम से अदालत की वेबसाइट पर जारी नोट में कहा गया है, "हाल की घटनाओं के मद्देनजर,  न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से न्यायिक कार्य तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक वापस ले लिया गया है।"</div>
<div> </div>
<div>एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने 22 मार्च को अपनी वेबसाइट पर दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की जांच रिपोर्ट अपलोड कर दी, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात कही गई है।</div>
<div> </div>
<div>न्यायमूर्ति उपाध्याय की मुख्य न्यायाधीश को सौंपी गई रिपोर्ट में आधिकारिक संचार से संबंधित सामग्री शामिल है, जिसमें कहा गया है कि न्यायाधीश के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास से "भारतीय मुद्रा नोटों से भरी चार से पांच अधजली बोरियां" पाई गईं।श्री वर्मा ने नोट बरामदगी विवाद में आरोपों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि उनके या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा स्टोर रूम में कभी भी कोई नकदी नहीं रखी गई।</div>
<div> </div>
<div>दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय को सौंपे गए अपने जवाब में न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि उनके आवास पर नकदी मिलने के आरोप स्पष्ट रूप से उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश प्रतीत होते हैं।</div>
<div> </div>
<div>उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा शुरू की गई आंतरिक जांच के बाद न्यायमूर्ति वर्मा ने अपना जवाब दाखिल किया। श्री खन्ना ने शनिवार (22 मार्च, 2025) को  न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया ।</div>
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<div>नकदी का भारी भंडार मिलने की कथित घटना 14 मार्च को होली की रात करीब 11.35 बजे न्यायमूर्ति वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लगने के बाद हुई, जिसके बाद अग्निशमन विभाग के कर्मियों को मौके पर पहुंचकर आग बुझानी पड़ी।</div>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 11:53:29 +0530</pubDate>
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                <title>जस्टिस के खिलाफ जस्टिस आखिर कौन देगा ?</title>
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                        <![CDATA[<p>ऊँट पहाड़ के नीचे जब कभी आता है, और जब आता है तब उसे पता लगता है के दुनिया में उसका कद आखिर कितना छोटा है। जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में यही सब हो रहा है। जस्टिस वर्मा के घर में हुए अग्निकांड के बाद मौके पर मिले रुपयों का ढेर भी मिला था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। वर्मा के सरकारी आवास से कथित नकदी बरामद होने के बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जांच के दौरान वर्मा न्यायिक कार्य</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150269/who-will-give-justice-against-justice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/wrma4.jpg" alt=""></a><br /><p>ऊँट पहाड़ के नीचे जब कभी आता है, और जब आता है तब उसे पता लगता है के दुनिया में उसका कद आखिर कितना छोटा है। जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में यही सब हो रहा है। जस्टिस वर्मा के घर में हुए अग्निकांड के बाद मौके पर मिले रुपयों का ढेर भी मिला था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। वर्मा के सरकारी आवास से कथित नकदी बरामद होने के बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। जांच के दौरान वर्मा न्यायिक कार्य नहीं कर पाएंगे।सीजेआई संजीव खन्ना ने जिन तीन सदस्यों की कमेटी बनाई है उसमें जस्टिस शील नागू, जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस अनु शिवरामन शामिल हैं। सीजेआई खन्ना ने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।</p>
<p>आपको बता दूँ की दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय ने जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर कैश मिलने के मामले में एक रिपोर्ट पहले ही भारत के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को सौंप दी गयी  है। बताया जा रहा है कि जस्टिस उपाध्याय ने घटना के संबंध में सबूत और सूचनाएं जुटाने के लिए इन-हाउस जांच प्रक्रिया शुरू की थी और शुक्रवार को ही रिपोर्ट पेश कर दी है। अब सुप्रीम कोर्ट का कलीजियम इस रिपोर्ट की पड़ताल करेगा और फिर कोई कार्रवाई कर सकता है।</p>
<p>जस्टिस वर्मा भले आदमी है न और व्यावहारिक भी। वे न दूध के धुले हैं और न महाकुम्भ में उन्होंने कोई डुबकी  लगाईं है। नोटों से उनका प्रेम पुराना है। एके  रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में यूपी की सिम्भावली शुगर मिल में गड़बड़ी के मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सीबीआई  ने प्रथिमिकी दर्ज की थी। जस्टिस वर्मा 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस बनाए जाने से पहले इस शुगर कंपनी में नॉन-इग्जेक्युटिव डायरेक्टर थे।</p>
<p>जस्टिस यशवंत वर्मा  ५६ इंच के सीने वाले जस्टिस हैं उन्होंने  अपने सरकारी आवास पर नोट बरामदगी विवाद में लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है।  भारतीय न्यायपालिका में भ्र्ष्टाचार के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी कम से कम गूगल के पास तो नहीं है लेकिन गरोक गुरु बताते हैं कीन्यायपालिका में भ्रष्टाचार के कई रूप देखे जा सकते हैं, जैसे रिश्वतखोरी, पक्षपात, राजनीतिक दबाव और पारदर्शिता की कमी।</p>
<p>निचली अदालतों से लेकर उच्च स्तर तक, कुछ मामलों में जजों और अदालती कर्मचारियों पर अनुचित प्रभाव डालने या लाभ लेने के आरोप लगे हैं। उदाहरण के लिए, 2011 में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने न्यायिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया था, और 2012 में "कैश-फॉर-बेल" घोटाले ने सुर्खियां बटोरी थीं, जिसमें जमानत के लिए पैसे लेने के आरोप लगे थे। इसके अलावा, लंबित मामलों की भारी संख्या (मार्च 2025 तक 4.7 करोड़ से अधिक) और न्यायिक नियुक्तियों में देरी भी भ्रष्टाचार के अवसर पैदा करते हैं, क्योंकि यह प्रक्रिया को धीमा और अपारदर्शी बनाता है।</p>
<p>जहाँ तक मुझे याद है की भ्र्ष्टाचार के मामलों में आरोपी जजों के खिलाफ कार्रवाई करने में भारत बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है। आपको यद् होगा की 1993  में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वी. रामास्वामी पर वित्तीय अनियमितताओं और कदाचार के आरोप लगे थे। उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन यह आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और असफल रहा। यह भारत में पहला मौका था जब किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव वोटिंग तक पहुंचा।</p>
<p>हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ समय-समय पर महाभियोग के लिए प्रस्ताव लाने की कोशिश हुई है, जैसे कि जस्टिस सौमित्र सेन (कलकत्ता हाई कोर्ट) के खिलाफ 2011 में। राज्यसभा में उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन लोकसभा में वोटिंग से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसी तरह, कुछ अन्य मामलों में जजों ने जांच या महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले इस्तीफा दे दिया।</p>
<p>मुझे लगता है की जस्टिस वर्मा के मामले में भी कुछ होने वाला नहीं है। न्यायपालिका की बदनामी बचने के लिए जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच का कोई नतीजा जनता के सामने नहीं आएगा। भारत का मीडिया भी जस्टिस वर्मा के खिलाफ कोई नयी खोज नहीं कर पायेग।  कोई राजनितिक दल तो ईद मुद्दे पर कुछ बोलने  वाला है ही नहीं। हमारे यहां जस्टिस के लिए चुने जाने वाले लोग इनजस्टिस भी करें तो उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई आसानी से नहीं होती। जस्टिस साहिबान को कंबल ओढ़कर घी पीने की आजादी अघोषित रूप से दी गयी है ,ठीक उसी तरह जैसे जस्टिस मिश्रा को बलात्कार के मामले में ये कहने की आजादी है की किसी लड़की के स्तन छूना और उसका नाडा खोलना बलात्कार नहीं है।</p>]]>
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                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 15:01:05 +0530</pubDate>
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                <title>जस्टिस यशवंत वर्मा पर सीजेआई को  रिपोर्ट सौंपी गई।</title>
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                        <![CDATA[<div>दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपी है। अभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। होली की रात, 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में लगभग 11:35 बजे आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। लेकिन उसके बाद सुनियोजित तरीके से अफवाह फैली की जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के कथित तौर पर कैश बरामद हुआ है। </div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150240/the-report-was-submitted-to-the-cji-on-justice-yashwant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/images5.jpg" alt=""></a><br /><div>दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को एक रिपोर्ट सौंपी है। अभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। होली की रात, 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में लगभग 11:35 बजे आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए दिल्ली अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। लेकिन उसके बाद सुनियोजित तरीके से अफवाह फैली की जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के कथित तौर पर कैश बरामद हुआ है। </div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ एक आंतरिक जांच शुरू की है। इसके साथ ही, उनकी इलाहाबाद हाई कोर्ट में तबादले की सिफारिश को भी माना गया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ट्रांसफर का प्रस्ताव कॉलेजियम ने दिया था। इस घटना ने न्यायिक हलकों में हलचल मचा दी है। जस्टिस वर्मा वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट में सेवा दे रहे हैं और इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी कार्य कर चुके हैं। इस मामले में पारदर्शिता की मांग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट अब इस जांच रिपोर्ट की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगा।</div>
<div> </div>
<div> यह मामला न केवल न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, बल्कि इसकी गहन जांच की आवश्यकता को भी रेखांकित कर रहा है। इस घटनाक्रम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को उस व्यक्ति के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने ईडी की जांच पर अंकुश लगाते हुए फैसला सुनाया था कि केंद्रीय जांच एजेसी  मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा किसी अन्य अपराध की जांच नहीं कर सकती है। वो यह नहीं मान सकती है कि कोई अंतर्निहित अपराध किया गया है। जब तक कि आरोप साबित न हो जाएं।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने ऑक्सफैम इंडिया, केयर इंडिया जैसे एनजीओ से जुड़े कई मामलों को भी निपटाया। जनवरी 2024 में, उन्होंने दोनों एनजीओ की टैक्स छूट की स्थिति को रद्द करने वाले आयकर विभाग द्वारा पारित आदेश पर रोक लगा दी। हालांकि इस साल फरवरी में उन्होंने समाचार पोर्टल न्यूज़ क्लिक द्वारा दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें आयकर विभाग के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे 2 मार्च को या उससे पहले बकाया कर मांग के रूप में ₹19 करोड़ से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने  जनवरी 2023 में नेटफ्लिक्स के पक्ष में फैसला सुनाया था, जबकि 1997 के उपहार सिनेमा त्रासदी पर आधारित फिल्म “ट्रायल बाय फायर” की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।</div>]]>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 12:18:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दिल्ली हाईकोर्ट के जज के घर आग से खुला बड़ा राज, कमरे में मिला बेहिसाब कैश</title>
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<div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायिक गलियारों में हड़कंप मच गया  है। मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा। </div>
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<div>टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जब आग लगी, उस समय न्यायमूर्ति वर्मा शहर से बाहर थे। उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की,</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150192/bada-raj-found-in-the-room-open-from-the-fire"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download6.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div>दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर लगी आग के बाद भारी मात्रा में नकदी बरामद होने से न्यायिक गलियारों में हड़कंप मच गया  है। मामला इतना गंभीर हो गया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम को उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा। </div>
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<div>टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जब आग लगी, उस समय न्यायमूर्ति वर्मा शहर से बाहर थे। उनके परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके बाद इस मामले की आधिकारिक एंट्री दर्ज की गई। स्थानीय पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद यह खबर सरकार के उच्च अधिकारियों तक पहुंची और अंततः CJI को जानकारी दी गई।</div>
<div> </div>
<div>सूचना मिलते ही CJI संजीव खन्ना ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई। कॉलेजियम ने सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट, इलाहाबाद स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति वर्मा को अक्टूबर 2021 में इलाहाबाद से दिल्ली हाईकोर्ट में भेजा गया था।</div>
<div> </div>
<div>कॉलेजियम के कुछ सदस्यों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि केवल स्थानांतरण कर दिया जाता है, तो इससे न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी और न्याय व्यवस्था से जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है। कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए। यदि वे इनकार करते हैं, तो संसद के माध्यम से उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>संविधान के अनुसार, किसी भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितता या कदाचार के आरोपों की जांच के लिए 1999 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन-हाउस प्रक्रिया तैयार की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत, CJI पहले संबंधित न्यायाधीश से स्पष्टीकरण मांगते हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता या मामले में गहन जांच की जरूरत महसूस होती है, तो CJI सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और दो उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक इन-हाउस जांच समिति गठित कर सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div>न्यायमूर्ति वर्मा के परिवार के सदस्यों ने फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में नकदी बरामद की, जिसके बाद इस मामले की आधिकारिक एंट्री दर्ज की गई।</div>
<div> </div>
<div>1999 में स्थापित सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक प्रक्रिया संवैधानिक न्यायालयों के न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार या कदाचार की शिकायतों से निपटने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करती है।</div>
<div> </div>
<div>इन दिशानिर्देशों के तहत:सीजेआई सबसे पहले संबंधित न्यायाधीश से जवाब मांगता है।यदि जवाब असंतोषजनक है या यदि मामले की गहन जांच की आवश्यकता है, तो सीजेआई एक आंतरिक समिति का गठन कर सकता है।इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश और उच्च न्यायालयों के दो मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं।यदि समिति को कदाचार गंभीर लगता है, तो वह न्यायाधीश को इस्तीफा देने की सिफारिश कर सकती है। यदि न्यायाधीश इनकार करते हैं, तो उन्हें हटाने के लिए संसदीय कार्यवाही शुरू की जा सकती है।</div>
<div> </div>
<div>इस घटना ने न्यायिक प्रणाली में हलचल मचा दी है, जिससे न्यायिक जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हो गई हैं। सूत्रों ने संकेत दिया कि गृह मंत्रालय और अन्य अधिकारियों से प्राप्त प्रतिकूल रिपोर्टों ने कॉलेजियम द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>
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<div>अधिक पारदर्शिता और निष्ठा की मांग बढ़ने के साथ, न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण एक व्यापक प्रक्रिया की शुरुआत मात्र हो सकता है, जिसमें औपचारिक जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।दरअसल, संवैधानिक  न्यायालय के जजों  के खिलाफ भ्रष्टाचार, गलत काम और न्यायिक अनियमितता के आरोपों से निपटने के लिए 1999 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आंतरिक प्रक्रिया तैयार की गई थी।</div>
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<div>इसके मुताबिक शिकायत प्राप्त होने पर, CJI  संबंधित जज से जवाब मांगेंगे और यदि वे जवाब से संतुष्ट नहीं होते हैं, या उनका मानना है कि मामले की गहन जांच की आवश्यकता है, तो वे एक आंतरिक जांच समिति का गठन करेंगे।इसमें  सुप्रीम कोर्ट के एक जज और अन्य हाईकोर्ट के दो मुख्य जज शामिल होंगे।</div>
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<div>आंतरिक जांच समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, यदि CJI की राय में जज का कदाचार गंभीर प्रकृति का है, जिसके लिए जज को हटाया जाना आवश्यक है, तो वह जज से इस्तीफा देने के लिए कहेंगे।यदि जज ने इनकार कर दिया, तो CJI संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत संसद में जज के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार को लिखेंगे।</div>
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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 13:02:53 +0530</pubDate>
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