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                <title>public health - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>आग उगलती भीषण गर्मी में प्यासे कंठों की कौन सुने दास्तां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पानी प्रकृति के समस्त जीवों की मूलभूत और अनिवार्य आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विडंबना यह है कि जब यही आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जीवों के अस्तित्व पर संकट गहराना स्वाभाविक है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्वीकार करना होगा कि आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में यह कल्पना करना कठिन नहीं कि वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करते होंगे। मानव जीवन के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु केंद्र और राज्य सरकारें हर वर्ष अनेक प्रयास करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्तर पर ये प्रयास अभी भी अपर्याप्त सिद्ध हो रहे हैं। विशेषकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ‘नल-जल योजना’ एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहल है। बावजूद इसके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई स्थानों पर जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अनेक गाँवों में बनी पानी की टंकियाँ केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। ये टंकियाँ प्यासे कंठों को राहत देने के बजाय व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बनती जा रही हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पानी हर जीव की मूलभूत आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यदि इसी आवश्यकता की पूर्ति में कमी रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह न केवल गंभीर लापरवाही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अक्षम्य अपराध के समान है। भीषण गर्मी में जब लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मीलों दूर से पानी लाने को विवश होते हैं। जल संकट के कारण मूक पशु-पक्षियों का जीवन बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति-विनाश के चलते बढ़ती गर्मी और अस्तित्व बचाने के लिए भटकते वन्यजीव—ये दोनों ही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। ऐसे में सरकार और समाज को मिलकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर तक मानव और वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि इस दिशा में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो देश के हर कोने में सभी जीवों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जा सकता है। अन्यथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर वर्ष की भाँति आग उगलती गर्मी में प्यासे मूक प्राणियों की दास्तां अधूरी ही रह जाएगी।</span></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन के वेंटिलेटर के टेंडर में बड़ा खेल -1</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ- उत्तर प्रदेश </strong></blockquote><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वैसे तो शुरू से ही जीजा साले की जोड़ी के निशाने पर है लूट करने के लिए परन्तु इसके साथ साथ भ्र्ष्ट अधिकारीयों, कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के लूट के संगठित गिरोह का भी अनुपम उदहारण है, नए अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन की भ्र्ष्ट छवि सुधरने की, क्योकि उनके पूर्ववर्ती अमित मोहन प्रसाद और कंचन वर्मा ने भी जीजा साले से मिलकर मेडिकल कारपोरेशन के मुंह पर कालिख पोतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है l </p><h4 style="text-align:justify;"><strong>लूट के निशाने पर मेडिकल</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177169/big-game-in-the-tender-of-ventilator-of-uttar-pradesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/photo-32.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ- उत्तर प्रदेश </strong></blockquote><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन वैसे तो शुरू से ही जीजा साले की जोड़ी के निशाने पर है लूट करने के लिए परन्तु इसके साथ साथ भ्र्ष्ट अधिकारीयों, कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के लूट के संगठित गिरोह का भी अनुपम उदहारण है, नए अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन की भ्र्ष्ट छवि सुधरने की, क्योकि उनके पूर्ववर्ती अमित मोहन प्रसाद और कंचन वर्मा ने भी जीजा साले से मिलकर मेडिकल कारपोरेशन के मुंह पर कालिख पोतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है l </p><h4 style="text-align:justify;"><strong>लूट के निशाने पर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन में वेंटिलेटर का टेंडर  </strong></h4><p style="text-align:justify;"><br /></p><p style="text-align:justify;">जीजा साले द्वारा इसी वेंटीलेटर के टेंडर को लूटने की योजना बनाई जा रही है इसी क्रम में जीजा साले  की जोड़ी द्वारा कोशिश की जा रही है कि कारपोरेशन के महाप्रबंधक उपकरण के पद पर सिद्धार्थ बहादुर सिंह उर्फ़  सिद्धार्थ सिंह की तैनाती की कराई जा सके, जिससे की इस वेंटीलेटर के टेंडर में पूरा खेल किया जा सके और अच्छे जीवन रक्षक उपकरण की जगह घटिया चीनी उत्पाद प्रदेश के अस्पतालों में स्थापित किया जा सके और जनता को घटिया चीनी उपकरण के जरिये मौत के मुंह में धकेल कर जम कर लूट की जा सके, </p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/photo-12.jpg" alt="उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन के वेंटिलेटर के टेंडर में बड़ा खेल -1" width="942" height="628"></img></p><h4 style="text-align:justify;"><strong>जीजा साले की जोड़ी का चीनी उत्पाद से प्रेम</strong></h4><p style="text-align:justify;">हाल ही में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष के नाराजगी और वेंटीलेटर की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश के बाद वेंटीलेटर के टेंडर में हलचल मची है ताज़ा प्रकरण में लूट के निशाने पर वेंटीलेटर का टेंडर है, जेम पोर्टल के टेंडर सख्या  GEM/2025/B/5823357 EQUIPMENT ICU VENTILATOR QTY 221 के द्वारा प्रदेश के अस्पतालों के लिए वेंटीलेटर की खरीद की जानी है, उक्त टेंडर में 11 कंपनियों ने प्रतिभाग किया है जिसमे से एक कंपनी जीजा साले की HEIDELCO MEDICORE PVT LTD है, वैसे तो अधिकांश टेंडरों में HEIDELCO MEDICORE PVT LTD कंपनी अपने आप को उपकरण निर्माता बताती रही या फिर अपने आपको POCT SERVICES का अधिकृत वितरक, परन्तु इस टेंडर में कुछ नया ही खेल खेला जा रहा है, HEIDELCO MEDICORE PVT LTD ने अपने आपको SYSMED MEDICAL TECHNOLOGIES PVT LTD, CHANDIGARH  का अधिकृत वितरक दिखाया है और वेंटीलेटर का मॉडल TOPNOTCH TV 15 है,</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>भारतीय कंपनी की आड़ और चीनी वेंटीलेटर</strong></h4><p style="text-align:justify;">घटिया चीनी उपकरण को उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में खपाने की कवायद कुछ इस प्रकार से की जा रही है, जेम पोर्टल के टेंडर सख्या  GEM/2025/B/5823357 EQUIPMENT ICU VENTILATOR QTY 221  में कंपनी SYSMED MEDICAL TECHNOLOGIES PVT LTD, CHANDIGARH द्वारा खुद को वेंटीलेटर का निर्माता बताया है, परन्तु असली निर्माता कंपनी SHENZHEN MINDRAY BIO MEDICAL ELECTRONICS COMPANY LIMITED  है, और SYSMED MEDICAL TECHNOLOGIES PVT LTD, CHANDIGARH घटिया चीनी वेंटीलेटर को फ़र्ज़ी लेबल लगाकर भारतीय उपकरण दिखाकर जीजा साले द्वारा,  HEIDELCO MEDICORE PVT LTD,LUCKNOW  कंपनी के माध्यम से उत्तर प्रदेश की अस्पतालों में सप्लाई करके बड़ी लूट की तैयारी है और उत्तर प्रदेश की जनता को घटिया चीनी जीवन रक्षक उपकरण के द्वारा मौत के मुहं में धकेलने की तैयारी है, लेकिन इनको नहीं पता है की वेंटीलेटर की खरीद पर उच्च न्यायालय की पैनी नज़र है, </p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/photo-32.jpg" alt="उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन के वेंटिलेटर के टेंडर में बड़ा खेल -1" width="909" height="606"></img></p><p style="text-align:justify;"><strong>चीन प्रेम और साइंस हाउस मेडिकल्स भोपाल का हश्र</strong><br /> <br />अभी हाल में ही अपने चीन प्रेम के कारन और चीनी घटिया जीवन रक्षक उत्पाद को मध्य प्रदेश के अस्पतालों में सप्लाई करने के कारन कुख्यात जीजा साले की जोड़ी के सहयोगी SCIENCE HOUSE MEDICALS PVT LTD BHOPAL के निदेशक जीतेन्द्र तिवारी, सुनैना तिवारी, राजेश गुप्ता और शैलेन्द्र तिवारी अपने कर्मचारियों के साथ जेल में है और अब   लगता है की फर्जीवाड़ा करने के कारन और जीजा साले की जोड़ी से संबंधों के कारन SYSMED MEDICAL TECHNOLOGIES PVT LTD, CHANDIGARH कंपनी के निदेशक हेमंत सिंगला, वीणा जॉली, अंकुर मंगला, नवदीप सिंगला भी अपने कर्मचारियों के साथ जेल जाने की तैयारी कर रहे हैं, आश्चर्यजनक यह हैं की मात्र तीन वर्ष पुरानी कंपनी वेंटीलेटर और एनेस्थीसिया जैसे बड़ी मशीनों की निर्माता बन गयी हैं I जीजा साले की जोड़ी को फायदा पहुंचने के लिए उज्जवल कुमार द्वारा वेंटीलेटर के स्पेसिफिकेशन्स में भी बड़ा बदलाव किया गया हैं</p><h4 style="text-align:justify;"><strong>उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन का पक्ष</strong></h4><p style="text-align:justify;">इस वेंटीलेटर के टेंडर के प्रकरण में संवाददाता द्वारा जब उत्तर प्रदेश मेडिकल कारपोरेशन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो मेडिकल कारपोरेशन द्वारा टेंडर में नामित बायर देवव्रत कुमार आर्य द्वारा स्वतंत्र प्रभात के संवाददाता को बताया गया  की मेडिकल कारपोरेशन चीनी उपकरण नहीं खरीदता है और यदि वेंटीलेटर के टेंडर में कोई उपकरण या कंपनी चीनी पाया जाता है तो उस निविदा को निरस्त किया जायेगा  </p><h5 style="text-align:justify;"><strong>बृजेश पाठक की जिम्मेदारी योगी की जीरो टॉलरेंस नीति</strong></h5><p style="text-align:justify;">वेंटीलेटर के टेंडर में हो रहा है इस खेल को रोकने की पूरी पूरी जिम्मेदारी बृजेश पाठक की है क्योंकि सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार है और जिनकी भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस पॉलिसी की नीति है, अतः इस नीति का पूरी तरीके से पालन कराना बृजेश पाठक की जिम्मेदारी है विभागीय मंत्री होने के नाते, चुनावी वर्ष है इसलिए सरकार को हर कदम अपना फूंक फूंक कर  रखना होगा ताकि जनता में उचित संदेश जाए इमानदारी का, इस चुनावी वर्ष में कोई भी व्यक्ति शातिर दलालों के साथ अपने संबंधों का खुलासा नहीं चाहेगा<br /> <br /><strong>अगले अंक में वेंटीलेटर टेंडर में लूट और जीजा साले के चीन प्रेम पर खुलासा .......</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 08:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घटिया और नकली दवाएं दे रहीं हैं जन स्वास्थ्य को बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2017</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसके अनुसार विकासशील देशों में कम-से-कम </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">10%</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  दवाएं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटिया या नक़ली थीं। इस रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा था कि ये आंकड़े बहुत कम रिपोर्ट हो सके हैं जब कि संभवत: यह समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ फिलिप मैथ्यू ने एएमआर डायलॉग्स सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यदि थोक विक्रय के आंकड़े देखें</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो विकासशील देशों में घटिया और नक़ली दवाओं पर अमरीकी डॉलर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">30.5</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  अरब से अधिक व्यय होता है। हर साल निमोनिया के</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">70,000</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150169/poor-and-fake-medicines-are-giving-a-big-challenge-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/untitled3.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2017</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसके अनुसार विकासशील देशों में कम-से-कम </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">10%</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> दवाएं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटिया या नक़ली थीं। इस रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा था कि ये आंकड़े बहुत कम रिपोर्ट हो सके हैं जब कि संभवत: यह समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ फिलिप मैथ्यू ने एएमआर डायलॉग्स सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यदि थोक विक्रय के आंकड़े देखें</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो विकासशील देशों में घटिया और नक़ली दवाओं पर अमरीकी डॉलर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">30.5</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> अरब से अधिक व्यय होता है। हर साल निमोनिया के इलाज करवा रहे </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">70,000</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">170,000</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बच्चे (</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">5</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से कम आयु के)</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटिया और नकली दवाओं के इस्तेमाल के कारण मृत होते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रख्यात अधिवक्ता लीना मेंघाने ने बताया कि बिहार में एचआईवी के साथ जीवित लोगों को</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें एडवांस्ड एचआईवी रोग है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को सबसे बड़ा जानलेवा खतरा दवा प्रतिरोधक संक्रमण से है -जैसे कि क्रिप्टोकॉकल मेनिनजाइटिस। एक ओर बड़ी संख्या में वे लोग हैं जिन्हें दवाएँ मुहैया ही नहीं हैं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो दवा प्रतिरोधक संक्रमणों से जूझ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सबको बराबरी</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकार और सामाजिक न्याय के आधार पर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना पहले से ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। चाहे कोई भी रोग हो</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सब को जल्दी और सही जांच</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सही इलाज और देखभाल मिलना</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी स्तर पर काफ़ी दुर्लभ है। जब दवाएं कारगर नहीं रहतीं क्योंकि दवा प्रतिरोधकता या रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) हो जाती है तो यह चुनौती अधिक जटिल बन जाती है। अब कल्पना करें कि ऐसे में यदि दवाएं घटिया या नकली होंगी तो जन स्वास्थ्य की समस्या कितनी अधिक पेचीदा हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटिया या नकली दवाएं क्या हैं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुसार जो दवाएं गुणवत्ता मानकों और विनिर्देशों को पूरा नहीं करती वे घटिया या नकली श्रेणी में आती हैं। ऐसी घटिया या नक़ली दवाओं से इलाज नहीं हो पाता क्योंकि उनमें या तो उचित सामग्री नहीं होती या सही मात्रा में नहीं होती। यदि दवाओं में मिलावट होगी या विषैले पदार्थ होंगे तो वह फायदेमंद होने के बजाय उल्टा नुकसानदायक भी हो सकती हैं। और ऐसी घटिया और नकली दवाओं से दवा प्रतिरोधकता भी बढ़ती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ कामिनी वालिया ने कहा कि जब रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणु दवाओं से मृत नहीं होते हैं तो उसे रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस) कहते हैं </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">– </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी कि जीवाणु दवा प्रतिरोधक हो चुके हैं और वह दवाएं इन पर असरकारी नहीं होंगी। अब इलाज के लिए नई दवाओं की ज़रूरत होगी और नई दवाएं या तो अत्यंत सीमित और महँगी हैं या है ही नहीं। हर साल </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">50</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख लोग रोगाणुरोधी प्रतिरोध के कारण मृत होते हैं। यदि रोगाणुरोधी प्रतिरोध को रोका नहीं गया तो </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2050</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">1</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ से अधिक व्यक्ति प्रति वर्ष इससे मृत होंगे और वैश्विक अर्थ व्यवस्था को अमरीकी डॉलर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">100</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> ट्रिलियन से अधिक का नुक़सान होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ वालिया ने कहा कि मानव स्वास्थ्य</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पशु स्वास्थ्य</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पशुधन और मुर्गीपालन</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तथा कृषि आदि में दवाओं के दुरूपयोग के कारण रोगाणुरोधी प्रतिरोध एक वैश्विक जन स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">60%</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> दवाएं जो बनती हैं वे पशुधन और मुर्गीपालन में उपयोग की जाती हैं। दवाओं के दुरुपयोग के कारण रोगाणु</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रोगाणुरोधी प्रतिरोध उत्पन्न कर लेते हैं और दवाएं रोगों पर कारगर नहीं रहती। अनेक दवा प्रतिरोधक जीवाणु हैं जो पशुओं से मनुष्य में पहुँच सकते हैं-</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि साल्मोनेला</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ई कोलाई</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एस ऑरियस</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंपीलोबैक्टर</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्लेब्सिएला</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एंट्रोकॉकस</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आदि। डॉ कामिनी वालिया ने चेताया कि हालांकि पशुओं से मानव तक संक्रमण फैलाव के संबंध में कुछ वैज्ञानिक प्रमाण हैं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु बड़े स्तर पर शोध की आवश्यकता भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटिया और नकली दवाओं पर विराम लगे</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ फिलिप मैथ्यू ने बताया कि अनेक कारण हैं जिनकी वजह से घटिया और नकली दवाओं की चुनौती बरकरार है: कमजोर विनियामक प्रणालियाँ</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आपूर्ति शृंखलाओं की जटिलता</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सही दवाएं अत्यंत महंगी होना जिसके कारण लोग पैसा बचाने के लिए सस्ते विकल्प खोजते हैं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आदि।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ मैथ्यू का कहना है कि यदि लोग सार्वभौमिक स्वास्थ्य व्यवस्था या स्वास्थ्य बीमा से पूर्णत: लाभान्वित नहीं होंगे तो उनकी जेब से ही स्वास्थ्य व्यय होता रहेगा </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">– </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अक्सर लोगों को अधिक गरीबी में धकेल देता है। इसी कारण से लोग सस्ते विकल्प खोजने को मजबूर होते हैं जो घटिया या नकली भी हो सकते हैं। विभिन्न स्तर पर भ्रष्टाचार और उपभोक्ता जागरूकता की कमी भी इस समस्या को बढ़ावा देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ महीने पहले (दिसंबर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2024</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में) विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें घटिया और नकली दवाओं से संबंधित </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2017-2021</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> के वैश्विक आंकड़ें हैं। डॉ मैथ्यू ने बताया कि </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">“</span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए क्योंकि घटिया और नकली दवाओं की दर कम होने के बजाए बढ़ोतरी पर थी। हर साल यह दर </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">36.3%</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> बढ़ रही थी। इनमें अनेक प्रकार की दवाएं शामिल थीं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एंटीबायोटिक</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एंटी-वायरल</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एंटी-फंगल</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एंटी-पैरासिटिक (मलेरिया आदि की दवाएं)</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर की दवाएं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वैक्सीन या टीके। इस रिपोर्ट में </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">877</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मामलों का विस्तार से ज़िक्र है जहाँ घटिया और नक़ली दवाएं पकड़ी गई थीं। स्पष्ट है कि इसके कारण दवा प्रतिरोधकता या रोगाणुरोधी प्रतिरोध का ख़तरा अधिक गंभीर हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">"</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिनिमम इन्हिबिटरी कंसंट्रेशन"</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दवाओं की उस न्यूनतम मात्रा को कहते हैं जिससे रोगाणु में बढ़ोतरी बंद हो जाती है। पर घटिया और नकली दवाएं अक्सर इस मानक पर खरी नहीं उतरती जिसके कारणवश न केवल रोगी अधिक पीड़ा झेलता है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संक्रमण का फैलाव नहीं रुकता</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मृत्यु का ख़तरा बढ़ता है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध भी बढ़ता है। डॉ मैथ्यू का कहना सही है कि घटिया और नकली दवाओं के कारण लोगों की आय का हर्जाना होता है</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय अनावश्यक रूप से बढ़ते हैं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लोगों का स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास डगमगाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि दवाएं सही अवधि तक</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">या सही मात्रा में नहीं दी जाएंगी तब भी रोगाणुरोधी प्रतिरोध होने का ख़तरा बना रहता है और दवा प्रतिरोधक संक्रमण का फैलाव बढ़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक ओर जहाँ हमें यह सुनिश्चित करना है कि सभी आवश्यक दवाओं की कमी न होने पाए और आपूर्ति शृंखला मज़बूत बनी रहे</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर यह भी पक्का करना है कि दवाएं घटिया या नकली न हों।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लीना मेंघने ने कहा कि सरकार को प्रभावित समुदाय को गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया में भागीदार बनाना चाहिए। लीना ने एक उदाहरण साझा किया - </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">2024</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> में एचआईवी के साथ जीवित लोगों के नेटवर्क से शिकायत आने लगी कि नए बैच की जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं बहुत कड़वी हैं और दवाओं की गोली टूट रही है। जब इसकी सूचना सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम और अन्य औषधि विनियामक अधिकारियों को दी गई तो एक हफ़्ते के अंदर इन दवाओं को विश्व स्वास्थ्य संगठन की उन दवाओं से बदला गया जिनकी गुणवत्ता की जांच हो चुकी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दवाओं की जैव समतुल्यता और स्थिरता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लीना का कहना है कि अक्सर गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया के अंतर्गत दवाओं के किसी बैच के सैंपल या नमूने की जाँच की जाती है कि उसमें कोई मिलावट न हो</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दवाओं में ऐक्टिव फार्मास्यूटिकल एजेंट की मात्रा सही हो</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आदि। परंतु गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया में प्रायः यह  जांच नहीं होती कि दवाओं की जैव समतुल्यता और स्थिरता</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न मौसम तापमान और नमी में भी सही रहती है या नही। गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया में यह भी पुष्टि की जानी चाहिए कि दवाएं जैव समतुल्य और स्थिर रहें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लीना मेंघने ने एक और उदाहरण साझा किया कि सरकार के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई दवाओं की ख़रीद हेतु जो टेंडर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें दवाओं की गुणवत्ता के मानक एक समान नहीं हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रेट ब्रिटेन पाउंड </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">1</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन का द ट्रिनिटी चैलेंज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ फिलिप मैथ्यू ने कहा कि घटिया या नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए नई तकनीकी खोज ज़रूरी है। इसी दिशा में</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">द ट्रिनिटी चैलेंज ने </span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">1</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> मिलियन ग्रेट ब्रिटेन पाउंड की प्रतियोगिता की घोषणा की है जिससे कि घटिया और नकली दवाओं पर रोक लगाने हेतु</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विकासशील देशों के लोग नवीन तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ कामिनी वालिया ने कहा कि औषधि विनियमक अधिकारियों और स्थानीय निर्माताओं की क्षमता में विकास आवश्यक है जिससे कि नवीनतम निगरानी तकनीकियों का उपयोग हो सके और घटिया और नकली दवाओं पर विराम लग सके। वैश्विक आपूर्ति शृंखला को भी मजबूत करना होगा जिससे कि सभी आवश्यक जाँच और इलाज</span><span lang="en-gb" xml:lang="en-gb">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सभी लोगों को सम्मान के साथ बिना विलंब मिल सके और रोगाणुरोधी प्रतिरोध की चुनौती का मुकाबला हम सब प्रभावकारी ढंग से कर सकें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 15:49:21 +0530</pubDate>
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