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                <title>सर्पदंश से महिला व युवक की हुई मौत, कोहराम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> सर्पदंश से महिला व युवक की मौत हो गयी। मौत की जानकारी होने पर परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पीएम के लिए जिला मुख्यालय भेजवाया। सांगीपुर थाना क्षेत्र के पूरे पण्डित सिंहगढ़ गांव निवासी रमाशंकर मिश्र उर्फ झुन्ना की अड़तालिस वर्षीया पत्नी पुष्पा देवी बीती सोमवार की रात करीब साढ़े आठ बजे घर के बगल धान की नर्सरी में घुसे मवेशी को भगाने गयी थी। इसी बीच खेत के पास उसे जहरीले सर्प ने डस लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">महिला चीखते हुए भागकर घर पहुंची और परिवार को सर्पदंश की जानकारी दी। इसी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183910/woman-and-youth-died-due-to-snake-bite"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260721-wa0066.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> सर्पदंश से महिला व युवक की मौत हो गयी। मौत की जानकारी होने पर परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को पीएम के लिए जिला मुख्यालय भेजवाया। सांगीपुर थाना क्षेत्र के पूरे पण्डित सिंहगढ़ गांव निवासी रमाशंकर मिश्र उर्फ झुन्ना की अड़तालिस वर्षीया पत्नी पुष्पा देवी बीती सोमवार की रात करीब साढ़े आठ बजे घर के बगल धान की नर्सरी में घुसे मवेशी को भगाने गयी थी। इसी बीच खेत के पास उसे जहरीले सर्प ने डस लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला चीखते हुए भागकर घर पहुंची और परिवार को सर्पदंश की जानकारी दी। इसी बीच वह अचेत हो गयी। परिजन उसे इलाज के लिए सांगीपुर सीएचसी ले गये। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की जानकारी होने पर परिवार में कोहराम मच गया। मृतका के एक पुत्र व दो पुत्रियां हैं।इधर सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कर पीएम के लिए भेजवाया। उधर थाना क्षेत्र के बूबूपुर गांव में सोमवार की रात करीब दो बजे सर्पदंश से अठारह वर्षीय युवक की मौत हो गयी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मृतक प्रतीक मिश्र उर्फ नान पुत्र धर्मेन्द्र मिश्र रायबरेली जनपद के कवही भगतपुर परशदेपुर निवासी था। वह यहां अपने मामा के मदन कुमार पाण्डेय के यहां रहकर पढ़ाई करता था। परिजनों के अनुसार रात करीब दो बजे कमरे में तख्त पर सोते समय उसे जहरीले सर्प ने डस लिया। इसकी जानकारी युवक ने मामा को दी। आननफानन में उसे इलाज के लिए सीएचसी सांगीपुर ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने प्रतीक को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पीएम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है। मृतक दो भाईयों में छोटा था। हादसे से परिजनों का रो-रो कर बुराहाल है। एसओ गौरव त्रिवेदी का कहना है कि शव को पीएम के लिए भेजा गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 22:14:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तमसा की अंतिम सांसें: जलकुंभी का कहर, गंदगी का तांडव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong> जिला मुख्यालय अकबरपुर से गुजरने वाली तमसा नदी का बड़ा हिस्सा इन दिनों जलकुंभी और गंदगी के साथ-साथ झाडियों में तब्दील हो चुका है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा वार्ड क्षेत्र से निकलने वाला कचरा नदी के किनारे ही डंप किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तमसा नदी सफाई के नाम पर पालिका द्वारा इस तरह स्वच्छता अभियान की एक ऐसी मुहीम चलाई जाती है कि जिम्मेदार अधिकारी भी तमसा नदी में सफाई करते नजर आते हैं ।नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की मुहीम नदी के कुछ मीटर के हिस्से तक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183210/last-breaths-of-tamsa-havoc-of-water-hyacinth-orgy-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1006297978-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर।</strong> जिला मुख्यालय अकबरपुर से गुजरने वाली तमसा नदी का बड़ा हिस्सा इन दिनों जलकुंभी और गंदगी के साथ-साथ झाडियों में तब्दील हो चुका है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा वार्ड क्षेत्र से निकलने वाला कचरा नदी के किनारे ही डंप किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमसा नदी सफाई के नाम पर पालिका द्वारा इस तरह स्वच्छता अभियान की एक ऐसी मुहीम चलाई जाती है कि जिम्मेदार अधिकारी भी तमसा नदी में सफाई करते नजर आते हैं ।नगर पालिका अकबरपुर के द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान की मुहीम नदी के कुछ मीटर के हिस्से तक ही सीमित रह जाती है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में सुर्खियां बटोरती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उस दौरान की वो तस्वीर जिसमें जिम्मेदार सफाई करते नजर आते हैं।जबकि लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि बरसात के पहले नगर पालिका  द्वारा तमसा नदी की अगर सही तरीके से साफ सफाई कराई  जाए तो नदी के किनारे बने मकान और शहजादपुर नई सड़क के किनारे बने दुकानों में जल भराव जैसी समस्या कभी उत्पन्न ही न हो।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 22:25:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चक फैजुल्ला मोहल्ले में जलभराव से जनजीवन प्रभावित,बीमारियों का बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>नैनी क्षेत्र के चक फैजुल्ला मोहल्ले में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मोहल्ले की सड़कों और गलियों में पानी जमा रहने के कारण लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव के कारण गंदगी और दुर्गंध फैल रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मोहल्लेवासियों ने आरोप लगाया कि कई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183127/life-affected-due-to-waterlogging-in-chak-faizullah-locality-increased"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0126.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज। </strong>नैनी क्षेत्र के चक फैजुल्ला मोहल्ले में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मोहल्ले की सड़कों और गलियों में पानी जमा रहने के कारण लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव के कारण गंदगी और दुर्गंध फैल रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मोहल्लेवासियों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और जलकल विभाग से मांग की है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था कर जलभराव की समस्या का जल्द से-जल्द स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और संभावित बीमारियों के खतरे से बचाव हो सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:46:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जाम नालियां और कूड़े के अंबार से ब्योहरा गांव बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेहवरा गांव में साफ-सफाई व्यवस्था बदहाल होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पूर्व प्रधान जयप्रकाश जायसवाल के कार्यालय के पास स्थित नालियां लंबे समय से जाम पड़ी हैं, जिनमें गंदा पानी भरा हुआ है। वहीं सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे होने से पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से सफाई कार्य नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण गांव में गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जाम नालियों के कारण जल निकासी बाधित हो गई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183125/beohra-village-is-in-trouble-due-to-clogged-drains-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0118.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेहवरा गांव में साफ-सफाई व्यवस्था बदहाल होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पूर्व प्रधान जयप्रकाश जायसवाल के कार्यालय के पास स्थित नालियां लंबे समय से जाम पड़ी हैं, जिनमें गंदा पानी भरा हुआ है। वहीं सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे होने से पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सफाईकर्मी नियमित रूप से सफाई कार्य नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण गांव में गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जाम नालियों के कारण जल निकासी बाधित हो गई है, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को आवागमन में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने बताया कि गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। इससे डेंगू, मलेरिया समेत अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है, जिससे लोगों में चिंता का माहौल है।ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और नगर प्रशासन से मांग की है कि जाम नालियों की तत्काल सफाई कराई जाए, कूड़े के ढेर हटाए जाएं तथा नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गांव के लोगों को राहत मिल सके और संभावित बीमारियों के खतरे को रोका जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:45:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जनसंख्या दिवस: संख्या नहीं संतुलन है सबसे बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस हमें केवल बढ़ती आबादी के आंकड़ों की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह सोचने का अवसर भी देता है कि जनसंख्या किसी देश के लिए बोझ है या सबसे बड़ी ताकत। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस देश के पास अपनी आबादी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और संसाधनों की कितनी प्रभावी व्यवस्था है। वर्ष 1990 में जब विश्व जनसंख्या दिवस पहली बार व्यापक रूप से मनाया गया था, तब दुनिया की आबादी लगभग 5.3 अरब थी। आज यह 8 अरब से अधिक हो चुकी है। इन तीन दशकों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183103/population-day-balance-is-the-biggest-challenge-not-numbers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(2).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस हमें केवल बढ़ती आबादी के आंकड़ों की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह सोचने का अवसर भी देता है कि जनसंख्या किसी देश के लिए बोझ है या सबसे बड़ी ताकत। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस देश के पास अपनी आबादी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और संसाधनों की कितनी प्रभावी व्यवस्था है। वर्ष 1990 में जब विश्व जनसंख्या दिवस पहली बार व्यापक रूप से मनाया गया था, तब दुनिया की आबादी लगभग 5.3 अरब थी। आज यह 8 अरब से अधिक हो चुकी है। इन तीन दशकों में विश्व की जनसंख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, लेकिन इसके साथ ही एक नया संकट भी सामने आया है। कई देशों में आबादी तेजी से बढ़ रही है, जबकि अनेक विकसित देशों में जन्मदर इतनी कम हो गई है कि वहां जनसंख्या घटने और समाज के बूढ़ा होने की चुनौती पैदा हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार देश की जनसंख्या लगभग 1.46 से 1.47 अरब के बीच पहुंच चुकी है। हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत की वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है और कुल प्रजनन दर भी प्रतिस्थापन स्तर के आसपास या उससे नीचे आ गई है। इसका अर्थ यह है कि अब भारत अनियंत्रित जनसंख्या विस्फोट के दौर से निकलकर जनसंख्या संतुलन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। इसलिए आज आवश्यकता केवल जनसंख्या नियंत्रण की नहीं, बल्कि दूरदर्शी जनसंख्या प्रबंधन की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीते दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ने के पीछे कई कारण रहे। चिकित्सा सुविधाओं में सुधार, टीकाकरण, बेहतर अस्पताल, स्वच्छता और पोषण के कारण मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई। शिशु एवं मातृ मृत्यु दर भी घटी, जिससे अधिक बच्चे जीवित रहने लगे। दूसरी ओर लंबे समय तक जन्मदर अपेक्षाकृत ऊंची बनी रही। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी, परिवार नियोजन के प्रति सीमित जागरूकता, बाल विवाह, पुत्र प्राप्ति की सामाजिक मानसिकता, गरीबी, बड़े परिवार को सामाजिक प्रतिष्ठा मानने जैसी धारणाओं ने भी जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा दिया। कई परिवारों में बच्चे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और श्रम शक्ति के रूप में देखे जाते रहे, जिससे परिवार का आकार बड़ा होता गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनसंख्या वृद्धि का प्रभाव केवल लोगों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, जल, खाद्यान्न, ऊर्जा, परिवहन और पर्यावरण पर पड़ता है। यदि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास से अधिक तेज हो जाए तो विकास योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक समान रूप से नहीं पहुंच पाता। सरकारें सड़क, अस्पताल, विद्यालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करती हैं, लेकिन बढ़ती आबादी के कारण उनकी मांग लगातार बढ़ती रहती है। परिणामस्वरूप संसाधनों पर दबाव बढ़ जाता है और विकास का लाभ अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि जनसंख्या का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी देश की आबादी में युवाओं का अनुपात अधिक हो तो वह देश आर्थिक दृष्टि से तेजी से आगे बढ़ सकता है। भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी कार्यशील आयु वर्ग में है। यही भारत का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय लाभांश है। यदि इन युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलें तो भारत विश्व अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी कार्यशक्ति बन सकता है। यही कारण है कि आज अनेक विकसित देश भारतीय इंजीनियरों, डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य पेशेवरों की ओर उम्मीद से देख रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दुनिया का जनसांख्यिकीय परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जापान, दक्षिण कोरिया, इटली, जर्मनी और चीन जैसे देशों में जन्मदर लगातार घट रही है। कई देशों में स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां जनसंख्या को बनाए रखने के लिए सरकारें लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने पर आर्थिक प्रोत्साहन, कर में छूट, नकद सहायता, मुफ्त शिक्षा और अन्य सुविधाएं दे रही हैं। इन देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती वृद्ध होती आबादी और घटती कार्यशील जनसंख्या है। कम युवा होने के कारण उद्योगों, अस्पतालों और सेवा क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी महसूस होने लगी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के लिए यह स्थिति एक महत्वपूर्ण सीख है। लंबे समय तक "हम दो हमारे दो" का संदेश सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया और इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया। आज देश की प्रजनन दर काफी कम हो चुकी है। इसलिए भविष्य की नीतियां बनाते समय केवल जनसंख्या घटाने पर जोर देना उचित नहीं होगा। यदि जन्मदर लगातार बहुत नीचे चली गई तो आने वाले दशकों में भारत भी वृद्ध होती आबादी की चुनौती का सामना कर सकता है। विशेषज्ञ पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि संतुलन नहीं बनाया गया तो भारत अमीर बनने से पहले बूढ़ा हो सकता है। इसका अर्थ यह है कि आर्थिक विकास की गति उस स्तर तक पहुंचने से पहले ही बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ने लगेगी और कार्यशील आबादी का अनुपात घट जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए अब आवश्यकता संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश में ऐसी नीतियां बननी चाहिए जो छोटे और जिम्मेदार परिवार को प्रोत्साहित करें, लेकिन साथ ही अत्यधिक गिरती जन्मदर को भी रोका जा सके। परिवार नियोजन का उद्देश्य केवल बच्चों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम परिवार बनाना होना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को बेहतर पोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना ही वास्तविक जनसंख्या नीति की सफलता होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल आबादी नहीं, बल्कि मानव संसाधन के प्रभावी उपयोग की है। यदि करोड़ों युवा बेरोजगार रहेंगे तो जनसांख्यिकीय लाभांश बोझ बन जाएगा। वहीं यदि उन्हें आधुनिक तकनीक, डिजिटल कौशल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विनिर्माण, अनुसंधान, कृषि और सेवा क्षेत्रों में अवसर मिलेंगे तो यही युवा भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बना सकते हैं। आने वाले वर्षों में वैश्विक श्रम बाजार में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी क्योंकि विकसित देशों में कार्यबल लगातार घट रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनसंख्या और पर्यावरण के बीच भी गहरा संबंध है। बढ़ती आबादी के कारण जल संकट, प्रदूषण, जंगलों की कटाई, कृषि भूमि पर दबाव और ऊर्जा की मांग बढ़ती है। इसलिए सतत विकास की अवधारणा के अनुरूप ऐसी विकास नीतियां आवश्यक हैं जिनमें संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रह सके। जनसंख्या प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व जनसंख्या दिवस का वास्तविक संदेश यही है कि केवल लोगों की संख्या बढ़ना या घटना ही महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समान अवसर उपलब्ध हों। भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति है। यदि यह शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ी तो देश आर्थिक महाशक्ति बनने की क्षमता रखता है। लेकिन यदि शिक्षा, रोजगार और संसाधनों का संतुलित विकास नहीं हुआ तो यही अवसर चुनौती में बदल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता भय या उत्साह में किसी एक छोर पर खड़े होने की नहीं, बल्कि संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की है। जनसंख्या न तो केवल समस्या है और न ही केवल संपत्ति। वह एक ऐसी शक्ति है जिसे सही नीति, दूरदर्शी योजना और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार बनाया जा सकता है। विश्व जनसंख्या दिवस हमें यही संदेश देता है कि भविष्य की सफलता केवल जनसंख्या की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, उत्पादकता और संतुलित विकास से तय होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:27:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>हर बच्चा भविष्य का पृष्ठ : लेकिन हम पन्ने भर रहे हैं या लिख रहे हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर जन्म नई संभावना लेकर आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हर संभावना उपलब्धि में नहीं बदलती। यही प्रश्न विश्व जनसंख्या दिवस हमारे सामने खड़ा करता है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य जनगणना की तालिकाओं में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन चेहरों में लिखा होता है जिन्हें हम अक्सर केवल संख्या मान लेते हैं। एक नवजात शिशु किसी परिवार का नया सदस्य भर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के भविष्य का पहला पृष्ठ होता है। विडंबना यह है कि उस पृष्ठ पर भविष्य लिखने की तैयारी किए बिना हम हर वर्ष नई प्रतियां जोड़ते जा रहे हैं। इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं कि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183101/every-child-is-a-page-of-the-future-but-we"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/world-population-day.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर जन्म नई संभावना लेकर आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हर संभावना उपलब्धि में नहीं बदलती। यही प्रश्न विश्व जनसंख्या दिवस हमारे सामने खड़ा करता है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य जनगणना की तालिकाओं में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन चेहरों में लिखा होता है जिन्हें हम अक्सर केवल संख्या मान लेते हैं। एक नवजात शिशु किसी परिवार का नया सदस्य भर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के भविष्य का पहला पृष्ठ होता है। विडंबना यह है कि उस पृष्ठ पर भविष्य लिखने की तैयारी किए बिना हम हर वर्ष नई प्रतियां जोड़ते जा रहे हैं। इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं कि भारत में कितने लोग हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि उनमें कितनी संभावनाओं को अवसर मिला और कितनों को परिस्थितियों के भरोसे छोड़ दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत </span>1.47 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब से अधिक लोगों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा जनसमूह है। इसे केवल भीड़ कहना उतनी ही बड़ी भूल होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी बिना तैयारी के इसे शक्ति मान लेना। संख्या न वरदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अभिशाप</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह केवल संभावनाओं का भंडार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका मूल्य इस बात से तय होता है कि राष्ट्र उसकी ऊर्जा को किस दिशा में ले जाता है। भारत की लगभग </span>65 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत आबादी </span>35 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष से कम आयु की है। अनेक विकसित देश घटती जन्म दर और वृद्ध होती आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि हमारे पास युवा शक्ति का अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इतिहास बार-बार नहीं देता। किंतु अवसर तभी उपलब्धि बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसके पीछे दूरदर्शी व्यवस्था हो। केवल युवाओं की संख्या से राष्ट्र समृद्ध नहीं होता</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल और रोजगार का सुदृढ़ आधार भी उतना ही आवश्यक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं सबसे बड़ी विडंबना है। युवाओं की ऊर्जा प्रचुर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसे दिशा देने वाली व्यवस्था अब भी अपेक्षाओं से पीछे है। शिक्षा डिग्री दे रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दक्षता नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर समान नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अवसर उसी गति से नहीं। परिणामस्वरूप युवा निराशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">असुरक्षा और दिशाहीनता के बीच अपने महत्वपूर्ण वर्ष गंवा देते हैं। यह केवल व्यक्तिगत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय हानि है। जिस ऊर्जा से नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और सामाजिक परिवर्तन संभव थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पलायन और असंतोष में बदल जाती है। जनसंख्या का वास्तविक संकट यहीं से प्रारंभ होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय है कि बहस जनसंख्या नियंत्रण से आगे बढ़कर जनसंख्या की गुणवत्ता पर केंद्रित हो। किसी बच्चे का जन्म केवल जैविक घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। उसे स्वस्थ शरीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुणवत्तापूर्ण शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक कौशल और सम्मानजनक अवसर देना ही वास्तविक परिवार नियोजन है। शहरों में महंगाई और करियर की चुनौतियों ने बच्चों का पालन-पोषण महंगी जिम्मेदारी बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं गांवों में अवसरों का अभाव युवाओं को शहरों की ओर धकेल रहा है। परिणामस्वरूप गांव खाली हो रहे हैं और शहर अनियोजित विस्तार व भीड़ के दबाव से जूझ रहे हैं। इसलिए जनसंख्या नीति का संबंध केवल जन्म दर से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और संतुलित क्षेत्रीय विकास से होना चाहिए। तभी हर नया नागरिक देश की संपत्ति बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बोझ नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का युवा जीवित रहने के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सम्मानजनक और सार्थक जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है। उसकी आकांक्षाओं में अच्छी नौकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित भविष्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ पर्यावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समान अवसर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार और व्यक्तिगत विकास शामिल हैं। यदि ये अपेक्षाएं अधूरी रहीं तो आने वाले वर्षों में जन्म दर स्वाभाविक रूप से प्रभावित होगी और हमारे सामने भी वही स्थिति आ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आज कई विकसित राष्ट्र गुजर रहे हैं। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस का संदेश परिवार नियोजन तक सीमित नहीं रह सकता। इसे युवा सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लैंगिक समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सुरक्षा और सतत विकास के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ना होगा। जब प्रत्येक युवा अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी जनसंख्या राष्ट्रीय संपदा बनेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और संसाधनों को लेकर हमारी सोच भी बदलनी होगी। यह कहना आसान है कि बढ़ती आबादी संसाधनों पर दबाव बढ़ा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु यह आधा सत्य है। वास्तविक प्रश्न यह है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कैसे हो रहा है। असंतुलित उपभोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपव्यय और विकास की असमान शैली कई बार जनसंख्या से अधिक नुकसान पहुंचाती है। यदि तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवीकरणीय ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट शहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक कृषि और संसाधनों के विवेकपूर्ण प्रबंधन को प्राथमिकता मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बड़ी आबादी भी सतत विकास की साझेदार बन सकती है। केवल जनसंख्या को दोष देकर नीतिगत कमजोरियों और सामाजिक जिम्मेदारियों से मुक्ति नहीं मिल सकती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत जैसा विविधताओं से भरा देश एक जैसी नीति से नहीं चल सकता। अलग-अलग राज्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृतियों और आर्थिक परिस्थितियों की अपनी चुनौतियां हैं। इसलिए जनसंख्या प्रबंधन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लचीला होना चाहिए। शिक्षा में निवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला सशक्तिकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौशल विकास और रोजगार सृजन—यही भविष्य के भारत के आधार स्तंभ हैं। इतिहास साक्षी है कि जब भी भारतीय मानव संसाधन को सही दिशा मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने असंभव को संभव बनाया। स्वतंत्रता आंदोलन से सूचना प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप क्रांति तक हर उपलब्धि के पीछे संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशिक्षित और प्रेरित मानव शक्ति ही निर्णायक रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व जनसंख्या दिवस हमें नई दृष्टि अपनाने का अवसर देता है। हमें लोगों की गिनती से आगे बढ़कर उनमें छिपी संभावनाओं को पहचानना होगा। देश की सबसे बड़ी पूंजी उसके खनिज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमारतें या बजट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके नागरिक होते हैं। यदि हर बच्चे की शिक्षा में निवेश होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर युवा को अवसर मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर महिला सुरक्षित और सशक्त होगी तथा हर क्षेत्र संतुलित विकास का सहभागी बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत केवल दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सक्षम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्ध और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में पहचाना जाएगा। तब विश्व जनसंख्या दिवस केवल औपचारिक तिथि नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बनेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें हर जन्म को बढ़ती संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की संभावना माना जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:23:39 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों की चहकती ज़िंदगी पर पड़ रहा विकास का काला साया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब किसी शहर से बच्चों की खिलखिलाहट गुम होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ लेना चाहिए कि वहां विकास ने दिशा खो दी है। किसी समाज की असली समृद्धि उसकी ऊँची इमारतों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के हिस्से आए खुले आसमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली और सुरक्षित खेल-स्थलों में दिखाई देती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्भाग्य से शहर जितनी तेजी से फैल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक पार्क और खेल के मैदान उतनी ही तेजी से सिमट रहे हैं। जहां कभी नंगे पांव दौड़ता बचपन सपने संजोता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां आज सूखी जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटे झूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंग लगी फिसलपट्टियां और कंक्रीट का</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183099/the-dark-shadow-of-development-is-falling-on-the-vibrant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब किसी शहर से बच्चों की खिलखिलाहट गुम होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ लेना चाहिए कि वहां विकास ने दिशा खो दी है। किसी समाज की असली समृद्धि उसकी ऊँची इमारतों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के हिस्से आए खुले आसमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली और सुरक्षित खेल-स्थलों में दिखाई देती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दुर्भाग्य से शहर जितनी तेजी से फैल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक पार्क और खेल के मैदान उतनी ही तेजी से सिमट रहे हैं। जहां कभी नंगे पांव दौड़ता बचपन सपने संजोता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां आज सूखी जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटे झूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंग लगी फिसलपट्टियां और कंक्रीट का फैलता साम्राज्य खड़ा है। यह केवल सौंदर्य का ह्रास नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों पर मौन प्रहार है। यदि बचपन से खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति और खुलापन छीन लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसकी कीमत केवल बच्चे नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा समाज चुकाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कंक्रीट की हर नई दीवार हरियाली की कीमत पर खड़ी होती है। बीते दो दशकों में अनियोजित शहरीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक उदासीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भ्रष्टाचार और नागरिक चुप्पी ने सार्वजनिक पार्कों को उपेक्षित कर दिया। कई महानगरों में प्रति बच्चे उपलब्ध खेल क्षेत्र आधे से भी कम रह गया है। नतीजा—बचपन स्क्रीन में कैद है। शारीरिक गतिविधियां घटने से मोटापा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानसिक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अकेलापन और व्यवहारगत समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रकृति से कटता बचपन तकनीक में दक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शरीर से दुर्बल और मन से असंतुलित होता जा रहा है। यह समाज के भविष्य की गंभीर चेतावनी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बचपन की पहली पाठशाला किसी इमारत में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुले आकाश के नीचे बसती है। पार्क केवल खेल का मैदान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला हैं। यहीं बच्चे मित्रता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हार-जीत का संतुलन और प्रकृति से रिश्ता सीखते हैं। मिट्टी की सोंधी गंध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ों की छांव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पक्षियों का कलरव और साथियों का साथ वे संस्कार देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कोई स्क्रीन या बंद कमरा नहीं दे सकता। पार्क खत्म होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बचपन का यह अध्याय अधूरा रह जाता है। सबसे अधिक मार सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके पास निजी क्लब या महंगे प्ले जोन का विकल्प नहीं होता। उनके बच्चे गलियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छतों और व्यस्त सड़कों पर खेलने को विवश हैं। खेल का अधिकार भी अब आर्थिक असमानता की भेंट चढ़ रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे भयावह स्थिति तब होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब बच्चों के लिए बनी जगहें ही असुरक्षित हो जाएं। जो पार्क बचे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है। रखरखाव का बजट आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर उसका बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार या अधूरे कार्यों में सिमट जाता है। टूटे झूले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जंग लगी फिसलपट्टियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गंदे पानी के गड्ढे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखी घास और कचरा अब सामान्य दृश्य हैं। अनेक स्थानों पर अतिक्रमण ने पार्कों की जमीन निगल ली है। कहीं राजनीतिक आयोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं अस्थायी निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो रात होते ही कई पार्क असामाजिक तत्वों और शराबियों के अड्डे बन जाते हैं। नतीजा यह है कि जहां बच्चों को सबसे सुरक्षित होना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं जाने से परिवार कतराने लगे हैं। किसी संवेदनशील समाज के लिए इससे बड़ी विडंबना क्या होगी</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर उजड़ा पार्क योजनाओं नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदार इच्छाशक्ति की मांग करता है। यह संकट असाध्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकारें इसे सौंदर्यीकरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य का प्रश्न मानें। प्रत्येक शहर में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क पुनर्जागरण मिशन"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत पुराने पार्कों का वैज्ञानिक पुनर्विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित खेल उपकरण और नियमित रखरखाव की जवाबदेही तय हो। हर नए आवासीय प्रकल्प में </span>18 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत क्षेत्र हरित पार्क और खेल क्षेत्र के लिए कानूनी रूप से आरक्षित हो। डिजिटल निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता से सुनिश्चित किया जाए कि पार्कों का बजट कागजों पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धरातल पर दिखे। विकास की हर योजना में बच्चों का खेल क्षेत्र अंतिम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहला अधिकार होना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें अकेले बचपन नहीं बचा सकतीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज को भी आगे आना होगा। किसी मोहल्ले का पार्क तभी जीवित रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लोग उसे अपना मानें। स्थानीय निवासी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वयंसेवी संस्थाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरिष्ठ नागरिक और युवा मिलकर पार्कों को गोद लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वृक्षारोपण और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएं। शिक्षा व्यवस्था भी सहभागी बने। विद्यालयों में प्रत्येक सप्ताह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>"<span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क डे"</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बच्चे खेल के साथ प्रकृति को समझें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण संरक्षण सीखें और खुली हवा में सामूहिक गतिविधियों का अनुभव करें। अभिभावकों को भी समझना होगा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल कोचिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंक और डिजिटल उपकरणों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि खुले मैदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिट्टी की सोंधी खुशबू और प्रकृति के सान्निध्य से भी होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कानून तभी सार्थक होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वे कागज से उतरकर जनजीवन की रक्षा करें। सार्वजनिक पार्कों को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शून्य सहनशीलता क्षेत्र</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषित किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां अतिक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक आयोजन और असामाजिक गतिविधियों की कोई जगह न हो। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठोर दंड और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। नगर निकायों का निरीक्षण औपचारिकता न रहे</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रत्येक पार्क की स्थिति सार्वजनिक पोर्टल पर हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि नागरिक भी निगरानी कर सकें। प्रशासन की दृढ़ता और समाज की सजगता से ही पार्कों की गरिमा लौटेगी। अन्यथा विकास की चकाचौंध में बचपन का उजाला खोता रहेगा और हम आंकड़ों में प्रगति तलाशते रह जाएंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब बच्चों से खुला आकाश छिनने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ लीजिए समाज का भविष्य सिमट रहा है। जिसने खुले मैदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ों की छांव और प्रकृति की गोद में जीवन नहीं सीखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदनशील समाज की अपेक्षा कैसे की जा सकती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क विलासिता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बच्चे का मौलिक अधिकार हैं। यदि आज हम उसके हिस्से का आकाश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली और खेल छीन रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल उससे रचनात्मकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदनशीलता और सामाजिक संतुलन की अपेक्षा का नैतिक अधिकार भी खो देंगे। इसलिए सार्वजनिक पार्कों की रक्षा केवल पर्यावरण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। जहां पार्कों में बचपन की हंसी गूंजती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं सशक्त भविष्य जन्म लेता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:19:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान की समीक्षा बैठक सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर-</strong> जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (जुलाई-2026) की प्रथम जनपद स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहे। बैठक में 1 जुलाई से अब तक विभिन्न विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की गई और अभियान को अधिक प्रभावी एवं परिणाममुखी बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने सभी अधिशासी अधिकारियों एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को संचारी रोगों की रोकथाम के लिए फॉगिंग एवं एंटी लार्वा छिड़काव को नियमित,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183046/review-meeting-of-communicable-disease-control-and-dastak-campaign-concluded"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001069393.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर-</strong> जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (जुलाई-2026) की प्रथम जनपद स्तरीय साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार भी उपस्थित रहे। बैठक में 1 जुलाई से अब तक विभिन्न विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों की विभागवार समीक्षा की गई और अभियान को अधिक प्रभावी एवं परिणाममुखी बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने सभी अधिशासी अधिकारियों एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को संचारी रोगों की रोकथाम के लिए फॉगिंग एवं एंटी लार्वा छिड़काव को नियमित, व्यापक और प्रभावी ढंग से कराने के सख्त निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अभियान की सभी गतिविधियां विभागीय समन्वय के साथ समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के साथ पूरी की जाएं।ईशा प्रिया ने चिकित्सा अधीक्षकों, एमओआईसी एवं चिकित्सकों को अपने दायित्वों का संवेदनशीलता एवं पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करने को कहा। उन्होंने चिकित्सालयों में नियमित साफ-सफाई, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी चिकित्सीय सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने जिला कृषि अधिकारी को चूहों एवं छछूंदरों से फैलने वाले रोगों के प्रति किसानों को जागरूक करने, जबकि मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को सुअर पालकों का संवेदीकरण कराने,  सुअर बाड़ों की नियमित सफाई और एईएस/जेई जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।इसके अलावा, सैम एवं माम (SAM/MAM) बच्चों के समयबद्ध चिन्हांकन, उन्हें पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित कृषि, पशुपालन, नगर पालिका, नगर पंचायत और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/183046/review-meeting-of-communicable-disease-control-and-dastak-campaign-concluded</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:36:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निःशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर मे 230 लोगों को चश्मे व 300 लोगों को वितरित किए गए छाते</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> स्वर्गीय राजेश दूबे जी की पुण्यतिथि के अवसर पर गांधीनगर स्थित एस.आर.डी. हॉस्पिटल में गुरुवार को विशाल निःशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किडनी, लीवर, रक्त, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, ब्लड प्रेशर तथा थायराइड की निःशुल्क जांच की गई। इसके साथ ही नेत्र रोगियों की जांच कर 230 लोगों को निःशुल्क चश्मे तथा बरसात से बचाव हेतु 300 छाते वितरित किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर का शुभारम्भ एस.पी. ग्रुप के निदेशक आशीष दूबे एवं एस.आर.डी. हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. रोहन दूबे ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने स्व. राजेश दूबे जी के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183040/spectacles-were-distributed-to-230-people-and-umbrellas-to-300"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260709-wa0087.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> स्वर्गीय राजेश दूबे जी की पुण्यतिथि के अवसर पर गांधीनगर स्थित एस.आर.डी. हॉस्पिटल में गुरुवार को विशाल निःशुल्क चिकित्सा एवं जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किडनी, लीवर, रक्त, कोलेस्ट्रॉल, शुगर, ब्लड प्रेशर तथा थायराइड की निःशुल्क जांच की गई। इसके साथ ही नेत्र रोगियों की जांच कर 230 लोगों को निःशुल्क चश्मे तथा बरसात से बचाव हेतु 300 छाते वितरित किए गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर का शुभारम्भ एस.पी. ग्रुप के निदेशक आशीष दूबे एवं एस.आर.डी. हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. रोहन दूबे ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने स्व. राजेश दूबे जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. राजेश दूबे का जीवन समाज सेवा, सरलता और आत्मीयता का प्रतीक था तथा उनकी स्मृति में आयोजित यह शिविर जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिविर में कुल 1360 मरीजों ने विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क परामर्श प्राप्त किया। इनमें जनरल फिजीशियन डॉ. अश्विनी सिंह, डॉ. अभिनव मिश्र, डॉ. हुसैन, महिला रोग विशेषज्ञ, न्यूरो फिजीशियन डॉ. के.के. दूबे, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ सहित अन्य चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इस अवसर पर एस.पी. ग्रुप के निदेशक अखिलेश दूबे, धीरेंद्र शुक्ल, विनय शुक्ल, सत्यदेव शुक्ल, भोलानाथ चौधरी, कृष्णमणि त्रिपाठी, ओमप्रकाश दूबे, मनीष सिंह, देवव्रत शुक्ल, विष्णु शुक्ल, रामचन्द्र यादव, ओमप्रकाश आर्या, गरुणध्वज पाण्डेय, प्रदीप दूबे, डॉ. के.के. सिंह, एम.पी. दूबे, गोपेश्वर त्रिपाठी, कैलाशनाथ दूबे, सुशील मिश्र, अनुराग शुक्ल, प्रभुप्रीत सिंह, संतोष दूबे, अभिषेक त्रिपाठी, सुनील सिंह, वीरेन्द्र उर्फ बंकू, रामानन्द उर्फ नन्हे सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में अखिलेश दूबे ने सभी चिकित्सकों, सहयोगियों एवं उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुफ्त दवा योजना पर संकट नहीं समाधान की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों मरीजों की उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है। हर दिन हजारों मरीज दूर-दराज के गांवों और कस्बों से यहां इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज के साथ सरकार की निशुल्क दवा योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन जब इलाज के बाद डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं होतीं तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। हाल के दिनों में जीवनरक्षक दवाओं सहित बड़ी संख्या में दवाओं की अनुपलब्धता की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182978/free-medicine-scheme-is-not-a-crisis-but-a-solution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/medicines_1534214900_1732846876853.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लाखों मरीजों की उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है। हर दिन हजारों मरीज दूर-दराज के गांवों और कस्बों से यहां इस विश्वास के साथ पहुंचते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज के साथ सरकार की निशुल्क दवा योजना का लाभ मिलेगा। लेकिन जब इलाज के बाद डॉक्टर की लिखी दवाएं अस्पताल के काउंटर पर उपलब्ध नहीं होतीं तो मरीज और उसके परिजनों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। हाल के दिनों में जीवनरक्षक दवाओं सहित बड़ी संख्या में दवाओं की अनुपलब्धता की खबरें सामने आई हैं। यह स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय है और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गरीब और मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहता है। निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। विशेष रूप से कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए नियमित दवाएं जीवन का आधार होती हैं। यदि ऐसी दवाएं समय पर नहीं मिलें तो बीमारी बढ़ सकती है और आर्थिक बोझ भी कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि निशुल्क दवा योजना को राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में गिना जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयपुर के एसएमएस अस्पताल में जिन मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भेजा गया, कई दिनों बाद आने के लिए कहा गया या फिर बाहर से दवा खरीदने की सलाह दी गई, उनकी परेशानी को सहज रूप से समझा जा सकता है। जो मरीज सैकड़ों किलोमीटर दूर से किराया खर्च करके अस्पताल पहुंचता है, उसके लिए केवल दवा ही नहीं बल्कि दोबारा आने-जाने का खर्च भी बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे मरीजों के सामने यह प्रश्न खड़ा हो जाता है कि वह इलाज कराए या परिवार का खर्च चलाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी सच है कि यह समस्या केवल जयपुर तक सीमित नहीं दिखाई देती। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में समय-समय पर कुछ दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं सप्लाई में देरी होती है तो कहीं खरीद प्रक्रिया पूरी होने तक मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। इससे सरकार की अच्छी योजनाओं की छवि प्रभावित होती है। जनता यह नहीं देखती कि कमी किस स्तर पर हुई है। उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि अस्पताल पहुंचने पर दवा मिलनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हालांकि इस पूरे विषय को केवल आलोचना के दृष्टिकोण से देखना भी उचित नहीं होगा। राजस्थान सरकार ने पिछले कई वर्षों में चिकित्सा सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार किया है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, जिला अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण, मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और निशुल्क जांच योजना जैसी पहल ने लाखों गरीब परिवारों को राहत दी है। यदि ये योजनाएं नहीं होतीं तो गरीब मरीजों का इलाज और भी कठिन हो जाता। इसलिए यह कहना उचित होगा कि योजना में कमी नहीं है बल्कि उसके क्रियान्वयन के कुछ हिस्सों में सुधार की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अस्पताल प्रशासन का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि कुछ दवाएं राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड से उपलब्ध नहीं हो पातीं तो स्थानीय स्तर पर खरीद की जाती है। कई बार आपूर्ति करने वाली कंपनियों की ओर से विलंब होने के कारण अस्थायी समस्या उत्पन्न हो जाती है। यदि वास्तव में ऐसा है तो इसका समाधान भी प्रशासनिक स्तर पर संभव है। दवाओं की उपलब्धता का नियमित आकलन, समय रहते नई खरीद प्रक्रिया और वैकल्पिक व्यवस्था से इस प्रकार की कठिनाइयों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य व्यवस्था जितनी बड़ी होती है, चुनौतियां भी उतनी ही अधिक होती हैं। राजस्थान जैसे विशाल राज्य में करोड़ों लोगों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आसान कार्य नहीं है। दवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और कई बार अनुमान से अधिक मरीज आने के कारण स्टॉक जल्दी समाप्त हो जाता है। इसलिए इस समस्या को केवल लापरवाही कह देना भी पूरी तस्वीर नहीं दर्शाता। आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग, अस्पताल प्रशासन और दवा आपूर्ति एजेंसियां मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करें जिससे आवश्यक दवाओं का भंडार हमेशा सुरक्षित रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तकनीक का बेहतर उपयोग भी इस दिशा में बड़ा समाधान बन सकता है। यदि सभी सरकारी अस्पतालों में दवाओं का ऑनलाइन स्टॉक रियल टाइम अपडेट हो तो यह पहले ही पता चल जाएगा कि कौन सी दवा कितनी मात्रा में बची है और कब नई खेप की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति में होने वाली देरी को काफी हद तक रोका जा सकता है। मरीजों को भी मोबाइल या हेल्पलाइन के माध्यम से यह जानकारी मिल सके कि संबंधित दवा किस अस्पताल में उपलब्ध है। इससे उन्हें अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">साथ ही अस्पतालों में मरीजों के साथ संवाद की व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए। यदि किसी दवा की अस्थायी कमी है तो मरीज को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि दवा कब तक उपलब्ध होगी या उसका सुरक्षित विकल्प क्या है। कई बार जानकारी के अभाव में मरीज अधिक परेशान हो जाता है। संवेदनशील व्यवहार और स्पष्ट सूचना भी आधी समस्या का समाधान कर देती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस विषय में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर समस्याओं की जानकारी सरकार तक पहुंचानी चाहिए। जहां भी दवा की कमी हो, वहां तत्काल समाधान के लिए प्रयास होने चाहिए। स्वास्थ्य सेवा राजनीति का नहीं बल्कि मानवता का विषय है। इसलिए सभी पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरकार के सामने यह अवसर भी है कि वह इस घटना को एक चेतावनी के रूप में लेकर पूरे प्रदेश में दवा आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करे। जिन अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की कमी है वहां तत्काल अतिरिक्त स्टॉक भेजा जाए। खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा तेज बनाया जाए। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है, वहां जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। इससे जनता का विश्वास और मजबूत होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः किसी भी कल्याणकारी सरकार की पहचान केवल योजनाएं बनाने से नहीं बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने से होती है। राजस्थान की निशुल्क दवा योजना लाखों लोगों के लिए वरदान रही है और इसे और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। यदि दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए तो गरीब मरीजों को न तो जेब से खर्च करना पड़ेगा और न ही इलाज अधूरा छोड़ने की मजबूरी होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक सकारात्मक कदम उठाए हैं और उनका लाभ भी समाज को मिला है। अब आवश्यकता इस बात की है कि दवा आपूर्ति से जुड़ी कमियों को शीघ्र दूर किया जाए ताकि कोई भी मरीज केवल दवा की अनुपलब्धता के कारण पीड़ा न झेले। एक संवेदनशील और उत्तरदायी स्वास्थ्य व्यवस्था ही विकसित राजस्थान की पहचान बनेगी, जहां इलाज के साथ भरोसा भी हर मरीज को समान रूप से प्राप्त हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 21:22:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनान मंडी के मुख्य द्वार पर जलभराव व गंदगी, व्यवस्था पर उठे सवाल मच्छरों का प्रकोप </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के नगर पंचायत बभनान के वार्ड संख्या 3 पटेल नगर स्थित बभनान–गौर मार्ग पर बनी नवीन सब्जी मंडी के मुख्य प्रवेश द्वार पर जलभराव और गंदगी की गंभीर समस्या सामने आई है। मंडी जैसे व्यस्त स्थल के गेट पर बदहाल स्थिति से राहगीरों, ग्राहकों और व्यापारियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">मंडी के मुख्य गेट के ठीक सामने सड़क पर लंबे समय से पानी भरा हुआ है, जिससे वहां कीचड़युक्त हालात बन गए हैं। लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182567/questions-raised-on-waterlogging-and-dirt-system-at-the-main"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260702-wa0084.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के नगर पंचायत बभनान के वार्ड संख्या 3 पटेल नगर स्थित बभनान–गौर मार्ग पर बनी नवीन सब्जी मंडी के मुख्य प्रवेश द्वार पर जलभराव और गंदगी की गंभीर समस्या सामने आई है। मंडी जैसे व्यस्त स्थल के गेट पर बदहाल स्थिति से राहगीरों, ग्राहकों और व्यापारियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंडी के मुख्य गेट के ठीक सामने सड़क पर लंबे समय से पानी भरा हुआ है, जिससे वहां कीचड़युक्त हालात बन गए हैं। लोगों को गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता जोखिम भरा हो गया है, जहां फिसलने की आशंका बनी रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सड़क किनारे कूड़े का ढेर और जलभराव की स्थिति नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। गंदगी के कारण आसपास दुर्गंध फैल रही है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही मंडी में आने वाले ग्राहकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन शिकायतों के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि नियमित सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से स्थिति और बिगड़ती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंडी में दुकान लगाने वाले व्यापारियों ने बताया कि गंदगी और जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इससे उनके व्यवसाय पर भी असर पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">वहीं, क्षेत्रीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बरसात के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में अधिशासी अधिकारी (ईओ) कीर्ति सिंह ने बताया कि नाला खुदाई का कार्य कराया जा रहा है और वर्तमान में मिट्टी व पत्थर निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को मौके पर भेजकर स्थिति का निरीक्षण कराया जा रहा है और शीघ्र ही सड़क को समतल कराकर जलभराव की समस्या दूर कर दी जाएगी। कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं, जिन्हें जल्द ठीक कर लिया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिलहाल स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से मांग की है कि समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि मंडी परिसर में स्वच्छता और सुचारु आवागमन सुनिश्चित हो सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:28:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉक्टर डे: सफेद कोट में भगवान, धड़कनों के रखवाले को हजार सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182495/doctors-day-a-thousand-salutes-to-the-god-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया। राजनीति में आने के बाद भी वो रोज सुबह 4 बजे उठकर मरीज देखते थे। उनके लिए मरीज भगवान था और सेवा धर्म। इसी सोच को सलाम करने के लिए 1991 से 1 जुलाई को डॉक्टर डे घोषित हुआ। सफेद कोट के पीछे छुपी जिंदगी</p>
<p><br />हम डॉक्टर को सिर्फ OPD में 5 मिनट देखते हैं। पर उसके पीछे क्या है? नींद की कुर्बानी: 36 घंटे की ड्यूटी, इमरजेंसी कॉल, रात 2 बजे उठकर ICU दौड़ना। त्योहार, जन्मदिन, शादी सब हॉस्पिटल की ड्यूटी के आगे सेकेंड पर आ जाता है।</p>
<p><br />दिमाग का बोझ: एक गलत दवा, एक छूटा हुआ लक्षण, और किसी की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। इसलिए हर केस में 100% दिमाग लगाना पड़ता है। डिप्रेशन और बर्नआउट डॉक्टरों में सबसे ज्यादा है।</p>
<p><br />जोखिम उठाकर सेवा: कोविड-19 में PPE किट पहनकर 12 घंटे काम करना, संक्रामक बीमारियों के बीच खड़े रहना, कभी-कभी मरीजों के परिजनों का गुस्सा झेलना। फिर भी वो भागते नहीं हैं। यही है मानव सेवा। किताबों से नहीं, जिगर से की जाने वाली सेवा। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो उम्मीद देते हैं। गांव का डॉक्टर : जहां MRI-CT नहीं, वहां स्टेथोस्कोप से बीमारी पकड़ लेता है। 50 रुपये फीस में 1 घंटे समझाता है। सर्जन: 8 घंटे टेबल पर झुका रहता है, ताकि किसी और को जिंदगी मिल जाए। बाल रोग विशेषज्ञ : रोते हुए बच्चे को चॉकलेट देकर इंजेक्शन लगाता है, और मां को हिम्मत देता है।</p>
<p><br />ग्रामीण MBBS डॉक्टर: बाढ़, महामारी, एक्सीडेंट में सबसे पहले वही पहुंचता है, एंबुलेंस से पहले। कोविड से लेकर डेंगू, हार्ट अटैक से लेकर डिलीवरी तक, हर संकट में सबसे आगे वो सफेद कोट ही खड़ा मिला। डॉक्टर भगवान नहीं हैं। वो इंसान हैं। उनसे गलती हो सकती है, वो थक सकते हैं। पर इरादा उनका हमेशा सेवा का ही होता है। भरोसा रखिए, सवाल पूछिए : गूगल डॉक्टर से पहले असली डॉक्टर की सुनिए। इज्जत दीजिए: इमरजेंसी में गाली की जगह धन्यवाद दीजिए। वो भी आपके जैसा इंसान है। सेल्फ-केयर : डॉक्टर को भी आराम, सम्मान और सुरक्षित माहौल चाहिए। हिंसा से उनका मनोबल टूटता है, इलाज नहीं सुधरता। निष्कर्ष: हजार सलाम कम हैं। डॉक्टर वो पुल है जो 'बीमारी' और 'जिंदगी' के बीच बना है। वो रात-रात भर जागकर हमारे अपनों की सांसें गिनते हैं। फीस लेते हैं, पर कई बार उम्मीद फ्री में दे देते हैं। इस 1 जुलाई को अपने फैमिली डॉक्टर, अपने शहर के उस सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर, या उस जूनियर रेजिडेंट को एक मैसेज कर दीजिए। कहिए: "डॉक्टर साहब, आपकी मानव सेवा को हजार सलाम।" क्योंकि जब सब थक जाते हैं, तब भी धड़कन चलती रहती है। और उस धड़कन को चलाने वाला सफेद कोट होता है। लेकिन हम इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते कि चिकित्सा सेवा का व्यवसायीकरण हो चुका है और आम जनता का कहीं कहीं शोषण भी हो रहा है। आज इलाज मानव सेवा न रहकर बेहद महंगा व्यापार बन चुका है। अत्यधिक व्यवसायीकरण के समय में आज कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम लाभ कमाने का केंद्र बन गए हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी जांचें और दवाइयां लिखी जातीं हैं, जिससे आम आदमी बहुत परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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