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                <title>मानसून में फलदार वृक्षों की गुठलियाँ लगाएँ, पर्यावरण की सुरक्षा करें योगेंद्र कुमार सह अधीक्षक तिहाड़ जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182461/plant-kernels-of-fruit-trees-in-monsoon-and-protect-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260627-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्लीः</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की गुठलियाँ और बीज ही लगाए जाएँ। हमने इस विचार को व्यवहार में उतारा और वर्षा ऋतु में बड़ी संख्या में जामुन, आम, इमली, बेर तथा अन्य फलदार वृक्षों की गुठलियाँ बोईं। अगले मानसून तक उनसे लगभग ढाई से तीन फीट ऊँचे स्वस्थ पौधे तैयार हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद हमने इन पौधों का निःशुल्क वितरण शुरू किया और स्वयं भी उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित किया। आज हमारा पौधारोपण अभियान पूरी तरह निःशुल्क है।मैं आप सभी से भी विनम्र आग्रह करता हूँ कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस मानसून में फलों की गुठलियाँ और बीज अवश्य लगाएँ। अगले वर्ष मानसून में तैयार पौधों को किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित करें। बिना किसी बड़े खर्च के हम सभी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।पिछले वर्ष तिहाड़ जेल के बंदियों एवं स्टाफ के सहयोग से हमने बड़ी संख्या में जामुन की गुठलियाँ लगाई थीं, जो आज 2–3 फीट ऊँचे पौधों में विकसित हो चुकी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष मानसून के दौरान दिल्ली सरकार के 'वन महोत्सव' अभियान में हम इन पौधों का निःशुल्क वितरण करेंगे तथा उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित भी करेंगे।फलदार वृक्ष लगाने के अनेक लाभ हैं। ये न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाते हैं, बल्कि फल खाने वाले सुंदर पक्षियों को भी पुनः उनके प्राकृतिक आवास में लौटने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही हमें भी बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के ताज़े और पौष्टिक फल प्राप्त होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त ये वृक्ष प्रदूषण कम करने, वातावरण को शुद्ध रखने तथा भरपूर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।आइए, इस मानसून एक संकल्प लें—हर घर, हर परिवार और हर नागरिक कम से कम एक फलदार वृक्ष की गुठली अवश्य लगाए। यही छोटा-सा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण की नींव बनेगा।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:54:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय वन दिवस: प्रकृति का आभार मानने का वक्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगल की गहराइयों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सूरज की पहली किरण पत्तियों की ओट से छनकर धरती को स्पर्श करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्रकृति एक अनूठा चमत्कार रचती है। हवा में घुलती मिट्टी की सोंधी खुशबू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ों के झुरमुट में गूंजती चिड़ियों की मधुर चहचहाहट और हर कदम पर बिछी हरी चादर—यह वनों का वह जीवंत राग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो धरती को साँस देता है। वन हमारे ग्रह के प्राण हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साँस में शुद्ध ऑक्सीजन का उपहार देते हैं। ये जलवायु को संतुलित करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैव विविधता को आश्रय देते हैं और अनगिनत जीवन को सहारा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150105/international-forest-day-is-a-time-to-thank-nature"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(16)3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगल की गहराइयों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब सूरज की पहली किरण पत्तियों की ओट से छनकर धरती को स्पर्श करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्रकृति एक अनूठा चमत्कार रचती है। हवा में घुलती मिट्टी की सोंधी खुशबू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ों के झुरमुट में गूंजती चिड़ियों की मधुर चहचहाहट और हर कदम पर बिछी हरी चादर—यह वनों का वह जीवंत राग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो धरती को साँस देता है। वन हमारे ग्रह के प्राण हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साँस में शुद्ध ऑक्सीजन का उपहार देते हैं। ये जलवायु को संतुलित करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैव विविधता को आश्रय देते हैं और अनगिनत जीवन को सहारा देते हैं। हर साल </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के रूप में हम इस अनमोल धरोहर को नमन करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और इसे संरक्षित करने की शपथ लेते हैं। इस बार की थीम "वन और भोजन" वनों की उस अनदेखी शक्ति को उजागर करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो खाद्य सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोषण और आजीविका का आधार बनती है। मगर यह सवाल मन को मथ डालता है—क्या हम वास्तव में इस अमूल्य संपदा के मोल को पहचानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या इसे खो देने की दहलीज पर आ खड़े हुए हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वनों का महत्व सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह जीवन का आधार है। वैज्ञानिक दृष्टि से ये पृथ्वी के सबसे बड़े कार्बन अवशोषक हैं। हर साल लगभग </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर ये ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करते हैं। यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक प्राकृतिक कवच है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैव विविधता के संदर्भ में वन एक अनमोल रत्न हैं। अमेज़न वर्षावन की बात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वहाँ </span>16,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक वृक्ष प्रजातियाँ और लाखों जीव-जंतु बसते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह धरती का सबसे जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रकृति की रचनात्मकता का जीता-जागता प्रमाण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वनों का आर्थिक और सामाजिक महत्व भी कम नहीं है। विश्व भर में करीब </span>1.6 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब लोग अपनी आजीविका के लिए वनों पर निर्भर हैं। खासकर आदिवासी समुदायों के लिए जंगल जीवन का आधार हैं। ये उन्हें भोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औषधीय पौधे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लकड़ी और आश्रय देते हैं। भारत के घने जंगलों में बसे आदिवासी आज भी वनों से मिलने वाली जड़ी-बूटियों से अपनी चिकित्सा करते हैं। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वन पर्यटन और लकड़ी आधारित उद्योगों के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं। सच कहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वन केवल हरे-भरे पेड़ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सभ्यता का वह आधार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर हमारा वजूद टिका है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह हरा सपना तेजी से मुरझा रहा है। हर साल </span>13 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन हेक्टेयर जंगल—यानी पुर्तगाल के बराबर क्षेत्र—काट दिया जाता है। शहरीकरण की अंधी दौड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि भूमि का विस्तार और औद्योगिक जरूरतों ने वनों को निगलना शुरू कर दिया है। भारत में भी वन क्षेत्र घट रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालाँकि कुछ प्रयासों से स्थिति सुधरी है। वन कटाई का असर सिर्फ पेड़ों तक सीमित नहीं है। यह मिट्टी के कटाव को बढ़ाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नदियों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को सूखने देता है और बाढ़ जैसी आपदाओं को न्योता देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जैव विविधता पर इसका प्रभाव और भी भयावह है। हर पेड़ के साथ अनगिनत प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं। उदाहरण के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेज़न में वन कटाई के कारण कई दुर्लभ प्रजातियाँ हमेशा के लिए खो गईं। कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि से धरती का तापमान बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ग्लोबल वार्मिंग अब एक दूर की बात नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारी आँखों के सामने की हकीकत है। यह सब उस भविष्य की ओर इशारा करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ जंगल सिर्फ बच्चों की किताबों में रंगीन चित्र बनकर रह जाएँगे। क्या हम सचमुच ऐसी दुनिया चाहते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट से निपटने के लिए दुनिया भर में कदम उठाए जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में वनों के सतत प्रबंधन को प्रमुखता दी गई है। यह लक्ष्य </span>2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक वन क्षेत्र को बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता को बेहतर करने की बात करता है। भारत भी इस दिशा में पीछे नहीं है। "राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम" और "ग्रीन इंडिया मिशन" जैसी योजनाएँ वन क्षेत्र को हरा-भरा करने में जुटी हैं। भारत सरकार ने </span>33% <span lang="hi" xml:lang="hi">भू-भाग को वन क्षेत्र बनाने का संकल्प लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो एक महत्वाकांक्षी लेकिन जरूरी लक्ष्य है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध कटाई पर रोक के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। कई देशों में ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक से जंगलों की निगरानी की जा रही है। गैर-सरकारी संगठन और स्थानीय समुदाय भी इस मुहिम में शामिल हैं। भारत में "चिपको आंदोलन" जैसी मिसालें आज भी प्रेरणा देती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ लोगों ने पेड़ों से चिपककर उन्हें बचाया। वृक्षारोपण अभियान भी जोर पकड़ रहे हैं। लेकिन क्या ये प्रयास पर्याप्त हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">शायद नहीं। हमें और तेजी से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बड़े पैमाने पर काम करना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वनों की रक्षा सिर्फ सरकारों या संगठनों का काम नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी साझा जिम्मेदारी है। हम में से हर एक इस बदलाव का हिस्सा बन सकता है। एक पेड़ लगाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कागज का कम इस्तेमाल करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लास्टिक से दूरी बनाना—ये छोटे कदम हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो मिलकर एक बड़ा फर्क ला सकते हैं। अपने घर के आसपास हरियाली बढ़ाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों को पेड़ों का महत्व समझाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सामुदायिक स्तर पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना—ये सब हमारे हाथ में है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आदिवासी समुदायों से हम सीख सकते हैं कि प्रकृति के साथ तालमेल कैसे बिठाया जाता है। उनकी जीवनशैली में वनों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना गहरे से बसी है। हमें भी अपने जीवन में यह भावना अपनानी होगी। अगर हर व्यक्ति एक पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हम लाखों हेक्टेयर जंगल को वापस ला सकते हैं। यह सिर्फ पर्यावरण की बात नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया की नींव रखने की बात है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय वन दिवस हमारे सामने एक सुनहरा अवसर लाता है—सोचने का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महसूस करने का और कुछ कर दिखाने का। यह वह पल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वनों की गहरी पुकार हमारे कानों तक पहुँचती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमें झकझोरती है। हर पेड़ जो हम बचा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह धरती की साँसों में एक नई जान फूँकता है। हर बीज जो हम धरती की गोद में सौंपते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह उम्मीद की एक नई गाथा रचता है। वन हमारे अतीत की जीवंत कथा हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान की सजीव हकीकत हैं और भविष्य का वो सपना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हम सच कर सकते हैं। इस वन दिवस पर एक अटूट संकल्प लें। अपने हाथों में एक नन्हा पौधा थामें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे धरती की गोद में सौंपें और उसे जीवन की नई ऊँचाइयों तक बढ़ते देखें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उस पौधे के साथ एक वचन दें—कि हम जंगलों को मुरझाने नहीं देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कि हम उस मधुर संगीत को ठहरने नहीं देंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पत्तियों की सरसराहट से हवा में गूँजता है। वन लहलहाएँगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो धरती खिलखिलाएगी। यह हँसी हमारी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे बच्चों की होगी और उन अनगिनत पीढ़ियों की होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमारा इंतज़ार कर रही हैं। अब वक्त है एक पेड़ लगाने का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक जंगल बचाने का और धरती को फिर से हरी-भरी शोभा से सजाने का। यह वही पल है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हमें आगे बढ़कर प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जीवन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हम हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी धरा की मुस्कान है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 15:25:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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