<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/27341/reservation" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Reservation - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/27341/rss</link>
                <description>Reservation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till</guid>
                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/akhilesh-yadav.jpg"                         length="82153"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, EWS आरक्षण के लिए बढ़ाई आय सीमा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: हरियाणा सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को बड़ी राहत देते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ा दिया है। सरकार ने EWS श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी है। इस फैसले से राज्य के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>यह निर्णय केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। मुख्य सचिव कार्यालय (CSO) की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। संशोधित आय सीमा राज्य में सिविल पदों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166029/haryana-big-decision-of-haryana-government-increased-income-limit-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/haryana-ews-reservation.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: हरियाणा सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को बड़ी राहत देते हुए आरक्षण का दायरा बढ़ा दिया है। सरकार ने EWS श्रेणी में आरक्षण का लाभ लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी है। इस फैसले से राज्य के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>यह निर्णय केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। मुख्य सचिव कार्यालय (CSO) की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। संशोधित आय सीमा राज्य में सिविल पदों और सेवाओं में प्रत्यक्ष भर्ती के साथ-साथ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए लागू होगी।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/f_1768394690.jpg" alt="f_1768394690" width="512" height="677"></img></p>
<p><strong>2019 में तय की गई थी 6 लाख की सीमा</strong></p>
<p>गौरतलब है कि इससे पहले 25 फरवरी 2019 को जारी आदेशों के तहत EWS श्रेणी के लिए वार्षिक आय सीमा 6 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग की जा रही थी, क्योंकि महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है।</p>
<p><strong>समीक्षा के बाद लिया गया फैसला</strong></p>
<p>सरकार ने इस विषय की विस्तृत समीक्षा के बाद आय सीमा को बढ़ाकर 8 लाख रुपये प्रतिवर्ष करने का निर्णय लिया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आय सीमा में संशोधन के अलावा EWS आरक्षण से जुड़े पहले जारी किए गए अन्य सभी निर्देश यथावत रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/166029/haryana-big-decision-of-haryana-government-increased-income-limit-for</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/166029/haryana-big-decision-of-haryana-government-increased-income-limit-for</guid>
                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 18:47:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/haryana-ews-reservation.jpg"                         length="133401"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>धर्म के आधार पर कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने मुस्लिम समुदाय के लिए 4 प्रतिशत सरकारी ठेकों में आरक्षण का प्रावधान किया है।कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी ठेकों में मुस्लिमों को 4% के आरक्षण को मंजूरी दी है। इस पर राजनीति तेज हो गई है। बीजेपी ने इसे असंवैधानिक करार दिया। कानूनी जानकार कहते हैं कि कैबिनेट ऐसे फैसले ले सकती है। अगर किसी को आपत्ति है तो कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकता है, वहां इसका टिकना मुश्किल होगा। रिजर्वेशन संवैधानिक दायरे में है या नहीं, इसको लेकर अब अहम सवाल खड़ा हुआ है। वैसे कर्नाटक में मुस्लिमों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150055/giving-reservation-on-the-basis-of-religion-unconstitutional%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/images3.jpg" alt=""></a><br /><div>धर्म के आधार पर कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने मुस्लिम समुदाय के लिए 4 प्रतिशत सरकारी ठेकों में आरक्षण का प्रावधान किया है।कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी ठेकों में मुस्लिमों को 4% के आरक्षण को मंजूरी दी है। इस पर राजनीति तेज हो गई है। बीजेपी ने इसे असंवैधानिक करार दिया। कानूनी जानकार कहते हैं कि कैबिनेट ऐसे फैसले ले सकती है। अगर किसी को आपत्ति है तो कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकता है, वहां इसका टिकना मुश्किल होगा। रिजर्वेशन संवैधानिक दायरे में है या नहीं, इसको लेकर अब अहम सवाल खड़ा हुआ है। वैसे कर्नाटक में मुस्लिमों के रिजर्वेशन का मामला पहले भी राजनीति का केंद्र रहा है और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पेंडिंग है। </div>
<div> </div>
<div>कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी ठेकों में मुस्लिमों के लिए 4% आरक्षण को मंजूरी दी है। लेकिन बीजेपी ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले का संवैधानिक टिकाव मुश्किल है और चुनौती देने पर कोर्ट में यह ठहरने की संभावना कम है।</div>
<div> </div>
<div>कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी ठेकों में मुस्लिमों को 4% के आरक्षण को मंजूरी दी है। इस पर राजनीति तेज हो गई है। बीजेपी ने इसे असंवैधानिक करार दिया। कानूनी जानकार कहते हैं कि कैबिनेट ऐसे फैसले ले सकती है। अगर किसी को आपत्ति है तो कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकता है, वहां इसका टिकना मुश्किल होगा। रिजर्वेशन संवैधानिक दायरे में है या नहीं, इसको लेकर अब अहम सवाल खड़ा हुआ है। वैसे कर्नाटक में मुस्लिमों के रिजर्वेशन का मामला पहले भी राजनीति का केंद्र रहा है और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पेंडिंग है।</div>
<div> </div>
<div>लोकसभा के पूर्व सेक्रेटरी जनरल पीडीटी अचारी कहते हैं कि राज्य सरकार को इस बात का अख्तियार है कि वह रिजर्वेशन दे सकता है। यही कारण है कि अलग अलग राज्यों ने रिजर्वेशन दे रखा है। कर्नाटक, तामिलनाडु और केरल आदि में मुस्लिम को ओबीसी कैटिगरी में राज्य सरकार ने रखा है। इसके तहत सरकारी नौकरी और एजुकेशनल संस्थानों में रिजर्वेशन दिया जाता रहा है। यहां नया सिर्फ यह है कि टेंडर प्रक्रिया में रिजर्वेशन दिया गया है। कैबिनेट फैसला ले सकती है और इसमें कोई शक नहीं है। यह अलग बात है कि इस फैसले को संवैधानिक कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। संसद या विधानसभा से पास किसी भी कानून को संवैधानिक अदालत में चुनौती दी जा सकती है। तब अदालत स्क्रूटनी करती है और यह देखती है कि कानून या सरकार का फैसला संविधान के दायरे में है या नहीं।</div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें कि कर्नाटक सरकार मंत्रिमंडल ने कर्नाटक सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है और संशोधन विधेयक को इसी बजट सत्र में पेश किया जाएगा। संशोधन विधेयक के पारित होने पर सरकारी ठेकों में मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा।</div>
<div>दरअसल कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार उपरोक्त संशोधन विधेयक को मंजूरी देते समय यह भूल गई कि 1976 में केंद्र में जब इंदिरा गांधी की सरकार थी, उस समय इंदिरा गांधी ने संविधान में 42वां संशोधन कर संविधान की उद्देशिका में 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द जोड़ा था। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार मुस्लिम समुदाय को धर्म के आधार पर ठेकों में चार प्रतिशत आरक्षण देकर धर्मनिरपेक्ष देश की नींव को ही कमजोर करने जा रही है।</div>
<div> </div>
<div>आपको बता दें कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार का उपरोक्त फैसला गलत है, क्योंकि यह देश को धर्म के आधार पर बांटने का काम करेगा, जिससे देश की अखण्डता को खतरा पैदा हो सकता है। राज्य सरकार तर्क दे रही है कि यह कदम पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में उठाया गया है, लेकिन यह नीति धर्म के आधार पर नागरिकों के साथ भेदभाव करती है, जो सविधान की मूल भावना के प्रतिकूल है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जिसकी नींव समानता, न्याय और अवसरों की निष्पक्षता पर आधारित है। धार्मिक आधार पर आरक्षण देना इन मूल्यों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।</div>
<div> </div>
<div>विशेषज्ञों के मुताबिक, सविधान में शिक्षा एवं नौकरी के लिए आरक्षण का प्रावधान है, ठेकों के लिए नहीं। ऐसे फैसले वोट बैंक की राजनीति के तहत किए जाते हैं, जो समाज में ध्रुवीकरण पैदा कर असमानता बढ़ाते हैं। सरकार को समझना चाहिए कि ठेका प्रणाली में योग्यता, पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का होना अत्यंत आवश्यक है। अन्यथा इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात के नए रास्ते खुल सकते हैं। किसी विशेष धर्म या समुदाय के लिए आरक्षित कोटा लागू करने से सार्वजनिक सेवा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है, और यह समान अवसर की अवधारणा को कमजोर करता है।</div>
<div> </div>
<div>बेशक सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने हेतु विशेष अवसर देने की आवश्यकता है, लेकिन आर्थिक स्थिति या शैक्षिक पिछड़ापन के आधार पर होना चाहिए, न कि धार्मिक पहचान के आधार पर। यदि प्रत्येक धर्म विशेष को इसी प्रकार रियायत दी जाने लगी, तो यह आरक्षण की अवधारणा का राजनीतिक दुरुपयोग होकर रह जाएगा। धर्म आधारित आरक्षण समाज को बांटने का ही कार्य करेगा, जो राष्ट्रहित में नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>आपको पता रहे कि कांग्रेस स्वतंत्रता के बाद जिस तरह की तुष्टिकरण की नीति अपनाकर चल रही है उसका परिणाम आज उसके सामने है। समय की मांग तो यह है कि कांग्रेस तुष्टिकरण की राह छोड़कर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देती। कांग्रेस नेतृत्व को कर्नाटक की सरकार को धर्म के आधार पर आरक्षण देने वाले निर्णय को रोकना चाहिए। अगर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार धर्म के आधार पर आरक्षण के निर्णय पर कायम रहती है तो देश भर में धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग उठेगी और धर्म के नाम पर लोग आमने-सामने होते दिखाई देंगे, जो देशहित में नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>आर्थिक या सामाजिक रूप से पिछड़ों को शिक्षा व नौकरियों में आरक्षण देना अलग बात है। धर्म के आधार पर आरक्षण देना गलत है। कांग्रेस हाईकमान मामले की गंभीरता को समझे और कर्नाटक सरकार को संशोधन विधेयक पारित करने से रोके। इसी में कांग्रेस की भलाई है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/150055/giving-reservation-on-the-basis-of-religion-unconstitutional%C2%A0</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/150055/giving-reservation-on-the-basis-of-religion-unconstitutional%C2%A0</guid>
                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 14:59:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/images3.jpg"                         length="9992"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        