<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/2728/technology" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Technology - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/2728/rss</link>
                <description>Technology RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184896/digital-india-and-cyber-crime</guid>
                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 17:27:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/hindi-divas3.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहनशीलता का अभाव और बढ़ता आत्महत्या का संकट, बदलते समाज की बड़ी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, रिश्ते, करियर, और जीवनशैली हर स्तर पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इन परिवर्तनों का सबसे गहरा प्रभाव हमारे किशोरों, युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में टीनेजर्स और छात्र–छात्राओं में आत्महत्या की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखने को मिली है। कभी पढ़ाई का दबाव, कभी लव मैरेज में मतभेद, तो कभी पति–पत्नी के विवाद या सोशल मीडिया की आभासी वास्तविकताएं है।ये सभी कारण आज जीवन समाप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सहनशीलता का अभाव  संकट की जड़ में छिपा बड़ा कारण है।सहनशीलता जिसका</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/download-(2)5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज का समाज तेजी से बदल रहा है। तकनीक, प्रतिस्पर्धा, रिश्ते, करियर, और जीवनशैली हर स्तर पर दबाव बढ़ा रहे हैं। इन परिवर्तनों का सबसे गहरा प्रभाव हमारे किशोरों, युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में टीनेजर्स और छात्र–छात्राओं में आत्महत्या की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखने को मिली है। कभी पढ़ाई का दबाव, कभी लव मैरेज में मतभेद, तो कभी पति–पत्नी के विवाद या सोशल मीडिया की आभासी वास्तविकताएं है।ये सभी कारण आज जीवन समाप्त करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहनशीलता का अभाव  संकट की जड़ में छिपा बड़ा कारण है।सहनशीलता जिसका अर्थ कठिन परिस्थितियों को धैर्य और समझदारी से संभालने की क्षमता है।आज की पीढ़ी में तेजी से घटती जा रही है।तकनीक और सोशल मीडिया ने जीवन को त्वरित बना दिया है। अब मनुष्य का धैर्य, प्रतीक्षा और संघर्ष जैसी मूल योग्यताएँ कमज़ोर पड़ रही हैं। हर चीज़ तुरंत चाहि।सफलता, मान्यता, प्यार, सराहना और समाधान। जब अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तब निराशा गहरी होती है। यह निराशा धीरे-धीरे अवसाद का रूप लेने लगती है और कई बार युवा इसे अंत का रास्ता समझ बैठते हैं। किशोरों और छात्रों में बढ़ती आत्महत्या का मुख्य कारण शिक्षा का दबाव सबसे बड़ा कारक रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिणाम आधारित शिक्षा का बोझ हम युवाओ पर जुल्म कर रहे है।आज छात्र सिर्फ पढ़ाई नहीं कर रहे, बल्कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में संघर्ष कर रहे हैं। बोर्ड का तनाव,कॉलेज प्रवेश का दबाव,करियर की अनिश्चितता, कोचिंग संस्थानों की रेसदोस्तों और समाज से तुलना यह सब एक छात्र के मन पर गहरा दबाव डालता है।नौंवी की छात्रा,दसवीं औरकिशोर वय के बच्चे दूसरी,तीसरी या पांचवी मंजिल से कूदकर जान देने की घटना हम हररोज अखबार में पढ़ते है।यह समाज पर काला कलंक है।शिक्षित समाज मे किसी कारणवश आत्महत्या करना तकलीफदेह है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असफलता समाज में एक कलंक की तरह देखी जाती है। बच्चे इस डर से घबरा जाते हैं कि वे माता–पिता, स्कूल या समाज की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरेंगे। यही दबाव कई बार उन्हें खुद को खत्म करने की ओर धकेल देता है। शहरों में अलगाव और अकेलापनअनेक छात्र घर से दूर हॉस्टल या किराए पर रहते हैं।जिससे अकेलापन, परिवार से दूरीऔरभावनात्मक सहयोग का अभाव इन कारणों से मानसिक तनाव बढ़ता है और नकारात्मक विचार मजबूत होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सोशल मीडिया की तुलना की बीमारी इंस्टाग्राम, यूट्यूब, स्नैपचैट जैसे माध्यमों पर दिखती परफेक्ट लाइफ युवा मन को भ्रमित कर देती है।वे अपने जीवन की तुलना दूसरों से करते हैं और खुद को असफल मान लेते हैं। टीनेजर्स में आत्महत्या का क्रेज  फैशन नहीं, गंभीर बीमारी है।समाज किस तरफ जा रहा है।आज किशोरों में आत्महत्या को कभी-कभी साहस आखिरी कदम या समाधान के रूप में देखा जाने लगा है, जो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। भावनात्मक परिपक्वता का अभाव बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किशोर मन तेजी से बदलता है। गुस्सा, प्रेम, असफलता और तनाव के समय वे निर्णय लेने में जल्दबाजी करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">भावनाओं पर नियंत्रण न होने से वे तत्काल प्रतिक्रिया में खतरनाक कदम उठा लेते हैं। लव रिलेशनशिप में टूटन12-18 वर्ष की उम्र में किशोर पहली बार प्रेम और आकर्षण की भावनाएँ महसूस करते हैं।ब्रेकअप या अस्वीकार किया जाना उनके लिए बड़ा सदमा होता है। वे इसे जीवन मृत्यु का प्रश्न समझ बैठते हैं।पति पत्नी के विवाद और आत्महत्या परिवार की टूटन का परिणाम है।विवाहिक संबंधों में बढ़ते तनाव भी आत्महत्या का बड़ा कारण बन रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आजआर्थिक दबाव अहंकार मनमुटाव बातचीत की कमी अविश्वास ने अलग कर दिया है।इन समस्याओं ने रिश्तों को कमजोर कर दिया है। लव मैरेज में अक्सर अपेक्षाएँ अधिक होती हैं। जब वास्तविकता कल्पना से भिन्न होती है, तो टकराव बढ़ता है। रोजाना होने वाले झगड़े कई बार मानसिक स्वास्थ्य को इतने प्रभावित कर देते हैं कि लोग चरम निर्णय लेने लगते हैं। समाज में आत्महत्या को बढ़ावा देने वाले अन्य कारक भी है। किशोर नशे की गिरफ्त में आने पर जल्द गुस्सा करते हैं और मानसिक नियंत्रण खो देते हैं। परिवार में भावनात्मक दूरीभी कारणभूत है।अब संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवार आ गए हैं।बच्चे मोबाइल में, माता–पिता नौकरी में व्यस्त  बातचीत और भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो रहा है।आर्थिक असमानता और बेरोजगारीमुख्य कारण है। युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। मीडिया में आत्महत्या की खबरों की ग्लैमराइजेशन पर प्रभाव पड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगातार समाचार चैनल और सोशल मीडिया पर इन घटनाओं की विस्तृत कवरेज इससे जुड़े जोखिम को बढ़ाती है। समाधान ढूंढना होगा। इस संकट से बाहर कैसे निकले? आत्महत्या रोकी जा सकती है। यदि परिवार, समाज, स्कूल और सरकार मिलकर प्रयास करें। परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।बच्चों से बात करें। बच्चों की भावनाओं को समझें। उन्हें सुनें ।गलतियों पर गुस्सा न करें, बल्कि समझाएं।किसी से  तुलना बंद करें।हर बच्चा अलग है।उसे अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने दें। असफलता को स्वीकार करना सिखाएं। असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।यह भाव बच्चों में बचपन से बनाना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूल और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य ,सहायता, काउंसलिंग सेंटर,हेल्पलाइन,तनाव प्रबंधन कार्यशालाएँ,खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम और परीक्षा परिणाम पर संतुलित नीति से छात्रों पर दबाव कम किया जा सकता है।  समाज की जिम्मेदारी आत्महत्या के मामलों को सनसनीखेज बनाने से बचें। भावनात्मक सहयोग की संस्कृति विकसित करें।पड़ोस और समाज में संवाद बढ़ाएं।नशे को रोकने के लिए अभियान चलाएं। डिजिटल दुनिया के प्रति जागरूकता लाए।सोशल मीडिया की अवास्तविक दुनिया से बच्चों को परिचित कराना है।स्क्रीन टाइम कम करानाऔरपरिवार के साथ समय बढ़ाना है।इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकतादेनी है।आवश्यक होने पर  मनोचिकित्स काउंसलर मनोवैज्ञानिक से सहायता लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानसिक बीमारी भी उतनी ही वास्तविक है जितनी शारीरिक बीमारी।सहनशीलता बढ़ाना ही समाधान की कुंजी है।आज की पीढ़ी को तकनीक ने बहुत कुछ दिया है, परंतु उसने मनुष्य की भावनात्मक शक्ति और सहनशीलता को कमजोर भी किया है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम अपने बच्चों और युवाओं में,धैर्य ,सहनशीलता, जीवन कौशलऔर  भावनात्मक मजबूती विकसित करें। आत्महत्या कोई समाधान नहीं है।यह एक स्थायी समस्या के लिए अस्थायी निर्णय है। यदि परिवार, स्कूल और समाज सही समय पर सही कदम उठाएँ, तो लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं। हमें एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें हर बच्चा, हर युवा और हर परिवार संकट के समय संवाद करें, समाधान ढूंढें, और जीवन को महत्व दें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161499/lack-of-tolerance-and-increasing-suicide-crisis-is-a-big</guid>
                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 16:52:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/download-%282%295.jpg"                         length="8032"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित भारत का सपना–तकनीक और नवाचार से होगा साकार” : गोविन्द चन्द्र महंत</title>
                                    <description><![CDATA[आईआईटी दिल्ली में टेकाथॉन–2025: नवाचार, शोध और समाजसेवा का अनोखा संगम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161428/the-dream-of-developed-india-will-come-true-through-technology"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251123-wa0122-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित अटल टिंकरिंग लैब इनोवेशन एग्ज़ीबिशन-2025 , भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी), नई दिल्ली में सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रामबाग बस्ती, गोरक्ष प्रान्त, पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रतिभागी भैया सचिन ने एग्रीकल्चर बेस्ड इन्नोवेशन पर एग्रीटेकबॉट प्रोजेक्ट और भैया आलेख वेस्ट वाटर मैनेजमेंट पर एक्वासेंस मॉडल आचार्य अंकित कुमार गुप्ता के नेतृत्व में बनाकर टॉप 20 में अपना प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय का ऐतिहासिक गौरव बढ़ाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भैया सचिन और दिव्यांशु (आलेख ) को 10000₹ - 10000₹ हजार का पुरस्कार, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और द्वितीय स्थान पर प्रोजेक्ट एंटीड्रोन डिफेन्स स्काई लॉक 360 भैया अथर्व गुप्ता को 5000₹ हजार का पुरस्कार, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र विद्या भारती अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्रीमान गोविन्द चन्द्र महंथ जी अखिल भारतीय महामंत्री देशराज शर्मा जी के द्वारा प्रदान किया गया। साथ ही भैया सर्वेश शुक्ला को भी स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साह वर्धन किया गया। इस प्रकार 100 प्रोजेक्ट में तीन प्रोजेक्ट रामबाग बस्ती के चयनित हविद्या भारती और उन्नत भारत अभियान द्वारा AICTE व नीति आयोग के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय टेकाथॉन–2025 का आईआईटी दिल्ली में सफल समापन हुआ। कार्यक्रम ने देशभर से आए 100 ATL इनोवेटर्स की रचनात्मकता, तकनीकी कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता को एक मंच पर प्रस्तुत कियाज्ञात हो अटल इनोवेशन एग्जिबिशन 2025 के अंतर्गत अप्रैल, जून, अगस्त और सितंबर में अलग-अलग थीम पर प्रोजेक्ट बनाया गया, जिसमें टॉप 100 प्रोजेक्ट में से सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रामबाग बस्ती, उ.प्र. के अलग-अलग माह में चार प्रोजेक्ट का चयन हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन सभी प्रोजेक्ट का एग्जीबिशन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान नई दिल्ली में चार दिवसीय दिनांक 18 से 21 नवंबर आयोजित हुआ। समापन पर उन सभी प्रोजेक्ट में से टॉप 20 प्रोजेक्ट का चयन कर परिणाम घोषित हुआ। जिसमें से विद्या मंदिर रामबाग बस्ती के 3 भैयाओं ने अपना परचम लहराया और टॉप 20 प्रोजेक्ट में अखिल भारतीय स्तर प्रतियोगिता में अपना ऐतिहासिक स्थान बनाकर विद्यालय का गौरव बढ़ायासमापन समारोह में आई आई एम रांची के निदेशक दीपक श्रीवास्तव ने छात्रों को “समस्याओं के हल से आगे बढ़कर सेवा निर्माण” की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि तकनीक का असली उद्देश्य युवाओं में सोचने की क्षमता, समस्या समाधान और नवाचार को विकसित करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब छात्र प्रयोग करते हैं, असफल होते हैं, फिर समाधान खोजते हैं — तभी असली सीख पैदा होती है।” कार्यक्रम के समापन पर श्रीमान गोविन्द चन्द्र महंत जी ने कहा कि टेकाथोन 25 इनोवेशन में सभी टॉप 100 प्रोजेक्ट बहुत ही इनोवेटिव है। भैया बहनों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व रोबोटिक्स के नए तकनीकों का प्रयोग किया। टेकाथॉन–2026 का पोस्टर भी जारी किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के विद्या भारती अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ रविंदर कन्हैरे जी, अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्रीमान गोविंद चंद्र महंत जी, अखिल भारतीय महामंत्री और अटल प्रभारी श्रीमान कमल किशोर सिंह जी, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष श्रीमान आर पी खेतान जी, डॉ. रामकृष्ण राव, AICTE चेयरमैन प्रो. टी. जी. सीताराम, उन्नत भारत अभियान के प्रमुख प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय, अटल इनोवेशन मिशन नीति आयोग के सुमन पंडित, शुभम गुप्ता, विद्या भारती अटल प्रमुख श्रीमान नितिन चौबे, श्रीमती गीता अरोरा, गोरक्ष प्रांत के प्रांत संयोजक और विद्या मंदिर रामबाग के आचार्य एवं अटल प्रमुख अंकित कुमार गुप्ता, अजय विश्वकर्मा सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी भैया एवं आचार्य बंधु/भगिनी उपस्थित रहे। इस उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविन्द सिंह ने बताया कि विद्यालय के लिए ये ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रबंध समिति के पदाधिकारीगण ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/161428/the-dream-of-developed-india-will-come-true-through-technology</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/161428/the-dream-of-developed-india-will-come-true-through-technology</guid>
                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 18:22:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-11/img-20251123-wa0122-%281%29.jpg"                         length="37927"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों को हाई-टेक दुनिया के लिए तैयार करना</title>
                                    <description><![CDATA[<div dir="ltr">दुनिया तकनीकी प्रगति वाले भविष्य की ओर बढ़ रही है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति लाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर जीन संपादन और भी बहुत कुछ शामिल है। इसलिए, इस मामले में, छात्रों को इस माहौल के लिए तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है। यहीं पर एसटीईएम शिक्षा आती है, जो विषयों के एक समूह से हटकर प्रौद्योगिकी-युक्त भविष्य के लिए अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने के दृष्टिकोण में बदल जाती है। एसटीईएम शिक्षा वह है जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित को जमीनी स्तर से एकीकृत किया जाता है। हालाँकि, भविष्य में बुनियादी ज्ञान से कहीं अधिक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/143530/preparing-students-for-the-high-tech-world"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/छात्रों-को-हाई-टेक-दुनिया-के-लिए-तैयार-करना.jpg" alt=""></a><br /><div dir="ltr">दुनिया तकनीकी प्रगति वाले भविष्य की ओर बढ़ रही है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति लाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर जीन संपादन और भी बहुत कुछ शामिल है। इसलिए, इस मामले में, छात्रों को इस माहौल के लिए तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है। यहीं पर एसटीईएम शिक्षा आती है, जो विषयों के एक समूह से हटकर प्रौद्योगिकी-युक्त भविष्य के लिए अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने के दृष्टिकोण में बदल जाती है। एसटीईएम शिक्षा वह है जहां विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित को जमीनी स्तर से एकीकृत किया जाता है। हालाँकि, भविष्य में बुनियादी ज्ञान से कहीं अधिक की आवश्यकता है, और परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालयों को भी बदलना होगा। इसके लिए दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है जिसमें शिक्षा चीजों की खोज, संज्ञानात्मक क्षमताओं और नवीन अंतर्दृष्टि के प्रति प्रेम बढ़ाने की एक प्रक्रिया है।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">यहां बताया गया है कि एसटीईएम शिक्षा भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए कैसे विकसित हो सकती है: विशेषज्ञ से यहां बताया गया है कि एसटीईएम शिक्षा भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए कैसे विकसित हो सकती है  अनुभवात्मक शिक्षा को अपनाना: किताबें और अन्य सामग्रियां बहुत महत्वपूर्ण उपकरण हैं जिनके लिए प्रत्येक छात्र को हमेशा प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। फिर भी, ऐसा कोई तरीका नहीं है कि एक छात्र को खोजने के लिए दिलचस्प तथ्यों के साथ इतनी सारी सामग्रियां दी जाएंगी, और इच्छा बस खत्म हो जाएगी क्योंकि ग्रंथों ने उसे पहले ही सब कुछ बता दिया है। ऐसा लगता है कि भविष्य एसटीईएम शिक्षा का है, या कम से कम उन दृष्टिकोणों का है जो इसके सार पर विचार करते हुए अनुभवात्मक शिक्षा के उच्च तत्वों के साथ एक वातावरण बनाने में शामिल हैं।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">चित्र स्कूल जिनमें 3डी प्रिंटिंग कार्यशालाएं और आभासी वास्तविकता प्रयोगशालाएं जैसे तकनीकी चमत्कार हैं जो छात्रों को कुछ ही मिनटों में अमेज़ॅन का दौरा करने की अनुमति देते हैं। ऐसी गतिविधियों के कारण ही अमूर्त विचारों को बल मिलता है और एसटीईएम विषयों के प्रति प्रेम विकसित होता है। उभरती प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना: प्रौद्योगिकी एसटीईएम शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है बल्कि शिक्षण का एक साधन है। कृत्रिम रूप से बुद्धिमान ट्यूटर्स से सीखने के मार्ग प्राप्त करने पर विचार करें जो शिक्षार्थियों की क्षमताओं और कठिनाइयों के अनुकूल हों। इसके लिए उपयुक्त आभासी वास्तविकता का उपयोग है, जहां, एक वास्तविक मेंढक को विच्छेदित करने के बजाय, आभासी वातावरण में परिवर्तनों का अनुकरण किया जा सकता है, जैसे कि मानव शरीर के साथ मुठभेड़ हो सकती है।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">सहयोग और संचार को बढ़ावा देना: उभरती पीढ़ी की मूल्य प्रणाली समूह बातचीत पर आधारित एक एकीकृत अवधारणा है। एसटीईएम शिक्षा समूह असाइनमेंट को शामिल करके इसे बढ़ावा दे सकती है जो छात्रों को कुछ समस्याओं को हल करने या एक-दूसरे को अपने विचार समझाने पर विचार-मंथन करने पर मजबूर करेगी। यह सहयोगात्मक भावना छात्रों को उस दुनिया के लिए तैयार करती है जिसमें नए विचारों के साथ आने का मतलब है कि विभिन्न क्षमताओं वाले प्रतिभाओं के समूह विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक साथ आएंगे। एसटीईएम और समाज के बीच अंतर को पाटना: एसटीईएम का अभ्यास अकेले नहीं किया जाना चाहिए। भविष्य को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जिनके पास मौजूदा तकनीक और विज्ञान से प्राप्त सामाजिक प्रभाव के संबंध में नैतिक कौशल हो।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">कृत्रिम बुद्धिमत्ता पूर्वाग्रह या जीन संपादन के मुद्दों के मामलों और विषयों को शामिल करने से छात्रों को जिम्मेदार उपयोगकर्ता, निर्माता और ज्ञान के नवप्रवर्तक बनने की अनुमति मिलती है। कलाओं को एकीकृत करना:     एसटीईएम  के विस्तार पर: कलाओं को एकीकृत करके   एसटीईएम  शिक्षा को बढ़ाना संभव है, जो   सटीम को अधिक अर्थ देता है। अधिकांश मुद्दों को हल करते समय रचनात्मकता एक आवश्यक उपाय है; कला रचनात्मकता के लिए उत्प्रेरक है। वे इसके माध्यम से जागरूकता और स्थिरता पैदा कर रहे हैंस्थायी शहरों को डिजाइन करने जैसी वास्तुशिल्प परियोजनाएं, साथ ही प्रकृति के पहलुओं पर आधारित संगीत का निर्माण। यह पद्धति छात्र को उपकरणों का एक उत्कृष्ट सेट भी प्रदान करती है जो उसे न केवल तकनीकी बल्कि रचनात्मक दृष्टिकोण का उपयोग करके विभिन्न समस्याओं को हल करने में सक्षम बनाती है।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">एसटीईएम शिक्षा का भविष्य केवल ऐसे स्नातक तैयार करने की प्रक्रिया नहीं है जो बैठ कर प्रोग्राम कर सकें या प्रयोग कर सकें। यह आधुनिक दुनिया की तकनीकी जटिलताओं को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण विश्लेषणों, आविष्कारशील और गहराई से उपयुक्त समाधानों और जवाबदेह आविष्कारकों की एक पीढ़ी तैयार करने के बारे में है। अनुभवात्मक शिक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकियों, सहयोग और समाज के समग्र संदर्भ को शामिल करने से भविष्य के लिए शिक्षाशास्त्र तैयार करना संभव हो जाता है, जिससे एसटीईएम छात्रों को परिवर्तन को तोड़ने और इसे चलाने के लिए तैयार करता है। </div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr"><strong>विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/143530/preparing-students-for-the-high-tech-world</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/143530/preparing-students-for-the-high-tech-world</guid>
                <pubDate>Sat, 27 Jul 2024 16:37:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-07/%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE.jpg"                         length="186128"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिल्स नें खोई रियल लाइफ,हर कोई बनना चाह रहा स्टार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सिर चढ़कर बोल रहा रिल्स बनाकर अपलोड करने का क्रेज</strong><br /><br /><strong>जितेन्द्र कुमार "राजेश" त्रिवेणीगंज</strong></p>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सुपौल (बिहार)</strong><br /><br />शहर में इन दिनों सोशल मीडिया पर रिल्स बनाकर अपलोड करने का क्रेज सर चढ़कर बोल रहा है। युवाओं से लेकर बड़ों तक में रिल्स बनाकर अपलोड करने की होड़ लगी हुई है।रिल्स युवाओं की पढ़ाई पर भी असर डाल रही है। दरअसल रिल्स बनाने को लेकर युवाओं का जुनून व उत्साह इस कदर तूफान पर है कि रिल्स के चक्कर में रियल लाइफ व उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है l</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही मोबाइल फोन हम सब के जीवन का अभिन्न</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140817/riles-lost-his-real-life-everyone-wants-to-become-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/smartselect_20240502_133645_google.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सिर चढ़कर बोल रहा रिल्स बनाकर अपलोड करने का क्रेज</strong><br /><br /><strong>जितेन्द्र कुमार "राजेश" त्रिवेणीगंज</strong></p>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सुपौल (बिहार)</strong><br /><br />शहर में इन दिनों सोशल मीडिया पर रिल्स बनाकर अपलोड करने का क्रेज सर चढ़कर बोल रहा है। युवाओं से लेकर बड़ों तक में रिल्स बनाकर अपलोड करने की होड़ लगी हुई है।रिल्स युवाओं की पढ़ाई पर भी असर डाल रही है। दरअसल रिल्स बनाने को लेकर युवाओं का जुनून व उत्साह इस कदर तूफान पर है कि रिल्स के चक्कर में रियल लाइफ व उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है l</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही मोबाइल फोन हम सब के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। स्कूल की पढ़ाई से लेकर ऑफिस के कामकाज तक में लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।कई घंटे तक युवा मोबाइल और रिल्स बनाने में निकाल देते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। रिल्स बनाने के लिए युवा आज किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार रहते है,युवा अब काल्पनिक दुनिया में जीने लगे हैं।<br /><br /><strong>रिल्स बनाने में गंवा चुके हैं जान</strong><br /><br />सोशल मीडिया पर खतरनाक स्टंट के साथ रिल्स और सेल्फी का क्रेज कई युवाओं की जान ले चुका है।सोशल मीडिया पर फ्लोवर्स, लाइक व कमेंट बढ़ाने के चक्कर में युवा किसी भी हद तक जा रहे हैं।कई थाना क्षेत्र से खबर आती रहती है हथियार के साथ वीडियो बनाकर अपलोड करने पर हवालात की हवा खानी पड़ी<br />और तो और युवाओं को जहां मौका मिलता है, वहीं वीडियो शूटिंग शुरू कर देते हैं. पार्क, स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, स्टेशन हो या कोई समारोह, किसी मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं. सड़कों पर साइकिल व बाइक से स्टंट करते युवा हमेशा दिख जाते हैं. इन रिल्स बनाने वाले युवाओं को न तो अभिनय व तकनीकी प्रशिक्षण मिलता है, बस कम समय में चर्चित होने के चक्कर में स्टंट कर जान गंवाते हैं या फिर अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है।<br /><br /><br /><strong>घरेलू महिला भी नहीं हैं पीछे</strong><br /><br />सोशल मीडिया में घरेलू महिलाएं भी कम सक्रिय नहीं है वह देर रात तक खाना बनाने का तरीका हो या फिर शादी समारोह में नाच गाने का वीडियो सभी तरह के वीडियो अपलोड कर रही है सोशल मीडिया में चर्चा में आने वाली शहर की कई हस्तियां लड़कियों की आइकान बन गई है।इन युवतियों का इंस्ट्राग्राम पर झुकाव बढ़ गया है।<br /><br /><strong>हर कोई बनना चाह रहा सोशल मीडिया स्टार</strong><br /><br />रिल्स रोमांचक होते हैं, बहुत ही कम समय में लोगों को अच्छा मनोरंजन देते हैं,यही कारण है कि रिल्स लोगों को बांधे रखती है।जिसके चलते हर कोई सोशल मीडिया स्टार बनना चाहता है। और इसी चक्कर में कुछ लोग गलतियां कर देते हैं। जो उनके लिए जानलेवा साबित होती है, रील एक मिनट से भी कम समय की वीडियो होती है।जो लोगों के मनोरंजन के लिए बनाई जाती है। पूरी दुनिया में इस शार्ट वीडियो का मार्केट इतना बड़ा है कि करोड़ अरबों की संख्या में लोग इसे देखना और बनाना पसंद करते हैं। यही कारण है कि लोगों को यह बांधे रखती है। जिसके चलते हर कोई सोशल मीडिया स्टार बनना चाहता है।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/140817/riles-lost-his-real-life-everyone-wants-to-become-a</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/140817/riles-lost-his-real-life-everyone-wants-to-become-a</guid>
                <pubDate>Fri, 03 May 2024 20:41:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-05/smartselect_20240502_133645_google.jpg"                         length="254152"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Instagram में  अब AI लिखेगा मैसेज, जानें पूरी डिटेल्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>इंस्टाग्राम </strong>अपने यूजर्स के लिए एक बेहतरीन फीचर लाने की तैयारी कर रहाहै। इस फीचर के आने से यूजर्स का काम आसान हो जाएगा। दरअसल, अब AI मैसेज लिखने में यूजर्स की मदद करेगा। हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम मैसेजिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट इंटीग्रेट करने के लिए तैयारी में है।<br />इस ऐप रिसर्चर एलेसेंड्रो पलुजी ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें आने वाले नए फीचर का पता चलता है जो यूजर्स को एआई की सहायता से मैसेज लिखने की अनुमति देता है। पलुजी ने एक्स पर डेवलपमेंट का खुलासा करते हुए कहा कि इंस्टाग्राम, यूजर्स</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138630/ai-will-now-write-messages-on-instagram-know-complete-details"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/instagram_large_1941_150.webp" alt=""></a><br /><p><strong>इंस्टाग्राम </strong>अपने यूजर्स के लिए एक बेहतरीन फीचर लाने की तैयारी कर रहाहै। इस फीचर के आने से यूजर्स का काम आसान हो जाएगा। दरअसल, अब AI मैसेज लिखने में यूजर्स की मदद करेगा। हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम मैसेजिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असिस्टेंट इंटीग्रेट करने के लिए तैयारी में है।<br />इस ऐप रिसर्चर एलेसेंड्रो पलुजी ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें आने वाले नए फीचर का पता चलता है जो यूजर्स को एआई की सहायता से मैसेज लिखने की अनुमति देता है। पलुजी ने एक्स पर डेवलपमेंट का खुलासा करते हुए कहा कि इंस्टाग्राम, यूजर्स के लिए AI से मेसेज तैयार करने की क्षमता डेवलप कर रहा है। इस इनोवेशन से यूजर्स को गूगल की मैजिक कंपोज फंक्शनैलिटी के समान अलग-अलग स्टाइल में मैसेज को लिखने में मदद मिलेगी। </p>
<p>बता दें कि, इंस्टाग्राम की मालिकाना कंपनी मेटा धीरे-धीरे जेनेरेटिव AI फीचर्स की एक नई क्लास के जरिए नए एक्सपीरियंस को इंटीग्रेट कर रही है। जिससे यूजर्स के बीच कनेक्टिविटी बढ़ रही है। मेटा AI, जिसे वन टू वन चैट या ग्रुप डिस्कशन के लिए उपलब्ध असिस्टेंट के रूप में बताया गया है। सिफारिशें प्रदान करने हास्य कंटेंट की पेशकश करने, विवादों को निपटाने और ज्ञान प्रदान करने समेत कई उद्देश्यों को पूरा करता है। </p>
<p>वहीं कंपनी की तरफ से कहा गया कि, हम शुरुआत में AI को विशेष रूप से अमेरिका में लॉन्च कर रहे हैं। मेटा AI के साथ जुड़ने के लिए, यूजर एक नया मैसेज कर सकते हैं और हमारे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के भीतर क्रिएट AI चैट को सिलेक्ट कर सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/138630/ai-will-now-write-messages-on-instagram-know-complete-details</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/138630/ai-will-now-write-messages-on-instagram-know-complete-details</guid>
                <pubDate>Sat, 10 Feb 2024 11:46:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-02/instagram_large_1941_150.webp"                         length="39546"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर खतरों से मुकाबला - जागरुकता है जरूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<div><strong>                                              ----       जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div>  </div>
<div>जब से दुनियां में इंटरनेट का प्रचलन बढ़ा है हम पूरी तरह से इस पर निर्भर हो चुके हैं। निश्चित ही इससे कार्य की गति तो तेज हुई है लेकिन उतने ही खतरे हमारे सामने चुनौती बन कर खड़े हो गए हैं। दरअसल जो फ्राड हमारे साथ हो सकते हैं हमें कैसे इन।से निबटना है उस जानकारी का हमारे पास अभाव है। या फिर हम कभी इस बात को समझ नहीं पाते कि इस तरह से भी फ्राड हो सकता है। हालांकि हमारी सरकारें और प्रशासन इस पर लोगों को बहुत जागरूक कर रहे हैं। और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/137441/combating-cyber-threats-%E2%80%93-awareness-is-important"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-12/10_12_2020-cyber_crime_21151867_93435555.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<div><strong>                       ----       जितेन्द्र सिंह पत्रकार</strong></div>
<div> </div>
<div>जब से दुनियां में इंटरनेट का प्रचलन बढ़ा है हम पूरी तरह से इस पर निर्भर हो चुके हैं। निश्चित ही इससे कार्य की गति तो तेज हुई है लेकिन उतने ही खतरे हमारे सामने चुनौती बन कर खड़े हो गए हैं। दरअसल जो फ्राड हमारे साथ हो सकते हैं हमें कैसे इन।से निबटना है उस जानकारी का हमारे पास अभाव है। या फिर हम कभी इस बात को समझ नहीं पाते कि इस तरह से भी फ्राड हो सकता है। हालांकि हमारी सरकारें और प्रशासन इस पर लोगों को बहुत जागरूक कर रहे हैं। और इस पर बहुत ही सराहनीय प्रयास पुलिस प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है लेकिन फ्राड करने वालों को हम मुश्किल से पकड़ पा रहे हैं। इसका सबसे मजबूत पक्ष यही है कि हमें इसके प्रति जागरूक होना चाहिए। हम जब कोई भी एप्लिकेशन डाउनलोड करते हैं तो उस एप्लिकेशन को अपने सारे अधिकार और जानकारी दे देते हैं। और जब तक हम उनको सारे अधिकार नहीं देता</div>
<div> </div>
<div>तब तक वह एप्लिकेशन काम नहीं करती। इसलिए इसका चुनाव हमें बहुत ही सोच समझ कर करना चाहिए। यदि वह एप्लिकेशन हमारे लिए अति आवश्यक नहीं है तो हमें कोई भी अधिकार नहीं देना चाहिए। हैकर हमारी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। इसलिए इंटरनेट का स्तेमाल भी कम से कम केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही करना चाहिए। हमने अपने हम मनोरंजन का सहारा मोबाइल को ही बना लिया है। हम हर एप्लिकेशन को डाउनलोड करने का प्रयास करते हैं। ऐसा करने से हमें बचना होगा। फोन पर अंजान काल से भी बचना होगा। हमारे पास दिन भर कइयों काल्स आतीं हैं जो तमाम आफर हमको प्रोवाइड करते हैं कई बार हम इनके चक्कर में फंस भी जाते हैं। शासन और प्रशासन हमको इसके प्रति बार बार जागरूक करता रहता है लेकिन हम बहुत ही कम लोग इस पर ध्यान देते हैं। </div>
<div> </div>
<div>                           साइबर ठगी के लिए पहले केवल चुनिंदा जगहों पर ही सुनवाई होती थी लेकिन साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए उ.प्र. सरकार ने अब राज्य के 57 जिलों में साइबर थाने खोलने की घोषणा की है। प्रदेश सरकार की यह एक अच्छी पहल है क्योंकि साइबर थाने अपना कार्य बहुत ही उम्दा तरीके से कर रहे हैं। लेकिन काम के अत्यधिक बोझ के कारण इनमें देरी होती थी लेकिन अब थानों की संख्या बढ़ने से वहां स्टाफ की संख्या भी बढ़ेगी और अपराधों को पकड़ने में गति मिलेगी। सरकार ने बताया है कि साइबर अपराधों की संख्या को बढ़ता देख इन थानों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता हो रही थी। उ.प्र. में 75, जिले हैं। उ.प्र. के 18 मंडल के मुख्यालय में पहले से साइबर थाने मौजूद थे लेकिन अब 57 और जिलों में साइबर थाने खुलने से राज्य के हर जिले में साइबर थाने मौजूद होंगे।</div>
<div> </div>
<div>इनकी स्थापना पर 27 करोड़ 24 लाख रुपए के लगभग सरकार पर व्यय भार पड़ने की संभावना है। सरकार तेजी से इसपर कार्य करने जा रही है इससे न केवल साइबर क्राइम पर नजर रखी जा सकेगी बल्कि उस पर प्रभावी कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उ.प्र. सरकार ने कहा है कि हमारी सजा दिलाने की दर नेशनल साइबर क्राइम की सजा दिलाने की दर से काफी बेहतर है। साइबर क्राइम के मामलों में नेशनल दर 46.5 प्रतिशत है जब कि उ.प्र. में यह 87.8 प्रतिशत है । सरकार का प्रयास सराहनीय है लेकिन हमें भी सजग रहना होगा। इसकी जानकारी ही इसका बचाव है। इसको हमें अच्छी तरह से समझना होगा। क्यों कि हम तब ही समझ पाते हैं जब हमारे साथ फ्राड हो चुका होता है। फिर हम भटकते हैं लेकिन अब हर जिले में साइबर थाने खुल जाने से हमें इसमें अच्छी सफलता हासिल होगी।</div>
<div> </div>
<div>                        दरअसल हम इंटरनेट पर कार्य करना तो जान गए हैं लेकिन उनसे कितने ख़तरे भी है उनसे अभी भी अनजान हैं और साइबर ठग इसी का फायदा उठाते हैं। आपने देखा भी होगा जो लोग फालतू की साइट पर कम ध्यान देते हैं उनके पास फाल्स काल कम आते हैं लेकिन जो लोग तरह तरह की एप्लिकेशन ज्यादा डाउनलोड करते हैं उनके पास काल आने का सिलसिला बढ़ जाता है। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी पर रोक लगा सके इसके लिए हमारे साइबर एक्सपर्ट भी बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। दरअसल इस ठगी में जितनी जल्द हम अपनी शिकायत पहुंचा सकेंगे उतनी ही हमारे लिए फायदेमंद होता है। क्यों इसमें जितनी देर लगती है ठगी का पता लगाना उतना ही मुश्किल हो जाता है। साइबर ठगी के तरीके भी समय समय पर बदलते रहते हैं क्यों कि इसमें क्वालीफाइड लोग कार्य कर रहे हैं और उनके लिए यह ठगी काफी आसान रहती है। अतः हमको सिर्फ इससे बचाव के लिए जागरूक होने की अत्यधिक आवश्यकता है।</div>
<div> </div>
<div>हमें सरकार के बताए हुए तरीकों के साथ चलना होगा क्योंकि सरकार बराबर यह पता लगा रही है कि साइबर ठग किस किस तरह से लोगों को ठगी का शिकार बना सकते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/137441/combating-cyber-threats-%E2%80%93-awareness-is-important</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/137441/combating-cyber-threats-%E2%80%93-awareness-is-important</guid>
                <pubDate>Wed, 20 Dec 2023 16:45:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-12/10_12_2020-cyber_crime_21151867_93435555.jpg"                         length="30463"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> अब नहीं चलेगी सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी?</title>
                                    <description><![CDATA[Digital Personal Data Protection Bill 2022: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सरकार डेटा प्रोटेक्शन बिल लेकर आ रही है. कैबिनेट ने Digital Personal Data Protection Bill 2022 को मंजूरी दे दी है और अब इसे संसद में पेश किया जाएगा. सवाल है कि इस बिल से एक सामान्य यूजर की लाइफ पर क्या असर पड़ेगा. आइए जानते हैं इस बिल की खास बातें.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131914/now-the-arbitrariness-of-social-media-companies-will-not-work"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/21212121.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International news: </strong><br /><br />केंद्र सरकार लंबे समय से डेटा प्रोटेक्शन बिल पर काम कर रही है. कई साल तक चर्चा के बाद आखिरकार भारत सरकार ने अपना डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पेश कर दिया है. इस बिल को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है. Digital Personal Data Protection Bill, 2022 को अब संसद में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा. ये बिल हमारे आपके डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करेगा. पिछले कुछ सालों में डिजिटल वर्ल्ड में तेजी से बदलाव हो रहा है. सोशल मीडिया कंपनियां समेत दूसरे प्लेटफॉर्म्स यूजर्स के तमाम डेटा को इकट्ठा करते हैं. इस डेटा का गलत इस्तेमाल ना हो, इसलिए इस बिल को पेश किया जा रहा है.</p>
<p><br /><strong>Digital Personal Data Protection Bill से क्या होगा ?</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 6 साल पहले प्राइवेसी को फंडामेंटल राइट बताया था. सरकरा यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा के लिए अब एक बिल लेकर आई है. अगर ये बिल दोनों सदनों से पास हो जाता है और कानून बनता हैं, तो ये भारत का कोर डेटा गवर्नेस फ्रेमवर्क होगा. इसका मकसद यूजर्स के पर्सनल डेटा को सेफ रखना है. इस मानसून सीजन में सरकार इस बिल को पेश कर सकती है. पिछले कुछ सालों से ऐसा लग रहा था कि सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद चल रहा था. अगर ये बिल कानून में बदलता है, तो सरकार के पास भारतीय यूजर्स के डेटा को लेकर कई तरह की ताकत होगी. सरकार इन कंपनियों पर जुर्माना तक लगा सकेगी. Digital Personal Data Protection Bill की शुरुआत 2018 में हुई, जब जस्टिस बी. एन. श्रीकृष्णा के नेतृत्व में एक स्पेशल कमेटी का गठन हुा. इस कमेट ने बिल का ड्राफ्ट तैयार किया था. साल 2019 में सरकार बिल को संसद में लेकर आई, जिसे दिसंबर 2021 में जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को भेजा गया. हालांकि, सरकार ने बाद में इस बिल को वापस ले लिया था. अब इसे दोबारा पेश किया जा रहा है.</p>
<p><strong>आप पर क्या होगा असर?</strong><br />जब से सरकार ने इस बिल पर काम करना शुरू किया था, तब से एक्सपर्ट्स का कहना था कि सरकार को कंपनियों पर फाइन और भारतीय यूजर्स के डेटा को प्रोटेक्ट करने पर काम चाहिए. इस बिल में ऐसा ही कुछ हुआ है. ये बिल सरकार को कंपनियों पर फाइन लगाने और यूजर्स के डेटा को सिक्योर रखने की पावर देता है. इस बिल के बाद सरकार एक डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड सेट करेगी. ये बोर्ड प्राइवेसी संबंधित मुद्दों और दोनों पार्टियों के बीच मतभेदों को हल करने पर काम करेगा. केंद्र सरकार के पास बोर्ड में किसी को शामिल करने और चीफ एक्जीक्यूटिव नियुक्त करने का अधिकार होगा. अगर किसी प्लेटफॉर्म को लगता है कि उन्होंने इस कानून का उल्लंघन किया है, तो उन्हें इसके लिए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड के पास जाना होगा. बोर्ड के पास इसके खिलाफ कार्रवाई का पूरा अधिकार होगा. बोर्ड चाहे तो कंपनी पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है या फिर सेटलमेंट फीस एक्सेप्ट कर सकता है. कानून के तहत बोर्ड के पास जुर्माने की राशि तय करने का अधिकार होगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/131914/now-the-arbitrariness-of-social-media-companies-will-not-work</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/131914/now-the-arbitrariness-of-social-media-companies-will-not-work</guid>
                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 13:56:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-07/21212121.webp"                         length="43370"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  Unverified अकाउंट्स  को केवल 600  ट्वीट ही पढ़ने की अनुमति, एलन मस्क का नया ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Technology:</strong></p>
<p>एलन मस्क अक्सर अपने फैसले से लोगों को चौंकाते आए हैं. हाल ही में एलन मस्क ने ट्वीट कर कुछ नई पाबंदियों की घोषणा की है. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि अब नॉन वेरिफाइड अकाउंट्स एक दिन में सिर्फ 600 ट्वीट ही पढ़ सकेंगे. हालांकि ये लिमिट टेम्परेरी रूप से लागू की गई हैं. एलन मस्क ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'डेटा स्क्रैपिंग और सिस्टम हेरफेर के मामलों को एड्रेस करने के लिए, हमने कुछ अस्थायी सीमाएं लागू<br />की हैं.'</p>
<p><strong>ट्विटर की नई पॉलिसी में इतने बदलाव</strong><br />नई पॉलिसी के मुताबिक, ट्विटर ब्लू को सब्सक्राइब करने वाले अकाउंट यानी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131695/elon-musks-new-announcement-allowing-unverified-accounts-to-read-only"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/ -unverified-अकाउंट्स- को-केवल-600- ट्वीट-ही-पढ़ने-की-अनुमति,-एलन-मस्क-का-नया-ऐलान.webp" alt=""></a><br /><p><strong>Technology:</strong></p>
<p>एलन मस्क अक्सर अपने फैसले से लोगों को चौंकाते आए हैं. हाल ही में एलन मस्क ने ट्वीट कर कुछ नई पाबंदियों की घोषणा की है. उन्होंने ट्वीट कर बताया कि अब नॉन वेरिफाइड अकाउंट्स एक दिन में सिर्फ 600 ट्वीट ही पढ़ सकेंगे. हालांकि ये लिमिट टेम्परेरी रूप से लागू की गई हैं. एलन मस्क ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'डेटा स्क्रैपिंग और सिस्टम हेरफेर के मामलों को एड्रेस करने के लिए, हमने कुछ अस्थायी सीमाएं लागू<br />की हैं.'</p>
<p><strong>ट्विटर की नई पॉलिसी में इतने बदलाव</strong><br />नई पॉलिसी के मुताबिक, ट्विटर ब्लू को सब्सक्राइब करने वाले अकाउंट यानी ट्विटर पर ब्लू टिक वेरिफाइट अकाउंट्स हर रोज 6000 पोस्ट पढ़ सकेंगे. इसके अलावा एक दिन में अनवेरिफाइड अकाउंट्स सिर्फ 600 पोस्ट ही पढ़ सकेंगे. साथ ही वो नए ट्विटर अकाउंट जो कि वेरिफाइड नहीं है वो एक दिन में सिर्फ 300 ट्वीट ही देख सकेंगे.</p>
<p><strong>जल्द ही बढ़ जाएगी संख्या</strong><br />एलन मस्क ने अपने पुराने ट्वीट को रिट्वीट करते हुए बताया कि वैरिफाइड यूजर्स आठ हजार, अनवैरिफाइड यूजर्ज 800 ट्वीट पढ़ सकेंगे. उन्होंने बताया कि नए अनवैरिफाइड यूजर्स भी 300 की जगह 400 ट्वीट जल्द पढ़ सकेंगे.</p>
<p><strong>ट्विटर की गड़बड़ नहीं प्लानिंग है लिमिट</strong></p>
<p>मस्क का यह ट्वीट कई यूजर्स द्वारा ट्विटर आउटेज की शिकायतों के बीच आया है. इस ट्वीट के साथ एलन मस्क ने इस बात का भी खंडन कर दिया कि ट्विटर सर्विसेज में कोई दिक्कत या ग्लिच है. उन्होंने लिखा कि यह कोई गड़बड़ नहीं है, बल्कि हमने जानबूझकर लिमिट सेट की है. उन्होंने लिखा कि ट्विटर जानबूझकर एपीआई कॉल को सीमित कर रहा है...<br />कई लोगों ने की ग्लिच की शिकायत आपको बताते चलें कि शनिवार शाम से कई यूजर्स ने इस बात को लेकर शिकायत की थी कि उन्हें नए ट्वीट नजर नहीं आ रहे हैं. लोगों को ऐसा लग रहा था कि ट्विटर की सर्विसेज में कोई दिक्कत है. हालांकि अब यह पूरी तरह से साफ हो गया है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/131695/elon-musks-new-announcement-allowing-unverified-accounts-to-read-only</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/131695/elon-musks-new-announcement-allowing-unverified-accounts-to-read-only</guid>
                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 14:48:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-07/%C2%A0-unverified-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%C2%A0%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%B2-600-%C2%A0%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%9F-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%9D%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF%2C-%E0%A4%8F%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%90%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8.webp"                         length="25182"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आप को लगता है, क्या सच में आपका आधार कार्ड सेफ है?  पढ़ें पूरा एनालिसिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>आधार कार्ड</strong> सेफ्टी को लेकर समय समय पर डिबेट होती रहती है. कभी आधार डेटा लीक की खबरें आती हैं तो कभी सरकार की तरफ से कहा जाता है कि यूजर का डेटा सेफ है. क्या हो अगर कोई ये कहे कि आपका आधार कार्ड फुलप्रूफ नहीं है?</p>
<p>आधार कार्ड एक जरूरी आइडेंटिटी प्रूफ है और सरकार इसके डेटा को फुलप्रूफ बताती है. मगर क्या हो अगर किसी के हाथ इसमें सेंधमारी का तरीका लग जाए. आप सोच रहे होंगे कि अगर ऐसा कोई तरीका है, तो अब तक किसी की नजर में क्यों नहीं आया?</p>
<p><br />दरअसल, इसकी वजह अलग-अलग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131464/do-you-really-think-your-aadhaar-card-is-safe-read"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/54548121.webp" alt=""></a><br /><p><strong>आधार कार्ड</strong> सेफ्टी को लेकर समय समय पर डिबेट होती रहती है. कभी आधार डेटा लीक की खबरें आती हैं तो कभी सरकार की तरफ से कहा जाता है कि यूजर का डेटा सेफ है. क्या हो अगर कोई ये कहे कि आपका आधार कार्ड फुलप्रूफ नहीं है?</p>
<p>आधार कार्ड एक जरूरी आइडेंटिटी प्रूफ है और सरकार इसके डेटा को फुलप्रूफ बताती है. मगर क्या हो अगर किसी के हाथ इसमें सेंधमारी का तरीका लग जाए. आप सोच रहे होंगे कि अगर ऐसा कोई तरीका है, तो अब तक किसी की नजर में क्यों नहीं आया?</p>
<p><br />दरअसल, इसकी वजह अलग-अलग एलिमेंट्स है, जिन पर हम इस आर्टिकल में चर्चा करेंगे. इसकी शुरुआत कुछ ऐसे लोगों से होती है, जो यूजर्स के कॉम्प्रोमाइज्ड डेटा के जरिए कुछ बुरा करने की प्लानिंग कर रहे हैं. ये कॉम्प्रोमाइज्ड डेटा उन खामियों से मिलता है, जो सामान्य लोगों को शायद ही कभी नजर आएं.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/131464/do-you-really-think-your-aadhaar-card-is-safe-read</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/131464/do-you-really-think-your-aadhaar-card-is-safe-read</guid>
                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 14:40:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/54548121.webp"                         length="14240"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>OnePlus ला रहा 150W के फ़ास्ट चार्जिंग के साथ 24GB RAM वाला फोन! </title>
                                    <description><![CDATA[<p>  <br />OnePlus दो प्लैगशिप स्मार्टफोन पर काम कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनके नाम OnePlus 12 और OnePlus Ace 2 Pro होंगे. इन स्मार्टफोन को लेकर लीक्स सामने आने लगे हैं और कंपनी भी बड़ी तैयारी कर रही है. लेटेस्ट लीक्स में दावा किया है कि वनप्लस 24GB Ram वाला फोन ला रहा है.</p>
<p>वनप्लस अब Red Magic 85 Pro और iQO0 115 को टक्कर देने के लिए अपना नया हैंडसेट लॉन्च कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका नाम OnePlus Ace 2 Pro हो सकता है. अभी कंपनी की तरफ से इसके फीचर्स कंफर्म नहीं किए हैं. अभी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131407/oneplus-is-bringing-24gb-ram-phone-with-150w-fast-charging"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/oneplus-ला-रहा-24gb-ram-वाला-फोन!-इसमें-मिल-सकता-है-150w-का-फास्ट-चार्जर.jpeg" alt=""></a><br /><p> <br />OnePlus दो प्लैगशिप स्मार्टफोन पर काम कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनके नाम OnePlus 12 और OnePlus Ace 2 Pro होंगे. इन स्मार्टफोन को लेकर लीक्स सामने आने लगे हैं और कंपनी भी बड़ी तैयारी कर रही है. लेटेस्ट लीक्स में दावा किया है कि वनप्लस 24GB Ram वाला फोन ला रहा है.</p>
<p>वनप्लस अब Red Magic 85 Pro और iQO0 115 को टक्कर देने के लिए अपना नया हैंडसेट लॉन्च कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका नाम OnePlus Ace 2 Pro हो सकता है. अभी कंपनी की तरफ से इसके फीचर्स कंफर्म नहीं किए हैं. अभी तक ये क्लियर नहीं है कि 24GB RAM में कितनी वर्चुअल रैम होगी.</p>
<p><br /><strong>क्वालकॉम के अपकमिंग प्रोसेसर वाला पहला फोन</strong><br />OnePlus Ace 2 Pro क्वालकॉम के अपकमिंग चिपसेट Snapdragon 8 Plus Gen 2 के साथ आने वाला पहला फोन हो सकता है. यह जानकारी मीडिय रिपोर्ट्स से मिलती है.</p>
<p><strong>टिप्स्टर ने किया दावा</strong><br />OnePlus Ace 2 Pro को लेकर एक टिप्स्टर Digital Chat Station ने चीनी माइक्रोब्लॉगिंग साइट वीबो पर पोस्ट करके दावा किया है. इसमें 24GB RAM और 1TB तक की स्टोरेज दी जा सकती है. हालांकि अभी तक इस जानकारी को कंफनी ने कंफर्म नहीं किया है..</p>
<p><strong>OnePlus Ace 2 Pro के संभावित स्पेसिफिकेशन</strong><br />रिपोर्ट्स पर गौर करें तो इसमें फोन में 6.74-inch का कर्व्ह एज OLED पैनल दिया जा सकता है, जो OPPO Reno 10 Pro+ के जैसा हो सकता है. इस डिस्प्ले में 1.5K रेजोल्यूशन और 144Hz का रिफ्रेश रेट्स देखने को मिलेगा.</p>
<p><strong>OnePlus Ace 2 Pro संभावित कैमरा सेटअप</strong><br />OnePlus Ace 2 Pro में बैक पैनल पर 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है. यह Sony IMX890 सेंसर होगा और Optical Image Stabilization मिलेगा. इस हैंडसेट में 5,000mAh की बैटरी दी जा सकता है. इसके साथ 100W या 150W का फास्ट चार्जर दिया जा सकता है.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/131407/oneplus-is-bringing-24gb-ram-phone-with-150w-fast-charging</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/131407/oneplus-is-bringing-24gb-ram-phone-with-150w-fast-charging</guid>
                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 14:27:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/oneplus-%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-24gb-ram-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8%21-%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-150w-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A4%B0.jpeg"                         length="4833"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने हैंडसेट के WiFi के आटोमेटिक कनेक्शन फीचर को कैसे करे बंद, आइये जाने ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>क्या आपके पास ऐसा Android फ़ोन है जो अनियमित रूप से वाई-फ़ाई नेटवर्क से कनेक्ट होता है? इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं। इसके कारण हैं, जैसे तीसरी पारी का ऐप या गलत तरीके से कॉन्फ़िगर किया गया वाई-फाई। Android उपकरणों के साथ, वाई-ऑटोमैटिक फाई की सक्रियता को अक्षम करना सरल है। यदि आपका फ़ोन Android 11 या उसके बाद का संस्करण चला रहा है, तो आप अपने फ़ोन को विशेष वाई-फ़ाई नेटवर्क से कनेक्ट होने से अपने आप रोक सकते हैं। इसे प्राप्त करने के लिए, वाई-फाई को स्वचालित रूप से चालू/बंद करें चुनें और फिर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127695/lets-know-how-to-turn-off-the-automatic-connection-feature"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-03/3.webp" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>क्या आपके पास ऐसा Android फ़ोन है जो अनियमित रूप से वाई-फ़ाई नेटवर्क से कनेक्ट होता है? इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं। इसके कारण हैं, जैसे तीसरी पारी का ऐप या गलत तरीके से कॉन्फ़िगर किया गया वाई-फाई। Android उपकरणों के साथ, वाई-ऑटोमैटिक फाई की सक्रियता को अक्षम करना सरल है। यदि आपका फ़ोन Android 11 या उसके बाद का संस्करण चला रहा है, तो आप अपने फ़ोन को विशेष वाई-फ़ाई नेटवर्क से कनेक्ट होने से अपने आप रोक सकते हैं। इसे प्राप्त करने के लिए, वाई-फाई को स्वचालित रूप से चालू/बंद करें चुनें और फिर टॉगल को अपनी पसंदीदा सेटिंग में समायोजित करें।</p>
<p><strong>1. Android उपकरणों को स्वचालित रूप से Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट होने से रोकें</strong></p>
<p>वाई-फाई प्राथमिकताएं बदलें: आपके एंड्रॉइड फोन में एक संग्रहीत वाई-फाई नेटवर्क से स्वचालित रूप से कनेक्ट होने की क्षमता होती है, जब यह सीमा के भीतर होता है। यह पहले से ही कार्य करता है। अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए निर्देशों का पालन करके अपने फोन की वाई-फाई प्राथमिकताएं बदल सकते हैं।</p>
<p>- अपने फोन पर सेटिंग ऐप लॉन्च करें और मेनू से कनेक्शन चुनें। अगला, वाई-फाई टैप करें।</p>
<p>- ऊपरी दाएं कोने में तीन बिंदुओं को टैप करके इंटेलिजेंट वाई-फाई चुनें।</p>
<p>- स्वचालित रूप से चालू/बंद होने के लिए Wi-Fi के आगे स्थित स्विच को स्लाइड करें।</p>
<p>Android उपकरणों को स्वचालित रूप से Wi-Fi नेटवर्क से कनेक्ट होने से रोकें</p>
<p><strong>2. एडेप्टिव कनेक्टिविटी अक्षम करें</strong></p>
<p>यदि आप अनुकूली कनेक्टिविटी सक्षम करते हैं, तो आप जो कर रहे हैं, उसके आधार पर आपका पिक्सेल फोन मोबाइल डेटा और वाई-फाई के बीच आ-जा सकता है। इससे आपके फोन की बैटरी लाइफ तो बढ़ जाएगी, लेकिन यह आपको परेशान कर सकता है। फिर भी, यह मरम्मत योग्य है।</p>
<p><strong>- अपने फ़ोन की सेटिंग ऐप लॉन्च करें।</strong></p>
<p>- नेटवर्क और इंटरनेट के तहत अनुकूली कनेक्शन चुनें। इसके बाद, अनुकूली कनेक्टिविटी के बगल में स्थित स्विच को बंद स्थिति में फ़्लिप करें।<br />3. वाई-फाई कॉलिंग अक्षम करें</p>
<p>एक आवश्यक विशेषता जो आपको कॉल करने और संदेश प्राप्त करने में सक्षम बनाती है, भले ही आपका फोन मोबाइल सिग्नल प्राप्त करने में असमर्थ हो, वाई-फाई कॉलिंग है। हो सकता है कि वाई-फ़ाई का स्वत: सक्रियण इसलिए हुआ हो क्योंकि आपने अपने फ़ोन पर इस सुविधा को सक्षम किया हुआ है।</p>
<p>अपने Android डिवाइस पर, सेटिंग ऐप खोलें और Wi-Fi कॉलिंग को अक्षम करने के लिए कनेक्शंस पर स्पर्श करें। उसके बाद वाई-फाई कॉलिंग के आगे स्विच को टॉगल करें।</p>
<p><strong>4. स्थान सटीकता में सुधार के लिए वाई-फाई स्कैनिंग अक्षम करें</strong></p>
<p>आपका एंड्रॉइड फोन अत्यधिक सटीकता के साथ आपके स्थान को इंगित करने के लिए जीपीएस के अलावा ब्लूटूथ और पड़ोसी वाई-फाई नेटवर्क का उपयोग करता है। साथ ही, इसके परिणामस्वरूप आपके फ़ोन पर ऐप्स और सेवाएँ वाई-फ़ाई चालू कर सकती हैं। यहां बताया गया है कि इसे कैसे रोका जाए।</p>
<p>- अपने फ़ोन पर सेटिंग ऐप लॉन्च करें और नीचे स्क्रॉल करने के बाद स्थान टैप करें।</p>
<p>- स्थान सेवाएं चुनें और इसके आगे स्थित स्विच का उपयोग करके वाई-फाई स्कैनिंग बंद करें।</p>
<p><strong>5. ऐप्स को वाई-फाई को नियंत्रित करने से रोकें</strong></p>
<p>वाई-फाई, ब्लूटूथ, स्थान और अन्य सेवाओं को उन ऐप्स द्वारा चालू या बंद किया जा सकता है जिन्हें आपकी जानकारी के बिना आपके फ़ोन पर सिस्टम सेटिंग को ओवरराइड करने का एक्सेस दिया गया है। यह बोधगम्य है कि इनमें से एक एप्लिकेशन बार-बार आपके फोन पर वाई-फाई चालू कर रहा है। यदि आप नहीं चाहते हैं कि ऐसा हो तो ऐप्स को अपने एंड्रॉइड डिवाइस पर वाई-फाई सेटिंग्स को बदलने से कैसे रोकें।</p>
<p>- अपने फोन के सेटिंग ऐप में एप्लिकेशन पर जाएं।</p>
<p>- ऊपरी दाएं कोने में तीन बिंदुओं को टैप करके विशेष पहुंच चुनें।</p>
<p>- उन ऐप्स की सूची प्राप्त करने के लिए वाई-फाई कंट्रोल पर जाएं जो आपके फोन के वाई-फाई को प्रबंधित कर सकते हैं। वाई-फाई को चालू या बंद करने से रोकने के लिए ऐप की तरफ स्विच को टॉगल करें।</p>
<p><strong>6. नेटवर्क सेटिंग रीसेट करें</strong></p>
<p>यदि इनमें से कोई भी रणनीति काम नहीं करती है तो वाई-फाई को अपने आप चलने से रोकने का एकमात्र तरीका फोन की नेटवर्क सेटिंग्स को रीसेट करना है। ऐसा करने से, समस्या स्थायी रूप से ठीक हो जाएगी और आपके फ़ोन पर सभी नेटवर्क कॉन्फ़िगरेशन उनके डिफ़ॉल्ट मानों पर रीसेट हो जाएंगे।</p>
<p><strong>आपके Android की नेटवर्क सेटिंग्स को रीसेट करने में शामिल हैं:</strong></p>
<p>1. सेटिंग ऐप में सामान्य प्रबंधन तक पहुंचें।</p>
<p>2. नीचे स्क्रॉल करके रीसेट चुनें। फिर, रीसेट नेटवर्क सेटिंग्स चुनें।</p>
<p>3. प्रोसेसर को सामान्य ऑपरेशन में वापस लाने के लिए, रीसेट सेटिंग बटन दबाएं और ऑन-स्क्रीन निर्देशों का पालन करें।</p>
<p>Android पर नेटवर्क सेटिंग मेनू रीसेट करें</p>
<p>इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद आपका फ़ोन स्वचालित रूप से वाई-फ़ाई नेटवर्क से नहीं जुड़ना चाहिए।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/127695/lets-know-how-to-turn-off-the-automatic-connection-feature</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/127695/lets-know-how-to-turn-off-the-automatic-connection-feature</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Mar 2023 16:44:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-03/3.webp"                         length="73204"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        