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                <title>swatantra prabhat editorial - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>swatantra prabhat editorial RSS Feed</description>
                
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                <title>वक्फ के नए नियम: इतिहास बदलने और भविष्य गढ़ने वाले कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई कानून केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहकर समाज की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वास्तविक बदलाव लाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी उसका ऐतिहासिक महत्व अमिट हो जाता है। राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के साथ वक्फ संशोधन कानून ने भारतीय वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पारदर्शिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाबदेही और सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक और क्रांतिकारी कदम है। पुराने तंत्र में भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनमानी और अतिक्रमण ने संपत्तियों से मिलने वाले वास्तविक लाभ को लगातार रोके रखा था। अब वक्फ बोर्ड आधुनिक तकनीक</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175270/new-rules-of-waqf-steps-to-change-history-and-shape"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई कानून केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहकर समाज की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वास्तविक बदलाव लाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी उसका ऐतिहासिक महत्व अमिट हो जाता है। राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के साथ वक्फ संशोधन कानून ने भारतीय वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पारदर्शिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाबदेही और सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक और क्रांतिकारी कदम है। पुराने तंत्र में भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनमानी और अतिक्रमण ने संपत्तियों से मिलने वाले वास्तविक लाभ को लगातार रोके रखा था। अब वक्फ बोर्ड आधुनिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तरदायी प्रबंधन और समावेशी दृष्टिकोण के साथ काम करेगा। इसका असर केवल संपत्तियों तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और गरीबी उन्मूलन जैसी मूलभूत जरूरतों में सीधे दिखाई देगा। यह परिवर्तन करोड़ों मुस्लिम परिवारों के लिए सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और समृद्धि का एक नया संदेश लेकर आया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पहले अनियमितताओं और विवादों की लंबी श्रृंखला रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने उनकी वास्तविक उपयोगिता और विकास को लगातार बाधित किया। मनमाने दावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लंबित मुकदमे और अतिक्रमण ने कई संपत्तियों को विवादास्पद और अनुपयोगी बना दिया था। अब डिजिटल पोर्टल और ऑटोमेशन के माध्यम से प्रत्येक संपत्ति का पूरा जीवनचक्र ट्रैक किया जाएगा। पंजीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेखा-जोखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑडिट और मुकदमेबाजी सभी ऑनलाइन और पारदर्शी होंगे। छह माह के भीतर सभी संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज हो जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कोई भी संपत्ति छिपी नहीं रहेगी। यह पारदर्शिता भ्रष्टाचार को कम करेगी और वक्फ बोर्ड को एक वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तरदायी और आधुनिक संस्था में परिवर्तित कर देगी। परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संपत्तियों का उपयोग अधिक प्रभावी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुव्यवस्थित और न्यायसंगत ढंग से सुनिश्चित होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जिला कलेक्टर को संपत्ति सर्वेक्षण और विवाद समाधान की जिम्मेदारी दी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रबंधन का सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगा। अब निर्णय केवल सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच पर आधारित होंगे। अतिक्रमण स्वतः रोका जाएगा और संपत्तियां उनके वास्तविक लाभार्थियों तक सुरक्षित रूप से पहुंचेगी। कलेक्टर का समयबद्ध और तथ्यपरक दृष्टिकोण हर निर्णय को मज़बूत और भरोसेमंद बनाएगा। इसके परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वक्फ संपत्तियां शीघ्र और प्रभावी कल्याण कार्यों में लगेंगी। विवाद कम होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संपत्तियों का विकास तेज़ी से होगा और गरीब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विधवा एवं वंचित वर्गों तक लाभ सुनिश्चित रूप से पहुंचेगा। यह व्यवस्था स्थानीय प्रशासन की दक्षता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाबदेही और पारदर्शिता को नई ऊँचाई पर ले जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समावेशिता और संतुलित नेतृत्व अब वक्फ बोर्ड की नई पहचान बन चुका है। बोर्ड में अब कम से कम दो मुस्लिम महिलाएं और गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल होंगे। विभिन्न मुस्लिम संप्रदायों का प्रतिनिधित्व भी अनिवार्य होगा। इससे निर्णय प्रक्रिया व्यापक दृष्टिकोण वाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलित और संवेदनशील बनेगी। महिलाओं की भागीदारी प्रबंधन में संवेदनशीलता और सूझबूझ लाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि गैर-मुस्लिम सदस्य प्रशासनिक निगरानी और सहयोग सुनिश्चित करेंगे। यह संरचना वक्फ को केवल धार्मिक संस्था नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय संपदा और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक बनाएगी। प्रत्येक वर्ग का सक्रिय योगदान विकास की दिशा में सुनिश्चित होगा और कल्याण कार्यों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संपत्ति दान और वक्फ गठन के नए नियम इसे सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शी और न्यायसंगत बनाते हैं। अब केवल पाँच वर्ष से इस्लाम का पालन करने वाला वास्तविक और सच्चा मालिक ही संपत्ति वक्फ कर सकेगा। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वक्फ बाय यूजर</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी पुरानी और असुरक्षित प्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। वारिसों और महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकार अब सुनिश्चित और संरक्षित हैं। यह प्रावधान मनमानी और दुरुपयोग को रोकता है और दानकर्ताओं के विश्वास को सुदृढ़ करता है। संपत्तियों की संख्या बढ़ेगी और उनका उपयोग स्पष्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायपूर्ण और कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित होगा। यह कदम वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को समाप्त करते हुए समुदाय में भरोसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिरता और सुरक्षा की नई भावना पैदा करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद समाधान प्रक्रिया में सुधार न्याय की गति को तेज करेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। अब ट्रिब्यूनल के फैसलों पर हाईकोर्ट में अपील का अधिकार होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निर्णय अधिक भरोसेमंद और न्यायपूर्ण बनेंगे। बोर्ड का सीईओ अब संयुक्त सचिव स्तर का होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पेशेवर प्रबंधन और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। म्यूटवाल्ली</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">वक्फ संपत्ति का प्रबंधक या देखभालकर्ता</span>)<span lang="hi" xml:lang="hi"> की योग्यता और प्रशिक्षण में कड़ाई आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भ्रष्ट तत्वों की रोकथाम होगी। यह व्यवस्था विवादों को कम करके संपत्तियों को शीघ्र और प्रभावी विकास कार्यों में लगवाएगी। परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुदाय का विश्वास और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और संपत्तियां वास्तविक कल्याण कार्यों में सही तरीके से उपयोग होंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल निगरानी और पारदर्शी प्रबंधन के माध्यम से वक्फ संपत्तियां अब शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और गरीबी उन्मूलन में निर्णायक और स्थायी योगदान देंगी। हर निर्णय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योजना और संपत्ति का उपयोग सीधे समुदाय की भलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और समग्र कल्याण के लिए किया जाएगा। यह परिवर्तन मुस्लिम समुदाय को सशक्त बनाते हुए पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरक और मॉडल उदाहरण प्रस्तुत करेगा। भविष्य में वक्फ बोर्ड एक आदर्श और मानक संस्था के रूप में उभरेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां दक्षता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और उत्तरदायित्व साथ-साथ संचालित होंगे। इस नए ढांचे में हर संपत्ति का उपयोग न्यायसंगत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख तरीके से सुनिश्चित और सुदृढ़ रूप से किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रपति की मंजूरी ने वक्फ को नई ऊँचाइयों की ओर मजबूती से अग्रसर कर दिया है। अब प्रबंधन आधुनिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्पक्ष और कल्याणकारी दृष्टिकोण से संचालित होगा। संपत्तियां अब केवल निजी संपत्ति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की साझा और अमूल्य राष्ट्रीय विरासत बनेंगी। यह नया युग आशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्धि और सतत विकास का होगा। हर वक्फ संपत्ति केवल जमीन या भवन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न्याय और समग्र विकास का सशक्त प्रतीक बनेगी। यह कानून स्पष्ट रूप से सिद्ध करेगा कि सच्चा सुधार हमेशा समुदाय और राष्ट्र की भलाई करता है और वक्फ संपत्तियों को भविष्य में प्रगति और समृद्धि की नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 18:13:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु प्रतिष्ठानों पर आक्रमण: मानवता के अस्तित्व पर मँडराता गहरा संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>(डा.) मनमोहन प्रकाश</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व राजनीति के वर्तमान दौर में युद्ध का स्वरूप जिस तेजी से परिवर्तित हो रहा है, वह समूची मानवता के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है। परंपरागत रूप से युद्ध सीमाओं पर सेनाओं के मध्य लड़े जाते थे, जहाँ रणनीतिक मर्यादाओं का पालन करते हुए नागरिक क्षेत्रों, चिकित्सा संस्थानों और अनिवार्य बुनियादी ढांचों को संघर्ष से पृथक रखा जाता था। किंतु समकालीन युद्धों में यह लक्ष्मण रेखा पूरी तरह ध्वस्त होती दिखाई दे रही है। आज के संघर्षों में न केवल नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि परमाणु ठिकानों पर बढ़ते</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175182/attacks-on-nuclear-facilities-pose-a-deep-threat-to-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>(डा.) मनमोहन प्रकाश</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व राजनीति के वर्तमान दौर में युद्ध का स्वरूप जिस तेजी से परिवर्तित हो रहा है, वह समूची मानवता के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है। परंपरागत रूप से युद्ध सीमाओं पर सेनाओं के मध्य लड़े जाते थे, जहाँ रणनीतिक मर्यादाओं का पालन करते हुए नागरिक क्षेत्रों, चिकित्सा संस्थानों और अनिवार्य बुनियादी ढांचों को संघर्ष से पृथक रखा जाता था। किंतु समकालीन युद्धों में यह लक्ष्मण रेखा पूरी तरह ध्वस्त होती दिखाई दे रही है। आज के संघर्षों में न केवल नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि परमाणु ठिकानों पर बढ़ते हमलों के खतरे ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को और भी भयावह बना दिया है। युद्ध की इस बदलती नीति के साथ ही मानवरहित हथियारों और ड्रोन तकनीक के बढ़ते उपयोग ने जन-धन की हानि के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण के एक नए संकट को जन्म दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​वर्तमान में जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में इजरायल-हमास युद्ध ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को महंगाई की आग में झोंका है, बल्कि राष्ट्रों के बीच असुरक्षा की भावना को भी चरम पर पहुँचा दिया है। इस अस्थिरता के बीच अमेरिका और इजरायल की ईरान के प्रति सख्त नीतियों और ईरान के परमाणु अनुसंधान स्थलों को लक्षित करने की संभावित कोशिशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गहरे तनाव में डाल दिया है। जवाबी कार्रवाई के रूप में ईरान द्वारा इजरायल के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने की चेतावनी इस संकट को एक ऐसी परमाणु आपदा की ओर धकेल रही है, जिसका प्रभाव किसी एक राष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। आधुनिक युद्ध का यह स्वरूप, जो अब बुनियादी ढांचों और ऊर्जा एवं परमाणु संयंत्रों के इर्द-गिर्द सिमट गया है, पूरी मानव सभ्यता के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​परमाणु प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का सैन्य हमला केवल सामरिक कार्रवाई नहीं, बल्कि जीव-जगत के विरुद्ध एक अक्षम्य अपराध है। यदि किसी परमाणु संयंत्र में रेडियोधर्मी रिसाव होता है, तो उसका प्रभाव दूर दूर तक तक फैल सकता है, राष्ट्र की सीमाओं को लांघ सकता है और और मित्र एवं दुश्मन देश को पहचानने से भी मना कर सकता है। द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु हमला के साथ पूर्व में चेर्नोबिल और फुकुशिमा जैसी त्रासदियों में दुनिया ने रेडिएशन खतरे के प्रभाव को देखा है। रेडिएशन रिसाव आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य, कृषि भूमि की उर्वरता और जल स्रोतों को दशकों तक के लिए विषाक्त कर देता है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन के अतिरिक्त प्रोटोकॉल स्पष्ट रूप से परमाणु बिजली घरों को युद्ध में निशाना बनाने से प्रतिबंधित करते हैं, क्योंकि इनसे होने वाली क्षति की भरपाई असंभव है। इसके बावजूद, परमाणु ठिकानों को रणनीतिक दबाव और शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों की खुली अवहेलना है।​यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि यद्यपि परमाणु ठिकानों पर हमला तकनीकी रूप से प्रत्यक्ष 'परमाणु युद्ध' की श्रेणी में नहीं आता, किंतु इसके परिणाम किसी परमाणु हमले से कम विनाशकारी नहीं होते। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन युद्धों को देखते हुए आज लगभग सभी देशों ने गरीबी,शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों की उपेक्षा करते हुए घातक हथियारों के संग्रहण की दौड़ तेज कर दी है। भारत ने सदैव परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और वैश्विक सुरक्षा की नीति का समर्थन किया है, किंतु वर्तमान वैश्विक परिस्थितियाँ इस संयम को चुनौती दे रही हैं। यदि समय रहते संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसियों ने इन हमलों पर कठोर वैश्विक प्रतिबंध नहीं लगाए और महाशक्तियों ने अपनी हठधर्मिता का परित्याग नहीं किया, तो भविष्य के युद्ध "बिना परमाणु बम विस्फोट के परमाणु युद्ध" का रूप ले लेंगे, जिससे संपूर्ण पृथ्वी का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 19:36:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केरल चुनाव 2026 का बदलता परिदृश्य धर्म समाज और राजनीति की जटिल तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दक्षिण भारत का राज्य केरल हमेशा से अपनी अलग राजनीतिक और सामाजिक पहचान के लिए जाना जाता रहा है। यहां की राजनीति विचारधाराओं के टकराव से अधिक सामाजिक संतुलन और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रही है। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में कई ऐसे मुद्दे उभरकर सामने आए हैं जिन्होंने राज्य की चुनावी दिशा को नई बहसों की ओर मोड़ दिया है। इनमें धर्मांतरण का प्रश्न प्रेम विवाह को लेकर विवाद और राजनीतिक दलों की रणनीतियां प्रमुख हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य में इस समय पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सत्ता में है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी लगातार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175180/changing-scenario-of-kerala-elections-2026-complex-picture-of-religion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दक्षिण भारत का राज्य केरल हमेशा से अपनी अलग राजनीतिक और सामाजिक पहचान के लिए जाना जाता रहा है। यहां की राजनीति विचारधाराओं के टकराव से अधिक सामाजिक संतुलन और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रही है। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में कई ऐसे मुद्दे उभरकर सामने आए हैं जिन्होंने राज्य की चुनावी दिशा को नई बहसों की ओर मोड़ दिया है। इनमें धर्मांतरण का प्रश्न प्रेम विवाह को लेकर विवाद और राजनीतिक दलों की रणनीतियां प्रमुख हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य में इस समय पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सत्ता में है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी लगातार अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा भी मुकाबले में है। इस त्रिकोणीय संघर्ष ने चुनाव को और रोचक बना दिया है।धर्मांतरण और प्रेम विवाह का मुद्दा इस बार सबसे अधिक चर्चा में है। कुछ संगठनों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि पिछले एक दशक में हजारों लड़कियों का धर्म परिवर्तन हुआ है। वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया राजनीतिक मुद्दा मानते हैं। यह विवाद तब और गहरा गया जब कुछ अंतरधार्मिक विवाहों को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर तीखी बहस छिड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले भी महत्वपूर्ण हैं जिनमें यह स्पष्ट किया गया कि बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से धर्म चुनने और विवाह करने का पूरा अधिकार है। इस कानूनी स्थिति के बावजूद राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने अपने तरीके से जनता के सामने रख रहे हैं। राहुल गांधी ने भी इस तरह की फिल्मों और कथाओं को राज्य की छवि खराब करने वाला बताया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केरल की सामाजिक संरचना भी इस चुनाव को खास बनाती है। यहां लगभग तीस प्रतिशत मुस्लिम आबादी है जबकि बहुसंख्यक हिंदू समाज के साथ एक मजबूत ईसाई समुदाय भी मौजूद है। खासतौर पर उत्तरी और मध्य जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रभाव अधिक है और इन्हीं क्षेत्रों में कई सीटें निर्णायक भूमिका निभाती हैं। ऐसे में किसी भी दल के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धर्मांतरण का मुद्दा भले ही चर्चा में हो लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह सीधे मतदान के निर्णय को प्रभावित करे। केरल के मतदाता परंपरागत रूप से शिक्षा स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों को अधिक महत्व देते हैं। यही कारण है कि कई बार बड़े विवाद भी चुनावी परिणामों में अपेक्षित असर नहीं डाल पाते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी इस बार राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी का मानना है कि धार्मिक पहचान और सुरक्षा के मुद्दे पर वह मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है। लेकिन चुनौती यह है कि केरल में अब तक भाजपा को व्यापक जनसमर्थन नहीं मिल पाया है। यहां की राजनीति लंबे समय से वाम और कांग्रेस के बीच ही घूमती रही है।दूसरी ओर वाम मोर्चा अपनी कल्याणकारी योजनाओं के आधार पर चुनाव मैदान में है। खासकर महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं ने उसे मजबूत आधार दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्य की लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और यह वर्ग चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। 2021 के चुनाव में भी महिलाओं का झुकाव वाम मोर्चे की ओर देखा गया था।कांग्रेस और उसके सहयोगी दल भी इस बार वापसी की कोशिश में हैं। वे सरकार की कथित विफलताओं और प्रशासनिक मुद्दों को उठाकर जनता को अपने पक्ष में करने की रणनीति अपना रहे हैं। हालांकि उन्हें भी यह समझना होगा कि केवल विरोध के आधार पर चुनाव जीतना आसान नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून व्यवस्था का मुद्दा भी चुनावी बहस का हिस्सा है। विपक्ष समय समय पर राज्य में बढ़ते अपराधों और राजनीतिक हिंसा के आरोप लगाता रहा है। वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी उपलब्धियों को सामने रखती है। आम जनता के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण जरूर है लेकिन यह कितना असर डालेगा यह कहना कठिन है।दलित और पिछड़े वर्गों की भूमिका भी इस चुनाव में अहम है। केरल में इन वर्गों की संख्या भले ही बहुत अधिक न हो लेकिन उनका वोट कई सीटों पर निर्णायक हो सकता है। सभी दल इन वर्गों को साधने के लिए अलग अलग योजनाएं और वादे कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां तक भाजपा के सत्ता में आने की संभावना का सवाल है तो यह अभी भी चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी उपस्थिति जरूर बढ़ाई है लेकिन उसे व्यापक जनाधार बनाने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। केरल की राजनीतिक संस्कृति और मतदाताओं की सोच अन्य राज्यों से अलग है जहां केवल एक मुद्दे के आधार पर बड़ा बदलाव आना मुश्किल होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चुनाव में असली मुकाबला एक बार फिर वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के बीच ही नजर आता है। हालांकि भाजपा कुछ सीटों पर प्रभाव डाल सकती है और चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। लेकिन पूर्ण बहुमत हासिल करना उसके लिए कठिन चुनौती बना हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः कहा जा सकता है कि केरल का चुनाव केवल धर्म या किसी एक विवाद का चुनाव नहीं है। यह राज्य की सामाजिक संरचना विकास मॉडल और राजनीतिक परंपराओं का सम्मिलित प्रतिबिंब है। मतदाता यहां भावनाओं से अधिक विवेक से निर्णय लेते हैं और यही इस राज्य की सबसे बड़ी विशेषता है। 2026 का चुनाव भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा और परिणाम यह तय करेंगे कि केरल किस दिशा में आगे बढ़ेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 19:30:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मय हो जीवन हमारा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सनातन संस्कृति में श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक पात्र या धार्मिक प्रतीक मात्र नहीं हैं, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के लिए मर्यादा, आदर्श और मानवीय मूल्यों के शाश्वत स्रोत हैं। जब हम "राममय जीवन" की परिकल्पना करते हैं, तो इसका अर्थ केवल कर्मकांड या नाम-जप तक सीमित नहीं है, अपितु इसका वास्तविक अर्थ अपने विचारों, कर्तव्यों, संबंधों और आचरण में राम के आदर्शों को स्थान देना है। राममय जीवन का तात्पर्य उस सत्य, करुणा, न्याय, समरसता और कर्तव्यपरायणता से युक्त जीवन को जीना है जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा का पुंज बन सके।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​श्रीराम का जीवन हमें</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174145/may-our-life-be-blessed-by-ram"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images11.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सनातन संस्कृति में श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक पात्र या धार्मिक प्रतीक मात्र नहीं हैं, बल्कि वे प्रत्येक भारतीय के लिए मर्यादा, आदर्श और मानवीय मूल्यों के शाश्वत स्रोत हैं। जब हम "राममय जीवन" की परिकल्पना करते हैं, तो इसका अर्थ केवल कर्मकांड या नाम-जप तक सीमित नहीं है, अपितु इसका वास्तविक अर्थ अपने विचारों, कर्तव्यों, संबंधों और आचरण में राम के आदर्शों को स्थान देना है। राममय जीवन का तात्पर्य उस सत्य, करुणा, न्याय, समरसता और कर्तव्यपरायणता से युक्त जीवन को जीना है जो दूसरों के लिए भी प्रेरणा का पुंज बन सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, मनुष्य को धर्म और कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए। पिता के वचनों की रक्षा हेतु सहर्ष राज्य-त्याग, वनवास के कष्टों के बीच भी मित्रों के प्रति अटूट समर्पण, शत्रुओं के प्रति भी मर्यादित व्यवहार और विपरीत परिस्थितियों में भी संयमित आचरण आदि उनके चरित्र की वे विशेषताएँ हैं जो सिद्ध करती हैं कि मनुष्य को हर स्थिति में नैतिक श्रेष्ठता को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। आज के युग में, जहाँ स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और नैतिक पतन की चुनौतियाँ प्रबल हैं, वहाँ राममय जीवन की आवश्यकता और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।​</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस जीवन पद्धति का प्रथम आधार असत्य का परित्याग कर सत्य और शुचिता का वरण करना है। यदि मनुष्य अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सत्य को प्रतिष्ठापित करता है, तो परिवार और राष्ट्र में परस्पर विश्वास का वातावरण निर्मित होता है। वर्तमान दौर में प्रशासन, शिक्षा और राजनीति जैसे तमाम क्षेत्रों में भी इसी राममय दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि नैतिकता और पारदर्शिता की जड़ें मजबूत हो सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही, कर्तव्य और मर्यादा का पालन राममय जीवन का अनिवार्य अंग है। श्रीराम ने राजा होने के बावजूद स्वयं को मर्यादा के बंधन में रखा और लोकहित को सर्वोपरि माना। यही कारण है कि उनके शासन को 'रामराज्य' के रूप में एक आदर्श व्यवस्था माना गया, जिसका अर्थ किसी संकीर्ण मजहबी शासन से नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यायपूर्ण, समतामूलक और लोककल्याणकारी व्यवस्था से है जहाँ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी सम्मान और सुरक्षा प्राप्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​राममय जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक समरसता और करुणा है। श्रीराम ने निषादराज को गले लगाकर और शबरी के जूठे बेर खाकर समाज को यह संदेश दिया कि मानवता की सेवा ही सर्वोपरि धर्म है। उन्होंने जाति, वर्ग, भाषा और संप्रदाय की सीमाओं को तोड़कर समावेशी समाज की नींव रखी। आज के खंडित समाज में सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय सद्भाव के लिए यह दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, राममय जीवन संयम और आत्मानुशासन की मांग करता है। श्रीराम ने भौतिक सुखों के बजाय त्याग को चुना, जो हमें सिखाता है कि वास्तविक सफलता आत्मबल और चरित्र की शुचिता से प्राप्त होती है। यदि हम अपने आचरण में राम के इन गुणों को सूक्ष्म रूप में भी स्थान दे सकें, तो व्यक्तिगत सुख और राष्ट्रीय उत्थान का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाएगा।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:23:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन देशों का महायुद्ध और भारत के शांति प्रयासों की भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">युद्ध कभी भी किसी भी परिस्थिति में वैश्विक विकास के लिए एक बड़ा अवरोध ऐतिहासिक रूप से साबित हुआ है। युद्ध किसी भी बात का विकल्प नहीं है। युद्ध,हिंसा और संघर्ष प्राचीन काल से मानवीय सभ्यता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हुए हैं। इतिहास गवाह है कि कई देशों को युद्ध और हिंसा ने ही भूगोल से अदृश्य कर दिया है। तीन देशों इज़रायल, ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा महायुद्ध आज केवल सीमाओं और सामरिक वर्चस्व का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह समूची मानव सभ्यता के संतुलन को डगमगाने वाला एक भयावह वैश्विक संकट बन चुका</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174143/the-great-war-of-the-three-nations-and-the-role"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">युद्ध कभी भी किसी भी परिस्थिति में वैश्विक विकास के लिए एक बड़ा अवरोध ऐतिहासिक रूप से साबित हुआ है। युद्ध किसी भी बात का विकल्प नहीं है। युद्ध,हिंसा और संघर्ष प्राचीन काल से मानवीय सभ्यता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हुए हैं। इतिहास गवाह है कि कई देशों को युद्ध और हिंसा ने ही भूगोल से अदृश्य कर दिया है। तीन देशों इज़रायल, ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा महायुद्ध आज केवल सीमाओं और सामरिक वर्चस्व का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह समूची मानव सभ्यता के संतुलन को डगमगाने वाला एक भयावह वैश्विक संकट बन चुका है, इस युद्ध की जड़ें वर्षों से चले आ रहे वैचारिक मतभेदों, क्षेत्रीय प्रभुत्व की आकांक्षाओं और सामरिक गठबंधनों में छिपी रही हैं,</p><p style="text-align:justify;"> जो अब खुलकर एक भीषण सैन्य टकराव का रूप ले चुकी हैं, इज़रायल की आक्रामक सैन्य रणनीतियाँ, ईरान की जवाबी कार्रवाई और अमेरिका की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष भागीदारी ने इस संघर्ष को वैश्विक स्तर पर विस्तारित कर दिया है, इस महायुद्ध का सबसे अधिक दुष्प्रभाव मध्य पूर्व के देशों—इराक, सीरिया, लेबनान और यमन—पर पड़ रहा है जहाँ पहले से ही अस्थिरता और संघर्ष की स्थिति थी और अब यह युद्ध उनके लिए मानवीय संकट का रूप ले चुका है, इसके अतिरिक्त सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देश भी सुरक्षा और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं, जबकि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश महँगाई और आपूर्ति संकट से गहराई से प्रभावित हो रहे हैं, </p><p style="text-align:justify;">वैश्विक अर्थव्यवस्था इस संघर्ष के कारण गंभीर संकट में फँस गई है, कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल ने परिवहन, उद्योग और दैनिक जीवन को महँगा बना दिया है, खाद्यान्न संकट ने गरीब देशों में भूख और कुपोषण का खतरा बढ़ा दिया है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग असुरक्षित हो गए हैं, निवेशकों का विश्वास डगमगा रहा है और विश्व आर्थिक मंदी की आशंका गहराती जा रही है, जनजीवन पर इसका प्रभाव अत्यंत पीड़ादायक है,</p><p style="text-align:justify;"> युद्धग्रस्त क्षेत्रों में लोग अपने घरों से विस्थापित होकर शरणार्थी बनने को मजबूर हैं, लाखों बच्चों की शिक्षा बाधित हो चुकी है, अस्पतालों में संसाधनों की कमी ने जीवन को संकट में डाल दिया है, वहीं अन्य देशों में बेरोजगारी, महँगाई और मानसिक असुरक्षा का वातावरण गहराता जा रहा है, इस भीषण परिस्थिति में भारत ने शांति और संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं, भारत ने सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को अपनाते हुए संवाद और कूटनीति का मार्ग प्रशस्त किया है, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने लगातार युद्धविराम, शांतिपूर्ण समाधान और वार्ता की आवश्यकता पर बल दिया है, मानवीय सहायता के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुँचाने के प्रयास भी किए गए हैं और यह संदेश दिया गया है कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, </p><p style="text-align:justify;">भारत की यह संतुलित और दूरदर्शी नीति वैश्विक शांति के लिए एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है, आज जब पूरा विश्व इस महायुद्ध के दुष्परिणामों से जूझ रहा है तब यह आवश्यक हो जाता है कि सभी राष्ट्र अपने संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर मानवता के व्यापक हित को प्राथमिकता दें और इज़रायल, ईरान तथा अमेरिका जैसे राष्ट्र संवाद, संयम और सहयोग का मार्ग अपनाएँ, क्योंकि अंततः युद्ध केवल विनाश, पीड़ा और असंतुलन की कहानी लिखता है, जबकि शांति ही वह मार्ग है जो विश्व को स्थिरता, समृद्धि और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:19:18 +0530</pubDate>
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                <title>आपदा में मुनाफा कमाने वालों पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज हो</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मध्य-पूर्व एशिया के देशों से दुनिया में 40% कच्चे तेल की आपूर्ति होती है और एशिया महाद्वीप के चीन, भारत, जापान, कोरिया सहित कई देशों की ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल की 60–70% निर्भरता मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों पर ही है। ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसकी सीमा से एक महत्वपूर्ण समुद्री शॉर्टकट मार्ग निकलता है, जो महासागरीय व्यापार की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। पिछले चार सप्ताह से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के साथ चल रहा युद्ध, जिसमें अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकले हैं, ने भारत सहित समूचे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174140/a-case-of-treason-should-be-registered-against-those-who"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas16.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य-पूर्व एशिया के देशों से दुनिया में 40% कच्चे तेल की आपूर्ति होती है और एशिया महाद्वीप के चीन, भारत, जापान, कोरिया सहित कई देशों की ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल की 60–70% निर्भरता मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों पर ही है। ईरान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसकी सीमा से एक महत्वपूर्ण समुद्री शॉर्टकट मार्ग निकलता है, जो महासागरीय व्यापार की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। पिछले चार सप्ताह से अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के साथ चल रहा युद्ध, जिसमें अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकले हैं, ने भारत सहित समूचे विश्व के अधिकांश देशों में तेल और गैस संकट की आशंका को बढ़ा दिया है। ईरान अपनी सीमा से अमेरिका समर्थित देशों को कच्चे तेल के परिवहन की अनुमति नहीं दे रहा है, जिससे यह संघर्ष अब अमेरिका की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। वहीं, इजराइल के लिए इस प्रकार के युद्ध कोई नई बात नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">   ईरान-अमेरिका के इस लंबे संघर्ष ने भारत सहित दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत, जो विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला देश है, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 60% से अधिक हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है, और इसका एक बड़ा भाग हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से आता है। भीषण युद्ध और बाधित मार्गों के बावजूद, भारत सरकार की सशक्त विदेश नीति के कारण भारतीय तिरंगे वाले जहाज कच्चा तेल और गैस लेकर देश तक पहुँच रहे हैं। ऐसे वैश्विक संकट के समय प्रत्येक भारतीय को अपनी सरकार पर विश्वास और गर्व होना चाहिए। कोरोना महामारी के दौरान भी भारत ने न केवल स्वयं को संभाला, बल्कि विश्व को संकट प्रबंधन का उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p style="text-align:justify;">   वर्तमान युद्ध परिस्थितियों को देखते हुए एक बार फिर कच्चे तेल और गैस की कमी की आशंका है। ऐसे में केंद्र सरकार को सक्रिय होकर देश के नागरिकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आवश्यक कठोर कदम उठाने होंगे। कोविड काल में कुछ असामाजिक तत्वों ने खाद्य वस्तुओं की कृत्रिम कमी की अफवाह फैलाकर गरीब और मध्यम वर्ग का शोषण किया था। अब पुनः इस युद्ध की आड़ में कुछ लोग आपदा को अवसर बनाकर मुनाफाखोरी की तैयारी में हैं। पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर बढ़ती भीड़ इसी ओर संकेत करती है। अतः केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि वे जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर तक सख्ती से निगरानी रखें और आपदा के समय आम जनता का शोषण करने वाले लोगों के विरुद्ध राष्ट्रद्रोह जैसे कठोर प्रावधानों के तहत कार्रवाई करें, ताकि ऐसे तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, यदि सरकार कच्चे तेल और गैस की खपत को नियंत्रित करना चाहती है, तो अप्रैल-मई की भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों को अस्थायी रूप से बंद करने, तथा अनावश्यक रूप से चलने वाले वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण रखने तथा आवश्यकता अनुसार सीमित लॉकडाउन जैसे कदम भी राष्ट्रहित, जनहित और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। आपदा के समय संयम, सजगता और कठोर प्रशासनिक कार्रवाई ही देश को संकट से उबार सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अरविंद रावल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:07:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चुनावी घमासान में तीखे आरोप और बदलते समीकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल से लेकर केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी तक हर राज्य में राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। आरोप-प्रत्यारोप, बयानबाजी और रणनीतिक गठबंधनों के बीच यह चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं और जनसमर्थन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें सबसे बड़ा घुसपैठिया तक कह दिया। कोलकाता में ईद की नमाज के बाद दिए गए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174038/sharp-allegations-and-changing-equations-in-the-electoral-battle"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल से लेकर केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी तक हर राज्य में राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुके हैं। आरोप-प्रत्यारोप, बयानबाजी और रणनीतिक गठबंधनों के बीच यह चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं और जनसमर्थन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए उन्हें सबसे बड़ा घुसपैठिया तक कह दिया। कोलकाता में ईद की नमाज के बाद दिए गए उनके भाषण ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल में अघोषित रूप से राष्ट्रपति शासन जैसा माहौल बना रही है और लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वोटर सूची में बदलाव के जरिए नागरिकों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे उनकी पार्टी किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता के इस बयान को भारतीय राजनीति में बढ़ती तीखी भाषा और ध्रुवीकरण का प्रतीक माना जा रहा है। चुनावी मौसम में इस तरह के आरोप अक्सर मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगाए जाते हैं, लेकिन इनके दूरगामी प्रभाव भी होते हैं। इससे न केवल राजनीतिक माहौल गरमाता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी असर पड़ सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर केरल में भी सियासी बयानबाजी अपने चरम पर है। वहां के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर भाजपा की बी टीम की तरह काम करने का आरोप लगाया। यह बयान उस समय आया जब राहुल गांधी ने सवाल उठाया था कि केंद्रीय एजेंसियां अन्य विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन केरल के मुख्यमंत्री पर ऐसा कोई दबाव क्यों नहीं दिखता। इस पर पलटवार करते हुए विजयन ने कांग्रेस की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केरल की राजनीति परंपरागत रूप से वामपंथी और कांग्रेस गठबंधन के बीच घूमती रही है, लेकिन इस बार भाजपा भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। हालांकि राज्य में अब तक भाजपा को उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है, फिर भी वह अपने संगठन और रणनीति के जरिए नई जमीन तलाश रही है। ऐसे में आरोपों का यह दौर चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम में भी चुनावी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कांग्रेस ने कई क्षेत्रीय और वामपंथी दलों के साथ गठबंधन कर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति अपनाई है। यहां बांग्लादेशी घुसपैठ, असमिया पहचान और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। भाजपा जहां अपनी उपलब्धियों और नेतृत्व के दम पर सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष एकजुटता के जरिए उसे रोकने की कोशिश कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में स्थिति कुछ अलग है, जहां लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है। यहां एम के स्टालिन के नेतृत्व में द्रविड़ मुनेत्र कषगम की सरकार है और कांग्रेस उसके साथ गठबंधन में है। भाजपा यहां अपने संगठन को मजबूत करने में लगी है, लेकिन राज्य की राजनीति में उसकी भूमिका अभी सीमित मानी जाती है। इसके बावजूद वह इस चुनाव को भविष्य की संभावनाओं के रूप में देख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुडुचेरी में भी मुकाबला रोचक होता जा रहा है। यहां सत्ता में मौजूद गठबंधन अपनी स्थिति बचाने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी वापसी की राह तलाश रहे हैं। छोटे राज्य होने के बावजूद यहां के चुनाव का राष्ट्रीय राजनीति पर असर पड़ सकता है, क्योंकि यह गठबंधन की राजनीति का एक अहम उदाहरण है।चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार पांचों राज्यों में अलग-अलग चरणों में मतदान होगा और चार मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। कुल मिलाकर यह पूरी चुनाव प्रक्रिया लगभग पचास दिनों तक चलेगी, जिसमें राजनीतिक दलों को जनता तक अपनी बात पहुंचाने का पर्याप्त समय मिलेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान कई जगहों पर तनाव और झड़प की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल के बारानगर में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच हुई झड़प इस बात का संकेत है कि चुनावी माहौल कितना संवेदनशील हो चुका है। ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय हैं और प्रशासन के लिए चुनौती भी।इन चुनावों का महत्व केवल राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आगामी लोकसभा चुनावों से पहले यह एक बड़ा संकेत होगा कि जनता किस दिशा में सोच रही है और किस नेतृत्व पर भरोसा कर रही है।कुल मिलाकर देखा जाए तो पांच राज्यों के ये चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक विमर्श का आईना भी हैं। नेताओं के बयान, गठबंधनों की रणनीति और जनता के मुद्दे मिलकर एक ऐसा परिदृश्य बना रहे हैं, जो आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:18:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तैयारी ही विजय है: वैश्विक संकट में भारत का नेतृत्व मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब वैश्विक क्षितिज पर युद्ध और अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब किसी राष्ट्र की असली पहचान उसके साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी और दूरदर्शी नेतृत्व से होती है। लोकसभा में प्रधानमंत्री द्वारा पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर दिया गया संदेश इसी शक्ति और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। उनका संबोधन केवल एक सामान्य चेतावनी नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे राष्ट्र को सतर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठित और सशक्त बनाने वाला दृढ़ आह्वान था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया कि यह संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसके प्रभाव पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे। ऐसे निर्णायक समय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174036/preparation-is-victory-indias-leadership-mantra-in-global-crisis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब वैश्विक क्षितिज पर युद्ध और अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब किसी राष्ट्र की असली पहचान उसके साहस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी और दूरदर्शी नेतृत्व से होती है। लोकसभा में प्रधानमंत्री द्वारा पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर दिया गया संदेश इसी शक्ति और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। उनका संबोधन केवल एक सामान्य चेतावनी नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे राष्ट्र को सतर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगठित और सशक्त बनाने वाला दृढ़ आह्वान था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया कि यह संघर्ष सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसके प्रभाव पूरी दुनिया को प्रभावित करेंगे। ऐसे निर्णायक समय में भारत को कोविड काल जैसी अनुशासित एकजुटता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सजगता और मजबूत तैयारी के साथ आगे बढ़ना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि हर चुनौती को अवसर में बदला जा सके और राष्ट्र की प्रगति अविरल बनी रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया का यह संघर्ष महज़ राजनीतिक टकराव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक गहराते वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट की चेतावनी भी है। भारत जैसे तेजी से उभरते राष्ट्र के लिए यह स्थिति अत्यंत निर्णायक बन जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ऊर्जा ही विकास की धुरी है। ऐसे संवेदनशील समय में प्रधानमंत्री ने जिस आत्मविश्वास के साथ देश को आश्वस्त किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह सरकार की दूरदर्शिता और ठोस रणनीति का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीते वर्षों में उठाए गए मजबूत और समयोचित कदम आज भारत को इस वैश्विक संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखने में सक्षम हैं। ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने के लिए अपनाई गई नीतियां अब अपनी प्रभावशीलता सिद्ध कर रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाती हैं कि सही समय पर लिए गए निर्णय भविष्य की बड़ी चुनौतियों को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति आज उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। आयात के स्रोतों का विस्तार कर उन्हें अनेक देशों तक फैलाना एक ऐसी रणनीति रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने देश को किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने से मुक्त कर दिया है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में यह नीति भारत के लिए सुरक्षा कवच सिद्ध हो रही है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से संचालित हो रही हैं और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। सामरिक पेट्रोलियम भंडार का निर्माण इस दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने आपातकालीन परिस्थितियों में भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत बनने की नई शक्ति प्रदान की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू स्तर पर एलपीजी और अन्य आवश्यक ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बावजूद आम नागरिकों को राहत पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सरकार की जनहितकारी सोच को दर्शाता है। कोविड काल के कठिन समय में जिस प्रकार आवश्यक वस्तुओं को नियंत्रित कीमतों पर उपलब्ध कराया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी संवेदनशील और जिम्मेदार नीति को आज भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। किसानों और आम परिवारों को आर्थिक दबाव से बचाना केवल एक नीति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह स्पष्ट करता है कि देश के विकास के साथ-साथ जनकल्याण को भी समान और सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां आज केवल प्रगति की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक मंच पर एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। सौर ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पवन ऊर्जा और जैव ईंधन के तीव्र विस्तार ने देश को पारंपरिक ईंधनों की निर्भरता से बड़ी हद तक मुक्त कर दिया है। इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की नीति ने एक ओर जहां विदेशी मुद्रा की भारी बचत सुनिश्चित की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दूसरी ओर किसानों को आय के नए और स्थायी स्रोत प्रदान किए हैं। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे के तीव्र विद्युतीकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन ने ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों को नई गति दी है। ये सभी दूरदर्शी प्रयास आज के वैश्विक संकट के बीच भारत को मजबूती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता प्रदान कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ देश को सचेत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह नेतृत्व की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी संकट में सबसे बड़ा खतरा बाहरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भीतर की घबराहट और अफवाहें होती हैं। ऐसे समय में संयम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जागरूकता और जिम्मेदारी ही सबसे बड़ी ताकत बनती है। अपील की कि वे सतर्क रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु विचलित न हों। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूटनीतिक स्तर पर भारत शांति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलन और स्थिरता की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी वैश्विक जिम्मेदारी और बढ़ते प्रभाव का सशक्त प्रमाण है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को केवल एक नीति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। रणनीतिक भंडारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और नवीकरणीय विकल्पों पर निरंतर जोर ने देश को एक मजबूत और स्थायी आधार प्रदान किया है। आज जब विश्व अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत की स्थिरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और मजबूती उसकी दूरदर्शी नीतियों की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित रणनीति और दृढ़ संकल्प किसी भी बड़े संकट का सामना करने में सबसे प्रभावी हथियार होते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए भारत जिस तीव्र गति से नई ऊर्जा तकनीकों और संसाधनों की दिशा में आगे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह उसकी दूरदर्शिता और संकल्प का प्रमाण है। ग्रीन हाइड्रोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत परमाणु ऊर्जा और उच्च इथेनॉल मिश्रण जैसी महत्वाकांक्षी पहलें देश को न केवल आत्मनिर्भर बना रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर कर रही हैं। प्रधानमंत्री का यह आह्वान कि कोविड काल जैसी एकजुटता आज भी उतनी ही आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल वर्तमान संकट तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य की हर चुनौती के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन है। यह सत्य और भी सशक्त होकर सामने आता है कि जब पूरा राष्ट्र एकजुट होकर आगे बढ़ता है और नेतृत्व दृढ़ एवं दूरदर्शी होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कोई भी संकट भारत की प्रगति की गति को थाम नहीं सकता।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:14:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अनुपम अद्वितीय विलक्षण नेतृत्व क्षमता के धनी हैं नरेंद्र मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों की काट कर अपनी नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपरिमित दक्षता भी रखते हैं इस मामले में उनका कोई सानी नहीं है यह हम नही रिकार्ड बयान कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तमाम आलोचनाओं और विरोधियों के जबरदस्त साजिशी प्रहार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत बन कर उभरे है जो धरातल पर अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के बूते पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173939/narendra-modi-is-blessed-with-unique-leadership-abilities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/pm-narendra-modi-2.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों की काट कर अपनी नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपरिमित दक्षता भी रखते हैं इस मामले में उनका कोई सानी नहीं है यह हम नही रिकार्ड बयान कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमाम आलोचनाओं और विरोधियों के जबरदस्त साजिशी प्रहार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत बन कर उभरे है जो धरातल पर अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपना अलग अनूठा व्यक्तित्व रखते हैं उन्होंने किसी भी राजनीतिक नेता के सरकार के लम्बे समय तक नेतृत्व करने के रिकार्ड को तोड़ दिया है। भारत की राजनीति में एक नया इतिहास रचते हुए पीएम नरेंद्र मोदी अब देश के सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को पीछे छोड़ दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक उनका सफर लगातार जीत, मजबूत नेतृत्व और राजनीतिक स्थिरता की मिसाल बनकर उभरा है। भारतीय राजनीति में बीता रविवार 22 मार्च विशेष दिन बन गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  एक ऐसा रिकॉर्ड तोड़ा जो दशकों से किसी और के नाम था. सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने लगातार 8,930 दिनों तक किसी सरकार का नेतृत्व किया था. यह भारत में किसी भी सरकार के मुखिया का अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल था. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह लंबे समय तक इस पद पर बने रहे और अपने कार्यकाल में कभी चुनाव नहीं हारे। साल 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए नाम सामने आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2019 और 2024 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। खास बात यह है कि अपने पूरे राजनीतिक करियर में उन्होंने अब तक कोई बड़ा चुनाव नहीं हारा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर. 2001 से 2014 तक करीब 13 साल तक वो गुजरात की सत्ता संभालते रहे. इस दौरान गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा पूरे देश में होती थी। 2014 में जब वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने. तब से इस रिपोर्ट को लिखने तक लगातार. इन दोनों कार्यकालों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 8,931 दिन बनता है.सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग अब पद पर 8930 दिनों के साथ दूसरे स्थान पर है. चामलिंग ने सिक्किम की लगातार 24 साल और 165 दिनों तक सेवा की. इससे वे ना सिर्फ भारत में बल्कि विश्व स्तर पर सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक बन गए. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी कड़ी में तीसरा स्थान ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास है. उन्होंने 2000 से 2024 तक राज्य पर शासन किया. उन्होंने लगभग 24 साल और 99 दिनों का कार्यकाल पूरा किया. पटनायक के लंबे शासन की पहचान राजनीतिक स्थिरता और लगातार चुनावी जीत रही है. इसने उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक टिके रहने वाले नेताओं में से एक बनाए रखा.आपको बता दें इस रैंकिंग को जो बात खास रूप से दिलचस्प बनाती है वह यह है कि इसमें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों के रूप में बिताए गए समय को जोड़ा गया है. जिन नेताओं ने सिर्फ प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दीं जैसे कि जवाहरलाल नेहरू, वे इस खास गणना के तहत शीर्ष तीन में शामिल नहीं हैं. भले ही उनका कार्यकाल लंबा रहा हो.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी बता दें कि वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने 23 सालों से ज्यादा समय तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया है. वे इस लिस्ट से बाहर हैं. लेकिन उनका कार्यकाल भारतीय इतिहास में किसी एक पद पर सबसे लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले कार्यकालों में से एक हैप्रधानमंत्री मोदी का यह रिकॉर्ड अकेला नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी के नाम और भी कई उपलब्धियां हैं. गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री किसी और मुख्यमंत्री ने गुजरात में इतना लंबा कार्यकाल नहीं किया.</div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि किसी भी प्रधानमंत्री की तुलना में मोदी सबसे ज्यादा अनुभव लेकर दिल्ली पहुंचे थे. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आजादी के बाद पैदा हुए पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 1950 में हुआ. वो पहले प्रधानमंत्री हैं जो आजाद भारत में पैदा हुए. तीन बार लगातार जीत - 2014, 2019 और 2024 तीनों लोकसभा चुनावों में जनता ने उन्हें चुना.2019 में भाजपा ने 303 सीटें जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत की। 2024 में 240 सीटों के साथ एनडीए गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी। जवाहरलाल नेहरू के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए नियुक्त होने वाले एकमात्र प्रधानमंत्री हैं। लगातार भारत का प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का दिवंगत इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड मोदी ने तोड़ उन्होंने पिछले साल इंदिरा गांधी (4,077 दिन) को लगातार प्रधानमंत्री रहने के मामले में पीछे छोड़ दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सितंबर 2025 में अपने तीसरे कार्यालय के दौरान वे लगातार सबसे लंबे समय तक पीएम रहने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए। साथ ही वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए हैं।इसी सिलसिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है. उन्होंने लिखा, "नरेंद्र मोदी का पूरा जीवन देश और देशवासियों की सेवा को समर्पित रहा है. गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक यह यात्रा सेवा, ईमानदारी और देश को सबसे पहले रखने की यात्रा है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के के मुताबिक पीएम मोदी ने अपने सफर को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम शुरू किया, तब राज्य कई बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा था। गुजरात भूकंप, चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों ने उन्हें और मजबूत बनाया और उन्होंने राज्य को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने अपनी मां की एक सीख का भी जिक्र किया, गरीबों के लिए काम करना और कभी रिश्वत न लेना, जैसी सीख को उन्होंने अपने जीवन का मार्गदर्शन बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएम मोदी के अनुसार, उनके कार्यकाल में गुजरात ने कृषि, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी तरक्की की और एक मजबूत राज्य के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया, तब देश में भरोसे का संकट था, लेकिन जनता ने उन्हें मजबूत समर्थन दिया।पीएम मोदी ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक मजबूत देश बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने महिलाओं (नारी शक्ति), युवाओं और किसानों के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि देश की सेवा करना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और लंबे सार्वजनिक जीवन की जमकर सराहना की है। अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी की दशकों की सेवा ने भारत में एक नया दौर शुरू किया है। उन्होंने गरीबों को अधिकार दिलाने, विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और दुनिया में भारत की छवि मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।उन्होंने यह भी कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए पीएम मोदी ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है और पिछले 24 साल से अधिक समय से बिना छुट्टी लिए देश की सेवा कर रहे हैं। अमित शाह ने बताया कि पीएम मोदी को जनता का अपार प्यार और समर्थन मिला है। वास्तव में नरेन्द्र मोदी एक बिरले व्यक्तित्व है यह बात उनके विरोधी भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:13:27 +0530</pubDate>
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                <title>स्त्री शिक्षा, सुरक्षा पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री की स्थिति एक ओर उल्लेखनीय प्रगति का संकेत देती है तो दूसरी ओर गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट करती है। स्त्री शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ होती है, बीते कुछ दशकों में भारत में स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार देखने को मिला है, बालिका नामांकन दर में वृद्धि, माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर में कमी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173937/need-for-serious-discussion-on-womens-education-security"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री की स्थिति एक ओर उल्लेखनीय प्रगति का संकेत देती है तो दूसरी ओर गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट करती है। स्त्री शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ होती है, बीते कुछ दशकों में भारत में स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार देखने को मिला है, बालिका नामांकन दर में वृद्धि, माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर में कमी और उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी ने सामाजिक संरचना को नया स्वरूप दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि शिक्षा स्त्री सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है, किंतु यह भी यथार्थ है कि ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में बालिकाओं की शिक्षा अब भी सामाजिक दबाव, घरेलू श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं से प्रभावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में स्त्री की स्थिति आधुनिक भारत की स्त्री आज शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में पहले की तुलना में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही है, पंचायत से लेकर संसद तक उसकी भागीदारी बढ़ी है और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इसके बावजूद घरेलू स्तर पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता, समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे अब भी पूर्ण समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, यह स्थिति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि कानूनी अधिकार और सामाजिक स्वीकृति के बीच अभी भी एक स्पष्ट अंतर विद्यमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्त्रियों के विरुद्ध अपराध  चिंता का विषय है हाल के वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के स्वरूप में भी बदलाव आया है, पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध,ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग से जुड़ी घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, दहेज से संबंधित मामले और सार्वजनिक स्थलों पर असुरक्षा की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि शहरीकरण और तकनीकी प्रगति के बावजूद सामाजिक मानसिकता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है, यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक चेतना के स्तर पर भी गंभीर आत्ममंथन की मांग करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कानूनी प्रावधान और प्रशासनिक दायित्व पर एक दृष्टि डालें तो भारत में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए सुदृढ़ कानूनी ढांचा उपलब्ध है, जिसमें घरेलू हिंसा निषेध अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून, दहेज निषेध अधिनियम तथा हाल के आपराधिक कानून संशोधन शामिल हैं, किंतु प्रशासनिक दृष्टि से चुनौती इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित न्याय और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण की है, पुलिस, न्यायपालिका और स्थानीय प्रशासन के समन्वय के बिना केवल कानूनों का अस्तित्व पर्याप्त नहीं सिद्ध हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक सहभागिता और विकास की अनिवार्यता — स्त्रियों की आर्थिक भागीदारी को राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त के रूप में स्वीकार किया जा चुका है, स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म वित्त योजनाओं, ग्रामीण उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान किए हैं, फिर भी श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है, जिसका कारण सामाजिक जिम्मेदारियों का असमान बोझ, कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार की अधिकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया और सामाजिक दृष्टिकोण में मीडिया स्त्री की छवि निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, सकारात्मक उदाहरणों के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि स्त्री को संवेदनशीलता के साथ सम्मानजनक और संतुलित रूप में प्रस्तुत किया जाए, जिससे समाज में समानता और गरिमा का संदेश सुदृढ़ हो सके। भविष्य की दिशा और नीतिगत अपेक्षाएँ देखीं जाएं तो स्त्री की स्थिति में वास्तविक सुधार के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार को समग्र दृष्टिकोण से जोड़ना होगा, साथ ही सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन के लिए पुरुषों और बालकों को भी लैंगिक समानता के मूल्यों से जोड़ना अनिवार्य होगा, यह केवल महिला केंद्रित योजनाओं से नहीं बल्कि सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक संवेदनशीलता से संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्त्री की स्थिति किसी एक वर्ग या समुदाय का विषय नहीं बल्कि राष्ट्र की सामाजिक परिपक्वता और लोकतांत्रिक गुणवत्ता का दर्पण है, जब तक स्त्रियाँ भयमुक्त वातावरण में शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में समान अवसर प्राप्त नहीं करेंगी तब तक समावेशी विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा, इसलिए स्त्री सशक्तिकरण को नीतिगत प्राथमिकता के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में भी स्वीकार किया जाना समय की आवश्यकता है।<br /><br />संजीव ठाकुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:08:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सेवा का सूर्योदय, इतिहास का सूर्यास्त नहीं: मोदी ने रचा 'अमर महाकाव्य'</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले केवल कल्पनाओं और स्वप्नों में ही संभव प्रतीत होता था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी दूरदर्शी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्षपूर्ण और प्रेरक यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वे भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय और जनप्रिय सरकार प्रमुख बन चुके हैं। पूर्व सिक्किम मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के </span>8,930 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173935/sunrise-of-service-not-sunset-of-history-modi-created-an"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/modi-meditating.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले केवल कल्पनाओं और स्वप्नों में ही संभव प्रतीत होता था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी दूरदर्शी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्षपूर्ण और प्रेरक यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वे भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय और जनप्रिय सरकार प्रमुख बन चुके हैं। पूर्व सिक्किम मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के </span>8,930 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने यह जीवंत और अभूतपूर्व संदेश दिया कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास कितना अडिग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराजेय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अविचलनीय और प्रगाढ़ हो सकता है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की अनवरत निष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अथक परिश्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निस्वार्थ समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदयस्पर्शी जनसंपर्क और हर नागरिक के कल्याण की अपार प्रतिबद्धता का अनमोल प्रतीक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर आज तक मोदी जी की हर सुबह नई चुनौतियों और नए संकल्पों से शुरू हुई। </span>2001 <span lang="hi" xml:lang="hi">में जब उन्होंने राज्य की बागडोर संभाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब गुजरात आपदा और अराजकता के बीच जूझ रहा था। मात्र </span>13 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षों में उन्होंने उसे विकास का प्रतीक बना दिया – ‘वाइब्रेंट गुजरात’ से लेकर द्वीपों के कोनों तक बुनियादी ढाँचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और समृद्धि का ऐसा जाल बुन दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज हर नागरिक के जीवन को छूता है। हर घर में बिजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क और स्वच्छता जैसी छोटी-छोटी बातें उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाकर ‘सबका साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबका विकास’ का मंत्र साकार किया। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों में उन्होंने कभी व्यक्तिगत आराम नहीं लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी परिवार की चिंता नहीं की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राष्ट्र और जनता की भलाई की। यही कारण है कि आज हर गाँव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर शहर में उनका नाम ‘विकास पुरुष’ के रूप में गूँजता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">26 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">को जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब देश एक नए युग की दहलीज पर खड़ा था। </span>2019 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में लगातार जनता ने उन्हें चुनकर यह स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व में निरंतरता और दृढ़ता कितनी महत्वपूर्ण है। इन </span>4,319 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों के प्रधानमंत्रित्व में उन्होंने सिर्फ नीतियाँ नहीं बनाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों जीवन संवार दिए। उज्ज्वला योजना से लेकर आयुष्मान भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जन धन योजना से लेकर डिजिटल इंडिया – हर योजना के पीछे छुपी है किसी गरीब परिवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी किसान या किसी महिला की एक छोटी-सी उम्मीद और कहानी। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की इस सेवा में उन्होंने कभी राजनीतिक विरोध को बहाना नहीं बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर चुनौती को अवसर में बदलकर दिखाया। यही उनका अद्वितीय और प्रेरक अंदाज है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज जब हम </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की गिनती करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हर दिन अपने आप में एक प्रेरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहसिक और उत्थानकारी कहानी बन जाता है। कभी आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी वैश्विक महामारी में टीकाकरण का अद्भुत चमत्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी आर्थिक संकट के समय आत्मनिर्भर भारत के आदर्श का नारा – हर घटना में नेतृत्व की दृढ़ता और दूरदर्शिता झलकती है। मोदी जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुना हुआ नेता केवल सत्ता का प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि निस्वार्थ सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के प्रति जिम्मेदारी और देशभक्ति का प्रतीक भी हो सकता है। उन्होंने पद की गरिमा कभी नहीं खोई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता के लालच में कभी नहीं डूबे। उनकी हर यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर भाषण और हर निर्णय पूर्णतया जनता के हित और राष्ट्र के कल्याण के लिए रहा। छोटी-छोटी बातें – ‘मैं हूँ ना’ का भरोसा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मन की बात’ में आम आदमी से सहज और सीधे संवाद – इन्हीं ने उन्हें हर नागरिक का अपना और पूरे देश का प्रेरक नेता बना दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस रिकॉर्ड के पीछे छिपा है अडिग संकल्प</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराजेय इच्छाशक्ति और निस्वार्थ सेवा की प्रेरक भावना। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन मतलब </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">रातें जागना</span>, 8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबहें नई उम्मीद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई चुनौतियाँ और नए संकल्प लेकर उठना। उन्होंने कभी छुट्टी नहीं ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी थकान को स्वीकार नहीं किया। गुजरात से दिल्ली तक की इस अद्वितीय और प्रेरक यात्रा में उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि लोकतंत्र में अगर इरादा मजबूत हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई भी रिकॉर्ड असंभव नहीं है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जी-</span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">की अध्यक्षता कर चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वैश्विक पटल पर ‘विश्वगुरु’ बनने की ओर अग्रसर है – यह सब </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की अथक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निस्वार्थ और प्रेरक सेवा का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह रिकॉर्ड केवल आंकड़ों का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भावनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और जनता के प्रति सच्चे समर्पण का प्रतीक है। हर माँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान और युवा आज महसूस करता है कि उनके लिए कोई है जो कभी नहीं रुकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उनके सुख-दुःख में हर पल खड़ा रहता है। मोदी जी ने सत्ता को सेवा में बदल दिया। उन्होंने दिखाया कि चुना हुआ नेता केवल पद का अधिकारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जनता के लिए अडिग सहारा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शक और प्रेरणा बन सकता है। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन की इस यात्रा में उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल राष्ट्र और जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यही वजह है कि आज पूरा देश उन्हें श्रद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्मान और गर्व के साथ सलाम करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण पल पर हमें गर्व होना चाहिए। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन का ‘मोदी युग’ केवल एक नेता की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके विश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी मेहनत और उनके सपनों की प्रेरक कहानी है। यह स्पष्ट करता है कि जब जनता का भरोसा अडिग और गहरा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई भी रिकॉर्ड असंभव नहीं। आगे भी यही निष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही समर्पण और यही दूरदर्शिता भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी। नरेंद्र मोदी ने इतिहास रच दिया है – अब आने वाली पीढ़ियाँ इस ‘मोदी युग’ को पढ़ेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझेंगी और सीखेंगी कि सच्ची सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निस्वार्थ समर्पण और जनहित कभी थकते या रुकते नहीं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>धार्मिक स्थलों को क्यों नही मिलती बंदरों से मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक स्थलों को बंदरों से क्यों नही मिलती मुक्ति। सबसे बड़ा  यक्ष  प्रश्न  यह है कि इन स्थानों पर आने वाले श्रृद्धालु  कब तक इनके आंतक झेलते  रहेंगे? कब तक इनका  शिकार होते  रहेंगे?</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु अपने कार्यकाल में </span>19 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को वृंदावन आईं। वे दूसरी बार यहां आईं है। इससे पहले इसी पद पर रहते हुए प्रणब मुखर्जी व रामनाथ कोविंद भी अपने कार्यकाल में दो बार वृंदावन आए थे। लेकिन</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">  राष्ट्रपति मुर्मु  वृंदावन के तीन दिवसीय प्रवास पर आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्रप्रसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञानी जैल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173933/why-are-religious-places-not-free-from-monkeys"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ram-mandir-monkey.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक स्थलों को बंदरों से क्यों नही मिलती मुक्ति। सबसे बड़ा  यक्ष  प्रश्न  यह है कि इन स्थानों पर आने वाले श्रृद्धालु  कब तक इनके आंतक झेलते  रहेंगे? कब तक इनका  शिकार होते  रहेंगे?</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु अपने कार्यकाल में </span>19 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को वृंदावन आईं। वे दूसरी बार यहां आईं है। इससे पहले इसी पद पर रहते हुए प्रणब मुखर्जी व रामनाथ कोविंद भी अपने कार्यकाल में दो बार वृंदावन आए थे। लेकिन</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति मुर्मु  वृंदावन के तीन दिवसीय प्रवास पर आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्रप्रसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञानी जैल सिंह एक बार वृंदावन आए। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉक्टर शंकरदयाल शर्मा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर वेंकटरामन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी वृंदावन अपनी धार्मिक यात्रा पर आ चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दो बार वृंदावन आए। आश्रय सदन में वृद्ध विधवा माताओं से मुलाकात करने आए थे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति पद पर रहते प्रणब मुखर्जी पहली बार </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">नवंबर </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">को अक्षयपात्र में चंद्रोदय मंदिर के भूमि पूजन में आए तो दूसरी बार </span>18 <span lang="hi" xml:lang="hi">नवंबर </span>2015 <span lang="hi" xml:lang="hi">को चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमनोत्सव के पांच सौ वे वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में आए थे। राष्ट्रपति पद पर रहते ज्ञानी जैल सिंह </span>1987 <span lang="hi" xml:lang="hi">में वृंदावन आए और रंगजी मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे </span>1957 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्रप्रसाद वृंदावन आए। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उप राष्ट्रपति पद पर रहते </span>1985 <span lang="hi" xml:lang="hi">में आर वेंकटरामन</span>, 1993 <span lang="hi" xml:lang="hi">में डॉ. शंकरदयाल शर्मा</span>, 1959 <span lang="hi" xml:lang="hi">में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन वृंदावन आ चुके हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति या  कोई  वीवीआईपी जब भी  वृंदावन आता है। प्रत्येक बार उनकी सुरक्षा तो  होती ही है। सबसे बड़ा काम होता है वीवीआईपी को यहां के झपटमार बदंर से बचाना। ये  बंदर झपटामार कर श्रद्धालु का चश्मा  उतारते  और किसी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ंची जगह पेड़ या दीवार पर जाकर बैठ जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये चश्मा तभी लौटाते हैं जब उन्हें खाने के लिए फ्रुटी, केला  या दूसरे खाने के सामान दिए जाएं। वीवीआईपी दौरे को  देखते हुए  प्रशासन लंगूरों के जगह− जगह कट आउट लगवाता है।  माना  जाता है कि लंगूर से बंदर डरतें हैं।उन्हें डराने के लिए ऐसा  किया जाता है। कुछ जगह लंगूर भी  लाकर बांध  दिए जाते  हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु की सुरक्षा से लेकर रूट पर व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के लिए जिला प्रशासन ने रात दिन एक कर दिया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के दौरे को देखते एक </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन ने लंगूरों के जगह− जगह कट आउट लगवाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेखक को  चित्रकूट में हनुमान गढ़ी  जाने का अवसर मिला। वहां रास्ते में बंदर और लंगूर मिलते और आपके कपड़े और बैग पकड़कर रोक लेते हैं। वे आपके  बैग और जेब से खाने का सामान प्रसाद  आदि निकालकर ही आपको आगे जाने देते हैं। शुक्रताल में तो  हनुमान धाम में बंदरों को भगाने के  लिए लंगूर  बांधा हुआ था।   बंदर उसके अभयस्त हो गए थे। उन्हें पता था  कि रस्सी में बंधे लंगूर की पंहुच कहां तक हैं। बदंर आते   और लंगूर की पंहुच की दूरी से अगल रहकर लौट जाते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रश्न है कि वीवीआइपी के आने पर ही  क्यों  बंदरों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रोकने की व्यवस्था होती है। देश के आम आदमी को भी  वीवीआईपी क्यों नही समझा जाता। उसकी सुरक्षा की  जिम्मेदारी भी तो  सरकार की है। उसके लिए क्यों नही ऐसी व्यवस्थाएं होती।  बंदर हम हिंदुओं की श्रद्धा है। हम उसे पवित्र  मानते हैं। पूजनीय मानते  है।  इतना होने पर भी  उसके भोजन की व्यवस्था क्यों नही करते। अयोध्या में बड़ी तादाद में बंदर है। हनुमान गढ़ी पर मैंने बंदरों को फूलों  की माला  तोड़कर  उसमें  भोजन के अंश तलाशते  देखा है। इसी शहर में डस्टविन से भोजन खोजते बंदर मुझे मिलें हैं। हमारी समाज सेवी संस्थाए क्यों नही इनके भोजन की जरूरत पूरी करती। बंदरों की संख्या  लगातार बढ़ रही है। बढती बंदरों की जनसंख्या को भोजन चाहिए। भोजन ने मिलने वह निरीह प्राणी अपना  पेट भरने के लिए कुछ तो करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> बंदरों के आतंक के कारण  कई शहरों  में तो महिलाओं और बच्चों का छतों पर जाना  कठिन हो गया है। शहरों की नही अब तो जंगल में भी इनकी बढ़ती आबादी किसानों के लिए संकट बन चुकी है। भोजन के अभाव में बंदर खेतों की फसल तोड़कर खा रहे हैं। गेंहू की बाली खा जाते है। बोए गए गन्ने के बीज जमीन से निकाल कर वे अपनी उदरपूर्ति  कर रहे हैं। किसान फसल की रक्षा को लेकर परेशान हैं।अब तो किसानों ने  खेतों की रक्षा के लिए नौकर रखने शुरू कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज बंदरों का  आंतक धार्मिक स्थलों के साथ अन्य स्थानों पर भी  बढ़ता जा रहा है।  शहरी आबादी के साथ  किसान भी परेशान है। आज जरूरी हो गया है कि  सरकार द्वारा बंदरों की आबादी कम करने के  लिए अभियान चलाया जाए। बंदरों के ग्रुप  लीडर की नसंबदी कराकर उनकी आबादी नियंत्रित की जाए।    जनता के शोर मचाने पर बंदरों  का पकड़कर  जंगलों में छोड़ा जाना कोई स्थायी निदान नही है। ये जंगल और वनों से लौटकर फिर आबादी की ओर आ जाते हैं। बढ़ती बंदरों की आबादी को भोजन चाहिए। भोजन न मिलने पर उन्हें भी  पेट भरना है। जैसे आदमी अपनी भोजन की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे साधन ढ़ूंढ़ता है। वैसे ही आज बंदर कर रहे हैं। तीर्थ स्थलों पर चश्मा छीन रहे हैं तो कुछ जगह श्रद्धालुओं को  पकड़कर उनके बैग से भोजन ले रहे हैं। गांव और शहरों में भोजन के लिए कपड़े  उठाकर ले जाना आम बात है। ये उठाए गए कपड़े तब छोड़ते हैं, जब उन्हें खाने की सामग्री मिल जाए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:57:26 +0530</pubDate>
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