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                <title>narcotics - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>महिला अपराध, पॉक्सो एक्ट एवं अन्य गंभीर मामलों में त्वरित निस्तारण हेतु प्रभावी पैरवी करने का निर्देश।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को संगम सभागार में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जनपद में लंबित अभियोजन प्रकरणों, गंभीर अपराधों से संबंधित मामलों तथा न्यायालयों में लम्बित वादों के सम्बंध में विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में पिछले माह गंभीर अपराधों में कितने बरी हुए तथा कितने में अपील हुई, के संबध में विस्तार से चर्चा की गई।  </div>
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<div style="text-align:justify;">            जिलाधिकारी ने उपस्थित समस्त शासकीय अधिवक्ताओं व अभियोजन संवर्ग के अधिकारियों को जघन्य अपराधों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए कहा। बैठक में जिलाधिकारी ने</div>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186374/instructions-for-effective-advocacy-for-quick-disposal-of-crimes-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260825-wa0103.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को संगम सभागार में अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जनपद में लंबित अभियोजन प्रकरणों, गंभीर अपराधों से संबंधित मामलों तथा न्यायालयों में लम्बित वादों के सम्बंध में विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में पिछले माह गंभीर अपराधों में कितने बरी हुए तथा कितने में अपील हुई, के संबध में विस्तार से चर्चा की गई।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      जिलाधिकारी ने उपस्थित समस्त शासकीय अधिवक्ताओं व अभियोजन संवर्ग के अधिकारियों को जघन्य अपराधों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए कहा। बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित को निर्देशित किया कि शासन की मंशा के अनुरूप सभी प्रकरणों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेष रूप से महिला अपराध, पॉक्सो एक्ट, मादक पदार्थों से संबंधित प्रकरणों एवं अन्य गंभीर मामलों में त्वरित निस्तारण हेतु प्रभावी पैरवी करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में सम्मन/तामीला नहीं हो रहा है, उन प्रकरणों में अधिक से अधिक सम्मन तामीला कराकर प्रकरण का निस्तारण सुनिश्चित कराया जाये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      जिलाधिकारी ने लंबित मामलों के कारणों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक अभिलेख समय से न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए कहा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, अपर जिलाधिकारी नगर श्री सत्यम मिश्र, संयुक्त निदेशक अभियोजन, जिला शासकीय अधिवक्ता सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 19:08:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशा, संवेदना और बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद ने कहा था हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो चरित्र का निर्माण करे, मन का बल बढ़ाए और मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, नशा  शिक्षा, चरित्र और आत्मबल तीनों का सबसे बड़ा शत्रु है। मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना और बचपन की मासूमियत है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है और बचपन उसके व्यक्तित्व की नींव रखता है। किंतु आज नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल इन दोनों पर सबसे कड़ा प्रहार कर रहा है। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, परिवार, शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को भी नष्ट कर देता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184774/drug-addiction-and-childhood"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/s-th1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद ने कहा था हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो चरित्र का निर्माण करे, मन का बल बढ़ाए और मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, नशा  शिक्षा, चरित्र और आत्मबल तीनों का सबसे बड़ा शत्रु है। मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना और बचपन की मासूमियत है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है और बचपन उसके व्यक्तित्व की नींव रखता है। किंतु आज नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल इन दोनों पर सबसे कड़ा प्रहार कर रहा है। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, परिवार, शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को भी नष्ट कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस आयु में बच्चों के हाथों में पुस्तकें और सपने होने चाहिए, वहाँ यदि नशे का जहर पहुँच जाए तो आने वाला पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स, सिंथेटिक नशे, हेरोइन, चरस, गांजा, अफीम तथा नशीली गोलियों का प्रसार चिंताजनक रूप से बढ़ा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। 2019 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 16 करोड़ लोग शराब, 3 करोड़ से अधिक लोग भांग या गांजा तथा लगभग 2.3 करोड़ लोग ओपिओइड (अफीम, हेरोइन आदि) का सेवन करते पाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें बड़ी संख्या 10 से 17 वर्ष और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में पंजाब, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा गोवा प्रमुख हैं। पंजाब में हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स का गंभीर संकट लंबे समय से चिंता का विषय है। पूर्वोत्तर के राज्यों में सीमा पार से होने वाली तस्करी ने युवाओं को प्रभावित किया है। राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मादक पदार्थों की तस्करी लगातार बढ़ी है। महानगरों में नशीली गोलियां, कोकीन और पार्टी ड्रग्स तेजी से फैल रहे हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि नशे की शुरुआत अब किशोरावस्था में ही होने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों, पारिवारिक विघटन, बेरोजगारी, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, गलत संगति तथा मानसिक तनाव के कारण अनेक बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। परिणामस्वरूप पढ़ाई छूट जाती है, अपराध बढ़ते हैं, हिंसा और आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित होती है तथा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूटने लगते हैं। नशा सबसे पहले मनुष्य की संवेदना को समाप्त करता है। जो व्यक्ति कभी माता-पिता के प्रति श्रद्धावान था, वही नशे की लत में उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगता है। परिवार की जमा पूंजी नशे में समाप्त हो जाती है। अनेक युवा चोरी, लूट और अन्य अपराधों की ओर बढ़ जाते हैं। धीरे-धीरे रिश्तों की गर्माहट समाप्त होने लगती है और मनुष्य केवल नशे का दास बनकर रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था शराब और नशा मनुष्य की आत्मा का पतन कर देते हैं। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का संदेश था शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। यह संदेश नशामुक्त समाज की स्थापना के लिए भी उतना ही आवश्यक है। नशे के विरुद्ध केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, विद्यालय, समाज, धार्मिक संस्थाएँ, मीडिया तथा शासन सभी को मिलकर कार्य करना होगा। बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना, खेल, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना, विद्यालयों में नशामुक्ति शिक्षा को अनिवार्य बनाना तथा नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करना समय की आवश्यकता है। सीमाओं पर तस्करी रोकने के साथ-साथ ऑनलाइन अवैध नेटवर्क पर भी कठोर कार्रवाई आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी राष्ट्र का बचपन सुरक्षित है तो उसका भविष्य भी सुरक्षित है। लेकिन यदि बचपन नशे की गिरफ्त में चला गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल आर्थिक ही नहीं, नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी कमजोर हो जाएँगी। इसलिए नशे के विरुद्ध संघर्ष केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है।आइए संकल्प लें कि हम अपने घर, विद्यालय, समाज और कार्यस्थल पर नशामुक्ति का संदेश फैलाएँगे। हर बच्चे के हाथ में नशा नहीं, पुस्तक होगी; हर युवा की आँखों में धुंध नहीं, सपने होंगे; और हर परिवार में भय नहीं, संवेदना और विश्वास का वातावरण होगा। यही स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की वास्तविक पहचान बनेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2025–26 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़े बताते हैं कि भारत में नशीले पदार्थों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण का गंभीर संकट बन चुकी है। गृह मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो के अनुसार नशे की तस्करी पर लगातार कार्रवाई के बावजूद इसकी पहुँच बच्चों और युवाओं तक बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा एम्स के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 10–17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 20 लाख बच्चे कैनाबिस (गांजा), 40 लाख बच्चे ओपिओइड (अफीम, हेरोइन आदि), 30 लाख बच्चे इनहेलेंट (सूँघने वाले नशीले पदार्थ) तथा लगभग 20 लाख बच्चे नशीली दवाओं (सेडेटिव) के सेवन से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय छोड़ने वाले किशोरों और शहरी मलिन बस्तियों के बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रही है।मार्च 2025 में संसद में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 2023–24 में देशभर के ओपन शेल्टरों में रहने वाले 4,158 बच्चों की पहचान नशे से प्रभावित बच्चों के रूप में की गई। म यह आँकड़े केवल सरकारी आश्रय गृहों में चिन्हित बच्चों के हैं; वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के अनुसार 2020 से मई 2025 तक राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो  ने 116 बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी मामलों का भंडाफोड़ करते हुए लगभग 1,09,318 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए। यह दर्शाता है कि भारत न केवल नशे की खपत बल्कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क की चुनौती से भी जूझ रहा है। डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का विश्वास था— "यदि देश को विकसित बनाना है तो युवाओं को सही दिशा देनी होगी।" इसलिए नशामुक्त बचपन केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि विकसित भारत की आधारशिला है।आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय, समाज, मीडिया और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की है। प्रत्येक बच्चे को स्नेह, संस्कार, खेल, साहित्य और रचनात्मक वातावरण मिले यही नशे के विरुद्ध सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है। संवेदनशील बचपन ही संवेदनशील समाज का निर्माण करता है; यदि बचपन बचा रहेगा, तभी भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:41:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक करोड़ से अधिक का गांजा बरामद, अंतर्राज्यीय तस्कर 'पहलवान' गिरफ्तार।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ प्रयागराज यूनिट को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी गिरोह के सक्रिय सदस्य अमरजीत यादव उर्फ "पहलवान" को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब 439 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग एक करोड़ दस लाख रुपये बताई जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एसटीएफ को गोपनीय सूचना मिली थी कि उड़ीसा के रायगढ़ क्षेत्र से भारी मात्रा में गांजा एक डीसीएम टाटा ट्रक में लोड कर उत्तर प्रदेश की ओर भेजा जा रहा है। यह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182475/ganja-worth-more-than-rs-1-crore-recovered-inter-state-smuggler"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260626-wa0092.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एसटीएफ प्रयागराज यूनिट को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी गिरोह के सक्रिय सदस्य अमरजीत यादव उर्फ "पहलवान" को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से करीब 439 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग एक करोड़ दस लाख रुपये बताई जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एसटीएफ को गोपनीय सूचना मिली थी कि उड़ीसा के रायगढ़ क्षेत्र से भारी मात्रा में गांजा एक डीसीएम टाटा ट्रक में लोड कर उत्तर प्रदेश की ओर भेजा जा रहा है। यह खेप सोनभद्र के रास्ते मीरजापुर पहुंचने वाली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ प्रयागराज की टीम ने संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ाई और घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोक लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वाहन की गहन तलाशी लेने पर उसमें बड़ी मात्रा में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ। मौके से वाहन चालक एवं तस्कर अमरजीत यादव उर्फ पहलवान को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी से तस्करी के नेटवर्क, आपूर्ति श्रृंखला तथा गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की बात सामने आई है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी उड़ीसा से गांजा लाकर उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में उसकी आपूर्ति करता था। पुलिस अब इस पूरे अंतर्राज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस खेप को किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:27:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशे में लड़खड़ाती नई पीढ़ी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>देश में इस बार होली के अवसर पर कई गुना लगातार हो रही ड्रग्स की सप्लाई ने देशभर में अपराधों का इजाफा कर दिया है| इस बार होली में लगा कि पूरा युवा वर्ग नशे में लड़खड़ा कर डोल रहा है। होली के अवसर पर युवा बुजुर्ग यहां तक छोटे-छोटे जवान होते बच्चे भी नशे का शिकार हो चुके हैं और होली में शराब गांजा भांग ड्रग्स जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों को लेने का जन्म सिद्ध अधिकार समझ उसका भयानक तरीके से सेवन करने लगे हैंl नशीले पदार्थों की इस बार खपत पिछली बार की तुलना में लगभग दुगनी हो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149901/new-generation-staggering-drunk"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(10)2.jpg" alt=""></a><br /><div>देश में इस बार होली के अवसर पर कई गुना लगातार हो रही ड्रग्स की सप्लाई ने देशभर में अपराधों का इजाफा कर दिया है| इस बार होली में लगा कि पूरा युवा वर्ग नशे में लड़खड़ा कर डोल रहा है। होली के अवसर पर युवा बुजुर्ग यहां तक छोटे-छोटे जवान होते बच्चे भी नशे का शिकार हो चुके हैं और होली में शराब गांजा भांग ड्रग्स जैसे खतरनाक नशीले पदार्थों को लेने का जन्म सिद्ध अधिकार समझ उसका भयानक तरीके से सेवन करने लगे हैंl नशीले पदार्थों की इस बार खपत पिछली बार की तुलना में लगभग दुगनी हो गई है। नशीले पदार्थों से हुई अपराधिक गतिविधियों में हुई तेजी शासन, प्रशासन तथा पुलिस के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है|</div>
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<div>नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय, अंतर राज्यीय तस्करी देश तथा विश्व के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है| यह चुनौती इसलिए भी है कि पिछले वर्ष में अपराधियों ने सूखे नशे का सेवन कर अपराध की वारदातें की हैं, नशे की लत में आकर अपराधियों में महानगरों मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई में लगातार बलात्कार, लूट, डकैती,और राहगीरों की हत्या को जन्म दिया है| दूसरी तरफ सूखे नशे की लत में स्कूल और कॉलेज के युवा तथा बच्चे अपना भविष्य खराब करने पर आमादा है|</div>
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<div>पिछले कुछ माह में मुंबई नारकोटिक्स इकाई ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर बड़ी मात्रा में चरस, कोकीन, गांजा, स्मैक की बड़ी तादाद में जप्त कर कई नामचीन अभिनेता, अभिनेत्रियों को गिरफ्तार कर प्रकरण न्यायालय के हवाले किया है| दूसरी तरफ दिल्ली,बेंगलुरु, कोलकाता में भी पुलिस प्रशासन द्वारा सीधे कड़ी कार्रवाई की हैं|वर्तमान में शराब तो सामाजिक बुराई बना ही हुआ है| साथ-साथ सूखा नशा भी समाज के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है, सुखे नशे के मामले में केंद्र के सर्वोच्च नेतृत्व में यानी प्रधानमंत्री ने भी गंभीरता पूर्वक इसे रोकने के लिए चिंता जताई है देश में न सिर्फ ड्रग्स के नशे का इस्तेमाल किया जा रहा है बल्कि बड़े पैमाने पर इसकी तस्करी कर अवैध कारोबार भी किया जा रहा है ड्रग्स का नशा सामाजिक विडंबना बना हुआ है|</div>
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<div>तब देश में नए वर्ष के आगमन के पूर्व बड़े-बड़े आलीशान होटलों मैं सूखे नशे की पार्टियां आयोजित करने की तैयारी कर ली है, ऐसे में पुलिस के केंद्र सरकार के तथा राज्य सरकार के आला अधिकारी इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास की रणनीति बनाने में जुट गए है और शासन तथा पुलिस प्रशासन अपना पूरा ध्यान सूखे नसे को प्रतिबंधित करने में लगे हुए हैं, मूलतः मुंबई गोवा और पाकिस्तानी सरहद से लगे क्षेत्र और राज्य से सूखे नशे पदार्थों की आवक सभी राज्यों में होती है| निसंदेह इसे गंभीर षड्यंत्र के रूप में लिया जाना चाहिए| मुंबई सूखे नशे का एक बड़ा केंद्र बन चुका है, सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या प्रकरण को लेकर जब पुलिस के आला अधिकारी को नशीले पदार्थों रेकेट हाथ लगा तब राज्य तथा केंद्र के कान खड़े हो गए और तब से पूरे देश में ताबड़तोड़ नशे के विरोध में कार्रवाई की जाने लगी|</div>
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<div>और इसी तारतम्य में देश को यह बात समझ में आई कि सूखे नशे की लत में बड़े शहरों के तमाम पूंजीपति नशे के आदी हो चुके परिस्थितियां बहुत गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण है, नए वर्ष के आगमन की सेलिब्रेशन तमाम नशीले पदार्थ की सप्लाई करने वाले तस्कर अपनी तैयारी में जुट गए हैं| देश के सभी राज्यों में नशीले पदार्थों के विरोध में केंद्र के निर्देशन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और युवा वर्ग बच्चों को सोशल मीडिया के द्वारा भी इसकी बुराई के संबंध में लगातार अवगत कराया जा रहा है एवं इस बुराई से दूर रहने का आह्वान किया गया है, देश के बड़े-बड़े रिसोर्ट, जंगल के पिकनिक स्पॉट, देश की मुख्य सड़कों के आसपास ढाबों के संचालकों पर भी नजर रखने की योजना को मूर्त रूप दिया जाना है| </div>
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<div>ताकि अपराधों में कमी आ सके ,शराब से तो अपराध होते ही हैं पर सूखे नशे से अपराधिक ज्यादा उम्र हिंसक और मस्तिष्क शुन्य हो जाते ऐसे में अपराध करने में उन्हें कोई हिचक नहीं होती, और इस तरह वे नशे में अपराधिक कृत्य करने से नहीं चूकते |केंद्र तथा राज्य प्रशासन की चिंता इस बात के लिए तो है ही कि इससे अपराध की संख्या में काफी वृद्धि हुई है पर साथ में इसके तस्करों द्वारा की जा रही ड्रग्स की तस्करी पर एक गंभीर चुनौती बनी हुई है|अंतरराष्ट्रीय सीमा से आने वाला ड्रग्स शारीरिक रूप से भी काफी नुकसानदेह होता है अंतरराष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने का एक राष्ट्रीय स्तर पर योजना बनाकर उसे रोकने का प्रयास किया जा रहा है, जितने व्यक्ति नशा करके अपराध करने के लिए दोषी हैं |</div>
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<div>उससे ज्यादा दोषी नशीले पदार्थों के तस्करी करने वाले भी है, तस्कर समूह को चिन्हित कर उस पर बड़ी कार्रवाई करने की देश को गंभीर आवश्यकता है, देश में शराब जहां ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ी बुराई है उससे ग्रामीण आमजन को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ शारीरिक नुकसान भी बहुत बड़ा होता है, इसी के साथ शहरी क्षेत्रों में खासकर बड़े शहरों में सुखा नशा एक बडी सामाजिक बीमारी की तरह अत्यंत गंभीर चुनौती बन गई है, इसे रोकने के हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए तभी इस सामाजिक गंभीर समस्या पर कुछ राहत और निदान मिल सकता है|</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 16:18:40 +0530</pubDate>
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