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                <title>Encroachment - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Encroachment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी ब्लॉक-8 पार्क पर कार्रवाई नहीं, शासन पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181568/government-did-not-take-action-on-block-8-park-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002015129.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन स्पेस के रूप में दर्ज भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे और निर्माण कार्य होते रहे, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय प्रकरणों का निस्तारण कागजों तक सीमित रखते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में ब्लॉक-8 स्थित पार्क में हुए निर्माण कार्यों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि जिस भूमि को पार्क एवं खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखा गया हो, वहां निर्माण और अतिक्रमण किस प्रकार होने दिया गया। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्कों और खुले स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तथा किए गए अतिक्रमणों को हटाकर उन्हें उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकाश वीर आर्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति 29 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त कराए जाने के बावजूद अब तक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने अथवा उसके मूल स्वरूप की बहाली के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत पार्क क्षेत्र में नई गतिविधियों और कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकरण का एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब केस्को को लिखित शिकायत और न्यायालयीय आदेशों की जानकारी दिए जाने के बावजूद पार्क में स्थित विवादित धार्मिक संरचना पर नया विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक पार्क की विवादित भूमि पर स्थित संरचनाओं को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने से अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलता है तथा भविष्य में ऐसे कब्जों को स्थायित्व प्रदान करने का आधार तैयार होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र में पार्क में अवैध रूप से निर्मित कंक्रीट ढांचों एवं इंटरलॉकिंग को हटाकर पूरे क्षेत्र को पुनः पार्क के रूप में विकसित करने, नए कब्जों एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने, विद्युत संयोजन प्रकरण की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों एवं अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। नगर विकास मंत्री कार्यालय द्वारा मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजे जाने के बाद अब क्षेत्रीय नागरिकों की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों और शासन स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी पार्क को उसका मूल स्वरूप नहीं मिल पाता, तो यह सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमण और जाम से कराहते शहर: फुटपाथ गायब, सड़कें सिकुड़ीं, वक्त बर्बाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुम्बई</span>,</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु व कोलकाता की तरह अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा और इलाहाबाद जैसे शहर जाम से जूझ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथों पर दुकानदारों व स्ट्रीट वैंडर ने कब्जा कर लिया है आखिर अब पैदल चलने वाले लोग कहां चलें और वाहनों को चलाने वाले कहां वाहन चलायें। नतीजा सड़कों पर जाम आधा घंटे का रास्ता दो घंटे में पूरा हो रहा है और हमारे शहरों के नगर निगम व यातायात विभाग कुछ भी कर पाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। देश के नगर निगमों ने इंदौर नगर निगम से कुछ भी नहीं सीख पाया। सुबह </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे  लखनऊ का आलमबाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर का टाटमील चौराहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आगरा की एमजी रोड और इलाहाबाद का चौक व सिविल लाइंस हर जगह एक ही तस्वीर - सड़कें गाड़ियों से पैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फुटपाथ पर ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुकानों का सामान बाहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लोग सड़क पर चलने को मजबूर। भारत के शहर तेजी से बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सड़कें उतनी ही रहीं। नतीजा: अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम ने शहरों की सांस रोक दी है। अतिक्रमण: फुटपाथ पर कब्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर हक। व्यावसायिक अतिक्रमण- दुकानदार शटर से </span>5-10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट बाहर सामान रख देते हैं। कपड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैकेनिक का सामान सब सड़क पर। आवासीय अतिक्रमण- कॉलोनियों में लोग घर के आगे पार्किंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाउंड्री वॉल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीढ़ियां निकाल लेते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्थायी कब्जा-  ठेले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेहड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेंट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक आयोजन। एक बार लग गया तो हटाना मुश्किल। जगह की कमी- जमीन महंगी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोग सार्वजनिक जगह को निजी समझ लेते हैं। राजनीतिक संरक्षण- चुनाव के समय हटाने की हिम्मत कोई नहीं करता। वोट बैंक बन जाते हैं। प्रशासन की निष्क्रियता तोड़फोड़ होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में वही स्थिति। जुर्माना वसूलने का सिस्टम कमजोर है। जाम: सिर्फ देरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक नुकसान- कितना बुरा है हाल</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति आयोग के मुताबिक बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में लोग औसतन सालाना </span>100-120<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे जाम में फंसते हैं। यानी </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन सिर्फ गाड़ी में बैठे-बैठे। आर्थिक: ईंधन बर्बादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिलीवरी में देरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोडक्टिविटी गिरना। दिल्ली में हर साल </span>60,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रु का नुकसान सिर्फ ट्रैफिक जाम से होता है। स्वास्थ्य-  गाड़ी में बैठे-बैठे </span>PM 2.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>CO <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस में जाता है। एम्स की स्टडी कहती है कि ट्रैफिक पुलिस और ऑटो ड्राइवरों में फेफड़े की बीमारी </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ज्यादा है। मानसिक तनाव- रोज </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटा जाम में फंसने वाले लोगों में एंग्जाइटी और रोड रेज के केस </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> गुना ज्यादा हैं। अतिक्रमण और जाम एक-दूसरे को फीड करते हैं। सड़क </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर दुकानों का सामान</span>, 10<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर पार्किंग। बच गई </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट। </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट पर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन की जगह </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लेन बनती है। एक गाड़ी खराब हुई नहीं कि पूरी सड़क ब्लॉक। लोग फुटपाथ पर नहीं चल सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सड़क पर चलते हैं। इससे ट्रैफिक स्लो होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>10%<span lang="hi" xml:lang="hi"> सड़क पर कब्जा होने से ट्रैफिक की स्पीड </span>40%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक गिर जाती है। कुछ शहरों ने क्या किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर का सिस्टम - बात जब स्मार्ट सिटी की होती है तो सबसे पहले इंदौर का नाम आता है क्योंकि इंदौर नगर निगम ने कई ऐसे प्रावधान किए हैं जिनसे अन्य नगर निगमों को सीख लेनी चाहिए। इंदौर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत </span>80%<span lang="hi" xml:lang="hi"> फुटपाथ खाली कराए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट वेंडर को वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया। अब शहर स्वच्छता में नंबर </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> है और ट्रैफिक फ्लो बेहतर है। भुवनेश्वर </span>ITMS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम लगाया। कैमरे और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से जाम का रियल टाइम एनालिस होता है। सिग्नल खुद एडजस्ट होते हैं। अहमदाबाद </span>BRTS <span lang="hi" xml:lang="hi">और फुटपाथ डेमार्केशन ने पैदल यात्रियों को जगह दी। अतिक्रमण पर जुर्माना सख्त किया। वेंडिंग जोन बनाओ-  हर </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर पर स्ट्रीट वेंडर के लिए जगह तय करो। दिल्ली में ये कानून </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में बना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लागू नहीं हुआ। रियल टाइम एक्शन-  शिकायत पर </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे में कार्रवाई। </span>Noida <span lang="hi" xml:lang="hi">का "हटाओ ऐप" इसका उदाहरण है। पार्किंग पॉलिसी-  रेजिडेंशियल एरिया में ऑन-स्ट्रीट पार्किंग को महंगा करो। ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग को सस्ता करो। मास ट्रांजिट- मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल लेन बढ़ाओ। जब लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करेंगे तो गाड़ी कम होगी। मास्टर प्लान में बदलाव-  नई कॉलोनियों में </span>30%<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगह सड़क और फुटपाथ के लिए रिजर्व हो। जवाबदेही तय करो-  अतिक्रमण हटाने का टार्गेट म्यूनिसिपल कमिश्नर के दायरे में हो। हर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने में ऑडिट हो। नागरिक क्या कर सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फोटो खींचो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट करो- </span>MCD, BMC, BBMP <span lang="hi" xml:lang="hi">के पास ऐप हैं। </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> शिकायत पर एक्शन होता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय दुकानदारों से बात करो- </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दुकानदार मिलकर तय करें कि सामान अंदर रखेंगे। एकता काम करती है। पैदल चलो-  </span>1-2 km <span lang="hi" xml:lang="hi">के काम के लिए गाड़ी मत निकालो। साइकिल और मेट्रो यूज करो। शहर सिर्फ सीमेंट और कंक्रीट नहीं होते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो लोगों के चलने-फिरने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस लेने की जगह हैं। जब फुटपाथ गायब हो जाएं और सड़कें पार्किंग बन जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शहर रहता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ ट्रांजिट पॉइंट रह जाता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अतिक्रमण हटाना सिर्फ बुलडोजर का काम नहीं है। ये पॉलिसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पॉलिटिक्स और पब्लिक के तीनों के बदलने से होगा। वरना अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल में हमारे शहर सिर्फ गूगल मैप पर लाल रंग के दिखेंगे - जाम का रंग।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181534/cities-groaning-due-to-encroachment-and-traffic-jams-footpaths-disappearing</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:53:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Haryana: हरियाणा में कांग्रेस नेता की प्रॉपर्टी पर चला बुलडोजर, स्थिति बनी तनावपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Haryana News: हरियाणा में गुरुग्राम के सेक्टर-68 स्थित परीना मी कासा (Pareena Mi Casa) सोसाइटी के पास प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम ने प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आ रहे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की, जिसका स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश यादव के करीब 400 गज के मकान समेत एक दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाया गया।</p>
<p>राजेश यादव की प्रॉपर्टी पर इससे पहले भी पिछले साल कार्रवाई हुई थी, जिसमें करीब आठ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165977/haryana-bulldozer-runs-on-congress-leaders-property-in-haryana-situation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/haryana-news---2026-01-14t141138.621.jpg" alt=""></a><br /><p>Haryana News: हरियाणा में गुरुग्राम के सेक्टर-68 स्थित परीना मी कासा (Pareena Mi Casa) सोसाइटी के पास प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की टीम ने प्रस्तावित सड़क के रास्ते में आ रहे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की, जिसका स्थानीय निवासियों ने कड़ा विरोध किया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेश यादव के करीब 400 गज के मकान समेत एक दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी पर बुलडोजर चलाया गया।</p>
<p>राजेश यादव की प्रॉपर्टी पर इससे पहले भी पिछले साल कार्रवाई हुई थी, जिसमें करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से बनी इमारत को ध्वस्त कर दिया गया था। इस बार फिर कार्रवाई होने पर उन्होंने आरोप लगाया कि यह उनका दादालाई मकान है और इसे गिराने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि एक बिल्डर के दबाव में प्रशासन आम लोगों के मकान गिरा रहा है।</p>
<h5><strong>भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर हैं राजेश यादव</strong></h5>
<p>कांग्रेस नेता राजेश यादव लंबे समय से भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर रहे हैं। वे स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक जनसमस्याओं को उठाते रहे हैं, जिससे उनके बयान अक्सर सत्तारूढ़ दल और प्रशासन को असहज करते हैं। समर्थकों का आरोप है कि इसी कारण वे अधिकारियों के निशाने पर रहते हैं।</p>
<h5><strong>लोगों ने रोका बुलडोजर</strong></h5>
<p>जैसे ही प्रशासन की टीम प्रस्तावित सड़क के मार्ग में आने वाले निर्माणों को गिराने पहुंची, स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बुलडोजर के सामने खड़े होकर रास्ता रोक दिया और कार्रवाई को रोकने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने लोगों को खदेड़कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन तनाव बना रहा।</p>
<h5><strong>सामान निकालने का भी मौका नहीं देने का आरोप</strong></h5>
<p>प्रभावित लोगों का आरोप है कि एचएसवीपी की टीम ने उन्हें अपने घरों और दुकानों से सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। परीना मी कासा सोसाइटी के पास से सोहना रोड तक प्रस्तावित सड़क के लिए अवैध स्ट्रक्चर हटाने की कार्रवाई इतनी तेजी से की गई कि लोग हतप्रभ रह गए।</p>
<h5><strong>सोहना रोड संपर्क मार्ग के विस्तार की योजना</strong></h5>
<p>प्रशासन के मुताबिक जिस रास्ते से अतिक्रमण हटाया जा रहा है, वह सीधे सोहना रोड से जुड़ता है। इस सड़क के विस्तार से ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और आवागमन सुगम बनेगा। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बुलडोजर मौके पर पहुंचे, लोगों ने पहले मुआवजा देने की मांग करते हुए विरोध शुरू कर दिया।</p>
<h5><strong>मुआवजे को लेकर विवाद</strong></h5>
<p>स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिन जमीनों पर पहले मुआवजा दिया जा चुका है, वहां कोई निर्माण नहीं था, जबकि जिन लोगों ने अपनी जमीन पर मकान और दुकानें बना रखी हैं, उन्हें अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। इसी मांग को लेकर लोग कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।</p>
<p>वहीं अधिकारियों का कहना है कि मुआवजे की राशि अदालत में जमा कर दी गई है और प्रभावित लोग वहां से इसे प्राप्त कर सकते हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे पहले भी नोटिस जारी किए गए थे।</p>
<h5><strong>मौके पर तैनात रहा पुलिस बल</strong></h5>
<p>फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जमा होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटा है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए एसएचओ समेत पुलिस बल मौके पर तैनात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Jan 2026 14:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>करोंग्राम के लोग जाम की समस्या से परेशान, प्रशासन से समाधान की माँग</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>करों, देवघर, झारखंड:- </strong>मधुपुर अनुमंडल के करों प्रखंड स्थित चर्चित गाँव करोंग्राम के लोग रोजाना जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से माँ चंडी मोड़ पर सुबह और शाम के समय जाम की स्थिति विकराल हो जाती है, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।</div>
<div>  </div>
<div><strong>संकीर्ण सड़क और अनियंत्रित वाहनों से बढ़ रही समस्या</strong></div>
<div>  ज्ञात हो कि यह इलाका विद्यासागर, रांगा सिरसा और सारठ की ओर जाने वाले चारपहिया वाहनों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है। सड़क संकरी होने और तिराहा चौक पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाने से जाम</div>
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<div>स्थानीय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149894/people-of-kargram-demanded-a-solution-from-the-administration-troubled"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/news-51.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>करों, देवघर, झारखंड:- </strong>मधुपुर अनुमंडल के करों प्रखंड स्थित चर्चित गाँव करोंग्राम के लोग रोजाना जाम की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से माँ चंडी मोड़ पर सुबह और शाम के समय जाम की स्थिति विकराल हो जाती है, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>संकीर्ण सड़क और अनियंत्रित वाहनों से बढ़ रही समस्या</strong></div>
<div> ज्ञात हो कि यह इलाका विद्यासागर, रांगा सिरसा और सारठ की ओर जाने वाले चारपहिया वाहनों के आवागमन का प्रमुख मार्ग है। सड़क संकरी होने और तिराहा चौक पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाने से जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है।</div>
<div> </div>
<div>स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे दुकानों के अतिक्रमण और ग्राहकों द्वारा दुकानों के पास ही मोटरसाइकिल खड़ी कर देने से स्थिति और बिगड़ जाती है। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।</div>
<div> </div>
<div><strong> स्थानीय प्रशासन से समाधान की गुहार</strong></div>
<div>ग्रामवासियों ने स्थानीय प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि उचित यातायात प्रबंधन किया जाए और अतिक्रमण हटाया जाए तो इस समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 15:23:07 +0530</pubDate>
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