<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/26965/water-conservation" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>water conservation - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/26965/rss</link>
                <description>water conservation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आग उगलती भीषण गर्मी में प्यासे कंठों की कौन सुने दास्तां</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के कई राज्यों में इस समय भीषण और भयावह गर्मी का प्रकोप जारी है। हर वर्ष तापमान अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू रहा है। आसमान से बरसती आग ने मानो समस्त जीव-जंतुओं के कंठ सूखा दिए हैं। यह बढ़ती हुई भीषण गर्मी कहीं न कहीं मानव द्वारा किए जा रहे पर्यावरण के अंधाधुंध दोहन और प्रकृति-विनाश का परिणाम है। इसी के चलते जल के प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो रहे हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जंगलों के अंधाधुंध विनाश के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मूक वन्यजीवों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पानी प्रकृति के समस्त जीवों की मूलभूत और अनिवार्य आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विडंबना यह है कि जब यही आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जीवों के अस्तित्व पर संकट गहराना स्वाभाविक है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्वीकार करना होगा कि आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में यह कल्पना करना कठिन नहीं कि वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए कितनी कठिनाइयों का सामना करते होंगे। मानव जीवन के लिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु केंद्र और राज्य सरकारें हर वर्ष अनेक प्रयास करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी स्तर पर ये प्रयास अभी भी अपर्याप्त सिद्ध हो रहे हैं। विशेषकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ‘नल-जल योजना’ एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहल है। बावजूद इसके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई स्थानों पर जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अनेक गाँवों में बनी पानी की टंकियाँ केवल दिखावा बनकर रह गई हैं। ये टंकियाँ प्यासे कंठों को राहत देने के बजाय व्यवस्था की खामियों का प्रतीक बनती जा रही हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पानी हर जीव की मूलभूत आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यदि इसी आवश्यकता की पूर्ति में कमी रह जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह न केवल गंभीर लापरवाही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अक्षम्य अपराध के समान है। भीषण गर्मी में जब लोग घर से बाहर निकलने से बचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मीलों दूर से पानी लाने को विवश होते हैं। जल संकट के कारण मूक पशु-पक्षियों का जीवन बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति-विनाश के चलते बढ़ती गर्मी और अस्तित्व बचाने के लिए भटकते वन्यजीव—ये दोनों ही हमारी सामूहिक जिम्मेदारी हैं। ऐसे में सरकार और समाज को मिलकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर तक मानव और वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि इस दिशा में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो देश के हर कोने में सभी जीवों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित जल उपलब्ध कराया जा सकता है। अन्यथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर वर्ष की भाँति आग उगलती गर्मी में प्यासे मूक प्राणियों की दास्तां अधूरी ही रह जाएगी।</span></p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177391/who-will-listen-to-the-tales-of-thirsty-throats-in</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:28:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/download2.jpg"                         length="72613"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पृथ्वी दिवस पर “शहीदों के सपनों की धरती को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> पृथ्वी दिवस के अवसर पर अमर शहीद झूरी सिंह के पपौत्र  समाजसेवी डॉ रामेश्वर सिंह ने  भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी रक्षा करना आज हर नागरिक का कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। “आज हम जिस तेजी से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं चेते, तो इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर होंग।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176997/on-earth-day-it-is-the-responsibility-of-all-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260422-wa0314.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> पृथ्वी दिवस के अवसर पर अमर शहीद झूरी सिंह के पपौत्र  समाजसेवी डॉ रामेश्वर सिंह ने  भावनात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस मिट्टी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राण न्योछावर किए, उसकी रक्षा करना आज हर नागरिक का कर्तव्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। “आज हम जिस तेजी से प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है। यदि समय रहते हम नहीं चेते, तो इसके दुष्परिणाम बहुत गंभीर होंग।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अमर शहीद झूरी सिंह जैसे वीरों ने देश की आज़ादी के लिए बलिदान दिया, और अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस आज़ाद देश की धरती को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित रखें। “देशभक्ति केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि अपने पर्यावरण की रक्षा में भी दिखाई देनी चाहिए,” </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉo सिंह ने लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक का उपयोग कम करें, जल स्रोतों की रक्षा करें और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और युवाओं द्वारा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए शपथ भी दिलाई गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176997/on-earth-day-it-is-the-responsibility-of-all-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/176997/on-earth-day-it-is-the-responsibility-of-all-of</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 21:36:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img-20260422-wa0314.jpg"                         length="68950"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बभनकुइया में जल अर्पण दिवस व विश्व जल दिवस पर भव्य समारोह,।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बभनकुइया ग्राम में रविवार को विश्व जल दिवस एवं जल अर्पण दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जल जीवन मिशन के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रवीण पटेल रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आए। उन्होंने योजना को जनता को समर्पित करते हुए कहा कि यह पहल गांवों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिला समन्वयक अश्विनी श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह के दौरान जल संरक्षण और उसके महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने ग्रामीणों से अपील की कि वे जल का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वर्षा जल संचयन जैसे उपाय अपनाएं, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन के अंत में जल संरक्षण का संकल्प दिलाया गया और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी को जागरूक किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173905/grand-celebration-on-water-offering-day-and-world-water-day</guid>
                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:02:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img-20260322-wa0133.jpg"                         length="149477"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिविर के पांचवें दिन जल संरक्षण एवं मृदा संरक्षण जागरूकता अभियान चला कर ग्रामीणों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कोरांव प्रयागराज। </strong>बलराम महाविद्यालय के पांचवें दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा जैविक, खेती मृदा संरक्षण तथा जल संरक्षण विषयों पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने बताया कि जैविक खेती से भूमि की उर्वरता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त मृदा संरक्षण (मिट्टी संरक्षण) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि पेड़ पौधे लगाकर खेतों में मेड बंदी करके संतुलित खेती अपनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा सकता है। यह कार्यक्रम बलराम महाविद्यालय के प्रबंधिका श्रीमती उमा सिंह के निर्देशन में संचालक पूर्वक संपन्न हुआ। इस मौके कार्यक्रमाधिकारी गौरव वर्मा एसोसिएट डायरेक्टर शाश्वत मिश्रा, डिप्टी डायरेक्टर शालिनी श्रीवास्त प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह डॉ अशोक उत्तम डॉ0 वी0 पी0 सिंह, डॉ अजय सिंह, संध्या पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, बृजेश कुमार और ग्रामीण उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173419/on-the-fifth-day-of-the-camp-villagers-were-made</guid>
                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 19:56:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/img-20260316-wa0137.jpg"                         length="140267"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मृदा संरक्षण एवं जल संरक्षण हेतु संगोष्ठी का आयोजन।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कोराव प्रयागराज। </strong>शिविर के छठवें दिन मंगलवार को  शुरुआत  के लक्ष्य जीत के साथ हुई। स्वयंसेविका द्वारा रैली के माध्यम से ग्रामीणों को रासायनिक खेती का त्याग कर जैविक खेती से होने वाले लाभ को बताया और साथ ही साथ मृदा संरक्षण और जल संरक्षण के संदर्भ में यह बताया गया कि "जल है तो कल है" इसे सभी को समझना होगा घर का पानी बर्बाद ना होने देना बारिश के पानी को तालाब कुँआ में संरक्षित करने की तरीकों को बताया गया।</div>
<div>  </div>
<div>रासायनिक उर्वरकों के ज्यादा प्रयोग से मृदा पर दुष्प्रभाव और शारीरिक नुकसान से बचने हेतु जैविक खेती</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149808/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250311-wa0092.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कोराव प्रयागराज। </strong>शिविर के छठवें दिन मंगलवार को  शुरुआत  के लक्ष्य जीत के साथ हुई। स्वयंसेविका द्वारा रैली के माध्यम से ग्रामीणों को रासायनिक खेती का त्याग कर जैविक खेती से होने वाले लाभ को बताया और साथ ही साथ मृदा संरक्षण और जल संरक्षण के संदर्भ में यह बताया गया कि "जल है तो कल है" इसे सभी को समझना होगा घर का पानी बर्बाद ना होने देना बारिश के पानी को तालाब कुँआ में संरक्षित करने की तरीकों को बताया गया।</div>
<div> </div>
<div>रासायनिक उर्वरकों के ज्यादा प्रयोग से मृदा पर दुष्प्रभाव और शारीरिक नुकसान से बचने हेतु जैविक खेती को करने हेतु प्रेरित किया गया। इस मौके पर डॉ० शाह आलम डॉ० अजय सिंह सुमित मंडल सांध्य पाण्डेय आशीष बृजेश कुमार सहित ग्रामीण में उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149808/%C2%A0</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149808/%C2%A0</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Mar 2025 13:05:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250311-wa0092.jpg"                         length="294363"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        