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                <title>Chhattisgarh High Court - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Chhattisgarh High Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने पाक्सो के आरोपी को किया बरी, कहा– नाबालिग अपनी मर्जी से गई थी, परिस्थितियां देखना भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक चर्चित POCSO मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले में केवल पीड़िता की उम्र को आधार बनाकर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को असंगत मानते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा.</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 13 सितंबर 2022 का है. मुंगेली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175919/high-court-acquitted-pocso-accused-and-said-%E2%80%93-the-minor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/chhattisgarh-high-court-jobs_650x400_41472110383.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक चर्चित POCSO मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले में केवल पीड़िता की उम्र को आधार बनाकर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को असंगत मानते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा.</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 13 सितंबर 2022 का है. मुंगेली जिले की एक नाबालिग लड़की स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो पिता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. शिकायत में आशंका जताई गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के बाद विशेष POCSO कोर्ट, मुंगेली ने आरोपी दीपक वैष्णव को IPC की धारा 363 और 366 के साथ-साथ POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी माना था. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को गंभीर अपराध का दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से संपर्क था. दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी और लड़की ने खुद अपनी इच्छा से आरोपी के साथ जाने का फैसला किया. दोनों ने मुंगेली, रायपुर, हैदराबाद और विजयवाड़ा जैसे शहरों की यात्रा की और करीब एक महीने तक साथ रहे. बचाव पक्ष का कहना था कि पूरे मामले में कहीं भी जबरदस्ती, दबाव या लालच के कोई साक्ष्य नहीं हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है. आरोपी ने उसे उसके माता-पिता की देखरेख से दूर ले जाकर अपराध किया है, जो सीधे तौर पर POCSO एक्ट के तहत दंडनीय है.</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से समीक्षा करने के बाद हाईकोर्ट ने साफ कहा कि “ले जाना” और “साथ जाना” दोनों अलग-अलग बातें हैं. कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने पीड़िता को जबरदस्ती या धोखे से उसके अभिभावकों की देखरेख से दूर किया. कोर्ट के अनुसार, यदि कोई लड़की खुद अपनी मर्जी से किसी के साथ जाती है, तो केवल इसी आधार पर अपहरण का अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता.</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने मेडिकल जांच और FSL रिपोर्ट पर भी गौर किया. रिपोर्ट्स में जबरन शारीरिक संबंध या हिंसा के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले. इस आधार पर कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करने में विफल रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने पाया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 15 वर्ष 10 माह थी. वह नाबालिग जरूर थी, लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि हर मामले में केवल उम्र के आधार पर दोष तय नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब परिस्थितियां यह दिखाती हों कि पीड़िता अपनी इच्छा से गई थी और कोई जोर-जबरदस्ती नहीं हुई, तो ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:39:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>बैठक में विवादित अध्यक्ष को बुलाए जाने पर हाई कोर्ट ने (एस. ई .सी .एल) प्रबंधन को लगाई फटकार </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong> शहडोल बिलासपुर।</strong> छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा 5 मार्च को एक नया आदेश जारी किया गया है जिसमें एस ई सी एल प्रबंधन के विरुद्ध नोटिस जारी करते हुए इस बात पर नाराजगी व्यक्त की गई है कि उन्होंने गोपाल नारायण सिंह को अध्यक्ष मानकर किस आधार पर आईआर सिस्टम में भाग लेने हेतु अनुमति प्रदान किया माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष संपत शुक्ला की प्रस्तुत याचिका में प्रस्तुत आवेदन पत्र को स्वीकार करते हुए एसईसीएल द्वारा गोपाल नारायण सिंह के पक्ष में आईआर सिस्टम में भाग लेने हेतु जारी किए गए आदेश को माननीय माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149667/high-court-reprimanded-secl-management-for-calling-the-disputed-president"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/screenshot_20250308_121613.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> शहडोल बिलासपुर।</strong> छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा 5 मार्च को एक नया आदेश जारी किया गया है जिसमें एस ई सी एल प्रबंधन के विरुद्ध नोटिस जारी करते हुए इस बात पर नाराजगी व्यक्त की गई है कि उन्होंने गोपाल नारायण सिंह को अध्यक्ष मानकर किस आधार पर आईआर सिस्टम में भाग लेने हेतु अनुमति प्रदान किया माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष संपत शुक्ला की प्रस्तुत याचिका में प्रस्तुत आवेदन पत्र को स्वीकार करते हुए एसईसीएल द्वारा गोपाल नारायण सिंह के पक्ष में आईआर सिस्टम में भाग लेने हेतु जारी किए गए आदेश को माननीय माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी किया है दिनांक 5 मार्च को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी आदेश को गोपाल नारायण सिंह की हार तथा संपत शुक्ला की जीत के रूप में देखा जा रहा है अब देखना यह है कि प्रबंधन माननीय उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के परिपालन किस प्रकार करती है।</div>
<div> </div>
<div><span style="font-weight:bolder;">क्या था मामला ।</span>                 </div>
<div>उक्त जानकारी राम संजीवन शर्मा ने बताया कि, पिछले दिनों साऊथ ईस्टर्न कोयला मजदूर कोंग्रेस की बैठक में संगठन विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाकर संपत शुक्ला समेत पदाधिकारियों का निष्कासन हुआ था कोरबा में हुई एक बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह द्वारा संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल पदाधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का समर्थन किया गया था।</div>
<div> </div>
<div>बैठक में एस ई सी एल के 13 क्षेत्रों के जनरल कौंसिल के सदस्य और पदाधिकारी उपस्थित थे संगठन में मौजूद असंतोष के मुद्दे पर चर्चा की गयी थी बैठक में मौजूद पूर्व उपाध्यक्ष सम्पत शुक्ला और कई पदाधिकारी संगठन से बाहर कर दिए गए थे इंटक के अंदर खाने और समर्थक, सदस्य के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू था एक ने तत्कालीन अध्यक्ष को भ्रष्ट बताया था दूसरी ओर इस कथन के विरोध में दूसरे ने संगठन विरधी होने का प्रत्यारोप मढ़ दिया था आरोपों प्रत्यारोपो में छिपे तथाकथित खुलासों से इंटक यूनियन की छवि खराब हुई है।</div>
<div> </div>
<div>गोपाल नारायण और उसके समर्थित नेता सदस्यों द्वारा अनुशासानात्मक कार्यवाही में निष्कासित इंटक के पूर्व अध्यक्ष सम्पत शुक्ल का कहना था की यूनियन के नाम पर जमा धनराशि में भारी गड़बड़ी हुई थी जिसकी पूछताछ करने पर ही इस के बाद निष्कासन का दुश्चक्र रचा गया जो की कानून सम्मत नहीं था। हमारे ऊपर किसी भी प्रकार के आरोप के प्रमाण नहीं थे बावजूद हमें निष्काषित किया ज की 2023 और 2024 के दौरान यूनियन के खाते में से लगभग लाखो के भुगतान किये गए</div>
<div> </div>
<div>किसके आरोपों में कितना दम था ये अब माननीय उच्चन्यायालय छत्तीसगढ़ की टिप्पणी से स्पष्ट हो गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एस ई सी एल प्रबंधन द्वारा आई आर की मीटिंग में गोपाल नारायण को बुलाये जाने पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि महप्रबन्धक ने किस अधिकार के तहत गोपाल नारायण सिंह को साउथ ईस्टर्न कोयला मजदूर कांग्रेस माय इंस्ट के अध्यक्ष के रूप में (इंडस्ट्रियलरिलेशन) औद्यौगिक संबंध की महत्वपूर्ण बठैक में आमंत्रित किया जबकि कथित अध्यक्ष को 10 अक्टूबर में जारी एक पत्र के द्वारा अध्यक्ष पद से बर्खास्त बताया गया था। माननीय उच्च न्यायालय ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई पूरी होने तक एसईसीएल प्रबंधन कथित विवादित मामले में अध्यक्ष जो की संदेहास्पद थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 15:01:08 +0530</pubDate>
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