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                <title>अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता की वैश्विक चुनौतिया</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस 1991 के विंडहोक घोषणा पत्र से प्रेरित है, जिसने स्वतंत्र और बहुलतावादी मीडिया की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।आज जब हम 2026 के वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हैं, तो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और डरावनी प्रतीत होती है। वैश्विक सूचकांक के आंकड़े</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178001/global-challenges-to-freedom-of-expression-and-impartial-journalism"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>- महेन्द्र तिवारी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 3 मई को मनाया जाता है और यह दिन लोकतंत्र की उस मूल भावना को उजागर करता है, जिसमें नागरिकों को स्वतंत्र रूप से जानकारी प्राप्त करने और अपनी बात रखने का अधिकार होता है। 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित यह दिवस 1991 के विंडहोक घोषणा पत्र से प्रेरित है, जिसने स्वतंत्र और बहुलतावादी मीडिया की आवश्यकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।आज जब हम 2026 के वैश्विक परिदृश्य पर दृष्टि डालते हैं, तो प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और डरावनी प्रतीत होती है। वैश्विक सूचकांक के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि दुनिया के 180 देशों में से आधे से अधिक देशों में प्रेस की स्थिति या तो बहुत कठिन है या फिर बेहद गंभीर श्रेणी में जा चुकी है। यह जानकर हृदय कांप उठता है कि विश्व की 1 प्रतिशत से भी कम आबादी आज उन क्षेत्रों में निवास कर रही है जहाँ प्रेस को वास्तव में स्वतंत्र और सुरक्षित माना जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले 25 वर्षों का इतिहास गवाह है कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव निरंतर बढ़ा है और पत्रकारों के काम करने की गुंजाइश संकुचित हुई है। पत्रकारिता आज एक ऐसा पेशा बन गया है जहाँ सच बोलने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। वर्ष 2025 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में 129 पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की निर्मम हत्या कर दी गई, जो अब तक का सबसे बड़ा और विचलित करने वाला आंकड़ा है। यह संख्या केवल एक डेटा नहीं है, बल्कि उन आवाजों की खामोशी है जो समाज की विसंगतियों पर प्रहार कर रही थीं। सन 2000 से लेकर अब तक लगभग 1795 पत्रकारों ने अपने कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्यौछावर किए हैं, जो इस पेशे के बढ़ते जोखिमों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिंसा के साथ-साथ कानूनी उत्पीड़न भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मार्ग में एक बड़ी बाधा बनकर उभरा है। 2026 के आंकड़ों के अनुसार विश्व भर की जेलों में लगभग 330 पत्रकार बंद हैं, जिनमें से 61 प्रतिशत पत्रकारों पर राष्ट्रविरोधी होने या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने जैसे संगीन आरोप मढ़े गए हैं। विडंबना यह है कि जिन कानूनों का निर्माण राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किया गया था, उनका उपयोग अक्सर उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है जो सत्ता की खामियों को उजागर करने का साहस करते हैं। पत्रकारिता को अपराध की तरह देखे जाने की यह प्रवृत्ति किसी भी सभ्य समाज के लिए घातक है। इससे भी अधिक चिंता का विषय वह न्यायहीनता है जो पत्रकारों के खिलाफ होने वाले अपराधों में व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार पत्रकारों की हत्या के लगभग 86 प्रतिशत मामलों में अपराधियों को कभी सजा नहीं मिलती। यह न्याय की विफलता न केवल अपराधियों का मनोबल बढ़ाती है बल्कि क्षेत्र में कार्यरत अन्य पत्रकारों के मन में भी भय का संचार करती है। जब सच के पहरेदारों को लगने लगता है कि उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और उनके हत्यारे खुलेआम घूम सकते हैं, तो वे आत्म-सेंसरशिप का रास्ता चुनने को मजबूर हो जाते हैं, जो अंततः लोकतंत्र की मृत्यु की शुरुआत होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस की स्वतंत्रता पर केवल भौतिक हमला ही एकमात्र खतरा नहीं है, बल्कि आज के दौर में इसके स्वरूप बदल गए हैं। कई देशों में मानहानि और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग एक सुनियोजित हथियार की तरह किया जा रहा है। इसके साथ ही आर्थिक दबावों के जरिए मीडिया संस्थानों की रीढ़ तोड़ने का प्रयास किया जाता है। विज्ञापन और वित्तीय संसाधनों के वितरण में पक्षपात करके उन संस्थानों को पुरस्कृत किया जाता है जो सत्ता के सुर में सुर मिलाते हैं, जबकि आलोचनात्मक रुख अपनाने वाले संस्थानों को आर्थिक रूप से पंगु बना दिया जाता है। इस बदलती दुनिया में डिजिटल युग ने जहाँ सूचना के प्रसार को पंख दिए हैं, वहीं पत्रकारों के लिए नई और जटिल चुनौतियां भी पैदा की हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से दुष्प्रचार और गलत जानकारियों का जाल इतनी तेजी से फैलता है कि तथ्य और झूठ के बीच का अंतर मिटने लगता है। इसके साथ ही ऑनलाइन ट्रोलिंग, साइबर हमले और अवैध डिजिटल निगरानी ने पत्रकारों के निजी और पेशेवर जीवन को असुरक्षित बना दिया है। विशेष रूप से महिला पत्रकारों को ऑनलाइन माध्यमों पर जिस तरह के अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ता है, वह अत्यंत निंदनीय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक और महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरण से जुड़ी रिपोर्टिंग का है, जो आज के समय में सबसे जोखिम भरे क्षेत्रों में से एक बन चुका है। पिछले 15 वर्षों में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़ी खबरें कवर करने वाले कम से कम 749 पत्रकारों पर जानलेवा हमले हुए हैं। 2019 से 2023 के बीच इस तरह के हमलों में 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो यह दर्शाता है कि जब पत्रकार भू-माफियाओं, अवैध खनन और कॉर्पोरेट जगत के भ्रष्टाचार पर कलम चलाते हैं, तो उन्हें कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। यूनेस्को और द गार्जियन जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें इस भयावह वास्तविकता की पुष्टि करती हैं। यह तथ्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में उस सच को सुनने के लिए तैयार हैं जो हमारे अस्तित्व और प्रकृति की रक्षा से जुड़ा है। प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा केवल मीडिया घरानों या पत्रकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करता है। एक स्वतंत्र मीडिया भ्रष्टाचार की परतों को खोलता है, सरकारी नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि जनता को सही और सटीक जानकारी मिले ताकि वे एक जागरूक नागरिक के रूप में अपने निर्णय ले सकें। इसके विपरीत जब मीडिया को सरकारी या कॉर्पोरेट नियंत्रण में ले लिया जाता है, तो जनता तक केवल वही सूचनाएं पहुँचती हैं जो एक खास एजेंडे को पुष्ट करती हैं। इससे समाज में भ्रम और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वाशिंगटन पोस्ट और स्टेटिस्टा जैसे मंचों से प्राप्त डेटा यह संकेत देता है कि प्रेस की आजादी में गिरावट का प्रभाव केवल कुछ विशिष्ट देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। भारत सहित दुनिया के कई बड़े लोकतांत्रिक देशों में भी प्रेस स्वतंत्रता के सूचकांक में गिरावट देखी गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक संस्थानों के भीतर असहमति के स्वरों के प्रति सहिष्णुता कम होती जा रही है। प्रेस की स्वतंत्रता दरअसल लोकतंत्र का वह दर्पण है जिसमें समाज अपनी असलियत देखता है। यदि इस दर्पण पर धूल जमा दी जाए या इसे धुंधला कर दिया जाए, तो समाज अपनी कमजोरियों को कभी सुधार नहीं पाएगा। अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस हमें यह अवसर प्रदान करता है कि हम उन साहसी पत्रकारों को श्रद्धांजलि दें जिन्होंने अपने जीवन का बलिदान देकर सच की मशाल को जलाए रखा। यह दिन सरकारों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे प्रेस की आजादी के प्रति अपनी संवैधानिक और नैतिक प्रतिबद्धताओं को फिर से परिभाषित करें। यह आवश्यक है कि ऐसी नीतियां बनाई जाएं जो पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और न्याय प्रणाली को इतना मजबूत बनाया जाए कि पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वाला कोई भी व्यक्ति कानून की पकड़ से बाहर न रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना किसी एक समूह का दायित्व नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमें यह समझना होगा कि यदि आज हम पत्रकारों की आवाज दबाने वाली शक्तियों के खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तो भविष्य में हमारी अपनी आवाज भी छीन ली जाएगी। लोकतंत्र की जीवंतता के लिए यह अनिवार्य है कि प्रेस बिना किसी डर या प्रलोभन के अपना कार्य कर सके। जब तक दुनिया में एक भी पत्रकार को सच बोलने के लिए जेल भेजा जाएगा या उसकी हत्या की जाएगी, तब तक हमारा लोकतंत्र अधूरा रहेगा। प्रेस की आजादी की मशाल को प्रज्वलित रखना ही इस दिवस की सार्थकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक ऐसे समाज में सांस ले सकें जहाँ सूचना पर किसी का एकाधिकार न हो और सच बोलने का साहस करने वालों को सम्मान मिले, न कि सजा।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:07:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विपक्ष मुक्त लोकतंत्र के दुष्प्रयास प्रयास अभी भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">  9 जून 2013 को गोवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनाव अभियान समिति की बैठक के दौरान जिस समय नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनावों के लिए अभियान समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया उस समय उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि "कांग्रेस मुक्त भारत हमारा सपना होना चाहिए।" इस आह्वान के फ़ौरन बाद उन्होंने ट्विटर पर भी इसकी पुष्टि करते हुये लिखा था कि "वरिष्ठ नेताओं ने मुझ में विश्वास जताया है। हम कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण करने में कोई कसर बाक़ी नहीं छोड़ेंगे।" उसके बाद से अब तक वे इसी बात को दूसरे शब्दों</div>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161382/efforts-for-opposition-free-democracy-still-continue"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/congress-free-india1.jpeg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;"> 9 जून 2013 को गोवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनाव अभियान समिति की बैठक के दौरान जिस समय नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनावों के लिए अभियान समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया उस समय उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि "कांग्रेस मुक्त भारत हमारा सपना होना चाहिए।" इस आह्वान के फ़ौरन बाद उन्होंने ट्विटर पर भी इसकी पुष्टि करते हुये लिखा था कि "वरिष्ठ नेताओं ने मुझ में विश्वास जताया है। हम कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण करने में कोई कसर बाक़ी नहीं छोड़ेंगे।" उसके बाद से अब तक वे इसी बात को दूसरे शब्दों में अपनी चुनावी सभाओं या सार्वजनिक रैलियों आदि में कहते रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैसे कभी देश को "कांग्रेस संस्कृति से मुक्ति" दिलाने की बात कभी "पंजे से मुक्ति",कभी  तुष्टिकरण से मुक्ति तो कभी परिवारवाद व भ्रष्टाचार से मुक्ति के रूप में देश के सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस को कोसकर विपक्ष मुक्त लोकतंत्र की अपनी हसरत की अभिव्यक्ति करते रहे हैं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की 99 सीटें आने के बाद मोदी की इस हसरत पर विराम लग गया था। फिर भी कांग्रेस के दर्जनों नेताओं को भय लालच आदि के द्वारा अपने पाले में कर कांग्रेस को पूरी तरह कमज़ोर करने की कोशिश ज़रूर की गयी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> अब बिहार चुनाव परिणामों से उत्साहित भाजपा दिल्ली से लेकर कर्नाटक तक एक बार फिर कांग्रेस व विपक्ष को कमज़ोर करने की कोशिश करने लगी है। इसी उद्देश्य से पिछले दिनों  प्रधानमंत्री मोदी ने सूरत में एक कार्यक्रम के दौरान फिर एक बयान दिया है। इस बार मोदी ने कांग्रेस व अन्य विपक्षी सांसदों की 'पैरवी' करते हुये उनके राजनीतिक कैरियर के प्रति चिंता ज़ाहिर की है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस के युवा सांसदों को पार्टी नेतृत्व बोलने नहीं देता, जिससे उनका राजनीतिक कैरियर बर्बाद हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि "जब कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सांसद मुझसे मिलते हैं, तो वे कहते हैं, 'हम क्या कर सकते हैं? हमारा कैरियर ख़त्म हो रहा है। हमें संसद में बोलने का मौक़ा ही नहीं मिलता। हर बार यही कहा जाता है कि संसद को ताला लगा दो।" उन्होंने कांग्रेस पर और भी हमले किये।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मोदी द्वारा विपक्षी सांसदों की 'फ़िक्र' किये जाने के सन्दर्भ में यह सोचना ज़रूरी है कि अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेताओं का बना बनाया कैरियर समाप्त करने या उन्हें अज्ञातवास अथवा राजनैतिक संन्यास पर भेजने के लिये मजबूर करने वाले प्रधानमंत्री मोदी को आख़िर विपक्षी सांसदों के कैरियर की चिंता कैसे सताने लगी ? गुजरात से लेकर दिल्ली तक कितने नेताओं को दरकिनार कर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने वाले मोदी को विपक्षी सांसदों के कैरियर की चिंता सताने लगी ? लाल कृष्ण आडवाणी ने तो ख़ुद मोदी जी का कैरियर बचाने में उनकी मदद की थी। याद कीजिये 2002 के गुजरात दंगों के बाद तो तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटाने की ठान ली थी। उस समय आडवाणी ने ही मोदी का साथ देकर इन की कुर्सी बचाई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाद में मोदी ने आडवाणी जी को कहाँ पहुंचा दिया ? जिनके पैर छुआ करते थे उन्हें ऐसे मार्ग दर्शन मंडल में भेज दिया जहाँ से मार्ग दर्शन लेने की किसी को ज़रुरत ही नहीं होती ? मुरली मनोहर जोशी का वाराणसी से टिकट काट कर पहले ख़ुद चुनाव लड़ा बाद में उन्हें भी मार्ग दर्शन मंडल का रास्ता दिखा दिया ? मार्गदर्शन मंडल के बारे में बताया गया कि 75 की आयु पार करने वालों को इसमें स्थान मिलेगा। परन्तु स्वयं 1950 में जन्मे मोदी भी आज 75 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। तो क्या 75 के नाम पर अपने अनेक वरिष्ठ नेताओं का 'कैरियर चौपट' करने वाले मोदी जी को स्वयं अपनी आयु 75 होने पर 'मार्गदर्शक मंडल' का रास्ता नज़र नहीं आता ? केंद्र में 79 वर्षीय जीतन राम मांझी मंत्री बनाये जा सकते हैं। 83 वर्षीय आनंदीबेन पटेल व 81 वर्षीय आचार्य देवव्रत राज्यपाल बनाये जा सकते हैं परन्तु सुब्रमण्यम स्वामी, यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा, अरुण शौरी जैसे नेताओं के कैरियर की कोई फ़िक्र नहीं ? ऐसे और भी अनेक उदाहरण हैं जो यह दर्शाते हैं कि मोदी को अपने राजनैतिक कैरियर के सिवा किसी और के राजनैतिक कैरियर की कोई फ़िक्र नहीं होती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> लंबे समय तक भाजपा में रहने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने ख़ुद कहा था कि भाजपा में अब "लोकतंत्र" नहीं, "तानाशाही" है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आर के सिंह को बिहार चुनाव परिणाम आते ही इसलिये पार्टी से निकाल दिया गया क्योंकि उन्होंने न केवल पार्टी के अपराधी नेताओं को पार्टी प्रत्याशी बनाने पर सवाल खड़ा किया था बल्कि अडानी पावर व नीतीश सरकार के बीच हुये कथित 62,000 करोड़ रुपये के बिजली घोटाले का भी ख़ुलासा किया था और इस घोटाले की जांच की मांग की थी। इसलिये कांग्रेस या विपक्षी सांसदों के कैरियर को लेकर चिंतित होना दरअसल उनके कैरियर की चिंता करना नहीं बल्कि अपनी इन कथित चिंताओं का प्रदर्शन कर कांग्रेस व विपक्ष को कमज़ोर करने की कोशिश मात्र है। कुछ ऐसी ही कोशिशें इन दिनों लालू यादव के परिवार में पड़ी पारिवारिक फूट को लेकर देखी जा रही हैं। यहाँ भी लालू -तेजस्वी का विरोध करने वाले परिवार के सदस्यों को हवा देने की ख़बरें आ रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल मोदी इस दावे से यह भी जताना चाहते हैं कि विपक्ष के कोटे का पूरा समय राहुल गाँधी ही ले लेते हैं। तो देश यह भी देखता है कि विपक्षी सांसदों को संसद में कितना बोलने दिया जाता है और उनके बोलने पर सत्ता पक्ष कितना व्यवधान पैदा करता है। हाँ राहुल का बोलना इसलिये ज़रूर खटकता होगा क्योंकि इस समय देश के वही अकेले ऐसे नेता हैं जो साम्प्रदायिकता, भ्रष्टाचार,अडानी- अंबानी ,नोटबंदी,जी एस टी,चुनाव धांधली, सरकारी संस्थानों पर सत्ता के शिकंजे,किसानों व जातीय जनगणना,एस आई आर जैसे ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं जो सत्ता से हज़म नहीं होता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और राहुल,कांग्रेस व सम्पूर्ण विपक्ष को कमज़ोर करने की ही ग़रज़ से अब एक और दांव चलते हुये देश के 272 पूर्व अधिकारियों जिनमें 16 पूर्व न्यायाधीश,133 पूर्व सैन्य अधिकारी व 14 पूर्व राजदूत सहित 123 पूर्व नौकरशाहों से विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरुद्ध एक खुला पत्र जारी कराया गया है जिसमें राहुल द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए "वोट चोरी" के आरोपों और संवैधानिक संस्थाओं पर कथित तौर पर बिना सबूत के हमलों की आलोचना की गयी है। परन्तु कांग्रेस ने तो इन 272 "प्रतिष्ठित " राहुल विरोधियों में से अनेक की सेवा कुंडली ही उधेड़ कर बता दिया कि इस सूची में कितने भ्रष्ट व अनैतिक आचरण के "प्रतिष्ठित " अधिकारी शामिल हैं। लिहाज़ा विपक्षी सांसदों के कैरियर की चिंता व राहुल गाँधी पर हमले जैसे प्रयास दरअसल 'विपक्ष मुक्त लोकतंत्र' के दुष्प्रयास हैं जो भाजपा के 2013 से शुरू हुये 'कांग्रेस मुक्त भारत' मिशन से लेकर अभी तक जारी हैं। सही मायने में लोकतंत्र के लिये सबसे बड़ा ख़तरा राहुल गाँधी नहीं बल्कि सत्ता के 'विपक्ष मुक्त लोकतंत्र' के दुष्प्रयास ही हैं।  </div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 23 Nov 2025 16:23:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लोकतंत्र को बचाने के लिए अपने वोटों की करें रक्षा-संजय विद्यार्थी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>खोड़ारे गोण्डा- </strong>धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव के जयंती पर विद्यार्थी जन कल्याण इंटर कालेज परिसर में  कार्यशाला एवं नेता जी धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव की जयंती मनाई गई निर्वतमान प्रत्याशी 301 गौरा विधानसभा संजय विद्यार्थी नें कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत मतदान है,आज भाजपा जब हमारे वोटों के साथ खिलवाड़ कर रही है ऐसे में हम सबको सतर्क होकर अपने वोटों की रक्षा करनी होगी।उनकी साजिश को  नाकाम करेंगे।संजय विद्यार्थी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव एक सामान्य परिवार में जन्म लेकर पिछड़ों वंचितों,शोषितों के उत्थान के लिए समाजवादी पार्टी की स्थापना कर इनको सत्ता में भागीदारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161295/to-save-democracy-protect-your-votes-sanjay-vidyarthi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1006771216.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>खोड़ारे गोण्डा- </strong>धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव के जयंती पर विद्यार्थी जन कल्याण इंटर कालेज परिसर में  कार्यशाला एवं नेता जी धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव की जयंती मनाई गई निर्वतमान प्रत्याशी 301 गौरा विधानसभा संजय विद्यार्थी नें कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत मतदान है,आज भाजपा जब हमारे वोटों के साथ खिलवाड़ कर रही है ऐसे में हम सबको सतर्क होकर अपने वोटों की रक्षा करनी होगी।उनकी साजिश को  नाकाम करेंगे।संजय विद्यार्थी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव एक सामान्य परिवार में जन्म लेकर पिछड़ों वंचितों,शोषितों के उत्थान के लिए समाजवादी पार्टी की स्थापना कर इनको सत्ता में भागीदारी दिलाने का काम किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया और भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर,मधु लिमये, जय प्रकाश नारायण की विचारधारा को आगे बढाने का काम किया।रोटी कपडा़ सस्ती हो,दवा पढाई मुफ्ती हो जैसे नारों को आगे बढाने का काम किया। शिक्षा होगी एक समान तभी बनेगा हिंदुस्तान,आज हम इस मौके पर उनके चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।अध्यक्षता कर रहे विधानसभा अध्यक्ष इस्लाम चौधरी नें कहा कि हम सबको एकजुट होकर इस बार अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।पीडीए परिवार किसी भी साजिश में फंसने वाला नहीं है।कार्यक्रम का संचालन सपा नेता  मोहन लाल यादव नें किया।इस अवसर पर महासचिव पवन यादव,सुशील पांडेय, विजय यादव , नरेन्द्र यादव, अमरनाथ विद्यार्थी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 19:08:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>लोकतंत्र में महत्वपूर्ण है मतदान . डॉ रुचि श्रीवास्तव</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में महिला पी जी कॉलेज बस्ती के राष्ट्रीय सेवा योजना की रानी लक्ष्मी बाई इकाई का प्राचार्या प्रो सुनीता तिवारी के मार्ग दर्शन में चल रहे सात दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस में आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रथम सत्र में स्वयं सेविकाओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान कार्यक्रम के अन्तर्गत जागरूकता रैली निकाली गयी ,जन जागरूकता रैली को डॉ रुचि श्रीवास्तव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया,छात्राओं का उत्साह वर्धन करते हुए डा रुचि श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, स्वस्थ्य लोकतंत्र हेतु प्रत्येक मतदाता को मतदान अवश्य करना चाहिए</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149662/voting-is-important-in-democracy-dr-ruchi-srivastava"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250308-wa0181.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में महिला पी जी कॉलेज बस्ती के राष्ट्रीय सेवा योजना की रानी लक्ष्मी बाई इकाई का प्राचार्या प्रो सुनीता तिवारी के मार्ग दर्शन में चल रहे सात दिवसीय विशेष शिविर के तृतीय दिवस में आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रथम सत्र में स्वयं सेविकाओं द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान कार्यक्रम के अन्तर्गत जागरूकता रैली निकाली गयी ,जन जागरूकता रैली को डॉ रुचि श्रीवास्तव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया,छात्राओं का उत्साह वर्धन करते हुए डा रुचि श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, स्वस्थ्य लोकतंत्र हेतु प्रत्येक मतदाता को मतदान अवश्य करना चाहिए ।</div>
<div> </div>
<div>राष्ट्रीय सेवा योजना सेवा की सात दिवसीय विशेष शिविर के द्वितीय सत्र में बौद्धिक कार्यक्रम में आज का केंद्रीय विषय अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस, के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में डा रुचि श्रीवास्तव व विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ नूतन यादव उपस्थित रहीं । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि के द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।</div>
<div> </div>
<div>मुख्य अतिथि डा रुचि श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सच्चे अर्थों में सार्थकता है कि हम अपने अधिकार और कर्तव्य दोनों के प्रति समान भाव अपना कर कार्य करें,राष्ट्रीयता के विकास में राष्ट्रीय सेवा योजना महत्वपूर्ण है,राष्ट्रीय सेवा योजना के द्वारा युवाओं में राष्ट्र सेवा का भाव जागृत होता है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास हेतु मजबूत स्तंभ है, विशिष्ट अतिथि डा नूतन यादव अंतर्राष्ट्रीय महिला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला और कहा कि महिला सशक्तिकरण की अवधारणा तभी चरितार्थ होगी जब हम खुद से जागरूक होकर अपने बेहतर भविष्य के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास करेंगे।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम का संचालन व आभार ज्ञापन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डा रघुवर पाण्डेय ने किया</div>
<div>इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ सुधा त्रिपाठी ,दुर्गेश गुप्ता, डा प्रियंका मिश्र, मोनी पांडेय, नेहा श्रीवास्तव,सहित एन एस एस की छात्राए उपस्थित रही ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 14:43:28 +0530</pubDate>
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