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                <title>democracy - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>संपादकीय पेज के लिए आलेख </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बेरोजगारी गरीबी असमानता भ्रष्टाचार से दबा लोकतंत्र ! </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
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<div>  इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक रोशनी की झालर जगमगा रही हैं लेकिन इस खुशहाल भारत के पीछे एक और हकीकत भी छिपी है यह है मुफलिसी, बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता व सस्ते सुलभ न्याय से महरूम हिंदुस्तान, जिसमें आज भी  भूख है, बेगार करने और अन्याय सहने की मजबूरी है, पूंजीवाद के हाथों में जकड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था है इन सबसे इतर नारे हैं</div>
<div>बेरोजगारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185256/article-for-editorial-page"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img_20260727_151239.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बेरोजगारी गरीबी असमानता भ्रष्टाचार से दबा लोकतंत्र ! </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div> </div>
<div> इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक रोशनी की झालर जगमगा रही हैं लेकिन इस खुशहाल भारत के पीछे एक और हकीकत भी छिपी है यह है मुफलिसी, बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता व सस्ते सुलभ न्याय से महरूम हिंदुस्तान, जिसमें आज भी  भूख है, बेगार करने और अन्याय सहने की मजबूरी है, पूंजीवाद के हाथों में जकड़ती लोकतांत्रिक व्यवस्था है इन सबसे इतर नारे हैं उम्मीद हैं और इनके बीच बेरोजगारी महंगाई भ्रष्टाचार से कराहता आम आदमी है।</div>
<div>बेरोजगारी </div>
<div> </div>
<div>हालिया आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में बेरोजगारी दर लगभग 5.5% है, जो वैश्विक औसत (4.9%) के आसपास और कई प्रमुख जी-20 अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में स्थिर स्थिति में है, हालांकि युवाओं के बीच यह दर तुलनात्मक रूप से अधिक बनी हुई है।आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार देश में कुल बेरोजगारी दर स्थिस्थिर है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की दर लगभग 5.1% और शहरी क्षेत्र की दर लगभग 6.4% से 6.6% के बीच दर्ज की गई है।युवा बेरोजगारी की समस्या चुनौती बनकठभारत में 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक (लगभग 15% से 16% के बीच) है, जो कौशल अंतराल और तकनीक-आधारित बदलावों को दर्शाती है। वैश्विक और भारतीय बाजारों में अनौपचारिक रोजगार और गुणवत्तापूर्ण पूर्णकालिक नौकरियों की उपलब्धता एक बड़ी चिंता बनी हुई है।</div>
<div> गरीबी की अंतहीन समस्या </div>
<div> </div>
<div>भारत में आज भी गरीबी की समस्या विकराल बनी हुई है। भारत में 20 करोड़ से भी ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे हैं और काफी मुश्किल से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। गरीबी से जुड़े कई ऐसे आंकड़े हैं, जो वाकई डराने वाले हैं। </div>
<div> </div>
<div>विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, भारत में अभी भी लगभग 23.4 करोड़ लोग गरीबी के स्तर पर जीवन जीने को मजबूर हैं। यह संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि गरीबी को मापने के लिए किस मानक या पैमाने का उपयोग किया जा रहा है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक के संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे संकेतकों के आधार पर भारत में लगभग 23.4 करोड़ लोग घोर या बहुआयामी गरीबी में जी रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है।विश्व बैंक के अत्यधिक गरीबी के आंकड़े बता रहे हैं कि विश्व बैंक के मानकों ($2.15 प्रतिदिन आय) के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी में जीने वाले लोगों की संख्या घटकर लगभग 7.5 करोड़ (75 मिलियन) रह गई है। पिछले एक दशक में लगभग 26.9 से 27 करोड़ लोग इस अत्यधिक गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। यदि उच्च स्तर यानी लगभग $4.20 प्रतिदिन के मानक को देखा जाए, तो भारत की लगभग 23.9% आबादी (करीब 34.2 करोड़ लोग) आर्थिक सुरक्षा के उस दायरे से नीचे आती है।</div>
<div> </div>
<div><strong>                                                                                   भुखमरी </strong></div>
<div> </div>
<div>नवीनतम ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2025 रिपोर्ट के अनुसार, कुल 123 देशों की सूची में भारत को 102वां स्थान मिला है। इस सूचकांक में भारत का कुल स्कोर 25.8 है, जो देश में भूख और कुपोषण की स्थिति को 'गंभीर' श्रेणी में रखता है। 123 देशों की पड़ताल में भारत का स्थान 102 वां है इस के अनुसार 25.8श्रेणी गंभीर प्रमुख स्वास्थ्य व पोषण 12.0%बाल बौनापन उम्र के हिसाब से कम लंबाई 32.9%बाल कमज़ोरी लंबाई के हिसाब से कम वजन 18.7% रिपोर्ट में दूसरी सबसे अधिक बाल मृत्यु दर 2.8% है। </div>
<div> भुखमरी सूचकांक वर्ष 2020 में भारत 94वें स्थान पर था।भूख और कुपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक भुखमरी सूचकांक की वेबसाइट के अनुसार चीन, ब्राजील और कुवैत सहित अठारह देशों ने पांच से कम के जीएचआई स्कोर के साथ अग्रिम पंक्ति में है। </div>
<div> </div>
<div><strong>                                                                     भ्रष्टाचार </strong></div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 में भारत 182 देशों में 91वें स्थान पर है। भारत का कुल स्कोर 39 (100 में से) है, जो पिछले वर्ष (2024 में 96वीं रैंक) की तुलना में पाँच स्थानों का सुधार दर्शाता है। यह रिपोर्ट ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी की जाती है।डेनमार्क, फिनलैंड और सिंगापुर सबसे कम भ्रष्ट देशों में शामिल हैं। भारत का प्रदर्शन (101रैंक)पाकिस्तान (136वीं रैंक), श्रीलंका (107वीं रैंक), और नेपाल (109वीं रैंक) से बेहतर है, लेकिन चीन (76वीं रैंक) और भूटान (18वीं रैंक) से पीछे है।</div>
<div> </div>
<div><strong>                                                                 गरीब अमीर के बीच खाई </strong></div>
<div> </div>
<div>विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 (तीसरा संस्करण) पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के द्वारा जारी की गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के शीर्ष 10% सबसे अमीर लोगों के पास वैश्विक संपत्ति का तीन-चौथाई (लगभग 75%) हिस्सा है, जबकि सबसे निचले 50% हिस्से के पास केवल 2% संपत्ति है।भारत में शीर्ष 10% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा है, जबकि निचले 50% लोगों को केवल 15% ही मिलता है।देश के शीर्ष 1% अमीरों के पास कुल संपत्ति का लगभग 40% हिस्सा है, और शीर्ष 10% के पास करीब 65% संपत्ति है।भारत में केवल 15.7% महिलाएं नौकरी कर रही हैं, और कुल श्रम आय में उनका हिस्सा महज 20% के आसपास है।</div>
<div> </div>
<div>भारत में असमानता गहराई से जड़ें जमा चुकी है, जहाँ शीर्ष 10% राष्ट्रीय आय का 58% हिस्सा अर्जित करते हैं और शीर्ष 1% के पास देश की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। इसे महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर के 15.7% पर स्थिर बने रहने से और बढ़ावा मिलता है।</div>
<div>जलवायु असमानता के लिए सबसे धनी 10% लोग निजी पूंजी से होने वाले उत्सर्जन के 77% के लिये उत्तरदायी हैं; केवल शीर्ष 1% अकेले 41% योगदान करते हैं, जो असमान ज़िम्मेदारी और जोखिम को दर्शाता है।</div>
<div>                               न्याय बना अन्याय</div>
<div>देश में अदालतों में न्याय के लिए लम्बी लाइन लगीं है अगली पेशी अगले साल के चलते लाखों की संख्या में वादी व पीड़ित तारीख पर चक्कर काटते हुए दुनिया से चले जाते हैं पर न्याय नहीं मिलता। स्थिति यह है कि देशभर की अदालतों में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कुल 5.64 करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित (पेंडिंग) हैं।अदालत के स्तर पर लंबित मामलों का विवरणसुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च अदालत): लगभग 96,000 से अधिक केस पेंडिंग हैं।हाई कोर्ट (उच्च न्यायालय): देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में लगभग 63.76 लाख मामले पेंडिंग हैं।जिला और अधीनस्थ अदालतें (निचली अदालतें): कुल पेंडिंग मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 4.98 करोड़ से अधिक मामले निचली अदालतों में अटके हैं, जो कुल लंबित मामलों का लगभग 85% से अधिक है।</div>
<div>साइबर अपराध </div>
<div>देश में अपराध की स्थिति भी बदतर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अंतिम उपलब्ध आंकड़े बताते हैं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की नवीनतम "क्राइम इन इंडिया" रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक शारीरिक और हिंसक अपराधों में मामूली कमी दर्ज की गई है, जबकि डिजिटल व वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। देश में समग्र अपराध दर घटकर लगभग 418.9 प्रति लाख जनसंख्या पर आ गई है। विभिन्न डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी में लगभग 17% से 18% की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल साइबर मामलों में से लगभग 72% से अधिक का उद्देश्य वित्तीय ठगी रहा है महिलाओं के विरुद्ध मामलों में आंशिक (लगभग 1.5%) कमी आई है, जबकि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लगभग 7.8% की वृद्धि देखी गई है। हत्या के मामलों में लगभग 2.4% की गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि अपहरण और अन्य विवादित मामलों की संख्या में क्षेत्रीय भिन्नता बनी हुई है। वित्तीय गबन और धोखाधड़ी से जुड़े आर्थिक अपराधों में करीब 4.6% की वृद्धि हुई है।</div>
<div>राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट </div>
<div>भारतीयों के राष्ट्रीय चरित्र में गिरावट के प्रमुख लक्षणों में अनियंत्रित भ्रष्टाचार, सार्वजनिक संपत्ति के प्रति लापरवाही, नागरिक अनुशासन का अभाव और राष्ट्रहित की तुलना में व्यक्तिगत स्वार्थ को प्राथमिकता देना शामिल है। समाज में नैतिक मूल्यों और सहिष्णुता की कमी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।</div>
<div>कभी भारतीय लोगों का राष्ट्रीय चरित्र विविधता में एकता, सहिष्णुता, आतिथ्य-सत्कार, परिवार के प्रति अटूट जुड़ाव और कठिन परिस्थितियों में भी उच्च सहनशक्ति (लचीलेपन) पर आधारित है। यहाँ के समाज में धर्म, आध्यात्मिकता और सामूहिक जीवन की भावना गहराई तक समाई हुई है।लेकिन अब स्थिति भिन्न हो चली है। समाज में नैतिक और सामाजिक पतन की शुरुआत हो गई है। भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि एक सामान्य और स्वीकृत बात बन गई है। लोग अपने अधिकारों के प्रति अत्यधिक जागरूक हैं, लेकिन अपने मूल कर्तव्यों को भूल रहे हैं। विभिन्न समूहों के बीच सहनशीलता घट रही है और असहिष्णुता बढ़ रही है। 'मेरा क्या फायदा' की सोच ने सामूहिक कल्याण और देशभक्ति की भावना को पीछे छोड़ दिया है।सरकारी संपत्तियों, पार्कों और धरोहरों को गंदा करना या नुकसान पहुँचाना आम हो गया है। यातायात नियमों और सामान्य कानूनों का पालन न करने को शान की बात समझा जाता है। अपराध या दुर्घटना के समय मदद करने के बजाय लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं।</div>
<div>भारत में राजनीतिक दलों की आपसी प्रतिद्वंद्विता अब इतना बढ़ गया है कि पिछले एक दशक में देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में सबसे कम समय का उपयोग किया जाता है विपक्ष संसद को अखाड़ा बनाने पर तुला है और सत्ता धारी विपक्ष के साथ सूक्ष्मता आम सहमति बनाने में नाकाम रहे हैं। देश ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शन में जैनजी के भीतर आक्रोश को देखा वहीं जैनजी के कंधे का इस्तेमाल करने की राजनीति को भी देखा वहीं आंदोलन की आड़ में अराजकता अभद्रता असंयमित गालीबाजी को भी सहन किया। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजनीति में जनता के असली मुद्दे</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की खूबसूरती इस बात में है कि यहां सत्ता से सवाल पूछे जा सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों की आलोचना की जा सकती है और विपक्ष सरकार के फैसलों पर अपना विरोध दर्ज करा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह सरकार को भी अपने निर्णयों का पक्ष रखने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का पूरा अधिकार है। लेकिन जब राजनीति का केंद्र जनहित के मुद्दों से हटकर केवल आरोप-प्रत्यारोप बन जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर पड़ने लगती है। आज भारतीय राजनीति के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजनीतिक दल जनता के वास्तविक सवालों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185148/real-issues-of-public-in-politics"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की खूबसूरती इस बात में है कि यहां सत्ता से सवाल पूछे जा सकते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों की आलोचना की जा सकती है और विपक्ष सरकार के फैसलों पर अपना विरोध दर्ज करा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह सरकार को भी अपने निर्णयों का पक्ष रखने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने का पूरा अधिकार है। लेकिन जब राजनीति का केंद्र जनहित के मुद्दों से हटकर केवल आरोप-प्रत्यारोप बन जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर पड़ने लगती है। आज भारतीय राजनीति के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजनीतिक दल जनता के वास्तविक सवालों को उतनी प्राथमिकता दे रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी प्राथमिकता वे एक-दूसरे पर आरोप लगाने को देते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">चुनावी राजनीति में आरोप लगना कोई नई बात नहीं है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब राजनीतिक बहस का अधिकांश हिस्सा इस बात पर खर्च होने लगे कि किस नेता ने किस पर क्या आरोप लगाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसने किस बयान का जवाब दिया और किसने किसे कठघरे में खड़ा किया। ऐसे वातावरण में महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों की आय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे कारोबार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानून-व्यवस्था और न्याय में देरी जैसे मुद्दे अक्सर राजनीतिक शोर में दब जाते हैं। एक आम नागरिक के लिए राजनीति का महत्व संसद या विधानसभा की बहसों से कहीं अधिक उसके रोजमर्रा के जीवन में दिखाई देता है। परिवार का बजट बिगड़ता है तो उसे महंगाई की चिंता होती है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">युवा नौकरी की तलाश करता है तो उसके लिए रोजगार सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। किसान को फसल का उचित मूल्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंचाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौसम और बाजार की चिंता रहती है। व्यापारी के लिए कारोबार की लागत और नियमों की सरलता महत्वपूर्ण होती है। गरीब परिवार के लिए बेहतर सरकारी अस्पताल और स्कूल किसी भी राजनीतिक भाषण से अधिक मायने रखते हैं। यही वह बिंदु है जहां राजनीतिक दलों को आत्ममंथन करना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या उनकी राजनीतिक भाषा जनता की इन समस्याओं को पर्याप्त स्थान दे रही है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या चुनावी घोषणाओं के बाद भी उन वादों की लगातार समीक्षा होती है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या संसद और विधानसभाओं में उन विषयों पर उतनी गंभीर चर्चा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितनी राजनीतिक आरोपों पर</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि जवाब संतोषजनक नहीं है तो यह केवल किसी एक दल की समस्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। आरोप जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन प्रमाण और समाधान उससे भी जरूरी विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है। यदि किसी सरकारी योजना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति या निर्णय में खामी दिखाई देती है तो विपक्ष को उसे सामने लाना चाहिए। भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक लापरवाही या किसी गंभीर अनियमितता का संदेह हो तो जांच की मांग भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन आरोप और प्रमाण में अंतर होता है। राजनीति में किसी आरोप को बार-बार दोहराना उसे स्वतः सत्य नहीं बना देता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में आरोपों की जांच संस्थाओं को करनी होती है और दोष या निर्दोष होने का फैसला निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से होना चाहिए। इसी तरह सरकार को भी विपक्ष के हर सवाल को राजनीतिक षड्यंत्र बताकर खारिज करने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र में स्वस्थ व्यवस्था वही होगी जहां आरोप के साथ प्रमाण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोध के साथ वैकल्पिक नीति और आलोचना के साथ समाधान प्रस्तुत किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">संसद केवल राजनीतिक मुकाबले का मंच नहीं</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च विधायी मंच है। वहां सरकार की नीतियों पर चर्चा होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर बहस होनी चाहिए। संसद में राजनीतिक असहमति होना जरूरी है। लेकिन असहमति और गतिरोध में फर्क है। सरकार यदि विपक्ष की बात नहीं सुनती तो लोकतांत्रिक संवाद कमजोर होता है। दूसरी ओर विपक्ष यदि हर विषय को विरोध का अवसर बना दे और चर्चा की संभावना ही समाप्त कर दे तो उससे भी जनता का नुकसान होता है। जनता ने अपने प्रतिनिधियों को केवल नारे लगाने के लिए नहीं चुना है। उनसे अपेक्षा है कि वे कानून बनाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों की समीक्षा करें और जनता की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाएं। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि सदन में बिताया गया समय केवल सत्ता पक्ष या विपक्ष की जीत-हार तय नहीं करता</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका सीधा संबंध देश के करोड़ों नागरिकों के भविष्य से होता है। भारत दुनिया की बड़ी युवा आबादी वाले देशों में है। ऐसे में रोजगार का सवाल केवल आर्थिक मुद्दा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता का भी विषय है। हर साल बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी करके नौकरी की तलाश में निकलते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए परीक्षा की पारदर्शिता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में राजनीतिक बहस केवल इस बात तक सीमित नहीं रहनी चाहिए कि किस सरकार ने कितनी नौकरियां देने का दावा किया। असली सवाल यह होना चाहिए कि स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार कितने पैदा हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं की आय कितनी बढ़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजी क्षेत्र में अवसर कैसे बढ़ेंगे और कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार से कैसे जोड़ा जाएगा। यदि राजनीतिक दल इस विषय पर ठोस और मापने योग्य योजनाएं सामने रखें तो यह लोकतांत्रिक बहस को एक नई दिशा दे सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 17:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्पेशल इन-डेप्थ रेक्टिफिकेशन (SIR) के तहत एन्यूमरेशन फेज़ पूरा हुआ - राहुल चाबा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट-</strong> इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, पूरे पंजाब में स्पेशल इन-डेप्थ रेक्टिफिकेशन (SIR) का प्रोसेस चल रहा है। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर श्री राहुल चाबा, IAS. ने सभी मान्यता प्राप्त पॉलिटिकल पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मीटिंग के दौरान, उन्होंने बताया कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया के निर्देशों के अनुसार, 25 जून, 2026 से 3 अगस्त, 2026 तक चलने वाले एन्यूमरेशन फेज़ के तहत एन्यूमरेशन फॉर्म बांटने, मिलने और डिजिटाइज़ेशन का प्रोसेस 100 परसेंट पूरा हो गया है। इसके साथ ही, एन्यूमरेशन फेज़ सफलतापूर्वक खत्म हो गया है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184852/enumeration-phase-completed-under-special-in-depth-rectification-sir-rahul"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1000987970.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट-</strong> इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, पूरे पंजाब में स्पेशल इन-डेप्थ रेक्टिफिकेशन (SIR) का प्रोसेस चल रहा है। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर-कम-डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर श्री राहुल चाबा, IAS. ने सभी मान्यता प्राप्त पॉलिटिकल पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीटिंग के दौरान, उन्होंने बताया कि इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया के निर्देशों के अनुसार, 25 जून, 2026 से 3 अगस्त, 2026 तक चलने वाले एन्यूमरेशन फेज़ के तहत एन्यूमरेशन फॉर्म बांटने, मिलने और डिजिटाइज़ेशन का प्रोसेस 100 परसेंट पूरा हो गया है। इसके साथ ही, एन्यूमरेशन फेज़ सफलतापूर्वक खत्म हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने हर मुमकिन कोशिश की ताकि सभी प्रिंटेड एन्यूमरेशन फॉर्म संबंधित वोटरों तक पहुंचाए जा सकें और उनसे लिए जा सकें। डिजिटाइजेशन के बाद, BLO ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों द्वारा नियुक्त BLAZs की मौजूदगी में एब्सेंट, शिफ्टेड, मृतक और डुप्लीकेट वोटरों को भी वेरिफाई किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वेरिफिकेशन के दौरान जिले में 18,514 वोटर मृत पाए गए, 16,273 वोटर परमानेंटली शिफ्टेड पाए गए, 6,982 वोटर एब्सेंट पाए गए और कुछ वोटरों के नाम डुप्लीकेट भी पाए गए। फरीदकोट जिले के कुल 4,49,615 वोटरों के एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन का काम पूरा हो चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज़िला चुनाव अफ़सर ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, वोटर लिस्ट के ड्राफ़्ट का शुरुआती प्रकाशन 13 अगस्त 2026 को किया जाएगा। यह ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट चीफ़ इलेक्टोरल अफ़सर, पंजाब की ऑफ़िशियल वेबसाइट और संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफ़सरों के दफ़्तरों में उपलब्ध होगी। वोटर अपने बूथ लेवल अफ़सर (BLO) के पास जाकर भी अपना नाम चेक कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट के ड्राफ़्ट प्रकाशन के बाद, जिन नागरिकों या वोटरों के नाम लिस्ट में शामिल नहीं हैं, वे 13 अगस्त 2026 से 12 सितंबर 2026 तक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफ़सर के पास दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं। जिन वोटरों को नोटिस जारी किए जाएँगे, उन्हें चुनाव आयोग द्वारा बताए गए दो ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मीटिंग में डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन तहसीलदार फरीदकोट पूनम सिद्धू, आम आदमी पार्टी से गुरतेज सिंह खोसा और गुरप्रीत सिंह, भारतीय जनता पार्टी से संदीप शर्मा, मनप्रीत सिंह बराड़ और हरचरण सिंह संधू, बहुजन समाज पार्टी से गुरबख्श सिंह चौहान और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) से अश्विनी कुमार मौजूद थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक ऐसी दुनिया जहाँ सब उपलब्ध हैं, पर कोई उपस्थित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता का सबसे गहरा घाव किसी युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महामारी या आर्थिक संकट ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस चमकती स्क्रीन ने दिया है जिसे हमने सुविधा समझकर जीवन का केंद्र बना लिया। इतिहास में पहली बार संवाद के साधन सबसे अधिक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर संवाद सबसे कम है। आवाज़ें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर महत्व नहीं। हर चेहरा ऑनलाइन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर हर मन ऑफलाइन हो रहा है। रिश्ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दफ्तर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र और अंतर्मन तक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">म्यूट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होने लगे हैं। उँगलियाँ सक्रिय हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर संवेदनाएँ निष्क्रिय। उत्तर तुरंत मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन किसी को समझने में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184772/a-world-where-everyone-is-available-but-no-one-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1.-prof.-rkjain1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यता का सबसे गहरा घाव किसी युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महामारी या आर्थिक संकट ने नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस चमकती स्क्रीन ने दिया है जिसे हमने सुविधा समझकर जीवन का केंद्र बना लिया। इतिहास में पहली बार संवाद के साधन सबसे अधिक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर संवाद सबसे कम है। आवाज़ें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर महत्व नहीं। हर चेहरा ऑनलाइन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर हर मन ऑफलाइन हो रहा है। रिश्ते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दफ्तर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र और अंतर्मन तक </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">म्यूट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होने लगे हैं। उँगलियाँ सक्रिय हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर संवेदनाएँ निष्क्रिय। उत्तर तुरंत मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन किसी को समझने में पहले से अधिक समय लग रहा है। यह तकनीक की विजय नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवीय उपस्थिति के मौन विस्थापन की कथा है। जिसने दुनिया को जोड़ने का दावा किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी ने मनुष्य को उसके सबसे निकट बैठे व्यक्ति से सबसे अधिक दूर कर दिया। यही हमारे समय का सबसे मौन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापक और सबसे कम समझा गया सामाजिक पतन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">परिवारों का विघटन अब खामोशी में हो रहा है। घर दीवारों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्क्रीन से संचालित हैं। एक ही छत के नीचे लोग अलग-अलग डिजिटल दुनियाओं में जी रहे हैं। भारत में औसत व्यक्ति प्रतिदिन सात घंटे से अधिक स्क्रीन पर बिताता है। माता-पिता पाँच घंटे से अधिक और बच्चे चार घंटे से अधिक समय स्मार्टफोन पर बिताते हैं। अध्ययनों में दो-तिहाई माता-पिता और आधे से अधिक बच्चों ने माना कि मोबाइल ने रिश्तों की ऊष्मा घटा दी है। भोजन की मेज़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कभी संवाद का केंद्र थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब रील्स का मंच है। बच्चे बोलना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर माता-पिता स्क्रीन पर हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">माता-पिता संवाद चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब बच्चे स्क्रॉल करते हैं। सामने बैठे व्यक्ति की उपेक्षा कर मोबाइल में डूबे रहने की आदत—</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">फुबिंग</span>'—<span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य हो रही है। रिश्ते अचानक नहीं टूटते</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वे पहले सुनना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर महसूस करना छोड़ते हैं। अंततः केवल औपचारिक संपर्क बचता है। घर अब भी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर आत्मीयता साइलेंट मोड में है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यस्थलों की सबसे बड़ी दूरी अब किलोमीटरों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्यों के बीच मापी जाती है। कार्यालयों की नई वास्तुकला ईंट-पत्थर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंडविड्थ से बनती है। वर्क फ्रॉम होम ने काम घर तक पहुँचाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर अदृश्य दूरियाँ खड़ी कर दीं। कमरे पास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन दूर। शोध बताते हैं कि दूरस्थ कर्मचारी अधिक अकेलापन और मानसिक तनाव महसूस करते हैं। डिजिटल बैठकों में कैमरे बंद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माइक्रोफोन म्यूट</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उपस्थिति दर्ज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहभागिता नहीं। कर्मचारी का मूल्य विचारों से अधिक ऑनलाइन सक्रियता से आँका जाता है। प्रमोशन चेहरों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्क्रीन पर दर्ज गतिविधियों से जुड़ने लगा है। कभी दफ्तर बातचीत से चलते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वह काम के बीच बची है। तकनीक ने गति बढ़ाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सहयोग का ताप घटा दिया। कार्यस्थल संवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल प्रक्रियाओं के केंद्र हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">किसी लोकतंत्र का पतन तब नहीं शुरू होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब लोग बोलना छोड़ देते हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह तब शुरू होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वे सुनना छोड़ देते हैं। जनचर्चा की चौपाल अब एल्गोरिदम के दरबार में बदल चुकी है। कभी राजनीति जनसभाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहसों और प्रत्यक्ष संवाद से चलती थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">आज स्क्रीन पर सिमट गई है। सोशल मीडिया पर राजनीतिक सामग्री का उपभोग बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर विचार की गहराई घट रही है। युवा समाचार रील्स में देखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नारे शॉर्ट्स में सुनते हैं और आक्रोश इमोजी से जताते हैं। संवाद की जगह प्रतिक्रिया ने ले ली है—लाइक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शेयर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एंग्री फेस। सत्ता जनता की आँखों में कम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रेंडिंग सूची में अधिक झाँकती है। जनता सड़क पर कम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फीड में अधिक दिखती है। कुछ सेकंड के विमर्श में जटिल प्रश्न मनोरंजन बन जाते हैं। लोकतंत्र की आवाज़ म्यूट होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो केवल चुनाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिकता भी कमजोर पड़ती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मनुष्य की सबसे लंबी दूरी अब स्वयं से है। भावनाएँ अनुभव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोटिफिकेशन बनती जा रही हैं। प्रेम स्टोरी में सिमट गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोस्ती वर्चुअल समूहों में कैद है और अपनापन ऑनलाइन उपस्थिति से मापा जाता है। अध्ययन बताते हैं कि केवल आभासी संपर्क रखने वाले लोग मित्रताओं से कम संतुष्ट रहते हैं। विडंबना यह है कि संपर्क सूची बढ़ती जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर अकेलापन भी गहराता जाता है। स्क्रीन ने दुनिया से जोड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर स्वयं से दूर कर दिया। अब हम उपलब्धियों का मूल्य अनुभवों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरों की रील्स से तय करते हैं। निरंतर तुलना आत्मसम्मान को क्षीण करती है। चेहरे मुस्कुराते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोफाइल चमकती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन का एकांत और गहरा हो जाता है। भीड़ में जन्मा यही अकेलापन हमारे समय की नई सामाजिक बीमारी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सभ्यताएँ एक दिन में नहीं बदलतीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वे आदतों में बदलती हैं। पहले पत्रों की जगह संदेश आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर संदेशों की जगह इमोजी ने भावनाएँ ले लीं। बातचीत स्टेटस में सिमट गई और साथ होने की जगह ऑनलाइन दिखना पर्याप्त हो गया। हर सुविधा के साथ संवाद घटा। हर नई तकनीक ने समय बचाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर थोड़ा-सा मनुष्य भी छीन लिया। अब असहमति को समझाने से आसान उसे म्यूट करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुःख बाँटने से आसान उसे छिपाना और प्रेम निभाने से आसान उसे पोस्ट करना है। सुविधा धीरे-धीरे संवेदना पर भारी पड़ गई। आधुनिक जीवन ने नियंत्रण दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मानवीय स्पर्श छीन लिया। यही इस युग का सबसे अदृश्य सौदा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सौभाग्य से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय हमारे हाथ में है। परिवार फोन-फ्री डिनर का नियम बना सकते हैं। दफ्तर कैमरा-ऑन संवाद को औपचारिकता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहभागिता बना सकते हैं। नागरिक सोशल मीडिया से निकलकर प्रत्यक्ष संवाद की संस्कृति जीवित कर सकते हैं। तकनीक शत्रु नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवेकहीन उपयोग संकट है। सुविधा के बदले संवेदना गिरवी रखी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाली पीढ़ियाँ ऐसे समय को याद करेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हर हाथ में स्मार्टफोन था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर किसी का हाथ थामने का समय नहीं। तब इंसानियत का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">लास्ट सीन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होगा—चलती उँगलियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थकी आँखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौन होंठ। रील्स चलती रहेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन ठहर जाएगा। इसलिए सबसे पहले रिश्तों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यस्थलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र और भीतर का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">म्यूट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">हटाना होगा। भविष्य हमारे समय का मूल्य तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बचाए गए संवाद से तय करेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:38:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांकीपुर में भाजपा की हार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बाकीपुर-</strong> विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए आत्ममंथन का एक बड़ा अवसर पैदा किया है। लंबे समय से मजबूत संगठन और अनुशासित कार्यकर्ता-आधार के लिए पहचानी जाने वाली भाजपा को इस सीट पर मिली हार ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल चुनावी हार थी, या संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी का संकेत? यही सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चुनावी परिणामों के बाद पार्टी के कई स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह भावना सामने आई कि संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184629/bjps-defeat-in-bankipur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/bankipur-assembly-by-election-prashant-kishor-wins-1785758730.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बाकीपुर-</strong> विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए आत्ममंथन का एक बड़ा अवसर पैदा किया है। लंबे समय से मजबूत संगठन और अनुशासित कार्यकर्ता-आधार के लिए पहचानी जाने वाली भाजपा को इस सीट पर मिली हार ने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल चुनावी हार थी, या संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती दूरी का संकेत? यही सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चुनावी परिणामों के बाद पार्टी के कई स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह भावना सामने आई कि संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। यदि किसी राजनीतिक दल के समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को निर्णय प्रक्रिया से अलग महसूस करने लगें, तो उसका प्रभाव चुनावी अभियान और मतदाताओं तक पहुंच पर पड़ना स्वाभाविक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका बूथ स्तर का संगठन रहा है। लेकिन यदि यही संगठन पूरी सक्रियता और उत्साह के साथ मैदान में न दिखाई दे, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। चुनाव केवल बड़े नेताओं की सभाओं से नहीं, बल्कि घर-घर जाकर मतदाताओं से संवाद स्थापित करने वाले कार्यकर्ताओं के परिश्रम से भी जीते जाते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उम्मीदवार चयन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज रहीं। कई बार ऐसा देखा गया है कि स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय और सक्रिय चेहरों की अनदेखी होने पर कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा होती है। यदि कार्यकर्ताओं को यह महसूस हो कि उनकी राय को पर्याप्त महत्व नहीं मिला, तो चुनावी ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">बांकीपुर में स्थानीय मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहे। क्षेत्र के विकास, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, महंगाई और जनसुविधाओं जैसे विषय मतदाताओं के लिए अहम रहे। विपक्ष ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया, जबकि भाजपा को इन पर अधिक प्रभावी संवाद स्थापित करने की आवश्यकता महसूस हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि विपक्ष विभिन्न सामाजिक समूहों को एक मंच पर लाने में सफल हो जाए और सत्ता पक्ष अपने पारंपरिक मतदाताओं को पूरी तरह मतदान केंद्र तक न पहुंचा सके, तो परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा के लिए यह हार एक चेतावनी भी है और अवसर भी। यदि पार्टी समय रहते संगठन की समीक्षा करे, कार्यकर्ताओं की बात सुने, स्थानीय नेतृत्व को अधिक महत्व दे और जनता के मुद्दों पर निरंतर संवाद बनाए रखे, तो भविष्य में ऐसे परिणामों से बचा जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में चुनावी हार किसी भी दल के लिए अंत नहीं होती, बल्कि सुधार और पुनर्निर्माण का अवसर होती है। भाजपा ने अतीत में भी कई चुनावी झटकों के बाद मजबूत वापसी की है। बांकीपुर का परिणाम भी पार्टी के लिए संगठनात्मक समीक्षा, कार्यकर्ता सम्मान और स्थानीय रणनीति को मजबूत करने का संदेश माना जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इस परिणाम से क्या सीख लेती है और क्या संगठन तथा कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को और मजबूत बनाकर जनता का विश्वास दोबारा हासिल करने में सफल होती है। बांकीपुर का जनादेश केवल एक सीट का फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए यह संदेश भी है कि लोकतंत्र में जनता और कार्यकर्ता—दोनों की आवाज़ को समान महत्व देना आवश्यक है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:19:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>EVM तुरंत बंद हो, बैलेट पेपर से हो चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बिकापुर, अयोध्या।</strong> भारतीय जन समाज पार्टी ने आज केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए मांग की कि देश में लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए EVM को तुरंत बंद किया जाए और आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं। भारतीय जन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजमोहन सिंह ने कहा: "जिस मशीन पर देश की जनता को भरोसा नहीं, उस मशीन से देश का भविष्य तय नहीं हो सकता। अमेरिका, जर्मनी, नीदरलैंड जैसे देश EVM को खारिज कर चुके हैं। फिर भारत में इसे थोपने का क्या कारण है? हम सरकार को चेतावनी देते हैं-EVM</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184623/evm-should-be-closed-immediately-and-elections-should-be-done"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/646029.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बिकापुर, अयोध्या।</strong> भारतीय जन समाज पार्टी ने आज केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए मांग की कि देश में लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए EVM को तुरंत बंद किया जाए और आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं। भारतीय जन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजमोहन सिंह ने कहा: "जिस मशीन पर देश की जनता को भरोसा नहीं, उस मशीन से देश का भविष्य तय नहीं हो सकता। अमेरिका, जर्मनी, नीदरलैंड जैसे देश EVM को खारिज कर चुके हैं। फिर भारत में इसे थोपने का क्या कारण है? हम सरकार को चेतावनी देते हैं-EVM पूरी तरह बंद हो। अन्यथा देश की जनता का चुनाव प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।"<br /><br />सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा पारदर्शिता है। बैलेट पेपर ही एकमात्र ऐसा तरीका है जिसमें वोटर खुद अपनी पर्ची देख सकता है और गिनती सबके सामने होती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। चाहे कोई भी संगठन हो, पंजीकृत हो या न हो, संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा। साफ-सुथरी छवि और साफ-सुथरा चुनाव भारतीय जन समाज पार्टी का मूल सिद्धांत है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय जन समाज पार्टी की प्रमुख मांगें:</div>
<div style="text-align:justify;">1. EVM को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">2. 2027 के सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं।</div>
<div style="text-align:justify;">3. सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की फंडिंग में पूर्ण पारदर्शिता लागू हो।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:11:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा सरकार प्रदेश के लिए संकट, सत्ता परिवर्तन से ही होगा समाधान : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लिए संकट बन चुकी है और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदेश की समस्याओं का समाधान संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों, युवाओं और बेटियों के साथ अन्याय किया है तथा आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस के माध्यम से बर्बर कार्रवाई कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184537/crisis-for-bjp-government-in-the-state-will-be-solved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/whatsapp-image-2026-08-02-at-19.00.11.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लिए संकट बन चुकी है और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदेश की समस्याओं का समाधान संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों, युवाओं और बेटियों के साथ अन्याय किया है तथा आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस के माध्यम से बर्बर कार्रवाई कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों के साथ समझौता कर यह आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा और न ही उनका उत्पीड़न होगा। लेकिन अब छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि सरकार अपने वादों पर कायम नहीं रहती तो जनता का विश्वास कमजोर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फतेहपुर की घटना का उल्लेख करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि वहां विद्यालय के बच्चों ने केवल पीने के पानी और कक्षाओं में पंखे लगाने जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग की थी। जब उनकी मांग स्वीकार कर ली गई, तब बच्चों और उनके परिवारों को परेशान करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी के विधायक प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से मिलकर हर संभव सहायता प्रदान करेंगे तथा किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने का दावा करने वाली सरकार को पहले सरकारी विद्यालयों में बिजली, पानी, पंखे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका कहना था कि विकास के बड़े दावों के बीच शिक्षा व्यवस्था की आधारभूत जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं के बढ़ते प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले के कई महत्वपूर्ण सरकारी तालाबों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रदेश में बने विभिन्न एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इनके निर्माण में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना था कि कई परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं और कुछ स्थानों पर सड़कें उद्घाटन के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गईं। उन्होंने इसे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की कमी का उदाहरण बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने अयोध्या से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों में भी पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने दिल्ली में छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन उचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी नसीहत देते हुए कहा कि वे निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उनके अनुसार सरकारें बदलती रहती हैं, इसलिए अधिकारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आकर कार्य नहीं करना चाहिए और कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लेने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पेपर लीक के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि युवाओं का भविष्य लगातार प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">एक प्रश्न के उत्तर में अखिलेश यादव ने कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को 'यश भारती सम्मान' प्रदान किया जाता था और भविष्य में भी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की परंपरा जारी रखी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं का समाधान, पारदर्शी शासन, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, युवाओं को रोजगार और कानून का निष्पक्ष पालन सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी प्रदेश के लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और जनहित के प्रश्नों पर संघर्ष जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 19:13:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों को प्रधानमंत्री की माफी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन छात्रों को माफ कर दिया है जिन्होंने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान उनके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। यह एक बहुत बड़ी बात है कि देश के प्रधानमंत्री पर जिन छात्रों ने गन्दी गन्दी गलियों का प्रयोग किया हो और उन्हें माफ़ कर दिया जाये। शायद प्रधानमंत्री ने उन्हें सुधरने का एक मौका दिया है। सार्वजनिक स्थान पर कैमरे के सामने इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग दंडनीय है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस तरह की भाषा को सहन नहीं किया जा सकता है। प्रशासन की तरफ़ से इस तरह के छात्रों की पहचान करके उन पर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184455/prime-ministers-apology-to-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन छात्रों को माफ कर दिया है जिन्होंने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान उनके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। यह एक बहुत बड़ी बात है कि देश के प्रधानमंत्री पर जिन छात्रों ने गन्दी गन्दी गलियों का प्रयोग किया हो और उन्हें माफ़ कर दिया जाये। शायद प्रधानमंत्री ने उन्हें सुधरने का एक मौका दिया है। सार्वजनिक स्थान पर कैमरे के सामने इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग दंडनीय है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस तरह की भाषा को सहन नहीं किया जा सकता है। प्रशासन की तरफ़ से इस तरह के छात्रों की पहचान करके उन पर कार्यवाही करने की तैयारी चल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी बीच सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक वीडियो आता है जिसमें वह कहते हैं कि मैं इन छात्रों पर कार्यवाही करने के पक्ष में नहीं हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं इन्हें एक बार सुधरने का मौका देता हूं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो में कहा कि ये बचपन है और बचपन में गलतियां हो जाती हैं। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस घटना ने देशभर में तीखी राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी। एक ओर कई लोगों ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर यह तर्क दिया गया कि युवाओं का आक्रोश परीक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों का परिणाम है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा संदेश दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे छात्रों को कठोर दंड देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने उन्हें "भटके हुए बच्चे" बताते हुए समाज से भी क्षमा और संवेदनशीलता का व्यवहार अपनाने की अपील की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री का यह रुख केवल राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद यदि सरकार प्रतिशोध की भावना से बचते हुए संवाद का रास्ता चुनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत भी माना जा सकता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी स्पष्ट है कि क्षमा का अर्थ अभद्र भाषा या हिंसक व्यवहार को उचित ठहराना नहीं है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार उतना ही महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितना कि उसकी मर्यादा बनाए रखना। यदि आंदोलन अपनी नैतिक शक्ति खो देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसकी वैध मांगें भी कमजोर पड़ सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे प्रकरण में न्यायपालिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचने की बात कही और जिन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें राहत देने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जांच और आवश्यक प्रक्रिया जारी रह सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रधानमंत्री का यह कदम विपक्ष की उस आलोचना का जवाब भी माना जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सरकार पर छात्रों के प्रति कठोर रवैया अपनाने के आरोप लगाए जा रहे थे। वहीं सरकार समर्थकों का मानना है कि क्षमा का संदेश देकर प्रधानमंत्री ने यह दिखाया कि वे युवाओं को विरोधी नहीं बल्कि देश का भविष्य मानते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम से छात्रों और छात्र संगठनों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश निकलता है। लोकतांत्रिक आंदोलन तभी प्रभावी बनते हैं जब वे अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथ्यों और मर्यादा के साथ आगे बढ़ें। अपशब्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा या व्यक्तिगत हमले किसी भी जनआंदोलन की नैतिक शक्ति को कम कर देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीट पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगाया है। ऐसे में सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल आंदोलनों को नियंत्रित करना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना भी है। यदि सुधार लागू होते हैं और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी इस पूरे आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य पूरा माना जाएगा। अंततः यह घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सीख है। सरकार को आलोचना सुनने का धैर्य रखना चाहिए और नागरिकों को विरोध की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। क्षमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद और सुधार—यदि ये तीनों साथ चलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान हर परिस्थिति में बना रहे। प्रोटेस्ट होते रहते हैं लेकिन इस तरह की अभद्र भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह इन आंदोलनकारी छात्रों के लिए एक सबक है जिसको सीखना बहुत जरूरी है। हम जिस समाज में रहते हैं वहां इस तरह की अभद्र भाषा का कोई स्थान नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आगे से ऐसा करने से पहले दस बार सोचना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 19:55:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन नेशन, वन इलेक्शन: जेपीसी पहुंचेगी पणजी और लखनऊ</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित <strong>संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024</strong> तथा <strong>संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024</strong> के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के उद्देश्य से <strong>'एक राष्ट्र, एक चुनाव'</strong> विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 10 से 15 जुलाई, 2026 तक गोवा की राजधानी पणजी और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अध्ययन दौरा करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति के अध्यक्ष <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पी. पी. चौधरी</span></span></strong> के नेतृत्व में होने वाले इस दौरे का उद्देश्य प्रस्तावित विधेयकों के देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनाव प्रणाली और शासन व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन करना तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182820/one-nation-one-election-jpc-will-reach-panaji-and-lucknow"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image-38-1024x612.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित <strong>संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024</strong> तथा <strong>संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024</strong> के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के उद्देश्य से <strong>'एक राष्ट्र, एक चुनाव'</strong> विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) 10 से 15 जुलाई, 2026 तक गोवा की राजधानी पणजी और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अध्ययन दौरा करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति के अध्यक्ष <strong><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पी. पी. चौधरी</span></span></strong> के नेतृत्व में होने वाले इस दौरे का उद्देश्य प्रस्तावित विधेयकों के देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनाव प्रणाली और शासन व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन करना तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन दौरे के दौरान समिति क्षेत्रीय स्तर पर संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, वित्तीय एवं शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, राज्य बार परिषदों, संबंधित उच्च न्यायालयों के अधिवक्ता संघों, विभिन्न पेशेवर संगठनों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत परामर्श करेगी। इन बैठकों में चुनाव प्रणाली में संभावित बदलावों, प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रभाव, संवैधानिक पहलुओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति का यह अध्ययन दौरा देशभर में आयोजित किए जा रहे क्षेत्रीय परामर्शों की श्रृंखला का अगला चरण है। इससे पहले समिति मुंबई, देहरादून, चंडीगढ़, शिमला, बेंगलुरु और गांधीनगर में भी इसी प्रकार के अध्ययन दौरे और परामर्श बैठकें आयोजित कर चुकी है। इन बैठकों में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों, विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, राजनीतिक दलों के नेताओं, बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा विभिन्न नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व में आयोजित इन परामर्श बैठकों में महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, चंडीगढ़ तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी। इसके अलावा <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारतीय रिज़र्व बैंक</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड</span></span> तथा <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक</span></span> जैसी प्रमुख संस्थाओं के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भी समिति के समक्ष अपने विचार रखे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति को उम्मीद है कि पणजी और लखनऊ में होने वाले आगामी अध्ययन दौरे के दौरान भी विभिन्न वर्गों से उपयोगी सुझाव प्राप्त होंगे। इन सुझावों के आधार पर समिति प्रस्तावित <strong>संविधान (एक सौ उनतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2024</strong> और <strong>संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024</strong> पर अपनी रिपोर्ट को और अधिक व्यापक तथा व्यावहारिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा को लेकर देशभर में विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है। ऐसे में संयुक्त संसदीय समिति का यह अध्ययन दौरा विभिन्न पक्षों की राय को समाहित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 18:17:39 +0530</pubDate>
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                <title>&quot;कलम और संविधान एक ही स्याही से चलते हैं&quot; पत्रकारों की एकजुटता का सशक्त संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति का प्रथम स्थापना दिवस शनिवार को लखनऊ में अत्यंत गरिमामय, भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में यह स्पष्ट संदेश गया कि संगठित पत्रकारिता ही लोकतंत्र की रीढ़ है। समारोह में पत्रकारिता, सामाजिक, धार्मिक एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्यजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह का ओजस्वी संबोधन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा: "सम्मानित मंच, अध्यक्ष हरीश तिवारी, संयोजक राजेंद्र गुप्ता, महासचिव आशीष तिवारी और उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182812/pen-and-constitution-run-with-the-same-ink-a-powerful"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/583704.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति का प्रथम स्थापना दिवस शनिवार को लखनऊ में अत्यंत गरिमामय, भव्य एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में यह स्पष्ट संदेश गया कि संगठित पत्रकारिता ही लोकतंत्र की रीढ़ है। समारोह में पत्रकारिता, सामाजिक, धार्मिक एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्यजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह का ओजस्वी संबोधन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जन समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा: "सम्मानित मंच, अध्यक्ष हरीश तिवारी, संयोजक राजेंद्र गुप्ता, महासचिव आशीष तिवारी और उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए पत्रकारिता के सच्चे सिपाही साथियों, आप सभी को मेरा क्रांतिकारी नमस्कार।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज मुझे बेहद गर्व हो रहा है कि 'जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति' अपना पहला स्थापना दिवस मना रही है। साथियों, कलम और संविधान एक ही स्याही से चलते हैं। जिस दिन पत्रकार डर जाएगा, उस दिन लोकतंत्र भी डर जाएगा। जिस दिन पत्रकार बिक जाएगा, उस दिन सरकार भी बिक जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मैं एक राजनीतिक दल का अध्यक्ष हूँ। रोज मेरी आलोचना भी होती है और तारीफ भी। लेकिन मैंने कभी किसी पत्रकार से ये नहीं कहा कि 'मेरे खिलाफ मत लिखो'। क्योंकि मैं जानता हूँ - आईना टूट सकता है, लेकिन सच नहीं टूटता।आज पत्रकार साथी सबसे ज्यादा परेशान हैं। मान्यता के नाम पर लटकाया जाता है, विज्ञापन के नाम पर दबाया जाता है, और सच लिखने पर धमकाया जाता है। भारतीय जन समाज पार्टी का वादा है। हम पत्रकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। अंत में समिति के सभी पदाधिकारियों को दिल से बधाई। आपका पहला साल नींव का साल है, अगला साल इंकलाब का साल होगा।जय हिंद, जय संविधान, जय पत्रकारिता। धन्यवाद।" कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समिति के अध्यक्ष हरीश तिवारी<br /><br />ने कहा कि  "उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति पत्रकारों के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी। हम संगठन को प्रदेश का सबसे मजबूत पत्रकार संगठन बनाएंगे।" समिति के महासचिव आशीष तिवारी ने प्रभावशाली मंच संचालन किया। वहीं कार्यक्रम के संयोजक राजेंद्र गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह को माला पहनाकर, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर BJSP के बांदा जिला अध्यक्ष राजेश कुमार यादव भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने पत्रकारों के सम्मान और लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते भारतीय जन समाज पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजमोहन सिंह समिति के पदाधिकारियों द्वारा अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानित करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।  </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 22:38:16 +0530</pubDate>
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