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                <title>Research and Innovation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Research and Innovation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण,  भव्य आयोजन आज</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
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<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में 29 जून 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आज विश्वविद्यालय में विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत संपूर्ण कार्यक्रम का अंतिम पूर्वाभ्यास सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;">  इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने विद्वत पारियात्र के साथ दीक्षांत समारोह की तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में जनभवन द्वारा नामित दो नए सदस्य, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182237/all-preparations-for-tenth-convocation-ceremony-completed-grand-event-today"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782655142971.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में 29 जून 2026 को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आज विश्वविद्यालय में विद्या परिषद एवं कार्य परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत संपूर्ण कार्यक्रम का अंतिम पूर्वाभ्यास सम्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह, कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्यों ने विद्वत पारियात्र के साथ दीक्षांत समारोह की तैयारियों का पूर्वाभ्यास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में जनभवन द्वारा नामित दो नए सदस्य, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल कुमार तथा बापू महाविद्यालय, पीपीगंज, गोरखपुर की प्राचार्य डॉ. मंजू मिश्रा भी समारोह में सम्मिलित होंगी। दीक्षांत समारोह में 19 कार्य परिषद सदस्य एवं 51 विद्या परिषद सदस्य सहभागिता करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दशम दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल  आनंदीबेन पटेल करेंगी। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यावरणविद् डॉ. मधुलिका अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री  रजनी तिवारी उपस्थित रहेंगी। रविवार सायंकाल  राज्यपाल का सिद्धार्थ विश्वविद्यालय आगमन प्रस्तावित है तथा उनके सम्मान में विश्वविद्यालय के कला संकाय सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल दीक्षांत समारोह का शुभारम्भ प्रातः 10:00 बजे वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगीत की प्रस्तुति से होगा तथा समापन राष्ट्रगान एवं विद्वत पारियात्रा के प्रत्यावर्तन के साथ किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष दीक्षांत समारोह का मुख्य आकर्षण स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी होंगे। विश्वविद्यालय द्वारा कुल 37 स्वर्ण पदक, जिनमें 13 डोनर स्वर्ण पदक शामिल हैं, प्रदान किए जाएंगे। विशेष रूप से 13 ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्हें दो या दो से अधिक स्वर्ण पदक प्राप्त हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में पीएच.डी. उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की जाएगी। साथ ही विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित आठ पुस्तकों का लोकार्पण, दीक्षा उत्सव कार्यक्रम की झलकियां पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन, नवनिर्मित बालगृह ‘किलकारी’ एवं दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटलाइज्ड लाइब्रेरी का लोकार्पण भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गोद लिए गए गांवों के बच्चों द्वारा पर्यावरण एवं जल संरक्षण विषयक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट वितरण का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि, दशम दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों, समाज के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता और नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय के साथ निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। यह दीक्षांत समारोह हमारे विद्यार्थियों, शिक्षकों और समस्त विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों का गौरवपूर्ण प्रतीक बनेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा</category>
                                            <category>अन्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 22:34:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की महंती आवश्यकता है :  कुलपति प्रोफेसर कविता शाह</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर में शुक्रवार को "पर्यावरण परिवर्तन, सततता, प्रौद्योगिकी और नवाचार" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। । कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की महत्ती आवश्यकता है, और इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में विशेष योगदान देना होगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि स्थायी विकास केवल सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149569/maintaining-environmental-balance-is-todays-great-need-vice-chancellor-professor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/1741355092802.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर में शुक्रवार को "पर्यावरण परिवर्तन, सततता, प्रौद्योगिकी और नवाचार" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। । कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की महत्ती आवश्यकता है, और इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में विशेष योगदान देना होगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि स्थायी विकास केवल सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है, और विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि उपविभागीय वन अधिकारी (एसडीएफओ) सिद्धार्थनगर, श्रीमती वीना तिवारी ने वनों के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर बल दिया। संगोष्ठी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के दो प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किए। इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बीएचयू, वाराणसी डॉ. शशि पांडेय राय  ने "पादप द्वितीयक चयापचयों के पारिस्थितिक प्रभाव" पर व्याख्यान दिया।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने बताया कि पादप द्वितीयक चयापचय  न केवल औषधीय और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भी सहायक होते हैं। दूसरा आमंत्रित व्याख्यान बीएचयू, वाराणसी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, निदेशक, प्रो. वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने निर्मित वेटलैंड के अनुप्रयोग" विषय पर अपना आमंत्रित व्याख्यान दिया। उन्होंने निर्मित वेटलैंड  को एक प्राकृतिक, सतत और किफायती समाधान बताते हुए इसके विभिन्न अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला पर व्याख्यान दिया। </div>
<div>इस दौरान डॉ. आशुतोष वर्मा , डॉ. अंकिता श्रीवास्तव  प्रो. प्रकृति राय ने भी संबोधित किया।</div>
<div> </div>
<div>इस संगोष्ठी में पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया जिनमें मौखिक प्रस्तुति  के लिए अनुराधा त्रिपाठी को प्रथम स्थान, हर्षिता सिंह को द्वितीय स्थान, कविता चौधरी को तृतीय स्थान, जबकि पोस्टर प्रस्तुति के लिए श्वेता भट्ट को प्रथम स्थान, वर्तिका द्विवेदी को द्वितीय स्थान, एकता सिंह को तृतीय स्थान प्रदान किया गया। इस संगोष्ठी के समापन सत्र में भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. कौशलेंद्र चतुर्वेदी ने अंतिम प्रतिवेदन  प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने धन्यवाद दिया ।  </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 13:37:06 +0530</pubDate>
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