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                <title>Siddharth University - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Siddharth University RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर निकाली योग जागरूकता यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में कुलपति प्रो० कविता शाह के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जन-जागरण योग जागरूकता यात्रा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों एवं विद्यार्थियों द्वारा निकाली गई यह यात्रा विश्वविद्यालय परिसर से प्रारम्भ होकर कपिलवस्तु तक पहुंची। यात्रा का उद्देश्य आम जनमानस को योग के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों तथा दैनिक जीवन में योग को अपनाने के प्रति जागरूक करना था।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर योग आयोजन के समन्वयक प्रो० सत्येन्द्र कुमार दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181739/siddharth-university-takes-out-yoga-awareness-tour-on-the-eve"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781969255734.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में कुलपति प्रो० कविता शाह के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जन-जागरण योग जागरूकता यात्रा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों एवं विद्यार्थियों द्वारा निकाली गई यह यात्रा विश्वविद्यालय परिसर से प्रारम्भ होकर कपिलवस्तु तक पहुंची। यात्रा का उद्देश्य आम जनमानस को योग के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों तथा दैनिक जीवन में योग को अपनाने के प्रति जागरूक करना था।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर योग आयोजन के समन्वयक प्रो० सत्येन्द्र कुमार दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का आधार है। वर्तमान समय में स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ० यशवंत यादव ने कहा कि योग केवल स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि एक जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण का माध्यम भी है। </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर डॉ० विमल चन्द्र वर्मा, डॉ० जय सिंह यादव, डॉ० मयंक कुशवाहा, डॉ० दिनेश प्रसाद, डॉ० अविनाश प्रताप सिंह, डॉ० कपिल गुप्ता तथा डॉ० अब्दुल हफीज सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों एवं  छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 21:06:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु  में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर का हुआ शुभारम्भ</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता  </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर,</strong></div>
<div>  </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु परिसर में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना की तीन इकाई,भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई, एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई, के  सप्त दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन कुलपति प्रो कविता शाह के निर्देशन  में  प्रारम्भ हुआ।</div>
<div>  </div>
<div>  सप्त दिवसीय विशेष शिविर के प्रथम दिवस का प्रारम्भ शिविर के उद्घाटन सत्र  को प्रो नीता यादव अधिष्ठाता छात्र कल्याण की अध्यक्षता में  हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि स्वयंसेवक- स्वयंसेविकाओं को बेहतर चरित्र निर्माण के साथ-</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172938/national-service-scheme-camp-started-at-siddharth-university-kapilvastu"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1772892943502.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता  </strong></div>
<div><strong>सिद्धार्थनगर,</strong></div>
<div> </div>
<div>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु परिसर में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना की तीन इकाई,भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई, महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई, एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई, के  सप्त दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन कुलपति प्रो कविता शाह के निर्देशन  में  प्रारम्भ हुआ।</div>
<div> </div>
<div> सप्त दिवसीय विशेष शिविर के प्रथम दिवस का प्रारम्भ शिविर के उद्घाटन सत्र  को प्रो नीता यादव अधिष्ठाता छात्र कल्याण की अध्यक्षता में  हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि स्वयंसेवक- स्वयंसेविकाओं को बेहतर चरित्र निर्माण के साथ- साथ एक सभ्य समाज के भी निर्माण करने की आवश्यकता है।</div>
<div> </div>
<div>कार्यक्रम के प्रथम बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के रुप में डॉ मनीषा वाजपेई, सहायक आचार्य, भौतिक विज्ञान विभाग ने "सभ्य समाज के निर्माण में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका"  विषय पर कहा कि  मानव जीवन का बेहतर निर्माण आदर्शों एवं मानव मूल्यों से ओतप्रोत होता है।</div>
<div> </div>
<div>इस तरह के जीवन निर्माण में स्वयंसेवक स्वयंसेविकाओं की सक्रियता बहुत अधिक प्रासंगिक होती है।मानवता को जीवंत रखने हेतु राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े लोग अपने सम्पूर्ण जीवन को भारत माता को समर्पित कर देते हैं।  प्रथम दिवस के द्वितीय बौद्धिक सत्र में वक्ता के रुप में डॉ हरेंद्र कुमार शर्मा ने " मानव मूल्य निर्माण में राष्ट्रीय सेवा योजना का योगदान" विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि  राष्ट्रीय सेवा योजना  का योगदान मानव मूल्य निर्माण में बहुत ही अधिक योगदान प्रदान करता है।</div>
<div> </div>
<div>राष्ट्रीय सेवा योजना भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ यशवन्त यादव,  महारानी अहिल्या बाई होलकर इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ रक्षा एवं  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ सरिता सिंह के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में संपूर्ण कार्यक्रम संचालित हुआ।</div>
<div> </div>
<div>सांस्कृतिक संध्या में स्वयंसेवक- स्वयंसेविकाओं ने मानव मूल्य से जुड़े गीत संगीत एवं अन्य विधा से उपस्थित सभी लोगों को आनंदित होने का अवसर प्रदान किया। उद्घाटन सत्र  का संचालन डॉ यशवन्त यादव, स्वागत डॉ रक्षा एवं आभार डॉ सरिता सिंह द्वारा किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 20:34:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अमिटी विश्वविद्यालय, ग्वालियर द्वारा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की शिक्षिका को “सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार”</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>अमिटी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के अमिटी बिज़नेस स्कूल द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के प्रबंधन अध्ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. क़हक़शाँ ख़ान को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए “सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार अमिटी बिज़नेस स्कूल, अमिटी विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा उनके उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक अनुसंधान और प्रबंधन अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस उपलब्धि पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु की  कुलपति प्रो. कविता शाह ने डॉ. क़हक़शाँ ख़ान को हार्दिक बधाई देते हुए उनके शोध कार्य को विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164101/siddharth-university-teacher-given-%E2%80%9Cbest-research-paper-award%E2%80%9D-by-amity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/1766493973358-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>अमिटी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के अमिटी बिज़नेस स्कूल द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के प्रबंधन अध्ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. क़हक़शाँ ख़ान को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए “सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार अमिटी बिज़नेस स्कूल, अमिटी विश्वविद्यालय ग्वालियर द्वारा उनके उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक अनुसंधान और प्रबंधन अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस उपलब्धि पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु की  कुलपति प्रो. कविता शाह ने डॉ. क़हक़शाँ ख़ान को हार्दिक बधाई देते हुए उनके शोध कार्य को विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने वाला बताया। विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के डीन प्रो. सौरभ ने भी उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बताते हुए उनकी सराहना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों एवं सहकर्मियों ने भी डॉ. क़हक़शाँ ख़ान को इस सम्मान के लिए शुभकामनाएँ दीं और उनके निरंतर अनुसंधान प्रयासों की प्रशंसा की। डॉ. क़हक़शाँ ख़ान, सहायक प्रोफेसर, प्रबंधन अध्ययन विभाग, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की शोध एवं शैक्षणिक उपलब्धियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 19:01:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी भी अपने कौशल से उपलब्धियां को प्राप्त कर सकते हैं - प्रोफ़ेसर दीपक बाबू</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के वाणिज्य विभाग के भूतपूर्व छात्र सलमान ने चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) की प्रतिष्ठित परीक्षा वर्ष 2025 में उत्तीर्ण कर विश्वविद्यालय एवं क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अपने प्रेरक संबोधन में सलमान ने कहा कि “किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और शिक्षकों के साथ सतत संवाद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान समय में क्षेत्रीय सीमाएँ सफलता में बाधक नहीं हैं यदि लक्ष्य स्पष्ट हो</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161111/students-from-rural-areas-can-also-achieve-achievements-with-their"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1763733509277-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के वाणिज्य विभाग के भूतपूर्व छात्र सलमान ने चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) की प्रतिष्ठित परीक्षा वर्ष 2025 में उत्तीर्ण कर विश्वविद्यालय एवं क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान अपने प्रेरक संबोधन में सलमान ने कहा कि “किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और शिक्षकों के साथ सतत संवाद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान समय में क्षेत्रीय सीमाएँ सफलता में बाधक नहीं हैं यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और नीयत मजबूत हो, तो सिद्धार्थनगर जैसे पिछड़े क्षेत्र में रहकर भी राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि हासिल की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सलमान मूल रूप से अलीगढ़ के निकटवर्ती क्षेत्र से हैं और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के गौरवमयी पूर्व विद्यार्थी रहे हैं। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष एवं पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. दीपक बाबू ने सलमान की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता विभाग के विद्यार्थियों के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत रहेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी भी अपने ज्ञान, कौशल एवं ईमानदार प्रयास से उच्चतम उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी आह्वान किया कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि आगे चलकर रोजगार सृजनकर्ता भी बनें, जिससे भारत के विकास एवं उत्पादन वृद्धि में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में डॉ. दिनेश प्रसाद सहित वाणिज्य विभाग के  शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 20:10:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में काला नमक धान पर सतत आजीविका एवं स्थानीय उद्यमिता के अवसरों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के प्रबंधन अध्ययन विभाग में बुधवार को  दिलीप चौहान  निदेशक, दिव्यम आहार प्रा. लि. द्वारा सिद्धार्थनगर में सतत आजीविका के अवसर सृजन  विषय पर एक प्रेरक एवं व्यावहारिक व्याख्यान आयोजित किया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में विशेष रूप से ‘काला नमक धान’ के उत्पादन, विपणन एवं मूल्य संवर्धन  पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह पारंपरिक धान न केवल पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यदि उचित विपणन, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग रणनीतिया अपनाई जाए तो यह क्षेत्रीय स्तर पर ग्रामीण उद्यमिता  और सतत आजीविका के नए आयाम खोल सकता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">अपने अनुभव साझा करते हुए</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159882/discussion-on-sustainable-livelihood-and-local-entrepreneurship-opportunities-on-black"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1762952829974-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के प्रबंधन अध्ययन विभाग में बुधवार को  दिलीप चौहान  निदेशक, दिव्यम आहार प्रा. लि. द्वारा सिद्धार्थनगर में सतत आजीविका के अवसर सृजन  विषय पर एक प्रेरक एवं व्यावहारिक व्याख्यान आयोजित किया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में विशेष रूप से ‘काला नमक धान’ के उत्पादन, विपणन एवं मूल्य संवर्धन  पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह पारंपरिक धान न केवल पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यदि उचित विपणन, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग रणनीतिया अपनाई जाए तो यह क्षेत्रीय स्तर पर ग्रामीण उद्यमिता  और सतत आजीविका के नए आयाम खोल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी दिव्यम आहार प्रा. लि. वर्तमान में काला नमक चावल के संरक्षण, प्रसंस्करण एवं बाजार विस्तार की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने एमबीए विद्यार्थियों को अपनी कंपनी से प्रशिक्षण और प्रोजेक्ट कार्यों में जुड़ने का आमंत्रण भी दिया, ताकि वे ग्रामीण उत्पादों के मूल्य शृंखला और विपणन व्यवहार को निकट से समझ सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सौरभ, अधिष्ठाता, वाणिज्य संकाय एवं विभागाध्यक्ष, एमबीए विभाग ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि काला नमक चावल जैसे स्थानीय उत्पाद क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नयी दिशा दे सकते हैं, यदि उनमें नवाचार, गुणवत्ता नियंत्रण एवं ब्रांड विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाए।सत्र के समापन पर प्रो. सौरभ ने अतिथि वक्ता  दिलीप चौहान के  विचारों को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर डॉ. दीपक जायसवाल, सहायक आचार्य, डॉ. क़हकशा ख़ान, सहायक आचार्य  तथा विभाग के अन्य संकाय सदस्य एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सत्र के अंत में विद्यार्थियों ने विविध प्रश्न पूछे जिनका  चौहान ने व्यवहारिक उदाहरणों सहित उत्तर दिया। व्याख्यान अत्यंत संवादात्मक एवं प्रेरणादायक रहा, जिसने छात्रों को स्थानीय संसाधनों के माध्यम से उद्यमिता विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।</div>
</div>
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<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 19:15:54 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की महंती आवश्यकता है :  कुलपति प्रोफेसर कविता शाह</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर में शुक्रवार को "पर्यावरण परिवर्तन, सततता, प्रौद्योगिकी और नवाचार" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। । कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की महत्ती आवश्यकता है, और इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में विशेष योगदान देना होगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि स्थायी विकास केवल सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149569/maintaining-environmental-balance-is-todays-great-need-vice-chancellor-professor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/1741355092802.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर में शुक्रवार को "पर्यावरण परिवर्तन, सततता, प्रौद्योगिकी और नवाचार" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर से लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। । कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने की। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की महत्ती आवश्यकता है, और इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में विशेष योगदान देना होगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि स्थायी विकास केवल सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है, और विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।</div>
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<div>कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि उपविभागीय वन अधिकारी (एसडीएफओ) सिद्धार्थनगर, श्रीमती वीना तिवारी ने वनों के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर बल दिया। संगोष्ठी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के दो प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किए। इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बीएचयू, वाराणसी डॉ. शशि पांडेय राय  ने "पादप द्वितीयक चयापचयों के पारिस्थितिक प्रभाव" पर व्याख्यान दिया।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने बताया कि पादप द्वितीयक चयापचय  न केवल औषधीय और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भी सहायक होते हैं। दूसरा आमंत्रित व्याख्यान बीएचयू, वाराणसी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, निदेशक, प्रो. वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने निर्मित वेटलैंड के अनुप्रयोग" विषय पर अपना आमंत्रित व्याख्यान दिया। उन्होंने निर्मित वेटलैंड  को एक प्राकृतिक, सतत और किफायती समाधान बताते हुए इसके विभिन्न अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला पर व्याख्यान दिया। </div>
<div>इस दौरान डॉ. आशुतोष वर्मा , डॉ. अंकिता श्रीवास्तव  प्रो. प्रकृति राय ने भी संबोधित किया।</div>
<div> </div>
<div>इस संगोष्ठी में पोस्टर और मौखिक प्रस्तुति सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया जिनमें मौखिक प्रस्तुति  के लिए अनुराधा त्रिपाठी को प्रथम स्थान, हर्षिता सिंह को द्वितीय स्थान, कविता चौधरी को तृतीय स्थान, जबकि पोस्टर प्रस्तुति के लिए श्वेता भट्ट को प्रथम स्थान, वर्तिका द्विवेदी को द्वितीय स्थान, एकता सिंह को तृतीय स्थान प्रदान किया गया। इस संगोष्ठी के समापन सत्र में भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. कौशलेंद्र चतुर्वेदी ने अंतिम प्रतिवेदन  प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने धन्यवाद दिया ।  </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 13:37:06 +0530</pubDate>
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