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                <title>holi festival - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>कहीं श्मशान की राख कहीं फूलों से खेली जाती है होली!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समूचे देश समेत विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला होली पर्व आस्था विश्वास ऋतु परिवर्तन और सामाजिक एकता का लोकपर्व है। होली के दिन समूचा समाज सवर्ण असवर्ण गरीब अमीर सबल निर्बल राजा प्रजा ऊंच नीच के दायरे से बाहर आकर एक दूसरे को रंग गुलाल लगा कर सामाजिक समरसता व सौहार्द का सूत्रपात करता है यह लोकपर्व इतना सजीव व सामाजिक वैज्ञानिक आधार से जुड़ा है कि इस की प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं हो सकती है। इस लोकपर्व के संबंध में प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। पुराने समय में हिरण्यकश्यपु का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172340/holi-is-played-with-ashes-of-crematorium-and-flowers-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/कहीं-श्मशान-की-राख-कहीं-फूलों-से-खेली-जाती-है-होली!.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समूचे देश समेत विशेषकर उत्तर भारत में मनाया जाने वाला होली पर्व आस्था विश्वास ऋतु परिवर्तन और सामाजिक एकता का लोकपर्व है। होली के दिन समूचा समाज सवर्ण असवर्ण गरीब अमीर सबल निर्बल राजा प्रजा ऊंच नीच के दायरे से बाहर आकर एक दूसरे को रंग गुलाल लगा कर सामाजिक समरसता व सौहार्द का सूत्रपात करता है यह लोकपर्व इतना सजीव व सामाजिक वैज्ञानिक आधार से जुड़ा है कि इस की प्रासंगिकता कभी खत्म नहीं हो सकती है। इस लोकपर्व के संबंध में प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है। पुराने समय में हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रहलाद विष्णु जी का परम भक्त था। ये बात हिरण्यकश्यपु को पसंद नहीं थी। इस वजह से वह प्रहलाद को मारना चाहता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असुर राज हिरण्यकश्यपु ने बहुत कोशिश की, लेकिन प्रहलाद को मार नहीं सका। तब असुरराज की बहन होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई। होलिका को आग में न जलना का वरदान मिला हुआ था, लेकिन भगवान विष्णु जी की कृपा से होलिका जल गई और प्रहलाद बच गया। तभी से सत्य और धर्म की जीत के रूप में होली दहन का पर्व मनाया जाता है।।युगों पहले जिस तरह भक्त प्रहलाद के सकुशल बच जाने पर लोगों ने रंग गुलाल लगा कर खुशी मनाई थी आज भी उसी तरह खुशी मनाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गालियों से होली</strong></div>
<div style="text-align:justify;">होली के गीतों में वैसे भी गालियां पिरोई होती हैं. शब्दों का प्रयोग कुछ इस प्रकार किया गया होता है कि लोग उसे सुन कर मस्ती करते हैं और उन्हें भीतर तक गुदगुदी होती है. वाराणसी, मिथिलांचल, कुमाऊं, राजस्थान, हरियाणा में होली पर गाली की अनोखी परंररा है। होली एक ऐसा त्योहार है, जो रंगों की मस्ती के साथ-साथ गालियों और गुदगुदाते गीतों के लिए भी खूब जाना जाता है. इसीलिए इस त्योहार को सबसे अनूठा कहते हैं. साल भर लोगों को इसका इंतजार रहता है. लोग गालियों और गीतों के जरिए अपनी भड़ास निकालते हैं. जैसा प्रदेश, वैसे गीत और वैसी ही वहां की गालियां. बहुरंगी होली की ये छटा दुनिया भर में निराली है। काशी की परंपराएं इसलिए अनूठी हैं क्योंकि यहां होली पर गालियों का भी अपना एक अलग संस्कार देखने को मिलता है. दूसरे शहरों में गाली देने पर मार हो जाए, लेकिन यहां होली पर गालियां मनभावन लगती हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तलवारबाजी से होली</strong> </div>
<div style="text-align:justify;">पंजाब में सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा शुरू की गई यह होलीवीर रस से भरी होती है। इसमें निहंग सिख पारंपरिक पोशाक पहनकर तलवारबाजी और घुड़सवारी (गतका) का प्रदर्शन करते हैं। पश्चिमी बंगाल व ओडिशा में यहाँ होली को डोल जात्रा के रूप में मनाया जाता हैजिसमें राधा-कृष्ण की मूर्तियों को झूलों (डोल) पर रखकर जुलूस निकाला जाता है और रंगों से पूजा की जाती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लठ्ठमार होली</strong> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से करीब 50 किमी दूर बरसाना की होली बहुत खास होती है। बरसाना में कई दिनों तक लट्ठमार होली खेली जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा से पहले ही लोग यहां होली खेलना शुरू कर देते हैं। पास के नंदगांव के पुरुष बरसाना आते हैं और बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं। इन गांवों की महिलाएं पुरुषों को लट्ठ मारती हैं और पुरुष ढाल से बचने की कोशिश करते हैं। ये होली देखने देश-विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>फूलों से होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">मान्यता है कि मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ होली खेली थी। इसी वजह से इन जगहों पर होली की अच्छी खासी धूम होती है। मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण के भक्त बड़ी संख्या में होली खेलने पहुंचते हैं। यहां के मंदिरों में फूलों से होली खेली जाती है।बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली अवर्णनीय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लड्डूमार होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">बरसाना के राधा रानी मंदिर में लड्डू मार होली खेली जाती हैजहाँ एक-दूसरे पर लड्डू फेंके जाते हैं और उन्हें प्रसाद के रूप में खाया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>मसाने की होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">वाराणसी(काशी) के मणिकर्णिका घाट पर खेली जाने वाली होली विश्व प्रसिद्ध है। यहां शमशान की राख से होली खेली जाती है। मान्यता है कि शिव जी ने यहां अपने गणों के साथ चिता की राख से होली खेली थी। इसी मान्यता की वजह से आज भी शिव भक्त यहां मसाने की होली खेलते है। देश दुनिया में यह एकमात्र ऐसी होली है जिसमें चिता भस्म को रंग गुलाल की तरह इस्तेमाल करते हुए होली खेलते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अंगारों में होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">एक ऐसी भी होली है जहां जलती होली की लपटों के बीच पंडा नंगे पांव निकल जाता है लेकिन खरोंच तक नहीं आती है। मथुरा से करीब 50 किमी दूर एक गांव है फालैन। इसे प्रहलाद का गांव भी कहते हैं। फालैन गांव की होली की खास बात ये है कि यहां जलती हुई होली के बीच में से एक पंडा चलकर गुजरता है। होली ऊंची-ऊंची लपटों से निकलने के बाद भी पंडे का बाल तक नहीं जलता है। ये चमत्कार देखने के लिए देश-दुनिया से काफी लोग यहां पहुंचते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गीतों की होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">उत्तराखंड में होली संगीत और गायन के साथ मनाई जाती हैजिसे 'बैठकी होली' कहा जाता हैजहाँ शास्त्रीय और पारंपरिक गीतों का गायन होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हल्दी से होली</strong></div>
<div style="text-align:justify;">केरल के कोंकणी और कुडुंबी समुदाय के लोग इस दिन रंगों के बजाय हल्दी (मंजल) मिले पानी का उपयोग करते हैंजो शुद्धिकरण का प्रतीक है</div>
<div style="text-align:justify;">महाराष्ट्र और गोवा में यहाँ होली को रंग पंचमी या शिग्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है जो बसंत पंचमी से शुरू होता है </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>हम्पी होली </strong></div>
<div style="text-align:justify;">कर्नाटक के हम्पी की होली भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ये जगह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल है। इस जगह का संबंध त्रेतायुग की वानर सेना से है। मान्यता है कि सुग्रीव अपनी वानर सेना के साथ इसी क्षेत्र में रहते थे। यहां होली पर बड़ा आयोजन होता है। हजारों लोग यहां होली खेलने आते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>शाही होली</strong></div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान की होली उदयपुर और पुष्कर में आज भी शाही तौर तरीकों से होली खेली जाती है। इस मौके पर राजपुताना आन बान शान देखने को मिलती है।कई दूसरे एशियाई देशों में भी होली के प्रतिरूप रंगों का पर्व मनाया जाता है लेकिन भारतीय होली यकीनन आज भी अनूठी मस्ती से भरी है यह समाज को एक सूत्र में पिरो कर उमंग व उत्साह का संचार करती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रंग-बिरंगी होली सबको कर देती इक रंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत पर्वों और उत्सवों की पावन धरती है। यहाँ वर्ष का कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता जब जीवन में उत्साह का कोई न कोई अवसर उपस्थित न हो। इन्हीं उत्सवों में होली एक ऐसा पर्व है जो केवल रंगों का खेल भर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर और बाहर जमी हुई गंदगी को जलाकर जीवन को नवचेतना से भर देने का संदेश देता है। दीपावली जहाँ प्रकाश का पर्व है, वहीं होली रंगों और उमंगों का उत्सव है। यह वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत है, खेतों में पकती हुई रबी की फसलों की खुशी है और समाज में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171884/colorful-holi-brings-color-to-everyone"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images16.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत पर्वों और उत्सवों की पावन धरती है। यहाँ वर्ष का कोई भी दिन ऐसा नहीं जाता जब जीवन में उत्साह का कोई न कोई अवसर उपस्थित न हो। इन्हीं उत्सवों में होली एक ऐसा पर्व है जो केवल रंगों का खेल भर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर और बाहर जमी हुई गंदगी को जलाकर जीवन को नवचेतना से भर देने का संदेश देता है। दीपावली जहाँ प्रकाश का पर्व है, वहीं होली रंगों और उमंगों का उत्सव है। यह वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत है, खेतों में पकती हुई रबी की फसलों की खुशी है और समाज में प्रेम व समानता का उद्घोष है। फाल्गुन की पूर्णिमा से जुड़ा यह पर्व प्रकृति और मानव हृदय दोनों को एक साथ रंग देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली की शुरुआत माघ मास से ही हो जाती है जब पारंपरिक स्थान पर लकड़ी और कंडे एकत्र किए जाते हैं। फाल्गुनी पूर्णिमा की रात्रि को शुभ मुहूर्त में होलिका दहन होता है। यह दहन केवल लकड़ियों का दहन नहीं, बल्कि बुराइयों, अहंकार, वैरभाव और दुराचार का प्रतीकात्मक अंत है। अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। लोग गुलाल लगाकर गले मिलते हैं, आपसी मनमुटाव भूलते हैं और प्रेम का संकल्प लेते हैं। होली का यह बाहरी रूप जितना आकर्षक है, उसका भीतरी अर्थ उससे कहीं अधिक गहरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली के साथ जुड़ी पौराणिक कथा में प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप का प्रसंग आता है। भक्त प्रह्लाद सत्य और भक्ति के प्रतीक थे, जबकि हिरण्यकश्यप अहंकार और अत्याचार का प्रतीक। होलिका दहन की कथा हमें बताती है कि दुराचार और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हों, अंततः सत्य और श्रद्धा की ही विजय होती है। इसी प्रसंग में भगवान नृसिंह का अवतार अन्याय के विनाश का संदेश देता है। यह कथा हमें अपने भीतर छिपे साहस को जगाने और असत्य के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैन परंपरा में भी होली से जुड़ी एक कथा मिलती है जो मानव जीवन के उत्थान और पतन की वास्तविकता को सामने लाती है। इसमें चरित्रहीनता और अहंकार के कारण पतन तथा पश्चाताप के माध्यम से आत्मशुद्धि का मार्ग बताया गया है। इस दृष्टि से होली केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि आत्मविश्लेषण और आत्मशुद्धि का अवसर है। यह पर्व हमें बताता है कि यदि मनुष्य अपनी भूलों को स्वीकार कर सुधार का मार्ग अपनाए, तो वह पुनः ऊँचाइयों को छू सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है, परंतु रंगों का अर्थ केवल लाल, पीला या हरा नहीं है। रंग का एक लाक्षणिक अर्थ भी है, जो प्रभाव और भावना से जुड़ा है। जब कहा जाता है कि किसी पर प्रेम का रंग चढ़ गया, तो उसका आशय है कि वह व्यक्ति प्रेम और सद्भाव से भर गया। होली पर रंग और गुलाल लगाने की परंपरा इसी भाव को प्रकट करती है कि हम अपने मन को प्रेम, सौहार्द और समानता के रंग में रंगें। तन पर लगा रंग कुछ समय में धुल जाता है, परंतु मन पर चढ़ा प्रेम का रंग जीवनभर साथ रहता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धूल और कीचड़ उछालने की परंपरा को भी प्रतीकात्मक रूप में समझना चाहिए। धूल और कीचड़ मनुष्य के भीतर जमा बुराइयों के प्रतीक हैं। वर्षभर जो मनमुटाव, ईर्ष्या, द्वेष और कटुता हमारे भीतर जमा हो जाते हैं, उन्हें बाहर निकालकर समाप्त करने का संदेश होली देती है। किंतु जब यह परंपरा मर्यादा की सीमा लांघकर अशिष्टता और अभद्रता में बदल जाती है, तब उसका स्वरूप विकृत हो जाता है। होली का वास्तविक उद्देश्य किसी को अपमानित करना या असुविधा पहुँचाना नहीं, बल्कि हृदयों को जोड़ना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ब्रज क्षेत्र की लठामार होली इसका एक अनूठा उदाहरण है। नंदगाँव और बरसाना में खेली जाने वाली यह परंपरा हँसी-ठिठोली और सांस्कृतिक आनंद का प्रतीक है। यहाँ महिलाएँ पुरुषों पर लाठी से प्रहार करती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं, परंतु इस पूरे आयोजन में द्वेष का लेशमात्र भी नहीं होता। यह परंपरा दर्शाती है कि होली का खेल प्रेम और सांस्कृतिक उत्साह का माध्यम है, न कि अशिष्ट व्यवहार का।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक समानता है। इस दिन ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, जाति और वर्ग के भेदभाव को भुलाकर सभी एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह त्योहार मानवता को एक सूत्र में बाँधने का कार्य करता है। समाज में जो कृत्रिम दीवारें खड़ी हो जाती हैं, होली उन्हें गिराने का अवसर देती है। एक-दूसरे के घर जाकर मिठाई बाँटना और शुभकामनाएँ देना सामाजिक एकता को मजबूत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली में कूड़ा-कचरा और झाड़-झंखाड़ इकट्ठा कर जलाने की परंपरा भी गहरा संदेश देती है। यह केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि भीतरी शुद्धि का संकेत है। जिस प्रकार हम अपने आसपास की गंदगी को हटाकर आग में भस्म कर देते हैं, उसी प्रकार हमें अपने भीतर की बुराइयों, संकीर्णताओं और स्वार्थ को भी समाप्त करना चाहिए। यह सामूहिक प्रयास का पर्व है, क्योंकि समाज की सफाई अकेले संभव नहीं। सब मिलकर ही वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कच्चे रंगों का प्रयोग भी जीवन का दर्शन सिखाता है। कच्चा रंग स्थायी नहीं होता, वह कुछ समय बाद धुल जाता है। इसी प्रकार जीवन में आए कटु अनुभव, अपमान या दुख भी स्थायी नहीं होने चाहिए। यदि हम उन्हें मन पर स्थायी रंग की तरह जमा कर लेंगे, तो जीवन की प्रसन्नता फीकी पड़ जाएगी। होली हमें सिखाती है कि कटु स्मृतियों को भुलाकर आगे बढ़ें और नए उत्साह के साथ जीवन को रंगीन बनाएँ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता है कि होली को विवेक और मर्यादा के साथ मनाया जाए। मदिरापान, अभद्र भाषा और हिंसा इस पर्व की आत्मा के विरुद्ध हैं। यदि होली प्रेम और सौहार्द का संदेश देती है, तो हमें उसी भावना के साथ इसे मनाना चाहिए। पर्व तभी सार्थक होता है जब वह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।अंततः होली केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह हमें सिखाती है कि असत्य और दुराचार का दहन करें, सत्य और सदाचार को अपनाएँ, वैमनस्य की धूल झाड़कर प्रेम के रंग में रंग जाएँ। जब हम अपने भीतर की बुराइयों को जलाकर मन को निर्मल बनाते हैं, तभी होली का वास्तविक आनंद मिलता है। यही इस पावन पर्व का संदेश है कि हम सब मिलकर जीवन को सदाचार, समानता और प्रेम के रंगों से रंग दें और समाज को एक सुंदर, समरस और जागरूक दिशा की ओर अग्रसर करें।</div>
<div style="text-align:justify;">     *कांतिलाल मांडोत*</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:13:25 +0530</pubDate>
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                <title>मर्यादा लांघकर त्योहार को न करें बदनाम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171880/do-not-defame-the-festival-by-crossing-limits"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas50.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बिका कुशवाहा ‘अम्बी’</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली भारतीय संस्कृति का पारिवारिक प्रेम एवं सामाजिक सौहार्द का त्योहार है, जो वसंत, प्रेम और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली का उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक संदेश का माध्यम भी है। पौराणिक कथाओं में होली होलिका दहन से जुड़ी है, जहाँ भक्त प्रह्लाद की भक्ति ने असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। साथ ही राधा-कृष्ण की लीलाएँ होली को प्रेम और भक्ति का उत्सव बनाती हैं। भारतीय परंपरा में होली परिवार और समाज को एक सूत्र में बाँधने वाला पर्व है, जहाँ रिश्तों की मिठास बढ़ती है और वैमनस्य दूर होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन आधुनिक समय में इसकी नैतिक और मर्यादित छवि धूमिल होती जा रही है। अश्लील भोजपुरी एवं द्विअर्थी गीत, तेज डीजे, जबरन छूना और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार ने इसे विवादास्पद बना दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जीजा–साली तथा भाभी–देवर जैसे रिश्तों की मर्यादा भंग करने वाली हरकतें निंदनीय हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भोजपुरी होली गीत ऐसे परोसे जा रहे हैं, जिनमें रिश्तों को यौनिकता के चश्मे से देखा जाता है। इससे परिवारों में शर्मिंदगी फैलती है और भोजपुरी भाषा एवं संस्कृति की बदनामी भी होती है, जो एक बड़ी क्षति है। भोजपुरी में होली के लोकगीतों और होलिका-गायन की मधुर एवं समृद्ध परंपरा रही है, जो अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय परंपरा में कुछ रिश्ते हास्य-व्यंग्य और हल्की छेड़छाड़ वाले माने जाते हैं, किंतु यह सब हमेशा सीमित और सम्मानजनक होना चाहिए। भोजपुरी या हिंदी होली गीतों में जीजा–साली या भाभी–देवर के संबंधों को द्विअर्थी, अश्लील और यौनिक संदर्भों में प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे गीतों का परिवार में तथा सड़कों पर बजना शर्मिंदगी का कारण बनता है और महिलाएँ असहज महसूस करती हैं। इन दिनों महिलाएँ कहीं भी यात्रा करने से डरती हैं, क्योंकि वे अपने ही समाज में असुरक्षित महसूस करती हैं। होली के बहाने जबरन छूना, अनचाहा गले लगना, शारीरिक छेड़छाड़ या अश्लील टिप्पणी करना घोर निंदनीय है। कई मामलों में यह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज सोशल मीडिया भी अश्लील सामग्री परोसकर युवाओं को भड़काने और रिश्तों की मर्यादा लांघने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है, जो हमारे पवित्र त्योहार को बदरंग बना रही है। दूसरी ओर, शहरीकरण और पश्चिमी प्रभाव से पारंपरिक मूल्यों का क्षरण बढ़ रहा है। जहाँ पहले परिवार में सामूहिक रूप से होली खेली जाती थी, वहीं अब यह कई स्थानों पर सार्वजनिक हुड़दंग और अराजकता का रूप ले लेती है। इन गलत प्रवृत्तियों का प्रभाव बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं; वे जो देखते और सुनते हैं, वही सीखते हैं। अश्लील गीत और हिंसक व्यवहार उन्हें गलत मूल्य सिखाते हैं, जो भविष्य में समाज के लिए घातक हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली की इस विकृति का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। महिलाओं की असुरक्षा सबसे बड़ी समस्या बन गई है। अश्लील गीतों और “बुरा न मानो, होली है” जैसे नारों का प्रयोग असहमति की अनदेखी करने का बहाना बन गया है, जो कई बार यौन उत्पीड़न की सीमा पार कर जाता है। लैंगिक वर्चस्व का प्रदर्शन और मर्यादा का उल्लंघन होली जैसे उत्सव की भावना को सबसे अधिक कलंकित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए इस होली को उत्साहपूर्वक मनाइए, किंतु मर्यादा की सीमाओं में रहकर। शोर-शराबा, जबरदस्ती रंग लगाना या किसी को असुविधा पहुँचाना त्योहार की भावना के विपरीत है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की भावनाओं का विशेष ध्यान रखें। बिहार पुलिस और महिला आयोग ने इस वर्ष अश्लील गीतों पर प्राथमिकी दर्ज करने तथा ड्रोन निगरानी तक की व्यवस्था की है, जो एक सकारात्मक कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का वास्तविक रंग प्रेम, एकता और पवित्रता में है। इसे विकृतियों से मुक्त रखकर हम न केवल त्योहार की मिठास बचाएँगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण भी करेंगे। इस प्रकार होली की पवित्रता, बंधुत्व और मिठास बनाए रखें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 18:03:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली: परिवार, समाज और राष्ट्र का हो लेने का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत उत्सव है। यह ऐसा पर्व है जो व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से और समाज को राष्ट्र की व्यापक चेतना से जोड़ देता है। ‘हो लेना’ अर्थात् स्वयं को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से मुक्त कर समष्टि के साथ एकात्म कर लेना।होली इसी भाव की अभिव्यक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार के स्तर पर होली स्नेह, क्षमा और पुनर्संयोजन का पर्व है। वर्षभर की व्यस्तता, मतभेद और मौन इस दिन रंगों में घुलकर समाप्त हो जाते हैं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल, बच्चों की खिलखिलाहट,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171876/holi-is-the-festival-of-coming-together-of-family-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत उत्सव है। यह ऐसा पर्व है जो व्यक्ति को परिवार से, परिवार को समाज से और समाज को राष्ट्र की व्यापक चेतना से जोड़ देता है। ‘हो लेना’ अर्थात् स्वयं को अहंकार, भेदभाव और संकीर्णताओं से मुक्त कर समष्टि के साथ एकात्म कर लेना।होली इसी भाव की अभिव्यक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिवार के स्तर पर होली स्नेह, क्षमा और पुनर्संयोजन का पर्व है। वर्षभर की व्यस्तता, मतभेद और मौन इस दिन रंगों में घुलकर समाप्त हो जाते हैं। बड़े-बुजुर्गों के चरणों में गुलाल, बच्चों की खिलखिलाहट, घर-आंगन में गूंजते फाग आदि सब मिलकर पारिवारिक संबंधों में नई ऊष्मा भर देते हैं। होलिका-दहन की अग्नि प्रतीक है कि ईर्ष्या, क्रोध और कटुता जलकर राख हो जाए और परिवार प्रेम के रंग में रंग जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज के स्तर पर होली समानता और समरसता का संदेश देती है। इस दिन रंग जाति, वर्ग, भाषा और आर्थिक भेद नहीं देखते। सब एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।यह व्यवहारिक रूप से सामाजिक समता का पाठ है। लोकगीत, नृत्य, ढोल-नगाड़े और सामूहिक उल्लास समाज को जोड़ते हैं। होली यह सिखाती है कि सामाजिक जीवन में संवाद, हास्य और सहभागिता कितनी आवश्यक है; कठोरता नहीं, बल्कि अपनत्व समाज को मजबूत बनाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्तर पर होली सांस्कृतिक एकता का उत्सव है। विविधताओं से भरे भारत में यह पर्व उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक समान भाव से मनाया जाता है।कहीं फाग, कहीं शिगमो, कहीं रंगपंचमी के रूप में। अलग-अलग परंपराएँ होते हुए भी उत्सव का मूल भाव एक है: आनंद, मेल-मिलाप और नवसृजन। यह सांस्कृतिक एकात्मता ही राष्ट्र की आत्मा है। होली हमें याद दिलाती है कि हमारी विविधता विभाजन नहीं, बल्कि शक्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">होली का आध्यात्मिक संकेत भी उतना ही गहरा है। यह ऋतु परिवर्तन का पर्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">वसंत के आगमन के साथ जीवन में नई ऊर्जा का संचार। रंग यहाँ केवल बाह्य नहीं, आंतरिक भी हैं</div>
<div style="text-align:justify;">-विवेक,  करुणा, साहस और सत्य के रंग। होलिका-दहन असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है; प्रह्लाद की कथा हमें बताती है कि आस्था और नैतिकता अंततः विजयी होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में होली का संदेश और भी प्रासंगिक है। जब समाज में वैमनस्य, अविश्वास और तनाव बढ़ रहा हो, तब होली हमें ‘हो लेने’ का मार्ग दिखाती है,परिवार के लिए समय निकालने का, समाज के प्रति संवेदनशील होने का और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ रहने का। यह पर्व हमें संयम, सौहार्द और पर्यावरण-संवेदनशीलता के साथ उत्सव मनाने की प्रेरणा भी देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, होली रंग लगाने का नहीं, रंग बनने का पर्व है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रेम का, एकता का और राष्ट्रभाव का। जब व्यक्ति परिवार में, परिवार समाज में और समाज राष्ट्र में ‘हो’ जाता है, तभी होली अपने पूर्ण अर्थ में साकार होती है। यही होली का शाश्वत संदेश है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 17:51:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामाजिक समरसता के पर्व पर हुड़दंग और हिंसा का ग्रहण! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>समाज में बंधुत्व प्रेम सद्भाव समरसता के संदेश का रंगपर्व आखिर क्यों बन जाता है कलह वैमनस्यता खून खराबे का दिन? आप जानते हैं कि इस बार होली और रमजान का जुमा एक दिन होने की वजह से पूरे देश में होली पर हाई अलर्ट किया गया था। पुलिस व सुरक्षा बलों की चौकसी और नागरिकों के संयम की वजह से देश में कोई बड़ी घटना नहीं हुई। फिर भी कम से कम चार राज्यों में होली पर हिंसा और झड़प की वारदातों को अंजाम दिया गया है। वहीं देश भर में नशा कर गाड़ी चलाने और हुड़दंग मचाने की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150050/eclipse-of-violence-and-violence-on-the-festival-of-social"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/hindi-divas39.jpg" alt=""></a><br /><div>समाज में बंधुत्व प्रेम सद्भाव समरसता के संदेश का रंगपर्व आखिर क्यों बन जाता है कलह वैमनस्यता खून खराबे का दिन? आप जानते हैं कि इस बार होली और रमजान का जुमा एक दिन होने की वजह से पूरे देश में होली पर हाई अलर्ट किया गया था। पुलिस व सुरक्षा बलों की चौकसी और नागरिकों के संयम की वजह से देश में कोई बड़ी घटना नहीं हुई। फिर भी कम से कम चार राज्यों में होली पर हिंसा और झड़प की वारदातों को अंजाम दिया गया है। वहीं देश भर में नशा कर गाड़ी चलाने और हुड़दंग मचाने की सैकड़ों वारदातों में पचास लोग जान गंवा गए जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग घायल अवस्था में अस्पतालों में इलाज के लिए लाए गए।</div>
<div> </div>
<div>अकेले उत्तर प्रदेश में 250 से अधिक सड़क दुर्घटना दर्ज की गई है जिसमें 430 लोग घायल हुए हैं। जबकि उत्तराखंड में हुड़दंग हिंसा की वारदातों में कुल 14 लोगों की मौत हो गई। भाजपा ने हिंसा के बाद राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंदू त्योहारों पर ही ऐसी हिंसा क्यों होती है?</div>
<div> </div>
<div>पश्चिम बंगाल के अलावा तीन और राज्यों बिहार छत्तीसगढ़ पंजाब में होली पर हिंसा हुई। बिहार के मुंगेर में ग्रामीणों के हमले में एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की मौत हो गई। पटना में दो गुटों में होलिका दहन का विवाद होली के दिन पथराव तक पहुंच गया। पुलिस की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। यहां फायरिंग की भी खबर है। झारखंड के गिरिडीह में होली के दिन दो गुटों में पथराव के बाद उपद्रवियों ने दुकानों और बाइक में आग लगा दी। इसके अलावा पंजाब के लुधियाना में दो समुदायों के बीच ईंट, पत्थर और बोतलें चलीं। झड़प में 11 लोग घायल हुए हैं। मुसलमानों कहना है कि नमाज अदा करते वक्त पथराव किया गया। वहीं हिंदुओं का कहना है कि पहले मस्जिद की तरफ ईंट फेंकी गई। कई वाहनों में भी तोड़फोड़ हुई है।</div>
<div> </div>
<div>बेंगलुरु में नशे में धुत कुछ लोगों के बीच हुए झगड़े में तीन लोगों की मौत की खबर आ रही है. मौके से पुलिस ने तीन लोगों के शवों को बरामद किया. पुलिस टीम को पहला शव अपार्टमेंट के रास्ते में मिला, जबकि दूसरा कमरे के अंदर और तीसरा अपार्टमेंट से बाहर मिला. पुलिस ने दो मृतकों की पहचान 22 वर्षीय अनसू और 23 वर्षीय राधे श्याम के रूप में की है. जबकि तीसरे मृतक की पहचान नहीं हो पाई है. आप को बता दें पश्चिम बंगाल के बीरभूम में दो समूहों के बीच हिंसक झड़प की खबर है  राज्य सरकार ने इलाक़े में इंटरनेट सेवाओंं को सस्पेंड कर दिया. क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात भी किया गया है. पुलिस का कहना है कि घटना के बाद 20 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिंसक वारदात के बाद पश्चिम बंगाल के गृह विभाग ने इंटरनेट सस्पेंड करने का आदेश जारी किया. पुलिस का कहना है कि स्थिति पर काबू पा लिया गया है।</div>
<div> </div>
<div>झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित घोड़थंबा में होली 14 मार्च 2025 के दिन जुलूस के दौरान हिंदुओं पर हमला हुआ। ये हमला मस्जिद वाली गली में हुआ। इस हिंसा के दौरान एक खास समुदाय के घरों से पत्थर चले।  मस्जिद वाली गली में हिंदुओं के जुलूस को निशाना बनाया गया , पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया गया । कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने प्रशासन पर हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। </div>
<div> </div>
<div>एफआईआर के अनुसार, 14 मार्च 2025 की शाम 15-20 लोगों की होली की टोली मस्जिद गली से गुजरना चाहती थी, लेकिन नमाज का समय होने की वजह से उन्हें रोका गया। टोली का कहना था कि वे हर साल इसी रास्ते से जाते हैं। समझाने के बावजूद टोली गली में आगे बढ़ गई। इसके बाद कथित तौर पर समुदाय विशेष के लोगों पेट्रोल बम, बोतल, ईंट और पत्थरों से हमला शुरू कर दिया। बाजार चौक के पास पेट्रोल बम फेंककर कई दुकानों, बाइकों और गाड़ियों में आग लगा दी गई।जानकारी के अनुसार प्राथमिकी में इस बात का साफ-साफ जिक्र है कि समुदाय विशेष  ने मंदिर पर हमला किया। पत्थर फेंके और पुलिस पहुँची तो उसकी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में चार पुलिसकर्मी घायल हुए। </div>
<div> </div>
<div>दिल्ली के द्वारका में होली का जश्न हिंसा में बदल गया. गोयला डेरी स्थित छठ घाट पार्क में होली का जश्न मनाया जा रहा था. इस दौरान हुआ छोटा विवाद हाथापाई में बदल गया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, राजू कुमार (35) अपने दोस्त राजेश से मिलने के लिए टैक्सी से पार्क गया था. उत्सव के दौरान, होली का कुछ रंग गलती से एक लड़के पर गिर गया, जिससे दोनों में तीखी बहस हो गई कुछ देर बाद, लड़के ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर राजू कुमार और राजेश पर हमला कर दिया. मारपीट में हमलावरों ने राजू कुमार की टैक्सी में भी तोड़फोड़ की और उसके शीशे तोड़ दिए।</div>
<div> </div>
<div>पंजाब के लुधियाना में दो समुदायों के बीच ईंट-पत्थर और बोतलें चलीं। झड़प में 11 लोग घायल हुए हैं। विशेष समुदाय के लोगों का कहना है कि नमाज अदा करते वक्त पथराव किया गया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि पहले मस्जिद की तरफ ईंट फेंकी गई। कई वाहनों में भी तोड़फोड़ हुई है।</div>
<div> </div>
<div>पश्चिम बंगाल में भी होली पर्व पर हिंसा हुई है। भाजपा ने नंदीग्राम में मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाया है। भाजपा आइटी सेल ने भी तस्वीरें पोस्ट कर आरोप लगाया कि बरुईपुर, जादवपुर और मुर्शिदाबाद समेत पूरे प्रदेश में त्योहार पर शरारत करने की घटनाएं सामने आई हैं। </div>
<div> </div>
<div>पटना के एनटीपीसी थाना क्षेत्र के सहनौरा गांव में होलिका दहन को लेकर दो पक्षों में शुक्रवार को झड़प हो गई। एक पक्ष के ग्रामीण ने सड़क पर होलिका दहन किया, जिसका दूसरे पक्ष ने विरोध किया।रात से ही दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। धुलेंडी की दोपहर करीब 1 बजे स्थिति बिगड़ गई और दोनों पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम को भी आक्रोशित लोगों ने खदेड़ दिया। पुलिस की गाड़ी पर भी पत्थर फेंके गए।</div>
<div> </div>
<div>देश भर में होली रंग के दौरान व्यापक एहतियात के बावजूद की स्थानों पर सांप्रदायिक झगड़े छिटपुट हिंसा एक सहायक उपनिरीक्षक की हत्या समुदायों के बीच पनपी घृणा विद्वेष को बयान करती है। क्या जरूरत है कि मस्जिद के सामने ही हुड़दंग किया जाए और पहले से ही पथराव के लिए एक समुदाय पत्थर और पैट्रोल की तैयारी रखे? दोषी दोनों हैं।आजादी के 78 साल बाद भी फिरकापरस्ती और घृणा का यह षडयंत्र खत्म होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि रंगों की होली को खून की होली मे तब्दील करने वाले दंगाइयों असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों की पुनरावृत्ति न हो और सद्भाव के रंगों को बदरंग होने से बचाया जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 14:25:20 +0530</pubDate>
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                <title>होली के रंगो पर हुड़दंग और हिंसा की कालिख क्यों ! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>समाज में बंधुत्व प्रेम सद्भाव समरसता के संदेश का रंगपर्व आखिर क्यों बन जाता है कलह वैमनस्यता खून खराबे का दिन? आप जानते हैं कि इस बार होली और रमजान का जुमा एक दिन होने की वजह से पूरे देश में होली पर हाई अलर्ट किया गया था। पुलिस व सुरक्षा बलों की चौकसी और नागरिकों के संयम की वजह से देश में कोई बड़ी घटना नहीं हुई। फिर भी कम से कम चार राज्यों में होली पर हिंसा और झड़प की वारदातों को अंजाम दिया गया है।</div>
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<div>वहीं देश भर में नशा कर गाड़ी चलाने और हुड़दंग मचाने की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149958/why-soot-on-holi-colors-and-soot-of-violence-%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(18)2.jpg" alt=""></a><br /><div>समाज में बंधुत्व प्रेम सद्भाव समरसता के संदेश का रंगपर्व आखिर क्यों बन जाता है कलह वैमनस्यता खून खराबे का दिन? आप जानते हैं कि इस बार होली और रमजान का जुमा एक दिन होने की वजह से पूरे देश में होली पर हाई अलर्ट किया गया था। पुलिस व सुरक्षा बलों की चौकसी और नागरिकों के संयम की वजह से देश में कोई बड़ी घटना नहीं हुई। फिर भी कम से कम चार राज्यों में होली पर हिंसा और झड़प की वारदातों को अंजाम दिया गया है।</div>
<div> </div>
<div>वहीं देश भर में नशा कर गाड़ी चलाने और हुड़दंग मचाने की सैकड़ों वारदातों में पचास लोग जान गंवा गए जबकि सैकड़ों की संख्या में लोग घायल अवस्था में अस्पतालों में इलाज के लिए लाए गए। अकेले उत्तर प्रदेश में 250 से अधिक सड़क दुर्घटना दर्ज की गई है जिसमें 430 लोग घायल हुए हैं। जबकि उत्तराखंड में हुड़दंग हिंसा की वारदातों में कुल 14 लोगों की मौत हो गई। </div>
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<div>सामाजिक समरसता के खिलाफ अप्रिय वारदातों में पश्चिम बंगाल की वीरभूम की वारदात को गंभीर माना जा रहा है। वहां हिंसा के बाद 17 मार्च तक इंटरनेट बंद कर दिया गया है। राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस को लेकर आरोप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिया है। भाजपा ने हिंसा के बाद राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हिंदू त्योहारों पर ही ऐसी हिंसा क्यों होती है?केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने हिंसा के बाद राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि राज्य की पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए हैं। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने भी शनिवार को ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया है कि हिंदू त्योहारों के दौरान हिंसा क्यों होती है? उन्होंने बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। </div>
<div> </div>
<div>पश्चिम बंगाल के अलावा तीन और राज्यों बिहार छत्तीसगढ़ पंजाब में होली पर हिंसा हुई। बिहार के मुंगेर में ग्रामीणों के हमले में एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की मौत हो गई। पटना में दो गुटों में होलिका दहन का विवाद होली के दिन पथराव तक पहुंच गया। पुलिस की गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। यहां फायरिंग की भी खबर है। झारखंड के गिरिडीह में होली के दिन दो गुटों में पथराव के बाद उपद्रवियों ने दुकानों और बाइक में आग लगा दी। इसके अलावा पंजाब के लुधियाना में दो समुदायों के बीच ईंट, पत्थर और बोतलें चलीं। झड़प में 11 लोग घायल हुए हैं। मुसलमानों कहना है कि नमाज अदा करते वक्त पथराव किया गया। वहीं हिंदुओं का कहना है कि पहले मस्जिद की तरफ ईंट फेंकी गई। कई वाहनों में भी तोड़फोड़ हुई है।</div>
<div> </div>
<div>बेंगलुरु में नशे में धुत कुछ लोगों के बीच हुए झगड़े में तीन लोगों की मौत की खबर आ रही है. पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि मामला होली के दिन  का है. जब एक निर्माणधीन इमारत में होली पार्टी करने के दौरान बिहार से आए छह मजदूरों के बीच मारपीट हो गई. मजदूरों के बीच पहले बहस शुरू हुई थी जो देखते ही देखते हिंसक हो गई. जांच में पता चला विवाद की शुरुआत किसी महिला को लेकर की गई टिप्पणी से शुरू हुई थी. मजदूरों के बीच आपसी झड़प के दौरान लोगों ने एक दूसरे पर लाठी और छड़ से हमला कर दिया. घटना में तीन लोगों को गंभीर रूप से चोटें आई. जिस वजह से उनकी मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए. पुलिस को घटना की सूचना मिली तो मौके से पुलिस ने तीन लोगों के शवों को बरामद किया।</div>
<div> </div>
<div>पुलिस टीम को पहला शव अपार्टमेंट के रास्ते में मिला, जबकि दूसरा कमरे के अंदर और तीसरा अपार्टमेंट से बाहर मिला. पुलिस ने दो मृतकों की पहचान 22 वर्षीय अनसू और 23 वर्षीय राधे श्याम के रूप में की है. जबकि तीसरे मृतक की पहचान नहीं हो पाई है।</div>
<div> </div>
<div>आप को बता दें पश्चिम बंगाल के बीरभूम में दो समूहों के बीच हिंसक झड़प की खबर है  राज्य सरकार ने इलाक़े में इंटरनेट सेवाओंं को सस्पेंड कर दिया. क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात भी किया गया है. पुलिस का कहना है कि घटना के बाद 20 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है.इस हिंसा की शुरुआत 14 मार्च, यानी होली के दिन हुई. इंडिया टुडे के इनपुट के मुताबिक़, सैंथिया कस्बे में एक ग्रुप और नशे में धुत कुछ लोगों के बीच कहासुनी हो गई. स्थिति तब और बिगड़ गई, जब दोनों ग्रुट एक-दूसरे पर पत्थर फेंकने लगे और हाथापाई हो गई. हालात को संभालने के लिए पुलिस की तरफ़ से हल्का लाठीचार्ज भी किया गया.  विवाद में कुछ स्थानीय लोगों के घायल होने की खबर है. हिंसक वारदात के बाद पश्चिम बंगाल के गृह विभाग ने इंटरनेट सस्पेंड करने का आदेश जारी किया. पुलिस का कहना है कि स्थिति पर काबू पा लिया गया है।</div>
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<div>झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित घोड़थंबा में होली 14 मार्च 2025 के दिन जुलूस के दौरान हिंदुओं पर हमला हुआ। ये हमला मस्जिद वाली गली में हुआ। इस हिंसा के दौरान एक खास समुदाय के घरों से पत्थर चले।  मस्जिद वाली गली में हिंदुओं के जुलूस को निशाना बनाया गया ,  फिर पीछे की गली में मंदिर पर हमले-पथराव और पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाया गया । इन सभी का सिलसिलेवार तरीके से एफआईआर की कॉपी में भी जिक्र है।</div>
<div> </div>
<div>आरोप है कि इसके बावजूद कथित राजनीतिक तुष्टिकरण की राजनीति के चलते आरोपित नंबर 1 से 11 तक हिंदुओं के नाम है।  झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पर घोर आपत्ति व्यक्त की  है। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने प्रशासन पर हिंदुओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। </div>
<div>एफआईआर के अनुसार, 14 मार्च 2025 की शाम 15-20 लोगों की होली की टोली मस्जिद गली से गुजरना चाहती थी, लेकिन नमाज का समय होने की वजह से उन्हें रोका गया। टोली का कहना था कि वे हर साल इसी रास्ते से जाते हैं।</div>
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<div>समझाने के बावजूद टोली गली में आगे बढ़ गई। इसके बाद कथित तौर पर समुदाय विशेष के लोगों पेट्रोल बम, बोतल, ईंट और पत्थरों से हमला शुरू कर दिया। बाजार चौक के पास पेट्रोल बम फेंककर कई दुकानों, बाइकों और गाड़ियों में आग लगा दी गई।जानकारी के अनुसार प्राथमिकी में इस बात का साफ-साफ जिक्र है कि समुदाय विशेष  ने मंदिर पर हमला किया। पत्थर फेंके और पुलिस पहुँची तो उसकी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में चार पुलिसकर्मी घायल हुए। प्राथमिकी धनवार के बीपीओ सह दंडाधिकारी सुरेंद्र कुमार वर्णवाल ने दर्ज की है।</div>
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<div>दिल्ली के द्वारका में होली का जश्न हिंसा में बदल गया. गोयला डेरी स्थित छठ घाट पार्क में होली का जश्न मनाया जा रहा था. इस दौरान हुआ छोटा विवाद हाथापाई में बदल गया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, राजू कुमार (35) अपने दोस्त राजेश से मिलने के लिए टैक्सी से पार्क गया था. उत्सव के दौरान, होली का कुछ रंग गलती से एक लड़के पर गिर गया, जिससे दोनों में तीखी बहस हो गई कुछ देर बाद, लड़के ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर राजू कुमार और राजेश पर हमला कर दिया. मारपीट में हमलावरों ने राजू कुमार की टैक्सी में भी तोड़फोड़ की और उसके शीशे तोड़ दिए।</div>
<div> </div>
<div>पंजाब के लुधियाना में दो समुदायों के बीच ईंट-पत्थर और बोतलें चलीं। झड़प में 11 लोग घायल हुए हैं। विशेष समुदाय के लोगों का कहना है कि नमाज अदा करते वक्त पथराव किया गया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि पहले मस्जिद की तरफ ईंट फेंकी गई। कई वाहनों में भी तोड़फोड़ हुई है।</div>
<div> </div>
<div>पश्चिम बंगाल में भी होली पर्व पर हिंसा हुई है। भाजपा ने नंदीग्राम में मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाया है। भाजपा आइटी सेल ने भी तस्वीरें पोस्ट कर आरोप लगाया कि बरुईपुर, जादवपुर और मुर्शिदाबाद समेत पूरे प्रदेश में त्योहार पर शरारत करने की घटनाएं सामने आई हैं। </div>
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<div>पटना के एनटीपीसी थाना क्षेत्र के सहनौरा गांव में होलिका दहन को लेकर दो पक्षों में शुक्रवार को झड़प हो गई। एक पक्ष के ग्रामीण ने सड़क पर होलिका दहन किया, जिसका दूसरे पक्ष ने विरोध किया।रात से ही दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। धुलेंडी की दोपहर करीब 1 बजे स्थिति बिगड़ गई और दोनों पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम को भी आक्रोशित लोगों ने खदेड़ दिया। पुलिस की गाड़ी पर भी पत्थर फेंके गए।</div>
<div> </div>
<div>देश भर में होली रंग के दौरान व्यापक एहतियात के बावजूद की स्थानों पर सांप्रदायिक झगड़े छिटपुट हिंसा एक सहायक उपनिरीक्षक की हत्या समुदायों के बीच पनपी घृणा विद्वेष को बयान करती है। क्या जरूरत है कि मस्जिद के सामने ही हुड़दंग किया जाए और पहले से ही पथराव के लिए एक समुदाय पत्थर और पैट्रोल की तैयारी रखे? दोषी दोनों हैं।आजादी के 78 साल बाद भी फिरकापरस्ती और घृणा का यह षडयंत्र खत्म होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि रंगों की होली को खून की होली मे तब्दील करने वाले दंगाइयों असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों की पुनरावृत्ति न हो और सद्भाव के रंगों को बदरंग होने से बचाया जा सके। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 15:37:27 +0530</pubDate>
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                <title> प्रेम व सद्भाव का प्रतीक बना होली का त्यौहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  भारत की सांझी गंगा यमुनी तहज़ीब का दर्शन कराने वाला होली का त्यौहार न केवल शांन्ति  से गुज़र गया बल्कि इस बार की होली प्रेम व सद्भाव की ऐसी मिसाल पेश कर गयी जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह देश सांझी संस्कृति व सांझे त्योहारों का देश है। यह देश अनेकता में एकता की मिसाल पेश करने वाला देश है। यह देश हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आदि सभी धर्मों व समुदायों में परस्पर एकता की मिसाल पेश करने वाला देश है। दरअसल इस बार का होली का त्यौहार देश के अमन पसंद लोगों के लिये</div>
<div> </div>
<div>सबसे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149947/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/holi.jpg" alt=""></a><br /><div> भारत की सांझी गंगा यमुनी तहज़ीब का दर्शन कराने वाला होली का त्यौहार न केवल शांन्ति  से गुज़र गया बल्कि इस बार की होली प्रेम व सद्भाव की ऐसी मिसाल पेश कर गयी जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह देश सांझी संस्कृति व सांझे त्योहारों का देश है। यह देश अनेकता में एकता की मिसाल पेश करने वाला देश है। यह देश हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आदि सभी धर्मों व समुदायों में परस्पर एकता की मिसाल पेश करने वाला देश है। दरअसल इस बार का होली का त्यौहार देश के अमन पसंद लोगों के लिये कई कारणों से चिंता का सबब बना हुआ था।</div>
<div> </div>
<div>सबसे पहली बात तो यह थी कि केंद्र से लेकर देश के कई महत्वपूर्ण व बड़े राज्यों में उस भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं जिनके अनेक नेता समाज में बेरोकटोक ज़हर घोलते आ रहे हैं। कई नेता ऐसे भी हैं जिन्हें नफ़रत फैलाने के लिये 'पुरस्कार ' स्वरूप मुख्य मंत्री,मंत्री व उपमुख्य मंत्री जैसे पद नवाज़े गये हैं। इससे प्रेरित होकर कई आधारहीन नेता भी अपने 'सफल व उज्जवल ' राजनैतिक भविष्य की ख़ातिर साम्प्रदायिकता का खुला कार्ड खेल रहे हैं।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/holi2.jpg" alt="holi2" width="530" height="341"></img></div>
<div>और कोई भी ज़हरीला व विवादित बयान देकर रातों रात सुर्ख़ियों में छा जाते हैं।  दूसरी बात यह कि होली से ठीक पहले जिस तरह औरंगज़ेब व संभल की जुमा मस्जिद विवादित विषयों व उत्तर प्रदेश के एक पुलिस अधिकारी के आपत्तिजनक बयान को लेकर देश के आग लगाऊ दलाल मीडिया ने देश के वातावरण में नफ़रत का ज़हर घोलने की कोशिश की और साथ ही उत्तर प्रदेश के उस पुलिस अधिकारी के विवादित बयान को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का समर्थन भी मिला उन सब के मद्देनज़र शांतिप्रिय देशवासियों का चिंतित होना स्वाभाविक था। </div>
<div> </div>
<div>उधर गत 15 मार्च यानी होली के दिन ही मुसलमानों के पवित्र त्यौहार रमज़ान महीने में पड़ने वाले शुक्रवार यानी जुमा का दिन भी था। जुमे की नमाज़ को मुसलमानों में ख़ास अहमियत दी जाती है ख़ासकर रमज़ान माह के जुमे की तो और अधिक अहमियत होती है।</div>
<div> </div>
<div>यह दोनों यानी होली और जुमा (शुक्रवार ) एक साथ पड़ने से लोगों के दिलों में और भी डर बैठा था कि सत्ता से जुड़े नफ़रती चिंटुओं की बदज़ुबानी उनकी गंदी व ज़हरीली मंशा, नफ़रती मीडिया की जुगलबंदी के साथ कहीं देश के ख़ुशनुमा माहौल को साम्प्रदायिकता की भेंट न चढ़ा दे। लोगों में डर था की होली जैसे अबीर व गुलाल उड़ाने के रंग बिरंगे त्यौहार में कहीं रंग की जगह भंग न घुल जाये। और पूरा देश टकटकी लगाये सुबह से शाम तक होली और जुमे के संयुक्त आयोजन पर नज़रें जमाये बैठा रहा। और होली व जुमा जैसे आयोजनों के शांतिपूर्ण तरीक़े से संपन्न होने की दुआयें मांग रहा था।   </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/holi1.jpg" alt="holi1" width="510" height="377"></img></div>
<div>बावजूद इसके कि शाहजहांपुर,संभल,बरेली,अलीगढ़ व अमरावती जैसी कुछ जगहों से उपद्रवी लोगों द्वारा उकसावे की कुछ कार्रवाई ज़रूर की गयी। मस्जिदों के सामने आपत्ति जनक गाने बजाये गये। परन्तु रोज़दारों ने सहनशीलता का परिचय दिया और शहर दंगों की आग में झुलसने से बच गया। परन्तु देशभर में कुल मिलाकर आख़िरकार देश की सांझी तहज़ीब का परचम लहराया। और जिस होली और जुमे को देश के कई संवेदनशील हिस्सों में हिंसा व दंगे फ़साद की संभावना जताई जा रही थी उसी होली ने इस बार प्रेम सद्भाव व भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश की जो शायद पहले कभी नहीं देखी गयी।</div>
<div> </div>
<div>होली व जुमे के बाद दोपहर से ही सोशल मीडिया पर भाईचारे की मिसाल पेश करने वाले जो दृश्य सामने आने शुरू हुये उन दृश्यों ने एक बार फिर यह प्रमाणित कर दिया की नफ़रत के सौदागरों की लाख कोशिशों के बावजूद देश के आम लोग सिर्फ़ अमन शांति सद्भाव व भाईचारा चाहते हैं। बिहार व उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न प्रदेशों के कई शहरों से लेकर गत वर्षों दंगों की शिकार हो चुकी दिल्ली के विभिन्न इलाक़ों के जो दृश्य सामने आये वह हमारी सांझी तहज़ीब व सांप्रदायिक सद्भाव के जीवंत दस्तावेज़ थे।  </div>
<div> </div>
<div> प्रयागराज/इलाहाबाद जहाँ पिछले दिनों कुंभ आयोजन के दौरान मची भगदड़ के बाद स्थानीय मुसलमानों ने अपनी मस्जिदें,मुस्लिम शिक्षण संस्थान,दरगाहों ,इमामबाड़ों व अपने घरों के दरवाज़े परेशानहाल परदेसी कुंभ श्रद्धालुओं के लिये खोल दिए थे। उसी शहर के होली मनाने वाले हिन्दू भाई नमाज़ के दौरान अपना डी जे व व हर्षोल्लास को न केवल विराम देते नज़र आये बल्कि मुस्लिम नमाज़ियों के साथ उनका सुरक्षा कवच बनकर खड़े रहे। जबकि अन्य कई शहरों से मुसलमानों द्वारा होली खेलने वालों रंग बरसाने की ख़बरें आईं।</div>
<div> </div>
<div>अनेक जगहों पर नमाज़ियों पर हिन्दू भाइयों द्वारा फूलों की वर्षा कर उन्हें होली से जोड़ने व जुमे की बधाई देने का प्रदर्शन किया गया। और कई जगहों से तो हिन्दू मुसलमानों के एक साथ होली के रंग में सराबोर होने के भी समाचार प्राप्त हुये। इस तरह के चित्र व विडिओ पहले भी आते रहे हैं परन्तु इसबार तो कुछ ज़्यादा ही भाई चारा नज़र आया। इसकी वजह यही थी कि आम लोग नफ़रती सत्ताधीशों के एजेंडे को क़तई स्वीकार नहीं करते। इसमें भी कोई शक नहीं कि देश की जनता के इस अमनपसंद रुख़ को भांप चुकी पुलिस व स्थानीय प्रशासन ने भी शांति व्यवस्था बनाये रखने में अपनी निष्पक्ष व सद्भाव पूर्ण भूमिका निभाई। </div>
<div> </div>
<div> दरअसल यह वह देश है जहां अनेक हिन्दू रमज़ान में रोज़े व मुहर्रम में ताज़िया रखते व मातमदारी करते दिखाई देते हैं,जबकि तमाम मुसलमान गणेशोत्सव मनाते व होली खेलते दिखाई देते हैं। आज देश में अनेक दरगाहें,पीरों फ़क़ीरों की मज़ारें व इमामबाड़े पूरी आस्था के साथ हिन्दुओं की देखरेख में चलाये जा रहे हैं। इसी देश की सांझी तहज़ीब की झलक नज़ीर अकबराबादी की उस शायरी में नज़र आती है जिसमें वह लिखते हैं -गुलज़ार खिले हों परियों के और मजलिस की तैयारी हो।</div>
<div> </div>
<div>कपड़ों पर रंग के छींटों से ख़ुश-रंग अजब गुल-कारी हो।। मुंह लाल,गुलाबी आँखें हों,और हाथों में पिचकारी हो। उस रंग-भरी पिचकारी को अंगिया पर तक कर मारी हो।। सीनों से रंग ढलकते हों तब देख बहारें होली की।। और नज़ीर अकबराबादी ही यह भी लिखते हैं कि - 'मियां तू हमसे न रख कुछ ग़ुबार होली में। कि रूठे मिलते हैं आपस में यार होली में। मची है रंग की कैसी बहार होली में। हुआ है ज़ोर-ए-चमन आश्कार होली में। अजब यह हिन्द की देखी बहार होली में॥ इसी तरह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के मुरीद और शायर अमीर ख़ुसरो ने सूफ़ियाना परंपरा से बसंत और होली मनाने की शुरूआत की। ख़ुसरो का यह कलाम आज भी  होली के दिन निज़ामुद्दीन औलिया की मज़ार पर पढ़ा जाता है।  आज रंग है, ऐ मा रंग है री, मोरे महबूब के घर रंग है री। मोहे पीर पायो निज़ामुद्दीन औलिया, जब देखो मोरे संग है री।।</div>
<div> </div>
<div>इसतरह के दस्तावेज़ इस बात के प्रमाण हैं कि भारतीय त्यौहार दरअसल धार्मिक कम सामाजिक व भारतीय त्यौहार अधिक हैं। यही वजह है कि इस बार का होली का त्यौहार देश व दुनिया के लिये प्रेम व सद्भाव का प्रतीक बन गया। आशा की जानी चाहिये कि ऐसी ही शांति व सद्भाव हमारे देश में हमेशा बना रहेगा और ज़हरीले बोल बोलने वाले राजनेताओं के मंसूबों पर हमेशा पानी फिरता रहेगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 14:08:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली पर मानवता का रंग: कूड़ा बीन रहे बेसहारा बुजुर्ग को वृद्धाश्रम संचालक ने दिया सहारा, घरवालों की तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कौशाम्बी। </strong>होली खुशियों, रंगों और प्रेम का पर्व है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह दिन भी सामान्य दिनों की तरह ही संघर्ष भरा होता है। ऐसा ही एक नजारा मंझनपुर नगर पालिका परिषद कार्यालय के पास देखने को मिला, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति कूड़ा बीनते नजर आए। उनकी फटेहाल स्थिति देखकर ओसा वृद्धाश्रम के संचालक आलोक रॉय ने अपनी इंसानियत का परिचय दिया और उनकी मदद के लिए आगे बढ़े।</div>
<div>  </div>
<div><strong>  सड़क किनारे मिले लाचार बुजुर्ग </strong></div>
<div>होली के दिन जब चारों ओर रंगों की बौछार हो रही थी, लोग अपने परिवार और दोस्तों संग जश्न मना रहे थे, उसी दौरान</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149913/old-age-home-operators-continue-to-search-for-the-help"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250315-wa0117.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कौशाम्बी। </strong>होली खुशियों, रंगों और प्रेम का पर्व है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह दिन भी सामान्य दिनों की तरह ही संघर्ष भरा होता है। ऐसा ही एक नजारा मंझनपुर नगर पालिका परिषद कार्यालय के पास देखने को मिला, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति कूड़ा बीनते नजर आए। उनकी फटेहाल स्थिति देखकर ओसा वृद्धाश्रम के संचालक आलोक रॉय ने अपनी इंसानियत का परिचय दिया और उनकी मदद के लिए आगे बढ़े।</div>
<div> </div>
<div><strong> सड़क किनारे मिले लाचार बुजुर्ग </strong></div>
<div>होली के दिन जब चारों ओर रंगों की बौछार हो रही थी, लोग अपने परिवार और दोस्तों संग जश्न मना रहे थे, उसी दौरान वृद्धाश्रम संचालक आलोक रॉय मंझनपुर से ओसा वृद्धाश्रम की ओर जा रहे थे। जैसे ही वह नगर पालिका परिषद कार्यालय के पास पहुंचे, उनकी नजर एक वृद्ध व्यक्ति पर पड़ी, जो कूड़ा बीन रहा था। उनकी हालत बहुत खराब थी—गंदे और फटे कपड़े, उलझे हुए बाल और थकी हुई आंखें, जिनमें भूख और बेबसी साफ झलक रही थी।</div>
<div> </div>
<div><strong>संवेदनशीलता दिखाते हुए रोकी बाइक, बुजुर्ग से पूछा नाम-पता</strong></div>
<div>यह दृश्य देखकर आलोक रॉय ने तुरन्त अपनी बाइक रोकी और उस बुजुर्ग के पास पहुंचे। उन्होंने उसका नाम-पता पूछा, लेकिन बुजुर्ग कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं थे। उनका जवाब न दे पाना इस बात की गवाही दे रहा था कि या तो उन्हें अपनी पहचान याद नहीं, या फिर कोई गहरी मानसिक पीड़ा उन्हें बोलने से रोक रही थी।</div>
<div> </div>
<div><strong>वृद्धाश्रम ले जाकर दिलाया भोजन और दिया नया जीवन</strong></div>
<div>बुजुर्ग की दयनीय स्थिति देखकर आलोक रॉय ने उन्हें अपनी बाइक पर बैठाया और पहले उन्हें फल दिलाए। फिर उन्हें ओसा वृद्धाश्रम लेकर गए, जहां सबसे पहले उनकी सफाई कराई गई। उन्हें नहलाया गया, साफ कपड़े पहनाए गए और सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया। भोजन करते समय उनके चेहरे पर आई संतुष्टि की झलक यह बता रही थी कि शायद लंबे समय बाद उन्हें भरपेट खाना नसीब हुआ था।</div>
<div> </div>
<div><strong>घरवालों की तलाश शुरू, परिजनों से मिलाने का प्रयास</strong></div>
<div>वृद्धाश्रम संचालक आलोक रॉय ने कहा कि अब उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द इस बुजुर्ग के परिजनों को खोजकर उन्हें उनके परिवार से मिलाया जाए। इसके लिए स्थानीय प्रशासन और आसपास के इलाकों में जानकारी जुटाई जा रही है। यदि परिवार का कोई पता नहीं चलता, तो वृद्धाश्रम में ही उनका पूरा ख्याल रखा जाएगा, ताकि उन्हें दोबारा ऐसी बेबसी का सामना न करना पड़े।</div>
<div> </div>
<div><strong>होली के रंग में इंसानियत का रंग शामिल</strong></div>
<div>आलोक रॉय के इस कदम ने यह साबित कर दिया कि होली सिर्फ रंग और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि मानवता का भी उत्सव है। जहां कई लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ त्योहार मना रहे थे, वहीं उन्होंने एक अजनबी को अपनाकर उसका जीवन संवारने की पहल की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 11:59:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होली मिलन समारोह का आयोज दयाल सेवा संस्था के सौजन्य से किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>विवेक शर्मा ब्यूरोचीफ टूण्डला</strong></p>
<p><strong>टूण्डला- </strong>होली मिलन समारोह का आयोजन गुरुवार को सिटी सेंटर टूण्डला मै दयाल सेवा संस्था के सौजन्य से किया गया। जिसमे नगर के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया और एक दूसरे को अबीर ग़ुलाल लगा कर शुभकामनायें दी ।</p>
<p>उक्त पर्व को मनाये जाने के लिए नई पीढ़ी के यादगार होगा ऐसे सांस्कृतिक कार्य को बढ़ावा देना दयाल संस्थान के प्रमुख कार्य में भी सम्पन्न किये जाते रहे हैं। संस्था के अध्यक्ष निशांत शर्मा ने बताया कि संस्था समय समय पर ऐसे आयोजन करती रहती है।</p>
<p>आयोजन मै बी डी पाठक, दाऊदयाल शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, शिवेंद्र</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149878/holi-milan-celebrations-were-performed-courtesy-of-dayal-seva-sanstha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250313-wa00281.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विवेक शर्मा ब्यूरोचीफ टूण्डला</strong></p>
<p><strong>टूण्डला- </strong>होली मिलन समारोह का आयोजन गुरुवार को सिटी सेंटर टूण्डला मै दयाल सेवा संस्था के सौजन्य से किया गया। जिसमे नगर के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया और एक दूसरे को अबीर ग़ुलाल लगा कर शुभकामनायें दी ।</p>
<p>उक्त पर्व को मनाये जाने के लिए नई पीढ़ी के यादगार होगा ऐसे सांस्कृतिक कार्य को बढ़ावा देना दयाल संस्थान के प्रमुख कार्य में भी सम्पन्न किये जाते रहे हैं। संस्था के अध्यक्ष निशांत शर्मा ने बताया कि संस्था समय समय पर ऐसे आयोजन करती रहती है।</p>
<p>आयोजन मै बी डी पाठक, दाऊदयाल शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, शिवेंद्र शर्मा, प्रशांत शर्मा, रेनू शर्मा, रेखा शर्मा, श्रद्धा शर्मा, कृष्ण कांत पाठक, राकेश पाठक सुखबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह यादव, पंकज यादव, मोहित यादव अर्पित बघेल, पुनीत रावत, राधेश्याम, अनिल गौतम, श्रीकृष्ण उपाध्याय आदि ने बड़े हर्षल्लास से होली मिलन समारोह मनाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149878/holi-milan-celebrations-were-performed-courtesy-of-dayal-seva-sanstha</link>
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                <pubDate>Sun, 16 Mar 2025 20:14:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुशीनगर : जिला मजिस्ट्रेट ने होली पर्व पर मदिरा दुकानों  को बंद रखने का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर। </strong>जिला मजिस्ट्रेट विशाल भारद्वाज ने होली पर्व पर लोक शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा-59 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए दिनांक 14 मार्च 2025 को जनपद कुशीनगर स्थित समस्त देशी शराब, विदेशी मदिरा, बीयर, मॉडल शॉप, बार, भांग, ताड़ी, की समस्त थोक व फुटकर दुकानों को बंद रखे जाने का आदेश दिया  है।</p>
<p style="text-align:justify;">  जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस बंदी के लिए किसी भी अनुज्ञापन धारक को कोई प्रतिफल देय नहीं होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149880/kushinagar-district-magistrate-instructed-to-keep-liquor-shops-closed-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/20240503_214017.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कुशीनगर। </strong>जिला मजिस्ट्रेट विशाल भारद्वाज ने होली पर्व पर लोक शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा-59 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए दिनांक 14 मार्च 2025 को जनपद कुशीनगर स्थित समस्त देशी शराब, विदेशी मदिरा, बीयर, मॉडल शॉप, बार, भांग, ताड़ी, की समस्त थोक व फुटकर दुकानों को बंद रखे जाने का आदेश दिया  है।</p>
<p style="text-align:justify;"> जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस बंदी के लिए किसी भी अनुज्ञापन धारक को कोई प्रतिफल देय नहीं होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/149880/kushinagar-district-magistrate-instructed-to-keep-liquor-shops-closed-on</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 23:42:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आओ रे ! आओ !! खेलें मसाने में होली</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत में चाहे कुम्भ हो या होली उसे हमारे ज्योतिषी आजकल विशेष बना देते हैं ।  जैसे कुम्भ को 144  साल के अद्भुद संयोगों का महाकुम्भ बना दिया था  वैसे  ही होली को भी 100  साल के अद्भुद संयोगों की होली बता दिया गया है। मुझे भी लगता है कि हमारे ज्योतिषी जो कहते हैं वो साबित भी करा देते हैं। जैसे कुम्भको  महाकुम्भ बनाकर ज्योतिषियों ने आधे देश को गंगा में डुबकी लगवा दी, उसी तरह अब पूरे देश को इस बार मसान में होली खेलने के लिए तैयार कर दिया गया है।</p>
<p>  हिन्दू धर्म की तरह होली</p>
<p>मसान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149866/come-come-play-holi-in-masane"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/atal-bihari-vajpayee-during-holi.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में चाहे कुम्भ हो या होली उसे हमारे ज्योतिषी आजकल विशेष बना देते हैं ।  जैसे कुम्भ को 144  साल के अद्भुद संयोगों का महाकुम्भ बना दिया था  वैसे  ही होली को भी 100  साल के अद्भुद संयोगों की होली बता दिया गया है। मुझे भी लगता है कि हमारे ज्योतिषी जो कहते हैं वो साबित भी करा देते हैं। जैसे कुम्भको  महाकुम्भ बनाकर ज्योतिषियों ने आधे देश को गंगा में डुबकी लगवा दी, उसी तरह अब पूरे देश को इस बार मसान में होली खेलने के लिए तैयार कर दिया गया है।</p>
<p> हिन्दू धर्म की तरह होली भी सनातन ही है । होली की अपनी कहानी है ,अपनी किम्वदंतियां हैं। अपना रंग है ,अपना स्वाद है। अपना आनंद है। लेकिन पहली बार ये आँखें होली का स्वाद, बेस्वाद होते देख रहीं है।  पहली बार होली के रंग खतरनाक   बनाये जा रहे है।  पहली  बार होली की मस्ती से देश  की एक चौथाई आबादी को अलग करने या अलग रहने के लिए कहा जा रहा है। धर्म के ठेकेदार, सियासत  के हाथों की कठपुतली  बनकर होली को सचमुच मसान में खेलने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>मसान की होली अभी तक काशी की मशहूर थी। मशहूर था होली का होली [पवित्र ] गीत। ' होली खेलें मसाने में' छन्नू लाल मिसुर या  मालिनी अवस्थी जब ये गीत गातीं हैं तो मन मछँदर हो जाता है। ये गीत भगवान शिव के साथ होली खेलने का भव्य दर्शन कराता है। लेकिन अब न जाने क्या हुआ है कि हमारी सियासत काशी के मसाने की होली ,पूरे देश में खिलवाना चाहती है। फतवे जारी कर दिए गए हैं कि होली पर विधर्मी अपने घरों से बाहर न निकलें। क्योंकि इससे होली में खलल पड़ सकती है। अरे मिया ! जब महाकुम्भ में खलल नहीं पड़ी तो होली में खलल कैसे पड़ सकती है ?लेकिन यदि सत्ता प्रतिष्ठान चाहे तो कुछ भी मुमकिन है।</p>
<p>होली का संदर्भ क्या  है ,सन्देश क्या है ? ये विद्वान बता सकते हैं ।  हम जैसे कूढ़ मगज तो सिर्फ इतना जानते हैं कि होली का  एकमात्र सन्देश ये है कि- प्रेम को, भक्ति को दुनिया की कोई आग नहीं जला सकती।' होलिका भी नहीं ,जिसे आग में सब कुछ भस्म करने का वरदान हासिल था /होलिका प्रेम और भक्ति के प्रतीक प्रह्लाद को नहीं जला पायी और खुद जलकर राख हो गयी। ख़ाक में मिल गयी। इसी तरह मेरा दृढ विश्वास है की सत्ता की होलिका सद्भाव के प्रह्लाद को जलाकर न राख कर सकती है और न खाक में मिला सकती है। भले ही सत्ता प्रतिष्ठान पूरे देश के कब्रस्तान और मस्जिदें खोद कर देख ले।</p>
<p>लोगों को शायद ये पता नहीं है कि होली पर रियाया आपस में गले मिलती आयी है। आज से नहीं  बल्कि आदिकाल से यानि जब से होली मानाने के सिलसिला शुरू हुआ होगा ,तब से। इस होली को अकेले हिन्दू  नहीं मानते ।  इसमें सिख,ईसाई,मुसलमान और तो और अंग्रेज तक शामिल होते आये हैं और होते आएंगे। कोई किसी को रोक नहीं सकता,रोकता भी  नहीं है। रोकना भी नहीं चाहिए ,लेकिन जो होली खेलना नहीं चाहता उसे इसमें जबरन घसीटा भी नहीं जा सकता। घसीटना भी नहीं चाहिए।</p>
<p>होली यदि हिन्दुओं का त्यौहार है तो उसके लिए दूसरों को न तो विवश किया जा सकता है और न ही किसी को होली खेलने ,मनाने से रोका जा सकता है। स्कूल बंद होने से पहले बच्चों ने होली माना ली,खेल ली। वहां सियासत अपना काम नहीं कर पायी ,लेकिन सम्भल  में रंगों के बजाय खून से होली खेलने की तैयारी जरूर की गयी है खुदा न करे की सम्भल में होली बदरंग हो ,बदनाम हो।</p>
<p>मैंने सात समंदर पार अमेरिका में दो-तीन बार होली मनाऐहै। वहां होली घरों में नहीं मंदिरों में जलाई जाती है और घरों में नहीं बल्कि सामूहिक रूप से सार्वजनिक बागीचों में खेली जाती है। अमेरिका में अकेले हिन्दू होली नहीं खेलता। पूरा हिंदुस्तान होली खेलता है।  होली खेलने   वाले से उसका मजहब नहीं पूछा जात।  अमरीकी भी होली खेलते है।  अपने बच्चों को होली खिलाने लाते हैं ,लेकिन यदि जिस तरह से हिन्दुस्तान में पहली बार होली खेलने कि कोशिश की जा रहीहै वैसी ही होली यदि देश के बाहर दूसरे मुल्कों में रहने वाले हिन्दुओं ने खेलना शुरू कर दी तो कबाड़ा हो जायेगा ।  भारतीयता का जनाजा उठ जाएगा। भारतीयता का मतलब ही सद्भाव है।</p>
<p>हमने, आप ने इसी मुल्क में सातों जातों को होली खेलते देखा है ,लेकिन अब जान-बूझकर रंग में भंग डालने की कोशिश की जा   रही है। होली सामाजिक उत्सव  है ,इसमें  राजनीति वाले ,मजहब वाले अपनी नाक क्यों घुसा रहे हैं ?वे थोड़े ही बताएँगे की हमें होली कैसे खेलना है ? किसके साथ खेलना है ? पहले तो ऐसा नहीं होता था ।  ये सब 2014  के बाद ही क्यों शुरू हुआ है ? दुर्भाग्य ये है कि अब होली को बदरंग करने के गुप्त अभियान  में नेता,भगवाधारी संत-महंत और साहित्यकार ,पत्रकार सभी शामिल हो गए हैं और जो इस कोशिश के खिलाफ खड़े हैं उन्हें विधर्मी,तथा देशद्रोही घोषित किया जा रहा है।</p>
<p>सब मिलकर रंगों की होली को मसान की होली   बना देने पर आमादा हैं।  अब मजा तब आये जब मुल्क का वो समाज बढ़ -चढ़कर होली खेले,जिसे इससे अलग करने की कोशिश की  जा  रही है ।विधर्मी अपनी मस्जिदों  में जुमे की नमाज भी पढ़ें और नमाज के बाद खुलकर रंगों  की होली   भी खेलें ,तभी साजिशें नाकाम हो सकतीं हैं । दुनिया के किसी भी रंग से न रोजा टूटेगा और न अपवित्र होगा। जैसे हिन्दू  ईद मिलने मुसलमानों के  यहां जाते हैं ,वैसे ही मुसलंमान  भी जुमे कि नमाज के बाद हिन्दू पड़ौसियों  के यहां होली मिलने जरूर  जाएँ ।</p>
<p>बहरहाल हमारे यहां तो होली जलाई भी जा रही है और खेली भी जा रही है,वो भी गलियों में ,मुहल्लों में ,बगीचों में। मसान में होली खेलने कोई नहीं गया। मसान में होली खेलने का हक केवल भगवान शिव को है और हम मनुष्य भगवान नहीं है।  भगवान शिव की तरह मसान की राख से होली नहीं खेल सकते। ये अधिकार भगवान शिव ने केवल काशी वासियों को दिया है। काशी के सांसद चाहें तो काशी के मसानों में जाकर राख की होली खेल सकते हैं,किन्तु देश के मुखिया होने के नाते उनका दायित्व है कि वे होली को बदरंग न होने दें । रोकें अपने प्यादों को ऐसा करने से।  </p>
<p>मुझे यकीन है कि उनकी बात सुनी जाएगी ।  उनके कहने पर ये देश जब ताली और थाली बजा सकता है तो मिलजुलकर,सद्भाव से होली भी खेल सकता है।होली कोई कुम्भ स्नान नहीं है कि संगम जाकर ही किया जाये ।  होली तो 60  क्या 150  करोड़ देशवासी जहाँ हैं, वहां खेल सकते हैं।  किन्तु साहब के  मन की बात केवल साहब  ही जानते हैं। पता नहीं वे क्या चाहते हैं ? आप सभी को होली की अनन्य अनंत शुभकामनायें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 15:18:22 +0530</pubDate>
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                <title> प्रधानमंत्री ने होली से पूर्व किसानों को दिया तोहफा :  पवन </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>देवरिया।</strong> भाजपा किसान मोर्चा द्वारा बरहज डाक बंगला पर होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रुद्रपुर एवं बरहज विधानसभा के किसान मोर्चा पदाधिकारीगण ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया। किसान मोर्चा की तरफ से सभी  को कृषि कैलेंडर और उपहार भेंट किया गया, इस अवसर पर उपस्थित किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष पवन कुमार मिश्र ने कहा होली के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान सम्मान निधि किसानों के खाते में भेजकर उनको होली का तोहफा दिया है।</div>
<div>  </div>
<div>उन्होंने कहा कि किसान मोर्चा पदाधिकारी होली में किसानों के बीच जाकर सरकार द्वारा प्रस्तुत किसान कल्याणकारी बजट की चर्चा कर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149863/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/hindi-divas29.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>देवरिया।</strong> भाजपा किसान मोर्चा द्वारा बरहज डाक बंगला पर होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रुद्रपुर एवं बरहज विधानसभा के किसान मोर्चा पदाधिकारीगण ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया। किसान मोर्चा की तरफ से सभी  को कृषि कैलेंडर और उपहार भेंट किया गया, इस अवसर पर उपस्थित किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष पवन कुमार मिश्र ने कहा होली के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसान सम्मान निधि किसानों के खाते में भेजकर उनको होली का तोहफा दिया है।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा कि किसान मोर्चा पदाधिकारी होली में किसानों के बीच जाकर सरकार द्वारा प्रस्तुत किसान कल्याणकारी बजट की चर्चा कर उनके साथ होली का पर्व मनाएंगे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भगवान यादव, अजित कुशवाहा, सुनील चतूर्वेदी, विजय यादव, जवाहर मिश्र, ओम प्रकाश चौरसिया, सुब्रत सिंह, बृजेश शर्मा, गुड्डू यादव, गोलू यादव, पंकज उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 15:06:06 +0530</pubDate>
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