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                <title>education system - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>education system RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>'यूपीएससी में कभी नहीं हुआ पेपर लीक, एनटीए को सीखने की जरूरत' : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180331/there-was-never-any-paper-leak-in-upsc-nta-needs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक के सफलतापूर्वक आयोजित करती हैं।जस्टिस नरसिम्हा ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपीएससी की परीक्षाओं में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। एनटीए को उससे सीखने की जरूरत है।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक समाधान तभी संभव है जब यह स्पष्ट हो कि किसी विफलता की जिम्मेदारी किस व्यक्ति पर है। केवल संस्थागत जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि एनटीए में “संस्थागत निरंतरता” विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में एजेंसी के पास परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने की क्षमता और विशेषज्ञता उपलब्ध रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान 2024 में गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन भी अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और लगभग 60 अल्पकालिक सिफारिशें दी थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने पूछा कि यदि सुधार लागू किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर इस वर्ष पेपर लीक जैसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की गई और नई कमजोरियों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय तैयार किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने लाखों छात्रों पर पड़े प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों का समय और भावनाएं लगाने वाले छात्रों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद पीड़ादायक और आघातकारी होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एनटीए को विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ स्थायी सहयोग विकसित करना चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद कई डॉक्टर संगठनों और छात्र समूहों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनटीए को भंग करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जगह एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण गठित करने और भविष्य की परीक्षाओं की न्यायिक निगरानी की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर विचार किया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हैदर नगर विद्यालय में बेपटरी होती दिख रही शिक्षा व्यवस्था </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>मितौली खीरी। </strong>मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</div>
<div>  </div>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149899/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/photo-06......jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>मितौली खीरी। </strong>मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</div>
<div> </div>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा सुधार की मंशा के विपरीत यहां के शिक्षक काम कर रहे हैं।</div>
<div>जब इस मामले में जानकारी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी मितौली भगवानराव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला।</div>
<div> </div>
<div>वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है। इससे पहले कई बार भी इसी तरह से मामले सामने आए हैं। लेकिन यहां विद्यालय में पांच अध्यापक हैं।जहां काफी देर बाद शिक्षा मित्र विद्यालय में पहुंचे। लेकिन जो शेष अन्य अध्यापक है वह नहीं पहुंच रहे हैं। आखिर क्या कारण है समय को ध्यान नहीं रखते हैं अध्यापक।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 15:37:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मितौली खीरी।</strong> मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</p>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149849/education-system-in-primary-school-haider-nagar-is-deteriorating"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/फोटो-01-..-.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मितौली खीरी।</strong> मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</p>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा सुधार की मंशा के विपरीत यहां के शिक्षक काम कर रहे हैं। जब इस मामले में जानकारी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी मितौली भगवानराव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला।</div>
<div> </div>
<div>वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है। इससे पहले कई बार भी इसी तरह से मामले सामने आए हैं। लेकिन यहां विद्यालय में पांच अध्यापक हैं।जहां काफी देर बाद शिक्षा मित्र विद्यालय में पहुंचे। लेकिन जो शेष अन्य अध्यापक है वह नहीं पहुंच रहे हैं। आखिर क्या कारण है समय को ध्यान नहीं रखते हैं अध्यापक।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149849/education-system-in-primary-school-haider-nagar-is-deteriorating</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 13:51:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सरकार को कमजोर शिक्षा व्यवस्था पर गहन विचार करने की आवश्यकता </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कौशाम्बी।</strong> देश आजाद होने के बाद भारत देश में समूचे भारत में बनी सरकार बनी उस समय के कानून मंत्री ने बहुत ही ही सोंच समझ के साथ पुख्ता कानून बनाया थे और लागू किया था जिस पर छात्र-छात्राओं  के विषय विधिवत गहन विचार करके नियमानुसार विद्यालयों में 01 जुलाई से 30 जून तक का सत्र बनाया गया था जिसमें बच्चों को बड़ी सहूलियत मिला करती थी और साथ ही साथ अध्यापकों को भी सहूलियत मिलती थी जब 01 जुलाई से जब विद्यालय खुलता था बच्चों का प्रवेश होता था और 15 जुलाई तक में कक्षायें संचालित हो जाती थी।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149517/government-needs-to-consider-intense-on-weak-education-system%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/education.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कौशाम्बी।</strong> देश आजाद होने के बाद भारत देश में समूचे भारत में बनी सरकार बनी उस समय के कानून मंत्री ने बहुत ही ही सोंच समझ के साथ पुख्ता कानून बनाया थे और लागू किया था जिस पर छात्र-छात्राओं  के विषय विधिवत गहन विचार करके नियमानुसार विद्यालयों में 01 जुलाई से 30 जून तक का सत्र बनाया गया था जिसमें बच्चों को बड़ी सहूलियत मिला करती थी और साथ ही साथ अध्यापकों को भी सहूलियत मिलती थी जब 01 जुलाई से जब विद्यालय खुलता था बच्चों का प्रवेश होता था और 15 जुलाई तक में कक्षायें संचालित हो जाती थी। </div>
<div> </div>
<div>और नवम्बर-दिसम्बर माह तक अर्धवार्षिक परीक्षा कराकर अप्रैल के महीने में बोर्ड की परीक्षा कराते हुए अन्य परीक्षाओं को मई माह में परिपूर्णं कराकर विद्यालय बन्द कर दिया जाता था और गर्मी के छुट्टियों के दिन में यानी 21 मई से 30 जून के बीच के समय में कॉपियों का मूल्यांकन कराकर 30 जून के पहले-पहले परिणाम घोषित कर दिया जाता था और छात्र-छात्राएं अपने परिणामों को देखकर अगले सत्र की तैयारी करते थे और जून के महीने में ही अगले सत्र की पढ़ाई के लिए कॉपी किताबें खरीद लेता था।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन आज मौजूदा समय में जिस तरह से छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ऐसे में बच्चों का भविष्य खराब होता जा रहा है 01 अप्रैल से 31 मार्च का नया सत्र लागू कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है 31मार्च तक परीक्षाफल घोषित कर दिया जा रहा है 01 अप्रैल से पूरा अप्रैल का महीना प्रवेश में ही चला जाता है और विद्यार्थी कापी किताब  भी नहीं खरीद पाता है साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह के उत्साह को देखते हुये बच्चे उपस्थित नहीं हो पाता है साथ ही साथ खेत कटाई-मडा़ई, महुआ बिनाई आदि कार्य किया जाता है। </div>
<div> </div>
<div>और मई का महीना भी इसी तरह से चला जाता है जून के महीना गर्मी की छुट्टी चली जाती है जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाती है और अब के समय में 01 जुलाई से विद्यालय पुनः खुलता है तो बच्चे कापी किताब खरीदने में जुट जाते हैं जिससे पूरा महीना जुलाई का समाप्त हो जाता है इस कारण से पुराने शिक्षा कानून व नियम को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मौजूदा समय के सत्र पर सरकार को गहन चिन्ता करनी होगी जिससे छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 13:59:52 +0530</pubDate>
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