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                <title>education system - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>education system RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक: 'भरोसा' कब लीक होना बंद होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi">  घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi">  लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  हजार अभ्यर्थियों का</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/education.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार अभ्यर्थियों का भविष्य फिर से लटका दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये कोई पहली बार नहीं है। सवाल वही है: आखिर पेपर लीक से छुटकारा कब मिलेगा</span>? 27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की सुबह का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवंडी में छापा- </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को सुबह </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">का पेपर बेचा जा रहा है। छापेमारी में संदिग्धों के पास से जो प्रश्नपत्र मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो असली </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे। परीक्षा रद्द-  महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने तुरंत </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा स्थगित कर दी। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारियां- भिवंडी पुलिस ने कम से कम </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को हिरासत में लिया है और केस दर्ज कर जांच शुरू की है। ये पहली बार नहीं: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कहानी-  महाराष्ट्र में </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक अब आदत बन चुका है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> कोल्हापुर में  </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> नवंबर की परीक्षा से पहले </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोग गिरफ्तार। गिरोह </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में पेपर बेच रहा था। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> ठाणे/भिवंडी में </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा से </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले पेपर लीक। </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कोल्हापुर केस के बाद भी परिषद ने कहा था कि "पेपर छपाई बेहद गोपनीय होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोषागार में </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे निगरानी रहती है"। फिर भी लीक हो गया। कौन फंस रहा है बीच में</span>? 4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख शिक्षक अभ्यर्थी। इस बार करीब </span>4.28<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख उम्मीदवार परीक्षा देने वाले थे। इसमें </span>2.26<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख वो शिक्षक भी शामिल थे जो पहले से नौकरी कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन के लिए फिर से परीक्षा दे रहे थे। एक अभ्यर्थी का </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल बर्बाद। फीस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग सब गया। और सबसे बड़ा नुकसान: स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती फिर लटकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लीक होता कैसे है</span>? '<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया का मॉडल</span>'- <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच और पुराने केस देखें तो पैटर्न साफ है। व्हाट्सएप चेन- </span>HSC <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड पेपर लीक में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टेक वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सीलेंट ट्यूशन क्लासेस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हुए स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचता था। प्राइवेट कोचिंग का रोल- नागपुर बोर्ड केस में एक प्राइवेट कोचिंग से जुड़े व्यक्ति ने पैसे लेकर पेपर साझा किया था। अंदरूनी सांठगांठ- बिना छपाई वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या कोषागार/ट्रांसपोर्ट लेवल पर पेपर निकलना। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भी पेपर परीक्षा से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट पहले व्हाट्सएप पर भेजा गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">                  राजनीति शुरू: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक सरकार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का आरोप- कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा: "पेपर लीक अब अपवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी सरकार की पहचान बन गया है। ठाणे में ही टैट का पेपर लीक... किसका राजनीतिक संरक्षण है</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर लीक से छुटकारा कब</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सजा का कानून-  </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह महाराष्ट्र में भी </span>'Public Examination Act' <span lang="hi" xml:lang="hi">को दांत वाला बनाना। गिरफ्तार लोग </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में जमानत पर बाहर न आएं। टेक्नोलॉजी से निगरानी- पेपर को ब्लॉकचेन या एन्क्रिप्टेड </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड से ट्रैक करना। हर हैंडलिंग पर बायोमेट्रिक लॉग। कोचिंग माफिया पर कार्रवाई-  ट्यूशन क्लासेस में छापे और व्हाट्सएप ग्रुप मॉनिटरिंग। पैसे लेकर पेपर बेचने वालों का लाइसेंस रद्द। परिषद की जवाबदेही- हर लीक पर </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">के शीर्ष अधिकारी से स्पष्टीकरण और जिम्मेदारी तय। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस का मामला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पल्ला झाड़ना बंद। अभ्यर्थियों को मुआवजा-परीक्षा रद्द होने पर फीस वापस + अगली परीक्षा फ्री + ट्रैवल खर्च। ताकि सिस्टम को दर्द हो। </span>NEET, HSC, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब </span>TET... <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बार सरकार कहती है "जांच होगी"। पर अभ्यर्थी हर बार नई तारीख का इंतजार करता है। जब तक पेपर लीक करने वाले को नौकरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जेल और </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का बैन मिलना तय नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। क्या महाराष्ट्र को हर परीक्षा के लिए </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">खुद को सुधारेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हर परीक्षा से पहले लीक का डर परीक्षार्थियों को सताने लगा है। और जब वह किसी परीक्षा की तैयारियां करते हैं तो एक सवाल जरूर मन में उठता है कि कहीं परीक्षा लीक न हो जाए। सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कानून को और सख्त बनाना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:27:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक तरफ चलती रही LDA की कार्यशाला, दूसरी तरफ सील होते रहे कोचिंग संस्थान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एक ओर एलडीए द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर शहर में कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई भी लगातार चलती रही। इस कार्रवाई से छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों के बीच असमंजस, चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। संचालकों का कहना है की ज्यादातर कोचिंग किराए की प्रॉपर्टी में चल रही हैं और जो एलडीए के मानक हैं उन्हें मकान मालिक पूरी करने की जगह कोचिंग वाली जगह खाली करने को बोलने लगे हैं ऐसे में जाएँ तो जाएँ कहाँ ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में अब मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में अनेक विद्यार्थियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182225/on-one-side-lda-workshops-continued-to-operate-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000998054.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक ओर एलडीए द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर शहर में कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई भी लगातार चलती रही। इस कार्रवाई से छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों के बीच असमंजस, चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। संचालकों का कहना है की ज्यादातर कोचिंग किराए की प्रॉपर्टी में चल रही हैं और जो एलडीए के मानक हैं उन्हें मकान मालिक पूरी करने की जगह कोचिंग वाली जगह खाली करने को बोलने लगे हैं ऐसे में जाएँ तो जाएँ कहाँ ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में अब मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में अनेक विद्यार्थियों का कहना है कि विशेषकर कमजोर छात्र ऑनलाइन माध्यम से गणित, विज्ञान और अन्य जटिल विषयों को प्रभावी ढंग से समझ नहीं पाते। उनका मानना है कि इस समय ऑफलाइन कक्षाओं का बाधित होना उनकी तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोचिंग संघ का कहना है कि लगातार हो रही कार्रवाई के कारण कई शिक्षक और संस्थान ख़त्म होने की कगार पर हैं उनका दावा है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और कोचिंग संस्थान का करियर पूरी तरह चौपट हो जाएगा । </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशासन का पक्ष है कि शहर में संचालित संस्थानों को निर्धारित नियमों और भवन सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है, और कार्रवाई उन्हीं मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है परंतु उत्तर प्रदेश कोचिंग संघ के अध्यक्ष बादल चोपड़ा का कहना है ऐसे संस्थान जो अत्यंत छोटे हैं और उनके पास आवश्यक उपकरण हैं उन्हें बिना निरीक्षण , नोटिस दिए सील कर देना नियम विरुद्ध है इससे सम्पूर्ण समाज प्रभावित होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा का बाजारीकरण और छात्रों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180637/commercialization-of-education-and-the-future-of-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में भेज रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यही उनके भविष्य का एकमात्र रास्ता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार आज भारत में लगभग 27 से 33 प्रतिशत छात्र किसी न किसी प्रकार की निजी शिक्षा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में यह संख्या और अधिक है। दिल्ली जैसे शहरों में लगभग 39 प्रतिशत छात्र इन संस्थानों से जुड़े हुए पाए गए हैं। यह आंकड़ा केवल शिक्षा की स्थिति नहीं बताता बल्कि उस मानसिक दबाव को भी दिखाता है जिसमें समाज जी रहा है। विद्यालयों और महाविद्यालयों पर भरोसा कम हुआ है और इन व्यापारिक केंद्रों को सफलता का संक्षिप्त मार्ग मान लिया गया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस उद्योग का बड़ा हिस्सा शिक्षा से ज्यादा विपणन पर टिका हुआ है। आज आभासी माध्यमों से छात्रों को जोड़ने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है। एक प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 62 प्रतिशत प्रवेश अब अंतर्जाल आधारित प्रचार के माध्यम से हो रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि शिक्षा अब विज्ञापन और पहचान निर्माण के उसी प्रतिरूप पर चल रही है जिस पर कोई बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलता है। फर्क केवल इतना है कि यहां उत्पाद कोई वस्तु नहीं बल्कि छात्रों का भविष्य है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">इन संस्थानों की सबसे बड़ी चाल उनका चयन प्रदर्शन होता है। हजारों और लाखों छात्रों की भीड़ में यदि 5 या 10 छात्रों का चयन हो जाए तो वही चेहरे हर विज्ञापन पट्ट पर दिखाई देने लगते हैं। ऐसा माहौल तैयार किया जाता है कि हर छात्र को लगे कि अगला चेहरा उसी का होगा। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि बाकी हजारों छात्रों का क्या हुआ। वे छात्र जो वर्षों तक शुल्क भरते रहे, जो किराये के कमरों में रहकर तैयारी करते रहे, जिनके परिवार कर्ज में डूब गए, उनका संघर्ष किसी विज्ञापन में जगह नहीं पाता।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">यहां सबसे बड़ा खेल संख्या का है। कुछ संस्थान कम शुल्क रखकर गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की भारी भीड़ जुटाते हैं। 1000 या 2000 रुपये का शुल्क सुनकर छात्रों को लगता है कि उन्हें बहुत बड़ा अवसर मिल रहा है। लेकिन जब ऐसे लाखों छात्र जुड़ते हैं तो वही छोटी रकम करोड़ों का कारोबार बना देती है। कम शुल्क का मतलब सेवा भावना नहीं होता। कई बार यह भीड़ इकट्ठा करने की रणनीति होती है। जितनी बड़ी भीड़, उतना बड़ा मुनाफा और उतनी ही बड़ी सफलता की कहानी।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि छात्र मेहनत अपनी करते हैं लेकिन श्रेय पूरा संस्थान ले जाता है। यदि कोई छात्र सफल हो जाए तो संस्था कहती है कि यह उसकी शिक्षा का परिणाम है। लेकिन यदि लाखों छात्र असफल हो जाएं तो उसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। असफल छात्र को कहा जाता है कि उसने पर्याप्त मेहनत नहीं की। इस तरह सफलता संस्थान की और असफलता छात्र की बना दी जाती है। आज इस उद्योग ने छात्रों की मानसिकता भी बदल दी है। पहले शिक्षा का उद्देश्य समझ विकसित करना होता था। अब शिक्षा केवल परीक्षा पास करने तक सीमित</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'यूपीएससी में कभी नहीं हुआ पेपर लीक, एनटीए को सीखने की जरूरत' : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180331/there-was-never-any-paper-leak-in-upsc-nta-needs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक के सफलतापूर्वक आयोजित करती हैं।जस्टिस नरसिम्हा ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपीएससी की परीक्षाओं में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। एनटीए को उससे सीखने की जरूरत है।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक समाधान तभी संभव है जब यह स्पष्ट हो कि किसी विफलता की जिम्मेदारी किस व्यक्ति पर है। केवल संस्थागत जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि एनटीए में “संस्थागत निरंतरता” विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में एजेंसी के पास परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने की क्षमता और विशेषज्ञता उपलब्ध रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान 2024 में गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन भी अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और लगभग 60 अल्पकालिक सिफारिशें दी थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने पूछा कि यदि सुधार लागू किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर इस वर्ष पेपर लीक जैसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की गई और नई कमजोरियों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय तैयार किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने लाखों छात्रों पर पड़े प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों का समय और भावनाएं लगाने वाले छात्रों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद पीड़ादायक और आघातकारी होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एनटीए को विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ स्थायी सहयोग विकसित करना चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद कई डॉक्टर संगठनों और छात्र समूहों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनटीए को भंग करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जगह एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण गठित करने और भविष्य की परीक्षाओं की न्यायिक निगरानी की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर विचार किया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:19:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> हैदर नगर विद्यालय में बेपटरी होती दिख रही शिक्षा व्यवस्था </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div><strong>मितौली खीरी। </strong>मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</div>
<div>  </div>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149899/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/photo-06......jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>मितौली खीरी। </strong>मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</div>
<div> </div>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा सुधार की मंशा के विपरीत यहां के शिक्षक काम कर रहे हैं।</div>
<div>जब इस मामले में जानकारी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी मितौली भगवानराव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला।</div>
<div> </div>
<div>वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है। इससे पहले कई बार भी इसी तरह से मामले सामने आए हैं। लेकिन यहां विद्यालय में पांच अध्यापक हैं।जहां काफी देर बाद शिक्षा मित्र विद्यालय में पहुंचे। लेकिन जो शेष अन्य अध्यापक है वह नहीं पहुंच रहे हैं। आखिर क्या कारण है समय को ध्यान नहीं रखते हैं अध्यापक।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Mar 2025 15:37:33 +0530</pubDate>
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                <title>प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मितौली खीरी।</strong> मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</p>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149849/education-system-in-primary-school-haider-nagar-is-deteriorating"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/फोटो-01-..-.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मितौली खीरी।</strong> मितौली विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हैदर नगर में शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ रहे हैं। इससे बच्चे स्कूल के बाहर इधर-उधर घूमने को मजबूर हैं।शिक्षकों की इस लापरवाही का सीधा असर विद्यालय में छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है। बच्चों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षकों को चेताया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। शिक्षक मनमाने तरीके से आते-जाते हैं।</p>
<div>स्कूल में मिड डे मील की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। बच्चों को उचित तरीके से भोजन नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा सुधार की मंशा के विपरीत यहां के शिक्षक काम कर रहे हैं। जब इस मामले में जानकारी के लिए खंड शिक्षा अधिकारी मितौली भगवानराव से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला।</div>
<div> </div>
<div>वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है। इससे पहले कई बार भी इसी तरह से मामले सामने आए हैं। लेकिन यहां विद्यालय में पांच अध्यापक हैं।जहां काफी देर बाद शिक्षा मित्र विद्यालय में पहुंचे। लेकिन जो शेष अन्य अध्यापक है वह नहीं पहुंच रहे हैं। आखिर क्या कारण है समय को ध्यान नहीं रखते हैं अध्यापक।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 13:51:06 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार को कमजोर शिक्षा व्यवस्था पर गहन विचार करने की आवश्यकता </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कौशाम्बी।</strong> देश आजाद होने के बाद भारत देश में समूचे भारत में बनी सरकार बनी उस समय के कानून मंत्री ने बहुत ही ही सोंच समझ के साथ पुख्ता कानून बनाया थे और लागू किया था जिस पर छात्र-छात्राओं  के विषय विधिवत गहन विचार करके नियमानुसार विद्यालयों में 01 जुलाई से 30 जून तक का सत्र बनाया गया था जिसमें बच्चों को बड़ी सहूलियत मिला करती थी और साथ ही साथ अध्यापकों को भी सहूलियत मिलती थी जब 01 जुलाई से जब विद्यालय खुलता था बच्चों का प्रवेश होता था और 15 जुलाई तक में कक्षायें संचालित हो जाती थी।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149517/government-needs-to-consider-intense-on-weak-education-system%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/education.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कौशाम्बी।</strong> देश आजाद होने के बाद भारत देश में समूचे भारत में बनी सरकार बनी उस समय के कानून मंत्री ने बहुत ही ही सोंच समझ के साथ पुख्ता कानून बनाया थे और लागू किया था जिस पर छात्र-छात्राओं  के विषय विधिवत गहन विचार करके नियमानुसार विद्यालयों में 01 जुलाई से 30 जून तक का सत्र बनाया गया था जिसमें बच्चों को बड़ी सहूलियत मिला करती थी और साथ ही साथ अध्यापकों को भी सहूलियत मिलती थी जब 01 जुलाई से जब विद्यालय खुलता था बच्चों का प्रवेश होता था और 15 जुलाई तक में कक्षायें संचालित हो जाती थी। </div>
<div> </div>
<div>और नवम्बर-दिसम्बर माह तक अर्धवार्षिक परीक्षा कराकर अप्रैल के महीने में बोर्ड की परीक्षा कराते हुए अन्य परीक्षाओं को मई माह में परिपूर्णं कराकर विद्यालय बन्द कर दिया जाता था और गर्मी के छुट्टियों के दिन में यानी 21 मई से 30 जून के बीच के समय में कॉपियों का मूल्यांकन कराकर 30 जून के पहले-पहले परिणाम घोषित कर दिया जाता था और छात्र-छात्राएं अपने परिणामों को देखकर अगले सत्र की तैयारी करते थे और जून के महीने में ही अगले सत्र की पढ़ाई के लिए कॉपी किताबें खरीद लेता था।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन आज मौजूदा समय में जिस तरह से छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है ऐसे में बच्चों का भविष्य खराब होता जा रहा है 01 अप्रैल से 31 मार्च का नया सत्र लागू कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है 31मार्च तक परीक्षाफल घोषित कर दिया जा रहा है 01 अप्रैल से पूरा अप्रैल का महीना प्रवेश में ही चला जाता है और विद्यार्थी कापी किताब  भी नहीं खरीद पाता है साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह के उत्साह को देखते हुये बच्चे उपस्थित नहीं हो पाता है साथ ही साथ खेत कटाई-मडा़ई, महुआ बिनाई आदि कार्य किया जाता है। </div>
<div> </div>
<div>और मई का महीना भी इसी तरह से चला जाता है जून के महीना गर्मी की छुट्टी चली जाती है जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाती है और अब के समय में 01 जुलाई से विद्यालय पुनः खुलता है तो बच्चे कापी किताब खरीदने में जुट जाते हैं जिससे पूरा महीना जुलाई का समाप्त हो जाता है इस कारण से पुराने शिक्षा कानून व नियम को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मौजूदा समय के सत्र पर सरकार को गहन चिन्ता करनी होगी जिससे छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 13:59:52 +0530</pubDate>
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