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                <title>illegal tree cutting - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>अवधी भाषा साहित्यिक संगोष्ठी व लोकार्पण समारोह आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>सृजना साहित्यिक संस्था उत्तर प्रदेश के तत्वावधान मे अवधी काव्य संग्रहों का लोकार्पण एवं अन्तर्राष्ट्रीय अवधी भाषा साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन न्यू एंजिल्स सीनियर सेकेन्डरी स्कूल के आडिटोरियम में हुआ।कार्यक्रम मे डॉ. दयाराम मौर्य रत्न द्वारा प्रणीत अवधी काव्य संग्रह आखर आखर सबद,वरिष्ठ कवि कुंजबिहारी काकाश्री विरचित अवधी काव्य संग्रह असल बाप तो हमही अही और श्रीनाथ सरस की पुस्तक शशि की कान्ति का लोकार्पण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए डॉ. एम गोविन्द राजन ने कहा कि आज अवधी वैश्विक स्तर अपना परचम लहरा रही है।मुख्य अतिथि डॉ. राम बहादुर मिश्र ने कहा कि अवधी आम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176631/awadhi-language-literary-seminar-and-launch-ceremony-organized"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260419-wa0073.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>सृजना साहित्यिक संस्था उत्तर प्रदेश के तत्वावधान मे अवधी काव्य संग्रहों का लोकार्पण एवं अन्तर्राष्ट्रीय अवधी भाषा साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन न्यू एंजिल्स सीनियर सेकेन्डरी स्कूल के आडिटोरियम में हुआ।कार्यक्रम मे डॉ. दयाराम मौर्य रत्न द्वारा प्रणीत अवधी काव्य संग्रह आखर आखर सबद,वरिष्ठ कवि कुंजबिहारी काकाश्री विरचित अवधी काव्य संग्रह असल बाप तो हमही अही और श्रीनाथ सरस की पुस्तक शशि की कान्ति का लोकार्पण किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए डॉ. एम गोविन्द राजन ने कहा कि आज अवधी वैश्विक स्तर अपना परचम लहरा रही है।मुख्य अतिथि डॉ. राम बहादुर मिश्र ने कहा कि अवधी आम जनमानस की भाषा है।इसका साहित्य सर्वग्राह्य है।संपादक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दयाराम मौर्य 'रत्न' ने कहा कि अवधी लोकमानस और लोकचेतना की भाषा है।अति विशिष्ट अतिथि प्रदीप सारंग ने कहा कि अवधी मे अधिकाधिक लेखन आज समय की मांग है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अति विशिष्ट अतिथि डाॅ. नीरज शुक्ल ने कहा कि अवधी  साहित्य की पहुँच वर्तमान मे विश्व स्तर पर है।इस आयोजन मे शिक्षाविद् डॉ. शाहिदा,आचार्य अनीस देहाती,बेचन लाल विनोदी,लखन प्रतापगढ़ी,सुप्रिया पांडेय,राधेश्याम दीवाना, प्रेमकुमार त्रिपाठी प्रेम,कुंजबिहारी काकाश्री,श्रीनाथ सरस,अमरनाथ बेजोड़,यदुवंशी रसिकाचार्य आदि ने अवधी मे काव्यपाठ किया।कार्यक्रम का संचालन अनिल कुमार निलय ने किया।इस अवसर पर रोशन लाल ऊमरवैश्य,राजेश हर्षपुरी,राकेश कनौजिया,सुनील कुमार,विवेक कुमार आदि उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:16:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हरे भरे पेड़ों पर चला लकड़कट्टो का आरा </title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर खीरी-</strong> तहसील शारदा नगर वन रेंज उसिया वीट कलीकापुरवा में  सरकारी नाला के आध दर्जन जामुन व शीशम के हरे भरे पेड़  लकड़कट्टे द्वारा काटे जाने का मामला प्रकाश में आया है।पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले हरे भरे पेड़ पौधे तमाम कवायदों के बाद भी दिन प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं।कारण लक़ड़कट्टा पुलिस व वन विभाग का गठजोड़ हावी है और विभागीय उदासीनता का परिणाम है कि हरे पेड़ों की बेखौफ कटाई की जा रही है। जितने पेड़ कट रहे उसकी तुलना में पौधारोपण व पेड़ों का संरक्षण नहीं हो रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार करोड़ों</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176625/wood-sawing-on-lush-green-trees"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/photo02........jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लखीमपुर खीरी-</strong> तहसील शारदा नगर वन रेंज उसिया वीट कलीकापुरवा में  सरकारी नाला के आध दर्जन जामुन व शीशम के हरे भरे पेड़  लकड़कट्टे द्वारा काटे जाने का मामला प्रकाश में आया है।पर्यावरण की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले हरे भरे पेड़ पौधे तमाम कवायदों के बाद भी दिन प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं।कारण लक़ड़कट्टा पुलिस व वन विभाग का गठजोड़ हावी है और विभागीय उदासीनता का परिणाम है कि हरे पेड़ों की बेखौफ कटाई की जा रही है। जितने पेड़ कट रहे उसकी तुलना में पौधारोपण व पेड़ों का संरक्षण नहीं हो रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार करोड़ों का बजट देकर हरे पेड़ों को लगाने और संरक्षित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।वहीं जनपद लखीमपुर खीरी  में शारदा नगर रेंज के वीट उसिया के गांव कलीकापुरवा में आधा दर्जन हरेभरे, पेड़ काट  डाले जा रहें हैं। हरे भरे जामुन व शीशम आदि प्रतिबंधित पेड़ों पर आरा चलाया जा रहा है इसके बावजूद  लकड़ी ठेकेदारों के खिलाफ   तहसील प्रशासन व वन विभाग शारदा नगर रेंज व पुलिस शारदा नगर  द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होना चर्चा का विषय बना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:09:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वन माफिया का कहर: प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई पर भी नहीं जागा प्रशासन</title>
                                    <description><![CDATA[<h3><strong>सरकारी जमीन पर प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की कटाई, अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप</strong></h3>
<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा।-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p>विकास खंड पंडरी कृपाल की ग्राम पंचायत सोनापार के सिरहना स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास सरकारी भूमि पर खड़े प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की खुलेआम कटान से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वन माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से दिनदहाड़े हरियाली का सौदा किया जा रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी जमीन पर वर्षों से खड़े हरे-भरे गूलर के पेड़ों को बिना किसी वैधानिक अनुमति के काटा जा रहा है। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172008/saw-banned-on-government-land-sycamore-trees-are-being-cut"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-01-at-16.25.45.jpeg" alt=""></a><br /><h3><strong>सरकारी जमीन पर प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की कटाई, अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप</strong></h3>
<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा।-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p>विकास खंड पंडरी कृपाल की ग्राम पंचायत सोनापार के सिरहना स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास सरकारी भूमि पर खड़े प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की खुलेआम कटान से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वन माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से दिनदहाड़े हरियाली का सौदा किया जा रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी जमीन पर वर्षों से खड़े हरे-भरे गूलर के पेड़ों को बिना किसी वैधानिक अनुमति के काटा जा रहा है। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ले जाया जा रहा है, लेकिन वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/whatsapp-image-2026-03-01-at-16.25.45-(1).jpeg" alt="सरकारी जमीन पर प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की कटाई, अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप" width="1280" height="800"></img></p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की कटाई की सूचना संबंधित अधिकारियों को दी गई, इसके बावजूद कोई भी अधिकारी मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है और वे इसे प्रशासनिक संरक्षण में हो रही अवैध कटाई बता रहे हैं।</p>
<p>क्षेत्र में चर्चा है कि लकड़ी माफिया सरकारी संपत्ति को ठिकाने लगाकर पर्यावरण और राजस्व दोनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।</p>
<p>ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों और शासन स्तर तक की जाएगी।</p>
<p>इस संबंध में क्षेत्रीय रेंजर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:54:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आराजी डूही धरमूपुर मुस्तहकम में बिना परमिट नीम के पेड़ की हुई कटान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के थाना दुबौलियाके कप्तानगंज वन रेंज के अंतर्गत विकासखंड दुबौलिया क्षेत्र के ग्राम पंचायत आराजी डूही धरमूपुर मुस्तहकम में बिना परमिट के नीम के पेड़ की कटान हुई है । बिना परमिट के नीम के पेड़ की कटान की सूचना पर पहुंची वन विभाग कप्तानगंज की टीम ने जांच पड़ताल किया और कटी लकड़ी को कब्जे में ले लिया है आपको बता दें कि डीएफओ बस्ती डा० शरीन ने जिले में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियोंको कड़ा निर्देश दिया है कि बिना परमिट के हरे पेड़ की कटान न हो यदि किसी के क्षेत्र में बिना परमिट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161767/cutting-of-neem-tree-without-permit-in-araji-doohi-dharamupur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251125-wa0196-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के थाना दुबौलियाके कप्तानगंज वन रेंज के अंतर्गत विकासखंड दुबौलिया क्षेत्र के ग्राम पंचायत आराजी डूही धरमूपुर मुस्तहकम में बिना परमिट के नीम के पेड़ की कटान हुई है । बिना परमिट के नीम के पेड़ की कटान की सूचना पर पहुंची वन विभाग कप्तानगंज की टीम ने जांच पड़ताल किया और कटी लकड़ी को कब्जे में ले लिया है आपको बता दें कि डीएफओ बस्ती डा० शरीन ने जिले में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियोंको कड़ा निर्देश दिया है कि बिना परमिट के हरे पेड़ की कटान न हो यदि किसी के क्षेत्र में बिना परमिट हरे पेड़ों की कटान कटान हुई तो संबंधित वन विभाग के अधिकारी / कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीएफओ के कड़े निर्देश के बाद जिले में अवैध हरे पेड़ों की कटान कम हुई है लेकिन दुबौलिया क्षेत्र में लकड़ी माफिया चोरी चोरी हरे पेड़ों की कटान करने में सफल है ।ग्राम पंचायत आराजी डूही धरमूपुर मुस्तहकम में बिना परमिट के कटे नीम के पेड़ मामले में कप्तानगंज में वन विभाग की टीम ने पेड़ मलिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है । वन विभाग कप्तानगंज के कार्रवाई से लकड़ी माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है । उक्त प्रकरण में वन क्षेत्राधिकारी कप्तानगंज राजू प्रसाद ने फोन के माध्यम से बताया कि मामला संज्ञान में नहीं था कि मामले का संज्ञान होते ही वन विभाग के कर्मचारियों को कार्यवाही हेतु निर्देश दे दिया गया है । जांच पड़ताल के बाद बिना परमिट के नीम के कटान मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Nov 2025 17:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में वृक्षों की गणना का आदेश दिया।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) में वृक्षों की गणना का आदेश दिया।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने TTZ प्राधिकरण को क्षेत्र में सभी मौजूदा पेड़ों का सर्वेक्षण करने के लिए वन अनुसंधान संस्थान (FRI) को नियुक्त करने का निर्देश दिया।</div>
<div>  </div>
<div>अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 1976 का अधिनियम पेड़ों की सुरक्षा के लिए है। इसके प्रावधान - जैसे कि कटाई से पहले अनुमति लेना और उल्लंघन के लिए दंड लगाना - केवल तभी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149506/the-supreme-court-ordered-the-calculation-of-trees-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(10)1.jpg" alt=""></a><br /><div>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) में वृक्षों की गणना का आदेश दिया।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने TTZ प्राधिकरण को क्षेत्र में सभी मौजूदा पेड़ों का सर्वेक्षण करने के लिए वन अनुसंधान संस्थान (FRI) को नियुक्त करने का निर्देश दिया।</div>
<div> </div>
<div>अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 1976 का अधिनियम पेड़ों की सुरक्षा के लिए है। इसके प्रावधान - जैसे कि कटाई से पहले अनुमति लेना और उल्लंघन के लिए दंड लगाना - केवल तभी लागू किए जा सकते हैं, जब मौजूदा पेड़ों का सटीक रिकॉर्ड हो।</div>
<div> </div>
<div>आदेश में कहा गया,“जब तक मौजूदा पेड़ों का डेटा उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक प्रावधानों को लागू नहीं किया जा सकता। डेटा तभी उपलब्ध कराया जा सकता है जब उचित वृक्ष गणना की जाए। वृक्ष गणना के बिना 1976 के अधिनियम के प्रावधानों का कोई प्रभावी कार्यान्वयन नहीं हो सकता। इसलिए हम TTZ प्राधिकरण को वन अनुसंधान संस्थान (FIR) को TTZ के क्षेत्र में सभी मौजूदा पेड़ों की वृक्ष गणना करने के लिए प्राधिकरण के रूप में नियुक्त करने का निर्देश देते हैं।”</div>
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<div>TTZ प्राधिकरण को एक सप्ताह के भीतर FIR की नियुक्ति का औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया गया। न्यायालय ने FIR को नोटिस भी जारी किया, जिसमें जनगणना करने की प्रक्रिया और समय-सीमा को रेखांकित करते हुए हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा गया। यदि FIR को विशेषज्ञ सहायता की आवश्यकता होती है तो वह नामों का प्रस्ताव कर सकता है और न्यायालय उचित निर्देश जारी करेगा। हलफनामा मार्च 2025 के अंत तक दायर किया जाना चाहिए। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि सभी स्थानीय प्राधिकरण, राज्य सरकार और TTZ प्राधिकरणों को वृक्ष गणना करने में FIR के साथ पूर्ण सहयोग करना चाहिए।</div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट TTZ में वृक्ष आवरण और अवैध वृक्ष कटाई के मुद्दे पर बारीकी से निगरानी कर रहा है। 22 नवंबर, 2025 को न्यायालय ने पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में अनधिकृत रूप से वृक्षों की कटाई को रोकने के लिए वृक्ष गणना और सतर्कता तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया था। खंडपीठ ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की जांच के लिए एक अलग समिति के गठन की मांग करने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया था।</div>
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<div>पिछली सुनवाई के दौरान, आवेदक के वकील ने चार वर्षों में वन क्षेत्र में 9 प्रतिशत की कमी का हवाला दिया और बताया कि काटे गए कई पेड़ों को उत्तर प्रदेश सरकार के दिशानिर्देशों के तहत “सुरक्षित पेड़” के रूप में नामित किया गया। एमिक्स क्यूरी के रूप में कार्य कर रहे सीनियर एडवोकेट एडीएन राव ने सुझाव दिया कि पेड़ों की गणना करने के अलावा, संबंधित क्षेत्र के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को अनधिकृत पेड़ों की कटाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया जाना चाहिए।</div>
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<div>एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पहले अदालत को सूचित किया कि अवैध रूप से पेड़ों की कटाई के मामलों में FIR दर्ज की गई और सुझाव दिया कि या तो वन विभाग या केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) जनगणना कर सकती है।</div>
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<div>न्यायालय ने बार-बार पेड़ों की गणना की आवश्यकता को रेखांकित किया है।जस्टिस ओक ने पिछली सुनवाई में कहा,“आज, इस बारे में कोई डेटा नहीं है कि कितने पेड़ उपलब्ध हैं, कितने पेड़ मौजूद हैं। वह डेटा एकत्र किया जाना है।”</div>
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<div>न्यायालय ने कृषि वानिकी गतिविधियों के लिए पेड़ों की कटाई से पहले अनुमति लेने की आवश्यकता से छूट देने की याचिका पर भी विचार किया।जस्टिस ओक ने सवाल किया कि क्या कृषि वानिकी को पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता से छूट देने का कोई आधार है।उन्होंने पूछा,"यहां तक कि तथाकथित कृषि वानिकी के लिए भी यदि आप पेड़ों को काटना चाहते हैं तो आपको अनुमति लेनी होगी। छूट का सवाल कहां है?"उन्होंने आगे कहा,"हम यहां बैठे हैं। यदि कोई मामला बनता है तो हम पेड़ों की कटाई की अनुमति देंगे। हम नहीं जानते कि कृषि वानिकी क्या है। ये सभी सापेक्ष शब्द हैं।"</div>
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<div>एडवोकेट किशन चंद जैन ने प्रस्तुत किया कि कानून कुछ श्रेणियों के पेड़ों को पूर्व अनुमति की आवश्यकता से छूट देता है। उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश का भी हवाला दिया। हालांकि, जस्टिस ओक ने कहा कि अनुमति अभी भी आवश्यक होगी और उन्होंने कहा कि "कृषि वानिकी" शब्द अस्पष्ट है। उन्होंने कहा, "ये सभी सापेक्ष शब्द हैं।"</div>
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<div>अदालत ने आवेदक को नोटिस जारी कर पूछा कि 11 दिसंबर, 2019 के आदेश को वापस क्यों नहीं लिया जाना चाहिए। जस्टिस ओक ने टिप्पणी की कि यह आदेश पेड़ों की अप्रतिबंधित कटाई की अनुमति देता प्रतीत होता है।</div>
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<div>उन्होंने कहा,"इससे सभी को पेड़ों को काटने की अनुमति मिल जाएगी। यह उद्योग क्या है, कोई नहीं जानता। हम यह जानकर हैरान हैं कि यह आदेश इस अदालत के सभी अन्य आदेशों को खत्म कर देता है। हम पेड़ों को बचाने के लिए इतना समय दे रहे हैं। यह निर्देश दूसरी तरफ आता है और चला जाता है। कृषिविदों की कुछ लॉबी है। वे यह सब कर रहे हैं। किसी ने इसे परिभाषित नहीं किया है।"</div>
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<div>अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि 8 मई, 2015 का आदेश, जिसमें यह शर्त लगाई गई कि TTZ प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेगा कि TTZ क्षेत्र के भीतर पेड़ों की कटाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना न हो, लागू रहेगा। इसने यह भी फैसला सुनाया कि कृषि वानिकी के लिए 1976 के अधिनियम के प्रावधान लागू रहेंगे, जिसका अर्थ है कि आवश्यक अनुमति अभी भी प्राप्त की जानी चाहिए किसी भी पेड़ को काटने से पहले।</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 07 Mar 2025 12:13:10 +0530</pubDate>
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