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                <title>राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाएगी सरकार, किरेन रिजिजू बोले- बिना सबूत लगाए आरोप राजनीतिक हलचल तेज</title>
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                        <![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने का फैसला किया है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सदन में बिना किसी ठोस सबूत के सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर और भ्रामक आरोप लगाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किरन रिजिजू ने बताया कि सदन में उन्होंने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में सबूत देने का अनुरोध किया था, लेकिन वे ऐसा करने में</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169180/government-will-bring-breach-of-privilege-notice-against-rahul-gandhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong></h4>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने का फैसला किया है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सदन में बिना किसी ठोस सबूत के सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर और भ्रामक आरोप लगाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किरन रिजिजू ने बताया कि सदन में उन्होंने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में सबूत देने का अनुरोध किया था, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे। इसके बावजूद उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री पर देश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने देश के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है और भारत को “बेचने” जैसी बातें कही थीं। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए भी कुछ गंभीर आरोप लगाए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि ये आरोप तथ्यहीन, निराधार और सदन की मर्यादा के खिलाफ हैं। ऐसे में यह संसद के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>किरेन रिजिजू का बयान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा—</strong></p>
<blockquote>
<blockquote class="format2">“राहुल गांधी ने बिना किसी तर्क, बिना सबूत और बिना पूर्व सूचना के सदन में आरोप लगाए। यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार पर झूठे और भ्रामक आरोप लगाए, जो स्वीकार्य नहीं हैं।”</blockquote>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी के भाषण में कई असंसदीय शब्दों और गलत बयानों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।</p>
<blockquote>
<p>“उन्होंने कहा कि किसी ने इंडिया बेच दिया और किसी ने इंडिया खरीद लिया। यह पूरी तरह गलत और भ्रामक है। इस देश को न कोई बेच सकता है और न कोई खरीद सकता है।”</p>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>स्पीकर के सामने नोटिस दाखिल होगा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रिजिजू ने बताया कि वह इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि किसी सांसद द्वारा बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने कहा—</strong></p>
<blockquote>
<blockquote class="format2">“हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर लगाए गए आरोप भी गंभीर हैं और पूरी तरह निराधार हैं। यह विशेषाधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।”</blockquote>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भाषण से हटाए जाएंगे विवादित अंश</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार का दावा है कि राहुल गांधी के भाषण के उन हिस्सों को संसद की कार्यवाही से हटाया जाएगा, जिनमें असंसदीय शब्दों और गलत आरोपों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें झूठे बयान, तथ्यहीन आरोप और आपत्तिजनक शब्द शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक हलचल तेज</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष इसे सरकार की आलोचना को दबाने की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आगे क्या?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका अहम होगी। अध्यक्ष नोटिस पर विचार करने के बाद तय करेंगे कि विशेषाधिकार समिति को मामला भेजा जाए या नहीं। यदि नोटिस स्वीकार होता है, तो राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर संसद में टकराव और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/ANI/status/2021518703393976455?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2021518703393976455%7Ctwgr%5Eb31edc9d0b959c204ab54877e27686239696c3d1%7Ctwcon%5Es1_&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.news24online.com%2Findia%2Fgovt-to-bring-motion-against-rahul-gandhi%2F1503134%2F">https://twitter.com/ANI/status/2021518703393976455?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2021518703393976455%7Ctwgr%5Eb31edc9d0b959c204ab54877e27686239696c3d1%7Ctwcon%5Es1_&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.news24online.com%2Findia%2Fgovt-to-bring-motion-against-rahul-gandhi%2F1503134%2F</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:15:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नेहरू का लेटर सामने आते ही गरमाई सियासत, निशिकांत दुबे बोले– ‘कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा’</title>
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                        <![CDATA[<h2>‘कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा…’, नेहरू का लेटर शेयर कर बोले निशिकांत दुबे, सियासी घमासान तेज</h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद में राहुल गांधी द्वारा शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’ अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर सड़क तक पहुंच गया है। इस विवाद ने अब और तूल पकड़ लिया है, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया।</p>
<p>इस पोस्ट के साथ निशिकांत दुबे ने लिखा, <strong>“कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा, कांग्रेस की लंका में आग लग जाएगी?”</strong> जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।</p>
<h3>संसद से शुरू</h3>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168239/politics-heated-up-as-soon-as-nehrus-letter-came-out"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/nishikant.jpg" alt=""></a><br /><h2>‘कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा…’, नेहरू का लेटर शेयर कर बोले निशिकांत दुबे, सियासी घमासान तेज</h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद में राहुल गांधी द्वारा शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’ अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर सड़क तक पहुंच गया है। इस विवाद ने अब और तूल पकड़ लिया है, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया।</p>
<p>इस पोस्ट के साथ निशिकांत दुबे ने लिखा, <strong>“कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा, कांग्रेस की लंका में आग लग जाएगी?”</strong> जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।</p>
<h3>संसद से शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’</h3>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा था। इसके जवाब में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे गांधी परिवार पर लिखी गई कुछ विवादित किताबें लेकर संसद पहुंचे, जिनमें आपत्तिजनक बातें होने का दावा किया गया।</p>
<p>इसके बाद सदन में तीखी बहस देखने को मिली, जो अभी तक थमती नजर नहीं आ रही है।</p>
<h3>नेहरू का पत्र शेयर कर कांग्रेस पर निशाना</h3>
<p>अब इस सियासी विवाद को आगे बढ़ाते हुए निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर जवाहरलाल नेहरू का एक पुराना पत्र साझा किया है। उनके मुताबिक यह पत्र 30 जनवरी 1961 का है, जो नेहरू ने जनरल केएम करिअप्पा को लिखा था।</p>
<p>इस पत्र में नेहरू ने लिखा था—</p>
<blockquote>
<p>“माय डियर करिअप्पा, मुझे आपके 26 और 27 जनवरी के दो पत्र मिले। यह अच्छी बात होगी अगर आप एडविना माउंटबेटन मेमोरियल फंड की मदद के लिए कोई डांस प्रोग्राम या शो आयोजित करें, लेकिन मुझे डर है कि मैं बैंगलोर में ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाऊंगा।”</p>
</blockquote>
<p>इस पत्र को साझा करते हुए दुबे ने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर परोक्ष रूप से सवाल खड़े किए हैं।</p>
<h3>सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस</h3>
<p>निशिकांत दुबे के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। बीजेपी समर्थक इसे कांग्रेस पर हमला बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे बेवजह का विवाद करार दे रहे हैं।</p>
<p>ट्विटर (X), फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।</p>
<h3>कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार</h3>
<p>फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।</p>
<h3>निष्कर्ष</h3>
<p>संसद में शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’ अब सोशल मीडिया और आम जनता तक पहुंच चुका है। नेहरू के पत्र को लेकर छिड़ा नया विवाद राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है। अब सबकी नजरें कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 19:19:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat]]>
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            <item>
                <title>ड्यूटी के दबाव में महिला वीएलओ की मौत, कांग्रेस प्रवक्ता ने उठाए गंभीर सवाल</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>देवरिया।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि निर्वाचन कार्य में लगी महिला वीएलओ रंजू दुबे पर अनर्गल दबाव बनाया गया, जिसके चलते मानसिक व शारीरिक तनाव बढ़ने से उनकी कल मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और दबावपूर्ण कार्यशैली इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय शुक्रवार को रुद्रपुर के मांझा नारायनपुर स्थित रंजू दुबे के पैतृक गांव पहुंच रहे हैं। उनके साथ कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना देने और पूरे प्रकरण की</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161887/female-vlo-dies-under-pressure-of-duty-congress-spokesperson-raises"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/screenshot_20251008_163247_gallery.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देवरिया।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि निर्वाचन कार्य में लगी महिला वीएलओ रंजू दुबे पर अनर्गल दबाव बनाया गया, जिसके चलते मानसिक व शारीरिक तनाव बढ़ने से उनकी कल मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और दबावपूर्ण कार्यशैली इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय शुक्रवार को रुद्रपुर के मांझा नारायनपुर स्थित रंजू दुबे के पैतृक गांव पहुंच रहे हैं। उनके साथ कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना देने और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग करने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि जिस तरह से सरकारी कर्मचारियों पर चुनावी कार्यों के दौरान दबाव डाला जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा, आश्रित को नौकरी तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने भी बताया कि रंजू दुबे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी दबाव और अतिरिक्त कार्यभार से परेशान थीं। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों की स्थिति है। प्रशासन की ओर से अभी तक मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 18:46:18 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]>
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                <title>बेमौसम बरसात से फसलों को नुकसानः कांग्रेस ने किया मुआवजा देने की मांग,सौंपा ज्ञापन</title>
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                        <![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बेमौसम बरसात से फसलों को हुये नुकसान के मामले में किसानों  को समुचित मुआवजा दिलाये जाने की मांग किया। ज्ञापन देने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि बेमौसम बरसात के कारण धान, आलू, तिलहन और हरी सब्जियों को बहुत नुकसान हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">किसान परेशान है ऐसे में सरकार तत्काल प्रभाव से किसानों को समुचित मुआवजा उपलब्ध कराये। कांग्रेस नेता देवेन्द्र श्रीवास्तव, सुरेन्द्र मिश्र, गिरजेश पाल, साधू शरन आर्य, मो. रफीक, संदीप श्रीवास्तव, अलीम</div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158955/damage-to-crops-due-to-unseasonal-rains-congress-submitted-memorandum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251104-wa0153-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बेमौसम बरसात से फसलों को हुये नुकसान के मामले में किसानों  को समुचित मुआवजा दिलाये जाने की मांग किया। ज्ञापन देने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि बेमौसम बरसात के कारण धान, आलू, तिलहन और हरी सब्जियों को बहुत नुकसान हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान परेशान है ऐसे में सरकार तत्काल प्रभाव से किसानों को समुचित मुआवजा उपलब्ध कराये। कांग्रेस नेता देवेन्द्र श्रीवास्तव, सुरेन्द्र मिश्र, गिरजेश पाल, साधू शरन आर्य, मो. रफीक, संदीप श्रीवास्तव, अलीम अख्तर, शौकत अली नन्हू, लक्ष्मी यादव, वाहिद अली सिद्दीकी आदि ने कहा कि जिलाधिकारी फसलों के नुकसान का आकलन कराकर शासन और सरकार को रिपोर्ट भेंजे जिससे धान, आलू, तिलहन और हरी सब्जियों से हुये नुकसान की भरपाई हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से इम्तियाज अहमद, गुड्डू सोनकर, अवधेश सिंह, राकेशमणि त्रिपाठी, विश्वजीत, दूधनाथ पटेल, रामबचन भारती, शोभित चौधरी, शिमला देवी, कमलादेवी, लालजीत हलवान, मो. हसन, चन्द्रशेखर वर्मा, निशान्त चौधरी, दुर्गेश चौधरी, आशुतोष कुमार पाण्डेय, राजकुमार, मनीष दूबे, मो. अकरम, आनन्द निषाद, शव्वीर अहमद, बब्लू शुक्ला, सर्वेश शुक्ला के साथ ही कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी शामिल रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]>
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                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 18:38:03 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड चुनाव आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया, कांग्रेस बोली- वोट चोरी पर अदालती मुहर</title>
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                        <![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उतराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156030/supreme-court-imposed-a-fine-of-two-lakh-rupees-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/supream-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उतराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से इनकार कर दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका नाम दो या ज़्यादा जगह वोटर लिस्ट में शामिल था। आयोग का यह फैसला उत्तराखंड हाकोर्ट के आदेश के खिलाफ था। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को वैधानिक प्रावधान मानने के लिए कहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया। राज्य चुनाव आयोग ने एक सर्कुलर जारी कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों के नाम कई मतदाता सूचियों में दर्ज हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने आयोग के उस सर्कुलर पर रोक लगा दिया था। राज्य चुनाव आयोग ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आज राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को कानून के उल्लंघन पर 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश पारित किया। जस्टिस नाथ ने आयोग के वकील से सवाल किया कि आप कैसे वैधानिक प्रावधान के विपरीत निर्णय ले सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया था कि कई मामलों में ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जा रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस फैसले पर कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि उत्तराखंड में वोट चोरी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। सप्पल ने कहा कि सवाल है कि चुनाव आयोग ने ऐसा किया क्यों</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल जनवरी में उत्तराखंड में अर्बन लोकल बॉडी यानी म्युनिसिपल चुनाव हुए। चुनाव में बीजेपी ने अपने लोगों को गांव से शहर की वोटर लिस्ट में शिफ्ट कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि फर्जी वोटिंग से वो चुनाव जीत सकें। चुनाव पूरे होने के बाद बीजेपी ने अपने लोगों को वापस गांव की वोटर लिस्ट में शिफ्ट करना शुरू किया ताकि मई-जून में होने वाले पंचायत चुनाव में वोटिंग में नाजायज फायदा ले सके। हमने इसे पकड़ लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सप्पल ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने चुनाव आयोग को बार-बार लिखा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। हमने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए कम से कम 6 महीने उसी पते पर रहने का नियम है। 6 महीने से कम समय में कोई भी वोटर दोबारा अपना नाम शिफ्ट नहीं कर सकता है। कांग्रेस के विरोध के कारण बीजेपी के लोग वापस ग्रामीण एरिया में अपना नाम शामिल नहीं करवा सके। तो उन्होंने क्या करना शुरू किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने नाम शिफ्ट करने की जगह नए सिरे से अपना नाम दूसरी जगह जुड़वा लिया। अब वो दो-दो जगह के वोटर हो गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गुरदीप सिंह सप्पल ने आगे कहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी के ऐसे लोगों को जब चुनाव में टिकट मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमारे लोगों ने चुनाव आयोग से कहा कि ऐसे लोगों का नॉमिनेशन रद्द होना चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग ने अपने ही नियम को मानने से मना कर दिया। इसीलिए लोग हाईकोर्ट में गए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि उत्तराखंड पंचायती राज कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2016 की धारा 9(6) और 9(7) के अनुसार ऐसे उम्मीदवारों का नॉमिनेशन रद्द किया जाए। लेकिन उत्तराखंड चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश को ही मानने से मना कर दिया और बीजेपी के लोगों को दो-दो जगह वोटर होने के बावजूद चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी! इसीलिए आज सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर ही पेनल्टी लगा दी है। वोट चोरी की इस दास्तान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपनी मुहर लगा दी है।</span></p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 18:21:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संविधान पर हो रहा वैचारिक हमला- सोनिया गांधी का सरकार पर आरोप।</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि देश का संविधान खतरे में है और भाजपा उसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक आर्थिक और धार्मिक तानाशाही स्थापित करने के इरादे से संविधान की मूल भावना पर हमला कर रही है। सोनिया गांधी का यह संदेश दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय विधिक संगोष्ठी 'संवैधानिक चुनौतियां - दृष्टिकोण और मार्ग' में पढ़ा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर संविधान की रक्षा करेगी - संसद में, अदालतों में और</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153660/constituent-ideological-attack-on-the-constitution-sonia-gandhis-charge-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि देश का संविधान खतरे में है और भाजपा उसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक आर्थिक और धार्मिक तानाशाही स्थापित करने के इरादे से संविधान की मूल भावना पर हमला कर रही है। सोनिया गांधी का यह संदेश दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय विधिक संगोष्ठी 'संवैधानिक चुनौतियां - दृष्टिकोण और मार्ग' में पढ़ा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर संविधान की रक्षा करेगी - संसद में, अदालतों में और सड़कों पर भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि, 'आज संविधान घिरा हुआ है। भाजपा-आरएसएस, जिन्होंने न तो स्वतंत्रता संग्राम लड़ा और न ही समानता का सिद्धांत अपनाया, अब वही लोग सत्तासीन होकर उस संविधान की नींव को खत्म कर रहे हैं जिसका वे हमेशा विरोध करते रहे।' उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस के विचारक मनुस्मृति का गुणगान करते हैं, तिरंगे को नकारते हैं और 'हिंदू राष्ट्र' की कल्पना करते हैं जहां लोकतंत्र कमजोर और भेदभाव ही कानून बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया, असहमति को अपराध बना दिया, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया, और दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और गरीबों के साथ धोखा किया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब संविधान से समाजवाद और पंथनिरपेक्षता जैसे शब्दों को हटाने की कोशिश कर रही है, जो बाबा साहेब आंबेडकर के समान नागरिकता के सपने की बुनियाद हैं। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और उनकी टीम को इस महत्वपूर्ण चर्चा को शुरू करने के लिए बधाई दी और कहा कि कांग्रेस का मिशन स्पष्ट है, गणराज्य की पुनर्रचना करना और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र की नैतिक नींव है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर आधारित है। उन्होंने बताया कि संविधान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सोच और संघर्ष का परिणाम है। 1928 के नेहरू रिपोर्ट से लेकर 1934 में संविधान सभा की मांग तक, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नींव रखी, और बाबा साहेब आंबेडकर ने इसे रूप दिया। 'आंबेडकर ने चेतावनी दी थी कि अगर सामाजिक और आर्थिक न्याय नहीं मिला, तो राजनीतिक लोकतंत्र सिर्फ एक दिखावा बन जाएगा। कांग्रेस ने इसे समझा और उस पर अमल किया, अधिकार बढ़ाए, संस्थाएं मजबूत कीं और सम्मान और समावेशिता को बढ़ावा दिया।'</div>]]>
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                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 21:54:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>देश लौटे 'फ्रीक्वेंट फ्लायर' पीएम, अब मणिपुर और बुनियादी ढांचे पर दें ध्यान', कांग्रेस की मोदी को नसीहत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>प्रयागराज ।</strong> कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मोदी की पांच देशों की आधिकारिक यात्रा संपन्न होने के बाद बृहस्पतिवार को तंज भरे लहजे में कहा कि अब वह चाहें तो मानसून सत्र का एजेंडा तय करने के लिए सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने के साथ हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने, पहलगाम के आतंकवादियों को अब तक न्याय के कठघरे में क्यों नहीं लाया गया है, इसकी समीक्षा करने और अपने गृह राज्य में लगातार गिरते-ढहते, नाकाम होते बुनियादी ढांचे पर विचार करने के लिए समय निकाल सकते हैं।</div>
<div>  </div>
<div>प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153073/frequent-flyer-pm-returned-to-the-country-now-pay-attention"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/download.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>प्रयागराज ।</strong> कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मोदी की पांच देशों की आधिकारिक यात्रा संपन्न होने के बाद बृहस्पतिवार को तंज भरे लहजे में कहा कि अब वह चाहें तो मानसून सत्र का एजेंडा तय करने के लिए सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने के साथ हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने, पहलगाम के आतंकवादियों को अब तक न्याय के कठघरे में क्यों नहीं लाया गया है, इसकी समीक्षा करने और अपने गृह राज्य में लगातार गिरते-ढहते, नाकाम होते बुनियादी ढांचे पर विचार करने के लिए समय निकाल सकते हैं।</div>
<div> </div>
<div>प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के अलावा पांच देशों - घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया का दौरा किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘भारत अपने ‘सुपर प्रीमियम फ्रीक्वेंट फ्लायर’ प्रधानमंत्री का स्वागत करता है, जो शायद अगली विदेश यात्रा से पहले तीन हफ्तों के लिए देश में रहेंगे।’’ उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब जब वे देश में हैं, तो शायद उन्हें मणिपुर जाने का समय मिल जाए, जहां लोग दो साल से अधिक समय से उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>जयराम रमेश का कहना है, ‘‘वह यह भी समीक्षा कर सकते हैं कि पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के दोषियों को अब तक न्याय के कठघरे में क्यों नहीं लाया गया, अपने गृह राज्य में लगातार गिरते-ढहते, नाकाम होते बुनियादी ढांचे पर ध्यान दे सकते हैं, और बाढ़ से तबाह हिमाचल प्रदेश के लिए सहायता राशि मंजूर कर सकते हैं।’’</div>
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<div>रमेश ने कहा, ‘‘वह चाहें तो जीएसटी में व्यापक सुधार पर भी ध्यान दे सकते हैं, जिससे आम उपभोग को प्रोत्साहन मिल सके और कुछ खास बड़े कॉरपोरेट समूहों के अलावा बाकी निजी कंपनियों को भी निवेश के लिए प्रेरित किया जा सके।’’ उन्होंने कहा कि बदलाव के तौर पर वह मानसून सत्र के लिए एजेंडा तय करने के उद्देश्य से सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता भी कर सकते हैं।</div>
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<div>दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वडोदरा पुल हादसे को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह हादसा सरकार की उदासीनता, नेतृत्व संकट और भ्रष्टाचार का नतीजा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सिर्फ भाषण और विज्ञापनबाज़ी में व्यस्त बीजेपी नेतृत्व और सरकार उदासीनता की सारी हदें पार कर चुके हैं।</div>
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<div>उन्होंने यह दावा भी किया कि यह नेतृत्व संकट, चौतरफ़ा भ्रष्टाचार और सरकार चलाने की क्षमता में कमी का नतीजा है। अधिकारियों ने बताया कि वडोदरा में बुधवार सुबह लगभग चार दशक पुराने एक पुल का कुछ हिस्सा ढह जाने के कारण 13 लोगों की मौत हो गई।</div>
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<div>कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "देश में आए दिन दुर्घटनाएँ आम बात हो गई हैं। कभी रेल दुर्घटना, कहीं उद्घाटन के साथ ही पुल में दरार आना। अभी विमान दुर्घटना के हादसे से देश उबर नहीं पाया है कि कल गुजरात से पुल ढहने की खबर आ गई। 13 मासूम जानें चली गई। "</div>
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<div>उन्होंने पीड़ितों के परिजन के प्रति संवेदना प्रकट की। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "ख़बरों के अनुसार तीन साल पहले ही पुल हिलने से खतरनाक स्थिति की बात कही गई थी। फिर भी कुछ नहीं किया गया। 2021 से यह गुजरात में पुल गिरने की सातवीं घटना है। "</div>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 17:38:41 +0530</pubDate>
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                <title>अब चाय वाले सज्जन को उम्रकैद की सजा</title>
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                        <![CDATA[<p>भारत में सभी चाय बेचने वालों का नसीब एक जैसा नहीं होता ।  यदि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो दूसरा चायवाला सिख दंगों   के आरोप में 80  साल की उम्र में आजीवन   सजा भी पा सकता है। सवाल ये है कि एक बूढ़े आदमी को 41  साल सजा सुनाने वाली अदालत क्या सचमुच इसे एक सही फैसला मानती है। इस फैसले से न पीड़ितों को न्याय मिला और न आरोपी को सजा।</p>
<p>आज की अनुजवान पीढ़ी सज्जन कुमार को नहीं जानती होगी,इसलिए मैं पहले आपको सज्जन कुमार के बारे में बता देना जरूरी समझता हूँ।</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149064/now-tea-gentleman-sentenced-to-life-imprisonment"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/sajjn4.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में सभी चाय बेचने वालों का नसीब एक जैसा नहीं होता ।  यदि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो दूसरा चायवाला सिख दंगों   के आरोप में 80  साल की उम्र में आजीवन   सजा भी पा सकता है। सवाल ये है कि एक बूढ़े आदमी को 41  साल सजा सुनाने वाली अदालत क्या सचमुच इसे एक सही फैसला मानती है। इस फैसले से न पीड़ितों को न्याय मिला और न आरोपी को सजा।</p>
<p>आज की अनुजवान पीढ़ी सज्जन कुमार को नहीं जानती होगी,इसलिए मैं पहले आपको सज्जन कुमार के बारे में बता देना जरूरी समझता हूँ। सज्जन कुमार एक गरीब परिवार में .80  साल पहले यानि दिल्ली में 23 सितंबर, 1945 को जन्मे थे ,उनका बचपन भी आज के प्रधानमंत्री की तरह  चाय बेचकर गुजारा करने में कब बीत गया ,कोईनहीं जानता।कुमार ने सज्जन ने धीरे-धीरे कांग्रेस में अपनी घुसपैठ करनी शुरू की।  1970 के दशक में इमरजेंसी के दौर में सज्जन कुमार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के करीब आ गए, जिन्हें उस समय 'सुपर पीएम ' कहा जाता था. संजय गांधी के समर्थन से सज्जन कुमार ने दिल्ली नगरपालिका का चुनाव जीता. इसके बाद 1980 में लोकसभा चुनाव में सज्जन कुमार को दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे ब्रह्माप्रकाश के खिलाफ कांग्रेस ने टिकट दिया. इस चुनाव में जीतकर सांसद बनने के साथ सज्जन कुमार को रुतबा पूरे देश में जम गया था।</p>
<p> संजय गांधी ने अपने पांच सूत्रीय कार्यक्रम में सज्जन कुमार को अहम जिम्मेदारी दी थी. हालांकि संजय गांधी के असमय हवाई जहाज क्रैश में हुए निधन से सज्जन कुमार को झटका लगा, लेकिन इससे वे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीब आ गए थे। सज्जन कुमार को ही श्रीमती इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों का  सिख विरोधी दंगों को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड माना जाता है।</p>
<p> सज्जन कुमार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े केस में उम्रकैद की सजा सुनाई है. दंगों के दौरान सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया गया था।  सरस्वती विहार में 1 नवंबर 1984 को हुई इस हत्या में दिल्ली पुलिस  ने भादंस  की धारा 147, 148, 149, 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436 और 440 के तहत सज्जन कुमार को मास्टरमाइंड बनाते हुए केस दर्ज किया था।</p>
<p>हत्या के इस मामले में अभियोजन की कार्रवाई बेहद लचर ढंग से हुई ।  पुलिस ने जिस व्यक्ति को चश्मदीद गवाह बनाया वो पूरे 16  साल पुलिस को चराता रहा ।  उसने 16 साल बाद सज्जन कुमार के इस हिंसा में शामिल होने की पुष्टि की थी. हालांकि सज्जन कुमार के वकील ने इसका ही आधार बनाते हुए अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया था।  सज्जन कुमार ने भी 1 नवंबर 2023 को कोर्ट में इस मामले में गवाही में खुद को निर्दोष बताया था।</p>
<p> इस मामले में अभियोजन की तरफ से कोर्ट में दी गई दलीलों में इसे निर्भया केस से भी ज्यादा संगीन मामला बताया गया था, जिसमें समुदाय विशेष के लोगों को टारगेट करके किलिंग की गई थी. सिख विरोधी हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए अभियोजन ने इस मामले में सज्जन कुमार को फांसी की सजा सुनाए जाने की मांग की थी.। सवाल ये है कि  हमारे देश की न्याय-व्यवस्था हत्या जैसे मामले में यदि आरोपी को सजा सुनाने में 41 साल लग जाते हैं तो हम अपनी न्याय व्यवस्था के प्रति आस्था कैसे रख सकते हैं। 80  साल की उम्र में यदि सज्जन कुमार जेल वापस लौटते भी हैं तो मृतक में परिजनों को कैसे संतोष मिलेगा ?</p>
<p>सज्जन कुमार के संगी-साथी अब उनके साथ नहीं है।  वे कांग्रेस के साथ नहीं है और वे कांग्रेस के साथ नहीं है। सज्जन कुमार के प्रति  मेरी सहानुभूति है। वे हत्यारे   थे या नहीं देश  की जनता जानती है। इस फैसले के बढ़ आप कह सकते हाँ की -हमारे यहां देर हैं लेकिन अंधेर नहीं है। हकीकत क्या है इसे दोनों चाय वाले समझते हैं ,सवाल ये भी है की ये चाय वाले ही दंगों के आरोपी क्यों होते हैं ,की काफी शाप वला क्यों नहीं होता ? याद रखिये की सिख दंगों की जाँच ले लिए बने नानावटी आयोग के मुताबिक, 1984 के दंगों के संबंध में दिल्ली में कुल 587 fir दर्ज की गई थीं, जिसमें 2,733 लोग मारे गए थे।  </p>]]>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 18:02:34 +0530</pubDate>
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                <title>करनावल की घटना प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालः कांग्रेस</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>मथुरा। </strong>बारात के दौरान करनावल गांव में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जिला कांग्रेस कमेटी ने आलोचना की है। जिलाध्यक्ष भगवान सिंह वर्मा के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल करनावल गांव पहुंचा और पीड़ित परिवार से मुंलाकात की। कांग्रेस के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष चौधरी भगवान सिंह वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय रॉय निर्देश वह गांव करनावल गए थे। कहा कि 21 फरवरी को शादी के दिन असामाजिक तत्वों द्वारा की गई घटना समूचे समाज के लिए अपमानजनक व्यवहार है। कानून व्यवस्था की यह स्थिति भाजपा की योगी सरकार को आईना दिखाती है।</p>
<p>यह</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148994/question-of-karnawal-is-questioned-on-the-law-and-order"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/24-uphmathura-01.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मथुरा। </strong>बारात के दौरान करनावल गांव में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जिला कांग्रेस कमेटी ने आलोचना की है। जिलाध्यक्ष भगवान सिंह वर्मा के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल करनावल गांव पहुंचा और पीड़ित परिवार से मुंलाकात की। कांग्रेस के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष चौधरी भगवान सिंह वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय रॉय निर्देश वह गांव करनावल गए थे। कहा कि 21 फरवरी को शादी के दिन असामाजिक तत्वों द्वारा की गई घटना समूचे समाज के लिए अपमानजनक व्यवहार है। कानून व्यवस्था की यह स्थिति भाजपा की योगी सरकार को आईना दिखाती है।</p>
<p>यह प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल है। वारदात के बाद पुलिस के द्वारा कोई भी त्वरित कार्रवाई नहीं की गई। दोषियों की गिरफ्तारी के साथ ही पीड़ित परिवार को 50 लख रुपये का मुआवजा दिये जाने की मांग की। कांग्रेस के नगर निगम के महापौर पद के प्रत्याशी रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन सिंह ने कहा कि दलितों की हितैषी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी के राज में खुलेआम दलित परिवार की बेटियों के साथ जो गुंडागर्दी की गई है।</p>
<p>जिला उपाध्यक्ष प्रवीण भास्कर ने कहा कि गांव में तनाव बना हुआ है और यदि पुलिस ने पूरे मामले में सतर्कता नहीं बढ़ती तो दोबारा से कोई भी वारदात पीड़ित परिवार के साथ हो सकती है। कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल में विनोद चतुर्वेदी, ठाकुर बदन सिंह, राजू अब्बासी, सलीम अब्बासी, मुकेश सिसोदिया, लोकेश शर्मा, राम भरोसे चौधरी, राजकुमार तिवारी, विनोद आर्य, अजय कुमार, रवि कुमार, दीपक शर्मा, मनोज शर्मा आदि थे।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 18:10:42 +0530</pubDate>
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                <title>अपने ' रोल ' की तलाश करते शशि थरूर</title>
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                        <![CDATA[<p>पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वाचाल लेकिन विद्वान नेता शशि थरूर को मै एक नेता से ज्यादा एक लेखक के रूप में जानता हूँ और उनका सम्मान करता हूँ ।  आजकल शशि थरूर अपनी ही पार्टी में अपना ही ' रोल ; [भूमिका ] तलाश रहे हैं ।  उन्होंने अपनी ही पार्टी   से अपनी भूमिका को लेकर सवाल किये तो बवाल होना स्वाभाविक था।  बवाल शुरू भी हो गया है और अब मुझे लगता है कि यदि कांग्रेस ने शशि  थरूर के सवालों का जबाब न दिया तो शशि थरूर भी आने वाले दिनों में भाजपा के मंच पर शोभायमान</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148924/shashi-tharoor-looking-for-his-role"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/shshi1.jpg" alt=""></a><br /><p>पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वाचाल लेकिन विद्वान नेता शशि थरूर को मै एक नेता से ज्यादा एक लेखक के रूप में जानता हूँ और उनका सम्मान करता हूँ ।  आजकल शशि थरूर अपनी ही पार्टी में अपना ही ' रोल ; [भूमिका ] तलाश रहे हैं ।  उन्होंने अपनी ही पार्टी   से अपनी भूमिका को लेकर सवाल किये तो बवाल होना स्वाभाविक था।  बवाल शुरू भी हो गया है और अब मुझे लगता है कि यदि कांग्रेस ने शशि  थरूर के सवालों का जबाब न दिया तो शशि थरूर भी आने वाले दिनों में भाजपा के मंच पर शोभायमान हो सकते हैं।</p>
<p>केरल के सनातनी ब्राम्हण शशि थरूर हमेशा सुर्ख़ियों में रहने वाले नेता हैं।  वे संसद में रहें या संसद के बाहर ,सुर्ख़ियों में रहते है।  कभी अपने लेखों की वजह से तो कभी अपने भाषणों की वजह से तो कभी अपनी निजी जिंदगी की वजह से।  उनकी प्रेमिका को लेकर प्रधानमंत्री  तक जुमलेबाजी कर चुके हैं, लेकिन शशि थरूर की सेहत पर इन सबका कोई असर नहीं होता। शशि थरूर भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व राजनयिक हैं ।  शशि ने कांग्रेस के मंच से राजनीति शुरू की ,वे  2009   से केरल के तिरुवनन्तपुरम से लोक सभा सांसद हैं। इस समय भी शशि  विदेशी मामलों में संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में सेवारत हैं।</p>
<p>कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व से शशि थरूर की अनबन नयी नहीं है ,लेकिन अब लगता है कि  कांग्रेस का नेतृत्व  शशि का हिसाब करके मानेगा ।  दरअसल शशि को पार्टी हाई कमान ने उनकी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप न कोई काम दिया और न उनका ठीक तरह से इस्तेमाल किया है ,इसीलिए शशि कांग्रेस में अपने आपको अलग-थलग और उपेक्षित अनुभव कर रहे हैं। शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच तनातनी जारी है. हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई, लेकिन उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ।  लगता है कि   अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी थरूर को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है.</p>
<p>आपको बता दें कि  थरूर ने राहुल गांधी से अपनी भूमिका स्पष्ट करने की मांग की थी। उन्होंने ये भी जताया कि पार्टी में उन्हें दरकिनार किया जा रहा है, लेकिन इस बैठक में राहुल गांधी ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया जिससे थरूर और ज्यादा असंतुष्ट नजर आए। जहाँ तक मुझे लगता है कि   शशि थरूरअपने  बयानों और लेखों  की वजह से ही कांग्रेस नेतृत्व के निशाने पर हैं। . प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा और डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात को लेकर थरूर के विचार पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग थे।  शशि सफेद  को सफेद और काले को काला कहने के आदी है।  उन्होंने  केरल की एलडीएफ सरकार की औद्योगिक नीति की प्रशंसा करने वाला लेख लिखकर  केरल राज्य कांग्रेस से भी पंगा ले लिया है।</p>
<p>शशि थरूर की अपनी महत्वाकांक्षाएं हो सकतीं है।  मुमकिन है कि  वे केरल की राजनीति में ही अपने आपको समेटना चाहते हों ,हो सकता है की वे केंद्रीय राजनीति में अपने लिए युक्तिययुक्त भूमिका चाहते हों ,लेकिन पार्टी है कमान को शशि का खुलापन शायद रास नहीं आरहा है। 68  साल के शशि के पास अब इन्तजार करने का वक्त नहीं है। वे जल्द से जल्द अपनी भूमिका चाहते हैं। कांग्रेस शशि का इस्तेमाल न कर शायद गलती कर रही है।  कांग्रेस को ऐसी गलतियां करने की पुरानी आदत है। और कांग्रेस इसका खमियाजा भी भुगतती आ रही है ।  कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता इस समय भाजपा के मंच की शोभा बढ़ा रहे हैं।  मुझे आशंका है कि  यदि कांग्रेस ने समय रहते शशि थरूर के प्रश्नों  का समाधानकारक उत्तर न दिया तो किसी भी दिन शशि थरूर भी भाजपा के मंच पर खड़े नजर आ सकते हैं।</p>
<p>कांग्रेस शशि के खुलेपन की सजा पहले ही प्रवक्ता पद से हटाकर दे चुकी है। अब उन्हें और कितना दण्डित किया जा सकता है ? शशि कोई जन्मजात राजनीतिज्ञ नहीं हैं लेकिन उन्होंने स्वदेश आने के बाद जब राजनीति करने का मन बनाया तो वे कांग्रेस में शामिल हुए ।  उनके लिए दूसरे दलों में जाने के भी विकल्प थे किन्तु उन्होंने देश सेवा केलिए कांग्रेस को ही सर्वथा उचित मंच समझा। आज कांग्रेस ही उन्हें मूषक बना देना चाहती है। कांग्रेस में दूसरे दलों की तरह आंतरिक लोकतंत्र अब दिखावे का रह गया है। कांग्रेस में भी अब मन की बात करने की आजादी किसी को नहीं है।</p>
<p>शशि थरूर को समझना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है अन्यथा शशि कांग्रेस के पास एकमात्र ऐसा नेता है जो हिंदी,अंग्रेजी और मलयाली में न सिर्फ लिख-पढ़ और बोल सकता है बल्कि कांग्रेस के किसी भी दिग्गज से ज्यादा हाजिर जबाब है।  शशि सनातन का मुद्दा हो ,धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा हो या अर्थव्यवस्था का मुद्दा हो सभी पार पार्टी के दूसरे नेताओं से कहीं ज्यादा मजबूती के साथ बोलने की स्थिति में है। शायद उनकी यही प्रतिभा अब पार्टी में उनकी दुश्मन बन रही है।  मै ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि  शशि जहाँ हैं वहीं रहें।  शशि  का कांग्रेस से जाना देश की धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए एक बड़ा नुकसान होगा । शशि को भगवा दुपट्टा बदलने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। भाजपा को उनके जैसे विद्वान नेताओं की जरूरत हर समय रही है ,क्योंकि भाजपा के पास शाखामृग तो इफरात में हैं लेकिन शशि थरूर कम ही हैं।</p>
<p>शशि थरूर का निजी जीवन काफी उथल-पुथल वाला रहा है।  उन्होंने तीन विवाह किये । उनकी आखरी पत्नी सुनंदा पुष्कर का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया था। शशि के दो बेटे हैं,दोनों पत्रकार हैं। शशि को जानने के लिए आपको शशि थरूर के उपन्यास पढ़ना चाहिए। शशि की एक दर्जन से ज्यादा किताबें हैं।  उनका उपन्यास ' शो बिजनेस ' और ' मै हिन्दू क्यों हूँ ' विशेष तौर पर पठनीय है।  मै शशि थरूर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ । एक नेता के नाते नहीं बल्कि एक लेखक के नाते भी ।  वे किसीभी दल में रहें ,मेरे प्रिय लेखक और राजनेता रहेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 17:22:12 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                <title>पित्रोदा जी, देश जानना चाहता है—क्या चीन वाकई मित्र है?</title>
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                        <![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सैम पित्रोदा जी ने बड़े आत्मविश्वास के साथ घोषणा कर दी है—"चीन भारत का शत्रु नहीं है।" अब जब इतनी विलक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रबुद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावशाली और उच्चकोटि की हस्ती ने यह निर्णय सुना दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमें अपने अनुभवों और ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रश्नचिह्न लगाना ही होगा। गलवान घाटी में जो कुछ भी हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह निश्चय ही ‘मैत्रीपूर्ण संवाद’ की एक अनोखी शैली रही होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सैनिकों ने कूटनीतिक सौहार्द दिखाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। अरुणाचल और लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ भी संभवतः ‘संस्कृति और परंपराओं के आदान-प्रदान’ का ही एक अभिनव प्रयास था</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148742/pitroda-ji-wants-to-know-the-country-is-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/1-prof.-rkjain.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सैम पित्रोदा जी ने बड़े आत्मविश्वास के साथ घोषणा कर दी है—"चीन भारत का शत्रु नहीं है।" अब जब इतनी विलक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रबुद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभावशाली और उच्चकोटि की हस्ती ने यह निर्णय सुना दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमें अपने अनुभवों और ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रश्नचिह्न लगाना ही होगा। गलवान घाटी में जो कुछ भी हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह निश्चय ही ‘मैत्रीपूर्ण संवाद’ की एक अनोखी शैली रही होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सैनिकों ने कूटनीतिक सौहार्द दिखाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। अरुणाचल और लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ भी संभवतः ‘संस्कृति और परंपराओं के आदान-प्रदान’ का ही एक अभिनव प्रयास था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां मित्रता को नए आयाम देने के लिए टैंक और लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>1962 <span lang="hi" xml:lang="hi">का युद्ध</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह तो मात्र दो पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा ‘सीमाओं की कलात्मक पुनर्कल्पना’ का एक प्रयोग था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें चीन ने भारतीय भूभाग पर अधिकार जमाकर यह प्रदर्शित किया कि पड़ोसी होने का अर्थ क्या होता है! यह सब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शायद हमारे ऐतिहासिक तथ्यों की गलत व्याख्या का परिणाम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जब एक महान विभूति कह रही है कि चीन शत्रु नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अवश्य ही हमें अपने ज्ञान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझ और राष्ट्रभक्ति की परिभाषा पर पुनर्विचार करना चाहिए!</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पित्रोदा जी जैसे महान चिंतकों की विशिष्टता यही होती है कि वे धरातल की सच्चाई से कोसों दूर रहते हैं और अपनी विचारधारा को राजनीतिक समीकरणों की प्रयोगशाला में गढ़ते हैं। जब सीमा पर हमारे वीर जवान अपने प्राणों की आहुति देकर घुसपैठ रोक रहे होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब पित्रोदा जी अपने वातानुकूलित कक्ष में बैठकर ‘वैश्विक नागरिकता’ की कल्पनाओं में खोए रहते हैं। शायद उनके लिए राष्ट्रभक्ति का मोल अब सिर्फ़ ट्विटर पर ‘चीनी स्मार्टफोन’ से किए गए दिखावटी पोस्टों में ही सिमटकर रह गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मगर असली प्रश्न यह है कि यदि चीन हमारा शत्रु नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर शत्रु है कौन</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या वह किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या वह छात्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शिक्षा और रोजगार की माँग करता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अथवा वह आम नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सरकार से प्रश्न पूछने का दुस्साहस करता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना देखिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन लोगों को तो बिना किसी संकोच के ‘राष्ट्रविरोधी’ करार दे दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चीन के लिए ‘सहानुभूति’ और ‘भाईचारे’ का विशेष आरक्षण रखा जाता है! ऐसा प्रतीत होता है कि देशभक्ति की परिभाषाएँ अब सुविधा और स्वार्थ के तराजू पर तौली जाने लगी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि यही तर्क स्वीकार्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अगला उद्घोषणा शायद यह हो कि पाकिस्तान भी हमारा शत्रु नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मात्र एक ‘शरारती नटखट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पड़ोसी’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कभी-कभी नटखट हरकतें कर बैठता है! संभवतः भविष्य में इतिहास की किताबों में यह भी लिखा जाए कि </span>26/11 <span lang="hi" xml:lang="hi">का जघन्य आतंकी हमला ‘अतिथि देवो भव’ की भारतीय परंपरा के तहत हुआ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुलवामा में हमारे वीर जवानों का बलिदान मात्र ‘आपसी सौहार्द’ की एक दुर्भाग्यपूर्ण भूल-चूक थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनदेखा कर देना चाहिए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मगर प्रश्न यह है कि यदि चीन और पाकिस्तान हमारे ‘सखा’ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर नेपाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ सतत कूटनीतिक तनाव क्यों बना रहता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों हमारी सद्भावना उन्हीं देशों के लिए आरक्षित है जो हमारी संप्रभुता को चुनौती देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे भूभाग पर अतिक्रमण करते हैं और हमारे वीर सैनिकों के बलिदान का उपहास उड़ाते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या यह ‘मैत्री’ का नया प्रतिमान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें राष्ट्र के सम्मान को तिलांजलि देकर उन ताकतों को मित्र माना जाता है जो भारत की अखंडता पर निरंतर प्रहार करते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर शत्रुता और राष्ट्रहित की परिभाषा पर पुनर्विचार करना ही उचित होगा!</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक नया युग प्रारंभ हो चुका है—‘शत्रु के प्रति सहानुभूति और नागरिकों के प्रति कठोरता’ का। हमारी सेना सीमाओं पर अपने प्राणों की आहुति दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन देश के भीतर यदि कोई युवा शासन से प्रश्न पूछने का साहस कर ले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह तुरंत ‘देशद्रोही’ करार दे दिया जाता है। यह कैसा राष्ट्रवाद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश के सम्मान और सुरक्षा से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि व्यापारिक और राजनीतिक समीकरणों से संचालित होता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या अब देशभक्ति की परिभाषा भी सत्ता की सुविधा अनुसार बदल दी जाएगी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">शायद अब विद्यालयों में ‘राष्ट्रप्रेम’ की शिक्षा को परिवर्तित कर ‘राजनीतिक अनुकूलता’ के नए पाठ पढ़ाए जाने चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह समझ सकें कि असली देशभक्त वह नहीं जो राष्ट्र की रक्षा के लिए बलिदान दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वह है जो सत्ता के रुख के अनुसार अपने विचारों को मोड़ना जानता हो!</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह विचारणीय है कि जब भारत अपनी सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु कोई ठोस कदम उठाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब यही तथाकथित बुद्धिजीवी उसे ‘युद्धोन्माद’ का जामा पहना देते हैं। यदि हमारी सेना सीमा पर सतर्क रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे ‘अनावश्यक आक्रामकता’ का तमगा दे दिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु जब चीन अपने सैन्य विस्तार और सामरिक वर्चस्व को बढ़ाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे ‘वैश्विक शक्ति संतुलन’ का गौरवशाली नाम दे दिया जाता है। विडंबना यह है कि राष्ट्रभक्ति का यह नया सिद्धांत केवल भारत पर ही लागू होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शत्रु देशों पर नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पित्रोदा जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षमा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु देश की जागरूक जनता आपकी इस ‘नवाचारपूर्ण परिभाषा’ को सहज स्वीकार नहीं कर सकती। उन्हें अपने पुरखों और शहीदों ने यही सिखाया है कि जो हमारी सीमाओं पर अतिक्रमण करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे वीरों के रक्त से धरती को लाल करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही हमारा शत्रु है। परंतु अब प्रतीत होता है कि हमें इस मूल सत्य को छोड़कर ‘राजनीतिक सुविधा’ और ‘राजनयिक स्वार्थ’ के तराजू पर तोलकर यह निर्धारित करना होगा कि कौन मित्र है और कौन शत्रु! क्या यही राष्ट्रनीति का नवीन संस्करण है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर यह राष्ट्रवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अवसरवादिता की पराकाष्ठा है!</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब अगली बार युद्ध की लपटें आसमान तक उठें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंदूकों की गड़गड़ाहट में किसी वीर सपूत की अंतिम चीख दब जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या किसी मां की आंखों में तिरंगे में लिपटे बेटे के शव को देख आंसू पत्थर बन जाएं—तो ठहरकर एक बार जरूर सोचिएगा। यह धधकता ज्वालामुखी क्या वास्तव में राष्ट्रभक्ति की वेदी पर जलाया गया पवित्र अग्निकुंड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर यह सिर्फ वैश्विक व्यापार नीति के मोहरों की बिसात पर बिछी कोई रक्तरंजित चाल</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आज देशभक्ति केवल वीरगाथाओं में सिमटकर नहीं रह गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वह सत्ता के गलियारों में लिखी उन नीतियों की मोहताज बन गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो किसी सैनिक की शहादत से अधिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापारिक हितों और राजनीतिक समीकरणों को साधने में व्यस्त हैं। क्या यह युद्ध वास्तव में मातृभूमि की अस्मिता की रक्षा हेतु लड़ा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यह महज किसी आर्थिक और कूटनीतिक स्वार्थ का खूनी तांडव है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी कोई रणबांकुरा अपने प्राणों की आहुति दे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी किसी मां की कोख सूनी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब भी किसी बहन की राखी इंतजार में रह जाए—तब केवल शोक और गर्व में मत डूबिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि गहरी दृष्टि से देखिए कि यह बलिदान वाकई मातृभूमि की रक्षा के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर किसी छिपे हुए षड्यंत्र की अनकही पटकथा का एक और अध्याय</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आज राष्ट्रभक्ति की कसौटी रणभूमि में बहे रक्त से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सत्ता की चौखट पर लिखे निर्णयों से तय हो रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि राष्ट्र की जागरूक जनता अपनी दृष्टि को तीव्र करे और भली-भांति समझे कि कौन वास्तव में देशहित में चिंतन कर रहा है और कौन राष्ट्रवाद का मुखौटा ओढ़कर अपने स्वार्थपूर्ण एजेंडे को साधने में जुटा है। इतिहास साक्षी है कि जब तक जनमानस निर्भीक होकर सत्ता से प्रश्न करता रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक सत्य को कुचला नहीं जा सकेगा और राष्ट्र की अस्मिता पर कोई आंच नहीं आएगी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब हमें यह निर्णायक फैसला करना होगा—क्या हम अपने स्वाभिमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए अडिग रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर ‘वैश्विक नागरिकता’ के भ्रामक मायाजाल में फंसकर अपने गौरवशाली अस्तित्व को तिलांजलि दे देंगे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">और हां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पित्रोदा जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगला बयान देने से पहले कृपया यह भी स्पष्ट कर दीजिए कि ‘देशद्रोह’ की नई परिभाषा क्या होगी—ताकि राष्ट्र के जागरूक नागरिक यह जान सकें कि अब सत्य कहना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्पक्ष चिंतन करना और सत्ता से प्रश्न पूछना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनमें से क्या अगली साजिश के तहत अपराध घोषित किया जाने वाला है!</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन "अरिजीत"</span></strong><strong>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़वानी (मप्र)</span></strong></p>]]>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Feb 2025 23:29:02 +0530</pubDate>
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                <title>क्या कांग्रेस वाकई एक डूबता जहाज है ?</title>
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                        <![CDATA[<p>भारत को 2014  में मिली असली आजादी के बाद भाजपा से लगातार जूझ रही कांग्रेस को दिल्ली विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा नकारे जाने के बाद क्या ये लगने लगा है कि -कांग्रेस अब एक डूबता जहाज है और अब कोई दूसरा दल इस पर सवारी नहीं करना चाहेगा ? सवाल जायज  भी है और इस पर विमर्श भी होना चाहिए। बल्कि यूं कहें कि  इस मुद्दे पर विमर्श शुरू भी हो चुका है।  2026  में होने वाले बंगाल  विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन में रहने या कांग्रेस के साथ  मिलकर चुनाव लड़ने से इंकार कर</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148554/is-congress-really-a-sinking-ship"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/polish_20250212_081153888.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत को 2014  में मिली असली आजादी के बाद भाजपा से लगातार जूझ रही कांग्रेस को दिल्ली विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा नकारे जाने के बाद क्या ये लगने लगा है कि -कांग्रेस अब एक डूबता जहाज है और अब कोई दूसरा दल इस पर सवारी नहीं करना चाहेगा ? सवाल जायज  भी है और इस पर विमर्श भी होना चाहिए। बल्कि यूं कहें कि  इस मुद्दे पर विमर्श शुरू भी हो चुका है।  2026  में होने वाले बंगाल  विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन में रहने या कांग्रेस के साथ  मिलकर चुनाव लड़ने से इंकार कर इस विमर्श का श्रीगणेश कर दिया है।</p>
<p>इस बात में कोई दो राय नहीं हो सकती कि  देश में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ मोर्चा लेने में कांग्रेस शुरू से अग्रणीय  रही है। 2014  के लोकसभा चुनाव में मात्र 44  सीटों पर सिमटी कांग्रेस ने मैदान नहीं छोड़ा। भाजपा ने तब 286  सीटें अकेले दम पर जीती थीं। पांच साल लगातार विपक्ष में बैठने के बावजूद कांग्रेस अपने ढंग से काम करती रही और 2019  के चुनाव में कांग्रेस 44  सीटों से बढ़कर 52  सीटों पर आ गयी। कांग्रेस के लिए हालाँकि ये कोई बड़ी उपलब्धि नहीं थी ,लेकिन कुल 8  सीटें ज्यादा हासिल कर कांग्रेस को थोड़ी -बहुत ऊर्जा जरूर मिली। डूबते को तिनके का सहारा होता है।</p>
<p>लगातार दूसरी जीत के बाद भाजपा की चाल,चरित्र और चेहरे में अप्रत्याशित रूप से बदलाव आया ।  भाजपा ने अपने दूसरे कार्यकाल में पूरी ताकत से अपने एजेंडे पर काम करना शुरू किया। जम्मो-कश्मीर से धारा 370  हटाई, अयोध्या में राममंदिर बनाने का रास्ता साफ़ कर मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कर उसे पूरा भी किया और लगातार एक के बाद एक राज्यों में अपनी बढ़त बनाई ,लेकिन कांग्रेस पीछे नहीं हटी ।  कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ  भाजपा  के दांत खट्टे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा की नफरत के मुकाबले मुहब्बत की दूकान खोली ।  पूरे देश में दो बार पदयात्रा कर जन-जागरण की कोशिश की ,परिणाम स्वरूप 2024  के आम चुनाव में कांग्रेस जहाँ 52  से आगे बढ़कर 99  पर पहुंची ,वहीं भाजपा का 400  पार का सपना चकनाचूर हो गया और भाजपा 240  पर सिमिट गयी।</p>
<p>भारत की राजनीति में कांग्रेस का उत्थान और पतन होता ही रहा है। एक लम्बी दास्तान है कांग्रेस के उत्थान और पतन की। 4  जून  2024  के बाद पिछले 9  महीने में देश में जितने भी विधानसभाओं के चुनाव हुए हैं उनमें से कर्नाटक,केरल,हिमाचल प्रदेश और झारखण्ड को छोड़ कांग्रेस कहीं भी भाजपा का विजय रथ नहीं रोक सकी।  दिल्ली विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ हो गया ,और इसी के साथ कांग्रेस की अगुवाई में बने आईएनडीआईए यानि इंडिया गठबंधन में विखराव शुरू हो गया।  दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का साथ और हाथ दोनों छोड़े और सत्ता से बाहर हो गयी। महाराष्ट्र में भी भाजपा ने कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया ।  हरियाणा में भी कांग्रेस के जीत के सपने को तोड़ा और अब उसका निशाना कांग्रेस के साथ इंडिया गठबंधन भी है।</p>
<p>भाजपा बिहार में विधानसभा के चुनाव से पहले कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की कमर तोड़ देना चाहती है। बिहार में चुनाव इसी साल अक्टूबर में होना है ।  अगले साल बंगाल का नंबर है।  बिहार विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इंकार कर दिया है। बिहार में कांग्रेस का राजद से गठबंधन है। यहां क्या होगा कहना कठिन है। लेकिन कांग्रेस के लगातार अकेले पड़ने की वजह से जहाँ देश में क्षेत्रीय दल एक-एककर भाजपा के शिकार बन रहे हैं वहीं कांग्रेस के वजूद पर भी प्रश्नचिन्ह भी लगते जा रहे हैं।</p>
<p> ये तय है कि  कांग्रेस जिस मुखरता से हार-जीत की परवाह  किये बिना भाजपा का मुकाबला कर रही है उतनी दम देश के किसी और राजनीतिक दल में नहीं है ।  कांग्रेस का साथ न देकर बीजद ने उड़ीसा खोया है तो आम आदमी पार्टी ने दिल्ली गंवा दी है और यदि तृणमूल कांग्रेस भी यही गलती करती है तो तय मानिये  की उसका हश्र भी बीजद और आम आदमी पार्टी जैसा ही होगा।</p>
<p>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी ।  कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन से उन्होंने इनकार किया है, क्योंकि उसने कांग्रेस को ' डूबता जहाज ' मान लिया है। लेकिन सवाल ये है कि  क्या सचमुच ममता बनर्जी की पार्टी जैसा सोच रही है वैसा ही दूसरे विपक्षी दल भी सोच रहे हैं ? अभी तक उद्धव ठाकरे की शिव सेना हो या तेजस्वी यादव की राजद या अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ,इन सभी ने कांग्रेस का न हाथ छोड़ा है और न साथ। जब तक ये सभी कांग्रेस के साथ हैं तब तक कांग्रेस को डूबता जहाज मानना टीएमसी की एक भूल के सिवाय कुछ भी नहीं है। आपको बता दें की ममता बनर्जी ने अपने विधायकों और मंत्रियों से  कहा कि टीएमसी 294 सीटों वाली राज्य विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ 2026 का चुनाव अपने दम पर जीतेगी।</p>
<p>मुझे न ममता बनर्जी के आत्म विश्वास पर संदेह है और न कांग्रेस के डूबने को लेकर कोई शक। लेकिन मेरा मानना है कि  कांग्रेस विहीन भारत की कल्पना को साकार करने में भाजपा को अभी लम्बी लड़ाई लड़ना पड़ेगी। कांग्रेस का डीएनए अमीबा जैसा है। अमीबा कभी मरता नहीं है। अमीबा जितना विखंडित होता है उतना ही विकसित होता जाता है। कांग्रेस पिछले सवा सौ साल में दर्जनों बार विभाजित,पराजित हुई है लेकिन समाप्त नहीं हुई ,अर्थात उसका जहाज कभी भी टाइटेनिक की तरह समुद्र की सतह में नहीं समाया। कांग्रेस डूबकर भी हर बार सतह पर आयी है। न भी आये  तो देश कहीं जाने वाला नहीं है।</p>
<p> कांग्रेस विहीन भारत कैसा होगा इसकी कल्पना न ममता बनर्जी को है और न अरविंद केजरीवाल को। जिन्हें है वे कांग्रेस के साथ खड़े हैं ,जिन्हें जाना है वे जायेंगे भी ।  कांग्रेस शायद ही  जाने वालों की चिरोरियाँ करे। कांग्रेस को लड़ने की आदत है ,चिरोरियाँ करने की नहीं। कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व कांग्रेस की दशा-दुर्दशा की समीक्षा खुद करेगा। नहीं करेगा तो भाजपा के गाल में समा जाएगी कांग्रेस। लेकिन ऐसा समय कब आएगा ,कहना कठिन है। हमें अभी अक्टूबर में बिहार का घमासान भी देखना है और अगले साल बंगाल का भी। भविष्य में किसका जहाज डूबेगा और किसका नहीं ये देखना बाकी है।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 16:22:51 +0530</pubDate>
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