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                <title>congress - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>वंदे मातरम् पर विवाद: राष्ट्रगीत के सम्मान से बड़ी नहीं हो सकती राजनीत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185453/controversy-over-vande-mataram-politics-cannot-be-bigger-than-respect"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे समय में कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राजनीति में राष्ट्रगीत की भूमिका, उसके सम्मान और दलों के पुराने रवैये पर बहस छेड़ दी है। 15 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन के समय सोनिया गांधी के कुछ हाव-भाव को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रगीत के गायन को रोकने का संकेत दिया। इस आरोप के आधार पर कर्नाटक के मंगलुरु में भाजपा नेता विकास पुत्तूर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई नहीं होने पर कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह मामला अभी आरोप और जांच के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना कानून की प्रक्रिया पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। कांग्रेस की ओर से इस पूरे आरोप को खारिज किया गया है। विवादित दृश्य को लेकर कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी मंच पर लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने का संकेत दे रही थीं, न कि वंदे मातरम् रोकने का। दूसरी ओर भाजपा ने इसे राष्ट्रगीत के अपमान से जोड़ते हुए राजनीतिक और सार्वजनिक सवाल खड़े किए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">लेकिन इस विवाद का एक बड़ा पक्ष केवल 15 अगस्त की घटना तक सीमित नहीं है। वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और देश की राजनीति में बहस का इतिहास बहुत पुराना है। इसलिए आज जब राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, तब यह समझना भी जरूरी है कि अतीत में कांग्रेस ने वंदे मातरम् के संबंध में क्या रुख अपनाया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि समय के साथ इसके कुछ अंशों और धार्मिक संदर्भों को लेकर मुस्लिम लीग तथा कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जताई। 1930 के दशक में यह विषय कांग्रेस के सामने भी आया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1937 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर आपत्ति जताई थी। नेहरू अभिलेखागार में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार, 17 अक्टूबर 1937 को मुस्लिम लीग ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में थोपने का आरोप लगाया था। इसके बाद कांग्रेस के भीतर भी इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">20 अक्टूबर 1937 को जवाहरलाल नेहरू ने सुभाषचंद्र बोस को लिखे पत्र में वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और उसके कुछ हिस्सों को लेकर चर्चा की। नेहरू ने लिखा कि गीत की ‘आनंदमठ’ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को असहज कर सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि वंदे मातरम् को लेकर पैदा हुआ विरोध काफी हद तक सांप्रदायिक तत्वों द्वारा निर्मित था। यानी इतिहास को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि उस समय कांग्रेस के भीतर भी गीत को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् के इस्तेमाल पर विचार किया और 1937 में यह निर्णय सामने आया कि गीत के उन शुरुआती अंशों का इस्तेमाल किया जाए जिन पर व्यापक सहमति थी। नेहरू के अपने वक्तव्य से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने इस विषय पर लंबे विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यहीं से आज की राजनीतिक बहस को एक ऐतिहासिक संदर्भ मिलता है। भाजपा इसे कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताती है, जबकि कांग्रेस और उसके समर्थक इसे उस समय की सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय बताते हैं। इतिहास में दर्ज तथ्यों को देखते हुए यह कहना अधिक उचित है कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के भीतर उस दौर में महत्वपूर्ण राजनीतिक और वैचारिक बहस हुई थी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रगीत है, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान होगा और स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान दिया जाएगा। इसलिए वंदे मातरम् को केवल एक राजनीतिक दल या विचारधारा से जोड़कर देखना उसके ऐतिहासिक महत्व को छोटा करना होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राष्ट्रगीत का सम्मान किसी सरकार, पार्टी या नेता की निजी संपत्ति नहीं है। यह स्वतंत्रता आंदोलन की उस विरासत का हिस्सा है जिसमें असंख्य लोगों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। यही कारण है कि इसके गायन के दौरान किसी भी प्रकार की अवमानना का आरोप गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आरोप को प्रमाण मान लेने के बजाय निष्पक्ष जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर तुष्टीकरण और अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगाती रही है। इसके समर्थन में वह कांग्रेस नेताओं के पुराने बयानों का भी उल्लेख करती है। उदाहरण के लिए 2010 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने ‘सैफ्रन टेररिज्म’ यानी ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस बयान पर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ। कांग्रेस के तत्कालीन महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने बाद में कहा था कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता और भगवा रंग को आतंकवाद से जोड़ना उचित नहीं है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2013 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के ‘हिंदू आतंकवाद’ संबंधी बयान पर भी विवाद हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने स्वयं को उस शब्दावली से अलग करते हुए कहा था कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन घटनाओं से यह जरूर स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के बयान समय-समय पर बड़े राजनीतिक विवादों का कारण बने हैं। हालांकि किसी नेता के बयान को पूरे दल की आधिकारिक विचारधारा मान लेना भी उचित नहीं है। राजनीति में बयान आते हैं, उन पर विवाद होता है और कई बार स्वयं दल को सफाई भी देनी पड़ती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् पर वर्तमान विवाद का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक संघर्ष का हथियार बनाने की प्रवृत्ति कब समाप्त होगी। भाजपा कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के प्रति असम्मान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर राष्ट्रवाद के नाम पर राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों की अपनी राजनीतिक दलीलें हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए इससे बड़ा प्रश्न राष्ट्रीय सम्मान का है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के मामले में भी यदि कोई आपत्तिजनक व्यवहार हुआ है तो उसकी जांच होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। लोकतंत्र में न तो किसी नेता को केवल पद के कारण कानून से ऊपर माना जा सकता है और न ही किसी राजनीतिक विरोधी पर बिना प्रमाण आरोप को अंतिम सत्य माना जा सकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">देशभक्ति किसी दल की बपौती नहीं है।कांग्रेस हो या भाजपा, कोई भी राजनीतिक दल देशभक्ति का प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार नहीं रखता। भारत की आजादी किसी एक परिवार, पार्टी या संगठन की देन नहीं है। करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और त्याग से देश स्वतंत्र हुआ। इसलिए ‘हमने देश आजाद कराया’ जैसी राजनीतिक मानसिकता से ऊपर उठना जरूरी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठाए जा सकते हैं। 1937 के निर्णयों और उसके पीछे की परिस्थितियों पर राजनीतिक बहस भी हो सकती है। कांग्रेस नेताओं के विवादित बयानों की आलोचना भी लोकतंत्र में स्वाभाविक है। लेकिन इस बहस का अंतिम उद्देश्य किसी दल को देशद्रोही साबित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज जैसे प्रतीकों का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रहे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज जरूरत इस बात की है कि वंदे मातरम् को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर देश की नई पीढ़ी को उसके इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान के बारे में बताया जाए। जो गीत स्वतंत्रता सेनानियों के भीतर राष्ट्रभावना जगाता रहा, उसके सम्मान में किसी भी प्रकार की कमी देश के लोकतांत्रिक संस्कारों के लिए उचित नहीं हो सकती। लेकिन सम्मान के साथ न्याय और तथ्य भी जरूरी हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत अब जांच का विषय है। पुलिस और जरूरत पड़ने पर न्यायपालिका यह तय करेगी कि लगाए गए आरोपों में कितना तथ्य है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी व्याख्या करते रहेंगे, लेकिन राष्ट्रगीत किसी दल का नहीं, पूरे राष्ट्र का है। इसलिए वंदे मातरम् का सम्मान राजनीतिक विवाद का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मर्यादा का विषय होना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;">        *कांतिलाल मांडोत*</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 20:08:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>उपचुनाव: जनता का संदेश, दलों के लिए चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">3<span lang="hi" xml:lang="hi">  अगस्त </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को बिहार की बांकीपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम सामने आए। तीन राज्यों की इन तीन सीटों पर आए नतीजों ने केवल स्थानीय राजनीति को ही प्रभावित नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी कई महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। इन परिणामों में भाजपा को दो महत्वपूर्ण सीटों पर झटका लगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कांग्रेस और जन सुराज ने एक-एक सीट जीतकर अपने-अपने राजनीतिक भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। भाजपा ने गुजरात की मांजलपुर सीट बचाकर अपनी उपस्थिति बनाए रखी। सबसे अधिक चर्चा बिहार की</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184676/by-election-publics-message-warning-to-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">3<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को बिहार की बांकीपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणाम सामने आए। तीन राज्यों की इन तीन सीटों पर आए नतीजों ने केवल स्थानीय राजनीति को ही प्रभावित नहीं किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी कई महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। इन परिणामों में भाजपा को दो महत्वपूर्ण सीटों पर झटका लगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कांग्रेस और जन सुराज ने एक-एक सीट जीतकर अपने-अपने राजनीतिक भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। भाजपा ने गुजरात की मांजलपुर सीट बचाकर अपनी उपस्थिति बनाए रखी। सबसे अधिक चर्चा बिहार की बांकीपुर सीट की रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ में जीत दर्ज कर भारतीय राजनीति में एक नई शुरुआत की। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने भाजपा को हराकर यह संदेश दिया कि वह अभी भी कई क्षेत्रों में सीधी चुनौती देने की स्थिति में है। वहीं गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज कर अपने संगठनात्मक आधार को बनाए रखा। भाजपा के लिए चेतावनी- उपचुनावों के परिणामों को सामान्य चुनावों का सीधा संकेत नहीं माना जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे जनता के तत्काल राजनीतिक मूड का संकेत अवश्य देते हैं। भाजपा को बांकीपुर और दतिया में मिली हार यह बताती है कि केवल संगठनात्मक मजबूती या पुराने राजनीतिक समीकरण हर चुनाव में सफलता की गारंटी नहीं हैं। इन परिणामों से भाजपा के सामने कुछ प्रमुख प्रश्न खड़े हुए हैं— क्या स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त महत्व दिया गया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या उम्मीदवार चयन में कहीं कमी रह गई</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या युवाओं और रोजगार जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को प्रभावित किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या सरकार को अपनी जनसंपर्क रणनीति में बदलाव की आवश्यकता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा नेतृत्व ने भी परिणामों को स्वीकार करते हुए समीक्षा की बात कही है। कांग्रेस के लिए राहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनौती भी- दतिया की जीत कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली है। लंबे समय से लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही कांग्रेस के लिए यह परिणाम संगठन को ऊर्जा देने वाला साबित हो सकता है। हालांकि केवल एक सीट की जीत से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कांग्रेस ने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन पूरी तरह वापस पा ली है। पार्टी को यह साबित करना होगा कि वह इस सफलता को व्यापक जनसमर्थन में बदल सकती है। प्रशांत किशोर और जन सुराज की बड़ी छलांग- सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश बिहार से आया है। वर्षों तक विभिन्न दलों के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने पहली बार स्वयं चुनाव लड़कर जीत हासिल की। यह केवल एक सीट की जीत नहीं बल्कि एक नई राजनीतिक शक्ति के उभरने का संकेत माना जा रहा है। यदि जन सुराज आने वाले समय में संगठन को मजबूत बनाए रखता है तो बिहार की राजनीति में पारंपरिक दलों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। क्या जनता ने सरकार को संदेश दिया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनावों में मतदाता अक्सर सरकार को सीधा संदेश देने का प्रयास करते हैं। महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">युवाओं की अपेक्षाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक कार्यशैली और उम्मीदवार की स्वीकार्यता जैसे मुद्दे इन चुनावों में निर्णायक बन सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के महीनों में देश में युवाओं और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा रही है। ऐसे में इन परिणामों को सरकार के लिए जनभावनाओं का संकेत मानने वाले विश्लेषक भी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि किसी एक कारण को निर्णायक कहना उचित नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> और आगे की राजनीति पर प्रभाव</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन उपचुनावों का असर आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीतियों पर दिखाई दे सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा संगठन और उम्मीदवार चयन पर अधिक ध्यान दे सकती है। कांग्रेस इन परिणामों को कार्यकर्ताओं के मनोबल बढ़ाने के लिए उपयोग करेगी। बिहार में जन सुराज को नई राजनीतिक पहचान मिलेगी। विपक्ष इन परिणामों को भाजपा के खिलाफ माहौल बनने के संकेत के रूप में पेश करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भाजपा इन्हें सीमित स्थानीय परिणाम बताने का प्रयास करेगी। क्या उपचुनाव भविष्य तय करते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति का इतिहास बताता है कि उपचुनाव हमेशा भविष्य के आम चुनावों का सटीक पूर्वानुमान नहीं होते। कई बार उपचुनावों में हारने वाली पार्टियाँ बाद में बड़े चुनावों में शानदार वापसी करती रही हैं। इसलिए इन परिणामों को अंतिम जनादेश नहीं बल्कि राजनीतिक चेतावनी और जनभावनाओं का संकेत माना जाना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तीनों उपचुनावों के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र में मतदाता किसी भी दल को स्थायी जीत का भरोसा नहीं देता। जनता समय-समय पर अपने निर्णय से राजनीतिक दलों को संदेश देती रहती है। भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस के लिए संगठन मजबूत करने का और जन सुराज के लिए अपनी नई राजनीतिक पहचान को स्थायी बनाने की चुनौती। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इन संकेतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अपनी रणनीतियों में क्या बदलाव करते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 19:51:41 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा के माथे के बदनुमा दाग बस स्टेशन के जीर्णोद्धार पर नहीं बोले सीएम</title>
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<div style="text-align:justify;"><strong>अश्वनी द्विवेदी, रूद्रपुर, देवरिया।   </strong>रूद्रपुर व बरहज विधानसभा के मिलन स्थल पर बरांव में चुनावी रिहर्सल और 456 करोड़ की विकास योजनाओं के शिलान्यास व लोकार्पण कार्यक्रम को जनता के बीच रखने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में ज्यादा देर तक सपा व कांग्रेस को कोसने का कार्य किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बरांव में आयोजित इस कार्यक्रम से रुद्रपुर की जनता को बस स्टेशन के जीर्णोद्धार की काफी उम्मीद थी किंतु रुद्रपुर विधानसभा के माथे पर लगे बदनुमा दाग रूपी जर्जर बस स्टेशन के कायाकल्प पर मुख्यमंत्री ने एक शब्द नहीं बोला। हालांकि क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश निषाद ने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182557/cm-did-not-speak-on-the-renovation-of-the-bus"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1000718713.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>अश्वनी द्विवेदी, रूद्रपुर, देवरिया।   </strong>रूद्रपुर व बरहज विधानसभा के मिलन स्थल पर बरांव में चुनावी रिहर्सल और 456 करोड़ की विकास योजनाओं के शिलान्यास व लोकार्पण कार्यक्रम को जनता के बीच रखने आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में ज्यादा देर तक सपा व कांग्रेस को कोसने का कार्य किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बरांव में आयोजित इस कार्यक्रम से रुद्रपुर की जनता को बस स्टेशन के जीर्णोद्धार की काफी उम्मीद थी किंतु रुद्रपुर विधानसभा के माथे पर लगे बदनुमा दाग रूपी जर्जर बस स्टेशन के कायाकल्प पर मुख्यमंत्री ने एक शब्द नहीं बोला। हालांकि क्षेत्रीय विधायक जयप्रकाश निषाद ने अपने संबोधन में जरूर बस स्टेशन का नाम लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यदि बस स्टेशन पर कोर्ट से स्टे नहीं होता तो अब तक निर्माण हो रहा होता।सच्चाई क्या है यह दीगर विषय है। मुख्यमंत्री का आगमन पूर्व चुनावी हलचल जैसा लगा। भाजपा चाहती है की 2027 के चुनाव से पहले पूर्वांचल की सभी विधानसभा सीटों में अपनी धमक जाहिर कर दें।मुख्यमंत्री ने अपने लगभग 35 मिनट के संबोधन में आधा समय सरकार का गुणगान किया और लगभग आधा समय सपा व कांग्रेस की जमकर आलोचना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे अधिक समय सपा के विरोध पर दिया गया। मोहर्रम के त्यौहार को लेकर एक समुदाय को निशान भी बनाया गया जिस पर लोगों की तालियां बजीं। विधानसभा के विकास से संबंधित ज्ञापन देने जा रहे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भभौली चौराहे के पास ही जबरन रोक दिया गया। जिससे साबित हुआ कि भाजपा सरकार विपक्ष को फेस नहीं करना चाहती।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:50:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी का चुनावी मैदान: मुकाबला फिर से भाजपा बनाम सपा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की सियासत का गणित पिछले </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi">  साल से लगभग तय है। यहाँ सत्ता की चाबी हमेशा दो बड़े खेमों के पास रही है। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi">  का विधानसभा चुनाव भी इसी स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ता दिख रहा है। मैदान में कई दल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर असली सीधी टक्कर भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा के बीच ही होगी। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi">  के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। प्रदेश में भाजपा को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  जबकि सपा को </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi">  सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। लेकिन यह संभव है कि विधानसभा का चुनावी गणित अलग हो।</span>'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182451/up-electoral-battle-again-between-bjp-vs-sp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की सियासत का गणित पिछले </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से लगभग तय है। यहाँ सत्ता की चाबी हमेशा दो बड़े खेमों के पास रही है। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> का विधानसभा चुनाव भी इसी स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ता दिख रहा है। मैदान में कई दल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर असली सीधी टक्कर भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा के बीच ही होगी। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। प्रदेश में भाजपा को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> जबकि सपा को </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। लेकिन यह संभव है कि विधानसभा का चुनावी गणित अलग हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में काफी लोकप्रिय हो चुके हैं खासकर अपने कड़े फैसले को लेकर। इसलिए विधानसभा चुनाव के गणित को अलग तरीकों से देखना होगा। भाजपा: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डबल इंजन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रिपल अटैक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की तैयारी- भाजपा यूपी में </span>2017<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। उसका कोर नैरेटिव </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> चीजों पर टिका है: हिंदुत्व + विकास: अयोध्या में राम मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काशी विश्वनाथ कॉरिडोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज कुंभ को भाजपा अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। साथ में एक्सप्रेसवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोएडा फिल्म सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे विकास प्रोजेक्ट फ्रंट पर हैं। लॉ एंड ऑर्डर: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया राज खत्म</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बुलडोजर मॉडल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी हथियार बना है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक इसे कानून-व्यवस्था की गारंटी के रूप में बेचा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र + राज्य का तालमेल: मोदी का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर और योगी का चेहरा राज्य स्तर पर। यह </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डबल इंजन</span>' 2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में कुछ सीटों पर झटका खाने के बाद भी संगठन के लिए सबसे बड़ा भरोसा है। भाजपा की चुनौती: किसानों की नाराजगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और आरक्षण जैसे मुद्दे। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में पिछड़ा-दलित वोट में हुई सेंध को वापस लाना संगठन की प्राथमिकता है। सपा: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पीडीए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">फॉर्मूले से वापसी की कोशिश- अखिलेश यादव ने </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद अपनी राजनीति को पूरी तरह रीसेट किया। सपा अब </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एम-वाई समीकरण</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से आगे बढ़कर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पीडीए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी पिछड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दलित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्पसंख्यक के फॉर्मूले पर खेल रही है। सोशल इंजीनियरिंग: भाजपा के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-यादव </span>OBC + <span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-जाटव दलित</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल को काटने के लिए सपा ने कुर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निषाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाटव के अलावा मुस्लिम वोट को एकजुट करने की कोशिश की। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में इसका असर दिखा भी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और महंगाई: पेपर लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निवीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और महंगाई को सपा मुख्य मुद्दा बना रही है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी भत्ता</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुरानी पेंशन बहाली जैसे वादे इसी दिशा में हैं। अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व: मंदिर जाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कावड़ यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और समाजवादी पीडीए पंचायत से सपा उस </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">तुष्टीकरण</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के टैग को तोड़ने की कोशिश कर रही है जो उसे पहले घेरता था। सपा की चुनौती: संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवारवाद के आरोप से बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मुस्लिम+यादव के बाहर दूसरे पिछड़ों को स्थायी तौर पर जोड़ना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी दल कहाँ हैं</span>? - <span lang="hi" xml:lang="hi">बसपा: मायावती अभी भी दलित वोट की सबसे बड़ी ध्रुव हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर </span>2022 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में उनका वोट बैंक खिसका। अगर वो अकेले लड़ती हैं तो वो भाजपा या सपा में से एक का नुकसान करेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर खुद सत्ता की रेस से बाहर दिख रही हैं। कांग्रेस: राहुल-प्रियंका के यूपी फोकस के बाद भी संगठन जमीन पर कमजोर है। वो कुछ सीटों पर सपा को फायदा या नुकसान दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मुख्य मुकाबला नहीं। </span>RLD + <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य: जयंत चौधरी </span>NDA <span lang="hi" xml:lang="hi">में हैं। निषाद पार्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपना दल भाजपा के साथ। ओम प्रकाश राजभर भी भाजपा के साथ। ये सब वोट कटवा या वोट ट्रांसफर का काम करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर फ्रेम भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा ही रहेगा। तो फैसला क्या होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी में चुनाव हमेशा जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और कानून-व्यवस्था के मिश्रण से तय होता है। </span>2027 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी फ्रेम यही रहेगा। भाजपा का दांव: हिंदुत्व + विकास + लॉ एंड ऑर्डर + मोदी-योगी का डबल चेहरा। सपा का दांव : पीडीए एकता + बेरोजगारी-महंगाई + </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">की मोमेंटम। बसपा का वोट जिस तरफ शिफ्ट हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ब्राह्मण-ठाकुर-बनिया </span>vs OBC-<span lang="hi" xml:lang="hi">दलित-मुस्लिम का ध्रुवीकरण जिस हद तक हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी पर सीटों का गणित बनेगा। जमीन पर चाहे जितने दल पोस्टर लगाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोटर के दिमाग में लड़ाई दो ही खेमों के बीच है। एक तरफ योगी-मोदी की भाजपा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ अखिलेश की सपा। यूपी </span>2027 = <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा। बाकी सब असर डालने वाले खिलाड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य खिलाड़ी ये दो ही हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक: 'भरोसा' कब लीक होना बंद होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi">  घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi">  लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  हजार अभ्यर्थियों का</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/education.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार अभ्यर्थियों का भविष्य फिर से लटका दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये कोई पहली बार नहीं है। सवाल वही है: आखिर पेपर लीक से छुटकारा कब मिलेगा</span>? 27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की सुबह का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवंडी में छापा- </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को सुबह </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">का पेपर बेचा जा रहा है। छापेमारी में संदिग्धों के पास से जो प्रश्नपत्र मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो असली </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे। परीक्षा रद्द-  महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने तुरंत </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा स्थगित कर दी। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारियां- भिवंडी पुलिस ने कम से कम </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को हिरासत में लिया है और केस दर्ज कर जांच शुरू की है। ये पहली बार नहीं: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कहानी-  महाराष्ट्र में </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक अब आदत बन चुका है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> कोल्हापुर में  </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> नवंबर की परीक्षा से पहले </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोग गिरफ्तार। गिरोह </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में पेपर बेच रहा था। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> ठाणे/भिवंडी में </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा से </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले पेपर लीक। </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कोल्हापुर केस के बाद भी परिषद ने कहा था कि "पेपर छपाई बेहद गोपनीय होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोषागार में </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे निगरानी रहती है"। फिर भी लीक हो गया। कौन फंस रहा है बीच में</span>? 4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख शिक्षक अभ्यर्थी। इस बार करीब </span>4.28<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख उम्मीदवार परीक्षा देने वाले थे। इसमें </span>2.26<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख वो शिक्षक भी शामिल थे जो पहले से नौकरी कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन के लिए फिर से परीक्षा दे रहे थे। एक अभ्यर्थी का </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल बर्बाद। फीस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग सब गया। और सबसे बड़ा नुकसान: स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती फिर लटकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लीक होता कैसे है</span>? '<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया का मॉडल</span>'- <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच और पुराने केस देखें तो पैटर्न साफ है। व्हाट्सएप चेन- </span>HSC <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड पेपर लीक में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टेक वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सीलेंट ट्यूशन क्लासेस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हुए स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचता था। प्राइवेट कोचिंग का रोल- नागपुर बोर्ड केस में एक प्राइवेट कोचिंग से जुड़े व्यक्ति ने पैसे लेकर पेपर साझा किया था। अंदरूनी सांठगांठ- बिना छपाई वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या कोषागार/ट्रांसपोर्ट लेवल पर पेपर निकलना। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भी पेपर परीक्षा से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट पहले व्हाट्सएप पर भेजा गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">                  राजनीति शुरू: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक सरकार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का आरोप- कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा: "पेपर लीक अब अपवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी सरकार की पहचान बन गया है। ठाणे में ही टैट का पेपर लीक... किसका राजनीतिक संरक्षण है</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर लीक से छुटकारा कब</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सजा का कानून-  </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह महाराष्ट्र में भी </span>'Public Examination Act' <span lang="hi" xml:lang="hi">को दांत वाला बनाना। गिरफ्तार लोग </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में जमानत पर बाहर न आएं। टेक्नोलॉजी से निगरानी- पेपर को ब्लॉकचेन या एन्क्रिप्टेड </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड से ट्रैक करना। हर हैंडलिंग पर बायोमेट्रिक लॉग। कोचिंग माफिया पर कार्रवाई-  ट्यूशन क्लासेस में छापे और व्हाट्सएप ग्रुप मॉनिटरिंग। पैसे लेकर पेपर बेचने वालों का लाइसेंस रद्द। परिषद की जवाबदेही- हर लीक पर </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">के शीर्ष अधिकारी से स्पष्टीकरण और जिम्मेदारी तय। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस का मामला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पल्ला झाड़ना बंद। अभ्यर्थियों को मुआवजा-परीक्षा रद्द होने पर फीस वापस + अगली परीक्षा फ्री + ट्रैवल खर्च। ताकि सिस्टम को दर्द हो। </span>NEET, HSC, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब </span>TET... <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बार सरकार कहती है "जांच होगी"। पर अभ्यर्थी हर बार नई तारीख का इंतजार करता है। जब तक पेपर लीक करने वाले को नौकरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जेल और </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का बैन मिलना तय नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। क्या महाराष्ट्र को हर परीक्षा के लिए </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">खुद को सुधारेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हर परीक्षा से पहले लीक का डर परीक्षार्थियों को सताने लगा है। और जब वह किसी परीक्षा की तैयारियां करते हैं तो एक सवाल जरूर मन में उठता है कि कहीं परीक्षा लीक न हो जाए। सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कानून को और सख्त बनाना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking</link>
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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:27:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस ने वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग की।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने रविवार को वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग की। पार्टी का तर्क है कि ऐसा करने से वोटरों को दबाने और मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने के खिलाफ़ मज़बूत सुरक्षा मिलेगी। स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (</span>SIR) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग का "साफ़ तौर पर पक्षपाती कामकाज" - जिसके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181819/congress-demanded-that-the-right-to-vote-be-given-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas20.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस ने रविवार को वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने की मांग की। पार्टी का तर्क है कि ऐसा करने से वोटरों को दबाने और मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने के खिलाफ़ मज़बूत सुरक्षा मिलेगी। स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (</span>SIR) <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग का "साफ़ तौर पर पक्षपाती कामकाज" - जिसके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा था - "पूरी तरह से बेनकाब" हो गया है। उन्होंने कहा कि अब वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने का समय आ गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि इसे न्यायिक समीक्षा और सुरक्षा का सर्वोच्च स्तर मिल सके।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का ज़िक्र किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दो जजों की बेंच ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया था। उन्होंने सवाल किया कि वोट देने के अधिकार को - जिसे उन्होंने लोकतंत्र के लिए बहुत ज़रूरी बताया - वैसी ही मान्यता क्यों नहीं मिलनी चाहिए।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि संविधान सभा ने सरदार पटेल की अध्यक्षता में मौलिक अधिकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्पसंख्यकों और आदिवासी व बहिष्कृत क्षेत्रों पर एक सलाहकार समिति बनाई थी। </span>21-22<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल</span>, 1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> को हुई बैठक के दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समिति ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की थी कि क्या वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉ. बी.आर. अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम ने वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने का ज़ोरदार समर्थन किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सरदार पटेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सी. राजगोपालाचारी और अन्य लोगों का तर्क था कि ऐसा करने से रियासतें भारतीय संघ में शामिल होने में हिचकिचा सकती हैं। उनका मानना था कि संविधान में सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार (यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइजी) देना ही काफ़ी होगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">सरदार पटेल का खुद यह मानना था कि सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार अपने आप में एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है। यही अनुच्छेद </span>326<span lang="hi" xml:lang="hi"> की पृष्ठभूमि है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सभी वयस्कों को वोट देने के अधिकार के आधार पर चुनाव कराने का प्रावधान करता है।" उन्होंने कहा कि वोट देने का अधिकार </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जन प्रतिनिधित्व अधिनियम</span>, 1951' <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत एक कानूनी अधिकार है या एक स्पष्ट मौलिक अधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर बहस सात दशकों से ज़्यादा समय से चल रही है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग राय सामने आई हैं। हाल ही में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च </span>2023<span lang="hi" xml:lang="hi"> के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मामले में जस्टिस अजय रस्तोगी ने अपनी असहमति वाली राय में कहा कि वोट देने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।"</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वोटिंग से जुड़े कई अधिकारों को पहले ही मान्यता दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उम्मीदवारों के आपराधिक बैकग्राउंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके आर्थिक हितों और राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों को जानने का मतदाताओं का अधिकार शामिल है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने तर्क दिया</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">इसने वोट की गोपनीयता की रक्षा की है और </span>NOTA <span lang="hi" xml:lang="hi">के ज़रिए सभी उम्मीदवारों को खारिज करने के अधिकार को मान्यता दी है। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह और भी अजीब बात है कि वोट देने का अधिकार अभी भी सिर्फ़ एक कानूनी अधिकार बना हुआ है। इससे जुड़े सभी अधिकारों को मौलिक घोषित किया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मुख्य अधिकार - जिसके बिना बाकी अधिकार मौजूद नहीं रह सकते - अभी भी कानूनी अधिकार ही बना हुआ है।"रमेश ने कहा कि वोट देने के अधिकार का दर्जा बढ़ाने से लोकतांत्रिक सुरक्षा उपाय मज़बूत होंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के इशारे पर काम करने वाले भारत के चुनाव आयोग के खुले तौर पर पक्षपाती कामकाज के बुरी तरह बेनकाब होने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे इसे न्यायिक समीक्षा और सुरक्षा का उच्चतम स्तर मिल सके।"</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रमेश ने आगे कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">यह मतदाताओं को दबाने या मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने के खिलाफ़ सुरक्षा उपाय लागू करने की दिशा में एक मज़बूत कदम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो </span>SIR (<span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया के तहत अलग-अलग राज्यों में बहुत बड़ी संख्या में हुए हैं। इसका मतलब यह भी होगा कि चुनाव आयोग के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट की ज़्यादा निगरानी रहेगी।"</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 19:24:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाएगी सरकार, किरेन रिजिजू बोले- बिना सबूत लगाए आरोप राजनीतिक हलचल तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<h4 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने का फैसला किया है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सदन में बिना किसी ठोस सबूत के सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर और भ्रामक आरोप लगाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किरन रिजिजू ने बताया कि सदन में उन्होंने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में सबूत देने का अनुरोध किया था, लेकिन वे ऐसा करने में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169180/government-will-bring-breach-of-privilege-notice-against-rahul-gandhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली। </strong></h4>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने का फैसला किया है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने सदन में बिना किसी ठोस सबूत के सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ गंभीर और भ्रामक आरोप लगाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किरन रिजिजू ने बताया कि सदन में उन्होंने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में सबूत देने का अनुरोध किया था, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे। इसके बावजूद उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री पर देश के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री ने देश के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है और भारत को “बेचने” जैसी बातें कही थीं। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए भी कुछ गंभीर आरोप लगाए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि ये आरोप तथ्यहीन, निराधार और सदन की मर्यादा के खिलाफ हैं। ऐसे में यह संसद के विशेषाधिकारों का उल्लंघन है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>किरेन रिजिजू का बयान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा—</strong></p>
<blockquote>
<blockquote class="format2">“राहुल गांधी ने बिना किसी तर्क, बिना सबूत और बिना पूर्व सूचना के सदन में आरोप लगाए। यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री और सरकार पर झूठे और भ्रामक आरोप लगाए, जो स्वीकार्य नहीं हैं।”</blockquote>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी के भाषण में कई असंसदीय शब्दों और गलत बयानों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।</p>
<blockquote>
<p>“उन्होंने कहा कि किसी ने इंडिया बेच दिया और किसी ने इंडिया खरीद लिया। यह पूरी तरह गलत और भ्रामक है। इस देश को न कोई बेच सकता है और न कोई खरीद सकता है।”</p>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>स्पीकर के सामने नोटिस दाखिल होगा</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रिजिजू ने बताया कि वह इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल करेंगे। उनका कहना है कि किसी सांसद द्वारा बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने कहा—</strong></p>
<blockquote>
<blockquote class="format2">“हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर लगाए गए आरोप भी गंभीर हैं और पूरी तरह निराधार हैं। यह विशेषाधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।”</blockquote>
</blockquote>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>भाषण से हटाए जाएंगे विवादित अंश</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार का दावा है कि राहुल गांधी के भाषण के उन हिस्सों को संसद की कार्यवाही से हटाया जाएगा, जिनमें असंसदीय शब्दों और गलत आरोपों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें झूठे बयान, तथ्यहीन आरोप और आपत्तिजनक शब्द शामिल हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>राजनीतिक हलचल तेज</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष इसे सरकार की आलोचना को दबाने की कोशिश बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतंत्र और संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आगे क्या?</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अब इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका अहम होगी। अध्यक्ष नोटिस पर विचार करने के बाद तय करेंगे कि विशेषाधिकार समिति को मामला भेजा जाए या नहीं। यदि नोटिस स्वीकार होता है, तो राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर संसद में टकराव और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet"><a href="https://twitter.com/ANI/status/2021518703393976455?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2021518703393976455%7Ctwgr%5Eb31edc9d0b959c204ab54877e27686239696c3d1%7Ctwcon%5Es1_&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.news24online.com%2Findia%2Fgovt-to-bring-motion-against-rahul-gandhi%2F1503134%2F">https://twitter.com/ANI/status/2021518703393976455?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2021518703393976455%7Ctwgr%5Eb31edc9d0b959c204ab54877e27686239696c3d1%7Ctwcon%5Es1_&amp;ref_url=https%3A%2F%2Fhindi.news24online.com%2Findia%2Fgovt-to-bring-motion-against-rahul-gandhi%2F1503134%2F</a></blockquote>
<p style="text-align:justify;">

</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/169180/government-will-bring-breach-of-privilege-notice-against-rahul-gandhi</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:15:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नेहरू का लेटर सामने आते ही गरमाई सियासत, निशिकांत दुबे बोले– ‘कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा’</title>
                                    <description><![CDATA[<h2>‘कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा…’, नेहरू का लेटर शेयर कर बोले निशिकांत दुबे, सियासी घमासान तेज</h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद में राहुल गांधी द्वारा शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’ अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर सड़क तक पहुंच गया है। इस विवाद ने अब और तूल पकड़ लिया है, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया।</p>
<p>इस पोस्ट के साथ निशिकांत दुबे ने लिखा, <strong>“कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा, कांग्रेस की लंका में आग लग जाएगी?”</strong> जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।</p>
<h3>संसद से शुरू</h3>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168239/politics-heated-up-as-soon-as-nehrus-letter-came-out"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/nishikant.jpg" alt=""></a><br /><h2>‘कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा…’, नेहरू का लेटर शेयर कर बोले निशिकांत दुबे, सियासी घमासान तेज</h2>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> संसद में राहुल गांधी द्वारा शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’ अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर सड़क तक पहुंच गया है। इस विवाद ने अब और तूल पकड़ लिया है, जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया।</p>
<p>इस पोस्ट के साथ निशिकांत दुबे ने लिखा, <strong>“कुछ कहूंगा तो बवाल हो जाएगा, कांग्रेस की लंका में आग लग जाएगी?”</strong> जिसके बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।</p>
<h3>संसद से शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’</h3>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा था। इसके जवाब में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे गांधी परिवार पर लिखी गई कुछ विवादित किताबें लेकर संसद पहुंचे, जिनमें आपत्तिजनक बातें होने का दावा किया गया।</p>
<p>इसके बाद सदन में तीखी बहस देखने को मिली, जो अभी तक थमती नजर नहीं आ रही है।</p>
<h3>नेहरू का पत्र शेयर कर कांग्रेस पर निशाना</h3>
<p>अब इस सियासी विवाद को आगे बढ़ाते हुए निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर जवाहरलाल नेहरू का एक पुराना पत्र साझा किया है। उनके मुताबिक यह पत्र 30 जनवरी 1961 का है, जो नेहरू ने जनरल केएम करिअप्पा को लिखा था।</p>
<p>इस पत्र में नेहरू ने लिखा था—</p>
<blockquote>
<p>“माय डियर करिअप्पा, मुझे आपके 26 और 27 जनवरी के दो पत्र मिले। यह अच्छी बात होगी अगर आप एडविना माउंटबेटन मेमोरियल फंड की मदद के लिए कोई डांस प्रोग्राम या शो आयोजित करें, लेकिन मुझे डर है कि मैं बैंगलोर में ऐसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाऊंगा।”</p>
</blockquote>
<p>इस पत्र को साझा करते हुए दुबे ने कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार पर परोक्ष रूप से सवाल खड़े किए हैं।</p>
<h3>सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस</h3>
<p>निशिकांत दुबे के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। बीजेपी समर्थक इसे कांग्रेस पर हमला बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे बेवजह का विवाद करार दे रहे हैं।</p>
<p>ट्विटर (X), फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।</p>
<h3>कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार</h3>
<p>फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।</p>
<h3>निष्कर्ष</h3>
<p>संसद में शुरू हुआ ‘किताबी संग्राम’ अब सोशल मीडिया और आम जनता तक पहुंच चुका है। नेहरू के पत्र को लेकर छिड़ा नया विवाद राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है। अब सबकी नजरें कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 19:19:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ड्यूटी के दबाव में महिला वीएलओ की मौत, कांग्रेस प्रवक्ता ने उठाए गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>देवरिया।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि निर्वाचन कार्य में लगी महिला वीएलओ रंजू दुबे पर अनर्गल दबाव बनाया गया, जिसके चलते मानसिक व शारीरिक तनाव बढ़ने से उनकी कल मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और दबावपूर्ण कार्यशैली इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय शुक्रवार को रुद्रपुर के मांझा नारायनपुर स्थित रंजू दुबे के पैतृक गांव पहुंच रहे हैं। उनके साथ कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना देने और पूरे प्रकरण की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/161887/female-vlo-dies-under-pressure-of-duty-congress-spokesperson-raises"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/screenshot_20251008_163247_gallery.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देवरिया।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि निर्वाचन कार्य में लगी महिला वीएलओ रंजू दुबे पर अनर्गल दबाव बनाया गया, जिसके चलते मानसिक व शारीरिक तनाव बढ़ने से उनकी कल मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और दबावपूर्ण कार्यशैली इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय शुक्रवार को रुद्रपुर के मांझा नारायनपुर स्थित रंजू दुबे के पैतृक गांव पहुंच रहे हैं। उनके साथ कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना देने और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग करने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि जिस तरह से सरकारी कर्मचारियों पर चुनावी कार्यों के दौरान दबाव डाला जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा, आश्रित को नौकरी तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने भी बताया कि रंजू दुबे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी दबाव और अतिरिक्त कार्यभार से परेशान थीं। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश दोनों की स्थिति है। प्रशासन की ओर से अभी तक मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 18:46:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेमौसम बरसात से फसलों को नुकसानः कांग्रेस ने किया मुआवजा देने की मांग,सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बेमौसम बरसात से फसलों को हुये नुकसान के मामले में किसानों  को समुचित मुआवजा दिलाये जाने की मांग किया। ज्ञापन देने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि बेमौसम बरसात के कारण धान, आलू, तिलहन और हरी सब्जियों को बहुत नुकसान हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">किसान परेशान है ऐसे में सरकार तत्काल प्रभाव से किसानों को समुचित मुआवजा उपलब्ध कराये। कांग्रेस नेता देवेन्द्र श्रीवास्तव, सुरेन्द्र मिश्र, गिरजेश पाल, साधू शरन आर्य, मो. रफीक, संदीप श्रीवास्तव, अलीम</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158955/damage-to-crops-due-to-unseasonal-rains-congress-submitted-memorandum"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251104-wa0153-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बेमौसम बरसात से फसलों को हुये नुकसान के मामले में किसानों  को समुचित मुआवजा दिलाये जाने की मांग किया। ज्ञापन देने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि बेमौसम बरसात के कारण धान, आलू, तिलहन और हरी सब्जियों को बहुत नुकसान हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान परेशान है ऐसे में सरकार तत्काल प्रभाव से किसानों को समुचित मुआवजा उपलब्ध कराये। कांग्रेस नेता देवेन्द्र श्रीवास्तव, सुरेन्द्र मिश्र, गिरजेश पाल, साधू शरन आर्य, मो. रफीक, संदीप श्रीवास्तव, अलीम अख्तर, शौकत अली नन्हू, लक्ष्मी यादव, वाहिद अली सिद्दीकी आदि ने कहा कि जिलाधिकारी फसलों के नुकसान का आकलन कराकर शासन और सरकार को रिपोर्ट भेंजे जिससे धान, आलू, तिलहन और हरी सब्जियों से हुये नुकसान की भरपाई हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी को ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से इम्तियाज अहमद, गुड्डू सोनकर, अवधेश सिंह, राकेशमणि त्रिपाठी, विश्वजीत, दूधनाथ पटेल, रामबचन भारती, शोभित चौधरी, शिमला देवी, कमलादेवी, लालजीत हलवान, मो. हसन, चन्द्रशेखर वर्मा, निशान्त चौधरी, दुर्गेश चौधरी, आशुतोष कुमार पाण्डेय, राजकुमार, मनीष दूबे, मो. अकरम, आनन्द निषाद, शव्वीर अहमद, बब्लू शुक्ला, सर्वेश शुक्ला के साथ ही कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी शामिल रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158955/damage-to-crops-due-to-unseasonal-rains-congress-submitted-memorandum</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 18:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड चुनाव आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया, कांग्रेस बोली- वोट चोरी पर अदालती मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उतराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156030/supreme-court-imposed-a-fine-of-two-lakh-rupees-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/supream-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">उतराखंड चुनाव आयोग को दो या ज्यादा मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए उत्तराखंड राज्य चुनाव आयोग की याचिका खारिज कर दी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उतराखंड चुनाव आयोग पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए आयोग से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत आदेश कैसे दे सकते हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल उत्तराखंड चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव में ऐसे उम्मीदवारों का नामांकन रद्द करने से इनकार कर दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका नाम दो या ज़्यादा जगह वोटर लिस्ट में शामिल था। आयोग का यह फैसला उत्तराखंड हाकोर्ट के आदेश के खिलाफ था। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को वैधानिक प्रावधान मानने के लिए कहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसा नहीं किया। राज्य चुनाव आयोग ने एक सर्कुलर जारी कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया था कि जिन उम्मीदवारों के नाम कई मतदाता सूचियों में दर्ज हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। हाईकोर्ट ने आयोग के उस सर्कुलर पर रोक लगा दिया था। राज्य चुनाव आयोग ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आज राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को कानून के उल्लंघन पर 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश पारित किया। जस्टिस नाथ ने आयोग के वकील से सवाल किया कि आप कैसे वैधानिक प्रावधान के विपरीत निर्णय ले सकते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया था कि कई मामलों में ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जा रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनके नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में शामिल थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस फैसले पर कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि उत्तराखंड में वोट चोरी पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग गई है। सप्पल ने कहा कि सवाल है कि चुनाव आयोग ने ऐसा किया क्यों</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल जनवरी में उत्तराखंड में अर्बन लोकल बॉडी यानी म्युनिसिपल चुनाव हुए। चुनाव में बीजेपी ने अपने लोगों को गांव से शहर की वोटर लिस्ट में शिफ्ट कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि फर्जी वोटिंग से वो चुनाव जीत सकें। चुनाव पूरे होने के बाद बीजेपी ने अपने लोगों को वापस गांव की वोटर लिस्ट में शिफ्ट करना शुरू किया ताकि मई-जून में होने वाले पंचायत चुनाव में वोटिंग में नाजायज फायदा ले सके। हमने इसे पकड़ लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सप्पल ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने चुनाव आयोग को बार-बार लिखा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। हमने चुनाव आयोग को याद दिलाया कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए कम से कम 6 महीने उसी पते पर रहने का नियम है। 6 महीने से कम समय में कोई भी वोटर दोबारा अपना नाम शिफ्ट नहीं कर सकता है। कांग्रेस के विरोध के कारण बीजेपी के लोग वापस ग्रामीण एरिया में अपना नाम शामिल नहीं करवा सके। तो उन्होंने क्या करना शुरू किया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने नाम शिफ्ट करने की जगह नए सिरे से अपना नाम दूसरी जगह जुड़वा लिया। अब वो दो-दो जगह के वोटर हो गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गुरदीप सिंह सप्पल ने आगे कहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी के ऐसे लोगों को जब चुनाव में टिकट मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हमारे लोगों ने चुनाव आयोग से कहा कि ऐसे लोगों का नॉमिनेशन रद्द होना चाहिए। लेकिन चुनाव आयोग ने अपने ही नियम को मानने से मना कर दिया। इसीलिए लोग हाईकोर्ट में गए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि उत्तराखंड पंचायती राज कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2016 की धारा 9(6) और 9(7) के अनुसार ऐसे उम्मीदवारों का नॉमिनेशन रद्द किया जाए। लेकिन उत्तराखंड चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश को ही मानने से मना कर दिया और बीजेपी के लोगों को दो-दो जगह वोटर होने के बावजूद चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी! इसीलिए आज सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग पर ही पेनल्टी लगा दी है। वोट चोरी की इस दास्तान पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपनी मुहर लगा दी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 18:21:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>संविधान पर हो रहा वैचारिक हमला- सोनिया गांधी का सरकार पर आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि देश का संविधान खतरे में है और भाजपा उसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक आर्थिक और धार्मिक तानाशाही स्थापित करने के इरादे से संविधान की मूल भावना पर हमला कर रही है। सोनिया गांधी का यह संदेश दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय विधिक संगोष्ठी 'संवैधानिक चुनौतियां - दृष्टिकोण और मार्ग' में पढ़ा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर संविधान की रक्षा करेगी - संसद में, अदालतों में और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153660/constituent-ideological-attack-on-the-constitution-sonia-gandhis-charge-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि देश का संविधान खतरे में है और भाजपा उसे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक आर्थिक और धार्मिक तानाशाही स्थापित करने के इरादे से संविधान की मूल भावना पर हमला कर रही है। सोनिया गांधी का यह संदेश दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय विधिक संगोष्ठी 'संवैधानिक चुनौतियां - दृष्टिकोण और मार्ग' में पढ़ा गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर मोर्चे पर संविधान की रक्षा करेगी - संसद में, अदालतों में और सड़कों पर भी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि, 'आज संविधान घिरा हुआ है। भाजपा-आरएसएस, जिन्होंने न तो स्वतंत्रता संग्राम लड़ा और न ही समानता का सिद्धांत अपनाया, अब वही लोग सत्तासीन होकर उस संविधान की नींव को खत्म कर रहे हैं जिसका वे हमेशा विरोध करते रहे।' उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस के विचारक मनुस्मृति का गुणगान करते हैं, तिरंगे को नकारते हैं और 'हिंदू राष्ट्र' की कल्पना करते हैं जहां लोकतंत्र कमजोर और भेदभाव ही कानून बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया, असहमति को अपराध बना दिया, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया, और दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और गरीबों के साथ धोखा किया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब संविधान से समाजवाद और पंथनिरपेक्षता जैसे शब्दों को हटाने की कोशिश कर रही है, जो बाबा साहेब आंबेडकर के समान नागरिकता के सपने की बुनियाद हैं। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी और उनकी टीम को इस महत्वपूर्ण चर्चा को शुरू करने के लिए बधाई दी और कहा कि कांग्रेस का मिशन स्पष्ट है, गणराज्य की पुनर्रचना करना और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनिया गांधी ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र की नैतिक नींव है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर आधारित है। उन्होंने बताया कि संविधान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सोच और संघर्ष का परिणाम है। 1928 के नेहरू रिपोर्ट से लेकर 1934 में संविधान सभा की मांग तक, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने इसकी नींव रखी, और बाबा साहेब आंबेडकर ने इसे रूप दिया। 'आंबेडकर ने चेतावनी दी थी कि अगर सामाजिक और आर्थिक न्याय नहीं मिला, तो राजनीतिक लोकतंत्र सिर्फ एक दिखावा बन जाएगा। कांग्रेस ने इसे समझा और उस पर अमल किया, अधिकार बढ़ाए, संस्थाएं मजबूत कीं और सम्मान और समावेशिता को बढ़ावा दिया।'</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 21:54:27 +0530</pubDate>
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