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                <title>जन समस्याएं - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>जन समस्याएं RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सोनभद्र में स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखा रहे ग्राम प्रधान, टोल प्लाजा मंदिर में शौचालय के लिए सालों से तड़प रहे महंत और श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p><p><strong><em>सोनभद्र /उत्तर प्रदेश -</em></strong></p><p style="text-align:justify;">एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर और हर सार्वजनिक स्थान पर शौचालय बनवाने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र के हाथीनाला टोल प्लाजा (मालूघाट) के समीप स्थित हनुमान मंदिर इस बुनियादी सुविधा से कोसों दूर है। यहाँ के महंत और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु पिछले कई वर्षों से एक अदद शौचालय के लिए तरस रहे हैं।हाथीनाला टोल प्लाजा के ठीक बगल में स्थित हनुमान मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह अंतरराज्यीय मार्ग पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166936/mahants-and-devotees-who-have-been-yearning-for-toilets-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260122_002134.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p><p><strong><em>सोनभद्र /उत्तर प्रदेश -</em></strong></p><p style="text-align:justify;">एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर और हर सार्वजनिक स्थान पर शौचालय बनवाने का दावा कर रही है, वहीं सोनभद्र के हाथीनाला टोल प्लाजा (मालूघाट) के समीप स्थित हनुमान मंदिर इस बुनियादी सुविधा से कोसों दूर है। यहाँ के महंत और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु पिछले कई वर्षों से एक अदद शौचालय के लिए तरस रहे हैं।हाथीनाला टोल प्लाजा के ठीक बगल में स्थित हनुमान मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह अंतरराज्यीय मार्ग पर होने के कारण राहगीरों का भी मुख्य पड़ाव है।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img_20260122_002212.jpg" alt="IMG_20260122_002212" width="2097" height="2193"></img></p><p style="text-align:justify;">मंदिर के महंत श्री श्री 108 श्री बड़कू महाराज जी ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि मंदिर परिसर में शौचालय न होने के कारण उन्हें और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं और बुजुर्ग यात्रियों के लिए यह स्थिति अत्यंत अपमानजनक और कष्टकारी है। महंत जी का कहना है कि उन्होंने मालूघाट के ग्राम प्रधान को इस समस्या से कई बार अवगत कराया है।</p><p style="text-align:justify;">बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रधान के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय निर्माण के लिए पर्याप्त बजट दिया जाता है, फिर भी मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थान को अनदेखा किया जा रहा है। प्रधान की यह उदासीनता सीधे तौर पर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को विफल बनाने और शासन की छवि खराब करने की कोशिश है।</p><p style="text-align:justify;">श्रद्धालु दूर-दराज से आते हैं, लेकिन शौचालय न होने के कारण उन्हें खुले में जाना पड़ता है या शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। क्या एक मंदिर परिसर में मूलभूत सुविधा देना प्रधान की जिम्मेदारी नहीं है। हम शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हैं।टोल प्लाजा के पास स्थित होने के कारण यहाँ से गुजरने वाले सैकड़ों राहगीर पानी और विश्राम के लिए मंदिर पर रुकते हैं।</p><p style="text-align:justify;">शौचालय न होने से न केवल लोगों को परेशानी होती है, बल्कि मजबूरी में खुले में शौच जाने से आसपास के क्षेत्र में गंदगी और बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर शौचालय कब बनेगा। मंदिर के महंत, स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने अब सोनभद्र जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से सामूहिक रूप से मांग की है कि मंदिर परिसर में तत्काल सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाए।</p><p style="text-align:justify;">मालूघाट प्रधान की कार्यप्रणाली की जांच की जाए कि आखिर क्यों जनहित के इस कार्य को सालों से रोका गया है। अब देखना यह होगा कि सबका साथ, सबका विकास का नारा बुलंद करने वाली सरकार के अधिकारी इस मुद्दे पर कब संज्ञान लेते हैं और कब महंत व श्रद्धालुओं की यह वर्षों पुरानी समस्या दूर होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 00:37:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परियोजना प्रसाशन की मनमानी को लेकर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के  प्राचार्य सहित प्राध्यापकों ने राज्य मंत्री को सौंपा पत्रक</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा / सोनभद्र </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों ने अनुसूचित जाति/जनजाति एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से मिलकर उन्हें ओबरा तापीय विद्युत परियोजना प्रबंधन/ प्रशासन द्वारा टूट क्षेत्र से बाहर ओबरा तापीय परियोजना कॉलोनी में उन्हें उनके पद के अनुरूप अन्य कोई समुचित आवास आवंटित किए बिना, परियोजना कॉलोनी में उन्हें वर्तमान में आवंटित आवासों को खाली करने के लिए, की जा रही मनमानी एवं बनाए जा रहे अनुचित दबाव के संबंध में जानकारी देते हुए उन्हें पत्रक देकर उन्हें अवगत कराया कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166824/professors-including-the-principal-of-the-government-post-graduate-college"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260120-wa0048(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>ओबरा / सोनभद्र </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों ने अनुसूचित जाति/जनजाति एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से मिलकर उन्हें ओबरा तापीय विद्युत परियोजना प्रबंधन/ प्रशासन द्वारा टूट क्षेत्र से बाहर ओबरा तापीय परियोजना कॉलोनी में उन्हें उनके पद के अनुरूप अन्य कोई समुचित आवास आवंटित किए बिना, परियोजना कॉलोनी में उन्हें वर्तमान में आवंटित आवासों को खाली करने के लिए, की जा रही मनमानी एवं बनाए जा रहे अनुचित दबाव के संबंध में जानकारी देते हुए उन्हें पत्रक देकर उन्हें अवगत कराया कि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के स्वामित्व वाली पूर्णतः सरकारी संस्था है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके प्राचार्य एवं प्राध्यापक सभी प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी हैं। इस महाविद्यालय की स्थापना 1982 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा अपने सामाजिक दायित्व के निर्वहन के अंतर्गत अपने अधिकारियों, कर्मचारियों एवं यहां के नागरिकों को ओबरा में ही उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन से अनुरोध करके यहां पर करवाई थी तथा महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापको एवं कर्मचारियों को निगमीय कर्मचारियों की भांति परियोजना कॉलोनी में ही आवास, विद्युत, पानी एवं चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध कराने का वचन देते हुए उन्हें उक्त सुविधायें परियोजना कॉलोनी में ही उपलब्ध कराई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण उस समय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा, सोनभद्र के निर्माण की कार्यदायी संस्था तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद द्वारा महाविद्यालय परिसर में आवासों का निर्माण नहीं किया गया था बल्कि परियोजना कॉलोनी में ही महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापको एवं कर्मचारियों को आवास आवंटित किए गए थे। राजकीय स्नातकोत्तर, महाविद्यालय ओबरा द्वारा भी प्रवेश में ओबरा के बच्चों को अतिरिक्त अधिभार (वेटेज)अंक प्रदान कर ओबरा के बच्चों को प्रवेश में वरीयता दी जाती रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">आज ओबरा तापीय परियोजना प्रबंधन/प्रशासन द्वारा 1982 में ओबरा में इस स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार/ उच्च शिक्षा विभाग को दिए गए वचनों से मुकरते हुए ओबरा डी परियोजना के नाम पर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापकों से निजी संस्था के कर्मचारी मानते हुए उनसे अवैधानिक रूप से आवास रिक्त करने के संबंध में अपनी मनमानी करते हुए उन पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। एक तरफ महाविद्यालय के प्राचार्य/ प्राध्यापकों के ठीक बगल में, समीप में एवं उसी कॉलोनी में निगमीय अधिकारी/कर्मचारी रह रहे हैं, दूसरी तरफ महाविद्यालय के प्राध्यापकों/ कर्मचारियो से ओबरा डी परियोजना के नाम पर आवास खाली करने को कहा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लग रहा है कि ओबरा डी परियोजना का बॉयलर,टरबाइन, कोल हैंडलिंग प्लांट, स्विचयार्ड सब चुन -चुन कर राजकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों/कर्मचारियो के आवासों में ही केवल लगाया जाएगा। यह ओबरा डी परियोजना के नाम पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा के प्राध्यापकों/कर्मचारियो से आवास खाली करने की सोची समझी साजिश, षड्यंत्र मात्र प्रतीत हो रहा है। परियोजना प्रबंधन की इस प्रकार की कार्यवाही पूर्णतः अनुचित एवं अन्याय पूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी परियोजना की स्थापना के लिए सामाजिक दायित्व के निर्वहन के अंतर्गत परियोजना प्रबंधन/ प्रशासन द्वारा वहां के लोगों के आवास, चिकित्सा, शिक्षा, विद्युत,पानी इत्यादि आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने एवं उनके निमित्त स्थापित संस्थाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी उक्त समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">महाविद्यालय के प्राचार्य प्राध्यापको ने ओबरा तापीय परियोजना प्रबंधन प्रशासन द्वारा की जा रही मनमानी, सौतेले व्यवहार एवं अनुचित दबाव का विरोध करते हुए, परियोजना प्रबंधन प्रशासन, अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड सहित मा. राज्यपाल ,मुख्यमंत्री , अनुसूचित जाति जनजाति एवं समाज कल्याण राज्य मंत्री सहित जिलाधिकारी एवं उप जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि ओबरा एक अत्यंत छोटी सी जगह है जहां पर निजी आवासीय सुविधा न के बराबर है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतः महाविद्यालय परिसर में ही महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कर्मचारियों के लिए आवासों का निर्माण कराया जाए तथा जब तक आवासों का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक ओबरा तापीय परियोजना,उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा महाविद्यालय की स्थापना के समय दिए गए वचन का पालन करते हुए अपने अधिकारियों, कर्मचारियों की भांति महाविद्यालय के प्राध्यापको एवं कर्मचारियों को भी अपनी परियोजना कॉलोनी में ही आवास उपलब्ध कराए। टूट क्षेत्र से बाहर परियोजना कॉलोनी में बिना दूसरा आवास आवंटित किए, उनसे वर्तमान आवास रिक्त न कराया जाए । जिससे वे लोग बिना किसी मानसिक तनाव के स्वस्थ मन से अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन कर सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 19:56:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओबरा तापीय परियोजना विस्तारीकरण आशियाना बचाने की गुहार के साथ सड़कों पर उतरा जनमानस</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र (ओबरा) / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण ओबरा तापीय परियोजना के विस्तारीकरण की सुगबुगाहट के बीच अब वहां दशकों से रह रहे गरीबों और श्रमिकों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। परियोजना क्षेत्र से बेदखल किए जाने के नोटिस और अल्टीमेटम के विरोध में संविदा सफाई कर्मियों, नगर पंचायत कर्मियों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों ने एक विशाल शांतिपूर्ण जनसंपर्क यात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260118-wa0061(1).jpg" alt="IMG-20260118-WA0061(1)" width="1200" height="960" /></p>
<p style="text-align:justify;">परियोजना परिसर में पिछले 35 से 40 वर्षों से निवास कर रहे इन परिवारों का दर्द अब सड़कों पर छलक आया है। प्रदर्शनकारियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/166580/%E0%A4%93%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%B8%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260118-wa0060(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र (ओबरा) / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण ओबरा तापीय परियोजना के विस्तारीकरण की सुगबुगाहट के बीच अब वहां दशकों से रह रहे गरीबों और श्रमिकों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। परियोजना क्षेत्र से बेदखल किए जाने के नोटिस और अल्टीमेटम के विरोध में संविदा सफाई कर्मियों, नगर पंचायत कर्मियों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों ने एक विशाल शांतिपूर्ण जनसंपर्क यात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260118-wa0061(1).jpg" alt="IMG-20260118-WA0061(1)" width="1280" height="960"></img></p>
<p style="text-align:justify;">परियोजना परिसर में पिछले 35 से 40 वर्षों से निवास कर रहे इन परिवारों का दर्द अब सड़कों पर छलक आया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी दो-तीन पीढ़ियां इसी परियोजना की सेवा में खप गईं। इनमें से अधिकांश लोग न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन पर काम कर रहे हैं, जो ओबरा तापीय परियोजना और उससे जुड़े अधिकारियों व कर्मियों की सेवा में निरंतर लगे रहे। जनसंपर्क यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।</p>
<p style="text-align:justify;">निवासियों के अनुसार, लगभग दो वर्ष पहले उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया था कि सरकार की मंशा के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया जाएगा। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य सरकारी योजनाओं के तहत स्थाई रूप से बसाने का वादा किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अब इन आश्वासनों को दरकिनार कर उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है। यात्रा में शामिल संविदा कर्मियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उनकी मजदूरी इतनी कम है कि वे बमुश्किल अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार का भरण-पोषण कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि उन्हें उनके घरों से बेदखल किया गया, तो हजारों की संख्या में लोग सड़क पर आ जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">हम परियोजना के लिए दिन-रात पसीना बहाते हैं, लेकिन आज जब विस्तारीकरण की बात आई तो हमें ही सबसे पहले बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। हमारे पास नई जमीन खरीदने या घर बनाने के लिए संसाधन नहीं हैं। एक प्रदर्शनकारी श्रमिक इस शांतिपूर्ण यात्रा के माध्यम से गरीब जनमानस ने एकजुटता का परिचय दिया है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे जल्द ही एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ जिलाधिकारी (DM) और मुख्यमंत्री (CM) के समक्ष उपस्थित होकर अपनी पीड़ा साझा करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 20:44:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनभद्र अपनों की सरकार में आदिवासियों की उपेक्षा मंत्री-विधायकों की फौज, फिर भी लकड़ी के मेड़ पर टिकी 50 परिवारों की जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">  एक ओर भारत डिजिटल इंडिया और अमृत काल के भव्य नारों के साथ वैश्विक पटल पर अपनी धमक जमा रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के ऊर्जांचल जिले सोनभद्र से आई एक तस्वीर इन दावों की कड़वी हकीकत बयां कर रही है।आजादी के 78 साल बाद भी जनपद के चोपन विकास खण्ड का कोटा ग्राम सभा के छीकराडांण अंतर्गत पटीहिवा टोला के करीब 50 आदिवासी परिवार आज भी एक अदद पुलिया के लिए तरस रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img_20260110_001354.jpg" alt="IMG_20260110_001354" width="908" height="513" /></p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नाला पार करने के लिए लकड़ी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165617/sonbhadra-government-of-their-own-people-neglect-of-tribals-army"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260110_001457.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> एक ओर भारत डिजिटल इंडिया और अमृत काल के भव्य नारों के साथ वैश्विक पटल पर अपनी धमक जमा रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के ऊर्जांचल जिले सोनभद्र से आई एक तस्वीर इन दावों की कड़वी हकीकत बयां कर रही है।आजादी के 78 साल बाद भी जनपद के चोपन विकास खण्ड का कोटा ग्राम सभा के छीकराडांण अंतर्गत पटीहिवा टोला के करीब 50 आदिवासी परिवार आज भी एक अदद पुलिया के लिए तरस रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img_20260110_001354.jpg" alt="IMG_20260110_001354" width="908" height="513"></img></p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर नाला पार करने के लिए लकड़ी के अस्थाई और जर्जर मेड़ (पुल) का सहारा लेने को मजबूर हैं। सोनभद्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहाँ चार विधायक, एक सांसद और सरकार में कल्याण समाज स्तर के मंत्री होने के बावजूद धरातल पर विकास की गति थमी हुई है। ग्रामीणों का आक्रोश विशेष रूप से प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री संजीव सिंह गौड़ के प्रति है, जो स्वयं इसी आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों का सवाल है कि जब मंत्री स्वयं उनके समाज से हैं, तो उनके अपने ही लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों भटक रहे हैं। स्थानीय लोगों ने तीखा सवाल उठाया है कि आखिर विधायक निधि और सांसद निधि का बजट कहाँ खर्च हो रहा है। जिला मुख्यालय से मात्र 45 किमी की दूरी पर आदिवासियों की यह बदहाली जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। पुलिया न होने का सबसे अमानवीय पहलू स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता है। पटीहिवा टोला के निवासियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया सड़क और पुल के अभाव में एंबुलेंस टोले तक नहीं आ पाती।</p>
<p style="text-align:justify;">गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लादकर उफनते नाले के बीच से पार ले जाना पड़ता है। मानसून के दौरान नाला उफान पर होते ही ये 50 परिवार पूरी दुनिया से कट जाते हैं। संपर्क टूटने के कारण आपातकालीन स्थिति में ये ग्रामीण भगवान भरोसे होते हैं। मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर इस लकड़ी के मेड़ को पार करते हैं। एक छोटी सी चूक यहाँ बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय निवासी रामशरण ने बताया कि पिछले सात दशकों में कई प्रधान आए और गए, बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं लगी। ग्रामीणों ने वर्तमान प्रधान पहलाद चेरो पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे समस्या से पूरी तरह अवगत हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक टोले का हाल जानने नहीं आए। पुलिया न होने के कारण निर्माण सामग्री (ईंट, सीमेंट, बालू) ले जाने वाले वाहन टोले के अंदर नहीं जा सकते। इसका सीधा असर प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी स्कीमों पर पड़ रहा है। वाहन न पहुँच पाने के कारण गरीब ग्रामीण अपने स्वीकृत कच्चे घरों को पक्का बनाने में भी असमर्थ हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल एक पुलिया का निर्माण नहीं, बल्कि उस भरोसे की बहाली का सवाल है जो आदिवासियों ने अपनी जाति के मंत्रियों और क्षेत्र के विधायकों पर जताया था। समाज कल्याण मंत्री के गृह जनपद में आदिवासियों का लकड़ी के पुल पर चलना लोकतंत्र के लिए एक बड़ी विडंबना है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और सरकार इन 50 परिवारों की सुध लेती है या इन्हें फिर से उन्हीं जर्जर लकड़ियों के सहारे छोड़ दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 00:24:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनभद्र के जऊवाजोत में पानी के लिए हाहाकार, ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन ,नदी-नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>कोन/सोनभद्र- </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">जनपद के नवसृजित विकास खंड कोन के अंतर्गत जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) दम तोड़ती नजर आ रही है। शुक्रवार को ग्राम जऊवाजोत (बागेसोती) में ग्रामीणों ने जल आपूर्ति न होने और कार्यदायी संस्था की लापरवाही के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों पर योजना पूरी दिखाई जा रही है, जबकि हकीकत में लोग फ्लोराइड युक्त और नदी-नालों का गंदा पानी पीने को विवश हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/1001011212.jpg" alt="1001011212" width="1200" height="960" /></p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र में हर घर नल योजना धरातल पर धराशायी साबित हो रही है। सूत्रों के अनुसार कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165598/villagers-protested-loudly-for-water-in-sonbhadras-jauvajjot-forced-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260109_195945.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>कोन/सोनभद्र- </em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">जनपद के नवसृजित विकास खंड कोन के अंतर्गत जल जीवन मिशन (हर घर नल योजना) दम तोड़ती नजर आ रही है। शुक्रवार को ग्राम जऊवाजोत (बागेसोती) में ग्रामीणों ने जल आपूर्ति न होने और कार्यदायी संस्था की लापरवाही के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों पर योजना पूरी दिखाई जा रही है, जबकि हकीकत में लोग फ्लोराइड युक्त और नदी-नालों का गंदा पानी पीने को विवश हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/1001011212.jpg" alt="1001011212" width="1280" height="960"></img></p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र में हर घर नल योजना धरातल पर धराशायी साबित हो रही है। सूत्रों के अनुसार कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लि. द्वारा कई ग्राम पंचायतों में काम पूरा किए बिना ही उसे कागजों पर पूर्ण दिखा दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे तो पाइप डाले गए, लेकिन गलियों और घरों के अंदर कनेक्शन नहीं पहुंचे। मरम्मत और चोकिंग के नाम पर महीनों से काम लटका हुआ है। सोन नदी के इंटेक पर बालू जमा होने का बहाना बनाकर जलापूर्ति ठप रखी गई है। कोन क्षेत्र के कचनरवा, असनाबांध और कुड़वा जैसे इलाके फ्लोरोसिस से बुरी तरह प्रभावित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img_20260109_195507.jpg" alt="IMG_20260109_195507" width="720" height="391"></img></p>
<p style="text-align:justify;">शुद्ध पानी न मिलने के कारण लोग दूषित जल पी रहे हैं, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डियाँ कमजोर हो रही हैं और कई लोग खाट पर पड़ गए हैं और कई लोगों की असामयिक मौत हो चुकी है।स्थानीय लोगों के अनुसार असनाबांध वार्ड नंबर 3 में पिछले 8 महीनों से पानी नहीं आया है। मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत के बावजूद विभाग ने बिना काम कराए ही अपनी रिपोर्ट लगाकर मामला रफा-दफा कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जलापूर्ति ठप होने से प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं। कचनरवा (असनाबांध), बड़ाप, रोहिन वादामर, नरोईयादामर, मधुरी, बागेसोती (सिंगा, डूमर), कुड़वा (धौर वादामर, शिवाखाडी), गोबरदाहा, पीपरखाङ, धंगरडीहा, मझिगवां, चांचीकला, खरौंधी और मिश्री। वरिष्ठ समाजसेवी जोखन प्रसाद यादव के नेतृत्व  प्रदर्शनकारियों ने जल निगम व संबंधित संस्था के खिलाफ मुर्दाबाद के नारेबाजी करते हुए कहा कि कार्यदायी संस्था की मनमानी से सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था ने अधिकांश ग्राम प्रधानों से फर्जी तरीके से कार्य पूर्ण होने का प्रमाण पत्र बनवाकर शासन को भेज दिया है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि भ्रष्ट कार्यदायी संस्था को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए। दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच हो और प्रभावित गांवों में तत्काल शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने दोटूक में कहा है कि यदि जल्द ही नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हुई, तो वे जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। जिसके क्रम में अरुण सिंह (अधिशासी अभियंता, जल निगम) ने बताया कि खनिज विभाग के सहयोग से पोकलेन द्वारा बालू हटाने का कार्य किया गया, लेकिन पानी के स्तर में सुधार नहीं हुआ। हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। सुदर्शन बिंद (प्रोजेक्ट मैनेजर, संस्था): इस विषय पर उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।</p>
<p style="text-align:justify;">अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना को पलिता लगाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या क्षेत्र की जनता इसी तरह तिल-तिल कर मरने को मजबूर रहेगी। प्रदर्शन में मुख्य रूप से उपस्थित जोखन प्रसाद यादव, मोबिन अंसारी, मिंटू शर्मा, छठू, रामनाथ मौर्या, गुड्डू पनिका आदि।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 20:19:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्यासे यात्री और बदहाल व्यवस्था , सफेद हाथी साबित हो रहा हाथीनाला में बनी सौर ऊर्जा पानी टंकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र (हाथीनाला) / उत्तर प्रदेश -</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला जिसे प्रदेश का ऊर्जांचल और सबसे अधिक राजस्व देने वाला जनपद कहा जाता है, आज अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आंसू बहा रहा है। एक तरफ सरकार हर घर नल, हर घर जल का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हाथीनाला क्षेत्र में यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए बनाया गया सौर ऊर्जा जल संयत्र पिछले एक साल से भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260109-wa0008.jpg" alt="IMG-20260109-WA0008" width="720" height="1200" /></p>
<p style="text-align:justify;">हाथीनाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत हनुमान मंदिर से महज १० कदम</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165551/thirsty-travelers-and-poor-system-solar-energy-water-tank-built"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260109-wa0007.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र (हाथीनाला) / उत्तर प्रदेश -</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला जिसे प्रदेश का ऊर्जांचल और सबसे अधिक राजस्व देने वाला जनपद कहा जाता है, आज अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आंसू बहा रहा है। एक तरफ सरकार हर घर नल, हर घर जल का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हाथीनाला क्षेत्र में यात्रियों की प्यास बुझाने के लिए बनाया गया सौर ऊर्जा जल संयत्र पिछले एक साल से भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260109-wa0008.jpg" alt="IMG-20260109-WA0008" width="720" height="1280"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हाथीनाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत हनुमान मंदिर से महज १० कदम की दूरी पर स्थित यह सौर ऊर्जा संचालित पानी की टंकी लाखों की लागत से स्थापित की गई थी। यह स्थान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से आस-पास के क्षेत्र और दुद्धी विंधमगंज के स्थानीय निवासी गुजरते हैं। झारखंड और बिहार जाने वाले अंतरराज्यीय यात्रियों का भारी जमावड़ा रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मजदूर और कामगार अपनी थकान मिटाने यहाँ रुकते हैं। विडंबना यह है कि तीन साल तक सेवा देने के बाद, चौथे साल की शुरुआत में ही यह टंकी सफेद हाथी बन गई। अब यहाँ यात्री आते तो हैं, लेकिन सूखी टोटियां देख मायूस होकर लौट जाते हैं। स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से इसकी शिकायत की। एक साल बीतने को है, लेकिन मरम्मत के नाम पर एक ईंट भी नहीं हिली। सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया गया, लेकिन जनता को पानी नसीब नहीं हो रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई इस योजना का चार साल के भीतर दम तोड़ देना कहीं न कहीं इसके निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़ा करता है। हाथीनाला जैसे मुख्य जंक्शन पर पानी की सुविधा न होना न केवल राहगीरों के लिए परेशानी का सबब है, बल्कि यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी एक बड़ा धब्बा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषकर लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए यह पानी की टंकी एक बड़ा सहारा थी। अब लोगों को पीने के पानी के लिए महंगे बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ता है या मिलों दूर स्थित किसी निजी स्रोत की तलाश करनी पड़ती है। रोजाना हजारों यात्री और राहगीर प्रभावित। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और विकास खंड अधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल जलापूर्ति कराने की मांग किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Jan 2026 00:40:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेलगुडवा  कोन सडक निर्माण मे देरी को लेकर अपना दल एस ने अघिशासी  अभियंता को सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">तेलगुडवा से कोन तक सडक निर्माण कार्य मे हो रही अत्यधिक देरी को लेकर लोक निर्माण विभाग पर दबाव बढता जा रहा है ।इसी क्रम मे प्रदेश उपाध्यक्ष युवा मंच अपना दल एस आनन्द पटेल दयालु के नेतृत्व मे अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग को ज्ञापन सौंपा गया। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260107-wa0017.jpg" alt="IMG-20260107-WA0017" width="1200" height="1200" /></p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञापन मे बताया गया कि उक्त सडक निर्माण कार्य का टेंडर लगभग एक वर्ष पूर्व हो चुका है लेकिन कार्य की गति अत्यन्त धीमी है जिससे क्षेत्रीय जनता मे असंतोष व्याप्त है। श्री दयालु ने बताया कि इस सडक की स्वीकृति के लिए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165434/apna-dal-s-submitted-memorandum-to-the-executive-engineer-regarding"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img-20260107-wa0014.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">तेलगुडवा से कोन तक सडक निर्माण कार्य मे हो रही अत्यधिक देरी को लेकर लोक निर्माण विभाग पर दबाव बढता जा रहा है ।इसी क्रम मे प्रदेश उपाध्यक्ष युवा मंच अपना दल एस आनन्द पटेल दयालु के नेतृत्व मे अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग को ज्ञापन सौंपा गया। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260107-wa0017.jpg" alt="IMG-20260107-WA0017" width="4096" height="2304"></img></p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञापन मे बताया गया कि उक्त सडक निर्माण कार्य का टेंडर लगभग एक वर्ष पूर्व हो चुका है लेकिन कार्य की गति अत्यन्त धीमी है जिससे क्षेत्रीय जनता मे असंतोष व्याप्त है। श्री दयालु ने बताया कि इस सडक की स्वीकृति के लिए उनकी टीम द्वारा लम्बे समय तक संघर्ष किया गया था । जिसके क्रम में उप जिलाधिकारी जिलाधिकारी मण्डलायुक्त खनन अधिकारी को ज्ञापन देने से लेकर जन हस्ताक्षर अभियान तक चलाया गया इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मा. आशीष पटेल जी के पत्राचार के उपरान्त सडक स्वीकृत हो सकी। </p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इतने लम्बे संघर्ष के बाद भी यदि निर्माण कार्य धीमी गति से चलता है तो यह आम नागरिको के लिए कष्टकारी होने के साथ सरकार की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न खडा करता है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि ठेकेदार को स्पष्ट और कठोर निर्देश जारी कर निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कराया जाए साथ ही कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए मानक के अनुरूप कार्य न होने की स्थिति मे विभागीय लापरवाही मानी जाएगी। </p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान प्रदेश सचिव अल्पसंख्यक मंच जनाब महताब आलम जिला उपाध्यक्ष जनाब शिबू शेख तथा जिला उपाध्यक्ष राष्ट्रीय नवनिर्माण सेना विकास घटक सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/165434/apna-dal-s-submitted-memorandum-to-the-executive-engineer-regarding</link>
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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 16:34:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियों और बिजली परियोजना के बीच अंधेरे में अमर डम-डम गुफा, विकास की राह देख रहे श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">  4 मार्च 1989 को मिर्जापुर से पृथक होकर बना सोनभद्र जिला अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के लिए विश्व विख्यात है। भारत का यह इकलौता जनपद है जिसकी सीमाएं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार को स्पर्श करती हैं। प्राकृतिक संपदा और औद्योगिक विकास के बावजूद, जिले की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक धरोहर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260106-wa0115.jpg" alt="IMG-20260106-WA0115" width="1200" height="1200" /></p>
<p style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि डाला क्षेत्र में एक तरफ अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री और दूसरी तरफ एसीसी (ACC) सीमेंट फैक्ट्री जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। वहीं पास ही ओबरा में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165378/devotees-waiting-for-the-development-of-amar-dum-dum-cave-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/img_20260107_000308.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;"> 4 मार्च 1989 को मिर्जापुर से पृथक होकर बना सोनभद्र जिला अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति के लिए विश्व विख्यात है। भारत का यह इकलौता जनपद है जिसकी सीमाएं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार को स्पर्श करती हैं। प्राकृतिक संपदा और औद्योगिक विकास के बावजूद, जिले की एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक धरोहर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260106-wa0115.jpg" alt="IMG-20260106-WA0115" width="4080" height="2296"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि डाला क्षेत्र में एक तरफ अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री और दूसरी तरफ एसीसी (ACC) सीमेंट फैक्ट्री जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। वहीं पास ही ओबरा में देश को रोशन करने वाली विशाल बिजली परियोजना है, जिसे 'ऊर्जा की राजधानी' कहा जाता है। इन दो बड़ी फैक्ट्रियों और बिजली के पावर हाउस के बीच स्थित सलाई बनवां का शिव-पार्वती अमर डम-डम गुफा मंदिर आज भी एक पक्की सड़क और बिजली के कनेक्शन के लिए संघर्ष कर रहा है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260106-wa0117.jpg" alt="IMG-20260106-WA0117" width="4080" height="2296"></img></p>
<p style="text-align:justify;">यह गुफा मंदिर अपनी दिव्यता और तपस्वियों की साधना स्थली के रूप में विख्यात है। श्रद्धालु यहाँ दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं। विडंबना यह है कि जहाँ केंद्र और प्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं इस प्राचीन स्थल तक पहुँचने का मार्ग आज भी बदहाल है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, शासन ने यहाँ रैन बसेरा, पानी के लिए बोरिंग और बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाएं तो दी हैं, लेकिन मुख्य बुनियादी जरूरतें—बिजली और सड़क—को नजरअंदाज कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-01/img-20260106-wa0120.jpg" alt="IMG-20260106-WA0120" width="4080" height="2296"></img></p>
<p style="text-align:justify;">बिना बिजली के रैन बसेरा और बिना सुगम सड़क के ये बेंच श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह उपयोगी साबित नहीं हो रहे हैं। हर-हर महादेव सेवा समिति के अध्यक्ष भानु प्रताप ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा सोनभद्र से उत्पन्न बिजली से आधा देश रोशन होता है, लेकिन दुःखद है कि यहाँ का यह पवित्र मंदिर वर्षों से अंधेरे में डूबा है। बरसात के दिनों में रास्ता कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाता है, जिससे वृद्धों, महिलाओं और बच्चों को मंदिर पहुँचने में भारी शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय ग्रामीणों और सेवा समिति ने जिला प्रशासन से तीन मुख्य मांगें की हैं।मंदिर मार्ग को तत्काल गड्ढा मुक्त कर पक्का बनाया जाए। मंदिर और गुफा क्षेत्र को बिजली से जोड़कर प्रकाश की व्यवस्था की जाए। सफाई कर्मियों की नियुक्ति स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थायी सफाई व्यवस्था हो। यदि प्रशासन इन बुनियादी कमियों को दूर कर दे, तो इस ऐतिहासिक गुफा मंदिर की सुंदरता निखर उठेगी। इससे न केवल स्थानीय पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास और राजस्व में भी वृद्धि होगी। अब क्षेत्र की जनता की निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस ऊर्जा राजधानी के अंधेरे को दूर कर श्रद्धालुओं की राह आसान बनाई जाएगी?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 00:05:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोन  क्षेत्र में पानी को  लेकर ग्रामीणों ने किया  प्रदर्शन, फ्लोराइड युक्त व नदी नाले का  पानी पीने को मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अजीत सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </strong></p>
<p><strong>कोन/ सोनभद्र </strong></p>
<p>जनपद के नव सृजित विकास खंड कोन अंतर्गत जल जीवन मिशन हर्रा कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत हर घर नल योजना धरातल पर धाराशायी साबित हो रहा है ।मिली जानकारी के अनुसार कई ग्राम पंचायतों में नल कनेक्शन का कार्य पूरा नहीं सका किन्तु कागजों पर पूर्ण दिखा दिया है जिससे संबंधित ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन किया । जिसके क्रम में कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लि. के द्वारा वास्तविकता पर पर्दा डालने के उद्देश्य से सड़क किनारे किनारे पाईप ढकने और नल कनेक्शन मरम्मत करने का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164019/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8--%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4-%E0%A4%B5-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE--%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%B0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img_20251222_132140.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अजीत सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </strong></p>
<p><strong>कोन/ सोनभद्र </strong></p>
<p>जनपद के नव सृजित विकास खंड कोन अंतर्गत जल जीवन मिशन हर्रा कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत हर घर नल योजना धरातल पर धाराशायी साबित हो रहा है ।मिली जानकारी के अनुसार कई ग्राम पंचायतों में नल कनेक्शन का कार्य पूरा नहीं सका किन्तु कागजों पर पूर्ण दिखा दिया है जिससे संबंधित ग्रामीणों ने कई बार प्रदर्शन किया । जिसके क्रम में कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लि. के द्वारा वास्तविकता पर पर्दा डालने के उद्देश्य से सड़क किनारे किनारे पाईप ढकने और नल कनेक्शन मरम्मत करने का कार्य तो कुछ जगहों पर शुरु किया गया था पर आज भी कई महीनें समय व्यतीत होने के बाद भी चोकिंग व मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो सका।</p>
<p>गौरतलब है सोन नदी में इंटेक का देखा जा सकता है जो बिना बरसात के ही नदी की धारा परिवर्तित हो जाती है जिससे पानी के आय दिन पानी का लेबल लो हो जाता है जिसका आलम है कि कई महीनों से जलापूर्ति ठप है जिससे सहज ही गर्मी के दिनों पानी का लेबल व कार्यदायी संस्था की गुणवत्ता का अनुमान लगाया जा सकता है जबकि किसी भी प्रोजेक्ट को लगाने से पहले उसकी भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है फिर आखिर नदी की धारा परिवर्तित बार बार क्यों हो जा रही है यह सवाल लोगों के जेहन में घर कर गया है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार आधार कार्ड के आधार पर कनेक्शन दिए गए, लेकिन कई महीनों से नलों से एक बूंद पानी नहीं आ रहा था जहाँ कोन क्षेत्र के संबंधित कार्यदायी संस्था द्वारा आम जनता को गुमराह करने का सिलसिला अनवरत जारी है यही नहीं बल्कि संस्था के कामगारों द्वारा कनेक्शन व मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति करके कागजी कोरम पूरा किया जा रहा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि कोन क्षेत्र सहित फ्लोरोसिस प्रभावित कचनरवा , असनाबांध, कुड़वा क्षेत्र में हर घर नल योजना लोगों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है।</p>
<p>मिली जानकारी के अनुसार संबंधित संस्था द्वारा कई महीनों से कोन क्षेत्र में पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। बतातें चलें कि कचनरवा के टोला असनाबांध लिंक रोड वार्ड नंबर 3 में विगत आठ महीनों से ऊपर हो गया है किन्तु आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका । जिसके क्रम में ग्रामीणों ने सी एम हेल्प लाइन पर भी शिकायत किया किन्तु संबंधित विभाग द्वारा महीनों बाद बिना कार्य पूरा कराये ही अपनी जाँच आख्या लगाकर अपने कर्तब्य की इतिश्री कर ली गयी।</p>
<p>जिसके क्रम में पुन: ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए ऐसे भ्रष्ट संस्था को ब्लैक लिस्टेड करने की मांग किया है। इसी तरह ग्राम पंचायत कचनरवा के असनाबांध वार्ड -3, बड़ाप , बागेसोती के सिंगा , कुड़वा के धौर वादामर , सहित कई गांवों में हर घर नल योजना के तहत पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जबकि लोग पानी के लिए समय समय पर कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।ग्रामीणों का कहना है कि लगभग आठ महीनों से कोन क्षेत्रों में पानी आपूर्ति नहीं की जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि हर घर नल योजना क्षेत्र में फ्लाप साबित हो रहा है यहाँ तक कि कई जगहों पर नल कनेक्शन तक नहीं है । ग्रामीणो ने बताया कि आज भी लोग धौर वादामर , कुड़वा सहित अन्य स्थानों के लोग नदी नाले ,चुआंड से लेकर पानी पीने को मजबूर है।</p>
<p>जिसके क्रम में <strong>जिला पंचायत सदस्य</strong> छविंद्र नाथ चेरो व वरिष्ठ समाजसेवी बिहारी प्रसाद यादव ने संबंधित संस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित संस्था की मनमानी इस कदर बढ़ गयी है कि क्षेत्र में आज भी लोग लोग नदी नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं जहाँ जवान भी बूढ़े दिखने लगे हैं और बच्चों के दांत भी पीले पड़ जा रहे हैं वहीं रीढ़ की हड्डी कमजोर होती जा रही है और आय दिन लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आने से लोग काल के मुँह में समा जा रहे हैं ।</p>
<p>उन्होंने ऐसे भ्रष्ट संस्था को तत्काल ब्लैक लिस्टेड की जाये ताकि सरकार की छवि धूमिल न हो सके। जिससे ग्रामीणों को नियमित पेय जलापूर्ति हो सके।बतादें कि अभी तक बहुतायत में लोगों के घरों में नल कनेक्शन तक नहीं है और शिकायतकर्ताओं के शिकायत का नतीजा सिफर निकलता है। इसी तरह कोन क्षेत्र के चांची खुर्द, नकतवार , मझिगवां ,मिश्री , खरौंधी , कचनरवा मुख्य बाजार, असनाबांध ,बड़ाप, रोहिनवादामर् , भेलवाखाडी ,नरोईयादामर, मधुरी ,बागेसोती , सिंगा , कुड़वा के सेमर वा दामर धौरवादामर्, शिवाखाडी , डीलवाहा, गोबरदाहा , पीपरखाड़, बिछमरवा, धंगरडिहा सहित कई जगहों पर आज तक लोगों को नियमित शुद्ध पेयजल नहीं मिल सका।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि जहाँ कनेक्शन है वहाँ भी कई महीनों से पानी नहीं मिल रहा है जिससे लोगों में आक्रोश ब्याप्त है। सबसे बड़ा सवाल है कि भारत सरकार व प्रधानमंत्री सहित मुख्यमंत्री की सबसे महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे जल मिशन के तहत परियोजना के द्वारा जनहित व कामकाजी महिलाओं को देखते हुए बड़ी तेजी से कार्य शुरू किया गया किन्तु संबंधित कार्यदायी संस्था के उदासिनता व मनमानी पूर्ण कार्य प्रणाली के कारण लोगों के नलों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है बल्कि उनकी योजना को ठेंगा दिखाया जा रहा है जो बेहद शर्मनाक है।</p>
<p> संस्था के द्वारा कई महीनों से पानी देने का आश्वासन् दिया जा रहा है और जो अब केवल लोगों के दरवाजे पर नहीं बल्कि कागजों में सिमट कर रह गया है। जिसके क्रम में ग्रामीणों ने सोमवार को मझिगवां में जोरदार प्रदर्शन करते हुए नियमित पानी आपूर्ति की मांग किया।इसी तरह मझिगवां सहित बागेसोती के टोला सिंगा में कई वर्षों से पानी नहीं जा रहा है और ऐसे ही पूरे ग्राम पंचायतों में पानी आपूर्ति नहीं की जा रही है जिससे लोगों के सामने बहुत बड़ी समस्या खड़ी है और बतादें कि ग्राम पंचायतों में हैंडपंपों की मरम्मत के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपये की धन निकासी की जाती है पर धरातल पर अभी भी कई हैंडपंप बंद पड़े हैं इसे देखने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं हैं।</p>
<p>बतातें चलें कि संबंधित संस्था के द्वारा अधिकांश ग्राम प्रधानों व पंचायत की जल समितियों से संपूर्ण गांव में जलापूर्ति होने का प्रमाण पत्र बनवा कर शासन स्तर पर भेजकर खानापूर्ति किया गया है। जिसके क्रम में ग्रामीणों ने सूबे के मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए शुद्ध पेयजल आपूर्ति कराने व संबंधित कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्टेड करने की मांग किया है।इस बावत <strong>अधिशासी अभियंता (</strong> जल निगम) अरुण सिंह ने कहा कि जल्द ही समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है है वहीं संस्था के <strong>प्रोजेक्ट मैनेजर </strong>सुदर्शन बिंद से पक्ष जानने का प्रयास किया गया किन्तु कॉल रीसिव नहीं हुआ।</p>
<p>अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या लोगों को पानी मिल पायेगा या यह योजना संबंधित कार्यदायी संस्था के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जायेगा। लोगों कि मानें तो उक्त संस्था को ब्लैक लिस्टेड कर नये संस्था को दिया जाये ताकि लोगों को नियमित पानी मिल सके जिससे सरकार की छवि धूमिल न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 18:21:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ को दिया जांच के आदेश- राकेश केशरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">राकेश केशरी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र के माध्यम से अवगत कराया था कि ओबरा के सभी क्षेत्र का पूरा कूड़ा ट्रॉली द्वारा ओबरा तापीय परियोजना के भूमि सेक्टर 9 मार्ग के किनारे फेंका जा रहा है जिसमें प्लास्टिक की मात्रा भी रहता है। वहां आसपास आवासीय क्षेत्र व विद्यालय मौजूद है जिसके लोग इस बदबू से काफी परेशान है सड़क किनारे फेंके गए कूड़े से दुर्गंध निकलता रहता है, जिससे राह चलना मुश्किल है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/img-20251006-wa0080.jpg" alt="IMG-20251006-WA0080" width="1200" height="960" /></p>
<p style="text-align:justify;">कूड़े के ढेर में आग लगा दी जाती है, जो दिन-रात सुलगती</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156705/central-pollution-control-board-ordered-an-inquiry-to-up-pollution"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img-20251006-wa0082.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">राकेश केशरी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र के माध्यम से अवगत कराया था कि ओबरा के सभी क्षेत्र का पूरा कूड़ा ट्रॉली द्वारा ओबरा तापीय परियोजना के भूमि सेक्टर 9 मार्ग के किनारे फेंका जा रहा है जिसमें प्लास्टिक की मात्रा भी रहता है। वहां आसपास आवासीय क्षेत्र व विद्यालय मौजूद है जिसके लोग इस बदबू से काफी परेशान है सड़क किनारे फेंके गए कूड़े से दुर्गंध निकलता रहता है, जिससे राह चलना मुश्किल है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/img-20251006-wa0080.jpg" alt="IMG-20251006-WA0080" width="1280" height="960"></img></p>
<p style="text-align:justify;">कूड़े के ढेर में आग लगा दी जाती है, जो दिन-रात सुलगती रहती है।नगर पंचायत ओबरा स्वच्छ भारत अभियान की धज्जियां उड़ा रहा है। जहां पर गाय भी कूड़े के अंबार में गंदा प्लास्टिक खाते नजर आ रही है जो उनके लिए जहर के समान काम करता है।कूड़े से निकलने वाला धुआं और दुर्गंध स्थानीय निवासियों, विद्यालय से आने जाने वाले बच्चों,राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-10/img-20251006-wa0081.jpg" alt="IMG-20251006-WA0081" width="1600" height="1200"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हवा के कारण कचरा उड़कर सड़क पर भी फैल जाता है। लोगों को नाक पर रुमाल रखकर इस रास्ते से गुजरना पड़ता है इस पूरे मामले में लिखित पत्र भारत सरकार को भेजा गया था जिसको संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भारत सरकार ने राकेश केशरी के द्वारा भेजे गए पत्र ओबरा नगर पंचायत में आबादी क्षेत्र में कूड़ा व मृत गाय फेकने के मामले को लिया संज्ञान बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधान 4(1)(2) के अनुसार, "कोई भी अपशिष्ट उत्पादक अपने द्वारा उत्पन्न ठोस अपशिष्ट को सड़कों पर अपने परिसर के बाहर खुले सार्वजनिक स्थानों पर या नाली या जल निकायों में नहीं फेंकेगा, जलाएगा या दफनाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एसडब्लूएम नियमों के प्रावधान 16(1(ए) के अनुसार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति अपने संबंधित क्षेत्राधिकार में स्थानीय निकायों के माध्यम से अपने राज्य में इन नियमों को लागू करेगी और संबंधित नगर प्रशासन निदेशालय या राज्य शहरी विकास विभाग के प्रभारी सचिव के साथ निकट समन्वय में वर्ष में कम से कम दो बार इन नियमों के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी।इस संबंध में सदस्य सचिव उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ को मामले की जांच करने और बेस्ट अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के प्रावधाने के अनुसार उचित कार्रवाई करने और शिकायतकर्ता को इसकी सूचना के साथ की गई कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए शिकायत अग्रेषित करने का निर्देश दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 23:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोन में सफाई को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, किया जमकर प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[विकास खण्ड कोन के ग्राम पंचायत मिश्री का मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154698/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/img-20250908-wa0135.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">विकास खंड कोन के ग्राम पंचायत मिश्री में सफाई व्यवस्था को लेकर सोमवार को ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन । ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत का सफाई कर्मी गली-नालियों की सफाई नहीं करता है बल्कि कागजी कार्यों का हवाला देकर ब्यस्त रहता है। ग्रामीणों के अनुसार नारायण भारती घर से रामनाथ कनौजिया के घर तक, मुरारी से नंदू सिंह के घर तक और वहीं टोला बहुआरा में डॉक्टर कमेश के घर से बाबूलाल कुशवाहा के घर तक का क्षेत्र कभी साफ नहीं किया गया , जहाँ लोगों का चलना हुआ दुश्वार। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-09/img-20250908-wa01361.jpg" alt="IMG-20250908-WA0136" width="720" height="636"></img></p>
<p style="text-align:justify;">जिसके संबंध में स्थानीय लोगों द्वारा एडीओ पंचायत को अवगत कराया गया था किन्तु मामला जस का तश ही रहा। लोगों की मानें तो सफाई कर्मचारी केवल कागजी कार्यवाही में ही व्यस्त रहता है।जिसके संबंध में ग्रामीणों ने मुख्य मंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की मांग किया है। जिसके क्रम में एडीओ पंचायत से सेल फोन पर सम्पर्क करने की कोशिश की गयी किन्तु कॉल रीसिव नहीं हुआ।  बहरहाल  अधिकारियों द्वारा कॉल रीसिव नहीं करना यह सबसे बड़ा अपने आप में सवाल है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस बावत <strong><em>खण्ड विकास अधिकारी डॉक्टर जितेंद्रनाथ द्विवेदी</em></strong> ने जरूर कार्यवाही कराने का अश्वासन दिया। प्रदर्शनकारियों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुए तत्काल सफाई कराने की मांग की है। प्रदर्शन  में मुख्य रूप से महेंद्र प्रसाद, वीरेंद्र प्रसाद, काशीनाथ, सुदामा कनौजिया, रामनाथ कनौजिया, दिनेश कनौजिया, राजकुमारी देवी, संध्या देवी सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 20:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[राजेश तिवारी]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनभद्र, ओबरा स्टेट हाईवे अपने बदहाली पर आँसू बहा  रहा है,  लोगों ने किया टोल शुल्क वृद्धि का विरोधाभास</title>
                                    <description><![CDATA[हाईवे पर बने  गड्ढे, लोगों को जान का खतरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154136/sonbhadra-obra-state-highway-is-shedding-tears-on-its-plight"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/img-20250827-wa0456.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सोनभद्र का ओबरा-शक्तिनगर-वाराणसी स्टेट हाईवे जो क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन है, इन दिनों अपनी जर्जर हालत पर आंसू बहा रहा है। टोल कंपनी द्वारा टोल शुल्क में लगातार वृद्धि किए जाने के बावजूद सड़क की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।ओबरा से शक्तिनगर होते हुए वाराणसी जाने वाले इस मुख्य मार्ग पर, विशेष रूप से बाघा नाले के ऊपर बने ओवरब्रिज की हालत बहुत ही खराब है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/img-20250827-wa0458.jpg" alt="IMG-20250827-WA0458" width="632" height="352"></img></p>
<p style="text-align:justify;">सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहन चालकों को गाड़ी चलाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। ये गड्ढे कई छोटी-मोटी दुर्घटनाओं का कारण भी बन चुके हैं।सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि एक तरफ टोल कंपनी सड़क के रखरखाव के नाम पर जनता से भारी टोल शुल्क वसूल रही है, वहीं दूसरी तरफ सुविधाओं के नाम पर केवल टूटी-फूटी सड़कें ही दे रही है। इस हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटें भी शो-पीस बनकर रह गई हैं, जो रात में यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-08/img-20250827-wa0457.jpg" alt="IMG-20250827-WA0457" width="1277" height="719"></img></p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति बिल्कुल अस्वीकार्य है। वे संबंधित विभाग से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने और सड़क की मरम्मत कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि टोल कंपनी को शुल्क वसूलने का अधिकार तभी होना चाहिए जब वह यात्रियों को सुरक्षित और अच्छी सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करे।जनता ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से यह भी अपील की है कि वे इस समस्या का संज्ञान लें और जनमानस को इस तरह की कठिनाइयों से वंचित न करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 22:12:09 +0530</pubDate>
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