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                <title>bhagwan shiv - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>bhagwan shiv RSS Feed</description>
                
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                <title>'इक शाम भगवान शिव दे नाम' 14 अगस्त को ड्रेसी ग्राउंड में होगा: दीपक बाली</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना- </strong>पंजाब के टूरिज्म और कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट के एडवाइजर दीपक बाली ने कहा कि भगवान शिव को समर्पित एक बड़ा धार्मिक कार्यक्रम 'इक शाम भगवान शिव दे नाम' 14 अगस्त को लुधियाना के ड्रेसी ग्राउंड में होगा। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को शाम 6 बजे शुरू होने वाले इस बड़े धार्मिक कार्यक्रम में देश के मशहूर सिंगर कैलाश खेर अपनी भक्ति परफॉर्मेंस देंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दीपक बाली ने मंगलवार को डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, नगर निगम की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर, ADCP (हेडक्वार्टर) वैभव सहगल, असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) पायल गोयल, नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर विनीत कुमार, सनातन सेवा समिति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184783/one-evening-lord-shiva-de-naam-will-be-held-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1000985845.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लुधियाना- </strong>पंजाब के टूरिज्म और कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट के एडवाइजर दीपक बाली ने कहा कि भगवान शिव को समर्पित एक बड़ा धार्मिक कार्यक्रम 'इक शाम भगवान शिव दे नाम' 14 अगस्त को लुधियाना के ड्रेसी ग्राउंड में होगा। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को शाम 6 बजे शुरू होने वाले इस बड़े धार्मिक कार्यक्रम में देश के मशहूर सिंगर कैलाश खेर अपनी भक्ति परफॉर्मेंस देंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दीपक बाली ने मंगलवार को डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन, नगर निगम की मेयर प्रिंसिपल इंदरजीत कौर, ADCP (हेडक्वार्टर) वैभव सहगल, असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) पायल गोयल, नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर विनीत कुमार, सनातन सेवा समिति के नेशनल प्रेसिडेंट श्री विजय शर्मा और वेद प्रचार मंडल पंजाब के प्रेसिडेंट रोशन लाल आर्य, सनातन सेवा समिति लुधियाना के करण ढंड, वरन मेहता, जतिंदर सोनी, आर्यन सोनी और दूसरे एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों के साथ डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स लुधियाना में कार्यक्रम की तैयारियों का रिव्यू किया और अलग-अलग इंतज़ामों का रिव्यू किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को भक्तों की सुविधा, सिक्योरिटी, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग, पीने का पानी, सफाई, मेडिकल मदद और दूसरे ज़रूरी इंतज़ाम समय पर पूरे करने के निर्देश दिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पंजाब टूरिज्म एंड कल्चरल अफेयर्स डिपार्टमेंट के एडवाइजर दीपक बाली ने कहा कि यह इवेंट बड़े लेवल पर हो रहा है और इसमें हजारों भक्तों के आने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी ज़रूरी इंतज़ाम किए जा रहे हैं ताकि भक्तों को किसी भी तरह की परेशानी न हो।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दीपक बाली ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप वाली पंजाब सरकार इवेंट के इंतज़ाम और भक्तों की सुविधाओं के लिए पूरा सपोर्ट कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और आम आदमी पार्टी के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल भक्तों के तौर पर इस इवेंट में शामिल होंगे और भगवान शिव का आशीर्वाद लेंगे। उन्होंने कहा कि यह इवेंट सिर्फ एक धार्मिक इवेंट नहीं है, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक मेलजोल का प्रतीक है, जो समाज में भाईचारे, एकता और एकजुटता की भावना को और मज़बूत करेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यह इवेंट किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आस्था और लोगों के सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार सभी ज़रूरी इंतज़ामों में मदद कर रही है, जबकि लोकल मंदिर कमेटियां, धार्मिक संस्थाएं और समाज सेवी संस्थाएं मिलकर इस इवेंट को सफल बनाने के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने लुधियाना और आस-पास के इलाकों के सभी भक्तों से अपील की कि वे अपने परिवार के साथ इस बड़े धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हों और भगवान शिव का आशीर्वाद लें और सामाजिक एकता और भाईचारे के संदेश को और मज़बूत करें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:58:25 +0530</pubDate>
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                <title>भगवान शिव के महामंत्र जाप में है सृष्टि का कल्याण - आचार्य संतोष जी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> बाबा घुइसरनाथ धाम के समीप पूरे दूधी रामगंज स्थित सुखसागर धाम में हो रही श्री शिवमहापुराण कथा में रविवार भगवान शंकर की मनोहरी कथा को सुनकर श्रद्वालु शिव भक्ति के परमानन्द में दिखे। कथाव्यास प्रयागराज के आचार्य संतोष जी महराज ने कहा कि भगवान शंकर के महामंत्र के जाप में सदैव सृष्टि का कल्याण है। उन्होने कहा कि भगवान शिव ने संसार में ईर्श्या, द्वेश, भेदभाव , अनीत के विष का हरण किया। उन्होने कहा कि भगवान शंकर की स्तुति करने वाले प्राणी का प्राण संकट भी दूर हो जाया करता है। कथा व्यास आचार्य संतोष जी ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160561/the-welfare-of-the-universe-lies-in-chanting-the-mahamantra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251116-wa0087(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> बाबा घुइसरनाथ धाम के समीप पूरे दूधी रामगंज स्थित सुखसागर धाम में हो रही श्री शिवमहापुराण कथा में रविवार भगवान शंकर की मनोहरी कथा को सुनकर श्रद्वालु शिव भक्ति के परमानन्द में दिखे। कथाव्यास प्रयागराज के आचार्य संतोष जी महराज ने कहा कि भगवान शंकर के महामंत्र के जाप में सदैव सृष्टि का कल्याण है। उन्होने कहा कि भगवान शिव ने संसार में ईर्श्या, द्वेश, भेदभाव , अनीत के विष का हरण किया। उन्होने कहा कि भगवान शंकर की स्तुति करने वाले प्राणी का प्राण संकट भी दूर हो जाया करता है। कथा व्यास आचार्य संतोष जी ने कहा कि शिव ही जगत के पालन हार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि शिव की आराधना सिर्फ उसी को फलीभूत हुआ करती है जो राग द्वेश से मुक्त हुआ करता है। उन्होने कहा कि भक्ति की साधना  सदैव पवित्र हुआ करती है। उन्होने कहा कि भगवान भय का हरण किया करते है। उन्होने बताया कि महादेव के मंत्र का जाप मनुष्य को सभी झंझावातों से छुटकारा दिलाया करता है। कथा के संयोजक देव नारायण मिश्र, श्याम नारायण मिश्र तथा अधिवक्ता मोनू पाण्डेय ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया। सुषमा मिश्रा ने श्रद्धालुओं के प्रति आभार जताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सह संयोजक गिरिजाशंकर मिश्र व शिवशंकर मिश्र ने प्रसाद वितरण में सहयोग किया। इस मौके पर के के शुक्ला, शीलम पाण्डेय, नीरज मिश्रा,रोहित पाण्डेय, धीरज मिश्रा, डॉ0 रामराज तिवारी, आचार्य राजेश मिश्र, गुडड् पाण्डेय, ममता, अंाचल , ज्योति पं0 कैलाशपति मिश्र, सुभाष पाण्डेय, सतीशचंद्र शुक्ला, श्रीप्रकाश मिश्र, विवेक शुक्ला, छेदीलाल शुक्ल, आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 19:11:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरितालिका तीज : संयम, समर्पण और संतुलन का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल धार्मिक विश्वासों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे मानवीय मूल्यों, सामाजिक संबंधों, स्वास्थ्य, पर्यावरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पोषित करने वाले जीवन-आधार भी हैं। इन्हीं में से एक है हरितालिका तीज, जो उत्तर भारत, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड और नेपाल के अनेक क्षेत्रों में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को विशेष श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।</div>
<div>  </div>
<div>पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का संबंध देवी पार्वती और भगवान शिव से है। स्कंद पुराण सहित अन्य ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने अपने पिता हिमालय द्वारा अनचाहे विवाह से बचने के लिए</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154043/hello"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/हरितालिका-तीज--संयम,-समर्पण-और-संतुलन-का-पर्व.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल धार्मिक विश्वासों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे मानवीय मूल्यों, सामाजिक संबंधों, स्वास्थ्य, पर्यावरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पोषित करने वाले जीवन-आधार भी हैं। इन्हीं में से एक है हरितालिका तीज, जो उत्तर भारत, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड और नेपाल के अनेक क्षेत्रों में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को विशेष श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है।</div>
<div> </div>
<div>पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का संबंध देवी पार्वती और भगवान शिव से है। स्कंद पुराण सहित अन्य ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती ने अपने पिता हिमालय द्वारा अनचाहे विवाह से बचने के लिए अपनी सखी के साथ वन में जाकर कठोर तप किया और अंततः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। यही कारण है कि इसका नाम "हरितालिका" पड़ा—जहाँ ‘हरि’ का अर्थ हरण और ‘तालिका’ का अर्थ सखी से है। यह कथा स्त्रियों को आत्मबल, दृढ़ निश्चय और समर्पण का संदेश देती है।</div>
<div> </div>
<div>यह पर्व केवल दांपत्य सौभाग्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि स्त्री-शक्ति, त्याग, धैर्य और आत्मसम्मान की पहचान भी है। महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं, पारंपरिक वेशभूषा धारण करती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। सामूहिकता का यह स्वरूप स्त्री-सशक्तिकरण की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।</div>
<div> </div>
<div>हरितालिका तीज का महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी पक्ष भी है। आधुनिक चिकित्सा शोध बताते हैं कि उपवास से शरीर डिटॉक्स होता है, पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षा ऋतु के अंतिम चरण में यह उपवास संक्रमण और मौसमी रोगों से बचाव में सहायक होता है। पूजा और भजन-स्मरण के समय मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे ‘हैप्पी हार्मोन’ स्रावित होते हैं, जो मानसिक संतुलन और प्रसन्नता प्रदान करते हैं। वहीं सामूहिक उत्सव सामाजिक संबंधों को गहरा बनाते हैं।</div>
<div> </div>
<div>आज के वैज्ञानिक युग के संदर्भ में इस पर्व का पर्यावरणीय पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शिव-पार्वती की प्रतिमाओं को मिट्टी से बनाना, पूजा में स्थानीय फूल-पत्तियों और फलों का उपयोग करना, पीपल, बेल और तुलसी की आराधना करना आदि।ये सब प्रकृति-संरक्षण को बढ़ावा देते हैं। इससे न केवल रसायन और प्लास्टिक आधारित सजावट का उपयोग घटता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और किसानों को भी प्रोत्साहन मिलता है। पर्व के नाम में ही ‘हरित’ शब्द प्रकृति, हरित ऊर्जा,हरित निमार्ण और हरियाली को महत्व देने की ओर संकेत है। इस प्रकार, यह पर्व आज के समय में सतत विकास और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी बल देता है।</div>
<div> </div>
<div>सांस्कृतिक दृष्टि से यह महिलाओं के सामूहिक उत्सव का पर्व है। इसमें लोकगीत, नृत्य, कथा-वाचन, झूला-झूलना और पारंपरिक श्रृंगार मिलकर सामाजिक एकता और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करते हैं। समाज और पड़ोस में आपसी मेल-जोल और सहयोग की भावना को यह पर्व विशेष रूप से प्रोत्साहित करता है।</div>
<div> </div>
<div>हरितालिका तीज संयम, समर्पण, स्वास्थ्य और पर्यावरण-संरक्षण का ऐसा अद्वितीय संगम है, जो केवल दांपत्य जीवन को सुदृढ़ करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संतुलन का संदेश भी देता है। यदि इसके मूल्यों को जीवन में उतारा जाए तो यह पर्व व्यक्तिगत, पारिवारिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक कल्याण का भी पथ प्रशस्त कर सकता है। यही इसकी विशिष्टता है कि यह भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा को जीवित रखता है, जिसमें तन, मन, प्रकृति और समाज, सभी का संतुलन साधा जाता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>लेखक: डॉ. मनमोहन प्रकाश, स्वतंत्र पत्रकार</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 18:20:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत ही विशेष होता है दयानंद शास्त्री</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>उतरौला (बलरामपुर)- </strong>भगवान शिव के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत विशेष होता है। यह पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। इस दिन भक्त कठिन उपवास का पालन करते हैं और भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। यह व्रत शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है। ऐसे में इस दिन का व्रत अवश्य करें। इस बार महाशिवरात्रि बुधवार 26 फरवरी को है। उक्त बातें ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताते हुए कहा कि शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव जंतुओं के स्वामी एवं अधिनायक हैं।</div><div><br /></div><div> यह सभी जीव जंतु कीट पतंग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149060/mahashivaratri-day-is-very-special-for-devotees-dayanand-shastri"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(6)1.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>उतरौला (बलरामपुर)- </strong>भगवान शिव के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत विशेष होता है। यह पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। इस दिन भक्त कठिन उपवास का पालन करते हैं और भोलेनाथ की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। यह व्रत शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है। ऐसे में इस दिन का व्रत अवश्य करें। इस बार महाशिवरात्रि बुधवार 26 फरवरी को है। उक्त बातें ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताते हुए कहा कि शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव जंतुओं के स्वामी एवं अधिनायक हैं।</div><div><br /></div><div> यह सभी जीव जंतु कीट पतंग भगवान शिव की इच्छा से ही सब प्रकार के कार्य तथा व्यवहार करते हैं। शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव वर्ष में 6 माह कैलाश पर्वत पर रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। उनके बाद ही सभी कीड़े मकोड़े भी अपने बिलों में बंद हो जाते हैं। उसके बाद 6 माह तक कैलाश पर्वत से उतरकर धरती पर शमशान घाट में निवास किया करते हैं। इनके धरती पर अवतरण प्रायः फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ करता है। </div><div><br /></div><div>अवतरण का यह महान दिन शिव भक्तों में शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। महाशिवरात्रि को लेकर भगवान शिव से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रह्मा के रूद्र रूप में मध्य रात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य कर अपना तीसरा नेत्र खोला था, और ब्रह्मांड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है। यह भी माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव मां पार्वती का विवाह हुआ था।</div><div><br /></div><div> महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है। जब धर्म प्रेमी लोग महादेव का विधि विधान के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं और बेलपत्र, धतूरा, भांग, अबीर गुलाल अर्पित करते और दिन भर उपवास रखकर शाम में फलाहार करते हैं, महादेव की पूजा करने वाले व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है। तो महादेव की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 19:24:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाशिवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व प्रो0 (डॉ0) भरत राज सिंह।</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>लखनऊ -</strong> राजधानी लखनऊ में महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष की तेरस/चतुर्दशी को हर वर्ष मनाया जाता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार यह तिथि प्रत्येक वर्ष फरवरी अथवा मार्च पड़ती है । ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान भोलेनाथ कालेश्वर के रूप में प्रकट हुए थे। महाकालेश्वर भगवान शिव की वह शक्ति है जो सृष्टि का समापन करती है। महादेव शिव जब तांडव नृत्य करते हैं तो पूरा ब्रह्माण्ड विखडिंत होने लगता है। इसलिए इसे महाशिवरात्रि की कालरात्रि भी कहा गया है।</div>
<div>  </div>
<div>भगवान शिव की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149047/scientific-importance-of-mahashivratri-prof-dr-bharat-raj-singh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(4)3.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखनऊ -</strong> राजधानी लखनऊ में महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष की तेरस/चतुर्दशी को हर वर्ष मनाया जाता है। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार यह तिथि प्रत्येक वर्ष फरवरी अथवा मार्च पड़ती है । ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान भोलेनाथ कालेश्वर के रूप में प्रकट हुए थे। महाकालेश्वर भगवान शिव की वह शक्ति है जो सृष्टि का समापन करती है। महादेव शिव जब तांडव नृत्य करते हैं तो पूरा ब्रह्माण्ड विखडिंत होने लगता है। इसलिए इसे महाशिवरात्रि की कालरात्रि भी कहा गया है।</div>
<div> </div>
<div>भगवान शिव की वेशभूषा भी हिन्दू के अन्य देवी-देवताओं से अलग होती है। श्री महादेव अपने शरीर पर चिता की भस्म लगाते हैं, गले में रुद्राक्ष धारण करते हैं और नन्दी बैल की सवारी करते हैं। भूत-प्रेत-निशाचर उनके अनुचर माने जाते हैं। ऐसा वीभत्स रूप धारण करने के उपरांत भी उन्हें मंगलकारी माना जाता है जो अपने भक्त की पल भर की उपासना से ही प्रसन्न हो जाते हैं और उसकी मदद करने के लिए दौड़े चले आते हैं। इसीलिए उन्हें आशुतोष भी कहा गया है।</div>
<div> </div>
<div>भगवान शंकर अपने भक्तों के न सिर्फ कष्ट दूर करते हैं बल्कि उन्हें श्री और संपत्ति भी प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि की कथा में उनके इसी दयालु और कृपालु स्वभाव का वर्णन किया गया है। कहा जाता है कि हरिद्वार में हो रहे कुंभ मेले पर शाही स्नान इसी दिन शुरू हुआ था और प्रयाग में माघ मेले और कुंभ मेले का समापन महाशिवरात्रि के स्नान के बाद ही होता है । महाशिवरात्रि के दिन से ही होली पर्व की शुरुआत हो जाती है। महादेव को रंग चढ़ाने के बाद ही होलिका की रंग बयार शुरू हो जाती है। बहुत से लोग ईख या बेर भी तब तक नहीं खाते जब तक महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को अर्पित न कर दें।</div>
<div> </div>
<div>प्रत्येक राज्य में शिव पूजा उत्सव को मनाने के भिन्न-भिन्न तरीके हैं लेकिन सामान्य रूप से शिव पूजा में भांग-धतूरा-गांजा और बेल ही चढ़ाया जाता है। जहाँ भी ज्योर्तिलिंग हैं, वहाँ पर भस्म आरती, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कर भगवान शिव का पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शंकर जी का विवाह माता पार्वती जी से हुआ था, उनकी बरात निकली थी। इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि महाशिवरात्रि का पर्व स्वयं परमपिता परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है।</div>
<div> </div>
<div>महाशिवरात्रि के दिन व्रत धारण करने से सभी पापों का नाश होता है और मनुष्य की हिंसक प्रवृत्ति भी नियंत्रित होती है। निरीह लोगों के प्रति दयाभाव उपजता है। कृष्ण चतुर्दशी के स्वामी शिव है इससे इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है वैसे तो शिवरात्रि हर महीने पड़ती है परन्तु फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है। उपरोक्त कथनों को डा० भरत राज सिंह जो महानिदेशक, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज व अध्यक्ष, वैदिक विज्ञानं केंद्र, लखनऊ है, बताते हैं कि यदि इसे विज्ञान के दृष्टिकोण से परखे तो शिवलिंग एक एनर्जी का पिंड है जो गोल व लम्बा- वृत्ताकार व सर्कुलर पीठम पर सभी शिव मंदिरों में स्थापित होता है, वह  ब्रह्माण्डीय शक्ति को शोखता है।</div>
<div> </div>
<div>रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, भस्म आरती, भांग-धतूरा-गांजा और बेल पत्र चढ़ाकर पूजा-अर्चना कर भक्त उस शक्तिशाली उर्जा को अपने में ग्रहण करता है। इसके द्वारा मन व विचारो में शुद्धता व शारीरिक रोग-व्याधियों के कष्ट का निवारण होना स्वाभाविक है। इसी दिन के पश्चात सूर्य उत्तरायण में अग्रसर हो जाता है और ग्रीष्मऋतु का आगमन भी शुरू हो जाता है और मनुष्यमात्र अपने में गर्मी से वचाव हेतु विशेष ध्यान देना शुरू कर देता है। उपरोक्त की पुष्टि “कुछ संतो के कथन कि रात भर जागना, पांचो इन्द्रियों की वजह से आत्मा पर जो बेहोशी या विकार छा गया है, उसके प्रति जागृत होना व तन्द्रा को तोड़कर चेतना को शिव के एक तंत्र में लाना ही महाशिवरात्रि का सन्देश है, से भी होती है ।</div>
<div> </div>
<div>वैदिक शिव पूजन विधि-भगवान शंकर की पूजा के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें। यज्ञोपवित धारण कर शरीर शुद्ध करें। तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें। पूजन-सामग्री को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित कर अब स्वस्ति-पाठ करे। स्वस्ति-पाठ -स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवारू, स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदारू, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु। इसके बाद पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश एवं गौरी-माता पार्वती का स्मरण कर पूजन करना चाहिए। यदि आप रूद्राभिषेक, लघुरूद्र, महारूद्र आदि विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं, तब नवग्रह, कलश, षोडश-मात्रका का भी पूजन करना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>संकल्प करते हुए भगवान गणेश व माता पार्वती का पूजन करें फिर नन्दीश्वर, वीरभद्र, कार्तिकेय (स्त्रियां कार्तिकेय का पूजन नहीं करें) एवं सर्प का संक्षिप्त पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात हाथ में बिल्वपत्र एवं अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें। भगवान शिव का ध्यान करने के बाद आसन, आचमन, स्नान, दही-स्नान, घी-स्नान, शहद-स्नान व शक्कर-स्नान कराएं। इसके बाद भगवान का एक साथ पंचामृत स्नान कराएं। फिर सुगंध-स्नान कराएं फिर शुद्ध स्नान कराएं। अब भगवान शिव को वस्त्र चढ़ाएं। वस्त्र के बाद जनेऊ चढाएं। फिर सुगंध, इत्र, अक्षत, पुष्पमाला, बिल्वपत्र चढाएं। अब भगवान शिव को विविध प्रकार के फल चढ़ाएं। इसके पश्चात धूप-दीप जलाएं।</div>
<div> </div>
<div>हाथ धोकर भोलेनाथ को नैवेद्य लगाएं। नैवेद्य के बाद फल, पान-नारियल, दक्षिणा चढ़ाकर आरती करें। (जय शिव ओंकारा वाली शिव-आरती) इसके बाद क्षमा-याचना करें। क्षमा मंत्र-आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम, पूजाश्चौव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वररू। इस प्रकार संक्षिप्त पूजन करने से ही भगवान शिव प्रसन्न होकर सारे मनोरथ पूर्ण करेंगे। घर में पूरी श्रद्धा के साथ साधारण पूजन भी किया जाए तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं।  </div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 18:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाशिवरात्रि: शरीर, मस्तिष्क और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने का अवसर </title>
                                    <description><![CDATA[<div>महाशिवरात्रि भगवान शिव की अराधना के लिए समर्पित है।आदि शंकराचार्य ने शिव को अद्वैत ब्रह्म कहा और "निर्वाण षट्कम्" में शिव की निराकार और सर्वव्यापी सत्ता का वर्णन किया। स्वामी विवेकानंद भगवान शिव को त्याग और सेवा का प्रतीक मानते हैं।संत तुकाराम ने शिव को "भक्ति और प्रेम" का साकार रूप बताया और शिव की उपासना को मोक्ष का मार्ग कहा। रामकृष्ण परमहंस कहते थे कि शिव प्रेम और करुणा के देवता हैं।</div>
<div>  </div>
<div>सनातनियों द्वारा महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रात के रूप में मनाया जाता है। यह गृहस्थ जीवन की शुद्धता और महत्व को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148980/mahashivaratri-body-opportunity-to-balance-between-brain-and-cosmic-energy%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(3)5.jpg" alt=""></a><br /><div>महाशिवरात्रि भगवान शिव की अराधना के लिए समर्पित है।आदि शंकराचार्य ने शिव को अद्वैत ब्रह्म कहा और "निर्वाण षट्कम्" में शिव की निराकार और सर्वव्यापी सत्ता का वर्णन किया। स्वामी विवेकानंद भगवान शिव को त्याग और सेवा का प्रतीक मानते हैं।संत तुकाराम ने शिव को "भक्ति और प्रेम" का साकार रूप बताया और शिव की उपासना को मोक्ष का मार्ग कहा। रामकृष्ण परमहंस कहते थे कि शिव प्रेम और करुणा के देवता हैं।</div>
<div> </div>
<div>सनातनियों द्वारा महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की रात के रूप में मनाया जाता है। यह गृहस्थ जीवन की शुद्धता और महत्व को भी प्रतिपादित करती है। इस दिन सृष्टि का आरंभ और शिव तत्त्व का प्राकट्य हुआ तथा भगवान शिव ने स्वयं को ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रगट किया था। ऐसी भी मान्यता है कि  जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब जो विष (हलाहल) निकला, उसे भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था। इस कारण उनका कंठ नीला हो गया और वे "नीलकंठेश्वर" कहलाए। यह घटना महाशिवरात्रि के दिन ही हुई थी।</div>
<div> </div>
<div>कुछ मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव ने अपना प्रसिद्ध तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि के सृजन, पालन और संहार का प्रतीक माना जाता है।यह भी कहा जाता है कि इसी दिन रावण ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की थी और शिवजी ने उसे आशीर्वाद दिया था। अतः महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना, शरीर, और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है, अध्यात्म के विज्ञान पक्ष को समझने का दिन है। सनातन संस्कृति में इस दिन ध्यान, योग, व्रत, मंत्र जप,तप,यज्ञ और शिवलिंग अभिषेक जैसे अनुष्ठानों आदि को करने का प्रावधान है,इन सभी की वैज्ञानिकता सिद्ध है।</div>
<div> </div>
<div>शिवरात्रि के दिन उपरोक्त में से किसी भी विधि द्वारा की गई पूजा-अर्चना  व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आत्मिक रूप से सशक्त बना सकती है।स्वामी विवेकानंद के अनुसार महाशिवरात्रि ध्यान और आत्मबोध का पर्व है।स्वामी शिवानंद के  अनुसार, महाशिवरात्रि आत्मा और परमात्मा के मिलन का समय है।जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) महाशिवरात्रि को आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने की रात बताते हैं। उनके अनुसार, यह रात ध्यान और साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।ओशो (रजनीश) महाशिवरात्रि को शिव की "नृत्य और ध्यान" की रात बताया। उनके अनुसार, यह उत्सव आंतरिक मौन और आनंद को जागृत करता है।</div>
<div> </div>
<div>महाशिवरात्रि अमावस्या और पूर्णिमा के बीच के समय में आती है, जब चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव अधिकतम होता है।यह मानव शरीर के जल और ऊर्जा प्रभाव को प्रभावित कर सकता है। महाशिवरात्रि की रात में पृथ्वी और चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है। इस दौरान व्यक्ति की चेतना ऊर्ध्वगामी होती है। अतः यदि योग्य गुरु के सान्निध्य में विशेष प्रयास किये जाएं तो आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि हो सकती है।ऋषि-मुनियों का मानना है कि इस दिन रीढ़ को सीधा रख कर ,मन को एकाग्र चित्त कर महादेव का ध्यान करना चाहिए। चूंकि इस दिन प्राकृतिक ऊर्जा ऊपर की ओर प्रवाहित होती है।</div>
<div> </div>
<div>इससे शरीर की ऊर्जा प्रणाली (चक्र) संतुलित होती है।विशेष प्रयास में जप, योग,ध्यान और साधना अधिक प्रभावशाली तथा लाभकारी हो सकती है।यह सब इसलिए भी संभव है क्योंकि शिव को "अविनाशी चेतना" या "कॉस्मिक कॉन्शसनेस" का प्रतीक माना जाता है। इस दिन  "ॐ नमः शिवाय" , “महामृत्युंजय मंत्र”तथा अन्य शिव से जुड़े वैदिक मंत्रों के उच्चारण से एक विशेष ध्वनि कंपन (फ्रीक्वेंसी) उत्पन्न होता है, जिससे मस्तिष्क और शरीर की कोशिकाओं  को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, डीएनए रिपेयर होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।</div>
<div> </div>
<div>शिव को पंचतत्त्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का स्वामी माना जाता है। महाशिवरात्रि के दौरान इन तत्वों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए विशेष अनुष्ठान(जल अभिषेक) किए जाते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है।शिवलिंग पर जल चढ़ाने का वैज्ञानिक आधार यह है कि जल में विद्युत ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है, जिससे शिवलिंग के आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह ऊर्जा व्यक्ति में मानसिक एवं शारीरिक संतुलन बनाने में मदद करती है तथा  मन और शरीर को शीतलता प्रदान करती है।</div>
<div> </div>
<div>नकारात्मक प्रभाव को दूर करने में मदद करती है।महाशिवरात्रि की रात को जागरण और ध्यान करने से, भजन कीर्तन करने से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामिन (हैप्पी हार्मोन) जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर बढ़ता है जिससे सकारात्मकता बढ़ती है, सामुहिक चेतना का विकास होता है, मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि होती है, आनंद का अनुभव होता है।एक  मत यह भी है कि रात्रि जागरण के दौरान ध्यान और भजन-कीर्तन करने से शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया जा सकता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और नकारात्मक भावनाएँ दूर होती हैं।</div>
<div> </div>
<div>साथ ही इस दिन किए जाने वाला भजन कीर्तन और दान पुण्य समाज में शुद्धता, सकारात्मकता के साथ सामाजिक कल्याण, सहयोग की भावना को जागृत करने का काम भी करते हैं।सनातनियों द्वारा इस दिन उपवास रखने की परंपरा है। वैज्ञानिकों के अनुसार उपवास(बिना आहार के) शरीर को डिटॉक्स करते हैं,  पाचन तंत्र को आराम देते हैं , कैंसर कोशिकाओं को निष्क्रिय करने में मदद करते हैं।ऐसा भी विचार है कि उपवास के दौरान शरीर की ऊर्जा आध्यात्मिक उन्नति की ओर केंद्रित होती है।</div>
<div> </div>
<div>सारांश रूप में हम कह सकते हैं कि सनातनियों के लिए महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्व नहीं है, आत्मज्ञान , ध्यान और भक्ति करने का अवसर भर नहीं है बल्कि यह शरीर, मस्तिष्क और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के बीच संतुलन बनाने का वैज्ञानिक अवसर भी प्रदान करती है।इस दौरान मानव द्वारा समर्पण भाव से तथा शुद्ध मन से एकाग्रचित्त हो कर की गई शिव अराधना एवं भक्ति शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक होती हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/148980/mahashivaratri-body-opportunity-to-balance-between-brain-and-cosmic-energy%C2%A0</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 17:13:34 +0530</pubDate>
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