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                <title>बेरोजगारी - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>बेरोजगारी RSS Feed</description>
                
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                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                <title>कुरुक्षेत्र: राहुल को प्रतिरोध का नारा बनाएगा विपक्ष का चेहरा, 2029 में PM मोदी और नेता विपक्ष का सीधा मुकाबला।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181388/kurukshetra-will-make-rahul-a-slogan-of-resistance-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/43.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच ही सीधा मुकाबला होगा।नतीजतन राहुल गांधी खुद खुलकर मैदान में आ गये हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा कि अब देश में चुनावों की परंपरागत राजनीति से आगे प्रतिरोध की राजनीति का युग आ गया है। प्रतिरोध की राजनीति से राहुल गांधी का सीधा मतलब है कि मोदी सरकार को संसद के साथ-साथ विपक्ष अब सड़क पर भी घेरेगा। राहुल ने कहा कि सभी संस्थाएं सरकार के कब्जे में हैं और चुनावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रतिरोध की राजनीति के अपने पुराने दौर में लौटना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल ने सिर्फ एलान ही नहीं किया बल्कि उन्होंने प्रतिरोध की राजनीति की शुरुआत करते हुए सबसे पहले युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।इसकी शुरुआत वह कोटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना और दिल्ली में छात्र युवा सम्मेलन से कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा और एनडीए तो 2014 से ही चाहे लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी को आगे करके उनके नाम पर ही हर चुनाव लड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लिए नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और नाम चुनावों में जीत का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि इसके विपरीत कांग्रेस मोदी के मुकाबले अपने किसी भी नेता को आगे करके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया गठबंधन भी मोदी के मुकाबले बिना कोई चेहरा आगे लाए ही मैदान में उतरा था। लेकिन अब कांग्रेस जिस राह पर चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे यह साफ है कि अब उसे नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को आगे करने में कोई गुरेज नहीं है। अब राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ होने वाली लड़ाई की कमान संसद के साथ सड़क पर भी संभालने के लिए तैयार हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर विपक्षी खेमे की तस्वीर अब खासी बदल गई है। हाल ही में हुए पांच विधानसभा चुनावों में प.बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के किले ढह गए और इसके पहले बिहार में तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भाजपा के हाथों हार चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस भी 2024 के बाद हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र और असम में भाजपा से हारी है लेकिन केरल में उसकी जीत और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने से पार्टी को फिर आक्सीजन मिल गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए अब मामला कांग्रेस और क्षत्रपों के बीच बराबरी का हो गया है और अब कोई भी क्षत्रप कांग्रेस को यह उलाहना नहीं दे सकता कि भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दल ही सफलता पूर्वक कर पाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षत्रपों में अब झारखंड में हेमंत सोरेन अकेले ऐसे नेता हैं जो दो बार लगातार भाजपा को चुनावी मात दे चुके हैं और कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन है जबकि 2014</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2017</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2019 और 2022 में लगातार भाजपा के हाथों चुनावी हार झेल चुके अखिलेश यादव ने 2024 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी देकर फिर से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए खम ठोंक रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब 2027 में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां चुनाव में भाजपा का सपा से मुकाबला होगा और कांग्रेस उसकी सहयोगी पार्टी होगी। वहीं पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा क्योंकि यहां भाजपा अभी अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले सारे राज्यों उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिमाचल प्रदेश</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। यहां भी कांग्रेस मुख्य किरदार होगी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>*सपा का महंगाई, बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शनः तहसील तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे, बोले- छात्र घर नहीं पहुंच पाते और पेपर लीक हो जाता है*</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र 302 शोहरतगढ़ द्वारा पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी  के नेतृत्व में तथा सपा जिलाध्यक्ष  लाल जी यादव  की अध्यक्षता में शोहरतगढ़ तहसील पर महंगाई, बेरोजगारी, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली के दामों में बड़े पैमाने पर मूल्य वृद्धि तथा डीजल पेट्रोल और रसोई गैस की भारी किल्लत, अघोषित बिजली कटौती, किसानों को खाद बीज तथा डीजल का ना मिल पाना, नीट परीक्षा पेपर लीक, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ,ध्वस्त कानून व्यवस्था, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  के परिवार पर नीच मानसिकता व अराजक तत्वों के</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181238/sps-protest-against-inflation-and-unemployment-reached-the-tehsil-shouting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781528894412.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> समाजवादी पार्टी विधानसभा क्षेत्र 302 शोहरतगढ़ द्वारा पूर्व विधायक अमर सिंह चौधरी  के नेतृत्व में तथा सपा जिलाध्यक्ष  लाल जी यादव  की अध्यक्षता में शोहरतगढ़ तहसील पर महंगाई, बेरोजगारी, डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस और बिजली के दामों में बड़े पैमाने पर मूल्य वृद्धि तथा डीजल पेट्रोल और रसोई गैस की भारी किल्लत, अघोषित बिजली कटौती, किसानों को खाद बीज तथा डीजल का ना मिल पाना, नीट परीक्षा पेपर लीक, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ,ध्वस्त कानून व्यवस्था, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  के परिवार पर नीच मानसिकता व अराजक तत्वों के द्वारा परिवार पर अभद्र व अशोभनीय टिप्पणी करने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग तथा भाजपा सरकार के जन विरोधी नीतियों के खिलाफ अपने हजारों समाजवादी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ शोहरतगढ़ तहसील पर उप जिलाधिकारी के माध्यम से राजपाल  के नाम ज्ञापन देकर जन समस्याओं के समाधान की मांग किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">       पूर्व विधायक चौधरी अमर सिंह  ने संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है अपराधियों का बोलबाला है भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए, अपराधियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है डीजल पेट्रोल रसोई गैस और बिजली के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर प्रदेश की जनता पर महंगाई का बोझ लाद दिया गया पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल है यह सरकार किसानों को खाद बीज और डीजल तक उपलब्ध नहीं कर पा रही है हमारी मांग है कि डीजल पेट्रोल और रसोई गैस बिजली की मूल्य वृद्धि वापस लिया जाए और इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, धान के बेहन डालने का समय चल रहा है किसानों को समय से खाद और डीजल उपलब्ध कराया जाए, नीट परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है और इस सरकार में पी डी ए आरक्षण का सबसे ज्यादा घोटाला हुआ है प्रदेश की जनता इस जन विरोधी सरकार को हटाने का मन बना चुकी है यह सरकार जनहित के हर मुद्दे पर विफल है 2027 का चुनाव देश और संविधान को बचाने का चुनाव है ।</div>
<div style="text-align:justify;">     धरना प्रदर्शन में प्रदेश सचिव बेचई, अफसर हुसैन रिजवी, राममिलन भारती, मुरलीधर मिश्रा, घिसियावन यादव, कमरूज्जमा खान, खलकुल्लाह खान, बहराइची प्रसाद प्रेमी, अब्दुल कलाम सिद्दीकी, हरिराम यादव, पारसनाथ विश्वकर्मा, रिंदु पासवान ,रामसेवक लोधी, शकील शाह, चंद्रभान पहलवान, घनश्याम जायसवाल, सुनीता गोस्वामी, मोहम्मद जावेद, चंद्रभूषण आर्य, सत्येंद्र यादव ,मोहम्मद यूनुस, नौशाद मलिक,हरिशंकर मौर्य, राम शंकर मौर्य, जलालुद्दीन खान, मनोज मिश्रा, चंचल रावत, राजकुमार चौधरी, सुनील वर्मा, शिव शंकर चौधरी, अभिरंजन चौधरी ,रामदास चौधरी ,माखन गुप्ता ,विजय सिंह चौधरी ,सुनील चौरसिया, शालिग्राम यादव, सुनील यादव, मोहम्मद अकरम ,मोहम्मद शमी ,मोहम्मद इश्तियाक, किशन पटेल ,अनूप चौधरी, पुनीत मिश्रा ,रामदेव चौधरी, बुलर यादव, रंजीत, पारस चौधरी, देव प्रकाश चौधरी, विंध्याचल चौधरी, नुरुल हुदा, रमेश लोधी, लाल जी चौधरी,  रामचरण चौधरी, संजय रस्तोगी ,अंगद यादव आदि  उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:55:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ सपा का हल्ला बोल, कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन।</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता सरस सिंह </strong></span></p>
<p>  </p>
<p>प्रयागराज।समाजवादी पार्टी  ने मंगलवार को कथित पेपर लीक, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न तथा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और बाद में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता हाथों में बैनर, पोस्टर और पार्टी के झंडे लेकर एकत्र हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच किया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180524/sps-noise-against-paper-leak-inflation-and-unemployment-strong-demonstration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/screenshot_20260602-165545.facebook.png" alt=""></a><br /><p><span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता सरस सिंह </strong></span></p>
<p> </p>
<p>प्रयागराज।समाजवादी पार्टी  ने मंगलवार को कथित पेपर लीक, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, महिला उत्पीड़न तथा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और बाद में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता हाथों में बैनर, पोस्टर और पार्टी के झंडे लेकर एकत्र हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय की ओर कूच किया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।</p>
<p>प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश सरकार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि बार-बार परीक्षा पत्र लीक होने से लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। युवा वर्षों तक मेहनत करने के बावजूद भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता न होने के कारण निराश और हताश हैं।</p>
<p>सपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल घोषणाएं करने में व्यस्त है। इसके अलावा बढ़ती महंगाई के कारण आम जनता का जीवन कठिन होता जा रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों की वस्तुओं पर पड़ रहा है, जिससे लोगों की आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं।</p>
<p>महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी सपा नेताओं ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।</p>
<p>कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इसके बाद सपा प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने, महंगाई नियंत्रित करने, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने तथा महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 23:27:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो जून की रोटी : संघर्ष, सम्मान और समाज की जिम्मेदारी - पत्रकार सरस सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>"दो जून की रोटी"— यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा सच है। जब कोई व्यक्ति कहता है कि उसे "दो जून की रोटी" कमानी है, तो उसके पीछे सिर्फ भोजन की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य की चिंता छिपी होती है।</p>
<p>भारत गांवों का देश है। यहां खेतों में पसीना बहाने वाला किसान, सड़क किनारे रिक्शा चलाने वाला मजदूर, ईंट-भट्ठों पर काम करने वाली महिलाएं, निर्माण स्थलों पर दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिक और छोटे दुकानदार— सभी का संघर्ष कहीं न कहीं दो जून की रोटी से जुड़ा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180484/june-2nd-bread-struggle-respect-and-responsibility-of-society"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/messenger_creation_7070006110035249701.jpeg" alt=""></a><br /><p>"दो जून की रोटी"— यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा सच है। जब कोई व्यक्ति कहता है कि उसे "दो जून की रोटी" कमानी है, तो उसके पीछे सिर्फ भोजन की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य की चिंता छिपी होती है।</p>
<p>भारत गांवों का देश है। यहां खेतों में पसीना बहाने वाला किसान, सड़क किनारे रिक्शा चलाने वाला मजदूर, ईंट-भट्ठों पर काम करने वाली महिलाएं, निर्माण स्थलों पर दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिक और छोटे दुकानदार— सभी का संघर्ष कहीं न कहीं दो जून की रोटी से जुड़ा है। सुबह सूरज निकलने से पहले घर से निकलना और शाम को थके कदमों से लौटना, उनके जीवन की रोजमर्रा की कहानी है।</p>
<p>आज विज्ञान और तकनीक के इस आधुनिक युग में जहां एक ओर देश चांद और मंगल तक पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज का एक बड़ा वर्ग अभी भी पेट भरने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। महंगाई, बेरोजगारी और संसाधनों की असमानता ने गरीब और मध्यम वर्ग की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी किसी युद्ध जीतने से कम नहीं।</p>
<p>दो जून की रोटी केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। जब कोई बच्चा भूखे पेट सोता है, तो यह केवल उसके परिवार की विफलता नहीं होती, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए चिंता का विषय होता है। भूख इंसान की सबसे बड़ी मजबूरी है और जब पेट खाली होता है तो सपने, शिक्षा और विकास की बातें पीछे छूट जाती हैं।</p>
<p>हालांकि सरकारों द्वारा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। राशन वितरण, मनरेगा, गरीब कल्याण योजनाएं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम लाखों लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं। लेकिन यह भी सच है कि जब तक हर व्यक्ति को सम्मानजनक रोजगार और पर्याप्त आय उपलब्ध नहीं होगी, तब तक दो जून की रोटी का संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकेगा।</p>
<p>समाज के सक्षम वर्ग की भी जिम्मेदारी है कि वह जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आए। किसी भूखे को भोजन कराना केवल दान नहीं, बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। हमें यह समझना होगा कि किसी की थाली में भोजन पहुंचाना, उसके जीवन में उम्मीद पहुंचाने जैसा है।</p>
<p>दो जून की रोटी की अहमियत वही समझ सकता है जिसने भूख की पीड़ा महसूस की हो। जिन लोगों के घरों में भोजन आसानी से उपलब्ध है, उन्हें कभी उन हाथों को भी देखना चाहिए जो दिनभर मेहनत करके भी अपने परिवार के लिए पर्याप्त भोजन नहीं जुटा पाते। यह संवेदनशीलता ही एक बेहतर समाज की पहचान है।</p>
<p>अंततः, दो जून की रोटी केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि इंसान के सम्मान, आत्मनिर्भरता और जीवन के अधिकार का प्रतीक है। जब देश का हर नागरिक बिना किसी चिंता के अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में सक्षम होगा, तभी सच्चे अर्थों में समृद्ध और विकसित भारत का सपना साकार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180484/june-2nd-bread-struggle-respect-and-responsibility-of-society</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 23:27:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दया शंकर त्रिपाठी ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मांगे पूरी होने तक एचएमकेपी जारी रखेगी मजदूर किसानों के अधिकारों की लड़ाई .राष्ट्रीय अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्द</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178440/hmkp-will-continue-the-fight-for-the-rights-of-laborers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001889868-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के मनाए गए मई दिवस को निरर्थक बताते हुए कहा है कि जब तक श्रमिकों और मजदूरों के हितों से संबंधित सारी मांगे पूरी ना हो जाएं। उनके हित होने की शुरुआत ना हो जाए। तब तक मई दिवस के स्थान पर हर साल काला दिवस ही मनाया जाना चाहिए। अवगत कराते चलें कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा ने इस साल के बीते मई दिवस को भी काला दिवस के रूप में मनाने की अपील सभी ट्रेड यूनियनों से की थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस बीच श्रमिकों, मजदूरों और कर्मचारियों के हित में लगातार संघर्ष कर रहे हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने व्यक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल कलप्पा ने कहा है कि मई दिवस शुरुआत 1886 में शिकागो में श्रमिक द्वारा 08 घण्टे के कार्य दिवस की मांग को लेकर एतिहासिक संघर्ष से हुई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष एल० कलप्पा के मुताबिक एकता, प्रतिरोध और श्रमिकों द्वारा बड़ी मुश्किल से हासिल किये गये अधिकारों का प्रतीक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा के माध्यम से राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने मई श्रम संघिताओं के तहत श्रमिको के विधानिक अधिकारों का हनन। बढ़ती नौकरी की असुरक्षा ठेका आधारित रोजगार व बेरोजगारी। सामुहिक सौदेबाजी और ट्रेडयूनियन आजादी पर हमला। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमो का निजीकरण व विनिवेश। श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी और कारपेंर्पोरेट समर्थक नीतिगत दिशाएं जैसे मुद्दों की भी चर्चा करते हुए  हिन्द मजदूर किसान पंचायत की ओर से कड़ा विरोध भी दर्ज कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने के अपने संकल्प को तुरन्त दोहराये। राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री राकेशमणि पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एल. कलप्पा ने सभी केन्द्रीय संगठनों व लोक तात्रिक ताकतों से इस मई दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने का आवाहन इसीलिए किया था क्योंकि मई दिवस केवल एक उत्सव नहीं है बल्कि न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने का दृढ संकल्प का भी दिन है। हिंद मजदूर किसान पंचायत का जिसके खिलाफ संघर्ष तब तक जारी रहेगा ,जब तक मजदूर श्रमिकों और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी सभी मांगे पूर्ण रूप से मानते हुए उन्हें अमलीजामा नहीं पहना दिया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:51:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वरोजगार अपनाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी : शिक्षक विधायक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>शिक्षित होकर बेरोजगार रहने से बेहतर स्वरोजगार अपनाना है। स्वरोजगार अपनाने वाले की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है,वहीं अच्छी सुविधा के लिए क्षेत्र के लोगों को इधर उधर भटकना नही पड़ता है।उपरोक्त बातें रविवार को शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उसका बाजार स्टेट बैंक शाखा के निकट श्री राधे फार्मा एंड सर्जिकल प्रतिष्ठान के उद्घाटन अवसर पर कही।उन्होंने  कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सभी युवाओं को नौकरी नही मिल सकती है, सम्मानित जीवन स्तर के लिए स्वरोजगार सबसे अच्छा विकल्प है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">यह क्षेत्र के विकास और पलायन रोकने में भी काफी सहायक है। जो युवा बाहर जाकर अपने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178055/adopting-self-employment-will-strengthen-the-economic-situation-teacher-mla"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1777819804807.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>शिक्षित होकर बेरोजगार रहने से बेहतर स्वरोजगार अपनाना है। स्वरोजगार अपनाने वाले की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है,वहीं अच्छी सुविधा के लिए क्षेत्र के लोगों को इधर उधर भटकना नही पड़ता है।उपरोक्त बातें रविवार को शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उसका बाजार स्टेट बैंक शाखा के निकट श्री राधे फार्मा एंड सर्जिकल प्रतिष्ठान के उद्घाटन अवसर पर कही।उन्होंने  कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सभी युवाओं को नौकरी नही मिल सकती है, सम्मानित जीवन स्तर के लिए स्वरोजगार सबसे अच्छा विकल्प है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह क्षेत्र के विकास और पलायन रोकने में भी काफी सहायक है। जो युवा बाहर जाकर अपने जीवकोपार्जन के लिए नौकरी खोजते हैं वह अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार कर अन्य लोगों की भी मदद कर सकते हैं। चेयरमैन प्रतिनिधि हेमन्त कुमार जायसवाल ने कहा की स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है। सरकार इसके लिए कई योजनाएं चला रही है। इसका लाभ सभी लोग उठाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर चंद्रभान त्रिपाठी, मयंक पाण्डेय, रामेश्वर पाण्डेय, पवन जायसवाल, शतीश तुलस्यान, डा कलीम, रोशन अली, राकेश आर्या, सच्चिदानंद चौबे, संतोष मिश्र , शिव जायसवाल, अयोध्या शाहू, मजीबुल्लाह, डा कपिल, सोमनाथ मिश्र, सत्य प्रकाश मिश्र, हबीबुल्लाह, मोबिन, डा बृजेश , सत्य प्रकाश वर्मा, अमित मिश्रा, अरुण मिश्र आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:25:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आइसा सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन संपन्न, 17 सदस्यीय कमेटी का गठन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल/त्रिवेणीगंज -: </strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन रविवार को त्रिवेणीगंज स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में देश के छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लैंगिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार की राज्य सरकार शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178043/second-district-conference-of-aisa-supaul-concludes-formation-of-17"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/b1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल/त्रिवेणीगंज -: </strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन रविवार को त्रिवेणीगंज स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में देश के छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लैंगिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार की राज्य सरकार शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे का साधन बना रही हैं, जिससे गरीब और मेहनतकश तबके के छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। साथ ही सरकारी स्कूलों के बंद होने, पेपर लीक की घटनाओं और शैक्षणिक संस्थानों में अव्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में बढ़ती समस्याओं और छात्रों के बीच बढ़ते तनाव को भी गंभीर मुद्दा बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि रोहित वेमुला प्रकरण के बाद यूजीसी द्वारा लाए गए समता संबंधी प्रावधानों को लागू कराने की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की। उन्होंने इन प्रावधानों को लागू करने के लिए छात्र आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सम्मेलन के सांगठनिक सत्र में 17 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन किया गया। इसमें संतोष कुमार सियोटा को जिला सचिव तथा रामाशीष को जिलाध्यक्ष बनाया गया। वहीं सुनील कुमार सरदार, अंकू आनंद और अभिनव आनंद को जिला उपाध्यक्ष, शशिकांत कुमार एवं अभिनंदन कुमार को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।<br />सम्मेलन में माले जिला सचिव जयनारायण यादव, पूर्व आइसा सचिव डॉ. अमित कुमार चौधरी, पिपरा विधानसभा से महागठबंधन प्रत्याशी अनिल कुमार, खेगरामस जिला सचिव जन्मजेय राय, मुलेश कुमार शर्मा, मो. अब्दुल सहित सैकड़ों छात्र-युवा उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सम्मेलन के अंत में संगठन को और मजबूत बनाने तथा छात्र-हितों के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178043/second-district-conference-of-aisa-supaul-concludes-formation-of-17</link>
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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:59:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिले में खुला कैंप लगाकर 80 प्रतिशत लोकल बेरोजगारों की हो भर्ती: रोशन लाल यादव</title>
                                    <description><![CDATA[- एनसीएल खड़िया परियोजना में काम कर रही निजी कंपनी कलिंगा में हुई भर्ती हो निरस्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151564/roshan-lal-yadav-should-recruit-80-percent-local-unemployed-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/img-20250430-wa0031(1).jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सोनांचल संघर्ष वाहिनी(सोसंवा) कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंच कर एनसीएल खड़िया कोयला परियोजना में काम कर रही निजी कंपनी कलिंगा के विरुद्ध तीन सूत्रीय मांगों का ज्ञापन एडीएम न्यायिक रमेश चंद्र यादव को सौंपा।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनांचल संघर्ष वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रोशन लाल यादव ने कहा कि भर्ती के नाम पर धड़ल्ले से वेरोजगार युवाओं का दोहन किया जा रहा है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए चाहे जितना बड़ा आंदोलन क्यों न करना पड़े किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि निजी कंपनी में एक हजार के ऊपर संविदा हेलफर और ड्राइवरों की भर्ती में संगठित संरक्षण प्राप्त तथा कथित गिरोह के द्वारा यहां के विस्थापित, प्रभावित और लोकल बेरोजगारों की भर्ती के नाम पर धड़ल्ले से युवाओं का दोहन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भर्ती घोटाले की जांच हो और संगठित गिरोह द्वारा अभी तक कराई गई भर्ती को निरस्त कर भर्ती की स्पष्ट गाइड लाइन बनाकर तीन दिन खुला कैंप लगाकर एक हजार में 80% विस्थापित, प्रभावित और लोकल बेरोजगारों की भर्ती सुनिश्चित की जाए, अन्यथा अब यह आंदोलन जल्द उर्जांचल जन आंदोलन के रूप में बदल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री यादव ने एनआईटी के समझौते के आधार पर एनसीएल मुख्यालय सिंगरौली के चीफ जनरल मैनेजर द्वारा 10 जुलाई 2006 को स्पष्ट आदेश पारित किया गया है कि संविदा की समस्त भर्ती की 80 प्रतिशत विस्थापित, प्रभावित व लोकल बेरोजगारों की ही भर्ती सुनिश्चित हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बावजूद इसके आदेश की अनदेखी कर चंद संगठित लोगों व एनसीएल खड़िया प्रबंधन की मिलीभगत से बाहरी लोगों की भर्ती सुविधा शुल्क लेकर बेरोकटोक की जा रही है। कहा कि अगर की भर्ती को निरस्त कर मामले की जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और उर्जांचल में बेरोजगारों की भर्ती का खेल खेल रहे संगठित लोग जल्द बेनकाब होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से सोसंवा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण मोहन यादव, राष्ट्रीय महासचिव पुष्पेंद्र चौधरी, रामचंद्र सिंह,सत्यप्रकाश यादव,अरुण कुमार सोनू,रामकेश पाल,फिरोज खान,सलमान खान, अन्नू खान, बब्बू खान, वीरेंद्र कुमार, दीपक कुमार गिरी, संतोष सोनी आदि शामिल रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 23:34:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोसंवा कार्यकर्ता 30 अप्रैल को पदयात्रा कर जीएम को सौपेंगे ज्ञापन: रोशनलाल यादव</title>
                                    <description><![CDATA[- सोनांचल संघर्ष वाहिनी कार्यकर्ताओं ने शक्तिनगर में बैठक कर आंदोलन की बनाई रणनीति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/151200/sosanwa-worker-will-hand-over-the-memorandum-to-gm-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/img_20250420_153833.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>राजेश तिवारी / अजयंत सिंह ( क्राइम ब्यूरो रिपोर्ट) </em></strong></p>
<p><strong><em>सोनभद्र(अनपरा) / उत्तर प्रदेश-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">सोनांचल संघर्ष वाहिनी(सोसंवा) कार्यकर्ताओं ने रविवार को शक्तिनगर में बैठक कर एनसीएल खड़िया कोयला परियोजना में काम कर रही निजी कंपनी कलिंगा के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई। मुख्य अतिथि सोनांचल संघर्ष वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रोशन लाल यादव ने कहा कि भर्ती के नाम पर धड़ल्ले से वेरोजगार युवाओं का दोहन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसपर अंकुश लगाने के लिए आगामी 30 अप्रैल को सोसंवा कार्यकर्ता पदयात्रा कर खड़िया जीएम को मांग से संबंधित ज्ञापन सौपेंगे।उन्होंने कहा कि निजी कंपनी में एक हजार के ऊपर संविदा हेलफर और ड्राइवरों की भर्ती में संगठित संरक्षण प्राप्त तथा कथित गिरोह के द्वारा यहां के विस्थापित, प्रभावित और लोकल बेरोजगारों की भर्ती के नाम पर धड़ल्ले से युवाओं का दोहन किया जा रहा है इसी के खिलाफ सोनांचल संघर्ष वाहिनी ने कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक सोनांचल संघर्ष वाहिनी के राष्ट्रीय महासचिव पुष्पेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि ने ऐलान किया कि आंदोलन के प्रथम चरण में आगामी 30 अप्रैल को रोड वेज बस स्टैंड शक्तिनगर से खड़िया कोयला परियोजना जीएम गेट तक बेरोजगार भर्ती घोटाले को लेकर सोनांचल संघर्ष वाहिनी के कार्यकर्ता और विस्थापित,</p>
<p style="text-align:justify;">प्रभावित और लोकल बेरोजगार पद यात्रा कर जीएम गेट पहुंचेंगे और एनसीएल खड़िया प्रबंधन से मांग करेंगे कि इस भर्ती घोटाले की जांच हो और संगठित गिरोह द्वारा अभी तक कराई गई भर्ती को निरस्त कर भर्ती की स्पष्ट गाइड लाइन बनाकर तीन दिन खुला कैंप लगाकर एक हजार में 80% विस्थापित, प्रभावित और लोकल बेरोजगारों की भर्ती सुनिश्चित की जाए, अन्यथा अब यह आंदोलन जल्द उर्जांचल जन आंदोलन के रूप में बदल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री यादव ने यह भी कहा कि उर्जांचल में बेरोजगारों की भर्ती का खेल खेल रहे संगठित लोग जल्द बेनकाब होंगे। यह आंदोलन सोनांचल के उपेक्षित बेरोजगारों के लिए मिल का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड को भी ज्ञापन देकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में प्रदीप कुमार, महेंद्र कुमार, विनय कुमार, सलमान खान, देवानंद विश्वकर्मा, सुमंत यादव, सुमित, बलवंत यादव, फिरोज और राहुल भारती मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Apr 2025 19:50:06 +0530</pubDate>
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                <title>एनसीएल खड़िया परियोजना में नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप, स्थानीय युवाओं की अनदेखी</title>
                                    <description><![CDATA[बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर  स्थानीय आदिवासी  युवा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150965/local-youth-ignored-accused-of-cheating-in-the-name-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/img_20250412_195713.jpg" alt=""></a><br /><p><strong><em>अजयंत कुमार सिंह (संवाददाता) </em></strong></p>
<p><strong><em>अनपरा/ सोनभद्र-</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">एनसीएल की खड़िया कोयला परियोजना में ओवरबर्डेन हटाने का कार्य कर रही निजी कंपनी कलिंगा में हेल्पर और ड्राइवरों की भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। सोनांचल संघर्ष वाहिनी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रोशन लाल यादव ने आरोप लगाया है कि इस भर्ती में एक संगठित गिरोह युवाओं से मोटी रकम वसूल कर मनमाने ढंग से भर्तियां कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने दावा किया कि इस गोरखधंधे में बड़े-बड़े लोग शामिल हैं और अपने निजी कोटे के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल खेला जा रहा है। यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस भर्ती प्रक्रिया में सोनांचल के आदिवासी और मूलनिवासी युवकों की घोर अनदेखी की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि उनकी संस्था वर्ष 2017 से ही एनसीएल की बीना, कृष्ण शीला, दुद्धीचुआ और खड़िया कोयला परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं की भर्ती के लिए गाइडलाइन बनाने और 80% आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन कर चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इस गंभीर धांधली को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी कई बार पत्र और ज्ञापन भेजे गए, लेकिन स्थानीय बेरोजगारों की पीड़ा अनसुनी कर दी गई। यादव ने मांग की कि गैरकानूनी तरीके से हो रही इस भर्ती की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनांचल संघर्ष वाहिनी के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के अंदर भर्ती के लिए गाइडलाइन नहीं बनाई जाती है, तो उनकी संस्था अनपरा थाना चौक से खड़िया जीएम गेट तक पदयात्रा करेगी और खड़िया कोयला परियोजना के जीएम को ज्ञापन सौंपकर गाइडलाइन के अनुसार भर्ती करने और गैरकानूनी भर्तियों को रद्द करने की मांग करेगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सोनांचल के बेरोजगारों के हितों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Apr 2025 01:52:44 +0530</pubDate>
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