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                <title>shivratri - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>शिवरात्रि के अवसर पर  श्री श्री शिव मंदिर एवं श्री श्री कृष्ण गरखिया ​​थान में श्रद्धालुओं लगी भीड़।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div>  <strong>असम धेमाजी ।</strong>सिलापथार मिसिंग पुर सिंगिबिल, खेतों के बीच एक पेड़ तले सथानीय कुछ गौवालो ने भगवान शिव और कृष्ण की मिट्टी से प्रतिमा निर्माण कर पूजा करते आ रही थी। समय के साथ लोगों में इस मंदिर के बारे मैं अवगत हुए और हर तरफ़ चर्चा होने लगी। समय के साथ 2014 में श्री श्री शिव मन्दिर और श्री श्री कृष्ण गरोखिया थान नाम देखर स्थायी रुप से प्रतिष्ठा किया गया। लोगों का मानना है की इस मंदिर में मन्नत मांगने से मन्नत पूरी होती है। इसीलिए हर वर्ष के तरह आज भी महा शिवरात्रि के पवित्र पर्व</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149074/on-the-occasion-of-shivaratri-devotees-gathered-at-sri-sri"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img_20250226_172939.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div> <strong>असम धेमाजी ।</strong>सिलापथार मिसिंग पुर सिंगिबिल, खेतों के बीच एक पेड़ तले सथानीय कुछ गौवालो ने भगवान शिव और कृष्ण की मिट्टी से प्रतिमा निर्माण कर पूजा करते आ रही थी। समय के साथ लोगों में इस मंदिर के बारे मैं अवगत हुए और हर तरफ़ चर्चा होने लगी। समय के साथ 2014 में श्री श्री शिव मन्दिर और श्री श्री कृष्ण गरोखिया थान नाम देखर स्थायी रुप से प्रतिष्ठा किया गया। लोगों का मानना है की इस मंदिर में मन्नत मांगने से मन्नत पूरी होती है। इसीलिए हर वर्ष के तरह आज भी महा शिवरात्रि के पवित्र पर्व में बृहत्त इलाके की 15 से ज्यादा गांवों के लोगों ने सुबह से मंदिर में पूजा  एवं शिव लिंग पर जलाविशेक करने लाइन लगते हुए दिखाई दी।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/img_20250226_172818.jpg" alt="शिवरात्रि के अवसर पर  श्री श्री शिव मंदिर एवं श्री श्री कृष्ण गरखिया ​​थान में श्रद्धालुओं लगी भीड़।" width="534" height="294"></img></div>
<div> मंदिर प्रबंधन समिति ने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रसाद, खीरी और खीर भेंट किया।  शिव और कृष्ण की मूर्तियां लोगों और व्यक्तियों द्वारा दान किए गए धन से स्थापित की गई हैं। हालांकि, खेतों के बीच कोई यातायात के जरिया ना होने की कारण  भक्तों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।  मंदिर एवं तीर्थ प्रबंधन समिति ने आज भूमि, मूर्तियां और मंदिर निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के दानकर्ताओं को औपचारिक रूप से सम्मानित किया तथा मंदिर तक श्रद्धालुओं के आने के लिए सड़क का निर्माण करने का आग्रह किया।</div>
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                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 18:44:06 +0530</pubDate>
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                <title>कृपा करो भोले भंडारी जनता पर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>26  फरवरी को भगवान शिव के विवाह की सालगिरह है। भारत में एक बड़ी आबादी इसे शिवरात्रि के रूप में मनाती है।  हमारे यहां भी इस दिन व्रत रखा जाता है ,पूजा अर्चना की जाती है बावजूद इसके की हम ' अस्नानी 'सनातनी हैं। अर्थात हमने 144  साल बाद पड़े महाकुम्भ में डुबकी  नहीं लगाईं। अब नहीं लगाईं ,तो नहीं लगाईं ,इससे भोले बाबा नाराज होने वाले नहीं हैं। वे कौन से महाकुम्भ में डुबकी लगाने आये ? महाकुम्भ में तो पापियों और मोक्ष की कामना करने वालों ने और सियासी दलों की धमकियों और भबकियों से डरने वाले सनातनियों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149025/please-bless-the-people"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download6.jpg" alt=""></a><br /><p>26  फरवरी को भगवान शिव के विवाह की सालगिरह है। भारत में एक बड़ी आबादी इसे शिवरात्रि के रूप में मनाती है।  हमारे यहां भी इस दिन व्रत रखा जाता है ,पूजा अर्चना की जाती है बावजूद इसके की हम ' अस्नानी 'सनातनी हैं। अर्थात हमने 144  साल बाद पड़े महाकुम्भ में डुबकी  नहीं लगाईं। अब नहीं लगाईं ,तो नहीं लगाईं ,इससे भोले बाबा नाराज होने वाले नहीं हैं। वे कौन से महाकुम्भ में डुबकी लगाने आये ? महाकुम्भ में तो पापियों और मोक्ष की कामना करने वालों ने और सियासी दलों की धमकियों और भबकियों से डरने वाले सनातनियों ने डुबकियां लगाई हैं।</p>
<p>बात भोले   बाबा की हो रही है।  मुझे भोले बाब सचमुच प्रभावित करते हैं।  मैं उनका अनन्य भक्त हूँ। मेरी भक्ति किसी राजनीतिक दल या उसके नेता के प्रति नहीं है। मैं अंधभक्त भी नहीं हूँ। अंधभक्त किसी को भी नहीं होना चाहिये।  भक्ति हमेशा ऑंखें खोलकर करना चाहिए ,फिर चाहे भक्ति किसी भगवान की हो या इंसान की। आजकल लोग भगवान से ज्यादा इंसानों की भक्ति में लीन है, भले ही भगवान नाराज हो जाये। आजकल के अवतारी इंसान भगवान को भी अडानी की तरह घूस देने में नहीं हिचकते। आजकल के इंसान तो भगवान के भक्तों को बाजार समझते है।  1500  करोड़ निवेश करते हैं और 3  लाख करोड़ की कमाई कर लेते हैं।</p>
<p>बहरहाल भवन शिव और माता पार्वती को उनके विवाह की वर्षगांठ पर  मैं हार्दिक बधाई देता हूँ ।  बधाई उन्हें भी और उनके उन भक्तों को भी जो इस समय प्रयागराज,बनारस और अयोध्या में फंसे हुए हैं और घंटों की प्रतीक्षा के बाद अपने-अपने आराध्य के दर्शन कर पा रहे हैं। भगवान भोले नाथ भी हैरान हैं कि इस बार भक्तगण उनके ऊपर इतनी कृपा क्यों  बरसा रहे हैं ? इससे पहले तो इतनी अपार भीड़ कभी उनके मंदिर में नहीं आयी। बनारस में विश्व गुरु तो अभी आये हैं, लेकिन भोले बाबा यानि भगवान विश्वनाथ तो बनारस में अनंत काल  से रमे हैं,जमे हैं।भोले बाबा बोलते नहीं हैं लेकिन सोचते तो होंगे कि इस अपार भीड़ के पीछे कोई न कोई खर दिमाग जरूर है।</p>
<p>भोले बाबा त्रिनेत्र कहे जाते हैं। उनका तीसरा नेत्र जब-तब खुलता है। यदि खुलता है तो कामदेव मारा जाता है। भस्म हो जाता है ,क्षार -क्षार हो जाता है ,लेकिन भगवान भोले उसके ऊपर भी कृपा करते हैं और उसे अनंग   बना देते   हैं जो बिना शरीर के भी सभी में व्याप्त हो जाता है। लगता है कि कलिकाल में बहुत से लोग हैं जो कामदेव की गति  हासिल करना चाहते हैं। उन्हें ' अनंग' होने की चाह है।  वे लोकतंत्र के भुजंग तो बन गए हैं लेकिन अनंग नहीं बन पा रहे। भोले बाबा को खुश करने के लिए उनके भुजंग भक्तों ने बनारस हो या उज्जैन दोनों ठिकानों पर कॉरिडोर और भव्यदिव्य लोक बना दिए हैं ,लेकिन भोले बाबा खुश नहीं हो   रहे ।  बेचारों को बैशाखियाँ लगाकर अपनी सरकार चलना पड़ रही है।</p>
<p> मुझे याद है कि भोले बाबा ने कभी किसी को वैष्णव या शैव्य होने के लिए अपनी और से नहीं कहा ।  उन्हें सभी प्रिय हैं। हाँ उन्हें सपने में वे लोग बिलकुल पसंद नहीं जो उनके आराध्य कौशलेश के नाम पर सियासत करने से भी बाज नहीं आये। भोले बाबा उनसे भी खफा हैं जिन्होंने अयोध्या,बनारस और संगम को टकसाल में बदल दिया ह।  आज की पीढ़ी टकसाल के बारे में नहीं जानती। टकसाल का मतलब नोट छापने का कारखाना होता है। आजकल भारत में नोट छापने के कारखाने धर्मस्थलों पर ही कामयाब हैं। भोले बाबा हिमाचल के दामाद हैं ,इसलिए हिमाचल वालों पार ज्यादा खुश रहते हैं। वहां उन्होंने नकली भक्तों की सरकार तक नहीं बनने दी ।  बन गयी तो गिरने नहीं दी। भले ही हिमाचल में कंगना खूब सक्रिय रहीं।</p>
<p> भगवान भोले नाथ को उनकी शादी की सालगिरह पर हालांकि भक्तों को उपहार देना चाहिए लेकिन मैं भगवान भोलेनाथ से एक वर माँगता हूँ कि  वे एक तो महाकुम्भ में जाम से आहत लोगों पार अपनी कृपा बरसायें और जितनी जल्दी हो अपना तीसरा नेत्र खोलकर इतना उजास कर दें ताकि भक्तों की आँखों की रौशनी वापस लौट आय।  वे देख  सकें कि उन्हें ठगने वाले लोग कौन हैं ? उनके वोट लूटने वाले लोग कौन हैं ? ट्रम्प साहब से 182  करोड़ रूपये लेने वाले कौन हैं ? विश्वनाथ के होते विश्वनाथ बनने की कोशिश करने वाले कौन हैं ? वे कौन हैं जो भारतभूमि पर इंसानों के बीच जाती-धर्म की विभाजक रेखा खींच रहे हैं।</p>
<p>आपको बता दूँ कि  मैं जब पहली बार अमेरिका गया था तब मैंने अटलांटा में डनवुडी में भोले बाबा के एक मंदिर का नाम डनवुडेश्वर रखने की सलाह दी थी। क्योंकि भोले बाबा के भक्त उन्हें किसी भी स्वरूप में स्वीकार करने में हर्षित होते हैं। पहली बार जिन सरकारी ज्योतिषियों ने कुम्भ को महाकुम्भ   बनाने की साजिश रची थी उनका ही कहना है कि महाशिवरात्रि का त्योहार तीन मूलांक के जातकों के लिए बेहद शुभ साबित होने वाला है. कहते हैं कि मूलांक 1 ,3 ,और 8 वालों   पर महादेव की कृपा बरसेगी। बकौल ज्योतिषियों के मूलांक 8 के स्वामी ग्रह शनि हैं और यह किसी से छिपा नहीं कि शनिदेव शिवजी के कितने बड़े भक्त हैं. ऐसे में मूलांक 8 के जातकों को इस महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की खूब कृपा बरसेगी. जातक को मानसिक शांति मिलेगी साथ ही सेहत में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं. महाशिवरात्रि के बाद का समय जातक के लिए अति सुख में बीतने वाला है।</p>
<p>मूलांक 1 के जातकों के लिए महाशिवरात्रि का पर्व अच्छे दिन लेकर आ रहा है. सूर्य ग्रह के मूलांक 1 के जातकों पर भगवान शिव विशेष कृपा करेंगे. जातक के कार्यों की तारीफ हो सकती है. पुरानी योजना पर काम शुरू कर सकते हैं. महाशिवरात्रि के बाद पारिवारिक जीवन भी अच्छा होने वाला है।मूलांक 2 का स्वामी चंद्रमा है, ऐसे में इस मूलांक के लोगों पर शिव जी की कृपा हमेशा बनी रहती है. दरअसल चंद्रमा भी महादेव के परम भक्त माने गए हैं. किसी भी महीने में 2, 11, 20 और 29 तारीख को जन्में लोगों का मूलांक 2 होता है. ये लोग महाशिवरात्रि की पूजा के बाद से ही अपने लक्ष्य को पाने में सफल रहेंगे । हमारे प्रधानमंत्री जीका मूलांक 8  हैउनके लिए ये शिवरात्रि शुभ है ,लेकिन राहुल गाँधी का मूलांक 10 और मेरा मेरा मूलांक तो 7  है इसलिए मुझे तो कुछ मिलने वाला नहीं है किन्तु जिन्हें कुछ मिलने वाला है उन्हें और बाकि सभी को शिवरात्रि की हार्दिक बधाइयाँ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:37:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कुंभ के अंतिम पड़ाव में भी सेंट्रल व बस अड्डे पर उमड़ी भीड़ </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कानपुर।</strong> महाकुंभ - 25 का अंतिम सप्ताह चल रहा है और 26 फरवरी शिवरात्रि को अंतिम स्नान भी है, इसके बाद कुंभ 12 साल बाद ही होगा। ऐसे में कोई भी प्रयागराज महाकुंभ में स्नान से वंचित नहीं रहना चाहता है। अपने साधन से, हवाई यात्रा से, रेल यात्रा से व बस से किसी भी तरह प्रयागराज पहुंचने का प्रयास कर रहा है। कल इसी क्रम में कानपुर में रात्रि सेंट्रल रेलवे स्टेशन व झकरकटी बस अड्डे पर अचानक ही भीड़ बढ़ गई। भीड़ बढ़ते देख रेलवे व प्रशासन एलर्ट हो गया।</div>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/img-20250223-wa0009.jpg" alt="कुंभ के अंतिम पड़ाव में भी सेंट्रल व बस अड्डे पर उमड़ी भीड़ " width="1200" height="1200" /></p>
<p>सूचना मिलते ही सहायक पुलिस आयुक्त कैंट सृष्टि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148928/crowds-gathered-at-central-and-bus-stand-in-the-last"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250223-wa0049(1).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कानपुर।</strong> महाकुंभ - 25 का अंतिम सप्ताह चल रहा है और 26 फरवरी शिवरात्रि को अंतिम स्नान भी है, इसके बाद कुंभ 12 साल बाद ही होगा। ऐसे में कोई भी प्रयागराज महाकुंभ में स्नान से वंचित नहीं रहना चाहता है। अपने साधन से, हवाई यात्रा से, रेल यात्रा से व बस से किसी भी तरह प्रयागराज पहुंचने का प्रयास कर रहा है। कल इसी क्रम में कानपुर में रात्रि सेंट्रल रेलवे स्टेशन व झकरकटी बस अड्डे पर अचानक ही भीड़ बढ़ गई। भीड़ बढ़ते देख रेलवे व प्रशासन एलर्ट हो गया।</div>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/img-20250223-wa0009.jpg" alt="कुंभ के अंतिम पड़ाव में भी सेंट्रल व बस अड्डे पर उमड़ी भीड़ " width="1600" height="1200"></img></p>
<p>सूचना मिलते ही सहायक पुलिस आयुक्त कैंट सृष्टि सिंह व पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार मय पुलिस फोर्स के रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर पहुंचे और वहां स्थिती का जायजा लिया। संबंधित थाना प्रभारी ने कानपुर नगर सेन्ट्रल रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए रेलवे स्टेशन से कुंभ मेला स्पेशल ट्रेन चलाई गई । घंटाघर की ओर से आने वाले यात्रियों को होल्डिंग एरिया में रोककर नियंत्रित रूप से स्टेशन भेजा गया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में किया गया।</p>
<div> पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार भी कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन एवं झकरकटी बस स्टैंड पहुंचे और वहां का निरीक्षण किया। महाकुंभ 2025 के मद्देनजर पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार द्वारा कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन एवं झकरकटी बस स्टैंड का निरीक्षण किया। यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। यात्रियों की सुगमता हेतु रूट व्यवस्था, पार्किंग व परिवहन के सुचारू संचालन के लिए विशेष उपाय करने के निर्देश दिए गए। आम नागरिकों एवं श्रद्धालुओं से यातायात नियमों के पालन व सहयोग की अपील की गई, जिससे किसी भी असुविधा से बचा जा सके।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 17:37:56 +0530</pubDate>
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