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                <title>डीवीसी विस्थापितों के अनिश्चितकालीन धरने का दूसरा दिन, जमीन के बदले रसीद की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>चंदवारा-</strong> डीवीसी विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले उरवां फार्म में जारी अनिश्चितकालीन धरने का दूसरा दिन भी संघर्षपूर्ण रहा। समिति के संयोजक कृष्णा यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक 56 मौजा के विस्थापितों को जमीन के बदले दी गई जमीन की रसीद निर्गत नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर चंदवारा प्रमुख मंजू देवी, जिला परिषद सदस्य महादेव राम, समिति के संयोजक कृष्ण कुमार यादव, सचिव शीतल यादव सहित कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।</div>
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<div>सभी ने डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) पर विस्थापितों के साथ छल करने का आरोप</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148317/demand-for-receipt-of-land-in-lieu-of-land-second"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/news-12.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>चंदवारा-</strong> डीवीसी विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले उरवां फार्म में जारी अनिश्चितकालीन धरने का दूसरा दिन भी संघर्षपूर्ण रहा। समिति के संयोजक कृष्णा यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक 56 मौजा के विस्थापितों को जमीन के बदले दी गई जमीन की रसीद निर्गत नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर चंदवारा प्रमुख मंजू देवी, जिला परिषद सदस्य महादेव राम, समिति के संयोजक कृष्ण कुमार यादव, सचिव शीतल यादव सहित कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।</div>
<div> </div>
<div>सभी ने डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) पर विस्थापितों के साथ छल करने का आरोप लगाया और प्रशासन से त्वरित समाधान की मांग की। धरने में शामिल नेताओं ने कहा कि 1950 से डीवीसी उरवां, कोटवारडीह और जामुखांडी गांवों के किसानों के साथ अन्याय कर रही है। किसानों की जमीन कम कीमत पर ले ली गई, लेकिन बदले में जो जमीन दी गई, वह अनुपयोगी साबित हो रही है। ना ही इस जमीन की बिक्री हो सकती है और ना ही कोई सरकारी लाभ मिल पा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>विस्थापितों को ना मुआवजा मिला, ना ही जमीन का पर्चा, जिससे वे कानूनी रूप से मालिक भी नहीं बन सके। इसके अलावा, तिलैया जलाशय योजना के तहत सैकड़ों मछुआरे मछली पालन कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं, लेकिन डीवीसी प्रबंधन द्वारा यहां सोलर प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है, जो स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर संकट खड़ा कर देगा। विस्थापितों की कई प्रमुख मांगें है जिनमें डीवीसी द्वारा दी गई जमीन का रसीद निर्गत किया जाए।</div>
<div> </div>
<div>डीवीसी डैम में मछुआरों और केज उत्पादकों के लिए वित्तीय सहायता दी जाए। प्रभावित गांवों में मुफ्त पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई की व्यवस्था की जाए। विस्थापित रैयतों को बकाया मुआवजा और जमीन का पर्चा दिया जाए। झारखंड सरकार के नियम अनुसार 75% स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। डीवीसी फार्म क्षेत्र में खेल मैदान और हेल्थ केयर सेंटर का निर्माण किया जाए। उरवां पंचायत में 100 बेड का अस्पताल बनाया जाए। डीवीसी जलाशय तक आम जनता के लिए 25 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण करवाया जाए शामिल है।</div>
<div> </div>
<div>धरने में महिलाओं और किसानों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने डीवीसी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। इस मौके पर प्रकाश यादव, झारी राणा, हीरामन रविदास, बजरंगी यादव, गीता देवी, सुनीता देवी, रीना देवी, बसंती देवी, मालती देवी, कंचन देवी समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे। संघर्ष समिति का कहना है कि जब तक विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल जाता, यह आंदोलन अनिश्चितकालीन जारी रहेगा। </div>
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<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Feb 2025 18:28:35 +0530</pubDate>
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