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                <title>कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग भाजपा के साथ सांठगांठ कर रहा है:ऐसे लोगों को बाहर करना होगा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग भाजपा के साथ सांठगांठ कर रहा है: गुजरात में राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस पिछले तीन दशकों में गुजरात के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में असमर्थ रही है, क्योंकि कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग अंदर से भाजपा के साथ साठगांठ कर रहा है।इस बात पर जोर देते हुए कि आलोचकों को ‘छानने’ से राज्य के लोग पार्टी पर भरोसा कर सकेंगे, गांधी ने कहा कि उन्होंने गुजरात के लोगों के साथ ‘संबंध बनाने’ और कांग्रेस के ‘छिपे हुए विश्वास को प्रकट करने’ का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149617/a-section-of-congress-leaders-is-colluding-with-the-bjp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(23).jpg" alt=""></a><br /><div>कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग भाजपा के साथ सांठगांठ कर रहा है: गुजरात में राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस पिछले तीन दशकों में गुजरात के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में असमर्थ रही है, क्योंकि कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग अंदर से भाजपा के साथ साठगांठ कर रहा है।इस बात पर जोर देते हुए कि आलोचकों को ‘छानने’ से राज्य के लोग पार्टी पर भरोसा कर सकेंगे, गांधी ने कहा कि उन्होंने गुजरात के लोगों के साथ ‘संबंध बनाने’ और कांग्रेस के ‘छिपे हुए विश्वास को प्रकट करने’ का फैसला किया है।</div>
<div> </div>
<div>गांधी ने अपने दो दिवसीय दौरे पर अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं और कहा कि पार्टी, समग्र रूप से, गुजरात के लोगों की “उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रही है”, जो “एक नया दृष्टिकोण चाह रहे हैं”।उन्होंने कहा कि पार्टी को उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने की जरूरत है जो अंदर से भाजपा के लिए काम करते हैं । उन्होंने कहा, "कांग्रेस पिछले 20-30 सालों से गुजरात के लोगों की उम्मीदों को पूरा क्यों नहीं कर पाई है? इसका जवाब यह है कि गुजरात के नेतृत्व, कार्यकर्ताओं, पार्टी के जिला और ब्लॉक अध्यक्षों में दो तरह के नेता हैं - एक, जो जनता के साथ खड़े होते हैं, उनके लिए लड़ते हैं और उनका सम्मान करते हैं क्योंकि उनके दिल में कांग्रेस है; दूसरे, जो अलग-थलग रहते हैं, लोगों का सम्मान नहीं करते और भाजपा के साथ मिले हुए हैं।"</div>
<div> </div>
<div>यह कहते हुए कि गुजरात में लोग, व्यापारी, एसएमई, किसान, मजदूर और छात्र विपक्ष चाहते हैं, गांधी ने कहा, "वे बी-टीम (भाजपा की) नहीं चाहते हैं... इन दोनों समूहों को छांटना मेरी जिम्मेदारी है। कांग्रेस में नेताओं की कोई कमी नहीं है - हमारे पास जिला और ब्लॉक स्तर के नेता हैं जो बब्बर शेर (एशियाई शेर) हैं, लेकिन उनके पास पीछे से एक जंजीर है (भाजपा के नियंत्रण में)।"</div>
<div> </div>
<div>गांधी ने कहा कि अब समय आ गया है कि विरोधियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए। उन्होंने कहा, "अगर हमें 20-30 लोगों को भी निकालना पड़े तो हम निकाल देंगे। अगर आप कांग्रेस के भीतर से भाजपा के लिए काम कर रहे हैं तो आपको बाहर भेज दिया जाएगा ताकि आप खुलकर उनके लिए काम कर सकें। आपको एहसास होगा कि वहां (भाजपा में) आपकी कोई कीमत नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>चुनाव जीतने और हारने की बात तो छोड़िए, वरिष्ठ नेताओं की रगों में कांग्रेस का खून बहना चाहिए। संगठन का नियंत्रण ऐसे नेताओं के पास होना चाहिए। जैसे ही हम ऐसा करेंगे, गुजरात के लोग कांग्रेस पार्टी में आना चाहेंगे और हमें उनके लिए अपने दरवाजे खोलने होंगे। हमें चुनाव के बारे में बात करने की जरूरत नहीं है - यह दो-तीन साल का प्रोजेक्ट नहीं बल्कि 50 साल का प्रोजेक्ट है।"</div>
<div> </div>
<div>तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी ने अपने वोट प्रतिशत में 22 प्रतिशत की वृद्धि की है, इस पर प्रकाश डालते हुए गांधी ने दावा किया कि गुजरात के 40 प्रतिशत वोट कांग्रेस के पास हैं। उन्होंने कहा, “हमें लोगों से जुड़ने की जरूरत है। हमने भारत जोड़ो यात्रा के जरिए दिखाया कि कांग्रेस कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों से आसानी से जुड़ सकती है। हम देश की राजनीति बदल सकते हैं। मैं अपनी बात भी कह रहा हूं, कांग्रेस नेताओं को लोगों के बीच और उनके घरों में जाना होगा।</div>
<div> </div>
<div>उनकी आवाज सुननी होगी और उनसे पूछना होगा कि वे अपने भविष्य, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापार के लिए क्या चाहते हैं। हम सुनने आए हैं, भाषण देने नहीं… मैं यह मंच से कह रहा हूं, मैं डरा हुआ या शर्मिंदा नहीं हूं। लेकिन मैं यह आपके सामने कहना चाहता हूं… चाहे हमारे कार्यकर्ता हों, या राहुल गांधी , या महासचिव या पीसीसी अध्यक्ष, हम गुजरात को रास्ता नहीं दिखा पा रहे हैं।”</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने कहा, "हम यह आसानी से कर सकते हैं..." उन्होंने आगे कहा, "आपको याद रखना चाहिए कि गुजरात में विपक्ष के पास 40 प्रतिशत वोट हैं। यह कोई छोटा विपक्ष नहीं है। गुजरात के किसी भी हिस्से में हमारे पास दो लोग होंगे, जिनमें से एक भाजपा का समर्थन करेगा और दूसरा कांग्रेस का। लेकिन हमारे दिमाग में, हम सोचते हैं कि कांग्रेस में कोई ताकत नहीं है। अगर हमारा वोट 5 प्रतिशत बढ़ जाता है, तो वह काफी होगा। तेलंगाना में, हमने अपना वोट प्रतिशत 22 प्रतिशत बढ़ाया, हमें यहाँ केवल 5 प्रतिशत की आवश्यकता है। लेकिन हम इन दो समूहों को छांटे बिना यह 5 प्रतिशत नहीं पा सकेंगे।"</div>
<div> </div>
<div>गांधी ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे नेताओं के कारण गुजरात से आई, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान "रास्ता दिखाया"। गांधी ने कहा, "गुजरात के बिना, कांग्रेस की कोई विचारधारा नहीं होती। गुजरात ने हमें (कांग्रेस को) सिखाया है। महात्मा गांधी और सरदार पटेल ने ही हमें सिखाया है। आज गुजरात खुद को फंसा हुआ पा रहा है। गुजरात की रीढ़ उसके व्यापारी, एसएमई हैं। वे खत्म हो चुके हैं; हीरा उद्योग, कपड़ा उद्योग और सिरेमिक उद्योग...गुजरात के किसानों को देखिए। वे चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि उन्हें नया विजन चाहिए क्योंकि पिछले 25 सालों से जो विजन चल रहा था, वह विफल हो गया है।"</div>
<div> </div>
<div>गांधी ने कहा कि वह गुजरात में कांग्रेस नेताओं के छिपे हुए आत्मविश्वास को बाहर लाने की "जिम्मेदारी पूरी करेंगे।"। यह हमारे अंदर है, लेकिन हमें इसे बाहर लाना होगा। मैं इसे आपके लिए प्रकट करूंगा।"</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 12:06:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>'बा' की पुण्यतिथि: गांधी संग बलिदान की अमर स्वर्ण-ज्योति</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा एक ऐसी तेजस्वी महागाथा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें असंख्य शूरवीरों और वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की बलिवेदी पर आहुति चढ़ाई। किंतु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ ऐसी महान आत्माएं उभरीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका बलिदान और समर्पण किसी एक घटना या आंदोलन की परिधि में बंधकर नहीं रहा। ऐसी ही एक अनुपम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलौकिक विभूति थीं कस्तूरबा गांधी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें संपूर्ण भारत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर श्रद्धा और प्रेम से संबोधित करता है। उनकी पुण्यतिथि (22 फरवरी) पर राष्ट्र उनके तपस्वी त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अडिग संकल्प और अमर बलिदान को कृतज्ञतापूर्वक नमन करता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल महात्मा गांधी की जीवनसंगिनी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148824/baun-offer-of-baa-the-immortal-golden-light-of-sacrifice-with-gandhi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/images1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा एक ऐसी तेजस्वी महागाथा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें असंख्य शूरवीरों और वीरांगनाओं ने अपने प्राणों की बलिवेदी पर आहुति चढ़ाई। किंतु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ ऐसी महान आत्माएं उभरीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका बलिदान और समर्पण किसी एक घटना या आंदोलन की परिधि में बंधकर नहीं रहा। ऐसी ही एक अनुपम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलौकिक विभूति थीं कस्तूरबा गांधी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें संपूर्ण भारत </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर श्रद्धा और प्रेम से संबोधित करता है। उनकी पुण्यतिथि (22 फरवरी) पर राष्ट्र उनके तपस्वी त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अडिग संकल्प और अमर बलिदान को कृतज्ञतापूर्वक नमन करता है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल महात्मा गांधी की जीवनसंगिनी ही नहीं थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की एक अद्वितीय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचंड क्रांतिकारी शक्ति भी थीं। उनका जीवन त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्भीकता और अनवरत संकल्प का ऐसा ओजस्वी महाकाव्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो प्रत्येक भारतीय के हृदय में प्रेरणा का अखंड दीप प्रज्ज्वलित करता है। सामाजिक कुप्रथाओं के विरुद्ध उनकी अदम्य संग्रामशीलता और नारी शक्ति को स्वावलंबी बनाने का उनका अथक संकल्प उन्हें एक सच्ची योद्धा के रूप में प्रतिष्ठित करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal">11 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल </span>1869 <span lang="hi" xml:lang="hi">को गुजरात के पोरबंदर में अवतरित कस्तूरबा का बाल्यकाल एक परंपरागत परिवार की शीतल छांव में बीता।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">औपचारिक शिक्षा का प्रकाश उन तक न पहुंच सका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परंतु उनके संस्कारों की गहनता और जीवन की कठोर तपस्या ने उन्हें एक अडिग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेजस्वी व्यक्तित्व का स्वामित्व प्रदान किया। मात्र </span>13 <span lang="hi" xml:lang="hi">वसंतों की कोमल आयु में उनका विवाह मोहनदास करमचंद गांधी से संपन्न हुआ। यह विवाह केवल पारिवारिक बंधन का सूत्र नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु दो प्रबल आत्माओं का ऐसा संगम था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने भारत के इतिहास में अमिट स्वर्णाक्षर अंकित किए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi"> विवाह के प्रारंभिक क्षण सौम्य और साधारण थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु जैसे-जैसे गांधीजी के जीवन का परम ध्येय प्रकाशमान हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्तूरबा भी उनके पथ पर एक अविचल सहचरी बनकर चल पड़ीं। प्रत्येक संकट में उन्होंने अपने अदम्य साहस और असीम धैर्य का परिचय दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और संघर्ष की प्रचंड अग्नि में स्वयं को खरे स्वर्ण-सा परिष्कृत कर दिखाया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दक्षिण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अफ्रीका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गांधीजी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीयों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्याग्रह</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शंखनाद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कस्तूरबा</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">स</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">महासंग्राम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अटल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति-स्तंभ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रखर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हुईं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रंगभेद</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अत्याचार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विरुद्ध</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तेजस्वी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हुंकार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आकाश</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीरती</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गूंजी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आंदोलन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में सहभागी बनीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बारंबार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कारागार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सलाखों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पीछे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निर्भीकता</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कदम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रखा </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अन्याय</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अडिग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खड़े</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लिए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचंड</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संग्राम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">करने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रबल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेरणा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओजपूर्ण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वभाव</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सिद्धांतों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अविचल</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्ठा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दक्षिण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अफ्रीका</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्ष</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदीप्त</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकाश-पुंज</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बनकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दमक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उठा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कारागार</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अमानुषिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यातनाएं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संकल्प</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विचलित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सकीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रण</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अटूट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की पावन धरती पर लौटते ही कस्तूरबा ने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भागीदारी को और भी प्रखर कर दिया। असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने नारियों को विदेशी वस्तुओं का परित्याग कर स्वदेशी को अंगीकार करने का ओजस्वी आह्वान किया। गली-गली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव-गांव घूमकर उन्होंने नारी शक्ति को एकजुट किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खादी को जीवन का प्राण-तत्व बनाने की प्रेरणा प्रदान की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्वच्छता व शिक्षा के अमर मूल्यों का दीप प्रज्ज्वलित किया। उनका अडिग विश्वास था कि भारत की सच्ची स्वाधीनता तब तक अधूरी रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक देश की आधी प्राण-शक्ति—महिलाएं—इस संग्राम में कंधे से कंधा मिलाकर न चलें। उन्होंने यह सप्रमाण स्थापित किया कि स्वतंत्रता का यह महायज्ञ केवल पुरुषों का एकमात्र कर्तव्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नारी शक्ति का भी उतना ही प्रबल और अनुपम योगदान है।</span></p>
<p class="MsoNormal">1930 <span lang="hi" xml:lang="hi">का दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन कस्तूरबा के साहस और नेतृत्व का स्वर्णिम अध्याय बना। उन्होंने नारी शक्ति को इस महायज्ञ का प्राण बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें ब्रिटिश शासन की क्रूर ज्यादतियों के विरुद्ध एक अटूट संगठित किया। ब्रिटिश दमन की क्रूरता भी उनके अदम्य हौसले को भंग न कर सकी। अहिंसा के पावन पथ को उन्होंने न केवल अंगीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे अपने जीवन का प्रदीप्त तप बना लिया। </span>1942 <span lang="hi" xml:lang="hi">के भारत छोड़ो आंदोलन में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गांधीजी को बंधक बना लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कस्तूरबा ने संग्राम की प्रबल कमान थामी। कारागार की ऊंची दीवारों के भीतर भी उनका संकल्प अविचल रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उन्होंने हार को कभी स्वीकार नहीं किया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कस्तूरबा का योगदान केवल राजनीतिक क्षितिज तक सीमित न रहा। सामाजिक सुधारों की प्रज्ज्वलित मशाल थामे वे छुआछूत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जातिवाद और बाल विवाह जैसी घोर कुप्रथाओं के विरुद्ध अडिग रहीं। हरिजनों के कल्याण और नारी शिक्षा के लिए उनका समर्पण एक अनुपम तपोमयी अग्नि बनकर दमक उठा। उनका अटल विश्वास था कि समाज का सच्चा उद्धार तब तक असंभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक नारी शक्ति जागृत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रबल न हो। घर की चारदीवारी को लांघकर अपनी ओजस्वी हुंकार को आकाश तक गूंजाने और समाज के नवनिर्माण में प्रचंड योगदान देने की प्रेरणा उन्होंने नारियों के हृदय में प्रदीप्त की। उनका जीवन एक ऐसा प्रखर दर्पण ठहरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो नारी शक्ति की असीम संभावनाओं को विश्व पटल पर तेजस्वी किरणों से उजागर करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><a></a><span lang="hi" xml:lang="hi">उनका जीवन एक ऐसी अनुपम गाथा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तपस्या और अनवरत समर्पण की जीवंत मिसाल बनकर उभरी। उनकी आत्मा में स्वतंत्रता की ज्वाला इस कदर प्रज्वलित थी कि कारागार की कठोर अग्निपरीक्षा भी उसे बुझा न सकी। वहाँ की निर्मम यातनाओं ने उनके शरीर को क्षीण किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु उनकी इच्छाशक्ति का प्रकाश और आत्मा का तेज कभी मंद न पड़ा। वह एक योद्धा थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने शारीरिक बंधनों को तोड़ा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी अडिग संकल्पशक्ति से उन्हें तुच्छ सिद्ध कर दिया। पुणे के आगाखान महल में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ चारदीवारी और बेड़ियाँ उन्हें कैद करने का दंभ भरती थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने अंतिम दिनों तक अपने आदर्शों को जीवित रखा। </span></p>
<p class="MsoNormal">22 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी </span>1944 <span lang="hi" xml:lang="hi">को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्होंने अंतिम प्राण-श्वास त्यागा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह क्षण मात्र एक देह का अंत नहीं था। वह स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रचंड युग का अवसान था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक ऐसी महाशक्ति का प्रस्थान था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने अपने जीवन से असंख्य दिलों में साहस और बलिदान की चिंगारी प्रज्वलित की। राष्ट्र उनके समक्ष नतमस्तक हुआ। अश्रु-नम नेत्रों से उन्हें विदाई दी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु वह विदाई केवल शारीरिक थी। उनका संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका बलिदान और उनकी अटूट भावना समय की सीमाओं को लाँघकर अमरत्व को प्राप्त हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कस्तूरबा गांधी का जीवन हमें यह ओजस्वी संदेश देता है कि अटल संकल्प</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनंत धैर्य और सत्यनिष्ठा से कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं। उन्होंने नारी शक्ति को एक नवीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदीप्त आयाम प्रदान किया और यह अविचल सत्य स्थापित किया कि स्वतंत्रता संग्राम में नारियां भी पुरुषों के समान सशक्त और प्रभावशाली हैं। आज भी उनके तेजस्वी आदर्श हमारे हृदय में प्रेरणा का प्रखर दीप जलाते हैं—कि हम अन्याय के समक्ष निर्भीकता से खड़े हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य और अहिंसा के पावन मार्ग पर अडिग रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अपने कर्तव्यों को असीम तपस्या के साथ संपूर्ण करें। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु भारतीय संस्कृति और नैतिकता की प्रदीप्त प्रतिमा थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका ओजस्वी प्रकाश युग-युगांतर तक हमारे पथ को आलोकित करता रहेगा। वह आज भी हमारे बीच जीवित हैं—हर उस स्वर में जो स्वतंत्रता की बात करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर उस कदम में जो अन्याय के विरुद्ध उठता है। उनकी पुण्यतिथि एक शोक-दिवस नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपितु उनके अदम्य साहस और त्याग को स्मरण करने का पावन अवसर है। वे थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं और सदा रहेंगी—हमारी प्रेरणा-स्रोत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे स्वाभिमान की प्रतीक। उनकी पुण्यतिथि पर हम कृतज्ञ हृदय से उन्हें नमन करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहस और सेवा सदा प्रेरणादायक रहेगी। हे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बा</span>', <span lang="hi" xml:lang="hi">आपकी पवित्र स्मृति के समक्ष कोटि-कोटि प्रणाम—आपके बलिदान ने इस राष्ट्र के आकाश में एक अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अनंत काल तक हमें प्रेरित करती रहेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 17:19:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारतीय संस्कार बनाम पश्चिमी जीवन शैली l</title>
                                    <description><![CDATA[<div>अंग्रेजों के आने के पूर्व भारतीय संस्कृति धार्मिक, आध्यात्मिक, परंपरा वादी, भाग्यवादी रही है। अंग्रेजों के भारत आने के बाद और उनके संपर्क में रहने से भारतीय जीवन का स्वरूप काफी हद तक परिवर्तित एवं बदले हुए स्वरूप में आया था । धार्मिकता आध्यात्मिकता तथा त्याग व ममता को व्यापक भौतिकवादी दृष्टिकोण से काफी नुकसान पहुंचा है। पश्चात विचारधारा के संपर्क में आने से परंपराओं के प्रति मोह धीरे-धीरे कम होने लगा एवं नई वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली सोच के कारण भाग्य वाद के प्रति आस्था उत्पन्न होने लगी। इसके अतिरिक्त भारतीय दर्शन के आंतरिक गुणों आदर्श नैतिकता,बुद्धि आदि में भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148213/indian-sanskar-vs-western-lifestyle-l"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><div>अंग्रेजों के आने के पूर्व भारतीय संस्कृति धार्मिक, आध्यात्मिक, परंपरा वादी, भाग्यवादी रही है। अंग्रेजों के भारत आने के बाद और उनके संपर्क में रहने से भारतीय जीवन का स्वरूप काफी हद तक परिवर्तित एवं बदले हुए स्वरूप में आया था । धार्मिकता आध्यात्मिकता तथा त्याग व ममता को व्यापक भौतिकवादी दृष्टिकोण से काफी नुकसान पहुंचा है। पश्चात विचारधारा के संपर्क में आने से परंपराओं के प्रति मोह धीरे-धीरे कम होने लगा एवं नई वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली सोच के कारण भाग्य वाद के प्रति आस्था उत्पन्न होने लगी। इसके अतिरिक्त भारतीय दर्शन के आंतरिक गुणों आदर्श नैतिकता,बुद्धि आदि में भी आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं।</div>
<div> </div>
<div>और इन घटकों पर नवीन शिक्षा पद्धति का व्यापक प्रभाव पड़ा है। अंग्रेज भारत को ऐसा वर्ग विशेष बनाना चाहते थे, जो जन्म और रंग से तो पूर्वी हों, पर अन्य सभी दृष्टिकोण से सब अंग्रेज बने रहें। भारत का उच्च वर्ग या अमीर तबका, राजा, महाराजा,नवाब धीरे-धीरे अंग्रेजी शिक्षा के गुलाम होते चले गए,और पाश्चात्य संस्कृति की ओर झुकते गए। भारतीय संस्कृति को विस्मृत करने में यही उच्च वर्ग या अमीर लोग काफी हद तक जिम्मेदार है। यह लोग अंग्रेजियत की नकल करने लगे,तथा भारतीय समाज धर्म दर्शन में इनकी कोई रूचि अविश्वास नहीं रहने लगा था। और इनकी नकल में इनके मातहत, सिपहसालार भी उसी रंग में डूबने लगे थे। धीरे धीरे पश्चिमी सभ्यता ने भारतीय संस्कृति पर अपना व्यापक प्रभाव डालना शुरू कर दिया था।</div>
<div> </div>
<div>पश्चिमी संस्कृति का वृहद अध्ययन करने वाले भारतीय विद्वानों ने पश्चिम की ओर इस अंधे आकर्षण का खुलकर विरोध भी किया था। इन्हीं विद्वानों ने भारतीय जनमानस को अपनी शक्ति और धर्म में विश्वास करने की प्रेरणा देकर उनका मार्गदर्शन किया था। तत्पश्चात भारतीय शोधकर्ताओं ने पश्चिम सभ्यता तथा उसकी शिक्षा का व्यापक परीक्षण शुरू कर दिया था। और इन्हीं शोधकर्ताओं और विद्वानों की अथक मेहनत से प्राचीन परंपराओं में सर्वश्रेष्ठ का चयन कर एवं पाश्चात्य दर्शन की श्रेष्ठ धारणाओं को मिलाकर एक नए दर्शन को समाज के सामने प्रस्तुत किया था।</div>
<div> </div>
<div>भारतीय विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विचारकों ने प्राचीन भारतीय कुप्रथा जैसे छुआछूत, पर्दा प्रथा,बहु विवाह, बाल विवाह, देवदासी प्रथा एवं महिला शिक्षा, तथा निरक्षरता के विरोध में अभियान चलाकर सामाजिक चेतना का आह्वान किया था। पर पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर भारतीय समाज में नैतिक विचारों में परिवर्तन की शुरुआत हुई। इस परिवर्तन के साथ भारतीय जनमानस के रहन-सहन खानपान, वेशभूषा,विवाह समारोह, आचार विचार, शिष्टाचार तथा व्यवहार में पाश्चात्य शिक्षा की झलक दिखाई देने लगी। जाति प्रथा के कठोर नियम ढीले पड़ने लगे।</div>
<div> </div>
<div>बाल विवाह प्रथा में बेहद कमी आने लगी। पश्चात दर्शन ने भारतीय संस्कृति में जीवंत एवं चरित्र को एक नया बदलाव दिया था। पाश्चात्य संस्कृति में धीरे-धीरे भारतीय रहन-सहन रीति-रिवाज प्रथाओं को प्रभावित किया। ड्रेसिंग सेंस, खान पान,बोलने चालने तथा अभिवादन के तरीकों में बड़े परिवर्तन हुए। वेस्टर्न पद्धति से संस्कृति शिक्षा विचारधाराओं ने भारत को दुनिया के राष्ट्रीय जीवन के संपर्क में ला खड़ा किया था। देश के अंदर विभिन्न अलग-अलग विचारधाराओं के समूहों को एक सांस्कृतिक समानता के मंच पर लाकर खड़ा किया।</div>
<div> </div>
<div>और इसी सांस्कृतिक समानता ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एकता और राष्ट्रीयता की नई मिसाल स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रदान की थी। विहंगम दृष्टिकोण से देखा जाए तो पाश्चात्य दर्शन ने भारतीय परंपरा रीति रिवाज में महत्वपूर्ण सुधार लाने की एक नई पहल की थी। प्राचीन परंपराओं के फल स्वरुप भारतीय जनमानस को रीति-रिवाजों एवं पाखंडी पन ने जीवन में जंजीर बनकर जकड़ रखा था। संस्कृति तथा कुप्रथाओं ने स्वतंत्र विचारों को मस्तिष्क में ही कैद कर लिया था ।एवं आमजन का जीना मुश्किल हो गया था। प्रभाव तथा कुरीतियों से सबसे ज्यादा सजा महिलाएं बालिकाएं तथा बच्चों को ही मिल रही थी।</div>
<div> </div>
<div>पाश्चात्य शिक्षा तथा दर्शन ने शिक्षा धर्म तथा आदर्शों के मूल्यों में सुधार लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया था। पाश्चात्य शिक्षा से अंधविश्वास के बदले बुद्धि विवेक और तर्क ने वैज्ञानिक विचारधारा के हिसाब से जीवन यापन करने की पद्धति से अवगत कराया था। पाश्चात्य शिक्षा तथा दर्शन के कारण ही भारत में ईसाई धर्म समाज की स्थापना हो पाई थी। ईसाइयत का भारत में जन्म अंग्रेजों के आने के बाद ही हुआ था।</div>
<div> </div>
<div>पाश्चात्य सभ्यता एवं शिक्षा से भारतीय महिलाओं पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ा। उनकी शिक्षा-दीक्षा रहन सहन तथा व्यवहार में काफी परिवर्तन आया तथा भारतीय महिलाओं ने खुली हवा में सांस लेने के अवसर भी तलाशना शुरू कर दिया था। और आज भारत में महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों के साथ हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। भारतीय जनमानस में पाश्चात्य सभ्यता का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा ।जीवन में विकास भी हुआ, और नागरिकों को नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी साक्षात्कार हुआ।</div>
<div> </div>
<div>पर इसके साथ पाचल सभ्यता ने भारत को बहुत सारी विकृतियां भी प्रदान की है। जैसे स्त्रियों का खुलापन, नशे की खुली लत एवं महिलाओं तथा पुरुषों का वासनायुक्त खुला व्यवहार, अशोभनीय स्तर पर आ गया है। नशे की अधिकता,महिलाओं के खुले व्यवहार को देखकर आने वाली पीढ़ी की नैतिक शिक्षा में बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है। इसमें भारतीय शिक्षा पद्धति में भारतीय संस्कृति के दर्शन के अध्यापन की भी महती आवश्यकता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 17:01:17 +0530</pubDate>
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