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                <title>indian culture - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>indian culture RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ऐतिहासिक आयोजन में 2,100 महिलाएं बनाएंगी विश्व रिकॉर्ड।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में 3 अगस्त महिला सशक्तिकरण, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक भव्य आयोजन 16 अगस्त 2026 को लखनऊ के के.डी. सिंह स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। “घर-घर हरियाली” नामक इस कार्यक्रम में 2,100 महिलाएं एक मंच पर एकत्र होकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">.कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि सभी प्रतिभागी पारंपरिक पीली साड़ी में उपस्थित होंगी। प्रत्येक महिला के हाथ में एक ओर तुलसी का पौधा और दूसरी ओर प्रज्वलित दीपक होगा। तुलसी पौधा हरियाली, स्वास्थ्य एवं प्रकृति संरक्षण का प्रतीक बनेगा, जबकि दीपक भारतीय संस्कृति, सकारात्मकता और जागरूकता का संदेश देगा।</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184610/2100-women-will-create-world-records-in-the-historic-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260803-wa0030-(9).jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में 3 अगस्त महिला सशक्तिकरण, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक भव्य आयोजन 16 अगस्त 2026 को लखनऊ के के.डी. सिंह स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। “घर-घर हरियाली” नामक इस कार्यक्रम में 2,100 महिलाएं एक मंच पर एकत्र होकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">.कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि सभी प्रतिभागी पारंपरिक पीली साड़ी में उपस्थित होंगी। प्रत्येक महिला के हाथ में एक ओर तुलसी का पौधा और दूसरी ओर प्रज्वलित दीपक होगा। तुलसी पौधा हरियाली, स्वास्थ्य एवं प्रकृति संरक्षण का प्रतीक बनेगा, जबकि दीपक भारतीय संस्कृति, सकारात्मकता और जागरूकता का संदेश देगा। आयोजकों के अनुसार “घर-घर हरियाली” केवल एक रिकॉर्ड बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने की पहल है। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को पौधारोपण, हरियाली बढ़ाने और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस आयोजन का नेतृत्व प्रसिद्ध समाज सेविका एवं महिला सशक्तिकरण की अग्रणी हस्ती<br /><br />पुनीता भटनागर कर रही हैं। पिछले 45 वर्षों से महिलाओं और कारीगरों के उत्थान के लिए कार्यरत भटनागर ने हजारों महिलाओं को हस्तशिल्प प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया है। उनके प्रयासों से 20 हजार से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार से जुड़ चुकी हैं। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों तथा आम नागरिकों की भागीदारी रहेगी। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन महिला एकता, सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को नई ऊंचाई देगा। पुनीता भटनागर ने कहा कि “घर-घर हरियाली” अभियान का उद्देश्य केवल विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना नहीं, बल्कि हर परिवार को प्रकृति से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस मुहिम में शामिल होकर हरियाली बढ़ाने का आह्वान किया। आयोजकों को विश्वास है कि 2,100 महिलाओं की सामूहिक भागीदारी वाला यह आयोजन महिला शक्ति, भारतीय संस्कृति और पर्यावरण जागरूकता का प्रेरणादायी उदाहरण बनेगा तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देगा।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 20:46:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के  जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर राम जानकी मंदिर में हुआ सुंदरकांड पाठ</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">  नैनी रेलवे स्टेशन स्थित श्री राम जानकी मंदिर में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के पुनःप्राप्त जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी का पूजन-अर्चन किया तथा कैबिनेट मंत्री नंदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और जनकल्याण की कामना की।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर पार्षद राकेश जायसवाल, जिला संयोजक एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष हरि कृष्णा (बबलू) तिवारी, नामित पार्षद दिलीप केसरवानी, सेक्टर संयोजक</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183176/sunderkand-recitation-took-place-in-ram-janaki-temple-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260711-wa0130.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनी रेलवे स्टेशन स्थित श्री राम जानकी मंदिर में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के पुनःप्राप्त जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी का पूजन-अर्चन किया तथा कैबिनेट मंत्री नंदी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और जनकल्याण की कामना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर पार्षद राकेश जायसवाल, जिला संयोजक एवं पूर्व मंडल अध्यक्ष हरि कृष्णा (बबलू) तिवारी, नामित पार्षद दिलीप केसरवानी, सेक्टर संयोजक जय कृष्णा तिवारी, मंदिर प्रबंधक त्रिभुवन चौरसिया, पत्रकार राकेश गुप्ता (बच्चा), विनोद जायसवाल, गुड्डू गैरेज, घनश्याम जायसवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने धार्मिक वातावरण में सुंदरकांड का श्रवण कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 20:38:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम, कलाकारों ने बांधा समां</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  विश्व संगीत दिवस के अवसर पर रविवार सायंकाल प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षागृह में शिव शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में लोक-संस्कृति आधारित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीत, लोकनृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी प्रयागराज की धर्मपत्नी डॉ. अंकिता राज उपस्थित रहीं। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक-संस्कृति हमारी समृद्ध विरासत है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।कार्यक्रम में मोहनी श्रीवास्तव, शिखा</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182082/artists-enthrall-folk-cultural-presentations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260624-wa0107.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> विश्व संगीत दिवस के अवसर पर रविवार सायंकाल प्रयाग संगीत समिति के मेहता प्रेक्षागृह में शिव शक्ति फाउंडेशन के तत्वावधान में लोक-संस्कृति आधारित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीत, लोकनृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी प्रयागराज की धर्मपत्नी डॉ. अंकिता राज उपस्थित रहीं। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक-संस्कृति हमारी समृद्ध विरासत है और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।कार्यक्रम में मोहनी श्रीवास्तव, शिखा सिंह, रागिनी श्रीवास्तव, पूर्णिमा गौड़, पूर्वी मिश्रा, यशी यादव, निधि कुशवाहा, आंचल कुशवाहा, शिल्पा कुशवाहा, शीलू द्विवेदी, प्रियंका अग्रहरि, खुशी आर्य, श्रद्धा श्रीवास्तव, अनूपा मिश्रा एवं रंजना त्रिपाठी सहित अनेक कलाकारों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रेक्षागृह में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा। दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। विश्व संगीत दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम लोक-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182082/artists-enthrall-folk-cultural-presentations</link>
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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:47:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><br /></p><blockquote class="format1"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ</span></strong>,  </blockquote><p><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर भाग के महाराजा सुहेलदेव नगर द्वारा श्रीराम शाखा पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें समाज के सैकड़ों नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज के प्रबंधक</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रवण मिश्रा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भारत की प्राचीन योग परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा एवं योग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181921/rashtriya-swayamsevak-sangh-organizes-huge-yoga-program-on-world-yoga"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50-(1)-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p><br /></p><blockquote class="format1"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">लखनऊ</span></strong>,  </blockquote><p><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर भाग के महाराजा सुहेलदेव नगर द्वारा श्रीराम शाखा पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें समाज के सैकड़ों नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघ के स्वयंसेवकों एवं पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं श्रीराम अकैडमी इंटर कॉलेज के प्रबंधक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रवण मिश्रा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि भारत की प्राचीन योग परंपरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योग चिकित्सा एवं योग पद्धति को आज पूरा विश्व अपना रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वभर के लोग भारतीय सनातन संस्कृति और उसकी परंपराओं को जानने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझने और अपनाने के लिए उत्सुक हैं।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50-(1)-(1).jpeg" alt="विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन" width="1080" height="810"></img></span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को संगठित रहने की आवश्यकता है और योग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हो रहा है। योग से तन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहते हैं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक इस कार्य को कुशलतापूर्वक समाज तक पहुंचा रहे हैं।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-21-at-15.08.50.jpeg" alt="विश्व योग दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विशाल योग कार्यक्रम का आयोजन" width="1080" height="810"></img></span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह जिला बौद्धिक प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">त्रियुगी नाथ</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नगर संघ चालक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संतोष</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सह नगर संघ चालक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">श्यामू</span></strong>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाग सद्भाव संयोजक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुधीर</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तथा नगर समरसता प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनोद</span></strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</span></p><p><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यक्रम में नगर समरसता प्रमुख</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">विनोद </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ने उपस्थित सभी आगंतुकों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया तथा योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन स्वस्थ एवं जागरूक समाज के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181921/rashtriya-swayamsevak-sangh-organizes-huge-yoga-program-on-world-yoga</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:20:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर लोटन में योगाभ्यास करते भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी लोटन मंडल की ओर से सरस्वती शिशु मंदिर लोटन के परिसर में योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">          कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बृज बिहारी मिश्र ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। नियमित योगाभ्यास से शरीर निरोग रहता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। उन्होंने लोगों से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा मंडल</div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181826/bjp-officials-and-workers-practicing-yoga-in-lotan-on-international"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1782048431542.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी लोटन मंडल की ओर से सरस्वती शिशु मंदिर लोटन के परिसर में योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष बृज बिहारी मिश्र ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। नियमित योगाभ्यास से शरीर निरोग रहता है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। उन्होंने लोगों से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा मंडल अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार शुक्ल के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया। वक्ताओं ने कहा कि योग आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का माध्यम बन चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर दृगनारायण सिंह, बब्लू पांडेय, प्रदीप मोदनवाल, अनुराग कसौधन, विनोद मिश्रा, रुद्रनारायण पांडेय, शिवम विश्वास, प्रेमचंद मोदनवाल, कृष्णदत्त त्रिपाठी, संतोष पांडेय, सतीश वर्मा, आनंद प्रकाश गौड सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने नियमित योग करने तथा योग के प्रति लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="hq gt">
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181826/bjp-officials-and-workers-practicing-yoga-in-lotan-on-international</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 20:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर निकाली योग जागरूकता यात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में कुलपति प्रो० कविता शाह के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जन-जागरण योग जागरूकता यात्रा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों एवं विद्यार्थियों द्वारा निकाली गई यह यात्रा विश्वविद्यालय परिसर से प्रारम्भ होकर कपिलवस्तु तक पहुंची। यात्रा का उद्देश्य आम जनमानस को योग के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों तथा दैनिक जीवन में योग को अपनाने के प्रति जागरूक करना था।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर योग आयोजन के समन्वयक प्रो० सत्येन्द्र कुमार दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181739/siddharth-university-takes-out-yoga-awareness-tour-on-the-eve"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781969255734.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में कुलपति प्रो० कविता शाह के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में जन-जागरण योग जागरूकता यात्रा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों एवं विद्यार्थियों द्वारा निकाली गई यह यात्रा विश्वविद्यालय परिसर से प्रारम्भ होकर कपिलवस्तु तक पहुंची। यात्रा का उद्देश्य आम जनमानस को योग के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों तथा दैनिक जीवन में योग को अपनाने के प्रति जागरूक करना था।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर योग आयोजन के समन्वयक प्रो० सत्येन्द्र कुमार दुबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का आधार है। वर्तमान समय में स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ० यशवंत यादव ने कहा कि योग केवल स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि एक जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण का माध्यम भी है। </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर डॉ० विमल चन्द्र वर्मा, डॉ० जय सिंह यादव, डॉ० मयंक कुशवाहा, डॉ० दिनेश प्रसाद, डॉ० अविनाश प्रताप सिंह, डॉ० कपिल गुप्ता तथा डॉ० अब्दुल हफीज सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवियों एवं  छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181739/siddharth-university-takes-out-yoga-awareness-tour-on-the-eve</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181739/siddharth-university-takes-out-yoga-awareness-tour-on-the-eve</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 21:06:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: 'थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान' की अभिनेत्री आरती बिराजदार ने बताया योग का महत्व।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के लिए अपने लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में, योग एक ऐसा तरीका है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सन नियो के आने वाले शो 'थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान' में वैदेही का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री आरती बिराजदार ने बताया कि योग उनके जीवन का अहम् हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">योग के बारे में बात करते हुए आरती ने कहा, "मेरे लिए योग सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181730/international-yoga-day-a-little-hope-a-little-sky-actress"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0095.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के लिए अपने लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में, योग एक ऐसा तरीका है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सन नियो के आने वाले शो 'थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान' में वैदेही का किरदार निभा रहीं अभिनेत्री आरती बिराजदार ने बताया कि योग उनके जीवन का अहम् हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग के बारे में बात करते हुए आरती ने कहा, "मेरे लिए योग सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की एक अनमोल देन है। आज की व्यस्त जिंदगी, प्रदूषण और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता का असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। योग मुझे शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से शांत और भावनात्मक रूप से संतुलित रखता है। लेकिन, इसका फायदा तभी मिलता है, जब इसे नियमित रूप से किया जाए। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को हर दिन थोड़ा समय निकालकर योग जरूर करना चाहिए।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने योग रूटीन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "मैं हर दिन सूर्य नमस्कार करती हूँ। यदि समय मिले, तो ज्यादा राउंड करना अच्छा होता है, लेकिन शूटिंग की व्यस्तता के कारण मैं आमतौर पर 25 राउंड ही कर पाती हूँ। इसके अलावा मैं पश्चिमोत्तानासन, धनुरासन, सर्वांगासन, चक्रासन, मत्स्यासन, वज्रासन और पद्मासन भी करती हूँ। इनमें से शवासन मुझे सबसे ज्यादा शांति देता है।"</div>
<div style="text-align:justify;">आरती ने आगे कहा, "कॉलेज के दिनों में मैं योग को लेकर और भी ज्यादा नियमित थी। अच्छी नींद, पौष्टिक भोजन, योग और प्राणायाम स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं। मैं अनुलोम-विलोम, कपालभाति, ओंकार जप और भ्रामरी भी करती हूँ। ये सभी मन को शांत और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग और जिम की तुलना पर उन्होंने कहा, "मेरे अनुसार सबसे जरूरी चीज निरंतरता है। जिम शरीर को मजबूत बनाता है, जबकि योग शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है। अगर योग, जिम, अच्छा खान-पान और पर्याप्त नींद को साथ में अपनाया जाए, तो कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। अच्छी सेहत एक दिन में नहीं बनती, बल्कि रोज की अच्छी आदतों से बनती है। इसलिए योग को सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।"</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181730/international-yoga-day-a-little-hope-a-little-sky-actress</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 20:58:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
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<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योग मानव जीवन की समस्याओं का समाधान और आत्मिक उत्कर्ष का मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक बनाने की एक वैश्विक चेतना का प्रतीक है। योग भारत की प्राचीन संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जिसने आज विश्व के करोड़ों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के बाद योग की महत्ता और भी अधिक बढ़ी है तथा आज दुनिया का लगभग हर देश इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है।</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181570/yoga-is-the-solution-to-the-problems-of-human-life"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक दिवस नहीं, बल्कि मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और सार्थक बनाने की एक वैश्विक चेतना का प्रतीक है। योग भारत की प्राचीन संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जिसने आज विश्व के करोड़ों लोगों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के बाद योग की महत्ता और भी अधिक बढ़ी है तथा आज दुनिया का लगभग हर देश इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय का मनुष्य अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है। जीवन की भागदौड़, प्रतिस्पर्धा, तनाव, असुरक्षा, आर्थिक दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ उसे निरंतर मानसिक रूप से विचलित करती रहती हैं। कभी शरीर रोगों से ग्रस्त होता है तो कभी मन चिंता, अवसाद और असंतोष से भर जाता है। व्यक्ति एक समस्या का समाधान खोजता है तो दूसरी उसके सामने खड़ी हो जाती है। परिणामस्वरूप उसका जीवन तनाव, भय, निराशा और मानसिक द्वंद्व का शिकार बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज अधिकांश लोग सुख की तलाश में हैं, परंतु वास्तविक सुख उनसे दूर होता जा रहा है। बाहरी उपलब्धियों के बावजूद भीतर शांति का अभाव दिखाई देता है। ऐसे समय में योग एक प्रकाश स्तंभ की भाँति मनुष्य को सही दिशा प्रदान करता है। योग व्यक्ति को समस्याओं से भागना नहीं सिखाता, बल्कि उनका संतुलित और सकारात्मक ढंग से सामना करना सिखाता है।योग का वास्तविक स्वरूप योग का सामान्य अर्थ जोड़ या मिलन है। भारतीय दर्शन के अनुसार योग आत्मा और परमात्मा के मिलन की प्रक्रिया है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने वाली एक समग्र साधना है। योग शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महर्षि पतंजलि ने योग को "चित्तवृत्ति निरोध" कहा है, अर्थात मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित करना। जब मन स्थिर और शांत होता है, तब व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान पाता है। यही योग का मूल उद्देश्य है। योग व्यक्ति को बाहरी संसार के साथ-साथ अपने अंतर्जगत को समझने की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य और योग का गहरा संबंध है।आज चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करने लगा है कि अनेक रोगों का संबंध केवल शरीर से नहीं, बल्कि मन और जीवनशैली से भी होता है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, अनिद्रा, चिंता और अवसाद जैसी अनेक समस्याएँ तनाव और असंतुलित जीवन का परिणाम हैं। योग इन समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योगासन शरीर को लचीला, सशक्त और स्वस्थ बनाते हैं। प्राणायाम श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित कर शरीर में ऊर्जा का संतुलन स्थापित करता है। ध्यान मन को शांत और एकाग्र बनाता है। नियमित योगाभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक तनाव कम होता है तथा व्यक्ति स्वयं को अधिक ऊर्जावान अनुभव करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राचीन भारत में योग जीवन का अभिन्न अंग था। उस समय लोगों का स्वास्थ्य प्राकृतिक जीवनशैली और योगाभ्यास पर आधारित था। आधुनिक युग में भी योग उसी परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">तनावमुक्त जीवन का आधार</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान युग को तनाव का युग कहा जाता है। भौतिक सुविधाओं में वृद्धि होने के बावजूद मनुष्य मानसिक रूप से अधिक अशांत होता जा रहा है। जीवन की जटिलताओं ने उसे भीतर से कमजोर बना दिया है। ऐसे वातावरण में योग तनावमुक्त जीवन का सबसे प्रभावी साधन सिद्ध हुआ है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग व्यक्ति को वर्तमान क्षण में जीना सिखाता है। यह मन को अनावश्यक चिंताओं और नकारात्मक विचारों से मुक्त करता है। जब मन शांत होता है तो निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, आत्मविश्वास विकसित होता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न होता है। योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं बनाता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">योग का प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करता है। नियमित योगाभ्यास से आत्मानुशासन, धैर्य, सहनशीलता, एकाग्रता और आत्मविश्वास का विकास होता है। व्यक्ति अपने भीतर छिपी हुई शक्तियों को पहचानने लगता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग हमें सिखाता है कि वास्तविक शक्ति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि हमारे भीतर निहित है। जब मनुष्य अपने अंतर्मन से जुड़ता है, तब उसके भीतर सकारात्मक परिवर्तन प्रारंभ होते हैं। उसके विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण में परिष्कार आता है। यही कारण है कि योग को व्यक्तित्व रूपांतरण का माध्यम कहा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व में  योग की लोकप्रियता बढ़ रही है। एक समय था जब योग केवल भारत तक सीमित माना जाता था, किंतु आज इसकी लोकप्रियता विश्वव्यापी हो चुकी है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के अनेक देशों में योग केंद्र स्थापित हो चुके हैं। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, कार्यालयों और चिकित्सा संस्थानों में योग को अपनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विदेशी समाज भौतिक रूप से समृद्ध होने के बावजूद मानसिक शांति की खोज में योग की ओर आकर्षित हुआ है। अनेक विदेशी भारत आकर योग का अध्ययन करते हैं और इसकी गहन साधना से लाभान्वित होते हैं। यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण है कि उसकी हजारों वर्ष पुरानी परंपरा आज विश्व का मार्गदर्शन कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक जीवन में योग की भूमिका अहम मानी जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग केवल व्यक्तिगत कल्याण का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम है। समाज में बढ़ते अपराध, हिंसा, नशाखोरी और नैतिक पतन के मूल में मानसिक असंतुलन और आत्मसंयम का अभाव है। योग व्यक्ति में आत्मनियंत्रण, करुणा, सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों का विकास करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब व्यक्ति का मन संतुलित होता है तो उसका व्यवहार भी संतुलित हो जाता है। योग परिवार, समाज और राष्ट्र के बीच सकारात्मक संबंधों को मजबूत करता है। यह मानवता, सहयोग और सद्भाव की भावना को विकसित करता है। इसलिए योग केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी आधार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अध्यात्म की ओर ले जाने वाला मार्ग है।योग का अंतिम उद्देश्य केवल रोगों से मुक्ति नहीं, बल्कि आत्मबोध और आत्मिक विकास है। यह मनुष्य को भौतिकता से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाता है। योग के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर स्थित अनंत संभावनाओं और दिव्य शक्तियों का अनुभव कर सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अध्यात्म का अर्थ संसार से भागना नहीं, बल्कि स्वयं को जानना है। योग हमें बाहरी उपलब्धियों के साथ-साथ आंतरिक समृद्धि का भी महत्व समझाता है। जब व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब जीवन में स्थायी शांति और आनंद का अनुभव होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अनुपम देन है। यह मानव जीवन की समस्याओं का व्यावहारिक और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। योग शरीर को स्वस्थ, मन को शांत, बुद्धि को निर्मल और आत्मा को जागृत करता है। आज जब पूरी दुनिया तनाव, अशांति और असंतुलन से जूझ रही है, तब योग मानवता के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग बाहर नहीं, हमारे भीतर है। यदि हम योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें तो न केवल व्यक्तिगत जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और नैतिक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। वास्तव में योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है, जो मनुष्य को स्वयं से जोड़कर अनंत आनंद और आत्मिक उत्कर्ष की ओर अग्रसर करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   <strong> <em>कांतिलाल मांडोत</em></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181570/yoga-is-the-solution-to-the-problems-of-human-life</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:48:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डांसिंग गर्ल: जिसे ढककर हम खुद को उजागर कर बैठे</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास बदलने के लिए बड़े फैसलों की जरूरत नहीं होती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी एक छोटी-सी शेडिंग ही काफी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सिंधु घाटी सभ्यता की कांस्य प्रतिमा "डांसिंग गर्ल" आज इसी कारण विवाद में है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त लगभग </span>4500 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष पुरानी (</span>2500-2300 <span lang="hi" xml:lang="hi">ईसा पूर्व) यह प्रतिमा भारतीय पुरातत्व की महत्वपूर्ण धरोहरों में गिनी जाती है। एक हाथ कमर पर रखे आत्मविश्वास से खड़ी यह किशोरी केवल कलाकृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस सभ्यता की सहजता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाबोध और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हाल ही में एनसीईआरटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की कक्षा </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">की कला शिक्षा पुस्तक ‘मधुरिमा’ में उसके नग्न धड़</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181457/the-dancing-girl-whom-we-covered-and-exposed-ourselves-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/dancing-girl.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास बदलने के लिए बड़े फैसलों की जरूरत नहीं होती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी-कभी एक छोटी-सी शेडिंग ही काफी है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सिंधु घाटी सभ्यता की कांस्य प्रतिमा "डांसिंग गर्ल" आज इसी कारण विवाद में है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त लगभग </span>4500 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्ष पुरानी (</span>2500-2300 <span lang="hi" xml:lang="hi">ईसा पूर्व) यह प्रतिमा भारतीय पुरातत्व की महत्वपूर्ण धरोहरों में गिनी जाती है। एक हाथ कमर पर रखे आत्मविश्वास से खड़ी यह किशोरी केवल कलाकृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस सभ्यता की सहजता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कलाबोध और आत्मविश्वास का प्रमाण है। हाल ही में एनसीईआरटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की कक्षा </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">की कला शिक्षा पुस्तक ‘मधुरिमा’ में उसके नग्न धड़ को शेडिंग से ढक दिया गया। मामूली दिखने वाला यह बदलाव राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया। सवाल प्रतिमा का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दृष्टि का है जिससे हम अपने अतीत को देख रहे हैं। क्या हम इतिहास को उसके वास्तविक रूप में स्वीकार कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या उसे अपने समय की नैतिक कसौटियों के अनुरूप बदल रहे हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डांसिंग गर्ल केवल प्रतिमा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक सभ्यता का आत्मविश्वास है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लॉस्ट-वैक्स तकनीक से बनी यह </span>10.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">सेंटीमीटर कांस्य मूर्ति दिखाती है कि सिंधु सभ्यता धातु-कला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौंदर्य-बोध और रचनात्मकता में कितनी विकसित थी। उसकी मुद्रा उस समाज की सहजता का प्रमाण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ शरीर संकोच का विषय नहीं था। दशकों तक यह प्रतिमा एनसीईआरटी की पुस्तकों में बिना बदलाव प्रकाशित होती रही और लाखों विद्यार्थियों ने इसे इतिहास के प्रमाण के रूप में देखा। ऐसे में अचानक इसे "उम्र के अनुकूल" बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या इतिहास को इतिहास की तरह दिखाना अब पर्याप्त नहीं है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह बदलाव केवल चित्र का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस सोच का है जो अतीत को उसकी वास्तविकता से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वर्तमान की असहजताओं से परिभाषित करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह बदलाव केवल संपादन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास की पुनर्रचना जैसा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहासकार मिशेल डैनिनो ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए इसे "सेंसरशिप" और "फर्जी कलाकृति" का निर्माण बताया। उनका तर्क था कि किसी ऐतिहासिक वस्तु का मूल रूप बदलने पर विद्यार्थी वास्तविक इतिहास नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसका संपादित संस्करण देखते हैं—यह बौद्धिक अन्याय है। उन्होंने इसे प्राचीन भारत पर विक्टोरियन नैतिकता थोपने की कोशिश भी कहा। विडंबना यह है कि जिस सभ्यता ने कला को सहज स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके प्रतीकों पर आज कृत्रिम शालीनता लादी जा रही है। जबकि इतिहास का काम सुविधा के अनुसार बदलना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि असुविधाजनक सच्चाइयों से रूबरू कराना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह विवाद भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की समझ पर सवाल खड़ा करता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">खजुराहो के मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोणार्क का सूर्य मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अजंता-एलोरा की चित्रकला और गुप्तकालीन मूर्तिशिल्प बताते हैं कि भारतीय कला में मानव शरीर सदैव सौंदर्य और अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। यहाँ नग्नता को अश्लीलता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वाभाविकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सृजन और सौंदर्य का प्रतीक माना गया। कामसूत्र की परंपरा वाली इस सभ्यता में यदि आज अपनी ही कलात्मक विरासत पर असहजता होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्रश्न उठता है—बदल इतिहास रहा है या हमारी दृष्टि</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">डांसिंग गर्ल की नग्नता अश्लीलता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस युग की सांस्कृतिक सहजता का प्रमाण है। उसे ढकने का प्रयास उस समझ को ढकने जैसा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने उस कला को जन्म दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस विवाद की एक और परत भीतर का विरोधाभास खोलती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एनसीईआरटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">की कक्षा </span>6 <span lang="hi" xml:lang="hi">की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में यही प्रतिमा अपने मूल रूप में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कक्षा </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">की कला शिक्षा पुस्तक में उसका संशोधित रूप दिखाया गया है। एक ही संस्था की दो पुस्तकों में एक ही ऐतिहासिक वस्तु के दो अलग-अलग रूप शिक्षा की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाते हैं। क्या हम छात्रों को इतिहास पढ़ा रहे हैं या उसे अपने वर्तमान मानकों के अनुसार ढाल रहे हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह केवल एक चित्र का मामला नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस प्रवृत्ति का संकेत है जहाँ पाठ्यक्रम संशोधन के नाम पर इतिहास और पुरातत्व पर वैचारिक दबाव दिखने लगता है। जब तथ्य बदलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शिक्षा का आधार कमजोर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक संवेदनशीलता का तर्क नकारा नहीं जा सकता।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अभिभावक और शिक्षक मानते हैं कि किशोर विद्यार्थियों के सामने नग्नता का प्रदर्शन सावधानी से होना चाहिए। लेकिन सवाल यह है—समाधान समझाना है या छिपाना</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा का दायित्व संदर्भ देना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि तथ्य बदलना। यदि किसी कलाकृति में नग्नता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छात्रों को बताया जा सकता है कि प्राचीन कला में उसका अर्थ आधुनिक दृष्टि से अलग था—वह शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौंदर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्रता और स्वाभाविकता का प्रतीक भी हो सकती है। हर असहज तथ्य पर शेडिंग चढ़ाते रहेंगे तो अगली पीढ़ी इतिहास नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका सुविधाजनक संस्करण पढ़ेगी। तब पाठ्यपुस्तकें दस्तावेज़ कम और कल्पना अधिक बन जाएँगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा मंत्रालय के स्पष्टीकरण और सार्वजनिक आलोचना के बाद एनसीईआरटी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने मूल छवि बहाल करने का निर्णय लिया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल संस्करण में तुरंत संशोधन हुआ और भविष्य की मुद्रित प्रतियों में भी मूल प्रतिमा प्रकाशित करने की घोषणा की गई। यह कदम स्वागत योग्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सवाल छोड़ता है कि शुरुआत में यह परिवर्तन क्यों किया गया। यह निर्णय दिखाता है कि पाठ्यपुस्तकें अब केवल शैक्षणिक सामग्री नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैचारिक संघर्ष का भी हिस्सा बन चुकी हैं। यह घटना याद दिलाती है कि संवेदनशीलता और सेंसरशिप की रेखा बहुत पतली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसे पार करने पर संस्थाओं पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डांसिंग गर्ल विवाद किसी प्रतिमा का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे आत्मविश्वास का है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय संग्रहालय में रखी यह डांसिंग गर्ल हर वर्ष असंख्य विद्यार्थी और पर्यटक देखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कोई उसे अश्लीलता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारतीय सभ्यता की उपलब्धि मानता है। यदि हम अपनी विरासत को उसके वास्तविक रूप में स्वीकार नहीं कर सकते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके गौरव पर गर्व भी अधूरा है। इतिहास को ढक देने से वह बदलता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल हमारी समझ सीमित होती है। पाठ्यपुस्तकें ज्ञान की खिड़कियाँ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैतिकता की दीवारें नहीं। डांसिंग गर्ल को उसकी पूर्ण वास्तविकता के साथ स्वीकार करना ही उस सभ्यता का सच्चा सम्मान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने हजारों वर्ष पहले आत्मविश्वास को कांस्य में ढाल दिया था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:40:11 +0530</pubDate>
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