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                <title>bhagdadh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>bhagdadh RSS Feed</description>
                
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                <title>नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की एफआईआर दर्ज नहीं।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads"><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><strong>प्रयागराज। </strong>नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना को एक महीन हो चुका है, लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस रेलवे की तरफ मामले में गठित जांच टीम ने जांच पूरी नहीं की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर रेलवे पुलिस घटना के संबंध में आगे जांच बढ़ाएगी।</div><div><br /></div><div>वहीं दूसरी तरफ से भगदड़ की घटना के बाद रेलवे के पांच अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया गया है। घटना के बाद रेल प्रशासन ने 4 मार्च को चार अलग-अलग आदेश जारी कर पांच</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149995/fir-for-stampede-at-new-delhi-railway-station-is-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(3)4.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads"><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><strong>प्रयागराज। </strong>नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना को एक महीन हो चुका है, लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस रेलवे की तरफ मामले में गठित जांच टीम ने जांच पूरी नहीं की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर रेलवे पुलिस घटना के संबंध में आगे जांच बढ़ाएगी।</div><div><br /></div><div>वहीं दूसरी तरफ से भगदड़ की घटना के बाद रेलवे के पांच अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया गया है। घटना के बाद रेल प्रशासन ने 4 मार्च को चार अलग-अलग आदेश जारी कर पांच अधिकारियों को उनके पद से हटाया दिया गया।हटाए गए अधिकारियों में स्टेशन डायरेक्टर महेश यादव, डिवीजनल कॉमर्शियल मैनेजर (सीनियर डीसीएम) आनंद मोहन, डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) सुखविंदर सिंह, एडिशनल डिवीजनल रेलवे मैनेजर (एडीआरएम) विक्रम सिंह राणा और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर महेश चंद सैनी शामिल है।</div><div><br /></div><div> इनमें से दो अधिकारियों को फिर से अलग-अलग जगह तैनात किया गया है। रेलवे सूत्रों ने बताया कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से हादसा हुआ है उनकी जवाबदेही तय करने के लिए उच्च स्तरीय जांच चल रही है। बताया जा रहा है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को महज तबादले से नहीं छोड़ा जाएगा। उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।</div><div><br /></div><div>15 फरवरी की शाम को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म 14-15 पर भगदड़ हुई थी। यात्रियों की भारी संख्या महाकुंभ मेले में भाग लेने के लिए प्रयागराज जाने वाली ट्रेन पकड़ने कोशिश कर रहे थे। इसमें 18 लोगों की मौत हो गई थी और एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हुई थे।</div><div><br /></div><div>नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ से हुई मौत की घटना पहली बार नहीं हुई थी। इससे पहले भी दो बार भगदड़ हुई, जिसमें सात लोगों की मौत और 16 लोग घायल हुए थे। लेकिन खास बात यह है कि इन दोनों घटनाओं में पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ी बल्कि रेलवे पुलिस ने मामलों की अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर जांच को हमेशा के लिए बंद कर दिया।</div><div><br /></div><div>13 नवंबर 2004 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लैटफॉर्म संख्या 2-3 पर भगदड़ हुई थी। छठ पर्व के लिए प्लैटफॉर्म पर यात्रियों की भीड़ बढ़ रही थी। इसी दौरान धक्का लगने की वजह से भगदड़ मच गई। इस हादसे में 5 महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि 10 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने एक बुजुर्ग की शिकायत पर लापरवाही से मौत की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। इसके दो साल बाद एक मार्च को जांच अधिकारी ने कोर्ट में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी। </div><div><br /></div><div>यहां तक कि रेलवे को अपनी जांच में भी जिम्मेदार का पता नहीं चल पाया। दूसरी घटना 2010 को हुई। रेलवे स्टेशन के प्लैटफॉर्म संख्या 12-13 पर भगदड़ में दो यात्रियों की मौत हुई और छह लोग घायल हुए थे। प्लैटफॉर्म पर बिहार जाने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस के यात्री जमा हो रहे थे। इसी दौरान ट्रेन के प्लैटफॉर्म बदलने की सूचना प्रसारित हुई और भगदड़ मच गई। इस मामले में भी दो साल बाद अनट्रेस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की गई।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div><div class="WhmR8e"><br /></div></div></div><div class="ajx"><br /></div></div><div class="gA gt acV"><div class="gB xu"><div class="ip iq"><div></div></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 14:15:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>  मानव जनित वैश्विक त्रासदी है भगदड़</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div>गत 28 जनवरी की देर रात 1:30 बजे के क़रीब संगम तट पर भगदड़ की घटनायें हुईं। इस दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ को लेकर कई अलग अलग दावे किये जा रहे हैं। स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताने वाले कुछ लोगों का दावा है कि उस रात एक नहीं बल्कि 3 स्थानों पर भगदड़ हुईं। इनमें दो जगहें संगम मेला क्षेत्र में थीं और एक भगदड़ जी टी रोड पर भी हुई बताई जा रही है। इसी तरह मृतकों के आंकड़ों को लेकर भी अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। सैकड़ों लोग अपने बिछड़े परिजनों को तलाश रहे हैं।</div>
<div>  </div>
<div>हज़ारों लोगों के जुते चप्पल</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148087/%C2%A0%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/kumbh-mela-stampede3.webp" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div>गत 28 जनवरी की देर रात 1:30 बजे के क़रीब संगम तट पर भगदड़ की घटनायें हुईं। इस दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ को लेकर कई अलग अलग दावे किये जा रहे हैं। स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताने वाले कुछ लोगों का दावा है कि उस रात एक नहीं बल्कि 3 स्थानों पर भगदड़ हुईं। इनमें दो जगहें संगम मेला क्षेत्र में थीं और एक भगदड़ जी टी रोड पर भी हुई बताई जा रही है। इसी तरह मृतकों के आंकड़ों को लेकर भी अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। सैकड़ों लोग अपने बिछड़े परिजनों को तलाश रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>हज़ारों लोगों के जुते चप्पल व अन्य सामान लावारिस पड़े दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जिनकी फ़ोटो योग गुरु रामदेव के साथ भगदड़ से दो दिन पहले ही नृत्यासन जैसी मुद्रा में वायरल हो रही थी, भगदड़ के बाद भी कई वेबसाईट व अख़बारों ने उसी फ़ोटो को प्रकाशित किया गया है। दरअसल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को इस भगदड़ को लेकर इसलिये भी आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है क्योंकि सरकार इस पूरे महाकुंभ आयोजन को अपनी सरकार की सफलता के रूप में काफ़ी बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रही थी। ज़ाहिर है जो सरकार अपनी सफलता के लिये अपनी पीठ स्वयं थपथपाने में माहिर हो कम से कम उसकी कमियों को उजागर करने का काम ईमानदार मीडिया व आलोचकों को तो करना ही चाहिये ?</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/kumbh-mela-stampede4.jpg" alt="kumbh-mela stampede4" width="696" height="490"></img>जबकि भगदड़ न तो कुंभ मेले में पहली बार हुई है न ही केवल कुंभ में ही भगदड़ होती है। और ऐसा भी नहीं है कि केवल भारत में ही भगदड़ होती हो। सऊदी अरब के मक्का में 1990 में हज यात्रा के दौरान एक बड़ी भगदड़ मचने से लगभग 1,400 लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा तब हुआ जब एक तंग मार्ग पर भीड़ जमा हो गई थी और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे थे।</div>
<div> </div>
<div>इसी तरह सऊदी अरब में ही 2006 में हज के दौरान बड़ी भगदड़ में लगभग 360 हज यात्रियों की मौत हो गई थी। इसी तरह 2015 के हज में हुई बड़ी भगदड़ हज यात्रा के दौरान का अब तक का सबसे बड़ा हादसा था जिसमें लगभग 2,300 लोगों की जान चली गई थी। यह हादसा भीड़ की असंतुलित स्थिति के कारण हुआ था, जब हज यात्रियों का एक समूह शैतान पर पत्थर फेंकने के लिए इकट्ठा हो रहा था। इसी तरह कुंभ मेलों के दौरान भी भगदड़ मचने के पूर्व में इससे भी बड़े व भयानक हादसे हुए हैं। कई देशों में फ़ुटबाल मैच या अन्य खेल अथवा मनोरंजक आयोजनों के दौरान भगदड़ मचने की घटनायें हो चुकी हैं।</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/kumbh-mela-stampede5.jpg" alt="kumbh-mela stampede5" width="640" height="439"></img>दरअसल भीड़ को कम कर या उसे विभिन्न क्षत्रों में विभाजित कर ऐसे हादसों को टाला जा सकता है। परन्तु सरकार तो स्वयं भीड़ के आंकड़ों को बढ़ा चढ़ाकर पेश करती है। ऐसे में जो श्रद्धालु रोज़ाना करोड़ों श्रद्धालुओं के संगम तट पर पहुँचने की ख़बर घर बैठे सुनता रहता है और मीडिया के माध्यम से वहां उपलब्ध 'सुविधाओं ' के सब्ज़ बाग़ देखता रहता है वह ज़रूर सोचता होगा कि कहीं वही इस पावन अवसर पर पुण्य कमाने से महरूम न रह जाये।</div>
<div> </div>
<div>और यह सोचकर आम भक्तजन तरह तरह की दुःख तकलीफ़ उठाते हुये भी चल पड़ते हैं। परन्तु जब वह ऐसे विशाल आयोजनों में पहुँचते हैं फिर उन्हें पता चलता है कि गोदी मीडिया द्वारा टी वी पर किया जाने वाला प्रचार या विज्ञापनों से पटे पड़े अख़बार केवल सरकार द्वारा प्रचारित उजले पक्ष को ही रखते हैं। और इसतरह का हादसा हो जाने के बाद केवल लाशों की संख्या छुपाने या कम बताने की बात तो पूर्व में भी होती ही रही है। परन्तु यह पहली बार सुनने में आ रहा है कि इस बार तो सरकार पूरी भगदड़ पर ही पर्दा डालने की कोशिश कर रहे है।</div>
<div> </div>
<div>अन्यथा क्या कारण है कि अलग अलग सूत्रों से प्राप्त होने वाली तीन अलग अलग भगदड़ की ख़बरों के बीच सरकार अभी तक यह क्यों नहीं बता पाई कि 28 जनवरी को प्रयागराज कुंभ में भगदड़ के हादसों की वास्तविक संख्या क्या थी। भगदड़ के अतिरिक्त आगज़नी की भी कई घटनायें इसी मेला क्षेत्र में हो चुकी हैं। कभी साधुओं व कल्पवासियों के टेंट जल गये तो कभी गीता प्रेस के 180 टेंट कॉटेज जलकर राख हो गये।</div>
<div> </div>
<div>ऐसे हादसों से क्या हम वास्तव में कोई सबक़ लेने को तैयार भी हैं ? क्या भीड़ को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने वाली सरकारें अपने इस आमंत्रित 'वोट बैंक' की जान व माल की सुरक्षा की गारंटी भी ऐसे आयोजनों में दे सकती हैं ? क्या वजह है कि ऐसी भगदड़ों में प्रायः वही लोग अपने जान माल से हाथ धो बैठते हैं जो सरकार की 'लाभार्थियों' की सूची में शामिल हैं। जबकि सत्ता व शासन-प्रशासन के निकटस्थ या फिर सम्पन्न व विशिष्ट लोग ऐसे हादसों में मरते कुचलते नहीं सुनाई देते।</div>
<div> </div>
<div>क्योंकि ऐसे विशिष्ट लोग अपने धन या प्रोटोकाल की बदौलत स्वयं को कहीं भी सुरक्षित कर लेते हैं जबकि आम आदमी के तो नसीब में ही भीड़ और भगदड़ का शिकार होना लिखा है। कई जगहों पर वी आई पी की आवाजाही के चलते भी भगदड़ जैसे हादसे होते रहे हैं। गत 28 जनवरी के हादसे को भी कथित तौर पर वी आई पी मूवमेंट से जोड़कर देखा जा रहा है। शायद यही वजह थी कि इस घटना के फ़ौरन बाद ही सभी वी आई पी पास निरस्त कर दिए गये।</div>
<div> </div>
<div>बताया जाता है कि 3 फ़रवरी, 1954 को भी इलाहबाद में लगे कुंभ मेले में मौनी अमावस्या के लिए लाखों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। यहाँ कुछ अफ़वाहें फैलने के बाद भगदड़ मच गई। 45 मिनट तक चली इस भगदड़ में लगभग 800 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि उस कुंभ में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी आए थे। इसी तरह सऊदी अरब में हज के दौरान जहां टेंटों में आग लगने व हाजियों के ज़िंदा जलने की ख़बरें आ चुकी हैं वहीँ कहीं शैतान पर पत्थर फेंकने या तंग रास्ते में अत्याधिक लोगों के इकठ्ठा होने के कारण भी भगदड़ मच चुकी है।</div>
<div> </div>
<div>वहीं हज के दौरान सऊदी किंग के आवागमन व उनके प्रोटोकाल पर अमल करने के कारण भी भगदड़ के हादसे हो चुके हैं। कहा जा सकता है कि भगदड़ एक मानव जनित वैश्विक त्रासदी है और जब जब जहाँ जहाँ इसतरह की अनियंत्रित भीड़ इकट्ठी होती रहेगी ऐसे हादसों की संभावना हमेशा बनी रहेगी।<em> </em></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Feb 2025 15:47:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महाकुंभ में हुई मौतें से दुःखद, कांग्रेस ने की प्रार्थना सभा</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती।</strong> जिले के कांग्रेस नेताओं द्वाराप्रार्थना सभा कर कांग्रेसियों ने महाकुंभ में मारे गये परिवारों के प्रति व्यक्त की गहरी संवेदना महाकुंभ में हुई मौतें दुर्भाग्यपूर्ण, व्यवस्थाओं की खामियों के चलते श्रद्धालुओं अपनों को खोया महाकुंभ में मची भगदड़ से हुई मौतों से आहत कांग्रेसियों ने कुआनो नदी के अमहट घाट पर प्रार्थना सभा की। मृतकों व घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुये जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ ने कहा महाकुंभ की घटना हृदयविदारक है। अनके परिवारों ने स्वजनों को खोया है। ईश्वर उन्हे दुख की इस घड़ी में साहस प्रदान करें जिससे वे अवसाद से बाहर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147989/congress-sad-due-to-deaths-in-mahakumbh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250130-wa0164.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> जिले के कांग्रेस नेताओं द्वाराप्रार्थना सभा कर कांग्रेसियों ने महाकुंभ में मारे गये परिवारों के प्रति व्यक्त की गहरी संवेदना महाकुंभ में हुई मौतें दुर्भाग्यपूर्ण, व्यवस्थाओं की खामियों के चलते श्रद्धालुओं अपनों को खोया महाकुंभ में मची भगदड़ से हुई मौतों से आहत कांग्रेसियों ने कुआनो नदी के अमहट घाट पर प्रार्थना सभा की। मृतकों व घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुये जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय ‘ज्ञानू’ ने कहा महाकुंभ की घटना हृदयविदारक है। अनके परिवारों ने स्वजनों को खोया है। ईश्वर उन्हे दुख की इस घड़ी में साहस प्रदान करें जिससे वे अवसाद से बाहर आ पायें।</div>
<div> </div>
<div>उन्होने महाकुंभ की घटना को अव्यवस्था का परिणाम बताया। इसके लिये शासन प्रशासन जिम्मेदार है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा यह राजनीति का विषय नही है। लेकिन जब भी चर्चा होगी ये सामने आयेगा कि महाकुंभ के आयोजन में शुरू से ही वीआईपी की जी हुजरी की जा रही है। आम जन की बुनियादी जरूरतों का ध्यान नही रखा गया।</div>
<div> </div>
<div>जनता के पैसे से इतना बड़ा आयोजन किया गया और जनता के लिये शौचालय, यूरिनल, टेंट और सुरक्षा के इंतजाम नही किये गये। उन्होने घटना में घायल हुये श्रद्धालुओं के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। पूर्व विधानसभा प्रत्याशी देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा इतनी बड़ी संख्या में किसी स्थान पर लोगों के आने का आवाह्न करने से पहले मुकम्मल इंतजाम होना चाहिये। सूचना व सुरक्षा तंत्र मजबूत होना चाहिये।</div>
<div> </div>
<div>भीड़ को जहां बैरिकेड किया जाना चाहिये वहां न करके अचानक श्रद्धालुओं को रोक दिया जाता था, तो भीड़ का दबाव बनना स्वाभाविक है। निश्चित रूप से महाकुंभ का सूचना तृत्र और सुरक्षा ंतजाम तथा क्राउड कन्ट्रोल की व्यवस्था पर्याप्त नही थी जिसकी कीमत श्रद्धालुओं को जान देकर चुकानी पड़ी। निकट भविष्य में इतनी बड़ी संख्या में भीड़ का आवाह्न करने से पहले हर विन्दु पर सेचना होगा। उन्होने मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।</div>
<div> </div>
<div>कांग्रेस की प्रार्थना सभा में प्रमुख रूप से मो. रफीक खां, अलीम अख्तर, जयंत चौधरी, शिवविभूति मिश्रा, अमित प्रताप सिंह, गुड्डू सोनकर, संदीप श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, सुनील कुमार पाण्डेय, मो. अकरम, आनंद निषाद, बबलू, शौकत अली नन्हू, शमशाद आलम, ओमप्रकाश पाण्डेय, एडवोकेट आशुतोष पाण्डेय, करीम अहमद, बबलू गुप्ता, रवीन्द्र कुमार विंद्रा चौधरी, अब्दुल रउफ आदि मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2025 16:59:35 +0530</pubDate>
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