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                <title>basic education - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>basic education RSS Feed</description>
                
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                <title>टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का दिया धरना और दिया ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को एन.आई.सी.परिसर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग), प्रतापगढ़ के जिलाध्यक्ष अशोक राय के नेतृत्व में विशाल भीड़ एकत्रित होकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री,केन्द्रीय शिक्षा मंत्री तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री  को सम्बोधित सेवारत शिक्षक शिक्षिकाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया।  कार्यक्रमों का संचालन जिला महामंत्री जय प्रकाश पाण्डेय ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;">उपस्थित शिक्षक समूह को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अशोक राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 27जुलाई2011और केन्द्रीय सेवाओं में 23 अगस्त 2010 के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों, शिक्षिकाओं के लिए भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181511/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0119.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को एन.आई.सी.परिसर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग), प्रतापगढ़ के जिलाध्यक्ष अशोक राय के नेतृत्व में विशाल भीड़ एकत्रित होकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री,केन्द्रीय शिक्षा मंत्री तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री  को सम्बोधित सेवारत शिक्षक शिक्षिकाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया।  कार्यक्रमों का संचालन जिला महामंत्री जय प्रकाश पाण्डेय ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;">उपस्थित शिक्षक समूह को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अशोक राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 27जुलाई2011और केन्द्रीय सेवाओं में 23 अगस्त 2010 के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों, शिक्षिकाओं के लिए भी उच्चतम न्यायालय, द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किया जाना सरासर अन्याय है और यह नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। उन शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता एक जबर्दस्ती थोपी गई व्यवस्था है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है।माध्यमिक संवर्ग के अध्यक्ष प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2017 के संसद के जिस संशोधन के आधार पर बेसिक शिक्षकों को बीस-पच्चीस साल तक नौकरी करने के बाद पुनः पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्णय दिया है , देश में वैसा उदाहरण मिलना असम्भव है। इसमें मानवीय पक्ष को पूरी तरह नकार दिया गया है।माध्यमिक संवर्ग के पूर्व प्रान्तीय कार्यकारी अध्यक्ष अरुण शुक्ल ने कहा कि संसद सर्वोच्च है और  उच्चतम न्यायालय के निर्णय से बड़ी विसंगति पैदा हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;">विशाल एकत्रीकरण कार्यक्रम एवं ज्ञापन कार्यक्रम में आज उपस्थित अन्य प्रमुख पदाधिकारियों में वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक वैश्य, उपाध्यक्ष डा.राज श्री पाण्डेय,जिला महामंत्री जय प्रकाश पाण्डेय,सह संगठन मंत्री गौरव त्रिपाठी, जिला संयुक्त महामंत्री/सदर ब्लाक अध्यक्ष डा.अजय सिंह, जिला मंत्री/बाबा गंज महामंत्री अरूण द्विवेदी,जिला मंत्री/शिवगढ़ अध्यक्ष सुशील द्विवेदी, क्रीड़ा भारती के जिलाध्यक्ष ध्रुव शर्मा,ब्लॉक अध्यक्ष गण-सुरेन्द्र पाण्डेय,रामेन्द्र सिंह, देवेन्द्र पति तिवारी,डा.कामेश्वर मणि त्रिपाठी, रमेश सिंह,अखिलेश सिंह, जीतेन्द्र सिंह, विनोद शर्मा,भागवत प्रसाद, महामंत्री गण-धर्मेन्द्र सिंह, राकेश वर्मा,  मनोज मिश्र, बिहार, राजीव कौशल, मनोज मिश्र,कुण्डा,लालजी यादव विद्याशंकर,बालचन्द्र,अनीस हैदर रिजवी, प्राचार्य कृपाशंकर पाण्डेय,इन्द्र देव सिंह, मीना भारती, कुसुम कुमारी, अनुराधा उपाध्याय,मंजू चौरसिया,जय प्रकाश सिंह आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:43:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनपद के बेसिक शिक्षा में चरम पर पहुँचा भ्रष्टाचार , बिना सुविधा शुल्क दिए बीमार नहीं हो पा रहे गुरुजी </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>  बस्ती।</strong> बस्ती जिले में सरकार भले ही स्वच्छ एवं भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा ठोंक रही है पर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है और आनलाइन प्रक्रिया में भी भ्रष्टाचारियों ने सेंध लगाकर अपना हाथ साफ करना शुरू कर दिया है जिसके परिणाम स्वरूप ही जनपद में बिना सुविधा शुल्क के गुरुजी बीमार नहीं हो पा रहे हैं और पूरे मामले में  संगठन तमाशगीर बना हुआ है ।उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संगठन का इतिहास क्रान्तियों से भरा पड़ा है ।</div>
<div>  </div>
<div>एक समय था जब बेसिक शिक्षा विभाग में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का दबदबा दिखता था परन्तु जैसे -</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150265/guruji-is-not-able-to-become-ill-in-the-basic"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250322-wa0170.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> बस्ती।</strong> बस्ती जिले में सरकार भले ही स्वच्छ एवं भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा ठोंक रही है पर जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है और आनलाइन प्रक्रिया में भी भ्रष्टाचारियों ने सेंध लगाकर अपना हाथ साफ करना शुरू कर दिया है जिसके परिणाम स्वरूप ही जनपद में बिना सुविधा शुल्क के गुरुजी बीमार नहीं हो पा रहे हैं और पूरे मामले में  संगठन तमाशगीर बना हुआ है ।उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संगठन का इतिहास क्रान्तियों से भरा पड़ा है ।</div>
<div> </div>
<div>एक समय था जब बेसिक शिक्षा विभाग में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ का दबदबा दिखता था परन्तु जैसे - जैसे समय बीत रहा है संगठन का दबदबा गुजरे जमाने की बात बन कर रह जा रही है और जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में खण्ड शिक्षा अधिकारियों की मनमानी के चलते भ्रष्टाचार का बोलबाला इस कदर बढ़ गया है कि शिक्षकों का मेडिकल अवकाश भी बिना सुविधा शुल्क के नहीं स्वीकृत हो रहा है । भ्रष्टाचार पर प्रहार बनने वाले  संगठन के धरने भी धीरे - धीरे कमजोर पड़ते जा रहे हैं वजह चाहे संगठनों का निजी स्वार्थ हो या कुछ और ।</div>
<div> </div>
<div>फिरहाल बेसिक शिक्षा परिषद में छुट्टियों की प्रक्रिया आनलाइन होने के बाद भी भ्रष्टाचार मुक्त नहीं हो पायी है और मेडिकल अवकाश जैसे अनिवार्य अवकाश भी बिना सुविधा शुल्क स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं । यदि महानिदेशक स्तर से जनपदवार विभिन्न अवकाशों की  समीक्षा की जाए तो भ्रष्टाचारी बेनकाब हो जायेंगे ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 14:18:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं संस्कार दिये जाये जिससे वह देश व समाज का नाम रोशन करें-जिलाधिकारी </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>प्रतापगढ़। </strong>बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा प्री प्राइमरी शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम, निपुण सम्मान समारोह एवं पीएम श्री विद्यालयों कार्यशाला का आयोजन तुलसीसदन (हादीहाल) में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। सरस्वती वंदना गीत कंपोजिट विद्यालय संडीला गौरा की बच्चियों द्वारा किया गया।स्वागत गीत प्राथमिक विद्यालय शंकर दयाल रोड नगर क्षेत्र के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया।</div>
<div>  </div>
<div>इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि ज्ञान हमें मुक्ति की तरफ ले जाता है, हमारी समस्त सामाजिक, आर्थिक, सामाजिक संरचना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150204/children-should-be-given-good-education-and-rites-so-that"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250321-wa0070.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>प्रतापगढ़। </strong>बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा प्री प्राइमरी शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम, निपुण सम्मान समारोह एवं पीएम श्री विद्यालयों कार्यशाला का आयोजन तुलसीसदन (हादीहाल) में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी शिव सहाय अवस्थी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। सरस्वती वंदना गीत कंपोजिट विद्यालय संडीला गौरा की बच्चियों द्वारा किया गया।स्वागत गीत प्राथमिक विद्यालय शंकर दयाल रोड नगर क्षेत्र के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि ज्ञान हमें मुक्ति की तरफ ले जाता है, हमारी समस्त सामाजिक, आर्थिक, सामाजिक संरचना ज्ञान के आधार पर टिकी रही है। उन्होने कहा कि विद्या हमें विनम्रता प्रदान करती है, विनम्रता से योग्यता आती है, योग्यता से धन प्राप्त होता है, धन का उपयोग अच्छे और धार्मिक कार्यों में करने से धर्म की प्राप्ति होती है और धर्म (सत्य, न्याय, और अच्छे कर्म) से वास्तविक सुख प्राप्त होता है। उन्होने कहा कि जिस व्यक्ति में श्रद्धा का भाव होता है वही ज्ञान प्राप्त करता है।</div>
<div> </div>
<div>शिक्षा का वास्तविक उद्वेश्य अच्छा संस्कारी मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण नागरिक बनना है। उन्होने कहा कि हमारे समाज में गुरूओं का स्थान अग्रणी रहा है और माता-पिता के साथ-साथ अगर कोई रिश्ता सबसे महत्वपूर्ण होता है।बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं संस्कार दिया जाय जिससे वह आगे बढ़ सके और देश व समाज का नाम रोशन कर सके।इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा निपुण हुए विद्यालयों का प्रतिनिधित्व कर रहे चिन्हित बच्चों और अध्यापकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।</div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह द्वारा हमारा आंगन हमारे बच्चे कार्यक्रम के उद्देश्य और बच्चे के विकास में समुदाय की भूमिका पर चर्चा की गई एवं आये हुये अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में कुल 1490 में से निपुण हुए 960 स्कूलों में से संबंधित ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा चिन्हित उत्कृष्ट शिक्षक व निपुण बच्चों को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन एसआरजी चंद्रजीत यादव और आशुतोष निर्मल ने किया। इस अवसर पर जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा, जिला व्यायाम शिक्षक राम कुमार सिंह, समस्त खण्ड शिक्षा अधिकारी व अन्य सम्बन्धित उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 13:55:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बुनियादी शिक्षा में प्रयोग और विज्ञान के सार्थक उपयोग का महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारत में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट बनाने कारखाने चल रहे हैं स्कूल महाविद्यालय और विश्वविद्यालय हर वर्ष लाखों ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगार बनाने के लिए डिग्रियां वितरित कर रही है,जबकि आवश्यकता मूल रूप से बुनियादी शिक्षा में व्यवसायीकरण की है, बुनियादी शिक्षा से ही ऐसे पाठ्यक्रम शामिल किए जाएं जो परिणाम मूलक हो और युवाओं को रोजगार देने हेतु सक्षम हो। स्कूल के सिलेबस में ही व्यावसायिक शिक्षा को महत्व दिया जाना चाहिए जिससे आगे चलकर युवा अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करें बल्कि अपने कई साथी बेरोजगारों को रोजगार देने में पूरी तरह सक्षम बने।</div>
<div>  </div>
<div>बुनियादी, नैतिक शिक्षा किसी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147983/importance-of-useful-use-of-use-in-basic-education-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download-(5)1.jpg" alt=""></a><br /><div>भारत में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट बनाने कारखाने चल रहे हैं स्कूल महाविद्यालय और विश्वविद्यालय हर वर्ष लाखों ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगार बनाने के लिए डिग्रियां वितरित कर रही है,जबकि आवश्यकता मूल रूप से बुनियादी शिक्षा में व्यवसायीकरण की है, बुनियादी शिक्षा से ही ऐसे पाठ्यक्रम शामिल किए जाएं जो परिणाम मूलक हो और युवाओं को रोजगार देने हेतु सक्षम हो। स्कूल के सिलेबस में ही व्यावसायिक शिक्षा को महत्व दिया जाना चाहिए जिससे आगे चलकर युवा अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करें बल्कि अपने कई साथी बेरोजगारों को रोजगार देने में पूरी तरह सक्षम बने।</div>
<div> </div>
<div>बुनियादी, नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति समाज और राष्ट्र के नैतिक तथा आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैl शिक्षित सुसंस्कृत नागरिक देश की एक बड़ी धरोहर होते हैं lजिस राष्ट्र में शिक्षा,संस्कृति जितनी गहरी और समृद्ध हो वह राष्ट्र उतना ही विकसित,पुष्पित, पल्लवित होता है। इसके साथ आर्थिक वैज्ञानिक सोच भी अत्यंत विचारणीय है।हर देश में राष्ट्र के प्रति और राष्ट्रहित के प्रति चिंतन करने वालों का समूह होना चाहिए,जो प्रजातांत्रिक, लोकतांत्रिक तथा राष्ट्रहित के विचारों और विकास के मूल मंत्र को नई ऊर्जा ताजा हवा और आगे बढ़ने की सच्चाई को इंगित कर सकेंl</div>
<div> </div>
<div>बिना संस्कृति ,संस्कार और वैचारिक क्षमता के कोई भी राष्ट्र वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय प्रगति करने की सोच भी नहीं सकताl वैचारिक और सैद्धांतिक अंतरधारा, सिद्धांतों को कुचला या नष्ट नहीं किया जा सकता। व्यक्तिगत वैचारिक अभिव्यक्ति भारत के संदर्भ में गणतंत्र की मूल आत्मा है।</div>
<div> </div>
<div>विचार और सिद्धांत व्यक्ति की अंतःप्रज्ञा होती है। यह सिद्धांत तथा अंतः विचारधारा जनमानस तक पहुंचने से बाधित किया जाए तो अंतरात्मा को प्रभावित करती है। इसके गहरे प्रभाव से व्यक्ति वह सब कर सकता है, जो बिना मार्गदर्शन के व्यक्ति नहीं कर सकता। प्राचीन काल से अब तक मनीषियों के वैचारिक सिद्धांत और विचारधारा सदैव समाज के दिग्दर्शक मार्गदर्शक रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>इनकी भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है।यदि यही सिद्धांत और अंतः प्रज्ञा जनमानस आत्मसात कर लेता है, तो इसका प्रभाव एक जन आंदोलन का रूप ले लेता है और यहीं से युग परिवर्तन की लहर उत्पादित होती है। प्राचीन यूनान में एक बहुत ही कुरूप किंतु विद्वान व्यक्ति रहते थे,उनके विचारों में मौलिकता,नयापन जनजागृति की अद्भुत क्षमता थी। उनकी विद्वता के कारण आम जनमानस होने राजा से ज्यादा महत्व और बुद्धिमान मानते थे।</div>
<div> </div>
<div>राजकीय तानाशाही के चलते उनके विचारों के कारण उनको मृत्युदंड दे दिया गया। जहर का प्याला पीने के बाद भी विद्वान, चिंतक, सुकरात अमर हो गए, उनकी विचारधारा आज भी जीवित है, एवं लोग उसे अपनाकर अपना जीवन सुधारने में इसका उपयोग करते हैं। अब्राहम लिंकन ने अमेरिकी स्वतंत्रता के बाद दास प्रथा के बारे में कहा था कि दास भी मनुष्य हैं, उन्हें भी उतना ही जीने का अधिकार है जितना स्वामी को है।</div>
<div> </div>
<div>अब्राहम लिंकन के आंदोलनकारी विचार से तत्कालीन समय में अमेरिका के लोग घबरा गए थे,और उनकी हत्या कर दी गई थी। पर अब्राहम लिंकन के विचारों ने दास प्रथा के उन्मूलन की अंतर आत्मा को जागृत कर दिया था, और जनमानस ने अपने अधिकारों के लिए लड़ते हुए दास प्रथा से मुक्ति पाई थी।</div>
<div> </div>
<div>स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि हम जो सोचते हैं वही बन जाते हैं। विचार एवं सिद्धांत ही व्यक्ति का निर्माण करता है। वही दुष्ट होने या महान होने का निर्णायक है। और बिना विचारों सिद्धांतों के व्यक्त व्यक्ति का अस्तित्व ही नहीं । विवेकानंद जी के विचार सर्व कालीन प्रासंगिक है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवित रहते हुए थे।</div>
<div> </div>
<div>आज हमारे बीच विवेकानंद जी स शरीर मौजूद नहीं है, पर उनके विचारों की महत्ता कायम है।भौतिक शरीर के नष्ट हो जाने से और भौतिक विचार तथा सिद्धांत उतनी ही तीव्रता रखते हैं, वेग रखते हैं, जो एक समाज में परिवर्तन ला सकती है ।विचारों की यह अमरता तथा तीव्रता किसी भी तानाशाह के लिए इतनी खतरनाक है, जितनी की सुप्त शेर की गुफा में रहना।</div>
<div> </div>
<div>जनता के मध्य शुद्ध विचारधारा के जागृत होने पर क्रांति लाई जा सकती है। फिर चाहे वह फ्रांस के वर्साय के महल का विध्वंस हो अथवा भारत की स्वतंत्रता हेतु वृहद आंदोलन हो। व्यक्ति या व्यक्तियों के दबाव को दबाने के बाद विचारों की पीड़िता ने जनसामान्य को एक गरजते हुए सिंह में तब्दील कर दिया था। यह शाश्वत सत्य है कि व्यक्ति को जरूर आप दबा सकते हैं,पर विचारधारा सिद्धांत अजर अमर होते हैं,और वही युग निर्माण में अपनी महती भूमिका निभाते हैं।</div>
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<div>विचारों के संदर्भ में कहा जाता है कि एक व्यक्ति का विचार तब तक उस व्यक्ति के पास है, जब तक वह अकेला है किंतु जैसे ही विचारधारा एवं सिद्धांत का प्रचार प्रसार होता है, तो वह व्यक्ति अकेला ना रह कर उस जैसे हजारों लाखों लोग उसके साथ हो जाते हैं। तब वह अकेला नहीं रह जाता। वह अपने विचारों के माध्यम से जन सामान्य को प्रभावित कर लोगों को उस लड़ाई में शामिल कर लेता है, जिस लड़ाई के वह कभी अकेले नहीं लड़ सकता था।</div>
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<div>विचारों सिद्धांतों की तीव्रता आवेश तथा सघनता किसी भी क्रांतिकारी लक्ष्य की प्राप्ति में एक बड़ा साधक हो सकता है। विचार व सिद्धांत एक से दूसरे व्यक्ति तक स्थानांतरित होते रहते हैं। जिसमें विचारों को सघनता प्राप्त होती है। ताकि सत्ता के दमन के समय वैचारिक अमरता स्थाई बनी रहे। चीन उत्तर कोरिया जैसे राष्ट्रों में विचारों के इस स्वतंत्र का प्रवाह को बाधित नियंत्रित कर दिया गया। अभिव्यक्ति के तमाम माध्यमों को प्रतिबंधित कर दमन चक्र चलाया गया। वहां विचार और सिद्धांत विद्वान व्यक्ति तक ही सीमित रहे उसका फैलाव या विस्तार नहीं हो पाया। जो मानव समाज तथा मानव अधिकारों की संवेदना तथा धाराओं का उल्लंघन भी है।</div>
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<div>किसी स्वस्थ स्वतंत्र राष्ट्र के लिए व्यक्ति समाज और राष्ट्र के विचारों की स्वतंत्रता नवीनता तथा उत्कृष्टता अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि विचारधारा और सिद्धांतों को रोक पाना किसी भी सत्ता या निरंकुश राजा के नियंत्रण में नहीं होता। विचारों और सिद्धांत अनादि काल से गतिशील है तथा अनंत तक जगत तक गतिशील रहेंगे,और उसका प्रतिपादक एवं अनुशीलन कर्ता विचारों के साथ अमर हो जाते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2025 16:32:19 +0530</pubDate>
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