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                <title>US market - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>US market RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> शेयर बाजार में गिरावट के चलते निवेशकों के लिए आयी चिंता बढ़ाने वाली खबर 16 साल बाद ऐसे संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>शेयर बाजार-</strong> शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच निवेशकों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। 16 साल बाद ऐसा नकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है, जो निवेशकों के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबी अवधि तक मंदी बनी रह सकती है। हालांकि, भारतीय सूचकांक कुछ सत्रों में सुधार दिखा रहे हैं लेकिन लॉन्ग टर्म में बाजार पर बियर हावी होने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p><strong>भारत में सुस्ती, अमेरिकी बाजार में तेजी- </strong>अक्टूबर-दिसंबर 2024 तिमाही में अमेरिकी कंपनियों की आय 16% बढ़ी,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149790/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(43).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>शेयर बाजार-</strong> शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच निवेशकों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। 16 साल बाद ऐसा नकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है, जो निवेशकों के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबी अवधि तक मंदी बनी रह सकती है। हालांकि, भारतीय सूचकांक कुछ सत्रों में सुधार दिखा रहे हैं लेकिन लॉन्ग टर्म में बाजार पर बियर हावी होने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p><strong>भारत में सुस्ती, अमेरिकी बाजार में तेजी- </strong>अक्टूबर-दिसंबर 2024 तिमाही में अमेरिकी कंपनियों की आय 16% बढ़ी, जबकि भारत में यह वृद्धि सिर्फ 6% रही। 2025 के पूरे कैलेंडर वर्ष में भी अमेरिकी कंपनियों की ग्रोथ भारतीय कंपनियों से अधिक रहने की संभावना है। अनुमान है कि भारत की कमाई FY26 में 11% बढ़ सकती है लेकिन अमेरिका की तुलना में यह आंकड़ा कमजोर ही रहेगा।</p>
<p><strong> ओवर वैल्यूएशन समाप्त- </strong>पिछले पांच महीनों की बिकवाली के कारण भारतीय बाजार का ओवर वैल्यूएशन खत्म हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीएसई सेंसेक्स अब अमेरिकी डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones) की तुलना में कम P/E अनुपात पर ट्रेड कर रहा है, जो 2009 के बाद पहली बार हुआ है। इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियों की आय और मुनाफे की वृद्धि दर घट रही है, जबकि अमेरिकी बाजार में यह अनुपात बेहतर हो रहा है।</p>
<p><strong>FPI का भारत से पलायन जारी-</strong>भारत में धीमी आय वृद्धि के चलते विदेशी निवेशक (FPI) अब अमेरिका, चीन और पश्चिमी यूरोप जैसे बाजारों का रुख कर रहे हैं। सितंबर 2023 से अब तक FPI ने भारतीय बाजार से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं, जिससे सेंसेक्स में 12% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, डॉउ जोन्स ज्यादा स्थिर बना हुआ है।</p>
<p><strong>सेंसेक्स का घटता मूल्यांकन-</strong>BSE का सेंसेक्स वर्तमान में बीते साल की कमाई के 21.8 गुना पर मूल्यांकित है, जो मार्च 2023 में 23.8 गुना था। दूसरी ओर, डाउ जोन्स का P/E अनुपात 22.4 गुना है, जो एक साल पहले 22.8 गुना था। ऐतिहासिक रूप से सेंसेक्स औसतन डॉउ जोन्स की तुलना में 25% प्रीमियम पर ट्रेड करता था लेकिन अब यह अंतर कम हो गया है। मार्च 2022 में सेंसेक्स का P/E अनुपात 26 गुना था, जबकि अब यह गिरकर 21.8 गुना हो गया है। इसके विपरीत, डॉउ जोन्स का P/E अनुपात 15.6 गुना के निचले स्तर से लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p><strong>डॉलर में कमजोर भारतीय ग्रोथ- </strong>पिछले वर्ष डॉउ घटक कंपनियों की आय में 8.9% की वृद्धि हुई, जबकि सेंसेक्स की कंपनियों की आय 10% बढ़ी। हालांकि, रुपए के अवमूल्यन के कारण यह वृद्धि डॉलर के संदर्भ में घटकर सिर्फ 5.6% रह गई। यही कारण है कि भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में नाकाम हो रहा है और वे अपनी पूंजी अमेरिका और अन्य विकसित बाजारों में लगा रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या बाजार में और गिरावट आएगी?- </strong>विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारत में कॉरपोरेट कमाई की वृद्धि दर धीमी रहती है और विदेशी निवेशकों का पलायन जारी रहता है, तो बाजार में लंबी मंदी की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की भागीदारी और सरकारी नीतियां बाजार को स्थिरता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिज़नेस रिलीज़</category>
                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Mar 2025 15:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारत के लिए 'मेक इन अमेरिका' प्लान मुसीबत बन सकता है, ट्रंप ने अपनाई 'ईनाम और सजा' नीति</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="Headlines mb-3">
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<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप- </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर जोर उन देशों के लिए बड़ा संदेश है जो अगला चीन बनने की दौड़ में हैं। उन्हें अपनी रणनीति दोबारा तैयार करनी होगी। भारत को भी अपने सप्लाई चेन सिस्टम को मजबूत करने और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की चुनौतियों को तेजी से हल करने की जरूरत है। ट्रंप ने 'मेक इन अमेरिका' को बढ़ावा देने के लिए 'ईनाम और सजा' वाली रणनीति अपनाई है।</p>
<p>वह चाहते हैं कि कंपनियां अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करें, अन्यथा अमेरिकी बाजार में सामान बेचने पर ऊंचे शुल्क चुकाएं। दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर</p></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147953/make-in-america-plan-can-become-a-problem-for-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/2025_1image_11_30_019994725trumpmodi-ll.jpg" alt=""></a><br /><div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="descriptionC">
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप- </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर जोर उन देशों के लिए बड़ा संदेश है जो अगला चीन बनने की दौड़ में हैं। उन्हें अपनी रणनीति दोबारा तैयार करनी होगी। भारत को भी अपने सप्लाई चेन सिस्टम को मजबूत करने और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की चुनौतियों को तेजी से हल करने की जरूरत है। ट्रंप ने 'मेक इन अमेरिका' को बढ़ावा देने के लिए 'ईनाम और सजा' वाली रणनीति अपनाई है।</p>
<p>वह चाहते हैं कि कंपनियां अमेरिका में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करें, अन्यथा अमेरिकी बाजार में सामान बेचने पर ऊंचे शुल्क चुकाएं। दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर उन्होंने कहा,  "दुनिया की हर कंपनी के लिए मेरा संदेश साफ है अमेरिका में निर्माण करें, और हम आपको सबसे कम टैक्स देंगे।"  ट्रंप ने अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनियों के लिए 15% कॉर्पोरेट टैक्स की पेशकश की है।  </p>
<p><strong> </strong><strong>भारत के लिए चुनौतियां </strong><br />इससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।  भारत की लॉजिस्टिक्स लागत GDP का 14-15% है, जबकि इसे राष्ट्रीय रसद नीति 2022 के तहत 9% तक लाने का लक्ष्य है। इससे प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) मैन्युफैक्चरिंग सुधारने में मदद कर रही है, लेकिन इसकी गति अपेक्षाकृत धीमी है।  </p>
<ul>
<li>- पुरानी तकनीक और असंगत गुणवत्ता मानक  </li>
<li>- कुशल श्रमिकों की कमी  </li>
<li>- जटिल नियम और नीतियां  </li>
<li>- अनुसंधान एवं विकास (R&amp;D) में कम निवेश (GDP का केवल 0.64%)  </li>
</ul>
<p><strong>वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग -</strong>पिछले कुछ दशकों में मैन्युफैक्चरिंग चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में शिफ्ट हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर कपड़ों तक, एशियाई देशों ने वैश्विक आपूर्ति चेन पर दबदबा बना लिया है। हालांकि, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे चिप निर्माण में अमेरिका ने फिर से निवेश बढ़ाया है। अमेरिका में श्रम लागत अधिक होने के कारण कई कंपनियां ठेके पर निर्माण कार्य करवाती हैं। उदाहरण के लिए, एनवीडिया अपने एआई चिप्स भारत और अन्य देशों में डिजाइन करता है, जबकि ताइवान में टीएसएमसी उन्हें बनाता है। एप्पल के उत्पाद भी अमेरिका में डिजाइन होते हैं लेकिन निर्माण चीन, भारत आदि में होता है।</p>
<p><strong>अन्य एशियाई देशों की बढ़त  </strong><br />नीति आयोग की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 'चीन प्लस वन रणनीति' का लाभ भारत को सीमित रूप से मिला है, जबकि वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया अधिक लाभान्वित हुए हैं। इन देशों ने सस्ते श्रम, सरल कर व्यवस्था, कम शुल्क और मुक्त व्यापार समझौतों के जरिये अपनी निर्यात हिस्सेदारी बढ़ाई है। अब, अमेरिका की सख्त व्यापार नीतियों के बीच भारत को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की अड़चनों को दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना यह अवसर भी हाथ से निकल सकता है।</p>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2025 17:39:58 +0530</pubDate>
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