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                <title>District Development Officer - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>District Development Officer RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर:वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में ग्राम पंचायत सचिव निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  चार ग्राम पंचायतों में  जांच के बाद कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अभिलेखों में कूटरचित, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप भी जांच</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180893/siddharthnagar-gram-panchayat-secretary-suspended-on-charges-of-financial-irregularities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> सिद्धार्थनगर।</strong> जिले के खुनियांव विकास खंड की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> चार ग्राम पंचायतों में  जांच के बाद कुल 6,11,426 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अभिलेखों में कूटरचित, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप भी जांच में सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है।जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला विकास अधिकारी राजमणि वर्मा को ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को निलंबित करने तथा आगे की विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिले की पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर हुए इस कथित गबन ने वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब पूरे प्रकरण की गहन जांच कर यह भी पता लगाने की तैयारी में है कि अनियमित भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग में अन्य किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। यह मामला सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) खुनियांव द्वारा ग्राम पंचायत खखरा-खखरी, बगहवा, सिरसिया और तेलियाडीह के निरीक्षण के बाद तैयार की गई जांच रिपोर्ट से उजागर हुआ। इस रिपोर्ट में विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर तथ्य सामने आए थे।जांच के अनुसार, ग्राम पंचायत खखरा-खखरी में आंगनबाड़ी केंद्र की मरम्मत और डस्टबिन इंस्टालेशन कार्यों में अनियमितता बरती गई। </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 21:13:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>18 फरवरी कोजिलाधिकारी  द्वारा घोषित सार्वजनिक अवकाश के दिन भी जिला विकास अधिकारी ने संपन्न कराया ग्राम पंचायत सोशल ऑडिट बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[जिला विकास अधिकारी कार्यालय एवं आवास के पास लगे सीसीटीवी फुटेज को देखा जाए तो सोशल ऑडिट के दिन से अगले एक 2 दिन तक ऑडिट से संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव, ग्राम प्रधान या उनका कोई माध्यम जिला विकास अधिकारी से मुलाकात हेतु आता हुआ दिखाई पड़ेगा इसके पीछे क्या है राज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148935/on-february-18-the-district-development-officer-held-gram-panchayat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/img-20250223-wa0177.jpg" alt=""></a><br /><div><strong> बस्ती। </strong>जनपद के बस्ती सदर विकासखंड के 4 ग्राम पंचायत पाकड़डांड, ओरई, पचीसा एवं पाण्डेयडीह में सोशल ऑडिट संपन्न होना सुनिश्चितता  था किंतु ओरई  ग्राम पंचायत की सोशल ऑडिट 9:30 बजे ही प्रारंभ कर दी गई ग्राम पंचायत पचीसा में 10:00 से 2:00 बजे तक ग्राम प्रधान के फरार रहने सचिव और तकनीकी सहायक के मौजूद न होने के कारण सोशल  ऑडिट टीम काफी समय तक इंतजार करती रही जिसमें 2:00 बजे के लगभग ग्राम प्रधान के आने पर संपन्न की गई ग्राम पंचायत की सोशल ऑडिट बैठक इसी क्रम में ग्राम पंचायत पाकड़डांड, में सूत्रों द्वारा पता चला कि बैठक निरस्त की गई है किंतु ग्राम पंचायत सचिवालय पर खाली कुर्सियां लगी हुई थीl</div>
<div> </div>
<div>बैठक का इंतजार कर रही थी बैठक हुई या नहीं हुई इस पर संदेह है इस संदेह का प्रमुख कारण कुशल पर्यवेक्षण का ना होना है और यदि नामित अधिकारी अपने अपने पर्यवेक्षण कार्य की निगरानी करते  तो तिथि और समय के अनुसार सोशल ऑडिट संपन्न हो सकता है किंतु जिम्मेदारों की शिथिलता के कारण लगातार फाइल न उपलब्ध होने, सचिव ग्राम प्रधान एवं तकनीकी सहायक के अनुपस्थित होने अर्थात ऑडिट के बैठक के दिन समस्त अभिलेख सहित बैठक में प्रस्तुत न होने के कारण ग्राम पंचायत सोशल ऑडिट की गरिमा तारतार हो रही है l </div>
<div> </div>
<div>कुछ ग्राम पंचायत में आवश्यक अभिलेख नहीं देखे जाते हैं इसकी वास्तविकता की पुष्टि यदि पंचायत भवन का सीसी पुटेज खंगाला जाए तो कितने लोग आए क्या-क्या कागज ग्राम पंचायत के प्रधान ने प्रस्तुत किया किस प्रकार सोशल ऑडिट संपन्न की गई यह सब दूध का दूध पानी का पानी सामने आ जाएगा सोशल ऑडिट निरस्त होने के पीछे क्या कारण है कभी ग्राम प्रधान सोशल ऑडिट निरस्त करते हैं तो कभी कोऑर्डिनेटर तो कभी अभिलेख के न मिलने से ऑडिट निरस्त होती है कुशल सोशल ऑडिट कब होगी संपन्न कब इसके जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाकर आदर्श सोशल ऑडिट संपन्न कराएंगे सूत्र बताते हैं कि कुछ ग्राम पंचायत में बिना भ्रमण किये बैठक के ही दिन संपूर्ण कोरम पूरा कर लिया जाता हैl </div>
<div> </div>
<div>यह सब सवालिया निशान कब समाप्त होगा आदर्श सोशल ऑडिट से यह शासन प्रशासन के लिए एवं संबंधित विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है ग्राम पंचायत सोशल ऑडिट एक निदेशालय की एक निष्पक्ष इकाई  है फिर भी यदि विभाग द्वारा इसके निष्पक्षता को प्रकाशित करने हेतु जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह एवं उनके कार्यालय के कार्यरत कर्मचारी मुकेश सोनकर, ईश्वर चंद्र वर्मा एवं रामप्रकाश से कोई जानकारी पूछी जाती है तो यह लोग फोन उठाकर जानकारी देने से लगातार कतराते हैं अथवा नंबर को ब्लैक लिस्ट में डाल देते हैं</div>
<div> </div>
<div>क्या किसी सरकारी कार्यालय के कर्मचारियों को जानकारी न देने का कोई शासनादेश प्राप्त है इतना ही नहीं जिला विकास अधिकारी के अजब गजब के कारनामे इनके बस्ती जनपद में आगमन से आज तक चर्चा का विषय बनी हुई है यह पहले जिला विकास अधिकारी हैं जो सोशल ऑडिट पर लगातार बैठक करते हुए दिलचस्पी बनाये हुए है कभी अपने कार्यालय पर बैठक करते हैं कभी रविवार को अपने आवास पर यह कहीं ना कहीं एक गहरा विषय है यह पहले जिला विकास अधिकारी हैं जो सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर पर वसूली का आरोप लगाते हैं और कोऑर्डिनेटर एक संविदा कर्मचारी होने के नाते अपने ऊपर लगे आरोप को निराधार साबित करने का प्रयास करता हैl </div>
<div> </div>
<div>लेकिन एक अच्छे अधिकारी द्वारा अपने विभाग के कर्मचारियों पर मिथ्या आरोप लगाना गलत साबित होता है एक संविदा कॉर्डिनेटर द्वारा ग्राम पंचायत सोशल ऑडिट में एक करोड़ से अधिक के ग्राम पंचायत के खर्च का ऑडिट करके हिसाब किताब निदेशालय की वेबसाइट पर अपलोड करता है और वह निदेशालय मान्य करता है तो 12000 के संविदा कर्मी पर इतना बड़ा सवालिया निशान क्यों लगता है रविवार को या अवकाश के दिन आवास पर मुलाकात मीटिंग क्यों बुलाई जाती है अवकाश के दिन सोशल ऑडिट क्यों संपन्न कराई जाती है यह सब कहीं ना कहीं निदेशालय के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है अब देखना है इसका समाधान कैसे होता है l</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Feb 2025 18:04:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह पर  सचिव सुधीर सिंह पड़ रहे भारी</title>
                                    <description><![CDATA[- प्रमुख सचिव (पंचायत )से शिकायत होने के बाद भी जिला विकास अधिकारी ने मामले को किया रफा दफा ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148619/secretary-sudhir-singh-falling-heavy-on-district-development-officer-ajay"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/02.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के विकासखण्ड गौर में लगातार 06 वर्षों से तैनात ग्राम विकास अधिकारी सुधीर सिंह डी० डी० ओ० अजय कुमार सिंह पर भारी पड़ रहे हैं । सचिव का अन्य ब्लाक में स्थानांतरण करना जिला विकास अधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के लिए चुनौती बना हुआ है और यह बहुत बड़े भ्रष्टाचार का संकेतक है । स्थानांतरण नीति को ताख पर रख कर की गई तैनाती को लेकर पी जी पोर्टल पर शिकायत किया गया था । पी जी पोर्टल पर शिकायत होने पर अपर प्रमुख सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव - पंचायती राज विभाग को मामले की जांच मिली थी ।</div>
<div> </div>
<div>अपर प्रमुख सचिव / प्रमुख सचिव / सचिव - पंचायती राज विभाग ने निर्देशक पंचायती राज को जांच कर कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिया था । निर्देशक पंचायती राज ने उक्त प्रकरण में डीपीआरओ  (जिला पंचायत राज अधिकारी बस्ती ) रतन कुमार से जांच आख्या मांगी थी डीपीआरओ ने जांच किया तो लेकिन जांच में पता चला कि सचिव सुधीर सिंह ग्राम विकास अधिकारी है । जो हमारे कार्य क्षेत्र में नही आता है । ग्राम विकास अधिकारियों (सचिवों ) का स्थानांतरण डीडीओ ( जिला विकास अधिकारी ) ही कर सकते हैं । डीपीआरओ मात्र ग्राम पंचायत अधिकारियों ( सचिवों ) का ही स्थानांतरण कर सकते हैं ।</div>
<div> </div>
<div>डीपीआरओ ने दिनांक - 28 -09-2024 को डीडीओ ( जिला विकास अधिकारी बस्ती ) को नोटिस जारी कर शासनादेश के खिलाफ तैनात सचिव / ग्राम विकास अधिकारी सुधीर कुमार सिंह के मामले को अवगत कराया था कि उक्त प्रकरण आपके विभाग से संबंधित है । उक्त प्रकरण में जांच कर कार्रवाई करने के लिए कहा था । डीपीआरओ रतन कुमार ने डीडीओ को रिसीव कराये गये नोटिस की सूचना निर्देशक पंचायती राज को अवगत कराया था । निर्देशक पंचायत राज ने डीपीआरओ के द्वारा जांच में उपलब्ध कराये गये नोटिस को पी जी पोर्टल पर अपलोड करके दिनांक - 10-10-2024 को मामले का निस्तारण कर दिया था ।</div>
<div> </div>
<div>डीपीआरओ रतन कुमार के द्वारा जारी नोटिस पर डीडीओ ने कोई कार्रवाई नहीं किया है और सचिव / ग्राम विकास अधिकारी सुधीर सिंह का गौर ब्लाक के अलावा अन्य ब्लाक में स्थानांतरण करने के बजाएं स्थानांतरण नीति का हवाला देकर डीडीओ ने सुधीर कुमार सिंह बचाने में पूरी ताकत झोंक दिया है । अब आप सोच सकते हैं कि योगी सरकार में अधिकारी / कर्मचारी कितने ईमानदारी / जिम्मेदारी / नियमों से अपने कार्यों का निर्वाहन कर रहे हैं । आखिर क्यों शासनादेश / स्थानांतरण नीति का पालन करने में जिम्मेदार अधिकारी कन्नी काट रहे है जिसको लेकर योगी सरकारी की छवि धूमिल हो रही है । </div>
<div> </div>
<div>सूत्रों की माने तो विकास भवन बस्ती में डीपीआरओ एवं डीडीओ से सम्बंधित अधिकारी के कार्यालय में पुरानी कहावत सिद्ध हो रही है कि *पैसा फेकों तमाशा देखों* अर्थात जो सचिव संम्बंधित अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत बाबू को मनचाहा सुविधा शुल्क दे दे उसके लिए कोई शासनादेश / स्थानांतरण नीति नही लागू है और जो सचिव संम्बधित कार्यालय में कार्यरत बाबू को मनचाहा सुविधा शुल्क न दे उसके लिए शासनादेश / स्थानांतरण नीति लागू है । अब देखना है कि तेज तर्रार मुख्य विकास अधिकारी जय देव सीएस के द्वारा मामले को संज्ञान में लेकर सचिव सुधीर सिंह का स्थानांतरण कर पाते हैं या मामला लीपापोती तक ही सीमित रहेगा ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 18:56:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिले में चल रही सोशल ऑडिट से 10 मिनट में फरार हुए जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  <strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में आज 20 जनवरी 2025 को सोशल आडिट टीम द्वारा विभिन्न ब्लाकों में सोशल ऑडिट संपन्न की गई सूत्रों द्वारा पता चला कि जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह खंड विकास अधिकारी और सचिव के माध्यम से सोशल ऑडिट से धन की चाहत में संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव से मिलने का  फरमान फोन से जारी करते हैं जिससे सोशल ऑडिट की पारदर्शिता तारतार हो रही है और कोऑर्डिनेटर पर भी मीटिंग में  व्यवस्था करने के लिए सांकेतिक भाषा के द्वारा निर्देशित किया जाता है। </div>
<div>वर्तमान में चल रही सोशल ऑडिट मैं ग्राम प्रधानों का</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147633/district-development-officer-ajay-kumar-singh-absconded-within-10-minutes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250120-wa0198.jpg" alt=""></a><br /><div> <strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में आज 20 जनवरी 2025 को सोशल आडिट टीम द्वारा विभिन्न ब्लाकों में सोशल ऑडिट संपन्न की गई सूत्रों द्वारा पता चला कि जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह खंड विकास अधिकारी और सचिव के माध्यम से सोशल ऑडिट से धन की चाहत में संबंधित ग्राम पंचायत के प्रधान और सचिव से मिलने का  फरमान फोन से जारी करते हैं जिससे सोशल ऑडिट की पारदर्शिता तारतार हो रही है और कोऑर्डिनेटर पर भी मीटिंग में  व्यवस्था करने के लिए सांकेतिक भाषा के द्वारा निर्देशित किया जाता है। </div>
<div>वर्तमान में चल रही सोशल ऑडिट मैं ग्राम प्रधानों का शोषण जिला विकास अधिकारी द्वारा बखूबी किया जा रहा है यह जानकारी तमाम ऑडिट के ग्राम पंचायत के  ग्राम प्रधानों से प्राप्त हो रही है अभी कुछ दिन पूर्व जिला विकास अधिकारी दुबौलिया ब्लाक के आरजीडूही धरमूपुर के ग्राम प्रधान और सचिव को ऑडिट कोऑर्डिनेटर सहित तलब करते हुए कमरे में कैद हुए थे जिससे सोशल ऑडिट कार्य वहां पर काफी विलंब से संपन्न हुआ। </div>
<div> </div>
<div>आज जिला विकास अधिकारी अजय कुमार सिंह बस्ती सदर के ग्राम पंचायत कटया में  पहुंच कर सोशल ऑडिट को केवल खाना पूर्ति कर समापन किये जिससे त्रुटि पूर्ण सोशल ऑडिट का होना संभव है जब जिला स्तर के अधिकारी सोशल ऑडिट की गरिमा को महत्त्व न देकर खानापूर्ति कर रहे हैं तो सवालिया निशान लगना लाजमी है मीडिया के उपस्थित होते ही रफू चक्कर हुए जिला विकास अधिकारी सोशल ऑडिट चंद्र मिनट में सिमट गई सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर सुधारानी जिला विकास अधिकारी के आने तक प्रतीक्षा करती रही की साहब आए तो बैठक शुरू किया जाए सब यूं आये यूं चले गए लोग उनकी बातों को सुन जान ही नहीं पाए ऐसे में जनता सोशल ऑडिट के महत्व को समझ ही नहीं पाई ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 18:35:28 +0530</pubDate>
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