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                <description>trump RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हमसे तेल खरीदना बंद नहीं करेगा भारत…ट्रंप के दावे पर रूस का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. लावरोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत भी इस मुद्दे पर बयान दे चुका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव का यह बयान उस समय आया जब भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर सफाई दी गई. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए भारत स्रोतों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169281/india-will-not-stop-buying-oil-from-us%E2%80%A6-russias-response"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/trump.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. लावरोव ने कहा कि रूस और भारत के बीच हुए तेल समझौतों पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत भी इस मुद्दे पर बयान दे चुका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव का यह बयान उस समय आया जब भारत की ओर से भी इस मुद्दे पर सफाई दी गई. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन को स्थिर रखने के लिए भारत स्रोतों में विविधता लाता रहेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस के साथ भारत के सभी समझौते पहले की तरह जारी हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था. बाद में यह टैरिफ वापस ले लिया गया. हालांकि अमेरिका ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल की खरीद दोबारा शुरू की, तो 25% टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत से रूसी तेल खरीद को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह दावा सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं. ट्रंप के अलावा किसी और ने ऐसा नहीं कहा है. लावरोव के मुताबिक, रूस और भारत के बीच हुए तेल और अन्य समझौते पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन पर कोई खतरा नहीं है.</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले हफ्ते ट्रंप ने भारत के साथ एक फ्रेमवर्क व्यापार समझौते की घोषणा की थी. उसी दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमति जताई है. अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल बेचकर जो पैसा कमाता है, उसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है.</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाए</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह भारत और ब्रिक्स देशों के साथ रूस के व्यापार, निवेश और सैन्य सहयोग को रोकने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका टैरिफ, प्रतिबंध और दबाव वाले कदमों के जरिए दुनियाभर में दबदबा बनाए रखना चाहता है, लावरोव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के आने के बाद यह नीति और खुलकर दिख रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 23:01:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जब तक मैं अमेरिका का राष्ट्रपति हूं, ताइवान सेफ है' ट्रंप का दावा- जिनपिंग ने किया उनसे वादा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया है कि उनके कार्यकाल के दौरान चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा. ट्रंप ने यह बयान फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में दिया. उन्होंने कहा, ‘शी जिनपिंग ने मुझे कहा कि जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, वो ताइवान पर आक्रमण नहीं करेंगे. मैंने उनका आभार जताया, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन बहुत धैर्यवान है.’</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब वे रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की तैयारी कर रहे थे.</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153981/as-long-as-i-am-the-president-of-america-taiwan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/jinping_trump_news-2025-08-be1472e8957c4edfbe85b9e32e7550cc.webp" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज ।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया है कि उनके कार्यकाल के दौरान चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा. ट्रंप ने यह बयान फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में दिया. उन्होंने कहा, ‘शी जिनपिंग ने मुझे कहा कि जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, वो ताइवान पर आक्रमण नहीं करेंगे. मैंने उनका आभार जताया, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि चीन बहुत धैर्यवान है.’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब वे रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की तैयारी कर रहे थे. ट्रंप और शी की दूसरी कार्यकाल में यह पहली पक्की बातचीत जून में हुई थी. अप्रैल में भी ट्रंप ने दावा किया था कि शी ने उन्हें फोन किया था, हालांकि उन्होंने तारीख नहीं बताई थी. इधर चीन ने अमेरिकी प्रशासन को दोहराया है कि ताइवान मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में सबसे ‘संवेदनशील और अहम’ विषय है. वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा, ‘अमेरिका को वन-चाइना पॉलिसी पर कायम रहना चाहिए और ताइवान से जुड़े मामलों को सावधानी से संभालना चाहिए.’</div>
<div style="text-align:justify;">चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसे अपने में मिलाने का संकल्प दोहराता रहा है, भले ही इसके लिए बल प्रयोग क्यों न करना पड़े. दूसरी ओर ताइवान चीन की दावेदारी को सख्ती से खारिज करता है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप के बयान पर ताइवान सरकार ने आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के वरिष्ठ सांसद वांग टिंग-यू ने लिखा, ‘हम अपने बड़े सहयोगी का समर्थन पाकर आभारी हैं. लेकिन सुरक्षा केवल दुश्मन के वादों या दोस्तों की मदद पर निर्भर नहीं हो सकती. अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करना ही सबसे महत्वपूर्ण है.’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिका भले ही ताइवान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी है, लेकिन उसके साथ आधिकारिक राजनयिक रिश्ते नहीं रखता. यही वजह है कि ताइवान अपनी सुरक्षा रणनीति में आत्मनिर्भरता और सहयोगियों दोनों पर जोर दे रहा है. ट्रंप का यह दावा न केवल वॉशिंगटन और बीजिंग के रिश्तों पर असर डाल सकता है, बल्कि ताइवान स्ट्रेट में पहले से मौजूद तनाव को भी नई दिशा दे सकता है.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 12:44:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Media]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> काम ना आई ट्रंप से गहरी दोस्ती </title>
                                    <description><![CDATA[<div>ना तो मोदी जी की ट्रंप के साथ गहरी दोस्ती ही काम आई और ना ही विदेशों में बजता भारत का डंका ही रोक सका ट्रंप को भारतीय स्वाभिमान का मजाक उड़ाने से, 5 फरवरी को दोपहर करीब 2 बजे अमेरिकी वायुसेना का सी-17 विमान अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा और उसमें से उतरे हथकड़ियों व बेड़ियों में जकड़े 104 भारतीय अप्रवासी नागरिक जो अवैध रूप से अमरीका में रह रहे थे, जिन्हे ट्रंप सरकार ने सत्ता में आते ही डिपोर्ट कर दिया। अमेरिकन सैन्य विमान शाम 5 बजकर 32 मिनट पर इन लोगों को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148217/%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/download-(11).jpg" alt=""></a><br /><div>ना तो मोदी जी की ट्रंप के साथ गहरी दोस्ती ही काम आई और ना ही विदेशों में बजता भारत का डंका ही रोक सका ट्रंप को भारतीय स्वाभिमान का मजाक उड़ाने से, 5 फरवरी को दोपहर करीब 2 बजे अमेरिकी वायुसेना का सी-17 विमान अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा और उसमें से उतरे हथकड़ियों व बेड़ियों में जकड़े 104 भारतीय अप्रवासी नागरिक जो अवैध रूप से अमरीका में रह रहे थे, जिन्हे ट्रंप सरकार ने सत्ता में आते ही डिपोर्ट कर दिया। अमेरिकन सैन्य विमान शाम 5 बजकर 32 मिनट पर इन लोगों को छोड़ने के बाद वापिस लौट गया। विमान में सभी यात्रियों के पांव, हाथ व कमर बांधकर रखे गए थे, लेकिन एयरपोर्ट पर उतारने से पहले विमान में उनके बंधन खोल दिए गए थे। अमेरिका से वापिस भेजे गए 104 लोगों  में 23 महिलाएं, 12 बच्चे व 79 पुरुष हैं। </div>
<div> </div>
<div>इनमें 33 गुजरात के , 33 हरियाणा के, 30 पंजाब के, 2 चंडीगढ के, 2 उत्तर प्रदेश के और 2 महाराष्ट्र के हैं। इन सभी की वेरिफिकेशन कर इनके घर पहुंचा दिया गया। निस्संदेह पहले भी विदेशों में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों की देश वापसी होती रही है परन्तु इस तरह की बदसलूकी और भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नीचा दिखाने की कोशिश किसी ने नही की जैसी मोदा जी के खास दोस्त डोनाल्ड ट्रंप ने की है। हमारे से अच्छा तो दक्षिण अमेरिका का छोटा सा देश कोलंबिया निकला, जिसने अपने नागरिकों की इस तरह बेड़ियों में वतन वापसी का विरोध कर अपना विमान भेज अपने नागरिकों की गरिमापूर्ण वतन वापसी करवाई।</div>
<div> </div>
<div>अमृतसर एयरपोर्ट पर हुई इस घटना से मीडिया को बिल्कुल दूर रखा गया परन्तु कुछ लोगों ने इस घटना की वीडियों और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। आज अमेरीकी डॉलर 87 रूपए से ऊपर चल रहा है। कनाडाई डॉलर 61 रूपए से ऊपर और आस्ट्रेलियाई डॉलर 55 के पास पहुंच गया है परन्तु मेनस्ट्रीम मीड‍िया में इन मुद्दों पर कोई बहस या चर्चा नही होती। कोई इन मुद्दों पर बात करता है तो उसे देशद्रोही और सनातन का विरोधी बता दिया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>अमेरीकी मिडिया के अनुसार 18000 अवैध रूप से  रह रहे भारतीयों की पहचान की गई है। अब देखना होगा हमारी सरकार उनकी बाइज्जत वापसी करवाती है या उन्हें भी इसी तरह खूंखार अपराधियों की तरह बेड़ियों में बांध कर वापिस भेजा जाएगा। ट्रम्प के सत्ता संभालने के पहले 11 दिन में ही 25 हजार से ज्यादा अवैध अप्रवासी हिरासत में लिए गए। ट्रम्प की इमिग्रेशन एंड कस्टम इंफोर्समेंट टीम ने 12 राज्यों में छापे मारे। रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर छापे रिपब्लिकन राज्यों मारे गए। जिनमें 1700 अवैध अप्रवासी भारतीयों को हिरासत में लिया गया है।</div>
<div> </div>
<div>इस दौरान मेक्सिको बॉर्डर से घुसपैठ की घटनाएं 94 प्रतिशत तक घटी हैं। बाइडेन के कार्यकाल में इस साल 1 जनवरी से 19 जनवरी के बीच हर दिन घुसपैठ की औसतन 2087 घटनाएं हुईं जबकि ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद 20 जनवरी से 31 जनवरी तक यह आंकड़ा 126 पर आ गया। अनुमान के मुताबिक अमेरिका में लगभग 7.25 लाख अवैध भारतीय अप्रवासी रहते हैं। यह आंकड़ा अवैध प्रवासियों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। पहले स्थान पर मेक्सिको और दूसरे पर अल साल्वाडोर के अप्रवासी हैं।</div>
<div> </div>
<div>पिछले महीने भारत सरकार ने कहा था कि अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे भारतीय नागरिकों को वापिस लेने के मामले में भारत हमेशा तैयार रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि भारत यह जांच कर रहा है कि अमेरिका में कितने भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं और इन्हें वापिस भेजा जा सकता है या नहीं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने टेक्सास के एल पासो और कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में हिरासत में रखे गए 5 हजार से अधिक अवैध अप्रवासियों को भी उनके देशों में भेजने के लिए सैन्य विमानों की मदद देनी शुरू कर दी है।</div>
<div> </div>
<div>अब तक सैन्य विमानों के जरिए अमेरिका से भारत, ग्वाटेमाला, पेरू और होंडुरास के प्रवासियों को वापिस भेजा गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार अमेरिका से वापिस भेजे गए सभी अप्रवासीयों का अमेरिका में बायोमीट्रिक स्कैन किया गया है। ये सभी अप्रवासी भविष्य में कभी अमेरिका नहीं जा पाएंगे। यहां तक की अगर ये वैध डॉक्यूमेंट्स के साथ भी अमेरिका जाने की कोशिश करेंगे, तो इन्हें वीजा नहीं मिल पाएगा। यहां यह बताना आवश्यक है कि अमेरिका की वीजा पॉलिसी को कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन समेत दुनिया के 20 देश फॉलो करते हैं।</div>
<div> </div>
<div>इसलिए इन अप्रवासियों को अब इन सभी देशों में कभी एंट्री नहीं मिल पाएगी। एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक भारत लौटे लोगों पर वैसे तो भारत में कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा क्योंकि उन्होंने अमेरिका की जमीन पर अपराध किया है भारत में नही परन्तु इन लोगों के अमेरिका पहुंचने के तरीकों की जांच पुलिस जरूर कर सकती है। इसके अलावा अगर किसी अप्रवासी ने डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने के लिए पैसा दिया है तो उन लोगों पर आयकर अधिनियम 1961 के तहत ईडी कार्रवाई कर सकती है।</div>
<div> </div>
<div>अगर पासपोर्ट में हेराफेरी का मामला हुआ तो नागरिकता अधिनियम 1955 और पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत कार्रवाई हो सकती है। वहीं भारत के बॉर्डर को अवैध रूप से पार करने वालों पर इमिग्रेशन अधिनियम 1983 के तहत कार्रवाई होगी या अगर भारत से भागने के बाद अवैध रूप से संपत्ति देश के बाहर ले गए तो सीमा शुल्क अधिनियम 1962 के तहत उन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 17:22:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या अमेरिका के  ' मोदी ' साबित होंगे ट्रम्प ?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>माननीय, सम्माननीय डोनाल्ड ट्रम्प अब अमेरिका के नए राष्ट्रपति है।  ट्रम्प महोदय के शपथ  ग्रहण के बाद ये अटकलें लगना शुरू हो गयीं हैं  कि  वे आज नहीं तो कल अमेरिका के मोदी साबित होंगे,क्योंकि ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री प्रातस्मरणीय माननीय श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जीकी प्राथमिकताएं लगभग एक जैसी है। उनकी आक्रामकता ,उनकी सियासत में अदावती शैली मोदी जी की राजनीति से बहुत कुछ मेल खाती है। ट्रम्प के लिए अमेरिका के लिए कुछ नया दिखने का ये अंतिम अवसर है। अमेरिकी ट्रम्प को और  मौक़ा नहीं दे सकता।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में 'कैच एंड</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147608/will-trump-prove-to-be-americas-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/trump-1.jpg" alt=""></a><br /><p>माननीय, सम्माननीय डोनाल्ड ट्रम्प अब अमेरिका के नए राष्ट्रपति है।  ट्रम्प महोदय के शपथ  ग्रहण के बाद ये अटकलें लगना शुरू हो गयीं हैं  कि  वे आज नहीं तो कल अमेरिका के मोदी साबित होंगे,क्योंकि ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री प्रातस्मरणीय माननीय श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जीकी प्राथमिकताएं लगभग एक जैसी है। उनकी आक्रामकता ,उनकी सियासत में अदावती शैली मोदी जी की राजनीति से बहुत कुछ मेल खाती है। ट्रम्प के लिए अमेरिका के लिए कुछ नया दिखने का ये अंतिम अवसर है। अमेरिकी ट्रम्प को और  मौक़ा नहीं दे सकता।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में 'कैच एंड रिलीज' नीति को समाप्त करने का वादा करते हुए कहा कि वे दक्षिणी सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करेंगे और लाखों अवैध अप्रवासियों को वापस भेजेंगे। कैच एंड रिलीज शब्द का इस्तेमाल अक्सर अप्रवासियों को अदालत की तारीख तक हिरासत में रखने के बजाय रिहा करने की नीति के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक विशिष्ट कानून या नीति नहीं है और अब आम प्रथा नहीं है, जिसे ट्रंप खत्म करने की बात कह रहे हैं। उनके आदेश का विवरण भी स्पष्ट नहीं है।</p>
<p>भारत में भी अवैध प्रवासियों को लेकर मोदी सरकार लगातार जूझ रही है लेकिन भारत में अभी किसी भी सीमा पर आपातकाल की घोषणा नहीं की हई है। लेकिन ट्रम्प महोदय से प्रेरणा लेकर भारत में भी ऐसा कदम उठाया आ सकता है। कोई माने या न माने ट्रम्प और मोदी जी एक-दुसरे के ख्यालों  [ आइडियाज ] की या तो नकल करते हैं या  एक-दुसरे को प्रेरित करते हैं। दोनों की बातों में ' हवा -हवाई ' तत्व कॉमन है।</p>
<p>ट्रंप ने पनामा नहर को वापस लेने का भी वादा करते हुए कहा कि इस नहर के निर्माण के दौरान 38,000 अमेरिकियों की मौत हुई और चीन नहर का संचालन कर रहा है। सच्चाई ये है कि अमेरिकी निर्माण में 5,600 लोगों की मौत हुई थी और ये कैरिबियन के मजदूर थे। पनामा नहर के प्रशासक ने ट्रंप के इस दावे का खंडन किया है कि चीन नहर का संचालन कर रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा है कि इन बंदरगाहों पर काम कर रही चीनी कंपनियां हांगकांग के एक कंसोर्टियम का हिस्सा थीं, जिसने 1997 में बोली प्रक्रिया जीती थी। अमेरिकी और ताइवान की कंपनियां भी नहर के किनारे अन्य बंदरगाहों का संचालन कर रही हैं।मुमकिन है की भविष्य में भारत के प्रधानमंत्री जी भी चीन को आँखेंदीखते हुए चीन से भारत की हथियाई गयी  जमीन पर अपना हक जताने लगें।</p>
<p> डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में मुद्रास्फीति 'रिकॉर्ड स्तर' पर पहुंची और ऐसा अत्यधिक खर्च और बढ़ती ऊर्जा कीमतों से हुआ है। ये बात सही है कि अमेरिका में मुद्रास्फीति 2022 की गर्मियों में 9.1 फीसदी के चार दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी लेकिन देश में सबसे अधिक मुद्रास्फीति दर जून 1920 में 23.7% थी।संयोग से ये सब भारत में भी हुआ है किन्तु मोदी जी को ये सुविधा हासिल नहीं है कि  वे भारत में मुद्रास्फीति के लिए किसी और को जिम्मेदार ठहरा सकें ,क्योंकि पिछले 11  साल से वे खुद ही सत्ता में हैं ,मोदी जी इसके एवज हमेशा नेहरू-गांधी परिवार को लपेटते रहते हैं।</p>
<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने 'खतरनाक अपराधियों' को शरण और सुरक्षा दी है, जिनमें से कई 'जेलों और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों' से अवैध रूप से अमेरिका में आए हैं। एक्सपर्ट इस दावे को ठीक नहीं मानते हैं। इनका कहना है कि कुछ अमेरिकी शहरों में अप्रवासियों की आमद हुई है लेकिन ज्यादातर कानूनी तौर पर, वर्क परमिट या अदालतों में उनके मामलों पर काम होने तक रहने के प्राधिकरण के साथ आए हैं।</p>
<p>ज्यादातर रिसर्च ये बताती हैं कि अप्रवासी, अमेरिका में जन्मे लोगों की तुलना में अपराध करने की कम संभावना रखते हैं। पर कुछ संस्थाएं हैं जो  मानती  है कि अपराध बढ़ने की वजह अप्रवासी नहीं हैं।भारत में भी मोदी जी और उनकी सरकार मानती  है की देश  में बढ़ते  अपरधों  की वजह बांग्लादेशी  प्रवासी  है। मशहूर फिल्म अभिनेता सैफ अली खान पर हमले को इसका उदाहरण बताया जा रहा है।</p>
<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में स्वास्थ्य सेवा पर अधिक पैसा खर्च करता है। उनका यह दावा सच है। अमेरिका प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य सेवा पर ज्यादातर देशों ज्यादा खर्च करता है। ट्रम्प की ही तरह भारत के प्रधानमंत्री  मोदी जी कहते हैं कि आरोग्य के मामले में उनकी सरकार की 'आयुष्मान योजना ' दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। अब कौन सच बोल रहा है ,कौन झूठ केवल ऊपर वाला ही जानता है।</p>
<p>अमेरिका के नए और 47  वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ये सुविधा नहीं है कि  वे देश के पहले राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन को देश की मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। ये सुविधा केवल भारतीय प्रधानमंत्री की है ,वे आज भी देश  की बदहाली के लिए अपने 11  साल के कुशासन को जिम्मेदार नहीं मानते,वे इसके लिए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित  जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार मानते हैं। देखना ये है कि  ट्रम्प साहब के आने के बाद दुनिया  कितनी  बदलती है ।</p>
<p> दुनिया में द्वन्द युद्ध जारी हैं। अमेरिका के सामने इन्हें समाप्त करने की चुनौती है। बहरहाल हमारा देश दूसरी बार ट्रम्प युग का और तीसरी बार मोदी युग का सामना कर रहा है। दोनों कि युग का अवसान एक साथ 2029  में होगा। इस मौके पार चचा ग़ालिब की बहुत याद आती ह।  उन्होंने एक जगह लिखा था  कि -<br />था बहुत शोर कि ग़ालिब कि उड़ेंगे पुर्जे देखने हम भी गए ,पै ये तमाशा न हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 16:27:32 +0530</pubDate>
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