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                <title>PM Modi - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>असहमति पर ‘दिमागी नक्सल’ का ठप्पा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत जैसे बहुलतावादी लोकतंत्र में राजनीतिक भाषा केवल शब्दों का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज के सार्वजनिक वातावरण को प्रभावित करती है। सत्ता में बैठे लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द प्रशासनिक संस्थाओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज और आम जनता की सोच पर असर डालते हैं। इसलिए जब किसी राजनीतिक असहमति, विचारधारा या सरकार की आलोचना के संदर्भ में ‘दिमागी नक्सल’ जैसा शब्द सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनता है तो इसे महज राजनीतिक बयान मानकर छोड़ देना उचित नहीं होगा। इस शब्द के राजनीतिक अर्थ, संवैधानिक सीमाओं और लोकतांत्रिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार आवश्यक है।<br /><br />स्वतंत्रता दिवस के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185965/dissent-labeled-as-mindless-naxal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001039405.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत जैसे बहुलतावादी लोकतंत्र में राजनीतिक भाषा केवल शब्दों का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज के सार्वजनिक वातावरण को प्रभावित करती है। सत्ता में बैठे लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द प्रशासनिक संस्थाओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज और आम जनता की सोच पर असर डालते हैं। इसलिए जब किसी राजनीतिक असहमति, विचारधारा या सरकार की आलोचना के संदर्भ में ‘दिमागी नक्सल’ जैसा शब्द सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनता है तो इसे महज राजनीतिक बयान मानकर छोड़ देना उचित नहीं होगा। इस शब्द के राजनीतिक अर्थ, संवैधानिक सीमाओं और लोकतांत्रिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार आवश्यक है।<br /><br />स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के बाद देश में राजनीतिक बहस तेज हुई। सत्ता पक्ष की दृष्टि में यह उन वैचारिक प्रवृत्तियों के लिए इस्तेमाल किया गया शब्द है जो देश की एकता, विकास और सुरक्षा के विरुद्ध वातावरण बनाती हैं। विपक्ष और आलोचकों ने इसे सरकार से असहमति रखने वालों को बदनाम करने वाली भाषा बताया। इस विवाद का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि भारत इस समय युवाओं के आंदोलनों, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था, कथित प्रश्नपत्र लीक और शासन की जवाबदेही जैसे मुद्दों से भी जूझ रहा है।<br /><br />लोकतंत्र में सरकार की आलोचना और राष्ट्रविरोधी गतिविधि को एक ही श्रेणी में रखना गंभीर भूल होगी। भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है, हालांकि ये अधिकार युक्तिसंगत संवैधानिक प्रतिबंधों के अधीन हैं। अर्थात नागरिक को सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाने का अधिकार है, लेकिन हिंसा, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने या देश की संप्रभुता और अखंडता के विरुद्ध आपराधिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली कसौटी इसी सीमा को स्पष्ट रखने में है।<br /><br />भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों से संबंधित है। इसमें अलगाववादी गतिविधियों, सशस्त्र विद्रोह तथा ऐसी गतिविधियों को उकसाने वाले कृत्यों को गंभीर अपराध माना गया है। लेकिन कानून की व्याख्या सरकार की नीतियों अथवा प्रशासनिक कदमों की वैधानिक माध्यम से आलोचना को स्वतः इस अपराध की श्रेणी में नहीं रखती। यही अंतर लोकतांत्रिक विमर्श के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार का विरोध करना और देश के विरुद्ध हिंसक गतिविधि करना समान नहीं है।<br /><br />हालिया युवा आंदोलनों ने इस प्रश्न को और प्रासंगिक बनाया है। परीक्षा व्यवस्था, रोजगार और सरकारी जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए। 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के बाद पुलिस कार्रवाई तथा प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की। यह कदम इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण है कि विवादित घटनाओं का अंतिम निष्कर्ष राजनीतिक दावों से नहीं, बल्कि स्वतंत्र जांच और प्रमाणों से निकाला जाना चाहिए।<br /><br />यदि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की, पुलिस पर हमला किया या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन यदि सुरक्षा बलों ने आवश्यकता से अधिक या अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया तो उसकी भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब उसकी कसौटी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान नहीं, बल्कि उसके वास्तविक कृत्य और उपलब्ध साक्ष्य हों।<br /><br />समस्या तब गंभीर हो जाती है जब राजनीतिक बहस में व्यक्ति के कृत्य से अधिक उसके विचार और पहचान को निशाना बनाया जाता है। ‘दिमागी नक्सल’ जैसा शब्द यदि वास्तविक हिंसक उग्रवाद और सामान्य राजनीतिक असहमति के बीच अंतर मिटाने लगे तो सार्वजनिक विमर्श अधिक स्पष्ट होने के बजाय अधिक ध्रुवीकृत हो सकता है। किसी व्यक्ति के विचार सरकार को अप्रिय हो सकते हैं, लेकिन केवल अप्रिय विचार किसी आपराधिक कृत्य का प्रमाण नहीं होते।<br /><br />भारत में विश्वविद्यालयों, मीडिया, नागरिक संगठनों और सामाजिक आंदोलनों की भूमिका इसी कारण महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र केवल चुनाव और संसद तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों में उठने वाले प्रश्न, पत्रकारों की पड़ताल, नागरिक समाज की आलोचना और युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतांत्रिक चेतना के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। युवाओं की प्रत्येक मांग सही हो, यह आवश्यक नहीं; लेकिन उनकी प्रत्येक मांग को सुनना और तथ्यों के आधार पर उत्तर देना शासन की जिम्मेदारी अवश्य है।<br /><br />इसी के साथ आंदोलनकारियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या सुरक्षा बलों पर हमला किसी लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा नहीं हो सकता। किसी आंदोलन का उद्देश्य कितना भी वैध क्यों न हो, हिंसक रास्ता उसकी नैतिक और लोकतांत्रिक वैधता को कमजोर करता है। इसलिए सरकार को संयम और प्रदर्शनकारियों को अनुशासन—दोनों की आवश्यकता है।<br /><br />संसद की कार्यवाही भी इसी व्यापक संवाद-संकट का संकेत देती है। हालिया मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव तथा व्यवधानों के कारण कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपेक्षित चर्चा प्रभावित हुई। संसद का मूल उद्देश्य ही असहमति को बहस में बदलना है। यदि सड़क पर आंदोलन और संसद के भीतर व्यवधान दोनों बढ़ते जाएं तो यह केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि संस्थागत संवाद की कमजोर होती क्षमता का संकेत भी माना जाना चाहिए।<br /><br />सत्ता पक्ष को समझना होगा कि आलोचना लोकतंत्र की बीमारी नहीं है। सरकार की नीतियों की समीक्षा, प्रशासनिक निर्णयों पर प्रश्न और सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही मांगना नागरिक जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है। दूसरी ओर विपक्ष को भी यह स्वीकार करना होगा कि हर सरकारी निर्णय को लोकतंत्र-विरोधी बताना उतना ही नुकसानदेह है। लोकतांत्रिक राजनीति में आरोप से अधिक महत्वपूर्ण प्रमाण और नारे से अधिक महत्वपूर्ण नीति-विमर्श है।<br /><br />राष्ट्रवाद को भी सरकार और राष्ट्र के बीच अंतर स्पष्ट रखते हुए समझना होगा। राष्ट्र केवल वर्तमान सरकार का नाम नहीं है। राष्ट्र संविधान, नागरिकों, संस्थाओं, विविध भाषाओं-संस्कृतियों और साझा भविष्य का व्यापक रूप है। कोई नागरिक सरकार की किसी नीति का विरोध करते हुए भी देश और संविधान के प्रति पूरी निष्ठा रख सकता है। उसी प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वास्तविक खतरों की उपेक्षा भी नहीं की जा सकती। यदि कोई संगठन सचमुच हिंसक उग्रवाद, सशस्त्र विद्रोह या अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्त है तो राज्य को कठोर कार्रवाई करनी ही चाहिए। लेकिन ऐसी कार्रवाई का आधार राजनीतिक लेबल नहीं, प्रमाण और कानून होना चाहिए।<br /><br />‘दिमागी नक्सल’ विवाद इसलिए केवल एक शब्द का विवाद नहीं है। यह उस बड़े प्रश्न से जुड़ा है कि भारत अपने असहमत नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहता है। क्या आलोचना का उत्तर तर्क से दिया जाएगा या राजनीतिक ठप्पे से? क्या हिंसक गतिविधि और वैचारिक असहमति के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाएगा? क्या पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारी हिंसा दोनों की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या संसद जनता के असंतोष को लोकतांत्रिक संवाद में बदलने की अपनी भूमिका निभाएगी?<br /><br />लोकतंत्र की शक्ति सर्वसम्मति में नहीं, असहमति को संभालने की क्षमता में होती है। मजबूत लोकतंत्र वह नहीं जिसमें हर नागरिक सत्ता की प्रशंसा करे, बल्कि वह है जिसमें नागरिक कठिन प्रश्न पूछ सकें और सरकार उन प्रश्नों का तथ्यपूर्ण उत्तर देने के लिए तैयार रहे। यदि कोई आरोप गलत है तो तथ्य उसे गलत सिद्ध कर सकते हैं; यदि कोई नीति सही है तो उसके परिणाम उसका बचाव कर सकते हैं; और यदि कोई व्यक्ति वास्तव में कानून तोड़ता है तो न्यायिक प्रक्रिया उसके विरुद्ध कार्रवाई का रास्ता तय कर सकती है।<br /><br />इसलिए भारत को ऐसी राजनीतिक संस्कृति की आवश्यकता है जिसमें हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता हो, लेकिन शांतिपूर्ण असहमति के लिए पर्याप्त लोकतांत्रिक स्थान भी हो। सरकार को आलोचना से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं और नागरिकों को कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं। संस्थाओं को निष्पक्ष रहना होगा, संसद को संवाद का मंच बनना होगा और राजनीतिक दलों को शब्दों की जिम्मेदारी समझनी होगी।<br /><br />क्योंकि लोकतंत्र का सबसे बड़ा संकट वह नहीं जब नागरिक सरकार से प्रश्न पूछते हैं। वास्तविक संकट तब शुरू होता है जब नागरिक प्रश्न पूछने से डरने लगते हैं। राजनीतिक ठप्पे क्षणिक प्रभाव पैदा कर सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र को स्थायी शक्ति संविधान, स्वतंत्र संस्थाओं, प्रमाण आधारित सार्वजनिक विमर्श और असहमति के सम्मान से मिलती है। भारत की लोकतांत्रिक परंपरा की रक्षा इसी संतुलन से होगी कि राष्ट्र की सुरक्षा भी सुरक्षित रहे और नागरिक की आवाज भी।<br /><br /><strong>अवनीश कुमार गुप्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 20:50:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>सिवि में नशा मुक्ति का संकल्प लिया गया: पीएम मोदी ने वर्चुअल मध्यम से विकसित भारत निर्माण का आह्वान किया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में रविवार को भारत के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन का सजीव प्रसारण आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' के राष्ट्रीय शुभारंभ के अवसर पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक 'ड्रग-फ्री इंडिया' के संकल्प को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से दूर रहने तथा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184557/pledge-taken-for-de-addiction-in-civil-society-pm-modi-called"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/17856813414202.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में रविवार को भारत के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन का सजीव प्रसारण आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' के राष्ट्रीय शुभारंभ के अवसर पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक 'ड्रग-फ्री इंडिया' के संकल्प को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से दूर रहने तथा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को राष्ट्र निर्माण में लगाने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के उपरांत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने उपस्थित शिक्षक, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा भारत की रीढ़ हैं। स्वस्थ, जागरूक और चरित्रवान युवा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं। नशामुक्त युवा अपनी संपूर्ण ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को राष्ट्र के विकास एवं समाज के उत्थान में समर्पित कर सकता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कुलपति ने उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई तथा उन्हें स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों एवं समाज को भी नशामुक्त भारत के निर्माण हेतु प्रेरित करने का संकल्प दिलाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार, कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नीता यादव, विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. प्रकृति राय,अधिष्ठाता वाणिज्य प्रो. सौरभ अधिष्ठाता शैक्षणिक प्रो जितेंद्र सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 20:34:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों को प्रधानमंत्री की माफी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन छात्रों को माफ कर दिया है जिन्होंने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान उनके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। यह एक बहुत बड़ी बात है कि देश के प्रधानमंत्री पर जिन छात्रों ने गन्दी गन्दी गलियों का प्रयोग किया हो और उन्हें माफ़ कर दिया जाये। शायद प्रधानमंत्री ने उन्हें सुधरने का एक मौका दिया है। सार्वजनिक स्थान पर कैमरे के सामने इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग दंडनीय है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस तरह की भाषा को सहन नहीं किया जा सकता है। प्रशासन की तरफ़ से इस तरह के छात्रों की पहचान करके उन पर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184455/prime-ministers-apology-to-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन छात्रों को माफ कर दिया है जिन्होंने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान उनके लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। यह एक बहुत बड़ी बात है कि देश के प्रधानमंत्री पर जिन छात्रों ने गन्दी गन्दी गलियों का प्रयोग किया हो और उन्हें माफ़ कर दिया जाये। शायद प्रधानमंत्री ने उन्हें सुधरने का एक मौका दिया है। सार्वजनिक स्थान पर कैमरे के सामने इस तरह की अभद्र भाषा का प्रयोग दंडनीय है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस तरह की भाषा को सहन नहीं किया जा सकता है। प्रशासन की तरफ़ से इस तरह के छात्रों की पहचान करके उन पर कार्यवाही करने की तैयारी चल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी बीच सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक वीडियो आता है जिसमें वह कहते हैं कि मैं इन छात्रों पर कार्यवाही करने के पक्ष में नहीं हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैं इन्हें एक बार सुधरने का मौका देता हूं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो में कहा कि ये बचपन है और बचपन में गलतियां हो जाती हैं। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस घटना ने देशभर में तीखी राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी। एक ओर कई लोगों ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर यह तर्क दिया गया कि युवाओं का आक्रोश परीक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों का परिणाम है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा संदेश दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे छात्रों को कठोर दंड देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने उन्हें "भटके हुए बच्चे" बताते हुए समाज से भी क्षमा और संवेदनशीलता का व्यवहार अपनाने की अपील की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री का यह रुख केवल राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद यदि सरकार प्रतिशोध की भावना से बचते हुए संवाद का रास्ता चुनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसे लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत भी माना जा सकता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी स्पष्ट है कि क्षमा का अर्थ अभद्र भाषा या हिंसक व्यवहार को उचित ठहराना नहीं है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार उतना ही महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जितना कि उसकी मर्यादा बनाए रखना। यदि आंदोलन अपनी नैतिक शक्ति खो देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसकी वैध मांगें भी कमजोर पड़ सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे प्रकरण में न्यायपालिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचने की बात कही और जिन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें राहत देने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार जांच और आवश्यक प्रक्रिया जारी रह सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रधानमंत्री का यह कदम विपक्ष की उस आलोचना का जवाब भी माना जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सरकार पर छात्रों के प्रति कठोर रवैया अपनाने के आरोप लगाए जा रहे थे। वहीं सरकार समर्थकों का मानना है कि क्षमा का संदेश देकर प्रधानमंत्री ने यह दिखाया कि वे युवाओं को विरोधी नहीं बल्कि देश का भविष्य मानते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम से छात्रों और छात्र संगठनों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश निकलता है। लोकतांत्रिक आंदोलन तभी प्रभावी बनते हैं जब वे अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तथ्यों और मर्यादा के साथ आगे बढ़ें। अपशब्द</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंसा या व्यक्तिगत हमले किसी भी जनआंदोलन की नैतिक शक्ति को कम कर देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नीट पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगाया है। ऐसे में सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल आंदोलनों को नियंत्रित करना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना भी है। यदि सुधार लागू होते हैं और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी इस पूरे आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य पूरा माना जाएगा। अंततः यह घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सीख है। सरकार को आलोचना सुनने का धैर्य रखना चाहिए और नागरिकों को विरोध की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। क्षमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद और सुधार—यदि ये तीनों साथ चलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान हर परिस्थिति में बना रहे। प्रोटेस्ट होते रहते हैं लेकिन इस तरह की अभद्र भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह इन आंदोलनकारी छात्रों के लिए एक सबक है जिसको सीखना बहुत जरूरी है। हम जिस समाज में रहते हैं वहां इस तरह की अभद्र भाषा का कोई स्थान नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए आगे से ऐसा करने से पहले दस बार सोचना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 19:55:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारतीय पत्रकार के लहजे पर ट्रंप की टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="container-wrapper one_column"><div class="column-wrapper"><div class="control-wrapper"><div class="jg_paragraph"><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान एक भारतीय पत्रकार के बोलने के अंदाज और भारी आवाज को लेकर टिप्पणी की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय पत्रकार ने भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर सवाल पूछा। इस पर ट्रंप ने पत्रकार के लहजे पर टिप्पणी करते हुए कहा, "क्या तुम भारत से हो? मुझे लगा कि तुम जर्मनी से हो।" हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ मजाक कर रहा हूं। तुम भारत से हो, यह बहुत अच्छी</p></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180700/i-thought-you-were-from-germany-but-you-are-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/donald-trump-2-780x470.webp" alt=""></a><br /><div class="container-wrapper one_column"><div class="column-wrapper"><div class="control-wrapper"><div class="jg_paragraph"><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान एक भारतीय पत्रकार के बोलने के अंदाज और भारी आवाज को लेकर टिप्पणी की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय पत्रकार ने भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को लेकर सवाल पूछा। इस पर ट्रंप ने पत्रकार के लहजे पर टिप्पणी करते हुए कहा, "क्या तुम भारत से हो? मुझे लगा कि तुम जर्मनी से हो।" हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ मजाक कर रहा हूं। तुम भारत से हो, यह बहुत अच्छी बात है।"</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद ट्रंप ने पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हैं तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके अच्छे मित्र हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच जल्द ही व्यापार समझौता हो जाएगा।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई दिल्ली के साथ संभावित ट्रेड डील पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों से काफी लाभान्वित हो रहा है और दोनों देश बहुत जल्द किसी समझौते पर पहुंचेंगे।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कुछ यूजर्स ने इसे अनुचित और अपमानजनक बताया, जबकि अन्य ने इसे नस्लीय पूर्वाग्रह से जोड़कर आलोचना की। एक यूजर ने लिखा कि ऐसे बयान किसी राष्ट्रपति के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं, जबकि दूसरे ने इसे नस्लवाद का उदाहरण बताया।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके बावजूद हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी देखी गई है।</p><p style="text-align:justify;">भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है और केवल कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। वहीं, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया है कि समझौते के अधिकांश पहलुओं पर सहमति बन चुकी है और अब वार्ता शेष बिंदुओं को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है।</p></div></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:40:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दावे विश्वगुरु के लेकिन देश में एक परीक्षा भी नहीं करवा सकते',  राहुल का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि नीट, सीबीएसई,एसएससी और आज CUET, चार परीक्षाएं और एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180381/claims-of-vishwaguru-but-cannot-even-conduct-an-examination-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images12.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को नीट पेपर लीक विवाद को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए बड़ा हमला बोला। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि नीट, सीबीएसई,एसएससी और आज CUET, चार परीक्षाएं और एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई। जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश की शिक्षा व्यवस्था को ‘‘पूरी तरह से बर्बाद’’ करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार एक ओर भारत के ‘विश्वगुरु’ होने का दावा करती है जबकि दूसरी ओर वह एक भी परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से आयोजित नहीं कर पा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि भारत भर में स्नातक डिग्री कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) 2026 की परीक्षा में तकनीकी खराबी के कारण शनिवार को कुछ केंद्रों पर देरी हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नीट, सीबीएसई, एसएससी और आज सीयूईटी। चार परीक्षाएं। एक करोड़ बच्चे। एक भी (परीक्षा) ईमानदारी से नहीं हो पाई।’’गांधी ने कहा, ‘‘दावे विश्वगुरु के, लेकिन देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते - मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।’’ कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं - वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।’’ राहुल गांधी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रूप से नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक की निगरानी भी की थी। बता दें कि राहुल गांधी पिछले कुछ दिनों से लगातार नीट पेपर लीक और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की विफलता पर मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई न करना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, न कि लाखों छात्रों के भविष्य की। कांग्रेस नेता ने उन छात्रों के साथ अपनी पिछली बातचीत का एक वीडियो भी साझा किया, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) परीक्षा दी थी और पेपर लीक के मद्देनजर परीक्षा प्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:55:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निशांत कुमार ने ली मंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात बिहार ब्यूरो | एम. रोशन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</strong></div>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान  में गुरुवार को भाजपा नीत एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में एनडीए के 32 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीति में नई पारी की शुरुआत की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/bihar8.jpg" alt="निशांत कुमार ने ली मंत्री पद की शपथ" width="1040" height="828" />पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा समेत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178450/nishant-kumar-took-oath-as-minister"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260507-wa0266.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात बिहार ब्यूरो | एम. रोशन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश</strong></div>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान  में गुरुवार को भाजपा नीत एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में एनडीए के 32 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीति में नई पारी की शुरुआत की।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/bihar8.jpg" alt="निशांत कुमार ने ली मंत्री पद की शपथ" width="1040" height="828"></img>पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चिराग पासवान, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। समारोह में  पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ,जदयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा  केंद्रीय मंत्री ,ललन सिंहभी शामिल हुए।शपथ ग्रहण से पहले निशांत कुमार ने अपने पिता नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य समारोह का विशेष आकर्षण बना रहा और राजनीतिक गलियारों में इसकी काफी चर्चा हुई।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/bihar-8.jpg" alt="पटना" width="1216" height="1020"></img></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जेडीयू कोटे में नए चेहरों को मिली जगह</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) कोटे से कई नए और पुराने नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। श्वेता गुप्ता ने मंत्री के रूप में अपनी नई पारी शुरू की, वहीं दामोदर रावत को भी कैबिनेट में जगह मिली। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को भी दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जिन्होंने पिछली सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई थीं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:08:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BIHAR SWATANTRA PRABHAT]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-फ्रांस साझेदारी की कोई सीमा नहीं: नरेंद्र मोदी-इमैनुएल मैक्रों बैठक में रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर बड़ा जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<h5 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इमैनुएल मैक्रों</span></span> के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। महाराष्ट्र लोक भवन में हुई इस वार्ता में दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करते हुए रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा के दौरान आयोजित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170053/there-is-no-limit-to-india-france-partnership-said-pm-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/भारत-फ्रांस-साझेदारी-की-कोई-सीमा-नहीं.webp" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई।</strong> प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेंद्र मोदी</span></span> ने मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इमैनुएल मैक्रों</span></span> के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की अहम बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। महाराष्ट्र लोक भवन में हुई इस वार्ता में दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करते हुए रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा की।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बैठक राष्ट्रपति मैक्रों की भारत की चौथी यात्रा के दौरान आयोजित की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपने मित्र से मुंबई में मिलकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मैक्रों को मुंबई बेहद पसंद आया और उन्होंने सुबह की दौड़ का भी आनंद लिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मुंबई की सड़कों पर मैक्रों की मॉर्निंग जॉगिंग</h4>
<p style="text-align:justify;">मुंबई दौरे के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों सुबह-सुबह जॉगिंग करते नजर आए। उनके साथ फ्रांसीसी और भारतीय अधिकारी तथा सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। इस दौरान स्थानीय लोगों और मीडिया की भी नजर उन पर पड़ी, जिससे यह पल चर्चा का विषय बन गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">26/11 के पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि</h4>
<p style="text-align:justify;">अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों और फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह भाव आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति मैक्रों ने इस मौके पर भारत और फ्रांस के बीच लोकतंत्र, शांति और वैश्विक स्थिरता जैसे साझा मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और भविष्य में यह साझेदारी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में पहले से ही मजबूत सहयोग है। इस बैठक को दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहराई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 17:52:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन जन जागरण अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>आजमगढ़ </strong>भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय पर आयोजित आजमगढ़/लालगंज जिला की प्रेस वार्ता में आजमगढ़ प्रभारी व कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार अनिल राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन सत्र के दौरान अति महत्वपूर्ण जी राम जी अधिनियम को पारित किया है। इस अधिनियम के पारित होने के बाद हमारे गांव में रहने वाले लोगों के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण परिवर्तन आने वाला है। जी राम जी अधिनियम हमारे गांव को आत्मनिर्भर बनाएगा गांव के अंदर सर्वांगीण विकास की परिकल्पना को चरितार्थ करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का  विकसित भारत बनाने का जो संकल्प है उसमें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/165654/developed-india-guarantee-mission-for-employment-and-livelihood-jan-jagran"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/1000529869.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>आजमगढ़ </strong>भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय पर आयोजित आजमगढ़/लालगंज जिला की प्रेस वार्ता में आजमगढ़ प्रभारी व कैबिनेट मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार अनिल राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शीतकालीन सत्र के दौरान अति महत्वपूर्ण जी राम जी अधिनियम को पारित किया है। इस अधिनियम के पारित होने के बाद हमारे गांव में रहने वाले लोगों के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण परिवर्तन आने वाला है। जी राम जी अधिनियम हमारे गांव को आत्मनिर्भर बनाएगा गांव के अंदर सर्वांगीण विकास की परिकल्पना को चरितार्थ करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का  विकसित भारत बनाने का जो संकल्प है उसमें सबसे महत्वपूर्ण योगदान करेगा।</div>
<div> </div>
<div>मनरेगा अभियान के अंतर्गत 100 दिनों की रोजगार की गारंटी थी लेकिन जो नया कानून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बनाया है उसके अंतर्गत 125 दिनों की रोजगार की गारंटी होगी। जी राम जी अधिनियम के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी श्रमिक यदि इस योजना के अंतर्गत काम कर रहा है तो उसको एक हफ्ता के अंदर भुगतान सुनिश्चित किया जाए ।यदि किसी कारणवश उसकी मजदूरी एक सप्ताह के अंदर नहीं मिलती है तो एक सप्ताह के बाद उसकी बकाया मजदूरी पर ब्याज भी दिया जाएगा। जब खेती किसानी का समय होता है तब  मजदूरों की कमी को देखते हुए उस समय इस अभियान को रोका गया।</div>
<div> </div>
<div>यदि परिस्थिति वश किसी ग्राम सभा में 125 दिन का रोजगार देना संभव नहीं हो पाया तो सरकार इस अधिनियम के अंतर्गत बेरोजगारी भत्ता भी देगी। जी राम जी योजना के अंतर्गत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि गांव के विकास का पूरा रोड मैप ग्राम पंचायत में ही बनाया जाएगा। अब हर गांव को इस बात की स्वतंत्रता दी गई है की वह अपने गांव की स्थिति के अनुसार अपने गांव की परियोजना का रोड मैप तैयार करें और उसके आधार पर बजट का प्रस्ताव बनाकर  शासन को भेजें और शासन उनको बजट की उपलब्धता कराएगा। देश में यह पहली बार  देखने को मिल रहा है कि इस अधिनियम के माध्यम से गांव को पूरी स्वतंत्रता दी जा रही।</div>
<div> </div>
<div>हम सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का अभिनंदन करते हैं कि आज इतना बड़ा फैसला भारत सरकार ने किया है जो आने वाले समय में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस योजना के अंतर्गत असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को भी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। श्रम विभाग के द्वारा संगठित क्षेत्र के मजदूरों को जिन योजनाओं का लाभ दिया जाता है उन सभी योजनाओं का लाभ अब असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को भी उपलब्ध कराने का काम इस अधिनियम के अंतर्गत किया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div>इस फैसले के लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हैं। ग्राम पंचायतों को बधाई देते हैं और गांव में काम करने वाले श्रमिकों को भी ढेर सारी  बधाई देते है। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष आजमगढ़ सदर ध्रुव सिंह जिलाध्यक्ष उपाध्यक्ष लालगंज हनुमंत सिंह, ऋषिकांत राय, सूरज प्रकाश श्रीवास्तव संतोष सिंह घनश्याम पटेल पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 18:07:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मन की बात में उपलब्धियों का उत्सव, आत्मचिंतन की पुकार और भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात का 129वां एपिसोड केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि बीते वर्ष की उपलब्धियों, वर्तमान की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का व्यापक दस्तावेज बनकर सामने आया। यह एपिसोड देशवासियों के लिए आत्मगौरव, आत्ममंथन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश लेकर आया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2025 भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, ऐसा वर्ष जिसमें भारत की क्षमता, सामर्थ्य और संकल्प दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से उभरे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर खेल, विज्ञान, नवाचार, अंतरिक्ष,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164707/celebration-of-achievements-in-mann-ki-baat-call-for-introspection"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/..2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात का 129वां एपिसोड केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि बीते वर्ष की उपलब्धियों, वर्तमान की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का व्यापक दस्तावेज बनकर सामने आया। यह एपिसोड देशवासियों के लिए आत्मगौरव, आत्ममंथन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश लेकर आया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2025 भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, ऐसा वर्ष जिसमें भारत की क्षमता, सामर्थ्य और संकल्प दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से उभरे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर खेल, विज्ञान, नवाचार, अंतरिक्ष, संस्कृति और भारत के वैश्विक प्रभाव तक, हर क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत केवल एक उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि कई वैश्विक मंचों पर दिशा तय करने वाला देश बन चुका है। भारत का प्रभाव हर जगह दिखाई दे रहा है, चाहे वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति हो, तकनीकी नवाचार हो या सांस्कृतिक पहचान।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मन की बात में ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे देश का गर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत की सुरक्षा क्षमताओं, रणनीतिक सोच और सशस्त्र बलों की दक्षता का प्रतीक बन गया है। ऐसे अभियानों से यह संदेश जाता है कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करता। राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की यह दृढ़ता आने वाले वर्षों में देश को और अधिक सुरक्षित तथा आत्मविश्वासी बनाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेलों की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। भारत में खेल संस्कृति का विस्तार हो रहा है और युवा पीढ़ी इसे करियर के रूप में अपना रही है। यह बदलाव देश के सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने अंतरिक्ष महाकुंभ जैसे आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत अंतरिक्ष विज्ञान में केवल अनुसरण करने वाला नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाला देश बन रहा है। चंद्रयान, गगनयान और अन्य अभियानों ने भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा को वैश्विक पहचान दिलाई है। यह उपलब्धियां युवाओं को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अयोध्या में बने राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। राम मंदिर के निर्माण से देश में एक लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक अध्याय का समाधान हुआ है। यह घटना भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक समरसता का उदाहरण भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">77वें गणतंत्र दिवस का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन हमें संविधान के मूल्यों और लोकतंत्र की ताकत की याद दिलाता है। भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड और झांकियां भारत की विविधता में एकता को दर्शाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वास्थ्य के विषय पर प्रधानमंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते और अनियंत्रित इस्तेमाल पर देशवासियों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकता है, क्योंकि इससे दवाएं बेअसर हो रही हैं। विशेष रूप से यूटीआई जैसी बीमारियों में दवाओं के कमजोर साबित होने पर उन्होंने दुःख प्रकट किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन न करें और जिम्मेदार नागरिक की तरह स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कश्मीर के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने बारामुला के टीलों का उल्लेख किया और कहा कि ये टीलें इंसानों द्वारा बनाई गई हैं और इनके भीतर इतिहास के कई रहस्य छिपे हैं। उन्होंने फ्रांस के एक म्यूजियम में मिले एक पुराने, धुंधले चित्र का जिक्र किया, जिसमें कश्मीर का गौरवशाली अतीत झलकता है। बौद्ध परिसरों की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर केवल प्राकृतिक सौंदर्य का ही नहीं, बल्कि ज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक समृद्धि का भी केंद्र रहा है। यह हमें अपने इतिहास को जानने, समझने और संरक्षित करने की प्रेरणा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मणिपुर के एक युवा की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि किस प्रकार उसने बिजली की समस्या से निपटने के लिए सोलर पैनल लगाए। यह उदाहरण आत्मनिर्भरता, नवाचार और स्थानीय समाधान की सोच को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल समस्याओं का समाधान करते हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने दुबई में कन्नड़ भाषा के संरक्षण और फिजी में तमिल दिवस के आयोजन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक कन्नड़ परिवार ने विदेश में रहते हुए भी कन्नड़ भाषा की शुरुआत की, बच्चों को कन्नड़ लिखना और पढ़ना सिखाया जा रहा है। यह भाषा और भूमि के प्रति गर्व की भावना का उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी पहचान हैं और इन्हें जीवित रखना हर भारतीय का दायित्व है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता सेनानी पार्वती गिरी का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। उनका जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक है। ऐसे नायकों और नायिकाओं की कहानियां हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन करती हैं। प्रधानमंत्री ने आग्रह किया कि आजादी दिलाने वाले इन महान व्यक्तित्वों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि युवाओं को यह समझ में आए कि आज जो स्वतंत्रता हमें मिली है, उसके पीछे कितने बलिदान छिपे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने मन की बात के माध्यम से 2026 की चुनौतियों और संभावनाओं की ओर भी संकेत किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष विकास, तकनीक और मानव संसाधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे। भारत को अपनी युवा शक्ति, नवाचार क्षमता और सांस्कृतिक विरासत के बल पर नई ऊंचाइयों को छूना है। इसके लिए आत्मविश्वास के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना भी जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मन की बात का यह एपिसोड केवल उपलब्धियों का बखान नहीं था, बल्कि यह एक सामूहिक चिंतन था। इसमें गर्व भी था, चेतावनी भी, प्रेरणा भी और भविष्य की स्पष्ट दिशा भी। प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया कि भारत की यात्रा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। जब देश का हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझेगा और निभाएगा, तभी भारत सच्चे अर्थों में विकसित राष्ट्र बनेगा। इस तरह मन की बात का 129वां एपिसोड भारत की आत्मा की आवाज बनकर उभरा, जिसमें अतीत का सम्मान, वर्तमान का आत्मविश्लेषण और भविष्य का आत्मविश्वासी संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 20:13:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Lakhpati Didi Yojana: सरकार महिलाओं को दे रही 5 लाख रुपये, ऐसे उठाएं लाभ </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>Lakhpati Didi Yojana:</strong>  केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बहुत सारी योजनाएं चलाई हुई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने महिलाओं के स्वरोजगार के लिए भी एक योजना शुरू की है। योजना का नाम है लखपति दीदी योजना। देश के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी भी कई बार योजना का जिक्र कर चुके हैं। ये स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम है।</p>
<p><strong>इन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ</strong></p>
<p>योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार में बढ़ावा दिया जाता है। महिलाओं को योजना की मदद से बिजनेस शुरू</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164477/lakhpati-didi-yojana-government-is-giving-5-lakh-rupees-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/lakhpati-didi-yojana.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Lakhpati Didi Yojana:</strong> केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए बहुत सारी योजनाएं चलाई हुई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने महिलाओं के स्वरोजगार के लिए भी एक योजना शुरू की है। योजना का नाम है लखपति दीदी योजना। देश के प्रधानमंत्री नरेंद मोदी भी कई बार योजना का जिक्र कर चुके हैं। ये स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम है।</p>
<p><strong>इन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ</strong></p>
<p>योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार में बढ़ावा दिया जाता है। महिलाओं को योजना की मदद से बिजनेस शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। खास बात है कि आपको ये रकम बिना किसी इंटरेस्ट के दी जाती है।</p>
<p>योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ पात्रताएं तय की हैं। योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को दिया जाएगा, जिनकी उम्र 18 साल से लेकर 50 साल के बीच है। खास बात है कि लाभ लेने वाली महिला के घर का कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।</p>
<p>योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं के परिवार की सालाना आय 3 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। महिला का योजना का लाभ लेने के लिए किसी स्वंय सहायता समूह से जुड़ना अनिवार्य है। इसके बाद ही महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाएगा।</p>
<p><strong>इन दस्तावेजों की होगी जरूरत</strong></p>
<p>योजना में आवेदन करने के लिए महिला को सबसे पहले किसी स्वयं सहायता समूह से जुड़ना होगा। इसके बाद अपने क्षेत्रीय स्वयं सहायता समूह के दफ्तर में महिला को अपना बिजनेस प्लान और अहम दस्तावेज शेयर करना होगा।</p>
<p>अहम दस्तावेजों की बात की जाए तो पैन कार्ड, आधार कार्ड, इनकम प्रूफ, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। पूरी प्रक्रिया होने के बाद महिलाओं को बिजनेस शुरू करने के लिए लोन दे दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 16:58:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम से बंगाल तक मोदी का आक्रामक संदेश घुसपैठ, विकास और सुशासन पर सियासी प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम और पश्चिम बंगाल के अपने हालिया कार्यक्रमों के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए घुसपैठ, भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दों को केंद्र में रखा। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस की दशकों पुरानी गलतियों को सुधारने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने असम के साथ हमेशा असम विरोधी रवैया अपनाया और वोटबैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को खुली छूट दी, जिसके चलते राज्य की डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बदलाव ने न</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163954/modis-aggressive-message-from-assam-to-bengal-political-attack-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/004.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम और पश्चिम बंगाल के अपने हालिया कार्यक्रमों के दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए घुसपैठ, भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दों को केंद्र में रखा। गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस की दशकों पुरानी गलतियों को सुधारने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप था कि कांग्रेस ने असम के साथ हमेशा असम विरोधी रवैया अपनाया और वोटबैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को खुली छूट दी, जिसके चलते राज्य की डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बदलाव ने न सिर्फ असम की सांस्कृतिक पहचान को खतरे में डाला है, बल्कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा भी दांव पर लग गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मोदी ने अपने भाषण में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर असम के संसाधनों का उपयोग करते हुए अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इसे डबल इंजन सरकार का उदाहरण बताया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के तालमेल से असम में विकास की एक नई धारा बह रही है। उनका दावा था कि आज असम में बिना पर्ची और बिना खर्ची के युवाओं को नौकरियां मिल रही हैं, जो पहले की सरकारों में केवल एक सपना था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुवाहाटी में प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई। गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की नई टर्मिनल बिल्डिंग का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक इमारत नहीं, बल्कि असम की बढ़ती आर्थिक क्षमता और कनेक्टिविटी का प्रतीक है। मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहने का शिकार रहा, लेकिन अब असम भारत के एक महत्वपूर्ण गेटवे के रूप में उभर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर हवाई, सड़क और रेल कनेक्टिविटी से न सिर्फ व्यापार बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि उसके एजेंडे में असम का विकास कभी प्राथमिकता में नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक असम को कमजोर बनाए रखने की राजनीति की, ताकि उसकी सीमाओं की समस्याएं और सामाजिक तनाव बने रहें। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार असम को कमजोर नहीं, बल्कि सशक्त बनाना चाहती है, ताकि राज्य न सिर्फ अपनी पहचान बचा सके, बल्कि देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम के बाद प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे। कोलकाता पहुंचने के बाद उन्होंने रानाघाट में आयोजित एक कार्यक्रम को फोन के जरिए वर्चुअली संबोधित किया। अपने संबोधन में मोदी ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि पश्चिम बंगाल में विकास के लिए पैसों की कमी है। उनके अनुसार केंद्र सरकार ने राज्य को विकास के लिए पर्याप्त संसाधन दिए हैं, लेकिन समस्या यह है कि राज्य सरकार काम करना ही नहीं चाहती, क्योंकि वह कट और कमीशन की राजनीति में उलझी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस घुसपैठियों को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है। उन्होंने कहा कि इस वजह से पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है और आम लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां भाजपा की सरकार है, वहां विकास की रफ्तार तेज है, जबकि पश्चिम बंगाल विकास के मामले में त्रिपुरा से भी पिछड़ता जा रहा है। उनका कहना था कि यह फर्क सिर्फ नीतियों और नीयत का है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने बंगाल के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे भाजपा को एक मौका दें। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग तृणमूल कांग्रेस के कुशासन से परेशान हो चुके हैं और अब बदलाव चाहते हैं। मोदी ने कहा कि भाजपा का मॉडल विकास, पारदर्शिता और सुशासन पर आधारित है, जिसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सीधे जनता तक पहुंच रही हैं, लेकिन राज्य सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण उनका पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने पूरे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का भाषण राष्ट्रवाद, सुरक्षा और विकास के मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता रहा। उन्होंने असम में बदलती डेमोग्राफी को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि जब किसी राज्य की पहचान और जनसंख्या संरचना पर संकट आता है, तो उसका असर पूरे देश पर पड़ता है। मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी और घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार शहीदों के परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और देश की सीमाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक स्थिरता के बिना विकास संभव नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के इन बयानों को आगामी चुनावों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। असम और पश्चिम बंगाल दोनों ही राज्यों में घुसपैठ, पहचान और विकास जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक बहस का केंद्र रहे हैं। मोदी ने इन मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए विपक्ष पर सीधा हमला किया और खुद को सुधारक और विकास के वाहक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके भाषणों से यह संदेश साफ था कि भाजपा आने वाले समय में इन राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकने वाली है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, असम से बंगाल तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा सिर्फ विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक सशक्त राजनीतिक संदेश भी था। उन्होंने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए खुद को घुसपैठ के खिलाफ सख्त, विकास के प्रति प्रतिबद्ध और सुशासन का पक्षधर नेता के रूप में पेश किया। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी के इन आक्रामक बयानों और विकास के दावों का असर जमीनी राजनीति और मतदाताओं के फैसले पर किस तरह पड़ता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 17:48:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेतन्याहू से मुलाकात के बाद जयशंकर का कड़ा संदेश, आतंकवाद पर भारत–इज़राइल एकजुट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International Desk </strong></p>
<p>यरूशलम। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इज़राइल की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में यहूदी समुदाय पर हुए आतंकी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।</p>
<p>मुलाकात के बाद डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेतन्याहू को शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने तकनीक, अर्थव्यवस्था, कौशल एवं प्रतिभा विकास, कनेक्टिविटी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163519/jaishankars-strong-message-after-meeting-netanyahu-india-israel-united-on-terrorism"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/s.-jaishankar.webp" alt=""></a><br /><p><strong>International Desk </strong></p>
<p>यरूशलम। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इज़राइल की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में यहूदी समुदाय पर हुए आतंकी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।</p>
<p>मुलाकात के बाद डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नेतन्याहू को शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने तकनीक, अर्थव्यवस्था, कौशल एवं प्रतिभा विकास, कनेक्टिविटी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया गया।</p>
<p>विदेश मंत्री जयशंकर ने सिडनी हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भारत और इज़राइल आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करते। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में भारत इज़राइल के साथ खड़ा है। इस बयान को आतंकवाद के विरुद्ध दोनों देशों की साझा रणनीति और प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>इसी बीच, सिडनी हमले को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस में यहूदी समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया के सभी देशों को कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को समर्थन देने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।</p>
<p>गौरतलब है कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिम देशों की यात्रा पर हैं, वहीं दूसरी ओर विदेश मंत्री जयशंकर की इज़राइल यात्रा भारत की संतुलित और सक्रिय कूटनीति को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्पष्ट नीति और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को रेखांकित करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 17:40:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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