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                <title>government school - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>government school RSS Feed</description>
                
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                <title>सरकारी विद्यालयों में गिरती शिक्षा की गुणवत्ता: जवाबदेही किसकी ? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">    शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, फिर भी अधिकतर सरकारी विद्यालयों में ‘शिक्षा की गुणवत्ता’, दिन-प्रतिदिन चिन्ताजनक होती जा रही है। यह एक कटु सत्य है कि, ‘‘हमारे देश के अनेक नेता, उच्चाधिकारी और प्रभावशाली लोग अपनी सन्तानों को विदेशों में अच्छी शिक्षा के लिए भेजते हैं या निजी स्तर के महंगे विद्यालयों में दाखिला दिलाते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकारी विद्यालय, जो देश की अधिकांश जनता के लिए शिक्षा प्राप्त करने का प्रमुख साधन हैं, उपेक्षित हैं और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।’’ क्या यह संयोग मात्र है या इसके पीछे हमारी प्रणाली की प्राथमिकताओं और जवाबदेही</div>
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<div style="text-align:justify;">यह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154125/quality-of-declining-education-in-government-schools-accountability"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-08/unnamed2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">  शिक्षा का महत्व निर्विवाद है, फिर भी अधिकतर सरकारी विद्यालयों में ‘शिक्षा की गुणवत्ता’, दिन-प्रतिदिन चिन्ताजनक होती जा रही है। यह एक कटु सत्य है कि, ‘‘हमारे देश के अनेक नेता, उच्चाधिकारी और प्रभावशाली लोग अपनी सन्तानों को विदेशों में अच्छी शिक्षा के लिए भेजते हैं या निजी स्तर के महंगे विद्यालयों में दाखिला दिलाते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकारी विद्यालय, जो देश की अधिकांश जनता के लिए शिक्षा प्राप्त करने का प्रमुख साधन हैं, उपेक्षित हैं और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।’’ क्या यह संयोग मात्र है या इसके पीछे हमारी प्रणाली की प्राथमिकताओं और जवाबदेही की कमी का गहरा सम्बन्ध है? सवाल यह उठता है कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही है, इसकी जवाबदेही किसकी है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">   प्रथम दृष्टया, सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में कमी के कई कारण हैं। जैसे-बुनियादी ढांचे की कमी, शिक्षकों की अपर्याप्त संख्या, किसी विद्यालय में अगर पर्याप्त संख्या में शिक्षक हैं भी तो वो अपनी जिम्मेदारी निष्ठा से नहीं निभाते, प्रशिक्षण का अभाव, आधुनिक शिक्षण विधियों का उपयोग न होना आदि प्रमुख समस्याएं हैं। इसके अलावा, सरकारी विद्यालयों को नीतिगत उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  इसी दरम्यान यह सवाल पनपना जायज है कि, ‘‘जब देश के नीति-निर्माता और प्रभावशाली वर्ग के लोग अपनी सन्तानों को सरकारी विद्यालयों से दूर रखते हैं, तो स्वाभाविक रूप से इन संस्थानों के प्रति उनकी जवाबदेही कम हो जाती है। यदि उनके अपने बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे होते, तो शायद इनकी स्थिति सुधारने के लिए अधिक गम्भीर प्रयास किए जाते।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह स्थिति न केवल सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा के अधिकार जैसे संवैधानिक वादे को भी कमजोर करती है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे, समाज के आर्थिक स्तर से कमजोर वर्गों से आते हैं, जिनके लिए निजी स्कूलों में पढ़ना आर्थिक रूप से सम्भव नहीं है। यदि इन विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, तो हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार करेंगे, जो अवसरों की कमी के कारण पिछड़ जाएगी। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अन्याय है, बल्कि देश के समग्र विकास के लिए भी हानिकारक है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  इस समस्या का समाधान तभी सम्भव है, जब नीति-निर्माता और समाज का प्रभावशाली वर्ग सरकारी शिक्षा प्रणाली को अपनी प्राथमिकता बनाए। एक सुझाव यह हो सकता है कि सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों के लिए सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई को अनिवार्य किया जाए। इससे न केवल जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि नीतियों में सुधार के लिए ठोस कदम भी उठाए जाएंगे। इसके साथ ही, शिक्षकों के प्रशिक्षण, स्कूलों में संसाधनों की उपलब्धता और नियमित निगरानी जैसे कदमों को प्राथमिकता देनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘शिक्षा’ किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है। यदि हम चाहते हैं कि हमारा देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो, तो सरकारी विद्यालयों को मजबूत करना होगा। यह तभी सम्भव है, जब हमारी प्रणाली में जवाबदेही और समानता का भाव जागे। नेताओं और उच्चाधिकारियों को यह समझना होगा कि उनकी सन्तानों का भविष्य देश के हर बच्चे के भविष्य से जुड़ा है। सरकारी विद्यालयों को नजरअन्दाज करना, न केवल शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को बढ़ावा देता है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रगति को भी बाधित करता है। ऐसी परिस्थितियों में जरूरी यह है कि हम इस दिशा में ठोस और त्वरित कदम उठाएं, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिले।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 17:23:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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                <title>शिक्षा का संकट: नींव को बचाने की जंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कल्पना करें—एक बच्चा सुबह-सुबह स्कूल की ओर चल पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंधे पर बस्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन में सपने और आँखों में चमक। लेकिन स्कूल पहुँचते ही उसका दिल टूट जाता है—दरवाजे पर ताला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक गायब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चारों ओर सन्नाटा। यह कोई कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मध्यप्रदेश के उमरिया जिले की हकीकत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हाल ही में कलेक्टर के औचक निरीक्षण में सामने आई। शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब यह रीढ़ लापरवाही की मार से कमजोर पड़ने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उमरिया की यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150741/education-crisis-battle-to-save-foundation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/download.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">कल्पना करें—एक बच्चा सुबह-सुबह स्कूल की ओर चल पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कंधे पर बस्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन में सपने और आँखों में चमक। लेकिन स्कूल पहुँचते ही उसका दिल टूट जाता है—दरवाजे पर ताला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक गायब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चारों ओर सन्नाटा। यह कोई कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मध्यप्रदेश के उमरिया जिले की हकीकत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हाल ही में कलेक्टर के औचक निरीक्षण में सामने आई। शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जब यह रीढ़ लापरवाही की मार से कमजोर पड़ने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">उमरिया की यह घटना सिर्फ एक जिले का दर्द नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक जोरदार चेतावनी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब उमरिया के कलेक्टर ने सरकारी स्कूलों का औचक दौरा किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जो देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह दिल दहला देने वाला था। कहीं शिक्षक बिना बताए गायब थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कहीं स्कूलों के दरवाजे बच्चों के लिए बंद मिले। यह सिर्फ ड्यूटी से चूक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन मासूम सपनों के साथ विश्वासघात था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर बच्चा स्कूल लेकर आता है। कलेक्टर ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया—दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया और </span>29 <span lang="hi" xml:lang="hi">की वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई। यह सख्ती जरूरी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन क्या यह समस्या सिर्फ उमरिया की है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश के हर कोने में अगर झाँकें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह लापरवाही एक गहरे संकट की ओर इशारा करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों को चमकाने के लिए सरकार ने ढेरों योजनाएँ शुरू कीं—नई इमारतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुफ्त किताबें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिड-डे मील। लेकिन जब जमीनी हकीकत सामने आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सारा ढाँचा खोखला नजर आता है। शिक्षक समय पर नहीं आते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल प्रबंधन सोया रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शिक्षा विभाग की निगरानी बस कागजों तक सीमित है। प्रवेश उत्सव जैसे आयोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महज औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। नतीजा सामने है—बच्चों की उपस्थिति गिर रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रॉपआउट की दर बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शिक्षा की गुणवत्ता धूल चाट रही है। योजनाएँ तो हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर जब तक शिक्षकों और प्रशासन की जवाबदेही तय नहीं होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब बेकार हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक पल को रुकें और सोचें—वह बच्चा जो स्कूल के लिए मीलों पैदल चलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धूप-धूल में अपने सपनों को सींचता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे क्या मिलता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">एक खाली कक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक अनुपस्थित शिक्षक और टूटती उम्मीदें। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों पर ज्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे निर्भर हैं। उनके लिए स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जिंदगी बदलने का एकमात्र रास्ता है। लेकिन जब शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी से मुँह मोड़ लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ये बच्चे कहाँ जाएँ</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ शिक्षा का संकट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लाखों मासूमों के भविष्य पर लगा ग्रहण है। हर गायब शिक्षक के साथ एक बच्चे का सपना मरता है—क्या हम इसे यूँ ही देखते रहेंगे</span>?</p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">अगर मध्यप्रदेश की शिक्षा को बचाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो अब नरमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सख्ती चाहिए। उमरिया में हुई कार्रवाई इसकी मिसाल है—जब कड़ा कदम उठाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो संदेश साफ गया कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। लेकिन यह काफी नहीं है। हर जिले में नियमित औचक निरीक्षण होने चाहिए। डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे बायोमेट्रिक सिस्टम से शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखी जा सकती है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ—साफ पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शौचालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली—को अनिवार्य करना होगा। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षकों को न सिर्फ सजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बेहतर प्रशिक्षण और प्रोत्साहन भी देना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि वे ड्यूटी को बोझ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जुनून समझें। यह सिर्फ नियम लागू करने की बात नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देने का वादा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उमरिया की यह कार्रवाई एक चिंगारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे प्रदेश में बदलाव की आग जला सकती है। अगर हर जिले में ऐसी सख्ती और पारदर्शिता आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सरकारी स्कूल फिर से ज्ञान के मंदिर बन सकते हैं। यह सिर्फ प्रशासन का काम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा स्कूल से खाली हाथ न लौटे। उमरिया ने एक मॉडल पेश किया है—अब इसे पूरे मध्यप्रदेश में लागू करने का वक्त है। जब हर स्कूल में शिक्षक मौजूद हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर कक्षा में ज्ञान की रोशनी हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी हम कह सकेंगे कि हमने अपनी नींव बचा ली।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा महज किताबों के पन्ने पलटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर बच्चे के मन में छिपे सपनों को पंख देना है—उन सपनों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आसमान छूने की हिम्मत रखते हैं। उमरिया की घटना ने हमें नींद से झटका देकर जगाया है—अब आँखें मूँदे रहने का वक्त नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उठ खड़े होने का समय है। सख्त अनुशासन की डोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निगरानी का मजबूत जाल और बच्चों को दिल से प्राथमिकता देकर उठाया गया हर कदम ही इस डूबते तंत्र को बचा सकता है। आइए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज एक पक्का इरादा करें—हर बच्चे को वह शिक्षा दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसका जन्मसिद्ध अधिकार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसके सपनों को हकीकत में बदल सके। क्योंकि जब शिक्षा का किला अडिग होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी मध्यप्रदेश का भविष्य सुनहरे सूरज सा दमकेगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक जुनून भरी पुकार है—शिक्षा को जिंदा रखें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के सपनों को उड़ने दें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 16:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आनंद नहीं, आत्मघात सिखा रहे ऑनलाइन गेम्स</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब नन्हे हाथों में किताबें और रंग-बिरंगी पेंसिलें होनी चाहिए थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब वहां ब्लेड से बने जख्म थे। जब मासूम आंखों में सपने चमकने चाहिए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उनमें डर और बेचैनी थी। राजस्थान के एक स्कूल में जब एक साथ </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के हाथों पर गहरे कट के निशान दिखाई दिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हर किसी का दिल कांप उठा। यह कोई साधारण हादसा नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह था आधुनिक तकनीक के अंधेरे पक्ष का खौफनाक परिणाम।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का युग तकनीक और इंटरनेट का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो गेम्स और सोशल मीडिया में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150538/anand-not-teaching-suicide-online-games"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/103.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब नन्हे हाथों में किताबें और रंग-बिरंगी पेंसिलें होनी चाहिए थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब वहां ब्लेड से बने जख्म थे। जब मासूम आंखों में सपने चमकने चाहिए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उनमें डर और बेचैनी थी। राजस्थान के एक स्कूल में जब एक साथ </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के हाथों पर गहरे कट के निशान दिखाई दिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हर किसी का दिल कांप उठा। यह कोई साधारण हादसा नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह था आधुनिक तकनीक के अंधेरे पक्ष का खौफनाक परिणाम।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का युग तकनीक और इंटरनेट का है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो गेम्स और सोशल मीडिया में गुजर रहा है। दुर्भाग्यवश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन सुविधाओं के बीच कुछ ऐसी काली परछाइयाँ भी हैं जो बच्चों की मासूमियत और मानसिक स्वास्थ्य को निगल रही हैं। ऐसा ही एक उदाहरण सामने आया राजस्थान के एक सरकारी स्कूल से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां कक्षा </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं से </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं तक के</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक बच्चे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एक खतरनाक वीडियो गेम के शिकार हो गए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों के बीच एक ऑनलाइन गेम का जुनून इस हद तक बढ़ गया कि वे एक-दूसरे को खतरनाक टास्क देने लगे। जो जितना गहरा घाव बनाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे इनाम और शाबाशी से नवाजा जाता। बच्चों ने ब्लेड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कटर और नुकीली वस्तुओं से अपने हाथों को छलनी कर डाला। जब शिक्षकों और अभिभावकों की नजर बच्चों के हाथों पर पड़े गहरे निशानों पर गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब जाकर इस भयावह सच का पर्दाफाश हुआ। हर अभिभावक सन्न रह गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह देखकर कि एक मासूम मोबाइल गेम उनके बच्चों को आत्म-विनाश के रास्ते पर धकेल रहा था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस घटना ने एक बार फिर उस कुख्यात और खौफनाक गेम "ब्लू व्हेल" की भयावह यादें ताजा कर दीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने </span>2017 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कई मासूम बच्चों की जिंदगियां निगल ली थीं। उस गेम में बच्चों को </span>50 <span lang="hi" xml:lang="hi">जानलेवा टास्क थमाए जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका अंतिम पड़ाव आत्महत्या के काले दरवाजे पर जाकर खुलता था। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गेम बच्चों के कोमल मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी भावनात्मक कमजोरियों और अकेलेपन की नस को पकड़कर उन्हें अपने जाल में फंसाता था। बच्चे धीरे-धीरे इस दलदल में उतरते चले जाते और मानसिक रूप से इस कदर टूट जाते कि बाहर निकलने का रास्ता ही बंद हो जाता।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह घटना महज एक गेम का परिणाम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बच्चों की भीतर उमड़ती मानसिक उथल-पुथल का आईना है। आज के बच्चे मोबाइल की चकाचौंध में खोए तो हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर परिवार की गर्माहट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">माता-पिता के प्यार और समाज के जुड़ाव से कोसों दूर होते जा रहे हैं। कई बार अभिभावक अपने बच्चों की छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी भावनाओं को अनदेखा करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बच्चे चुपचाप एक अनजाने दर्द की गहराई में डूबते चले जाते हैं। ऐसे में ये खतरनाक खेल उनके सामने एक छलावा बनकर आते हैं—एक झूठा सहारा और रोमांच की चुनौती देकर उन्हें भटकाव के अंधेरे में धकेल देते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस समस्या का हल महज गेम्स पर पाबंदी लगाना नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">असल जरूरत है बच्चों के दिल और दिमाग तक पहुँचने की। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों से दिल खोलकर बात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी कही-अनकही को सुनें और उसकी गहराई को समझें। बच्चों को यह एहसास दिलाना होगा कि वे कभी अकेले नहीं हैं—उनके हर डर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर उलझन और हर मुश्किल में उनके माता-पिता और शिक्षक उनके साथ कदम-से-कदम खड़े हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों को तकनीक का सही और संतुलित इस्तेमाल सिखाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर उनकी सीमाएँ तय करना और उन्हें एक खुला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भरोसेमंद माहौल देना ही इस खतरे से बचाव का असली रास्ता है। स्कूलों को भी आगे आना होगा—मानसिक स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तनाव से निपटने के तरीके और आत्म-विश्वास को मजबूत करने के लिए खास कार्यक्रम और वर्कशॉप्स आयोजित करने चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि बच्चे न केवल तकनीक के गुलाम बनें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपनी जिंदगी के मालिक बनकर उभरें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">बच्चों का मन कोमल मिट्टी की तरह होता है—जैसा आकार दोगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसा ही ढल जाता है। आज वक्त की मांग है कि हम अपने बच्चों के साथ दिल से वक्त बिताएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी दुनिया को करीब से जानें और उनसे बेझिझक बातें करें। अगर हमने यह जिम्मेदारी नहीं संभाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाला कल न जाने कितने मासूमों को ऐसे ही खतरनाक खेलों की भेंट चढ़ते देखेगा। अब वक्त आ गया है कि हम सब एकजुट होकर बच्चों को इस स्याह अंधेरे से बाहर निकालें और उनके जीवन को फिर से उम्मीदों के रंगों से सजाएँ।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 13:35:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योगी सरकार की नई पहल से अब सरकारी स्कूल देंगे निजी स्कूलों को टक्कर</title>
                                    <description><![CDATA[- बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह 19 मार्च को करेंगे उद्घाटन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150004/due-to-the-new-initiative-of-yogi-government-now-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/whatsapp-image-2025-03-17-at-4.39.13-pm-(2).jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>- आधुनिक सुविधाओं से लैस इस विद्यालय में होगी स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड जैसी सुविधाएं,  परिषदीय विद्यालयों में नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं: संदीप सिंह</strong><br /><br /><strong>ग्रेटर नोएडा।</strong> योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों में बदलने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। ऑपरेशन कायाकल्प योजना के तहत अब परिषदीय विद्यालय सिर्फ स्कूल नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त समावेशी शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। इसी कड़ी में ग्रेटर नोएडा के मथुरापुर में 1.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हाईटेक विद्यालय का उद्घाटन 19 मार्च को किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल का शुभारंभ प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह करेंगे।<br /><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/whatsapp-image-2025-03-17-at-4.39.14-pm-(1).jpeg" alt="WhatsApp Image 2025-03-17 at 4.39.14 PM (1)" width="1600" height="900"></img><br /><strong>बच्चों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रही योगी सरकार</strong><br />योगी सरकार की प्राथमिकता केवल अधिक विद्यालय खोलना नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड, प्रयोगशालाएं, समावेशी शिक्षा सुविधाएं और स्वच्छता व स्वास्थ्य प्रबंधन को विशेष रूप से शामिल किया गया है। वर्तमान में इस विद्यालय में 90 छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य आगामी सत्र में 150 से अधिक बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। योगी सरकार की इस पहल से अब सरकारी विद्यालय भी निजी स्कूलों की तरह उच्चस्तरीय सुविधाओं से लैस हो रहे हैं, जिससे छात्रों को समान अवसर मिल सकें।<br /><br /><strong>छात्रों के लिए उपलब्ध होंगी आधुनिक सुविधाएं</strong><br />इस नवनिर्मित विद्यालय में छात्रों की शिक्षा को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा दी गई है, जहां प्रत्येक कक्षा में डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट लर्निंग टूल्स लगाए गए हैं। शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता और स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा गया है। छात्रों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था आरओ और वाटर फिल्टर के माध्यम से की गई है, वहीं छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं, जिससे स्वच्छता और सुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकें। विद्यालय में सुरक्षा के भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।</p>
<p>आकस्मिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हर कक्षा में दो दरवाजे बनाए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को आसानी से निकाला जा सके। मिड-डे मील के लिए भी अलग से एक भवन तैयार किया गया है, जहां छात्र आराम से बैठकर भोजन कर सकेंगे। इसके अलावा, बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में खेलकूद और प्रयोगशाला की भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे वे न सिर्फ शारीरिक रूप से सक्रिय रह सकें, बल्कि वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षा भी प्राप्त कर सकें।<br /><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/whatsapp-image-2025-03-17-at-4.39.12-pm.jpeg" alt="योगी सरकार की नई पहल से अब सरकारी स्कूल देंगे निजी स्कूलों को टक्कर" width="1600" height="900"></img><br /><strong>दिव्यांग छात्रों के लिए विकसित की जा रही विशेष सुविधाएं</strong><br />योगी सरकार समावेशी शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित कर रही है। इस विद्यालय को 'दिव्यांग अनुकूल विद्यालय' के रूप में विकसित किया गया है, जिससे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बिना किसी बाधा के शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके। विद्यालय परिसर में दिव्यांग छात्रों की सुगमता को सुनिश्चित करने के लिए रैंप और रेलिंग सहित विशेष सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। विद्यालय में विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है, जो दिव्यांग छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण प्रदान करेंगे। समावेशी शिक्षा की इस पहल से दिव्यांग छात्र बिना किसी भेदभाव के मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में शामिल हो सकेंगे और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।<br /><br /><strong>विद्यालय निर्माण में पर्यावरण संरक्षण का रखा गया विशेष ध्यान</strong><br />योगी सरकार शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दे रही है। इस विद्यालय का निर्माण ‘ग्रीन स्कूल’ मॉडल के अनुरूप किया गया है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाया गया है। विद्यालय निर्माण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी पेड़ को न काटा जाए, बल्कि इसके स्थान पर अधिक से अधिक पौधारोपण किया जाए। इससे विद्यालय परिसर हरा-भरा बना रहेगा और बच्चों को स्वच्छ व शुद्ध वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।<br /><br /><strong>कहते हैं बेसिक शिक्षा मंत्री</strong><br />बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सबका साथ, सबका विकास नीति के तहत शिक्षा को हर बच्चे तक समान रूप से पहुंचाने की योजना बनाई गई है। दिव्यांग छात्रों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए परिषदीय विद्यालयों में नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। मथुरापुर का यह विद्यालय इसी नीति का एक उदाहरण है। यहां दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष रैंप, समावेशी कक्षाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं, ताकि वे बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।<strong><br /></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 15:17:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी विद्यालय में चोरी, लाखों के सामान पर अज्ञात चोरों का हाथ साफ</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बरही, झारखंड:- </strong>राजकीय बुनियादी विद्यालय पंचमाधव बरही में अज्ञात चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया। घटना 13 मार्च 2025 की रात की है, जब चोरों ने स्कूल के कार्यालय का ताला तोड़कर महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान चुरा लिए। शिकायत पत्र के अनुसार, चोरी गए सामान में 2 पीस टीवी, पंखा, 9 फूटबॉल, 3 डाइस राउटर, कंप्यूटर, कैमरा, फिलिप्स स्पीकर और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। चोरी की सूचना पावती देवी पति विष्णधारी यादव ने सुबह 8 बजे दी, जिसके बाद विद्यालय प्रशासन मौके पर पहुंचा और कार्यालय का टूटा ताला पाया।</div>
<div>  </div>
<div>विद्यालय प्रबंधन का कहना है</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149936/unidentified-thieves-cleaned-the-stolen-in-government-school"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/news-4.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बरही, झारखंड:- </strong>राजकीय बुनियादी विद्यालय पंचमाधव बरही में अज्ञात चोरों ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया। घटना 13 मार्च 2025 की रात की है, जब चोरों ने स्कूल के कार्यालय का ताला तोड़कर महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान चुरा लिए। शिकायत पत्र के अनुसार, चोरी गए सामान में 2 पीस टीवी, पंखा, 9 फूटबॉल, 3 डाइस राउटर, कंप्यूटर, कैमरा, फिलिप्स स्पीकर और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। चोरी की सूचना पावती देवी पति विष्णधारी यादव ने सुबह 8 बजे दी, जिसके बाद विद्यालय प्रशासन मौके पर पहुंचा और कार्यालय का टूटा ताला पाया।</div>
<div> </div>
<div>विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस चोरी से शिक्षण कार्य प्रभावित होगा और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की क्षति भी हुई है। स्कूल प्रशासन ने बरही थाना प्रभारी से प्राथमिकी दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। मौके पर मुखिया प्रतिनिधि हरेंद्र गोप, प्रधानाध्यापक संजय कुमार दुबे, मनोज घोष सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/149936/unidentified-thieves-cleaned-the-stolen-in-government-school</link>
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                <pubDate>Mon, 17 Mar 2025 13:21:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी विद्यालय के टीचर पर रेप सहित गंभीर मामलों में केस दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तार नही कर रही पुलिस </title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में पुलिस किसी समान्य व्यक्ति पर सामान्य धाराओं में भी मुकदमा दर्ज हों तो पुलिस कालर पकड़कर उसे उठा ले जायेगी। किन्तु आरोपी सरकारी कर्मचारी हो तो उसे बंचाने में पूरा अमला लग जाता है। जिले के गौर विकास क्षेत्रसे एक ऐसा ही मामला चर्चा मे है। परिषदीय विद्यालय जलालाबाद में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक पवन कुमार पर अपनी ही छात्रा के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। </div>
<div>आरोपी ने कक्षा 6 की छात्रा से पानी मांगा और उसे कमरे में ले जाकर उसके साथ घिनौनी हरकत की। घटना 15 सितम्बर 2023 की है। पीड़ित पिता शिक्षा विभाग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147456/police-is-not-arresting-a-government-school-teacher-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/img-20250117-wa0210.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में पुलिस किसी समान्य व्यक्ति पर सामान्य धाराओं में भी मुकदमा दर्ज हों तो पुलिस कालर पकड़कर उसे उठा ले जायेगी। किन्तु आरोपी सरकारी कर्मचारी हो तो उसे बंचाने में पूरा अमला लग जाता है। जिले के गौर विकास क्षेत्रसे एक ऐसा ही मामला चर्चा मे है। परिषदीय विद्यालय जलालाबाद में तैनात प्रभारी प्रधानाध्यापक पवन कुमार पर अपनी ही छात्रा के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा है। </div>
<div>आरोपी ने कक्षा 6 की छात्रा से पानी मांगा और उसे कमरे में ले जाकर उसके साथ घिनौनी हरकत की। घटना 15 सितम्बर 2023 की है। पीड़ित पिता शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस की चैखट पर सिर पटकता रहा लेकिन एफआईआर नही दर्ज हुई।</div>
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<div>मजबूर होकर उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया जहां से मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी हुआ। काफी मशक्कत के बाद पैकोलिया पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया लेकिन आरोपी पर आंच नही आई। खबर है कि स्थानीय पुलिस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने की तैयारी मे है। आरोपी पवन कुमार पर पैकोलिया थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली छात्रा के मां की तहरीर पर आईपीसी की धारा 376एबी, 354बी, 504, 506 तथा पॉक्सो एक्ट 5ध्6, 9ध्10 के तहत मुकदमा दर्ज। इसमे 7 साल से अधिक और उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। </div>
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<div>अब आप समझ सकते हैं यही मुकदमा किसी सामान्य व्यक्ति पर दर्ज हुआ होता तो पुलिस उसका घर खोद डालती। सरकारी कर्मचारी होने का इतना फायदा है कि जिम्मेदार उसकी घिनौनी हरकत को भी नजरअंदाज कर सकते हैं। 17 जनवरी को पीड़ित ने सीडब्लूसी को प्रार्थना पत्र देकर नाबालिग से जुड़े प्रकरण में कार्यवाही की मांग किया है। इससे पहले एसपी, डीआईजी सभी से फरियाद कर चुका है। प्रकरण में अब तक कोई कार्यवाही न होने से पीड़ित परिवार को परोक्ष अपरोक्ष धमकियां दी जा रही हैं।</div>
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<div>समझौते का नाजायज दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उसके परिवार के साथ कोई अनहोनी हुई तो स्थानीय पुलिस तथा महकमे के उच्चाधिकारी इसके जिम्मेदार होंगे। कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डा. आलोक रंजन वर्मा ने भी इस प्रकरण में पुलिस कप्तान से मिलकर अविलम्ब आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग आरोपी पीड़ित छात्र के परिजनों को जान से मारने की धमकी दिया जा रहा है जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती है तब तक छात्र और उनके परिवार वालों पर डर बसा रहेगा सुलह करने का दबाव डालता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 17:24:22 +0530</pubDate>
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