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                <title>  hindi lekh - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>संस्थागत संस्कृति के सामने खड़ा सियासी व्यवहार का प्रश्न</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र केवल चुनावों और सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया का नाम नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मर्यादा और संस्थागत गरिमा की उस सूक्ष्म परंपरा पर आधारित व्यवस्था है जो शासन को स्थायित्व और विश्वसनीयता प्रदान करती है। जब इस परंपरा में जरा-सी भी दरार पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कोई सामान्य-सी घटना भी राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन जाती है। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जुड़ा हालिया विवाद इसी प्रकार का प्रसंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने भारतीय लोकतंत्र के सामने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या तीव्र होती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संवैधानिक पदों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172873/question-of-political-behavior-facing-institutional-culture"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र केवल चुनावों और सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया का नाम नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मर्यादा और संस्थागत गरिमा की उस सूक्ष्म परंपरा पर आधारित व्यवस्था है जो शासन को स्थायित्व और विश्वसनीयता प्रदान करती है। जब इस परंपरा में जरा-सी भी दरार पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब कोई सामान्य-सी घटना भी राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन जाती है। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से जुड़ा हालिया विवाद इसी प्रकार का प्रसंग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने भारतीय लोकतंत्र के सामने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या तीव्र होती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान धीरे-धीरे केवल औपचारिकता बनकर रह गया है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रपति के मंच से व्यक्त हुए कुछ भावुक शब्दों ने पूरे देश को यह सोचने पर विवश कर दिया कि प्रोटोकॉल महज़ नियमों का संकलन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और उसकी गरिमा को सुरक्षित रखने वाला आवश्यक अनुशासन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान की सबसे गहरी शक्ति उसकी संस्थाओं की गरिमा में निहित होती है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और उन संस्थाओं में राष्ट्रपति का पद राष्ट्र की सर्वोच्च मर्यादा और एकता का जीवंत प्रतीक माना जाता है। इसलिए राष्ट्रपति को केवल एक औपचारिक पद के रूप में देखना संविधान की भावना को सीमित कर देना होगा। जब इस पद पर आसीन व्यक्ति सार्वजनिक मंच से यह अनुभव व्यक्त करे कि उसे उसके पद के अनुरूप सम्मान नहीं मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह महज़ व्यक्तिगत असहजता का प्रसंग नहीं रह जाता। यह उस संवैधानिक संस्कृति की परीक्षा बन जाता है जिस पर भारत जैसे विशाल लोकतंत्र की नींव टिकी है। किसी भी राज्य की सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वह किसी भी दल की क्यों न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके लिए यह अनिवार्य है कि वह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्र की संस्थाओं का सम्मान बनाए रखे। क्योंकि जब संस्थाओं के प्रति आदर कम होने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता भी धीरे-धीरे क्षीण पड़ने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आदिवासी समाज की संवेदनशीलता इस घटना का उतना ही महत्वपूर्ण पक्ष है। भारत के आदिवासी समुदाय सदियों से अपनी पहचान और सांस्कृतिक सम्मान के लिए संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में जब देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति किसी सांस्कृतिक आयोजन में पहुंचती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह केवल एक कार्यक्रम नहीं रहता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रतीकात्मक रूप से पूरे समुदाय के आत्मसम्मान का उत्सव बन जाता है। यदि उस अवसर पर किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही या प्रोटोकॉल की कमी का आरोप लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो स्वाभाविक है कि यह पीड़ा अधिक गहरी महसूस होती है। इसलिए राष्ट्रपति के शब्दों में जो भावुकता दिखाई दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस ऐतिहासिक संवेदनशीलता का प्रतिबिंब भी थी जो आदिवासी समाज से जुड़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज की राजनीति की एक बड़ी विडंबना यह बन गई है कि लगभग हर घटना को तुरंत राजनीतिक दृष्टि से परखा जाने लगता है। राष्ट्रपति की टिप्पणी सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का तूफान उठना स्वाभाविक था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने इसे गंभीर विषय बताते हुए संवैधानिक गरिमा का प्रश्न बताया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरी ओर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने इन आरोपों को राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है जब संवैधानिक संस्थाएं भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनने लगती हैं। तब वास्तविक मुद्दा—संस्थाओं की प्रतिष्ठा—पृष्ठभूमि में चला जाता है और चर्चा केवल दलगत हितों तक सीमित रह जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटोकॉल को अक्सर महज औपचारिकता समझ लिया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि उसका असली महत्व उसके संदेश में छिपा होता है। जब किसी राज्य में राष्ट्रपति का स्वागत मुख्यमंत्री या वरिष्ठ मंत्री करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह केवल एक स्वागत समारोह नहीं होता</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">यह उस राज्य की ओर से राष्ट्र की सर्वोच्च संस्था के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति होता है। यदि यह परंपरा टूटती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जनता के मन में यह संदेश जाता है कि राजनीतिक असहमति संस्थागत मर्यादा से भी बड़ी हो गई है। यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं कही जा सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जब संस्थाओं के प्रति सम्मान धीरे-धीरे कम होने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे विवाद ने एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक प्रश्न को सामने ला खड़ा किया है—क्या हमारे लोकतंत्र में संवाद और संवेदनशीलता की जगह धीरे-धीरे कम होती जा रही है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि किसी प्रशासनिक कारण से कोई कार्यक्रम अपने मूल स्वरूप में आयोजित नहीं हो पाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे स्पष्ट और संयमित संवाद के माध्यम से सहजता से समझाया जा सकता था। लेकिन जब संवाद की जगह आरोप-प्रत्यारोप ले लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छोटा सा मतभेद भी गहरे विवाद का रूप ले लेता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल लोकतंत्र की असली ताकत इसी में निहित होती है कि वह मतभेदों और असहमतियों के बावजूद संवाद के दरवाजे खुले रखता है। यदि यह रास्ता संकुचित होने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राजनीतिक टकराव अनावश्यक रूप से तीखे और कटु हो जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसके साथ-साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा भी प्रभावित होने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे प्रसंग को केवल एक राजनीतिक विवाद मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। दरअसल इसे उस चेतावनी के रूप में देखना चाहिए जो लोकतंत्र समय-समय पर अपने आचरण के माध्यम से देता है। संविधान की संस्थाएं तभी वास्तव में मजबूत और विश्वसनीय बनती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उनके प्रति व्यवहार में सम्मान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयम और संतुलन स्पष्ट दिखाई दे। राष्ट्रपति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री या कोई भी संवैधानिक पद— इन सबकी गरिमा केवल संविधान की किताब में नहीं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वह राजनीतिक आचरण और सार्वजनिक व्यवहार में भी प्रतिबिंबित होनी चाहिए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि यह आचरण कमजोर पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो धीरे-धीरे संस्थागत विश्वास भी कम होने लगता है। इसलिए आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दल इस घटना से सबक लें और भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसके लिए अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार व्यवहार का प्रयास करें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतंत्र की असली कसौटी सत्ता की जीत-हार में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संस्थाओं के प्रति निभाई जाने वाली सामूहिक जिम्मेदारी में छिपी होती है। राजनीतिक दल आते-जाते रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन संस्थाएं स्थायी होती हैं और उनका सम्मान ही राष्ट्र की स्थिरता का आधार बनता है। पश्चिम बंगाल की यह घटना चाहे जिस कारण से हुई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि संवैधानिक पदों की गरिमा से जुड़ी छोटी-सी चूक भी राष्ट्रीय बहस का विषय बन सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए राजनीति की तीखी धूप के बीच भी लोकतंत्र की यह मर्यादा सुरक्षित रहनी चाहिए—क्योंकि जब संस्थाओं का सम्मान अक्षुण्ण रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतुलित और विश्वसनीय बन पाता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>महाशिवरात्रि: शिव-शक्ति के मिलन और सृष्टि के संतुलन का उत्सव</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><span style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि यह ब्रह्मांडीय चेतना के जागरण की वह दिव्य बेला है जब आकाश और पृथ्वी का मिलन होता है। भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति में शिव को </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अनादि</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">और </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अनंत</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">माना गया है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जिनका न कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह महान रात्रि उस परम शिव तत्व के साक्षात्कार का अवसर प्रदान करती है जो संपूर्ण सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">सामान्यतः त्योहारों को उल्लास</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">रंग और बाहरी चमक-धमक से जोड़ा जाता</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169679/mahashivratri-celebration-of-the-union-of-shiva-and-shakti-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/images7.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><span style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि यह ब्रह्मांडीय चेतना के जागरण की वह दिव्य बेला है जब आकाश और पृथ्वी का मिलन होता है। भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति में शिव को </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अनादि</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">और </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अनंत</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">माना गया है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जिनका न कोई आरंभ है और न ही कोई अंत। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह महान रात्रि उस परम शिव तत्व के साक्षात्कार का अवसर प्रदान करती है जो संपूर्ण सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">सामान्यतः त्योहारों को उल्लास</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">रंग और बाहरी चमक-धमक से जोड़ा जाता है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">किंतु महाशिवरात्रि एक ऐसी रात्रि है जो हमें अंतर्मुखी होने का संदेश देती है। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय नहीं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि उस गहन अंधकार की आराधना है जिससे प्रकाश का जन्म होता है। </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">शिव का अर्थ ही </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">कल्याण</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">है और रात्रि का अर्थ </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">विश्राम</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">या </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">निवृत्ति</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">है। इस प्रकार महाशिवरात्रि का अर्थ है वह रात्रि जो हमें आध्यात्मिक विश्राम प्रदान कर परम कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करती है। इस महापर्व की महत्ता को समझने के लिए हमें इसके पौराणिक</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">आध्यात्मिक</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वैज्ञानिक और सांस्कृतिक आयामों को एक अखंड प्रवाह में देखना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">पौराणिक गाथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के साथ कई अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग जुड़े हुए हैं। सबसे प्रमुख कथा भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की है। यह विवाह केवल दो सत्ताओं का मिलन नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि यह पुरुष और प्रकृति</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वैराग्य और गृहस्थ</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तथा ध्यान और शक्ति के संतुलन का प्रतीक है। शिव जो परम योगी हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">श्मशान निवासी हैं और सांसारिक मोह-माया से विरक्त हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वे देवी पार्वती के कठिन तप से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">यह प्रसंग हमें सिखाता है कि आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए संसार का त्याग आवश्यक नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि संसार में रहते हुए भी अनासक्त भाव से शिव तत्व को प्राप्त किया जा सकता है। एक अन्य कथा के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">इसी रात्रि को ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद को शांत करने के लिए शिव एक विशाल अग्नि स्तंभ यानी ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस स्तंभ का न तो कोई छोर था और न ही कोई अंत</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जो यह दर्शाता है कि ईश्वर किसी सीमा या परिभाषा में बंधा हुआ नहीं है। समुद्र मंथन की कथा भी इस रात्रि से गहराई से जुड़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi"> जब समुद्र से निकले हलाहल विष से पूरी सृष्टि जलने लगी</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तब करुणावतार शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की उस प्रचंड ऊष्मा को शांत करने के लिए देवताओं और ऋषियों ने रात्रि भर जल और दुग्ध से उनका अभिषेक किया और उन्हें जागृत रखा। यही कारण है कि आज भी भक्त रात्रि भर जागकर शिव का जलाभिषेक करते हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जो वास्तव में समाज के कष्टों को स्वयं पर लेने की शिव की उदारता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अध्यात्म की दृष्टि से देखा जाए तो महाशिवरात्रि का महत्व </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जागरण</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">में निहित है। मनुष्य का जीवन प्रायः अज्ञान की निद्रा में बीता जाता है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जहाँ वह अपनी देह और अहंकार को ही सत्य मान बैठता है। शिवरात्रि की रात्रि वह समय है जब प्रकृति स्वयं मनुष्य की चेतना को ऊपर उठाने में सहायक होती है। योग विज्ञान के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">इस विशिष्ट रात्रि में पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की स्थिति ऐसी होती है कि मनुष्य के शरीर के भीतर की ऊर्जा स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर यानी रीढ़ की हड्डी के माध्यम से मस्तिष्क (सहस्रार चक्र) की ओर प्रवाहित होने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi"> यही कारण है कि इस रात्रि में रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर बैठने और जागने का विधान है। जो साधक इस रात्रि में सजग रहता है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वह अपनी कुंडलिनी शक्ति के जागरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठा सकता है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">यहाँ </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जागने</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">का अर्थ केवल आंखों को खुला रखना नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि अपनी चेतना को विचारों और विकारों से मुक्त कर शून्य में ले जाना है। शिव स्वयं </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">शून्य</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">के प्रतीक हैं—वह जो नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वही शिव है। जब हम अपनी पहचान</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अपने पद</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अपने धन और अपने अहंकार को पूरी तरह विसर्जित कर देते हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तब हमारे भीतर शिव का प्राकट्य होता है। इसीलिए कहा गया है </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">शिवो भूत्वा शिवं यजेत्</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अर्थात शिव बनकर ही शिव की पूजा की जा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">महाशिवरात्रि की पूजन विधि भी अत्यंत प्रतीकात्मक और मनोवैज्ञानिक है। शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले पदार्थों का गहरा अर्थ है। जल चढ़ाना मन की चंचलता को शांत करने का प्रतीक है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जबकि दूध शुद्धता और सात्विकता का। शहद वाणी की मधुरता के लिए है और घी तेज के लिए। बिल्वपत्र के तीन दल मनुष्य के तीन गुणों—सत्व</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">रज और तम—का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिव को ये तीनों दल अर्पित करने का अर्थ है कि हम अपने इन तीनों गुणों को ईश्वर के चरणों में समर्पित कर रहे हैं ताकि हम गुणातीत अवस्था को प्राप्त कर सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi"> धतूरा और भांग जैसे पदार्थ</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जिन्हें समाज सामान्यतः त्याज्य मानता है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">शिव उन्हें भी स्वीकार करते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि शिव की दृष्टि में कुछ भी अपवित्र नहीं है। वे उन सभी को शरण देते हैं जिन्हें दुनिया ठुकरा देती है। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विधान है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जो मनुष्य के जीवन की चार अवस्थाओं और पुरुषार्थों को शुद्ध करने की प्रक्रिया है। प्रत्येक प्रहर में किए जाने वाले विशिष्ट अभिषेक और मंत्रोच्चार भक्त के चित्त की परतों को साफ करते हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जिससे सूर्योदय तक वह एक नई ऊर्जा और स्पष्टता के साथ आत्मसात होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर महाशिवरात्रि भारत की अखंडता और विविधता का जीवंत उदाहरण है। उत्तर में केदारनाथ और काशी विश्वनाथ से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम तक</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">और पश्चिम में सोमनाथ से लेकर पूर्व में पशुपतिनाथ (नेपाल) तक</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">पूरा भारतीय उपमहाद्वीप शिवमय हो जाता है। अलग-अलग राज्यों में इस पर्व को मनाने की अपनी विशिष्ट परंपराएँ हैं। कहीं शिव की बारात निकाली जाती है जिसमें लोग भूत-पिशाचों का वेश धारण कर नाचते हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जो इस बात का संदेश है कि शिव की छाया में हर प्रकार की विषमता और विचित्रता के लिए स्थान है। कहीं मंदिरों में शास्त्रीय संगीत और नृत्य के माध्यम से भगवान नटराज की स्तुति की जाती है। शिव केवल संहारक नहीं हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वे नृत्य</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">संगीत</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">व्याकरण और योग के आदि गुरु भी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi"> उनके डमरू से निकले चौदह महेश्वर सूत्रों से ही संस्कृत व्याकरण का जन्म हुआ। अतः यह रात्रि कला और ज्ञान के साधकों के लिए भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। आधुनिक समय में जब मानसिक तनाव और अवसाद एक बड़ी चुनौती बन गए हैं</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तब महाशिवरात्रि का व्रत और ध्यान एक औषधि के समान कार्य करता है। उपवास शरीर को विषमुक्त (डिटॉक्स) करता है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जबकि निरंतर मंत्र जप मन के बिखराव को रोकता है। </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">ॐ नमः शिवाय</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">यह पंचाक्षरी मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि यह पंचतत्वों—पृथ्वी</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">जल</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अग्नि</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वायु और आकाश—को संतुलित करने की एक ध्वनि तरंग है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">महाशिवरात्रि का दर्शन हमें वैराग्य और दायित्व के बीच संतुलन बनाना सिखाता है। शिव अपनी जटाओं में गंगा को धारण करते हैं जो पवित्रता का प्रतीक है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं जो शीतलता और समय का प्रतीक है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">और कंठ में विष धारण करते हैं जो सहनशीलता का प्रतीक है। उनके हाथ में त्रिशूल है जो इच्छा</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">ज्ञान और क्रिया शक्तियों के संतुलन का परिचायक है। यह स्वरूप हमें यह शिक्षा देता है कि एक आदर्श मनुष्य वही है जो विकट परिस्थितियों में भी अपना धैर्य न खोए और लोक कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;line-height:normal;margin:12pt 0in 0.0001pt 0in;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi"> आज के भौतिकवादी युग में जहाँ गलाकाट प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ की प्रधानता है</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">महाशिवरात्रि हमें </span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">सर्वजन हिताय</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">का मार्ग दिखाती है। शिव ने कभी महलों की कामना नहीं की</span><span style="font-size:12pt;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">वे खुले आकाश के नीचे बाघंबर ओढ़े हिमालय की चोटियों पर या श्मशान की राख में प्रसन्न रहते हैं। यह सादगी हमें सिखाती है कि सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं बल्कि आंतरिक संतोष और आत्म-साक्षात्कार में है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अंततः महाशिवरात्रि का यह पावन अवसर हमें आत्म-निरीक्षण की प्रेरणा देता है। यह वह समय है जब हमें अपने भीतर के काम</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">क्रोध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">लोभ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">मोह और अहंकार रूपी अंधकार को पहचानना चाहिए और शिव की कृपा से उसे ज्ञान की अग्नि में भस्म कर देना चाहिए। जब तक हमारे भीतर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">स्व</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' (</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">अहंकार) जीवित है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तब तक हम शिव के वास्तविक आनंद का अनुभव नहीं कर सकते। जैसे ही हम इस अहंकार की आहुति दे देते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">हम स्वयं शिव स्वरूप हो जाते हैं। महाशिवरात्रि की वह गहन काली रात वास्तव में एक अनंत संभावना की सुबह की ओर ले जाने वाली सीढ़ी है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi"> यह हमें यह विश्वास दिलाती है कि चाहे जीवन में कितना भी बड़ा विष क्यों न आ जाए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">यदि हम शिव के प्रति समर्पित हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तो वह विष भी अमृत में परिवर्तित हो सकता है। यह पर्व हमें शक्ति</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">भक्ति और मुक्ति का अद्भुत समन्वय प्रदान करता है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">सत्यं शिवं सुंदरम्</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">के इस शाश्वत मंत्र को अपने जीवन में उतारना ही इस महापर्व की सच्ची सार्थकता है। जो व्यक्ति इस रात्रि की महिमा को समझकर पूर्ण श्रद्धा के साथ इसमें डूबता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">उसे न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि उसे वह परम सत्य भी अनुभूत होने लगता है जो इस नश्वर संसार से परे है। हर हर महादेव का उद्घोष केवल कंठ से नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">बल्कि आत्मा के गहरे तल से होना चाहिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Arial, 'sans-serif';color:#1f1f1f;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#1f1f1f;" xml:lang="hi">तभी इस महाशिवरात्रि पर हमारा वास्तविक पुनर्जन्म संभव है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 18:26:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>एक युगद्रष्टा व्यक्तित्व: कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:11.25pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;color:#2d2d2d;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी भारतीय सार्वजनिक जीवन के उन विरल व्यक्तित्वों में थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिनका योगदान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो साथ ही साहित्यकार</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">शिक्षाविद्</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राजनेता</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सांस्कृतिक चिंतक और संस्थान निर्माता भी। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राष्ट्रीय चेतना के निर्माण और आधुनिक भारत की वैचारिक आधारशिला रखने के प्रयासों से जुड़ा रहा। परंपरा और प्रगति के बीच संतुलन साधते हुए उन्होंने यह सिद्ध किया कि आधुनिक राष्ट्र निर्माण अपनी जड़ों से कटकर नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि उनसे शक्ति लेकर ही संभव है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">30 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">दिसंबर </span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168542/kanhaiyalal-maniklal-munshi-a-visionary-personality"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/km-munshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:11.25pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;color:#2d2d2d;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी भारतीय सार्वजनिक जीवन के उन विरल व्यक्तित्वों में थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिनका योगदान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो साथ ही साहित्यकार</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">शिक्षाविद्</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राजनेता</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सांस्कृतिक चिंतक और संस्थान निर्माता भी। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राष्ट्रीय चेतना के निर्माण और आधुनिक भारत की वैचारिक आधारशिला रखने के प्रयासों से जुड़ा रहा। परंपरा और प्रगति के बीच संतुलन साधते हुए उन्होंने यह सिद्ध किया कि आधुनिक राष्ट्र निर्माण अपनी जड़ों से कटकर नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि उनसे शक्ति लेकर ही संभव है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">30 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">दिसंबर </span>1887 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">को गुजरात के भरूच जिले में जन्मे मुंशी एक सुशिक्षित भागर्व ब्राह्मण परिवार से थे। उनके पिता माणिकलाल पटवारी थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु संस्कृत</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इतिहास और भारतीय दर्शन में गहरी रुचि रखते थे। बालक कन्हैयालाल को घर के वातावरण से ही भारतीय ज्ञान परंपरा का संस्कार मिला। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने बड़ोदा कॉलेज से स्नातक और मुंबई विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वे न केवल मेधावी छात्र थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि अध्ययनशील और तार्किक चिंतन के धनी भी थे। वकालत के क्षेत्र में उन्होंने शीघ्र ही प्रतिष्ठा अर्जित कर ली</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु उनका मन केवल न्यायालय तक सीमित नहीं रहा। समाज</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">राजनीति और राष्ट्र की पीड़ा ने उन्हें सक्रिय सार्वजनिक जीवन की ओर आकर्षित किया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मुंशी पर श्री अरविंद घोष के राष्ट्रवादी और आध्यात्मिक विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा। साथ ही एनी बेसेंट के नेतृत्व में होम रूल आंदोलन से जुड़कर उन्होंने राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत की। पत्रकारिता उनके विचारों की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनी। </span>1912 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में उन्होंने </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भार्गव</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मासिक की स्थापना की</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जिसने गुजराती साहित्य और राष्ट्रीय चेतना को दिशा दी। बाद में </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यंग इंडिया</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">के सह-संपादक के रूप में वे महात्मा गांधी के निकट आए। गांधीजी के साथ उनके संबंध सम्मान और वैचारिक संवाद पर आधारित थे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यद्यपि आगे चलकर दोनों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद भी उभरे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्वतंत्रता संग्राम में मुंशी की भूमिका सक्रिय और साहसपूर्ण रही। </span>1915 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में वे होम रूल लीग के सचिव बने और </span>1917 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन के सचिव के रूप में कार्य किया। </span>1920 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">के अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन में उनकी उपस्थिति ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित कर दिया। </span>1927 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में वे बॉम्बे विधानसभा के सदस्य चुने गए</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु बारडोली सत्याग्रह के समर्थन में उन्होंने पद से त्यागपत्र देकर नैतिक राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। </span>1930 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें कारावास भुगतना पड़ा और </span>1932 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में पुनः दो वर्षों के लिए जेल गए। यह कारावास उनके व्यक्तित्व को और अधिक दृढ़ तथा चिंतनशील बनाता गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;">1937 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में वे पुनः बॉम्बे प्रेसीडेंसी विधानसभा के सदस्य बने और गृह मंत्री के रूप में नियुक्त हुए। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सांप्रदायिक दंगों को नियंत्रित करने में प्रशासनिक कुशलता</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">संवेदनशीलता और दृढ़ता का परिचय दिया। </span>1942 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">के भारत छोड़ो आंदोलन में भी वे सक्रिय रहे। स्वतंत्रता के अंतिम चरण में गांधीजी से कुछ नीतिगत मतभेदों के कारण उन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र दिया</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए बाद में पुनः सहयोग का मार्ग अपनाया। हैदराबाद के भारत में विलय और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। सोमनाथ को वे केवल एक धार्मिक स्थल नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक मानते थे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण में भी मुंशी का योगदान महत्वपूर्ण रहा। वे संविधान सभा के सदस्य थे और डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता वाली ड्राफ्टिंग कमेटी के साथ कार्य किया। भारतीय परंपरा</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">संस्कृति और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के समन्वय का उनका दृष्टिकोण संविधान की भावना में परिलक्षित होता है। </span>1950 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">से </span>1952 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तक वे केंद्रीय खाद्य एवं कृषि मंत्री रहे। इसी दौरान उन्होंने </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वन महोत्सव</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">की शुरुआत की</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जो पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है। यह पहल आज भी उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण मानी जाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;">1952 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">से </span>1957 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तक वे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे। इस संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">संस्कृति और साहित्य को विशेष प्रोत्साहन दिया। सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूर होते हुए वे स्वतंत्र पार्टी से जुड़े और बाद में जनसंघ के साथ भी उनका संबंध रहा</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु </span>1959 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में उन्होंने राजनीति से संन्यास लेकर स्वयं को पूर्णतः सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। वे विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक सदस्यों में भी रहे</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यद्यपि उनका दृष्टिकोण सांप्रदायिक नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर आधारित था।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मुंशी का साहित्यिक योगदान अत्यंत व्यापक और प्रभावशाली है। वे गुजराती</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में समान अधिकार से लिखते थे। गुजराती साहित्य में उनके ऐतिहासिक उपन्यास </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पाटणनी प्रभुता</span>’, ‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पृथ्वीवल्लभ</span>’, ‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जय सोमनाथ</span>’, ‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भग्न पादुका</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">और </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">लोपामुद्रा</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन कृतियों में इतिहास केवल घटनाओं का विवरण नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव का स्रोत बनकर सामने आता है। </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">कृष्णावतार</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">श्रृंखला के माध्यम से उन्होंने पौराणिक आख्यानों को आधुनिक संदर्भों से जोड़ा। हिंदी में भी उनके उपन्यास और निबंध लोकप्रिय रहे। प्रेमचंद के साथ </span>‘<span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">हंस</span>’ <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पत्रिका का संपादन उनके साहित्यिक कद को और ऊँचा करता है। अंग्रेजी में लिखी गई उनकी पुस्तकें भारतीय संस्कृति और दर्शन को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में मुंशी का योगदान संस्थागत और दूरगामी रहा। </span>1938 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">में स्थापित भारतीय विद्या भवन उनके जीवन का एक महत्त्वपूर्ण स्वप्न था। इसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच सेतु का निर्माण करना था। आज यह संस्था भारत ही नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विश्व के अनेक देशों में भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रही है। संस्कृत शिक्षा</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">हिंदी प्रचार और भारतीय दर्शन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी प्रेरणा देती है। वे मानते थे कि कोई भी राष्ट्र अपनी भाषा</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों के बिना सशक्त नहीं हो सकता।</span></p>
<p style="text-align:justify;">8 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">फरवरी </span>1971 <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">को मुंबई में उनका निधन हुआ</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">किंतु उनकी विरासत आज भी जीवित है। भारतीय विद्या भवन</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वन महोत्सव और उनका साहित्य</span> <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ये सभी उनके जीवन दर्शन के सजीव प्रमाण हैं। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा राष्ट्र निर्माण केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि सांस्कृतिक आत्मबोध</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">नैतिकता और ज्ञान परंपरा के संरक्षण से होता है। आज के समय में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं</span>, <span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जितने स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 18:32:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वैश्विक टैरिफ समझौते: भारतीय निर्यातकों एवं उत्पादनकर्ताओं के लिए स्वर्णिम युग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो (डा) मनमोहन प्रकाश</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​भारत के विदेश व्यापार के इतिहास में वर्तमान समय एक ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में उभर रहा है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक केंद्रों के साथ किए गए हालिया टैरिफ समझौतों ने भारतीय उत्पादकों और निर्यातकों के लिए असीमित संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ये द्विपक्षीय संधियाँ न केवल भारतीय बाजार में विदेशी वस्तुओं की पहुंच सुगम बनाएंगी, बल्कि भारतीय उत्पादों को भी वैश्विक पटल पर अधिक प्रतिस्पर्धी, किफायती और सुलभ बनाएंगी। यह रणनीतिक कदम 'ब्रांड इंडिया' को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला  के केंद्र में स्थापित करने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168540/global-tariff-agreement-golden-age-for-indian-exporters-and-manufacturers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/india-us-trade-deal.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रो (डा) मनमोहन प्रकाश</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारत के विदेश व्यापार के इतिहास में वर्तमान समय एक ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में उभर रहा है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे दुनिया के सबसे प्रभावशाली आर्थिक केंद्रों के साथ किए गए हालिया टैरिफ समझौतों ने भारतीय उत्पादकों और निर्यातकों के लिए असीमित संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ये द्विपक्षीय संधियाँ न केवल भारतीय बाजार में विदेशी वस्तुओं की पहुंच सुगम बनाएंगी, बल्कि भारतीय उत्पादों को भी वैश्विक पटल पर अधिक प्रतिस्पर्धी, किफायती और सुलभ बनाएंगी। यह रणनीतिक कदम 'ब्रांड इंडिया' को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला  के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​प्रमुख देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी ​व्यापारिक संबंधों की इस नई इबारत में अमेरिका के साथ हुआ तालमेल अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्कों में की गई भारी कटौती ने फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र और आईटी, हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों को एक नई ऊर्जा प्रदान की है। इसी प्रकार, यूरोपीय संघ के साथ हुआ दीर्घकालिक समझौता भारतीय वस्तुओं को शून्य-टैरिफ की दिशा में ले जा रहा है, जिससे ऑटोमोबाइल, रसायन और कृषि उत्पादों के लिए यूरोप के विशाल बाजार में पैठ बनाना आसान हो जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ हुए समझौते भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक सहयोग ने भारतीय मसालों, अनाज और मशीनरी के लिए बाधाओं को समाप्त कर दिया है। वहीं, ब्रिटेन के साथ हुए द्विपक्षीय करार ने वस्त्र और विनिर्माण क्षेत्र के लिए रियायतों का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है, जो स्थानीय इकाइयों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन सिद्ध हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​इन वैश्विक समझोतों को वास्तविक लाभ में बदलने के लिए भारतीय उत्पादकों को अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करने होंगे। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को सिद्ध करने के लिए अब उच्च गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय मानकों की पैकेजिंग और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण पर ध्यान देना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारतीय उद्योगों को अब वैश्विक खरीदारों के बीच दीर्घकालिक विश्वास कायम करने के लिए डिजिटल ट्रेसिबिलिटी और पर्यावरण अनुकूल  उत्पादन तकनीकों को प्राथमिकता देनी होगी। वस्त्र उद्योग द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों को अपनाकर हासिल की गई सफलता अन्य क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">​व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो ये समझौते केवल व्यापारिक लेनदेन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश में बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव के संकेत हैं। निर्यात में होने वाली वृद्धि से न केवल देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुदृढ़ होगा, बल्कि श्रम-गहन क्षेत्रों में रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा होंगे। यह उपलब्धि भारत के व्यापार असंतुलन को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​अंततः, यह समझना बेहद आवश्यक है कि वैश्विक बाजारों के खुलने के साथ घरेलू बाजार में विदेशी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में भारतीय उद्यमियों की तत्परता और नागरिकों की 'वोकल फॉर लोकल' के प्रति प्रतिबद्धता ही आत्मनिर्भरता की असली कसौटी होगी। इन टैरिफ समझौतों की वास्तविक सफलता इस बात पर टिकी है कि हमारे उत्पादक कितनी कुशलता से वैश्विक मानकों को अपनाते हैं और भारतीय समाज अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को किस प्रकार दिशा देता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 18:29:12 +0530</pubDate>
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                <title>विकसित भारत की राह बनाता – दूरगामी सोच वाला बजट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार रविवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक फरवरी को देश का बजट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता तात्कालिक लोकलुभावन घोषणाओं से अधिक दीर्घकालीन राष्ट्र निर्माण है। आज़ादी की </span>75<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं वर्षगांठ से पहले भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह बजट एक ठोस संकेत देता है । इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय घोषणा कैंसर व दुर्लभ बीमारियों में प्रयुक्त जीवनरक्षक दवाओं पर आयात शुल्क समाप्त करना रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लाखों मरीजों को सीधी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167918/paving-the-way-for-a-developed-india-%E2%80%93-a-forward-thinking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/विकसित-भारत-की-राह-बनाता-–-दूरगामी-सोच-वाला-बजट.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार रविवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक फरवरी को देश का बजट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता तात्कालिक लोकलुभावन घोषणाओं से अधिक दीर्घकालीन राष्ट्र निर्माण है। आज़ादी की </span>75<span lang="hi" xml:lang="hi">वीं वर्षगांठ से पहले भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में यह बजट एक ठोस संकेत देता है । इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय घोषणा कैंसर व दुर्लभ बीमारियों में प्रयुक्त जीवनरक्षक दवाओं पर आयात शुल्क समाप्त करना रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लाखों मरीजों को सीधी राहत मिलेगी। जबकि विपक्ष हमेशा सरकार पर आम आदमी की उपेक्षा का आरोप लगाता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह निर्णय उस आरोप को कमजोर करता है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि भारत को केवल इलाज का केंद्र ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्वसनीय मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की चिकित्सा सेवाएं पहले से ही दुनिया के कई विकसित देशों की तुलना में सस्ती और प्रभावी हैं। इसी क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से बजट में तीन नए एम्स और पाँच मेडिकल हब स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित होंगे जिस पर विपक्ष अक्सर सरकार को घेरता रहा है । महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की बात करते हुए सरकार ने देशभर के जिलों में बालिकाओं के लिए गर्ल्स हॉस्टल निर्माण का निर्णय लिया है। यह फैसला उन आलोचकों के लिए जवाब है जो सरकार को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित बताते हैं। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाए गए कदम इस बजट की एक और मजबूत कड़ी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सही है कि इस बजट में बड़े उद्योगपतियों या वेतनभोगी वर्ग के लिए कोई आकर्षक घोषणा नहीं की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सरकार ने चिकित्सा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और कृषि को तकनीक से जोड़कर देश की नींव मजबूत करने का प्रयास किया है। ऐसे बजट का प्रभाव तुरंत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले वर्षों में दिखाई देगा । स्वाभाविक है कि विपक्ष और कुछ वर्गों को यह बजट पहली नजर में निराशाजनक लग सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">तुरंत लाभ</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">देने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम अप्रत्यक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दूरदर्शी निर्णयों के लिए जानी जाती है। यही कारण है कि यह बजट समझने वालों को विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम लगेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि समझ से परे रहने वालों के लिए यह महज आंकड़ों का पुलिंदा बनकर रह जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 18:06:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रत्येक धर्म का अपना एक निजी दर्शन होता है</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">विश्व का कोई भी धर्म या दर्शन हो, उसके कुछ अपने सिद्धान्त होते हैं। इस कार्यभूमि भारत में जितने दर्शनों का प्रादुर्भाव हुआ है, वैसा अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। कई चिन्तक और मनीषी अनादिकाल से सांसारिक व्यथाओं से मुक्ति हेतु अपने विचार देते आ रहे हैं। प्रत्येक धर्म का अपना एक निजी दर्शन होता है। उसके कुछ आधारभूत सिद्धान्त ही उसके तत्त्व कहलाते हैं। दूध में से यदि मक्खन बाहर निकाल दिया जाये और फिर बेचा जाए तो लेने वाला यही कहेगा-अरे, इसका तत्त्वत्-तत्त्व तो तुमने पहले ही निकाल लिया, अब इसका क्या महत्त्व है? महत्त्व तत्त्व या वस्तु</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167915/every-religion-has-its-own-personal-philosophy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">विश्व का कोई भी धर्म या दर्शन हो, उसके कुछ अपने सिद्धान्त होते हैं। इस कार्यभूमि भारत में जितने दर्शनों का प्रादुर्भाव हुआ है, वैसा अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। कई चिन्तक और मनीषी अनादिकाल से सांसारिक व्यथाओं से मुक्ति हेतु अपने विचार देते आ रहे हैं। प्रत्येक धर्म का अपना एक निजी दर्शन होता है। उसके कुछ आधारभूत सिद्धान्त ही उसके तत्त्व कहलाते हैं। दूध में से यदि मक्खन बाहर निकाल दिया जाये और फिर बेचा जाए तो लेने वाला यही कहेगा-अरे, इसका तत्त्वत्-तत्त्व तो तुमने पहले ही निकाल लिया, अब इसका क्या महत्त्व है? महत्त्व तत्त्व या वस्तु के सार का होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऋषि-मुनियों ने जिस ढंग से जीवन का चिन्तन-मनन किया, आत्मा के सम्बन्ध में सोचा और परमात्मा की महत्ता का प्रतिपादन किया, वह उनकी अपनी विचारधारा है। उन विचारधाराओं पर ही उनके दर्शनों को मान्यता मिली है। तत्त्वहीन दर्शन कभी भी मान्य नहीं हो सकते। वर्तमान युग में जितने भी धर्म मान्य हैं, उसके पीछे उनके अनुयायियों की भावना उनके दर्शन के कारण स्थिर है। ऋषि-परम्परा के इस देश में जितने दर्शन बने हैं, उनके पीछे अनेक चिन्तकों का वर्षों का चिन्तन छिपा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैदिक धर्म की आधारभूमि पर ही सांख्य, मीमांसा, द्वैत, अद्वैत, विशिष्टाद्वैत आदि कई दर्शन जन्मे हैं। बौद्ध एवं जैन धर्म का अपना अलग दर्शन है। जहाँ बौद्ध और वैदिक ज्ञान प्रधान है वहीं जैन धर्म क्रिया व ज्ञान प्रधान है। बुद्ध और वेद शब्द का अभिप्राय है ज्ञान और जानना। जहाँ बुद्ध ने अपने चिन्तन से ज्ञान प्राप्त किया है, वहीं वैदिक ऋषियों ने अपने चिन्तन-मनन व ध्यान से संसार के बारे में जानकारी ग्रहण की और अपने विचार दिये। उन्होंने जाना उसे फिर दुनियाँ को बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैन धर्म आचार-प्रधान धर्म है। जैन शब्द की व्युत्पत्ति "जयत्तीति जिनः" से हुई है। अर्थात् जो जीतता है, उसे जिन कहते हैं। इसी कारण जैन धर्म को विजेताओं का धर्म माना जाता है। विजय प्राप्त करने के लिए कर्मों से युद्ध करना पड़ता है।जो अपने आप में महत्त्वपूर्ण क्रिया है। केवल मात्र ज्ञान से आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता, उसके लिए क्रिया की आवश्यकता, चारित्र की आवश्यकता है। दोनों का सम्यक् योग हो और उन पर सम्यग्दृष्टि का प्रभाव हो तो मुक्ति का पथ प्रशस्त हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सभी दर्शनों का लक्ष्य एक</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभी दर्शन मानव को सुखी बनाने का मार्ग बताते हैं। आत्मा दर्शन का केन्द्र बिंदु रहा है। उपनिषद्कारों ने चिन्तन-मनन के बाद अपने विचारों को मूर्त रूप दिया है। सांख्य दर्शनकार ने आत्मा के लिए कहा है।आत्मा अरूपी और चेतनायुक्त है, कर्मफल भोगने वाली, नित्य, सर्वव्यापी, क्रिया-शून्य, अकर्ता, निर्गुण और सूक्ष्म है। गीता में भी श्रीकृष्ण ने आत्मा की शाश्वतता के लिए अर्जुन को कहा- यह आत्मा न कभी जन्म लेती है, न कभी मरती है, क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है।श्वेताश्वतर उपनिषद् में लिखा है-यह आत्मा न स्त्री है, न पुरुष और न यह नपुंसक है। आत्मा जो-जो शरीर धारण करती है, यह उस-उस नाम से युक्त हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;">दशवैकालिक निर्युक्ति-भाष्य में आत्मा को नित्य, अविनाशी एवं शाश्वत माना गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मानव-जीवन आत्म-तत्त्व पर चिन्तन करने लगे तो उसे अपना जीवन अल्प लगेगा। हमारे समक्ष तो सत्य उद्घाटित हो चुका है। व्यर्थ वाद-विवाद में पड़कर महत्त्वपूर्ण जीवन को खोना नहीं है। विवाद और तर्क हमें दलदल में उलझा देते हैं। आप अपने आपको जैनी मानते हैं तो धर्म के प्रति श्रद्धा रखकर तत्त्वों को ग्रहण करें। जो वस्तु को जिस ढंग से देखता है, वह उसी रूप से उसको अभिव्यक्त करता है। जलती हुई अग्नि को देखकर तीन व्यक्ति अलग-अलग बातें बताते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक कहता है यह दाहक है, दूसरा कहता है यह तो आतप है, तीसरा उसे प्रकाशक कहता है। यह अब आपके सोचने की बात है कि आपकी दृष्टि उस प्रज्वलित अग्नि के लिए क्या है? आप चाहें तो एक रूप से देखें और चाहें तो समग्र रूप से देखें। सत्य को वास्तविक रूप से जानने के लिए उसका समग्र ज्ञान आवश्यक है। अमरीका-प्रवास के समय स्वामी विवेकानंद भारत की गौरवमयी सांस्कृतिक विरासत पर अपने विचार प्रकट कर रहे थे। उस समय एक अमरीकी ने व्यंग्य की भाषा में कहा - स्वामी जी ! भारतीय संस्कृति के प्रणेताओं की प्रशंसा कहाँ तक की जाए, जिन्होंने लक्ष्मी का वाहन तो उल्लू को बनाया है और सरस्वती का हंस। क्या यही आपका सांस्कृतिक गौरव है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सुनकर विवेकानन्द ने कहा- "बस, यही तो आपका दृष्टि-भेद है। हमारी व आपकी संस्कृति में यही अन्तर है। हमारा दर्शन कहता है कि धन आदमी को अंधा बना देता है, उल्लू की तरह। इसलिए लक्ष्मी का वाहन उल्लू चुना गया है। सरस्वती विद्या की प्रतीक है जो हमारे विवेक को जगाने वाली है। अतः उनका वाहन हंस रखा गया है, जो नीर-क्षीर-न्याय का प्रतीक है। विवेकानन्द की बात सुनकर बेचारा अमरीकी अपना-सा मुँह लेकर चुपचाप बैठ गया।हर व्यक्ति अपने-अपने ढंग से वस्तु को देखते हैं। कुछ रूप को देखते हैं, कुछ गुण को देखते हैं। कुछ दोनों ही देखते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक व्यक्ति अपने बीमार बेटे को लेकर डॉक्टर के घर गया तो डॉक्टर की पत्नी ने कहा- डॉक्टर साहब तो अस्पताल गये हैं। वह व्यक्ति अस्पताल पहुँचा तो पता चला कि वे अभी तक घर से अस्पताल नहीं आये हैं। अब सत्य क्या है ? तत्त्वज्ञान में यही बात सोचने व विचारने की है। उसमें हठवाद या दुराग्रह को कहीं भी स्थान नहीं है।जैन धर्म पदार्थ के अनन्त धर्म को स्वीकारता है। किसी वस्तु या पदार्थ में एक ही गुण नहीं होता। भगवान महावीर ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा, पहचाना, अनुभव किया तब उसे प्रकट किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जैन धर्मज्ञों को सही मायने में जैन बनने का प्रयत्न करना चाहिए। सर्वज्ञ की वाणी का चिन्तन-मनन करना चाहिए। उन्होंने अपरिग्रहवाद का चिन्तन दिया है। जीवन-निर्वाह हेतु धन का अर्जन बुरा नहीं है लेकिन धन कुबेर बनने का विचार भी गलत है। अधिक धनार्जन की भूख व्यक्ति को धर्म-पथ से विचलित कर देती है। दूसरे के धन को धूल समझना चाहिए। क्या अपने आपको धर्मज्ञ समझने वाले सभी यह सोचते हैं?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिंसा मोक्ष मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। कोई भी धर्म हिंसामय नहीं हो सकता। सन्त और गृहस्थ दोनों को हिंसा के मार्ग से बचना चाहिए। गृहस्थ पूर्ण रूप से हिंसा से नहीं बच सकता, लेकिन जान-बूझकर की जाने वाली हिंसा से स्वयं को बचा सकता है। त्याग-भावना से हिंसा कमजोर पड़ती है। अतः तप, त्याग, दान से अनजाने में हुई हिंसा के दबाव को कम किया जा सकता है। मन, वचन और कर्म से जान-बूझकर किसी के मन को चोट पहुँचाना हिंसा है। अतः इससे बचने का प्रयास करें। कभी-कभी दया भी हिंसा का रूप ले लेती है। अतः प्रत्येक कार्य विचारपूर्वक करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक सन्त तालाब के किनारे बैठे हुए चिन्तन कर रहे थे। उन्होंने किनारे पर खड़े कुछ बगुलों को देखा, जो अपने शिकार की खोज में खड़े थे। एक सज्जन कुछ आटे की गोलियाँ बनाकर लाये, उन्होंने तालाब के जल में बिखेर दीं। आटे की सुगन्ध से आकर्षित होकर अनेक मछलियाँ जो अब तक गहरे पानी में थीं, किनारे की ओर चल पड़ीं। बगुले उन मछलियों को अपना आहार बना गये। सन्त का हृदय करुणा से मर गया। उन्होंने आटे की गोलियाँ डालने वाले से कहा- "भाई ! देखो बगुले क्या कर रहे हैं?" वह बोला- "मछलियाँ खा रहे हैं।" "तुमने आटा डालकर मछलियों को जीवन दिया है या मृत्यु ? तुम्हारे आटा डालने से ये इधर आईं और मृत्यु के मुख में चली गईं। तुम्हारी दया हिंसा में बदल गई है।" उस व्यक्ति को अपनी भूल पर पश्चात्ताप हुआ, लेकिन अब क्या हो सकता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवा-भाव का भी जैन धर्म में महत्त्वपूर्ण स्थान है। विना किसी चाह के दूसरों को देना, सहयोग करना, सहायता करना सेवा है। पशु-पक्षियों को बाँधकर उन्हें खिलाना-पिलाना सेवा नहीं कहलाती है। बन्धन कोई नहीं चाहता, तो उन्हें जंजीर से बाँधना, पिंजरे में रखना उचित नहीं है।महाराजा रणजीतसिंह एक दिन सवेरे सवेरे घूमने के लिए जा रहे थे। अचानक उनके सिर पर पत्थर लगा। वे सिर थामकर वहीं बैठ गये। कुछ ही क्षणों में उनके पीछे-पीछे चलने वाले राज्य कर्मचारी एक वृद्धा को पकड़ लाये। महाराज को देखकर वृद्धा घबरा गई और अपने किये पर क्षमा माँगने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रणजीतसिंह ने कहा- माँ ! तुम पत्थर क्यों फेंक रही थीं?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">महाराज ! मेरे हाथ वृक्ष तक पहुँच नहीं सकते, घर में और कोई है नहीं, इन आमों को ऐसे ही तोड़कर बेचती हूँ और अपना गुजारा करती हूँ।रणजीतसिंह ने कहा- वृक्ष को पत्थर मारने पर वह फल देता है और मैं सजा देने की सोच रहा था। नहीं, यह ठीक नहीं है। मैं इंसान हूँ। मुझे कुछ ऊँची बात सोचनी चाहिए। उन्होंने उसी समय मंत्री को आदेश दिया कि इस वृद्धा माँ का सारा खर्चा राजकोष से प्रदान किया जाये। राज्य में जिन वृद्ध पुरुषों या स्त्रियों के सन्तान नहीं हों और वे स्वयं मेहनत करते हों, उन्हें भी सहायता देने की व्यवस्था की जाये।यह है सच्ची सेवा। धर्म के पथ पर चलने वालों को धर्म के तत्त्वों का ज्ञान आवश्यक है और वही उनके जीवन को कल्याणमय बना सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 18:01:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका द्वारा ईरान का भया दोहन, ट्रंप ईरान में वेनेजुएला की तरह नियंत्रण चाहते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच गत कुछ महीनों में तनाव एक नए शिखर पर पहुँच गया है। जिसमें न केवल कूटनीतिक, वाणिज्यिक दबाव बल्कि विस्तृत सैन्य तैयारियों और खुले रूप से युद्ध की धमकियाँ भी शामिल हैं।  पिछले कई महीनों की घटनाओं से यह स्पष्ट नजरिया सामने आया।है कि यह केवल रीजनल तनाव नहीं रहा बल्कि वैश्विक राजनीति का एक प्रमुख केन्द्र बन गया है। अमेरिका अभी भी आर्थिक,सामरिक एवं राजनीतिक तौर पर शक्तिशाली राष्ट्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">और आर्थिक रूप से अमेरिका ने ईरान पर बड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिसमें तेल निर्यात और वित्तीय लेन-देन को रोकने के साथ-साथ ईरान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167913/us-exploiting-irans-fear-trump-wants-control-in-iran-like"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/ar3-29.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच गत कुछ महीनों में तनाव एक नए शिखर पर पहुँच गया है। जिसमें न केवल कूटनीतिक, वाणिज्यिक दबाव बल्कि विस्तृत सैन्य तैयारियों और खुले रूप से युद्ध की धमकियाँ भी शामिल हैं।  पिछले कई महीनों की घटनाओं से यह स्पष्ट नजरिया सामने आया।है कि यह केवल रीजनल तनाव नहीं रहा बल्कि वैश्विक राजनीति का एक प्रमुख केन्द्र बन गया है। अमेरिका अभी भी आर्थिक,सामरिक एवं राजनीतिक तौर पर शक्तिशाली राष्ट्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">और आर्थिक रूप से अमेरिका ने ईरान पर बड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिसमें तेल निर्यात और वित्तीय लेन-देन को रोकने के साथ-साथ ईरान के सहयोगी देशों और संस्थाओं पर भी अतिरिक्त टैक्स तथा दंडात्मक कार्रवाई शामिल है। जिससे एजेंसी डेटा बताते हैं कि ईरान की निर्यात-आय सीमित हो रही है, जिससे व्यापक आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह प्रतिबंध और दबाव ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम और क्षेत्रीय समर्थित आतंकवाद को रोकने के उद्देश्य से हैं, लेकिन ईरानी नेतृत्व इसे अपने संप्रभुत अधिकारों पर आक्रमण मानता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सैन्य दृष्टि से, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है और तैनात नौसेना बलों को बड़ा आकार दे दिया है ट्रंप ने बयान दिया है कि यह बेड़ा उस से भी बड़ा है जो उसने वेनेजुएला पर उसकी कार्रवाई से पहले तैनात किया था, और यह बल अब्राहम लिंकन जैसे युद्धपोतों के साथ समुद्री और वायु समूहों को शामिल करता है।  अमेरिका का यह बल ‘निर्दिष्ट मिशन के लिये तैयार, इच्छुक और सक्षम’ बताया जा रहा है और ट्रंप इसे ईरान को बातचीत की मेज़ पर लाने के लिये दबाव का हिस्सा मानते हैं, यह कहते हुए कि “हम उम्मीद करते हैं कि ईरान सौदा करना चाहेगा”। अमेरिका के सभी विकल्प खुले रहने की बात करने से यह संकेत भी मिलता है कि सैन्य हमले की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा रहा है।<br /><br />ईरान ने जवाब में अपनी सैन्य तैयारियाँ तेज कर रखी हैं, जिसमें रिपोर्टें बताती हैं कि उसने हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की हैं और अपनी क्षमता को बढ़ाया है, साथ ही यह कहा है कि किसी भी हमले का उत्तर ‘तुरंत और अप्रत्याशित’ रूप से दिया जाएगा।  इरानी नेतृत्व ने युद्ध नहीं चाहने का दावा किया है, लेकिन सजग चेतावनी दी है कि “हम देश को युद्ध की राह पर नहीं ले जाना चाहते” और आरोप लगाया है कि अमेरिका ईरान को ‘निगल’ जाना चाहता है, जो तनाव को भावनात्मक रूप से और बढ़ाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कुछ विश्लेषक और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी यह मानते हैं कि सैन्य हमले की संभावना “एक बार तय” जैसे दृष्टिकोण में पहु‍ँच चुकी है और यह समय की बात है कि हमला कब होगा, न कि क्या होगा, जिससे युद्ध की तैयारी का माहौल और गहराता जा रहा है।  इसी बीच ईरान के भीतर भी व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की मौत की खबरें आईं हैं और यह स्थिति आंतरिक असंतोष तथा अमेरिका-के खिलाफ रुख को एक साथ बढ़ा रही कूटनीतिक रूप से, ताज़ा सूचनाओं के अनुसार ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे अमेरिका के साथ एक ‘न्यायसंगत’ बातचीत के लिये तैयार हैं, बशर्ते वह धमकियों के साये में न हो।,</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बातचीत के आयोजन के लिये प्रगति हो रही है। यह दर्शाता है कि खुले युद्ध के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयास भी चल रहे हैं। अरब देश, तुर्की और अन्य क्षेत्रीय शक्तियाँ भी संघर्ष को रोकने के लिये सक्रिय मध्यस्थता कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसी भी बड़े खुला युद्ध का प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हम अमेरिका के सैन्य तैनाती और आर्थिक दबाव की तुलना वेनेजुएला से करें, तो स्पष्ट रूप से अमेरिका ने पहले वेनेजुएला के खिलाफ ऑपरेशन सदर्न स्पियर जैसे अभियान में नौसेना तथा सैन्य बल का इस्तेमाल किया था, जिसमें राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ने और शासन को बदलने की कोशिश की गई थी, जिसमें कूटनीतिक विवाद और अंतरराष्ट्रीय आलोचना भी उत्पन्न हुई थी। ट्रंप के बयान के अनुसार, ईरान के लिये जो सैन्य समूह भेजा जा रहा है वह उससे भी बड़ा है, जो संकेत देता है कि अमेरिकी प्रशासन इसे वेनेजुएला की तरह एक सीमित राजनैतिक,सैन्य ऑपरेशन से भी आगे देख रहा है।<br /><br />लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप ने खुले तौर पर कहा है कि वे चाहते हैं ईरान बातचीत करे और यह कि “हम युद्ध नहीं चाहते”, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों ने उद्धृत किया है।  ट्रंप की इस दोहरे रणनीति को कुछ विश्लेषक ‘ब्रिंकमैनशिप’  नीति कह रहे हैं, जहां खुला युद्ध अंतिम विकल्प रखा जाता है पर बातचीत को भी कायम रखा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहाँ यह समझना जरूरी है कि ईरान जैसे क्षेत्रीय शक्ति पर अमेरिका का दबाव केवल सीधा सैन्य संघर्ष नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक प्रतिबंध, वैश्विक कठोर राजनैतिक दबाव तथा सैन्य रणनीतिक तैयारियों का संयोजन है। ईरान भी केवल कूटनीतिक रूप से नहीं बल्कि सामरिक रूप से भी तैयार दिख रहा है। मिसाइल कार्यक्रम, बलों की तैनाती, और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया रूस और चीन जैसे देशों द्वारा कभी-कभी समर्थन का संकेत — यह संकेत देते हैं कि— यानी बातचीत को युद्ध की कगार पर ले जाकर समझौता करने की ईरान अकेला नहीं है, और एक सीधा युद्ध बहुत खतरनाक और व्यापक बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वेनेजुएला की तुलना में ईरान अन्तरराष्ट्रीय महत्व और रणनीतिक स्थितियों की वजह से कहीं बड़ा मामला है। वेनेजुएला में अमेरिका ने मुख्यतः दक्षिण अमेरिका में राजनीतिक नियंत्रण और ऊर्जा साधनों पर प्रभाव के लिये कदम उठाये, जबकि ईरान मध्य पूर्व में तेल मार्ग, न्यूक्लियर कार्यक्रम तथा सामरिक प्रभाव के केन्द्र में है। अगर ट्रंप ईरान को वेनेजुएला की तरह कब्जे या शासन परिवर्तन के लिये ले जाने की कोशिश करे, तो यह केवल एक राष्ट्र का सैनिक अधिपत्य नहीं बल्कि एक वैश्विक प्रतिद्वंदी शक्ति को नियंत्रित करने का प्रयास होगा, जिसका परिणाम क्षेत्रीय युद्ध, तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल, और विश्व राजनीति में और गहरी विभाजन की स्थिति हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय ताज़ा हालात यह संकेत देते हैं कि अमेरिका पूरी सैन्य तैयारी के साथ खड़ा है, ईरान भी कठोर प्रतिक्रिया के लिये तैयार है, और कूटनीतिक प्रयास संघर्ष को नियंत्रण में रखने के लिये जारी हैं ।लेकिन खुला युद्ध अभी टल नहीं पाया है और दोनों पक्षों की कठिन स्थिति वैश्विक राजनीति के लिये बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या ट्रंप ईरान को वेनेजुएला की तरह अपने अधिपत्य में ले सकता है? वर्तमान संकेत यह दिखाते हैं कि सैन्य नियंत्रण के बजाय अमेरिका अधिकतर दबाव और बातचीत के द्वारा ही परिणाम चाहता है, पर यह भी स्पष्ट है कि अगर ईरान बातचीत में मुख्य शर्तें नहीं मानता तो सैन्य विकल्पों को पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है और यह सम्भावना वैश्विक राजनीति के लिये गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।<br /><br />संजीव ठाकुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 17:57:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>तो इन्हें सताता है देश की बदनामी का डर ?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:large;"><strong>तनवीर जाफ़री</strong></span></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भारतीय जनता पार्टी के नेता व समर्थक अक्सर यह आरोप लगाते रहते हैं कि वे विदेशी की धरती पर भारतीय राजनीति, संस्थानों चुनाव आयोग, न्यायपालिका या भारतीय मीडिया व सरकार की आलोचना करके देश की छवि को ख़राब करते रहते हैं। इतना ही नहीं बल्कि भाजपा इसे "देश-विरोधी" या "भारत को बदनाम करने" की साज़िश तक बताती है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> सवाल यह है कि आख़िर किन बातों से देश की बदनामी होती है और बदनामी और नेकनामी का पैमाना है </strong><strong>क्या </strong><strong>? </strong><strong>  याद कीजिये जब राहुल गांधी ने 2023 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (यू के</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अभी</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167911/so-they-are-afraid-of-defaming-the-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><span style="font-size:large;"><strong>तनवीर जाफ़री</strong></span></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भारतीय जनता पार्टी के नेता व समर्थक अक्सर यह आरोप लगाते रहते हैं कि वे विदेशी की धरती पर भारतीय राजनीति, संस्थानों चुनाव आयोग, न्यायपालिका या भारतीय मीडिया व सरकार की आलोचना करके देश की छवि को ख़राब करते रहते हैं। इतना ही नहीं बल्कि भाजपा इसे "देश-विरोधी" या "भारत को बदनाम करने" की साज़िश तक बताती है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> सवाल यह है कि आख़िर किन बातों से देश की बदनामी होती है और बदनामी और नेकनामी का पैमाना है </strong><strong>क्या </strong><strong>? </strong><strong> याद कीजिये जब राहुल गांधी ने 2023 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (यू के ) में कहा कि भारत में विपक्ष को दबाया जा रहा है और चीन का ख़तरा समझा नहीं जा रहा है। इसमें राहुल ने क्या ग़लत कहा था ? परन्तु भाजपा ने राहुल के इस सच्चाई भरे वक्तव्य को "भारत को बदनाम करना" बताया था। इसी तरह जब 2023 में कोलंबिया की एक यूनिवर्सिटी में राहुल ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र पर "हमला" हो रहा है और कुछ बड़े व्यापारियों का अर्थव्यवस्था पर क़ब्ज़ा है तब भी भाजपा ने इसे राहुल द्वारा "विदेशी धरती पर भारत को बदनाम करना" बताया था। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>अभी कुछ समय पूर्व ही जब राहुल गाँधी ने बर्लिन (जर्मनी) में चुनाव आयोग पर सवाल उठाए और कहा कि हरियाणा चुनाव में धांधली हुई उस समय भी भाजपा ने इसे "संस्थानों को बदनाम करने की साज़िश " बताया था। राहुल गाँधी के ऐसे आरोपों से भाजपा इतना तिलमिला जाती है कि वह राहुल की आलोचना को "एंटी-इंडिया फ़ोर्सेज़ " से जोड़कर कांग्रेस को कमज़ोर करने की कोशिश करने लगती  है। यहाँ तक कि कुछ भाजपा  नेता इसे "चाइना की तारीफ़ " या "विदेशी हस्तक्षेप" को आमंत्रित करने तक के रूप में परिभाषित कर देते हैं। भाजपाई कहते हैं कि इससे भारत की "ग्लोबल इमेज" ख़राब होती है</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>इस विषय पर कांग्रेस व राहुल गाँधी का कहना है कि वे सिर्फ़ "सच्चाई" बोलते हैं,और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है। लिहाज़ा राहुल भाजपा के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि चीन जैसे मुद्दों पर तो मोदी ख़ुद ही विदेश में भारत को बदनाम करते हैं। कुछ का मत है कि राहुल विदेश में कुछ नया नहीं कहते,वे भारत में भी यही कहते हैं। कांग्रेस के अनुसार समस्या चुनावी प्रक्रिया में है, न कि आलोचना में। </strong><strong>कांग्रेस </strong><strong>इसे "साइलेंट करने" की कोशिश बताती है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> और सच भी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेता प्रायः विदेश में अपनी सरकार की आलोचना करते हैं, और यह 'फ़्री स्पीच' का हिस्सा माना जाता है। इससे देश की बदनामी नहीं होती, बल्कि इससे किसी भी देश के लोकतान्त्रिक मूल्य नज़र आते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह भी कि ऐसे भी कोई प्रमाण नहीं है कि विदेश में की गयी राहुल की बातों से भारत की अर्थव्यवस्था, निवेश या कूटनीति पर कभी कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा हो। सरकार ख़ुद ही तो बताती रहती है कि भारत की जी डी पी ग्रोथ और ग्लोबल रैंकिंग मज़बूत बनी हुई है?</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>इसी तरह राहुल गांधी व कांग्रेस के कई नेता नरेंद्र मोदी पर </strong><strong>भी </strong><strong>यह आरोप लगा चुके हैं कि वे विदेशी धरती पर भारत या पिछले 70 वर्षों के शासन की आलोचना कर देश को बदनाम करते हैं। नरेंद्र मोदी ने 2014 से 2023 के दौरान देश विदेश में कई बार यह दोहराया कि "पिछले 70 सालों में भारत में कुछ ख़ास नहीं हुआ", " पहले लोग भारत में जन्म लेना दुर्भाग्य मानते थे", या "70 साल में विकास नहीं हुआ"। इसी तरह मोदी ने 2022 में रूस में एक कार्यक्रम में भारत के पिछड़ापन, ग़रीबी या पिछली सरकारों की कमियों पर बात की थी।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> अमेरिका, यूके या अन्य देशों में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मोदी ने अक्सर पूर्व सरकारों की "कमज़ोर विदेश नीति", उनके "घोटालों" या उस दौर में "विकास की कमी" पर ज़ोर दिया है । कांग्रेस भी मोदी की इन बातों को "भारत की बदनामी" बताती है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी ने कम से कम 4-5 बार विदेश में ऐसा कहा कि कांग्रेस शासन में "भारत को दुनिया ने गंभीरता से नहीं लिया" या "पिछले शासकों ने देश को कमज़ोर बनाया" आदि । कांग्रेस इसे भारत और भारतीयों ख़ास तौर से पिछली पीढ़ियों का अपमान मानती है, क्योंकि यह कांग्रेस के शासन काल को नकारात्मक रूप से पेश करता है। राहुल गांधी ने 2023 में लंदन में कहा भी था कि मोदी ख़ुद विदेश में भारत को बदनाम करते हैं, क्योंकि वे हर भारतीय, उनके माता-पिता और दादा-दादी का अपमान करते हैं।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ऐसे में यह समझना भी ज़रूरी है कि दरअसल सत्ता व विपक्ष के उपरोक्त आरोपों प्रत्यारोपों से ही देश की बदनामी होती है या फिर इसतरह के आरोप प्रत्यारोप ही एक दूसरे नेताओं व उनके दलों को नीचा दिखाने व उन्हें जनता में बदनाम करने जैसा एक षड्यंत्र मात्र है ? या फिर वास्तव में जनता को इस तरह की बहस में उलझाकर उन वास्तविक समस्याओं व विषयों पर पर्दा डालने का प्रयास है जिससे हक़ीक़त में देश की बदनामी होती है ? क्या ग़लत कहते है राहुल गांधी कि चुनाव आयोग संदिग्ध है ? वे </strong><strong>चुनाव आयोग सामने </strong><strong>कितने सबूत पेश कर चुके जिनका कोई जवाब नहीं आया ? क्या देश के अनेक महत्वपूर्ण संस्थानों व संसाधनों पर अडानी का क़ब्ज़ा नहीं होता जा रहा ? </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>क्या सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग विपक्ष को परेशान करने के लिये नहीं किया जा रहा ? जब देश में मॉब लिंचिंग होती है तो क्या देश की बदनामी नहीं होती ? देश में सत्तारूढ़ दल की ओर से मंत्री व मुख्यमंत्री स्तर के लोग खुले आम साम्प्रदायिकता फैलाने वाली बातें कर ओछी राजनीति करते हैं तो क्या देश की बदनामी नहीं होती ? देश की राजनीति को संविधान से अलग हटकर सांप्रदायिकता के रंग में चलाने के प्रयास क्या देश की बदनामी का कारण नहीं ? कितने लुटेरे जिनमें अधिकांश गुजराती,देश की अरबों रुपये लूटकर विदेशों में बैठे हैं क्या यह बदनामी की वजह नहीं ?</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> देश के सर्वोच्च धर्माधिकारी शंकराचार्य जी को व उनके सहयोगियों को संगम तट पर मारा पीटा गया क्या वह देश की बदनामी की वजह नहीं ? नक़ली डिग्री धारक लोग सत्ता में सर्वोच्च पदों पर बैठे हों,यह बदनामी की बात नहीं ? संसद विधानसभा व मंत्रिमंडल में भ्रष्ट,बलात्कारियों व अन्य अपराधियों का शामिल होना क्या बदनामी की बात नहीं ? गाँधी के हत्यारों का महिमामंडन क्या देश की बदनामी नहीं ? सत्ता द्वारा बलात्कारियों व अपराधियों को संरक्षण क्या बदनामी की वजह नहीं ? बड़ा आश्चर्य है कि देश की बदनामी इबारत लिखने वालों को ही देश की बदनामी का दर सताता रहता है? </strong>  <span style="font-size:large;"><strong> </strong></span></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 17:53:19 +0530</pubDate>
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                <title>थाईलैंड में इंसानियत की मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:11.25pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;color:#2d2d2d;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थाईलैंड की एक साधारण सड़क</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहाँ ट्रैफिक का शोर हमेशा गूँजता रहता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक दिन जीवन की सबसे सुंदर ध्वनि का गवाह बन गई। यह केवल एक खबर नहीं थी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया के दिलों को जोड़ने वाला वह पल था</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है। अस्पताल <span>  </span>पहुँचने से पहले ही</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेज़ ट्रैफिक के बीच एक चलती गाड़ी में एक बच्चे ने जन्म ले लिया। कुछ ही सेकंडों में वह सड़क एक साधारण रास्ते से बदलकर उम्मीद और संवेदना का जीवंत मंच बन गई। यह घटना न केवल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167909/example-of-humanity-in-thailand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:11.25pt;line-height:normal;background:rgb(246,246,246);text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;color:#2d2d2d;" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';color:#2d2d2d;" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थाईलैंड की एक साधारण सड़क</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहाँ ट्रैफिक का शोर हमेशा गूँजता रहता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक दिन जीवन की सबसे सुंदर ध्वनि का गवाह बन गई। यह केवल एक खबर नहीं थी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया के दिलों को जोड़ने वाला वह पल था</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है। अस्पताल <span> </span>पहुँचने से पहले ही</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तेज़ ट्रैफिक के बीच एक चलती गाड़ी में एक बच्चे ने जन्म ले लिया। कुछ ही सेकंडों में वह सड़क एक साधारण रास्ते से बदलकर उम्मीद और संवेदना का जीवंत मंच बन गई। यह घटना न केवल थाईलैंड की व्यस्त सड़कों की कहानी है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि मानवता की उस शक्ति का प्रतीक है जो विपत्ति में भी प्रकाश फैला देती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कल्पना कीजिए उस दृश्य को—बैंकॉक या अयुत्थाया जैसी जगह पर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहाँ कारें</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्कूटर और ट्रक लगातार दौड़ते रहते हैं। एक गर्भवती महिला</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपनी माँ या पति के साथ कार में सवार</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अस्पताल की ओर जा रही है। अचानक प्रसव पीड़ा इतनी तीव्र हो जाती है कि रुकना ही एकमात्र विकल्प बचता है। गाड़ी सड़क के किनारे रुकती है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और डरावनी चीखें हवा में गूँजने लगती हैं। आसपास के वाहन रुकते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हॉर्न की कर्कश आवाज़ें धीरे-धीरे शांत हो जाती हैं। पहले तो लोग समझ ही नहीं पाते कि क्या हो रहा है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन जैसे ही खबर फैलती है—"डिलीवरी हो रही है!"—एक चमत्कार घटित हो जाता है। हर दिशा से लोग दौड़ पड़ते हैं। कोई अजनबी चालक पानी की बोतल थमा देता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोई दुपहिया सवार साफ़ कपड़ा लाकर देता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो कोई बस खड़ा होकर प्रार्थना करता है। ट्रैफिक जाम</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो हमेशा अभिशाप लगता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पल सुरक्षा की एक चादर बन जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माँ का चेहरा—वह घबराहट</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दर्द और अनिश्चितता से भरा होता है। पसीने से तर</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आँसुओं से भीगा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वह हर पल सोच रही होती है कि क्या सब ठीक होगा। लेकिन फिर वह क्षण आता है जब बच्चे की पहली किलकारी हवा में गूँजती है। रोने की वह मधुर ध्वनि न केवल माँ के कानों तक पहुँचती है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि हर मौजूद इंसान के दिल को छू जाती है। चेहरा बदल जाता है—डर के बादल छँट जाते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और खुशी के आँसू बहने लगते हैं। ममता की वह विजय होती है जहाँ आँसू तकलीफ के नहीं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जीवन की जीत के प्रतीक बन जाते हैं। अजनबी लोग अब अजनबी नहीं रहते</span><span>; </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वे एक बड़े परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। कोई बच्चे को गोद में लेता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोई नाभि नाल काटने में मदद करता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो कोई एम्बुलेंस को फोन कर तुरंत बुला लेता है। यह दृश्य कैमरों में कैद होता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन इसका असर शब्दों से परे होता है—यह महसूस करने वाला होता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थाईलैंड में ऐसी घटनाएँ असामान्य नहीं हैं। देश की घनी आबादी और भयानक ट्रैफिक जाम अक्सर ऐसी अप्रत्याशित स्थितियों को जन्म देते हैं। कुछ वर्ष पहले अयुत्थाया में एक महिला ने पिकअप ट्रक के पीछे बच्चे को जन्म दिया था। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ। इसी तरह</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैंकॉक की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अक्सर फँसी गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी में मदद करते हैं। एक अधिकारी ने तो 47 से अधिक बच्चों को सड़क पर ही जन्म दिया है। ये कहानियाँ थाई संस्कृति की गहराई को दर्शाती हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहाँ बौद्ध धर्म की करुणा और सामुदायिक भावना हर कदम पर झलकती है। थाईलैंड में </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सनुक</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">या सामूहिक सहायता की परंपरा इतनी मजबूत है कि विपदा में हर कोई अपना मान लेता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह घटना केवल स्थानीय नहीं रही</span><span>; </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया ने इसे वायरल कर दिया। वीडियो में दिखता है कैसे ट्रैफिक थम जाता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लोग मोबाइल निकालकर रिकॉर्ड करते हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन साथ ही मदद के लिए आगे आते हैं। दुनिया भर से कमेंट्स आए—भारत से लोग इसे अपनी सड़कों से जोड़ते हुए बोले कि यहाँ भी ऐसा ही होता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका से कोई कहता है कि यह मानवता का सच्चा चित्र है। यह पल हमें याद दिलाता है कि आधुनिक दुनिया की भागदौड़ में भी इंसानियत की जड़ें गहरी हैं। महामारी के दौर में जब लोग अलग-थलग पड़ गए थे</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसी कहानियाँ आशा की किरण बनकर चमकीं। बच्चे का जन्म न केवल एक माँ की खुशी था</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि पूरी सड़क की साझा विजय थी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन इस घटना से गहरे सबक भी मिलते हैं। पहला</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सेवाओं की कमी। थाईलैंड जैसे विकासशील देश में ट्रैफिक और दूरस्थ अस्पतालों के कारण ऐसी स्थितियाँ बार-बार बनती हैं। सरकार को मोबाइल एम्बुलेंस और ट्रैफिक पुलिस को विशेष ट्रेनिंग देनी चाहिए। दूसरा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सामुदायिक जागरूकता। स्कूलों और कॉलेजों में ऐसी कहानियाँ पढ़ाई जानी चाहिए ताकि नई पीढ़ी सहायता की संस्कृति सीखे। तीसरा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग। वायरल वीडियो ने न केवल प्रेरित किया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि दान अभियान भी चलाए गए जहाँ लोगों ने उस माँ के लिए मदद भेजी।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत के संदर्भ में देखें तो यह घटना और भी प्रासंगिक हो जाती है। दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक जाम रोज़ की बात है। क्या होगा अगर यहाँ ऐसी स्थिति बने</span><span>? </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हमारे यहाँ भी </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अतिथि देवो भव:</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की भावना है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन अक्सर भीड़ में व्यक्तिगत जिम्मेदारी कम हो जाती है। थाईलैंड की यह घटना हमें झकझोरती है—ट्रैफिक सिग्नल पर अगली बार फोन देखने के बजाय</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आसपास देखें। शायद कोई मदद माँग रहा हो। बॉलीवुड की फिल्मों में भी ऐसी कहानियाँ हैं</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रंगीला</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">या </span><span>'</span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मर्द</span><span>' </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में सड़क पर जन्म लेने वाले बच्चे</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन वास्तविक जीवन इससे कहीं अधिक प्रभावशाली है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस घटना का एक वर्ष बाद का प्रभाव देखें। वह बच्चा अब मासूम कदम उठा रहा होगा</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माँ गर्व से उसकी कहानी सुना रही होगी। सोशल मीडिया पर फॉलो-अप आया—परिवार ने थैंक्यू पोस्ट किया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें सभी मददगारों को याद किया। यह साबित करता है कि अच्छाई कभी व्यर्थ नहीं जाती। दुनिया तेज़ी से बदल रही है—एआई</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रोबोट</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वचालित कारें—लेकिन मानवीय स्पर्श की जगह कोई नहीं ले सकता। थाईलैंड की यह सड़क हमें सिखाती है कि जीवन कभी भी</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहीं भी आ सकता है</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और अगर इंसानियत साथ हो</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो हर रास्ता अस्पताल बन जाता है।</span></p>
<p style="margin:0in;margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय कभी-कभी खुद रुक जाता है ऐसे पलों में। दुनिया की भागमभाग में</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह चमत्कार हमें रोकता है और सोचने को मजबूर करता है—हम कितने भाग्यशाली हैं कि इंसान बने। यह कहानी नई पीढ़ी को सुनानी चाहिए</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ताकि इंसानियत की लौ कभी न बुझे। थाईलैंड की उस सड़क ने न केवल एक बच्चे को जन्म दिया</span><span>, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि लाखों दिलों में आशा का बीज बो दिया।</span></p>
<p style="margin:0in;margin-bottom:0.0001pt;text-align:justify;"><span> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 17:47:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक आरोह अवरोह में सतर्कतापूर्वक आगे बढ़े,मजबूत भारत सतर्क भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">लोकसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025- 26 देश की अर्थव्यवस्था का ऐसा दर्पण है जिसमें मजबूती आत्मविश्वास और सतर्कता तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश यह दस्तावेज केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत की आर्थिक दिशा का संकेतक भी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार यह सर्वे बताता है कि वैश्विक उथल पुथल और भू राजनीतिक तनावों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी जड़ों में मजबूत बनी हुई है और आगे बढ़ने की क्षमता रखती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025 26</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167687/move-cautiously-in-global-ups-and-downs-strong-india-cautious"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/hindi-divas49.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">लोकसभा में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025- 26 देश की अर्थव्यवस्था का ऐसा दर्पण है जिसमें मजबूती आत्मविश्वास और सतर्कता तीनों एक साथ दिखाई देते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश यह दस्तावेज केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत की आर्थिक दिशा का संकेतक भी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार यह सर्वे बताता है कि वैश्विक उथल पुथल और भू राजनीतिक तनावों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी जड़ों में मजबूत बनी हुई है और आगे बढ़ने की क्षमता रखती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2025 26 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर सात प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है जबकि 2026 27 में यह 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक मंदी की आशंकाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद यह दर भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनाए रखती है। यह संकेत देता है कि घरेलू मांग मजबूत है निवेश का माहौल सुधर रहा है और नीतिगत सुधारों का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सर्वेक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। बीते कुछ वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधारों ने मध्यम अवधि की विकास क्षमता को लगभग सात प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। कर सुधार डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार बुनियादी ढांचे में भारी निवेश और वित्तीय अनुशासन ने मिलकर ऐसी स्थिति बनाई है जिसमें भारत बाहरी झटकों को अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से झेल सकता है। हालांकि सर्वे यह भी चेतावनी देता है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच सतर्क रहना जरूरी है और अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान देना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महंगाई के मोर्चे पर यह सर्वे आम लोगों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच खुदरा महंगाई औसतन 1.7 प्रतिशत रही जो हाल के वर्षों में सबसे निचले स्तरों में से एक है। खास तौर पर सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट से घरेलू बजट पर दबाव कम हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां कई देश ऊंची महंगाई से जूझ रहे हैं वहीं भारत का यह प्रदर्शन उसकी मौद्रिक नीति और आपूर्ति प्रबंधन की सफलता को दर्शाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकारी वित्त की स्थिति को लेकर भी सर्वे में सकारात्मक तस्वीर उभरती है। राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.8 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसे और कम करने का लक्ष्य रखा गया है। यह संकेत देता है कि सरकार खर्च और आय के बीच संतुलन बनाने में सफल हो रही है। टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी खास तौर पर इनकम टैक्स दाताओं की संख्या का 9.2 करोड़ तक पहुंचना औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार का प्रमाण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। कुल जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 53.6 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आईटी सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल सर्विसेज और फाइनेंशियल सेवाओं के निर्यात ने भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया है। शहरी रोजगार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है जिससे शहरों में आय और उपभोग दोनों बढ़े हैं। यह क्षेत्र न केवल रोजगार सृजन कर रहा है बल्कि विदेशी मुद्रा कमाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बदलाव साफ नजर आता है। भारत अब केवल कम लागत वाले उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि मध्यम और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सर्वे के अनुसार इस क्षेत्र की लगभग 46.3 प्रतिशत गतिविधियां अब मीडियम और हाई टेक्नोलॉजी से जुड़ी हैं। बिजली स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों में उत्पादन और खपत में बढ़ोतरी से बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिली है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुनियादी ढांचे में निवेश को आर्थिक सर्वे ने विकास की गाड़ी का इंजन बताया है। केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च 2018 में 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सड़क रेलवे ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए इस निवेश ने न केवल निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दिया है बल्कि निजी निवेश के लिए भी अनुकूल माहौल बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विदेशी मुद्रा भंडार भारत की आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में सामने आया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है जो करीब ग्यारह महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। यह भंडार वैश्विक बाजारों में अचानक आने वाले झटकों से निपटने की क्षमता देता है और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रोजगार और गरीबी के मोर्चे पर भी सर्वे मिश्रित लेकिन सकारात्मक संकेत देता है। बेरोजगारी दर 2017 18 के 5.6 प्रतिशत से घटकर 2025 26 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। महिलाओं की श्रम बल भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जो 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 41.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बदलाव है। गरीबी दर में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है जो 2005 06 के 55.3 प्रतिशत से घटकर 2022 23 में 11.28 प्रतिशत रह गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र को लेकर सर्वे में यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाया गया है। 2025 26 में कृषि विकास दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की तुलना में कम जरूर है लेकिन स्थिर है। सर्वे में उर्वरकों के असंतुलित उपयोग पर चिंता जताई गई है और यूरिया सब्सिडी को नकद हस्तांतरण से जोड़ने का सुझाव दिया गया है ताकि मिट्टी की सेहत बनी रहे और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक सर्वे ने कुछ सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी रेखांकित किया है। जंक फूड की बढ़ती खपत को गंभीर समस्या बताते हुए इसके विज्ञापनों पर समय आधारित प्रतिबंध और पैकेट पर पोषण चेतावनी लेबल लगाने की सिफारिश की गई है। बच्चों में सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग को लेकर भी चिंता जताई गई है और आयु आधारित नियंत्रण तथा सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने की जरूरत बताई गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सोने और चांदी की कीमतों में जारी तेजी पर भी ध्यान दिलाया है। यह तेजी केवल भू राजनीतिक तनावों का परिणाम नहीं बल्कि वैश्विक फिएट करेंसी पर घटते भरोसे का संकेत भी है। ऐसे में कीमती धातुएं सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में आगे भी आकर्षक बनी रह सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण 2026 भारत की अर्थव्यवस्था की एक संतुलित तस्वीर पेश करता है। इसमें आत्मसंतोष की जगह आत्मविश्वास है और अति उत्साह की जगह सतर्कता। सर्वे यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत को अल्पकालिक दबावों से विचलित हुए बिना दीर्घकालिक सुधारों और नवाचार के रास्ते पर चलते रहना होगा। फर्राटा और मैराथन दोनों एक साथ दौड़ने की यह चुनौती ही भारत की आर्थिक यात्रा का सार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:49:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगलादेश में बेगुनाह हिन्दुओं के साथ बर्बरता कब तक? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong>  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बांग्लादेश में अब अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ अमानवीय बर्बरता हिंसा और अत्याचार का सिलसिला थम नही रहा है। भारत में 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भारत की शांति के संदेशवाहक के रूप में भूमिका को विश्व के सामने रख रही थीं, तभी भारत के पड़ोसी देश बंगलादेश में एक निर्दोष हिन्दू जो गैराज में सो रहा था उसको पैट्रोल डाल कर जिंदा जलाने का मामला सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों अनुसार चंचल आग में फंसा रहा और काफी देर तक तड़पता रहा। वह मदद के लिए चीख रहा था, लेकिन बाहर से शटर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167685/how-long-will-the-brutality-against-innocent-hindus-continue-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/hindi-divas48.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल</strong> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बांग्लादेश में अब अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ अमानवीय बर्बरता हिंसा और अत्याचार का सिलसिला थम नही रहा है। भारत में 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भारत की शांति के संदेशवाहक के रूप में भूमिका को विश्व के सामने रख रही थीं, तभी भारत के पड़ोसी देश बंगलादेश में एक निर्दोष हिन्दू जो गैराज में सो रहा था उसको पैट्रोल डाल कर जिंदा जलाने का मामला सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों अनुसार चंचल आग में फंसा रहा और काफी देर तक तड़पता रहा। वह मदद के लिए चीख रहा था, लेकिन बाहर से शटर लॉक था। उसे निकलने का रास्ता नहीं मिला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकल लोगों की सूचना पर फायर सर्विस पहुंची और आग बुझाने में करीब एक घंटा लगा, लेकिन चंचल पूरी तरह जल चुका था, मौके पर ही उसकी मौत हो गई। लोगों ने घटना को दिल दहला देने वाला बताया। स्थानीय दुकानदार राजीब सरकार ने सी.सी.टी.वी. कैमरे की फुटेज का हवाला देकर कहा कि यह हादसा नहीं था। कैमरे में दिखा कि कई लोग जानबूझकर शटर को आग लगा रहे हैं। लगभग 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बंगलादेश में 2024 के तख्तपलट के बाद से हालात अस्थिर बने हुए हैं। इस्लामी संगठनों की सक्रियता बढ़ने से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। बंगलादेश में हिंदू और सूफी मुस्लिम सहित अल्पसंख्यकों की आबादी 10 प्रतिशत से भी कम है। भारत ने बंगलादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के साथ हो रहे व्यवहार पर चिंता जताई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपरोक्त घटना बंगलादेश के नरसिंदी जिले की है। 23 वर्षीय चंचल के परिवार का कहना है कि यह एक सोची समझी हत्या है। बंगलादेश में 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल और शेख हसीना सरकार को गिराए जाने से जुड़ी डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग अमरीका से लीक होने के बाद नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। रिकॉर्डिंग लीक होने के बाद अवामी लीग ने अमरीका की भूमिका को लेकर सवाल उठाया है। बंगलादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने हाल ही में एक इवेंट में कहा कि यह ऑडियो अवामी लीग की लंबे समय से चली आ रही बात को सही साबित करता है कि शेख हसीना सरकार का गिरना पूरी तरह से एक ऑर्गेनिक प्रक्रिया नहीं थी। बीते कुछ वर्षों में बंगलादेश हो या फिर नेपाल, सरकार गिरने की घटना सामने आई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब बंगलादेश को लेकर लीक हुई यू.एस. डिप्लोमैटिक रिकॉर्डिंग ने वाशिंगटन को नए आरोपों के केंद्र में ला दिया है। एक बड़े डेली, स्ट्रैटन्यूज ग्लोबल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस रिकॉर्डिंग का जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक इस रिकॉर्डिंग में एक सीनियर अमरीकी डिप्लोमैट की बातचीत है, जिसमें वह बंगलादेश की इस्लामी राजनीतिक ताकतों से जुड़ने और हसीना के बाद के दौर में देश की चाल का अंदाजा लगाने के बारे में बात कर रहे हैं। इससे बंगलादेश में अमरीका की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है।शेख हसीना की सरकार के गिरने से लेकर आज तक बंगलादेश में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। यूनस सरकार अमेरिका की कठपुतली सरकार ही है। कट्टरपंथी सरकार पर हावी है। हिन्दुओं पर अत्याचार जारी है। आर्थिक स्थिति भी दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगलादेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डालने वाले एक बड़े फैसले में बंगलादेश टैक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (बी.टी.एम.ए.) ने देशभर की सभी टैक्सटाइल मिलों को 1 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान किया है। एसोसिएशन ने इसके पीछे भारी वित्तीय नुकसान और घरेलू यार्न उत्पादकों को बचाने में अंतरिम सरकार की कथित उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। करीब 23 अरब डॉलर मूल्य वाला बंगलादेश का टैक्सटाइल उद्योग देश के गारमेंट सैक्टर की रीढ़ है, जो कुल निर्यात आय का 85 प्रतिशत हिस्सा देता है। चुनाव से पहले मिल बंदी की धमकी से सप्लाई चेन टूटने, मजदूरी भुगतान में देरी और व्यापक आर्थिक संकट की आशंका बढ़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नए बंद से लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। बी.टी.एम.ए. के अनुसार पिछले 30 दिनों से स्पिनिंग मिलें केवल 50 प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं। इस अवधि में उद्योग को 12,000 से 15,000 करोड़ टका का नुकसान हुआ है। जिससे बैंक ऋण चुकाने में असमर्थता बढ़ गई है और देश की वित्तीय प्रणाली पर खतरा मंडरा रहा है। रसेल ने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में उत्पादन जारी रखना असंभव है। उन्होंने कहा कि यदि इस संकट के कारण बैंकिंग सैक्टर में अस्थिरता पैदा होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। बी.टी.एम.ए. अध्यक्ष ने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मैं सभी मंत्रालयों और संबंधित विभागों के चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन हर कोई जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल रहा है। कोई ठोस फैसला नहीं लिया जा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि टैक्सटाइल क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) में करीब 13 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन सरकार इस सैक्टर की समस्याएं सुनने के लिए 13 मिनट भी नहीं निकाल पा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगलादेश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण वहां की सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव ही पड़ रहा है। कट्टरपंथियों के हावी होने से वहां के अल्पसंख्यक समुदाय विशेषतया हिन्दुओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर भीड़ द्वारा किए गए हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं, जो भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की है। 18 दिसंबर को एक कपड़ा कारखाने में काम करने वाले दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोपों पर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और बाद में आग लगा दी। कुछ दिनों बाद अमृत मंडल को राजबारी जिले में जबरन वसूली के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बावजूद हिंसा जारी है। पिछले सप्ताह, कालीगंज में भीड़ के हमले में हिंदू व्यापारी लिटन चंद्र दास की हत्या कर दी गई। एक अन्य मामले में पेट्रोल पंप पर बिना भुगतान किए भाग रहे वाहन को रोकने की कोशिश में पेट्रोल पंप कर्मचारी रिपन साहा को कुचलकर मार डाला गया।बंगलादेश के आंतरिक हालातों को देखते हुए भारत को अति सतर्क होने की आवश्यकता है। फरवरी में होने वाले चुनावों के बाद स्थिति में सकारात्मक बदलाव आने की आशा है। लेकिन अगर उसके बाद भी स्थिति नहीं बदलती तो भारत को वहां के हिन्दू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठा समस्या का समाधान ढूंढना होगा। बंगलादेश के हिन्दुओं को कट्टरपंथियों के हाथों मरने के लिए  नहीं छोड़ा जा सकता।विश्व समुदाय खासकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी इस नस्ली हिंसा पर चुप्पी साधे हुए हैं यह बेहद हैरत की बात है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:43:32 +0530</pubDate>
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                <title>यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="margin:0in 0in 12pt;text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाना केवल एक कानूनी आदेश नहीं है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि यह भारतीय समाज</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संविधान और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा एक गहरा संकेत है। यह फैसला उस समय आया है जब देश लगातार यह प्रश्न पूछ रहा है कि क्या हम सचमुच समानता की ओर बढ़ रहे हैं या फिर समानता के नाम पर नई दीवारें खड़ी कर रहे हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि सामाजिक न्याय की भावना तभी सार्थक हो सकती है जब वह सबके</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167675/supreme-court-bans-new-rules-of-ugc"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/supream-court7.jpg" alt=""></a><br /><p style="margin:0in 0in 12pt;text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" style="font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाना केवल एक कानूनी आदेश नहीं है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि यह भारतीय समाज</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संविधान और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य से जुड़ा एक गहरा संकेत है। यह फैसला उस समय आया है जब देश लगातार यह प्रश्न पूछ रहा है कि क्या हम सचमुच समानता की ओर बढ़ रहे हैं या फिर समानता के नाम पर नई दीवारें खड़ी कर रहे हैं। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि सामाजिक न्याय की भावना तभी सार्थक हो सकती है जब वह सबके लिए हो</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न कि किसी एक वर्ग को केंद्र में रखकर शेष समाज को हाशिए पर डाल दे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव एक कड़वी सच्चाई रही है और इसे नकारा नहीं जा सकता। अनेक घटनाएं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आत्महत्याएं और शिकायतें इस बात की गवाही देती हैं कि कमजोर और वंचित वर्गों को आज भी अपमान</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उपेक्षा और मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ता है। इसी पृष्ठभूमि में समानता को बढ़ावा देने वाले नए नियम बनाए गए थे</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिनका उद्देश्य था कि अनुसूचित जाति</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिले। मंशा निस्संदेह सही थी</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन न्यायालय का कहना है कि मंशा के साथ-साथ मार्ग भी सही होना चाहिए।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यायालय के समक्ष यह प्रश्न प्रमुख रूप से उभरा कि क्या कोई नियम केवल कुछ वर्गों को ही पीड़ित मानकर चल सकता है। संविधान की मूल भावना यह कहती है कि कानून की नजर में सभी समान हैं। यदि कोई नियम यह मानकर बनाया जाए कि भेदभाव केवल एक ही दिशा में संभव है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो वह समानता के सिद्धांत को कमजोर करता है। न्यायालय ने इसी बिंदु पर चिंता जताई कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को पूरी तरह नजर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अंदाज करते हैं और उन्हें किसी भी प्रकार के भेदभाव से संरक्षण देने की बात ही नहीं करते। इससे यह संदेश जाता है कि कुछ छात्रों का अपमान</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्पीड़न या मानसिक शोषण कानून की दृष्टि में महत्वहीन है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो कि स्वीकार्य नहीं हो सकता।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक और गंभीर चिंता नियमों की अस्पष्टता को लेकर सामने आई। भेदभाव</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्पीड़न और रैगिंग जैसे शब्दों की स्पष्ट सीमा तय न होने से यह आशंका पैदा होती है कि उनका दुरुपयोग हो सकता है। न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि परिभाषाएं धुंधली होंगी तो शिकायत और अपराध के बीच की रेखा मिट जाएगी। इससे न केवल निर्दोष छात्रों के फंसने का खतरा बढ़ेगा</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा संस्थानों का वातावरण भी भय और अविश्वास से भर जाएगा। शिक्षा का उद्देश्य संवाद</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रश्न और विचारों का आदान प्रदान है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन जब हर शब्द और हर व्यवहार पर कानूनी तलवार लटकती हो तो यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियां इस पूरे विवाद की आत्मा को उजागर करती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उत्पीड़न एक बड़ी बुराई है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या नियम केवल जाति आधारित अपमान तक ही सीमित रहेंगे। यदि किसी छात्र को उसकी भाषा</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्षेत्र या सांस्कृतिक पहचान के कारण नीचा दिखाया जाए तो क्या वह भेदभाव नहीं है। इस प्रश्न के माध्यम से न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भेदभाव के रूप अनेक हैं और उन्हें केवल जाति के चश्मे से देखना वास्तविकता को अधूरा समझना है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यायालय ने यह भी विचार किया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि हर नीति जाति की पहचान को और गहरा करती जाए तो क्या हम सच में एक जाति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विहीन समाज की ओर बढ़ रहे हैं। आज के विश्वविद्यालयों में छात्र एक साथ रहते हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पढ़ते हैं और सपने देखते हैं। अंतरजातीय विवाह बढ़ रहे हैं और नई पीढ़ी कई मामलों में पुरानी दीवारों को तोड़ रही है। ऐसे समय में यदि संस्थागत नीतियां फिर से कठोर वर्गीकरण पर आधारित होंगी तो यह सामाजिक एकता के लिए खतरा बन सकती हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक महत्वपूर्ण टिप्पणी यह भी रही कि आरक्षित वर्गों के भीतर भी असमानता मौजूद है। हर अनुसूचित या पिछड़ा छात्र समान परिस्थितियों से नहीं आता। कुछ के पास संसाधन हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ के पास नहीं। यदि नीतियां इस आंतरिक विविधता को नजर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अंदाज करेंगी तो वे वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाएंगी। इससे सामाजिक न्याय का उद्देश्य कमजोर होगा और नए प्रकार का असंतोष जन्म लेगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों को पूरी तरह खारिज नहीं किया</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें फिलहाल रोककर पुराने नियमों को लागू रहने दिया। यह एक संतुलित कदम है। न्यायालय ने न तो भेदभाव की समस्या से इनकार किया और न ही सामाजिक न्याय की आवश्यकता को नकारा। उसने केवल यह कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए जो न्याय</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समानता और एकता तीनों को साथ लेकर चलें। केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगकर न्यायालय ने यह अवसर दिया है कि वे नियमों की समीक्षा करें</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्हें अधिक स्पष्ट</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समावेशी और संतुलित बनाएं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह फैसला आरक्षण और समानता की बहस को एक नई दिशा देता है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि किसे संरक्षण मिले</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि यह भी है कि संरक्षण कैसे दिया जाए। क्या हम ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जिसमें हर छात्र</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चाहे वह किसी भी वर्ग से हो</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपमान और उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षित महसूस करे। क्या हम ऐसी नीतियां बना सकते हैं जो शिकायत करने वाले को न्याय दें और झूठे आरोपों से निर्दोष को बचाएं। यही वे प्रश्न हैं जिनका उत्तर आने वाले समय में तलाशना होगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शिक्षा संस्थान समाज का दर्पण होते हैं। वहां जो मूल्य पनपते हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वही भविष्य के समाज की नींव रखते हैं। यदि वहां भय</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अविश्वास और वर्ग विभाजन का माहौल बनेगा तो उसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि समानता केवल कानून से नहीं आती</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि दृष्टि और संवेदनशीलता से आती है। नियम आवश्यक हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उनसे अधिक आवश्यक है यह समझ कि हर छात्र एक इंसान है</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसकी गरिमा समान है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अंततः यह निर्णय हमें एक चेतावनी और एक अवसर दोनों देता है। चेतावनी इस बात की कि अच्छे इरादे भी गलत ढांचे में अन्याय पैदा कर सकते हैं</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और अवसर इस बात का कि हम ऐसी नीतियां गढ़ें जो सचमुच समावेशी हों। यदि इस फैसले से यह संवाद शुरू होता है कि सामाजिक न्याय और समानता को कैसे संतुलित किया जाए</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो यह केवल एक अदालती आदेश नहीं रहेगा</span><span lang="en-in" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 17:20:42 +0530</pubDate>
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