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                <title>lekhpal kanungo - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>क्षेत्रीय लेखपाल कानूनगो को बचाने के चक्कर में निरस्त नहीं हो पा रहा फर्जी जारी निवास प्रमाण पत्र </title>
                                    <description><![CDATA[मुझे नहीं है निवास प्रमाण पत्र निरस्त करने का पावर - एसडीएम सदर ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150326/regional-accountant-is-unable-to-cancel-fake-residence-certificate-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/hindi-divas45.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>शाहजहांपुर/ </strong>जनपद की तहसील सदर में फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करना तो बहुत आसान है लेकिन निरस्त कराना बहुत मुश्किल काम है यहां क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो सुविधा शुल्क के चलते निवास प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेज पर रिपोर्ट तो आंख मीच  कर लगा देते हैं  लेकिन जब मामला कहीं फसता है तो अपने आप को बचाने में भी बहुत बड़े माहिर है ऐसा ही मामला तहसील सदर के मिदनापुर ब्लॉक के गांव आमखेड़ा में सामने आया है जहां शिकायतकर्ता गुड्डू की जांच के बाद जिला अधिकारी के आदेशानुसार मुख्य विकास अधिकारी ने तहसीलदार सदर से 5 मार्च को एक निवास प्रमाण पत्र की जांच कराई थी। </div>
<div> </div>
<div>जिसमें निवास प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था, जिसमें तहसील के अधिकारियों ने इस फर्जी जारी निवास प्रमाण पत्र का मुख्य कारण तकनीकी दृष्टिगत बताया जो किसी को हजम नहीं हो रहा है और मुख्य कारण रिपोर्ट में ना लिखने के कारण आज तक निवास प्रमाण पत्र निरस्त नहीं हो सका है और शिकायतकर्ता तहसील के चक्कर लगा रहा है संबंधित रिपोर्ट में क्षेत्रीय लेखपाल और कानून को बचाने के चक्कर में मामला लटका पड़ा है उप जिलाधिकारी सदर द्वारा अपर जिलाधिकारी न्यायिक को पत्र जारी कर निवास प्रमाण पत्र निरस्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। </div>
<div> </div>
<div>तो अपर जिलाधिकारी न्यायिक ने हाथ खड़े कर दिए बोले यह मुझसे संबंधित मामला नहीं है वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जब एसडीएम सदर  पांडे से बात की गई तो उन्होंने बताया की निवास प्रमाण पत्र निरस्त करने का पावर मुझे नहीं है कुल मिलाकर इस पूरे मामले में अधिकारियों का गोल मोल जवाब शिकायतकर्ता को कोर्ट जाने के लिए मजबूर कर रहा है भाई दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने आरोप लगाते हुए बताया की तहसील और एसडीएम कार्यालय के कुछ बाबू उसे 1 महीने से टरका रहे हैं जो फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी कराने वाले से मिले हुए हैं।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Mar 2025 12:43:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>फर्जी वरासत किए जाने का मामला बना चर्चा का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[मामले की शासन प्रशासन तक हुई शिकायतों में अपनी गर्दन फसते देख की गई असल व्यक्ति के नाम वरासत और पुरानी वरासत को किया गया निरस्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147094/the-matter-of-fake-inheritance-became-a-topic-of-discussion"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/02.........jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लखीमपुर खीरी</strong> तहसील सदर लखीमपुर में तहसील प्रशासन और दलालों के बीच मिली भगत से किए गए एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला खुलकर सामने आया है मामला कुछ इस प्रकार से बताया जाता है की तहसील सदर के अंतर्गत कस्बा खीरी टाउन निवासी शहाबुद्दीन पुत्र अली रजा की भूमि गाटा संख्या 323/2/0,008,322/2/0'042 जो शहाबुद्दीन पुत्र अली राजा के नाम दर्ज कागजात है शहाबुद्दीन की मृत्यु के उपरांत उक्त जमीन का वारिस लेखपाल द्वारा पैसा लेकर वसीम व मोहम्मद हसीन पुत्रगण शहाबुद्दीन निवासी बेहटी तहसील लहरपुर जिला सीतापुर में दर्ज कर दिए जाने का मामला प्रकाश में आया था ।</div>
<div> </div>
<div>उक्त लोग जाति के पठान हैं जबकि मृतक के असली बारिश मोहम्मद सगीर व रईस पुत्रगण शहाबुद्दीन निवासी पट्टी रामदास कस्बा खीरी  हैं और मेमन अंसारी बिरादरी के हैं जबकि उनके नाम ग्राम निजामपुर रामदास में गाटा संख्या 409/०•821,422/0•505 पर पिता की भूमि की वरासत हो चुकी है उक्त असल वारिस मेमन जाति केहै। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल रमाकांत मिश्रा द्वारा विपक्षी गणो से सांठगांठ करके व रिश्वत राशि लेकर फर्जी वरासत दर्ज कर दी गई तथा अवैध तरीके से कब्जा दिलाए जाने का भी प्रयास किया गया उक्त असल बारिशों का इस फर्जी वाडा का पता चलने पर आनन-फानन में जिला अधिकारी खीरी सहित शासन प्रशासन से शिकायत कर जांच की मांग की गई शिकायत में लगाए गए आरोपों पर गौर करें तो उक्त लेखपाल ने दलालों के साथ मिली भगत करके कस्बे के अंदर की बेश कीमती जमीन की फर्जी वरासत करके भूमि की बिक्री करवाए जाने के आरोप लगाए हैं शिकायतकर्ता का आरोप है। </div>
<div> </div>
<div>कि उसने इस मामले की दर्जनों शिकायत की परंतु तहसील प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई आहत होकर जब पीड़ित पक्ष द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की गई उसमें भी लेखपाल द्वारा फर्जी भ्रामक गलत आख्या लगाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। मोहम्मद सागीर वह रईस ने आरोप लगाया है कि उक्त अधिकारी गण काफी भ्रष्ट हैं जिन पर कार्यवाही की मांग की गई है तथा दर्ज की गई फर्जी वरासत निरस्त कर असल व्यक्तियों के नाम वरासत दर्ज किए जाने की भी मांग  करने के साथ-साथ दोषी लोगों में लेखपाल व कानूनगो को के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की। पीड़ित पक्ष द्वारा उक्त फर्जी वाडा में शामिल लोगों व तहसील कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराए जाने की भी मांग की थी।</div>
<div> </div>
<div><strong>अपनी गर्दन फसते देख फर्जी वरासत निरस्त कर असल वारिशों के नाम दर्ज हुई वरासत</strong></div>
<div>उक्त मामले में शासन प्रशासन द्वारा हुई दर्जनों शिकायतों के बाद मामले का संज्ञान ग्रहण किया गया मौजूद साक्ष्यो के आधार पर तहसील प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और आनंन फानन में शिकायतकर्ता को बुलाकर समझा बूझकर मुकदमा डालने की सलाह देने के साथ-साथ उस पर उसके पक्ष में तत्काल आदेश पारित करने का आश्वासन दिया गया और मामले को शांत करने का प्रयास किए जाने की जानकारी सूत्रों द्वारा दी गई है। पीड़ित पक्ष द्वारा दाखिल वाद में ऑनलाइन उत्तराधिकार 2023 310 15380/005056दि 19•12•2023वराजस्व वाद न्यायालय तहसीलदार/T 202410430106922/18•11•24वरासत के आधार पर असल वारिशों के नाम दर्ज कागजात कर पूर्व में की गई फर्जी वरासत को निरस्त कर दिया गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>पीड़ित पक्ष द्वारा दोषी लेखपाल और कानूनगो के विरुद्ध की गई कार्यवाही की मांग</strong></div>
<div>फर्जी वरासत अंकन करने वाले कानूनगो सुरेश चंद शुक्ला और क्षेत्रीय लेखपाल रमाकांत मिश्रा के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराए जाने की मांग शिकायतकर्ता द्वारा की गई है यहां पर अहम सवाल यह उठते हैं की जाति और निवास का पता तथा जिला और तो फिर किस आधार पर दर्ज की गई वरासत?</div>
<div>जब इससे पूर्व कुछ भूमि की वरासत पहले सागीर और रईस के नाम दर्ज की जा चुकी थी तो फिर इस जमीन पर वारिशों के नाम किस आधार पर बदले गए?</div>
<div> </div>
<div>किन कारणो से जांच पड़ताल के बगैर फर्जी तरीके से सीतापुर जनपद की तहसील लहरपुर निवासी लोगों के नाम फर्जी वरासत का अंकन किया गया एक ही जमीन व एक ही गाटा संख्या की कैसे हो गई दो दो वरासत? और की गई दोनों उक्त वरासतों में कौन सी बरासत है सत्य अहम सवाल बना हुआ है? इन यक्ष प्रश्नों के सवाल के जवाब क्षेत्रीय लेखपाल से लेकर तहसीलदार तक के पास ढूंढे नहीं मिल पा रहे हैं ।आखिर दोषी तहसील कर्मचारियों के विरुद्ध आज तक कोई कार्यवाही अमल में क्यों नहीं लाई जा रही है ?पीड़ित पक्ष द्वारा मामले के दोषी लोगों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराए जाने की मांग की गई है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2024 17:15:51 +0530</pubDate>
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