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                <title>disaster management - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>disaster management RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जर्जर मकान की छत गिरने से एक परिवार के छः लोगों की हुई दर्दनाक मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के ग्राम महुली में जर्जर मकान गिरने से हुई दर्दनाक दुर्घटना के बाद जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार रात्रि लगभग दो बजे प्रमोद श्रीवास्तव पुत्र कामता प्रसाद का जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे परिवार के छः सदस्य मलबे में दब गए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस भीषण हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष), रीता (55</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184848/six-members-of-a-family-died-tragically-when-the-roof"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260806-wa0079.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के ग्राम महुली में जर्जर मकान गिरने से हुई दर्दनाक दुर्घटना के बाद जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय एवं पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार रात्रि लगभग दो बजे प्रमोद श्रीवास्तव पुत्र कामता प्रसाद का जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे परिवार के छः सदस्य मलबे में दब गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस भीषण हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष), रीता (55 वर्ष), नितिन (25 वर्ष), माधुरी (23 वर्ष), माधव (01 वर्ष) तथा अद्विक उर्फ बाबू (10 माह) की दुःखद मृत्यु हो गई। वहीं अमन पुत्र प्रमोद (28 वर्ष) सुरक्षित है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस एवं प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा राहत कार्यों की जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि पीड़ित परिवार को अनुमन्य राहत सहायता तत्काल उपलब्ध करा दी गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि दुर्घटना में मृत छः व्यक्तियों के लिए दैवीय आपदा राहत मद के अंतर्गत प्रति मृतक 4 लाख रुपए की दर से कुल 24 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान के लिए 1.20 लाख रुपए तथा मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना के अंतर्गत 01 लाख रुपए की सहायता भी स्वीकृत कर प्रदान की गई है। इस प्रकार पीड़ित परिवार को कुल 26.20 लाख रुपए की राहत सहायता उपलब्ध कराई गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और उन्हें आवश्यकतानुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने कहा कि घटना से संबंधित सभी आवश्यक विधिक कार्रवाई कराई जा रही है। सभी मृतकों के शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया।जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने हादसे में दिवंगत हुए सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। मुख्यमंत्री ने इस हादसे का संज्ञान लिया है और अधिकारियों को मौके पर जाने और हर संभव सहायता का निर्देश दिया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:04:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बैराजों से छोड़े गए पानी का सीतापुर में असर शारदा-घाघरा उफान पर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सीतापुर-</strong>    जनपद सीतापुर में बैराजों से छोड़े गए करीब तीन लाख क्यूसेक पानी का असर सीतापुर में लगातार चौथे दिन भी देखने को मिल रहा है। शारदा और घाघरा नदियों के जलस्तर में लगातार 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है हालांकि दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों में हालात धीरे-धीरे गंभीर होने लगे हैं। करीब 150 बीघा कृषि योग्य भूमि जलमग्न होने लगी है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों को अलर्ट मोड पर रखते हुए निगरानी बढ़ा दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> रामपुर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184647/effect-of-water-released-from-barrages-on-sharda-ghaghra-spate-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260803-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सीतापुर-</strong>  जनपद सीतापुर में बैराजों से छोड़े गए करीब तीन लाख क्यूसेक पानी का असर सीतापुर में लगातार चौथे दिन भी देखने को मिल रहा है। शारदा और घाघरा नदियों के जलस्तर में लगातार 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है हालांकि दोनों नदियां अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों में हालात धीरे-धीरे गंभीर होने लगे हैं। करीब 150 बीघा कृषि योग्य भूमि जलमग्न होने लगी है जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों को अलर्ट मोड पर रखते हुए निगरानी बढ़ा दी है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> रामपुर मथुरा और रेउसा विकासखंड क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने का सबसे अधिक प्रभाव दिखाई दे रहा है नगेश्वरपुरवा और बचऊपुरवा गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया है। लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं रेउसा क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। नदियों की तेज कटान जारी उधर, बेहटा विकासखंड के ग्राम खाना मंडोर क्षेत्र में नदियों की तेज कटान जारी है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नदी का बढ़ता पानी गन्ने और धान की फसलों तक पहुंचने लगा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। एसडीएम लहरपुर दामिनी एम. दास ने बताया कि कटान प्रभावित स्थानों पर सिंचाई विभाग की टीमों को लगाया गया है। बालू से भरी बोरियों और जियो बैग के माध्यम से कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, जिससे तत्काल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लेखपालों की क्लस्टरवार ड्यूटी लगाकर जलस्तर की लगातार निगरानी कराई जा रही है!!</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:36:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मंत्री रोनूज पेगु ने जियाधल कमलपुर के बाढ़ प्रभावित इलाके का किया दौरा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी। </strong>बार-बार बदल रही हैं धेमाजी जियादल नदी के दिशा । परेशान है नदी किनारे के कमलपुर के ग्रामीण। गत शनिवार को जियादल नदी के उफनती बाढ़ में प्रभावित कमालपुर  इलाकों का दौरा किया धेमाजी के विधायक तथा मंत्री रणुज पेगू ने।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंत्री पेगू ने जल संसाधन विभाग को विलम्ब ना करते हुए नदी के तट पर तत्काल  बांध निर्माण के लिए निर्देश दिया ओर शनिवार को जियादल नदी के बाढ़ में क्षतिग्रस्त कमलपुर धर्मपुर गांव के अनिमा हजारिका के परिवार को पुनः संस्थापन के लिए भाजपा कार्यकर्ता मनुज कुमार चुतीया ने तीन काटा जमीन दान पर दिया है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184637/minister-ronuj-pegu-visited-the-flood-affected-area-of-jiadhal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1000675740-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी। </strong>बार-बार बदल रही हैं धेमाजी जियादल नदी के दिशा । परेशान है नदी किनारे के कमलपुर के ग्रामीण। गत शनिवार को जियादल नदी के उफनती बाढ़ में प्रभावित कमालपुर  इलाकों का दौरा किया धेमाजी के विधायक तथा मंत्री रणुज पेगू ने।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मंत्री पेगू ने जल संसाधन विभाग को विलम्ब ना करते हुए नदी के तट पर तत्काल  बांध निर्माण के लिए निर्देश दिया ओर शनिवार को जियादल नदी के बाढ़ में क्षतिग्रस्त कमलपुर धर्मपुर गांव के अनिमा हजारिका के परिवार को पुनः संस्थापन के लिए भाजपा कार्यकर्ता मनुज कुमार चुतीया ने तीन काटा जमीन दान पर दिया है। मंत्री ने जिला प्रशासन को अनिमा पेगू के घर निर्माण कर देने की आश्वासन दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:27:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उसका बाजार में स्थापित हुआ अस्थाई बाढ़ शरणालय</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बाढ़ की विभीषिका से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा कस्बे के किसान इंटर कालेज उसका बाजार  के  परिसर में अस्थाई बाढ़ शरणालय स्थापित किया गया है। बाढ़ की स्थिति में यहां बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को आश्रय मिलेगा। यहां पर तैनात केयर टेकर विशाल ने बताया कि इस वॉटर प्रूफ  बाढ़ शरणालय में वर्तमान में 25 बेड है । यह बाढ़ पीड़ितों के लिए रात्रि के समय विश्राम के लिए है। इसके अलावा प्रकाश व्यवस्था, कूलर, पंखा,पेयजल, मोबाइल शौचालय आदि व्यवस्था से सुसज्जित है।मालूम हो कि उसका के दोआबा क्षेत्र के बगहिया, नटवा, लाऊ खाऊ,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184466/temporary-flood-shelter-established-in-his-market"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1785597758790.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाढ़ की विभीषिका से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा कस्बे के किसान इंटर कालेज उसका बाजार  के  परिसर में अस्थाई बाढ़ शरणालय स्थापित किया गया है। बाढ़ की स्थिति में यहां बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को आश्रय मिलेगा। यहां पर तैनात केयर टेकर विशाल ने बताया कि इस वॉटर प्रूफ  बाढ़ शरणालय में वर्तमान में 25 बेड है । यह बाढ़ पीड़ितों के लिए रात्रि के समय विश्राम के लिए है। इसके अलावा प्रकाश व्यवस्था, कूलर, पंखा,पेयजल, मोबाइल शौचालय आदि व्यवस्था से सुसज्जित है।मालूम हो कि उसका के दोआबा क्षेत्र के बगहिया, नटवा, लाऊ खाऊ, रीवा, अमरिया, संगलदीप आदि दर्जनों गांव हर वर्ष कूड़ा, बूढी राप्ती, राप्ती नदियों की बाढ़ विभिषिका से प्रभावित रहते है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184466/temporary-flood-shelter-established-in-his-market</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 21:53:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों व कांवड़ यात्रा मार्गों का निरीक्षण </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> अनुपम कुलश्रेष्ठ, अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर द्वारा जनपद कन्नौज भ्रमण दौरान कोतवाली कन्नौज क्षेत्र स्थित मेहंदी घाट एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया गया। संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी बनाए रखने, आमजन की सुरक्षा, समस्त घाटों पर गोताखोरों की तैनाती तथा आवश्यक राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके उपरांत कोतवाली कन्नौज एवं कोतवाली गुरसहायगंज क्षेत्र के कांवड़ यात्रा मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग, पुलिस तैनाती तथा श्रद्धालुओं की सुविधा संबंधी व्यवस्थाओं की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184387/inspection-of-flood-affected-areas-and-kanwar-yatra-routes"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002152145.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> अनुपम कुलश्रेष्ठ, अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर द्वारा जनपद कन्नौज भ्रमण दौरान कोतवाली कन्नौज क्षेत्र स्थित मेहंदी घाट एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया गया। संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी बनाए रखने, आमजन की सुरक्षा, समस्त घाटों पर गोताखोरों की तैनाती तथा आवश्यक राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके उपरांत कोतवाली कन्नौज एवं कोतवाली गुरसहायगंज क्षेत्र के कांवड़ यात्रा मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग, पुलिस तैनाती तथा श्रद्धालुओं की सुविधा संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सकुशल संपन्न कराने हेतु सभी आवश्यक प्रबंध समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से सुनिश्चित किए जाएं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। निरीक्षण के दौरान यमुना प्रसाद, पुलिस उपमहानिरीक्षक, कानपुर परिक्षेत्र, कानपुर, आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी जनपद कन्नौज, विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक जनपद कन्नौज सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 21:47:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने शनिवार को सदर तहसील अंतर्गत ग्राम बैराड़ी एतमाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिलाधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना ने शनिवार को सदर तहसील अंतर्गत ग्राम बैराड़ी एतमाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा बाढ़ विभाग द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त किया।</div>
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<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि संबंधित अधिकारी बाढ़ की स्थिति पर निरंतर नजर बनाए रखे तथा राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया  जाए। उन्होंने कहा कि नावों, राहत शिविरों एवं आपदा से संबंधित सभी संसाधनों को पूरी</div></div></div></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184083/the-district-magistrate-conducted-on-site-inspection-of-the-flood-affected"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260725-wa0151-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिलाधिकारी श्रीमती कृत्तिका ज्योत्स्ना ने शनिवार को सदर तहसील अंतर्गत ग्राम बैराड़ी एतमाली के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ की वर्तमान स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा बाढ़ विभाग द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि संबंधित अधिकारी बाढ़ की स्थिति पर निरंतर नजर बनाए रखे तथा राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया  जाए। उन्होंने कहा कि नावों, राहत शिविरों एवं आपदा से संबंधित सभी संसाधनों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ विभाग तटबंधों एवं संवेदनशील स्थलों की नियमित निगरानी करते रहें, किसी भी प्रकार के कटान अथवा जलस्तर में वृद्धि की सूचना मिलते ही तत्काल आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित किया जाय।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सभी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जा सके। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों या जिला प्रशासन को दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      उन्होने चॉदपुर कटरिया कैम्प कार्यालय का भी निरीक्षण कर जायजा लिया। उन्होने कहा कि बाढ़ कार्य में प्रयोग होने वाले बोरी का स्टाक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें। निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियन्ता बाढ़ दिनेश कुमार, उपजिलाधिकारी सदर हिमांशु कुमार सहित संबंधित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 21:38:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करोल बाग में बहुमंजिला इमारत में लगी आग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> करोल बाग थाना क्षेत्र में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। राहत की बात यह रही कि इमारत की ऊपरी मंजिल पर संचालित पीजी (पेइंग गेस्ट) में रह रहे दो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत की निचली मंजिल पर चमड़े के जूते बनाने की एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183971/fire-breaks-out-in-multi-storey-building-in-karol-bagh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260722-wa0001-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> करोल बाग थाना क्षेत्र में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। राहत की बात यह रही कि इमारत की ऊपरी मंजिल पर संचालित पीजी (पेइंग गेस्ट) में रह रहे दो छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत की निचली मंजिल पर चमड़े के जूते बनाने की एक छोटी विनिर्माण इकाई संचालित होती है, जबकि ऊपरी मंजिल पर पीजी चल रहा है। आग लगने के बाद इमारत से धुआं उठता देख आसपास के लोगों ने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कराया और राहत कार्य शुरू कराया।दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दमकल विभाग की पांच गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हैं। दमकल कर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि आग अन्य हिस्सों में न फैल सके। पुलिस ने भी मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और लोगों को सुरक्षित दूरीबनाए रखने की सलाह दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटनास्थल पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों सहित पर्याप्त पुलिस बल तैनात है। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और दमकल विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। अधिकारियों का कहना है कि आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद विस्तृत जांच की जाएगी। इसके बाद ही आग लगने के कारणों और संपत्ति को हुए नुकसान का सही आकलन किया जा सकेगा। पुलिस ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और पूरे मामले पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 22:42:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांवड़ यात्रा व संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, कलवारी-टांडा पुल का किया निरीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में जिला प्रशासन आगामी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने तथा सरयू नदी में संभावित बाढ़ की आशंका के मद्देनज़र रविवार को मंडलायुक्त बस्ती मंडल, जिलाधिकारी बस्ती एवं पुलिस अधीक्षक बस्ती ने सरयू नदी पर स्थित कलवारी-टांडा पुल का स्थलीय निरीक्षण किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पुल पर यातायात व्यवस्था, सरयू नदी के जलस्तर तथा आसपास के निचले क्षेत्रों की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कांवड़ यात्रा के दौरान निर्बाध यातायात, सुरक्षा व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।अधिकारियों ने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183849/administration-alert-regarding-kanwar-yatra-and-possible-flood-inspection-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260720-wa0079.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले में जिला प्रशासन आगामी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने तथा सरयू नदी में संभावित बाढ़ की आशंका के मद्देनज़र रविवार को मंडलायुक्त बस्ती मंडल, जिलाधिकारी बस्ती एवं पुलिस अधीक्षक बस्ती ने सरयू नदी पर स्थित कलवारी-टांडा पुल का स्थलीय निरीक्षण किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पुल पर यातायात व्यवस्था, सरयू नदी के जलस्तर तथा आसपास के निचले क्षेत्रों की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कांवड़ यात्रा के दौरान निर्बाध यातायात, सुरक्षा व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।अधिकारियों ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की और निर्देश दिया कि संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा और बाढ़ जैसी संभावित परिस्थितियों को देखते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता एवं मुस्तैदी से कार्य करेंगे, जिससे आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 19:13:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज का मॉनसून, कल का इतिहास नहीं — भविष्य का फैसला है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी पहाड़ों से टूटते मलबे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी एक रात की बारिश में ढह गए घरों की खामोशी में। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून भी ऐसा ही एक मौन संदेश था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनसुना करना आने वाले कल से आंखें मूंदना होगा। जून में सामान्य से लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी ने खेतों की उम्मीदें सुखा दीं। एल नीनो के प्रभाव में किसान आसमान निहारते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बादल बेरुख़ रहे। फिर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183626/todays-monsoon-is-not-yesterdays-history-%E2%80%93-it-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images-(1)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति चेतावनी देने के लिए शब्दों का सहारा नहीं लेती</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अपने संकेत छोड़ती है—कभी प्यास से फटी धरती पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी पहाड़ों से टूटते मलबे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कभी एक रात की बारिश में ढह गए घरों की खामोशी में। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून भी ऐसा ही एक मौन संदेश था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनसुना करना आने वाले कल से आंखें मूंदना होगा। जून में सामान्य से लगभग</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी ने खेतों की उम्मीदें सुखा दीं। एल नीनो के प्रभाव में किसान आसमान निहारते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बादल बेरुख़ रहे। फिर जुलाई ने अचानक करवट बदली। मुंबई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायनाड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रत्नागिरी सहित कई क्षेत्रों में कुछ दिनों की मूसलाधार बारिश ने साबित कर दिया कि अब खतरा बारिश के कम या अधिक होने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके बेकाबू और असंतुलित स्वरूप में है। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून इस सच्चाई की गवाही बन गया कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम का मिज़ाज बदल दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह बदलाव आकस्मिक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विज्ञान की वर्षों पुरानी चेतावनी का साकार रूप है। वैज्ञानिकों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गर्म होती पृथ्वी का वातावरण पहले से अधिक नमी समेट रहा है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का बढ़ता तापमान इसे ऊर्जा दे रहा है। नतीजा यह है कि बादल अब ठहरकर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टूटकर बरसते हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जुलाई के शुरुआती दिनों में मुंबई (सांताक्रुज स्टेशन) में </span>600–900 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जुलाई के पूरे महीने के औसत का बड़ा हिस्सा थी। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायनाड में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दो दिनों की मूसलाधार बारिश ने टनल निर्माण स्थल पर मिट्टी का पहाड़ ढहा दिया। इस हादसे में कई मजदूरों की जान गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लापता रहे। यह महज़ हादसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलते जलवायु दौर की भयावह तस्वीर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ कम वर्षा वाला मौसम भी विनाश की इबारत लिख सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने केवल शहरों को नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी विकास-दृष्टि को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। कंक्रीट के फैलते जंगलों ने पानी के प्राकृतिक रास्ते निगल लिए। नतीजा था—मुंबई के मानखुर्द में चॉल ढह गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पालघर में बाढ़ दस से अधिक जिंदगियां बहा ले गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेड़ उखड़े</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दीवारें गिरीं और शहर दिनों तक थम गए। यह तबाही सिर्फ आसमान से बरसे पानी की नहीं थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जर्जर ड्रेनेज व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिक्लेम्ड भूमि पर अनियोजित निर्माण और प्रकृति की कीमत पर खड़ा विकास भी इसके भागीदार थे। जलवायु विशेषज्ञ वर्षों से चेताते रहे हैं कि मध्य भारत में </span>1950 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद अत्यधिक वर्षा की घटनाएं लगभग तीन गुना बढ़ चुकी हैं। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">ने उस चेतावनी को आंकड़ों से उठाकर सड़कों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस्तियों और ज़िंदगियों पर लिख दिया। अब बारिश मौसम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ घंटों में पूरे महीने का संतुलन और शहरों की व्यवस्था बहा ले जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने एक भ्रम तोड़ दिया—सूखा और बाढ़ अब विरोधी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक ही जलवायु संकट के दो रूप हैं। एल नीनो ने पहले बारिश रोकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर गर्म वातावरण ने संचित नमी उलीच दी। सूखी धरती पानी सोख न सकी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">वही जल मैदानों में बाढ़ और पहाड़ों में भूस्खलन बन गया। बदलता मौसम चेतावनी है कि अब खतरा वर्षा की मात्रा से अधिक उसकी तीव्रता और असंतुलन में है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक तापमान </span>1.5-2 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री सेल्सियस बढ़ने पर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कई क्षेत्रों में आर्द्र गर्मी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गंभीर संकट बन सकती है। यानी आने वाले समय में चुनौती केवल सूखे और बाढ़ की नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बारिश के बाद की दमघोंटू उमस जनस्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रम क्षमता और अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून ने एक नया शब्द सिखाया है—</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वैरिएबिलिटी</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">। अब बारिश का आकलन उसकी कुल मात्रा से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसके समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवधि और तीव्रता से होगा। कई दिनों का सूखा और फिर एक-दो दिनों में पूरे महीने जितनी वर्षा—यही नया पैटर्न खेती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्यावरण और शहरों की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों को कम अवधि वाली फसलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु-अनुकूल बीज और सटीक मौसम पूर्वानुमान अपनाने होंगे। शहरों को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">स्पॉन्ज सिटी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल विकसित करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि वर्षा जल सड़कों पर बहने के बजाय जमीन में समा सके। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां वैज्ञानिक आकलन और कठोर मानकों से संचालित हों</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बदलते मौसम में यही विकास की सबसे विश्वसनीय बुनियाद है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी भूल यह होगी कि जलवायु संकट का समाधान केवल राष्ट्रीय योजनाओं में खोजा जाए। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून बताता है कि पिछले दो वर्षों की अच्छी वर्षा से अधिकांश जलाशय भरे होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर भारी तबाही हुई। साफ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े बांध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घोषणाएं और राहत पैकेज तब तक पर्याप्त नहीं होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक हर शहर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव और पहाड़ी क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार न हो। वेटलैंड्स का संरक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नदियों और प्राकृतिक जलमार्गों का पुनर्जीवन तथा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सस्टेनेबल डेवलपमेंट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को विकास की आधारशिला बनाना अब विकल्प नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन भविष्य की आशंका नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्तमान का यथार्थ है—और इसकी सबसे बड़ी कीमत आने वाली पीढ़ियां नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज का समाज चुका रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर आपदा केवल नुकसान नहीं छोड़ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह हमारी प्राथमिकताओं का भी परीक्षण करती है। </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">का मॉनसून इसी कसौटी पर हमें परख गया। उसने स्पष्ट कर दिया कि प्रकृति की सीमाओं की अनदेखी कर किया गया विकास टिकाऊ नहीं हो सकता। अब समय राहत और मुआवजे की घोषणाओं से आगे बढ़कर विकास की दिशा बदलने का है। इंफ्रास्ट्रक्चर को जलवायु-अनुकूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नीतियों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप और विकास को पर्यावरण का प्रतिद्वंद्वी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका सहभागी बनाना होगा। चेतावनी स्पष्ट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्णय हमारे हाथ में है। यदि इस संकेत को भी अनसुना किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले मॉनसून केवल नई आपदाएं नहीं लाएंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारी विकास-यात्रा की नींव को भी कठघरे में खड़ा कर देंगे। यही </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">के मॉनसून की सबसे बड़ी सीख है और यही हमारे समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 22:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश के 1.40 लाख विद्यालयों का होगा सुरक्षा ऑडिट, नैनी में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  प्रदेश के सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को सुरक्षित और आपदा-प्रतिरोधी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत स्कूल सेफ्टी एंड रिस्क असेसमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत चयनित संस्था बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) द्वारा नैनी स्थित लेट बेला सिंह आईटीआई संस्थान में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">10 जुलाई से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण 12 जुलाई तक चलेगा। इस परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के लगभग 1.40 लाख सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों का सुरक्षा एवं जोखिम आकलन (School Safety &amp; Risk Assessment) किया जाएगा। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयागराज प्रशिक्षण केंद्र</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183172/security-audit-of-140-lakh-schools-of-the-state-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260711-wa0142.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> प्रदेश के सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को सुरक्षित और आपदा-प्रतिरोधी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत स्कूल सेफ्टी एंड रिस्क असेसमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत चयनित संस्था बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) द्वारा नैनी स्थित लेट बेला सिंह आईटीआई संस्थान में तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">10 जुलाई से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण 12 जुलाई तक चलेगा। इस परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के लगभग 1.40 लाख सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों का सुरक्षा एवं जोखिम आकलन (School Safety &amp; Risk Assessment) किया जाएगा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रयागराज प्रशिक्षण केंद्र में वर्तमान में प्रदेश के 15 जनपदों से आए फील्ड ऑडिटर एवं डिजास्टर एक्सपर्ट को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्कूल सेफ्टी ऑडिट की कार्यप्रणाली, भवनों की स्ट्रक्चरल एवं नॉन-स्ट्रक्चरल सुरक्षा का मूल्यांकन, संभावित आपदा जोखिमों की पहचान, फायर एवं इलेक्ट्रिकल सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांत, मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा संग्रह एवं रिपोर्टिंग तथा गुणवत्तापूर्ण ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र प्रबंधक शिवम शुक्ला एवं परियोजना प्रबंधक सौरभ सिंह ने बताया कि इस बैच के बाद फायर सेफ्टी एक्सपर्ट तथा सिविल एक्सपर्ट के लिए भी तीन-तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा होने के उपरांत तीनों विशेषज्ञों की संयुक्त टीम प्रदेशभर के विद्यालयों में सुरक्षा एवं जोखिम आकलन का कार्य करेगी।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 20:08:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तहसील टांडा में बाढ़ प्रभावित गांवों में 7 से 31 जुलाई तक राहत चौपालों का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर</strong>- संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने तहसील टांडा के बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया है। 7 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक इन क्षेत्रों में राहत चौपालों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों को बाढ़ पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान सावधानियां, बचाव व राहत व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।उप जिलाधिकारी टांडा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जनहानि एवं धनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राहत चौपालों के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि बाढ़ के समय क्या करें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183050/organization-of-relief-chaupals-in-flood-affected-villages-in-tehsil"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001069395.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अम्बेडकरनगर</strong>- संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने तहसील टांडा के बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया है। 7 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक इन क्षेत्रों में राहत चौपालों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें ग्रामीणों को बाढ़ पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान सावधानियां, बचाव व राहत व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।उप जिलाधिकारी टांडा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर जनहानि एवं धनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहत चौपालों के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि बाढ़ के समय क्या करें और क्या न करें, सुरक्षित स्थानों एवं राहत शिविरों तक पहुंचने की प्रक्रिया, तटबंधों व नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए विशेष सावधानियां, बच्चों, वृद्धों, दिव्यांगजनों एवं गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा, पशुओं की सुरक्षा एवं पशु चिकित्सा सुविधाएं, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, जलजनित रोगों से बचाव, सर्पदंश व डूबने जैसी आपात स्थितियों में प्राथमिक उपचार एवं चिकित्सीय सहायता की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा अफवाहों से बचने, केवल प्रशासन द्वारा जारी प्रमाणिक सूचनाओं पर विश्वास करने, हेल्पलाइन नंबर, नियंत्रण कक्ष तथा राहत व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामुदायिक सहभागिता और स्वयंसेवकों की भूमिका पर भी विशेष जोर रहेगा।राहत चौपालों में ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, आशा, पंचायत सहायक सहित राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, पशुपालन, सिंचाई, विद्युत, पूर्ति एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहेंगे तथा जनसामान्य को जागरूक करने के साथ ही स्थानीय समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहत चौपालें 9 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित होंगी। इनमें माझा औसानपुर, माझा सलाहपुर रजौर, माझा मीरानपुर बभनपुरा, माझा सलारपुर, कटरिया, माझा रायपुर, माझा कला, माझा ककराही, माझा आसोपुर, माझा महरीपुर, माझा छज्जापुर, माझा चिन्तौरा, माझा उल्टहवा, माझा डुहिया, रसूलपुर मुबारकपुर, माझा इस्माइलपुर बेल्दहा, माझा अजमेरीबादशाहपुर, माझा फूलपुर और माझा केवटला शामिल हैं।जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे राहत चौपालों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें, सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा आपदा की स्थिति में धैर्य बनाए रखते हुए केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही भरोसा करें।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पर्याप्त संसाधनों के बाद भी बाढ़ (अतिवृष्टि) और सूखे(अनावृष्टि) स्थिति हर वर्ष क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत भौगोलिक तौर पर बड़ा विशाल का देश है। जहां एक ओर हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थान, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, उपग्रह तकनीक, विशाल प्रशासनिक तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए अलग मंत्रालय है, तो दूसरी ओर हर वर्ष भीषण गर्मी, सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देते हैं। जब संसाधनों की कमी नहीं है, तब तैयारी में कमी और इतनी जानमाल का नुकसान क्यों क्यों दिखाई देता है?</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या किसी एक शहर, राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के अनेक हिस्से भीषण लू और सूखे से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182832/floods-excessive-rainfall-and-droughts-despite-adequate-resources"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/drought_and_flood_750_1563354640_749x421.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत भौगोलिक तौर पर बड़ा विशाल का देश है। जहां एक ओर हमारे पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक संस्थान, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, उपग्रह तकनीक, विशाल प्रशासनिक तंत्र और आपदा प्रबंधन के लिए अलग मंत्रालय है, तो दूसरी ओर हर वर्ष भीषण गर्मी, सूखा, अतिवृष्टि और बाढ़ लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर देते हैं। जब संसाधनों की कमी नहीं है, तब तैयारी में कमी और इतनी जानमाल का नुकसान क्यों क्यों दिखाई देता है?</p>
<p style="text-align:justify;">यह समस्या किसी एक शहर, राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के अनेक हिस्से भीषण लू और सूखे से जूझते हैं, वहीं असम, बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल तथा महानगरों में कुछ घंटों की बारिश भी बाढ़ का रूप ले लेती है। हाल के दिनों में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने सड़कें, पुल और गांवों को भारी नुकसान पहुँचाया। इसी समय देश के कई भागों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप भी देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी विकास नीति, प्रशासनिक तैयारी और दीर्घकालिक योजना की परीक्षा भी है जब मौसम विभाग कई दिन पहले भारी वर्षा, लू और चक्रवात की चेतावनी जारी करता रहता है, तब स्थानीय प्रशासन समय रहते पर्याप्त तैयारी में क्यों नहीं जुट पाता है? अक्सर राहत कार्य आपदा आने के बाद शुरू होते हैं। यदि पहले से जल निकासी की व्यवस्था, सुरक्षित आश्रय, पेयजल, चिकित्सा दल और आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा दी जाए, तो जन-धन की हानि काफी कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी बड़ी समस्या हमारी अनियोजित शहरीकरण की है। शहरों के तालाब, नाले और जलग्रहण क्षेत्र पाटकर भवन खड़े कर दिए गए। नदियों के प्राकृतिक मार्ग पर अतिक्रमण हुआ परिणामस्वरूप कुछ घंटों की तेज बारिश भी शहरों को जलमग्न कर देती है। दूसरी ओर वर्षा का वही पानी भूजल में नहीं समा पाता और कुछ ही महीनों बाद वही क्षेत्र जल संकट से जूझने लगता है। विडंबना यह है कि जिस पानी को बाढ़ के समय हम अभिशाप मानते हैं, उसी पानी की एक-एक बूंद के लिए गर्मियों में तरसते हैं। यदि बड़े पैमाने पर वर्षा जल संचयन, छोटे बाँध, तालाबों का पुनर्जीवन, चेक डैम और जल संरक्षण के कार्य निरंतर किए जाएँ तो बाढ़ का पानी भी भविष्य का अमृत बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब वर्षा कम दिनों में अधिक तीव्रता से होती है और गर्मी की अवधि अधिक लंबी तथा अधिक प्रचंड होती जा रही है। यही कारण है कि कभी तापमान 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है तो कहीं कुछ ही घंटों में महीनों जितनी वर्षा हो जाती है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि चरम मौसम की घटनाएँ अब नई सामान्य स्थिति बनती जा रही हैं।इसके बावजूद हमारी अधिकांश योजनाएँ अभी भी पुराने मौसम चक्र को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। शहरों की जल निकासी व्यवस्था दशकों पुरानी है, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के कार्य पर्याप्त नहीं हैं और नदी तटों पर निर्माण आज भी जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल राहत सामग्री बाँटना नहीं है। वास्तविक आपदा प्रबंधन वह है जिसमें आपदा आने से पहले जोखिम कम कर दिया जाए। विकसित देशों में पूर्व चेतावनी, सामुदायिक प्रशिक्षण, नियमित मॉक ड्रिल, आधुनिक संचार व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय प्रणाली पर विशेष बल दिया जाता है। भारत में भी इन व्यवस्थाओं को गाँव-गाँव और वार्ड स्तर तक पहुँचाने की आवश्यकता है। सरकारों की जवाबदेही जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही समाज की भी। जल स्रोतों को बचाना, वृक्षारोपण करना, प्लास्टिक और कचरे से नालियाँ न भरना, वर्षा जल संचयन अपनाना तथा स्थानीय जलाशयों का संरक्षण करना नागरिकों का भी कर्तव्य है। यदि समाज और शासन मिलकर कार्य करें, तभी स्थायी समाधान संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ बार-बार यह भी कहते हैं कि हर जिले का अलग जलवायु अनुकूलन योजना तैयार होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में सूखा अधिक पड़ता है वहाँ जल संरक्षण और सूखा-रोधी खेती को बढ़ावा मिले, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नदी प्रबंधन, तटबंधों का वैज्ञानिक रखरखाव, जल निकासी और सुरक्षित पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था हो।हाल के वर्षों में यह भी स्पष्ट हुआ है कि केवल राहत कोष बढ़ाने से समस्या समाप्त नहीं होगी। आवश्यकता ऐसी विकास नीति की है जिसमें सड़क, पुल, भवन, कॉलोनियाँ और औद्योगिक क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाए जाएँ। अस्पताल, विद्यालय, बिजली व्यवस्था और संचार तंत्र भी आपदा सहनशील होने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अंततः प्रश्न संसाधनों का नहीं, बल्कि दूरदृष्टि, इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन का है। यदि हम हर वर्ष बाढ़ और सूखे के बाद केवल नुकसान का आकलन करते रहेंगे, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और विकराल होगा। लेकिन यदि हम आज से जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक योजना, स्थानीय भागीदारी और पूर्व तैयारी को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना लें, तो आपदाओं की विभीषिका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।प्रकृति हमें हर वर्ष चेतावनी दे रही है। अब निर्णय हमें करना है कि हम केवल राहत बाँटने वाला राष्ट्र बनना चाहते हैं या आपदाओं से पहले तैयारी करने वाला दूरदर्शी राष्ट्र। समय की यही सबसे बड़ी पुकार है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 21:56:27 +0530</pubDate>
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