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                <title>Modi Government - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Modi Government RSS Feed</description>
                
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                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                <title>नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज होने जा रहा एक नया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180808/a-new-record-is-going-to-be-registered-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/178054939444.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। यहाँ जनता समय</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर अपने नेताओं का चयन करती है और सत्ता परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाती है। स्वतंत्रता के बाद से देश ने अनेक प्रधानमंत्रियों को देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ नेता ऐसे रहे जिन्होंने केवल शासन नहीं किया बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा और स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया। जवाहर लाल नेहरू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के बाद यदि किसी प्रधानमंत्री ने सबसे अधिक प्रभाव छोड़ा है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का दिन इसी कारण राजनीतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे रिकॉर्ड के साथ चर्चा के केंद्र में होंगे जो भारतीय राजनीति में उनके लंबे और प्रभावशाली सफर का प्रतीक माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी ने पहली बार </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि लगभग </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों बाद किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला था। उस दौर में देश भ्रष्टाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक सुस्ती और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों से जूझ रहा था। जनता एक ऐसे नेतृत्व की तलाश में थी जो निर्णायक दिखाई दे और देश को नई दिशा दे सके। नरेंद्र मोदी ने विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुशासन और मजबूत नेतृत्व के नारों के साथ चुनाव अभियान चलाया और जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत केवल एक चुनावी विजय नहीं थी बल्कि भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत थी। लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाली कांग्रेस पार्टी पहली बार इतनी कमजोर स्थिति में पहुँच गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व इस परिवर्तन का मुख्य केंद्र बन गया। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान पहले से ही एक विकासवादी नेता की बन चुकी थी और उसी छवि को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके बाद </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> का लोकसभा चुनाव आया। सामान्यतः किसी सरकार के </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षों के बाद सत्ता विरोधी लहर देखी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पहले से भी अधिक सीटें जीत लीं। इस विजय ने यह स्पष्ट कर दिया कि मोदी केवल एक लोकप्रिय नेता नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुके हैं। </span>2019<span lang="hi" xml:lang="hi"> की जीत के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" xml:lang="hi"> हटाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीन तलाक कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिनका व्यापक राजनीतिक प्रभाव पड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह उपलब्धि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लगातार तीन बार सत्ता में लौटना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आसान नहीं होता। इसके लिए केवल चुनावी रणनीति ही नहीं बल्कि व्यापक जनसमर्थन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत संगठन और प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि मोदी की तीसरी पारी को भारतीय राजनीति के बड़े घटनाक्रमों में गिना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को लेकर चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि वे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेताओं की सूची में और अधिक मजबूत स्थिति प्राप्त करेंगे। भारतीय राजनीति में लंबे कार्यकाल का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र में जनता हर चुनाव में सरकार को बदलने का अधिकार रखती है। ऐसे में यदि कोई नेता लगातार वर्षों तक जनता का समर्थन बनाए रखता है तो यह उसकी राजनीतिक क्षमता और जनस्वीकार्यता को दर्शाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लगभग </span>16<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ष </span>286<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन तक लगातार प्रधानमंत्री रहे। यह रिकॉर्ड आज भी सबसे लंबा लगातार प्रधानमंत्रित्व माना जाता है। नेहरू ने </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> अगस्त </span>1947<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>1964<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक देश का नेतृत्व किया। उनके सामने विभाजन की त्रासदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक कमजोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संस्थाओं के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहचान जैसी अनेक चुनौतियाँ थीं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव मजबूत करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक क्षेत्र के विकास और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया। आधुनिक भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर नरेंद्र मोदी ऐसे समय में प्रधानमंत्री बने जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था। उनके सामने चुनौती थी कि भारत को आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामरिक और तकनीकी दृष्टि से और अधिक शक्तिशाली बनाया जाए। मोदी ने राष्ट्रवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सांस्कृतिक पहचान और मजबूत नेतृत्व को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाया। उन्होंने विदेश नीति में भी सक्रियता दिखाई। अमेरिका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जापान और खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंधों को नई गति मिली। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली दिखाई देने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार के दौरान अनेक कल्याणकारी योजनाएँ भी शुरू की गईं। जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए। आयुष्मान योजना के जरिए गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रयास हुआ। स्वच्छ भारत अभियान ने स्वच्छता को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। कोरोना महामारी के दौरान मुफ्त राशन योजना ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इन योजनाओं ने गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के बीच मोदी सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना भी करता रहा है। बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि संकट और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई। कई विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे कठिन कार्यों में से एक होगा। किसान आंदोलन ने भी यह दिखाया कि बड़े जनसमूह सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक शक्ति भी मोदी की सफलता का एक बड़ा कारण रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का विशाल कार्यकर्ता तंत्र बूथ स्तर तक सक्रिय रहता है। चुनाव प्रबंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रचार अभियान और मतदाताओं तक सीधा संपर्क भाजपा की विशेषता बन चुके हैं। इसके अलावा विपक्ष की एकजुटता की कमी ने भी भाजपा को लाभ पहुँचाया। कई राज्यों में विपक्षी दल आपसी मतभेदों के कारण मजबूत चुनौती प्रस्तुत नहीं कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक राजनीति में संचार माध्यमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया। सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं और नए मतदाताओं से सीधे जोड़ने में सहायता की। रेडियो कार्यक्रमों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडियो संदेशों और विशाल जनसभाओं के माध्यम से उन्होंने लगातार जनता के साथ संवाद बनाए रखा। यह शैली पहले के प्रधानमंत्रियों से अलग मानी जाती है। नेहरू के समय में संचार के साधन सीमित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आज राजनीति का बड़ा हिस्सा डिजिटल मंचों पर भी संचालित होता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास केवल आँकड़ों से नहीं बनता बल्कि जनमानस की स्मृतियों से भी बनता है। जवाहर लाल नेहरू को आधुनिक भारत की संस्थाओं के निर्माण के लिए याद किया जाता है। इंदिरा गांधी को निर्णायक नेतृत्व और राजनीतिक साहस के लिए जाना जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी को संवाद और सहमति की राजनीति का प्रतीक माना जाता है। नरेंद्र मोदी की छवि एक ऐसे नेता की बनी है जिसने भारतीय राजनीति को अत्यधिक केंद्रीकृत नेतृत्व की दिशा दी और राष्ट्रवाद को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">10<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिन भारतीय राजनीति में नेतृत्व की निरंतरता और बदलते जनादेश दोनों का प्रतीक बन रहा है। लोकतंत्र में लंबे समय तक सत्ता में बने रहना असाधारण उपलब्धि माना जाता है। यह केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि जनता के विश्वास का संकेत भी होता है। नरेंद्र मोदी के समर्थक इसे मजबूत नेतृत्व की विजय मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आलोचक इसे भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व आधारित राजनीति के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखते हैं। लेकिन दोनों पक्ष इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय राजनीति का केंद्र नरेंद्र मोदी ही रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में इतिहास नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का मूल्यांकन कई आधारों पर करेगा। आर्थिक विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समरसता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश नीति की उपलब्धियाँ और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव इन सबके आधार पर उनके शासन को परखा जाएगा। यदि आने वाले वर्षों में भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में और मजबूत होता है तो मोदी के कार्यकाल को विशेष महत्व दिया जाएगा। वहीं यदि बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं तो आलोचनाएँ भी तेज होंगी। यही लोकतंत्र की विशेषता है कि किसी भी नेता का अंतिम मूल्यांकन इतिहास और जनता दोनों मिलकर करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रकार </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक तारीख नहीं बल्कि भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक बनने जा रही है। यह दिन उस राजनीतिक यात्रा की याद दिलाता है जिसमें एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति देश का सबसे प्रभावशाली नेता बनता है और लगातार वर्षों तक सत्ता में बना रहता है। नेहरू से मोदी तक की यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के बदलते विश्वास और नेतृत्व की निरंतर बदलती परिभाषा को भी दर्शाती है। भारतीय राजनीति में रिकॉर्ड बनते और टूटते रहेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ क्षण ऐसे होते हैं जो इतिहास में स्थायी रूप से दर्ज हो जाते हैं। </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर चल रही चर्चा भी भारतीय लोकतंत्र के ऐसे ही एक ऐतिहासिक क्षण की ओर संकेत करती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:18:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल 87 तो डीजल 91 पैसे महंगा, 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi">  पैसे प्रति लीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल में </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi">  पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi">  रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi">  दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi">  मई को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी के दाम में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi">  रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके</span>19</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179980/petrol-became-costlier-by-87-paise-and-diesel-by-91"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/petrol-1-2.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। शनिवार को एक बार फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई। पेट्रोल के दाम में </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल में </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे प्रति लीटर और सीएनजी में </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बीते </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। इससे पहले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और सीएनजी के दाम में </span>3-3<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद </span>19<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को पेट्रोल </span>87<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे और डीजल </span>91<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे महंगा हुआ। लगातार बढ़ोतरी के चलते पिछले </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये तक का इजाफा हो चुका है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीएनजी के दाम भी दूसरी बार बढ़ाए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत </span>98.64<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से बढ़कर </span>99.51<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं डीजल का दाम </span>91.58<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से बढ़कर </span>92.49<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके अलावा सीएनजी अब </span>81.09<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार बड़ रहे तेल की कीमतों को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने एक पर एक पोस्ट में लिखा है कि महंगाई मैन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी ने पेट्रोल-डीजल पर </span>9<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए बढ़ा दिए। आज फिर पेट्रोल </span>94<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे और डीजल </span>95<span lang="hi" xml:lang="hi"> पैसे महंगा कर दिया गया। मोदी को बस तेल कंपनियों के फायदे की चिंता है. एक तरफ जहां दुनियाभर की सरकारें अपनी जनता को राहत दे रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार जनता को ही लूटने में लगी है। कभी तो जनता के भले के बारे में सोच लो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब तक पूंजीपतियों का फायदा कराते रहोगे</span>?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:26:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राष्ट्रहित और जनहित के कार्य करने वालों को ही जनादेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में हाल ही में पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की यदि ईमानदारी से व्याख्या की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जनता ने उन्हीं दलों और नेताओं को जनादेश दिया है जिनकी छवि साफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ और ईमानदार रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी को बिहार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो व्यापक जनसमर्थन मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे केंद्र की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा  की नरेंद्र मोदी  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की राष्ट्रहित और जनहित में कार्य करने वाली नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। इन नीतियों के कारण देश न केवल आंतरिक रूप से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178740/mandate-only-for-those-working-in-national-interest-and-public"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में हाल ही में पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की यदि ईमानदारी से व्याख्या की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जनता ने उन्हीं दलों और नेताओं को जनादेश दिया है जिनकी छवि साफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ और ईमानदार रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी को बिहार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो व्यापक जनसमर्थन मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे केंद्र की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा  की नरेंद्र मोदी  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की राष्ट्रहित और जनहित में कार्य करने वाली नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। इन नीतियों के कारण देश न केवल आंतरिक रूप से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अधिक मजबूत और सशक्त हुआ है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विधानसभा चुनावों के परिणाम देश के राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि इक्कीसवीं सदी के आधुनिक और जागरूक भारत में जात-पात और धर्म के नाम पर राजनीति कर सत्ता प्राप्त करना अब आसान नहीं रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का मतदाता पंच से लेकर प्रधानमंत्री तक के चुनाव में विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और सुशासन की गारंटी चाहता है। वह उसी व्यक्ति और दल को अपना समर्थन देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में डेढ़-दो दशक पहले तक कई राज्यों में जातिवाद और धर्म आधारित राजनीति के सहारे सरकारें बनती रही हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि प्राकृतिक संसाधनों और व्यापारिक संभावनाओं से सम्पन्न कई राज्य भी भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख और भ्रष्टाचार के प्रतीक बनकर रह गए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र में प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद देश की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। जाति और धर्म की राजनीति करने वाले दलों का जनाधार लगातार कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और उनकी व्यक्तिगत ईमानदार छवि के कारण भारत आज विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर अधिक सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और आत्मनिर्भर बनता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज यदि देश के दो दर्जन के आसपास राज्यों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अथवा उसके सहयोगी दलों की सरकारें है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके पीछे केंद्र सरकार की विश्वसनीय और जनहितकारी छवि का महत्वपूर्ण योगदान है। इस नेतृत्व ने देशवासियों के मन में व्याप्त भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख और भ्रष्टाचार के वातावरण को कम करने का प्रयास किया है तथा विकसित और सुरक्षित भारत का विश्वास जगाया है। लगातार आ रहे विधानसभा चुनावों के परिणाम विपक्षी दलों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश हैं। यदि उन्हें राजनीति में प्रासंगिक बने रहना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जात-पात और धर्म की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतना होगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश का मतदाता स्वार्थ और तुष्टिकरण की राजनीति से अधिक राष्ट्रहित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और सुशासन को महत्व देने लगा है। यही कारण है कि केवल सत्ता प्राप्ति के उद्देश्य से की जाने वाली राजनीति को जनता लगातार नकारती जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एआई बनाम अंडरवर्ल्ड: नया भारत, नई लड़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[डेटा, टेक्नोलॉजी और इरादा: मोदी सरकार की सुरक्षा क्रांति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164727/ai-vs-underworld-new-india-new-battle"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/0031.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य कवच प्रदान करने की दिशा में मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी पहल करते हुए </span>26 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिसंबर </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">को राष्ट्रीय ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क डेटाबेस (ओसीएनडी) का शुभारंभ किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस-</span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में लॉन्च किया गया यह प्लेटफॉर्म केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध की घोषणा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित यह प्रणाली अपराधियों के नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके फंडिंग चैनल और अंतरराज्यीय गठजोड़ को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है। एनआईए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य पुलिस और नेटग्रिड (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड) के संयुक्त प्रयास से विकसित ओसीएनडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का सशक्त प्रमाण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश देता है कि अब भारत में छिपने की कोई जगह नहीं बची है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संगठित अपराध की जटिल और बहुस्तरीय संरचना को समझते हुए सरकार ने यह स्वीकार किया कि केवल पारंपरिक पुलिसिंग से इस चुनौती का समाधान संभव नहीं। वर्षों से माफिया गिरोह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रग नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराधी और अंतरराज्यीय सिंडिकेट सूचनाओं के बिखराव का लाभ उठाते रहे हैं। एक राज्य के पास अपराधी का अधूरा डेटा होता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरे राज्य में उसकी पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि छिपी रह जाती थी। ओसीएनडी इस खामी को समाप्त करता है। यह सभी राज्यों की एफआईआर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चार्जशीट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खुफिया रिपोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डोसियर और बायोमेट्रिक जानकारियों को एकीकृत मंच पर लाकर रीयल-टाइम एक्सेस देता है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्लेटफ़ॉर्म ‘प्राकृतिक भाषा में खोज और तुरंत उत्तर’ देने वाले </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एआई</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल जैसी कार्यप्रणाली अपनाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे अपराध नेटवर्क को पूरी तरह उजागर किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ओसीएनडी की सबसे बड़ी ताकत इसकी उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताएं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इसे वैश्विक स्तर का सुरक्षा टूल बनाती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वॉयस सैंपल मैचिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिंगरप्रिंट पहचान और अन्य बायोमेट्रिक तकनीकों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए संदिग्धों की पहचान अब सेकंडों में संभव होगी। नेटग्रिड से इसका समन्वय आतंक फंडिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओवरग्राउंड वर्कर्स और हवाला नेटवर्क को बेनकाब करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। अमित शाह ने सही कहा कि कई अपराधी नेता विदेश भागकर आतंकी संगठनों से हाथ मिला लेते हैं और अपराध की कमाई से देश के खिलाफ साजिशें रचते हैं। ओसीएनडी इसी खतरनाक नेक्सस को तोड़ने का औजार है। इसके साथ लॉन्च किया गया वेपंस डेटाबेस खोए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लूटे और बरामद हथियारों की ट्रैकिंग कर अपराध की सप्लाई चेन को ध्वस्त करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस में अमित शाह द्वारा घोषित “</span>360 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री असॉल्ट” रणनीति भारत की सुरक्षा सोच में गुणात्मक बदलाव को दर्शाती है। इसमें इंटेलिजेंस शेयरिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अत्याधुनिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतर-एजेंसी समन्वय और सहकारी संघवाद को एकीकृत किया गया है। यह नीति अपराध को केवल नियंत्रित करने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे जड़ से समाप्त करने की मंशा को दर्शाती है। इसी क्रम में अपडेटेड एनआईए क्राइम मैनुअल भी जारी किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जांच प्रक्रियाएं अधिक वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेज और कानूनी रूप से मजबूत बनेंगी। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध आतंकवाद की नर्सरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जब तक इसे समाप्त नहीं किया जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय सुरक्षा पूर्ण नहीं हो सकती। ओसीएनडी इस समग्र रणनीति का डिजिटल फंदा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अपराधियों के हर कदम को ट्रैक करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ओसीएनडी का प्रभाव केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के पूरे इकोसिस्टम को नई धार देगा। ड्रग ट्रैफिकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टेरर फाइनेंसिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर गैंग और अंतरराष्ट्रीय माफिया नेटवर्क अब इस डिजिटल निगरानी से बच नहीं पाएंगे। जहां पहले किसी नेटवर्क को समझने में महीनों लग जाते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं अब सेकंडों में एक्शन योग्य इंटेलिजेंस उपलब्ध होगी। मोदी सरकार ने इस पहल में राज्यों को भागीदार बनाकर सहकारी संघवाद को नई मजबूती दी है। विशेषज्ञ इसे “डिजिटल ड्रैगनेट” की संज्ञा दे रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो न केवल मौजूदा अपराधियों को पकड़ेगा बल्कि भविष्य के खतरों का पूर्वानुमान भी लगाएगा। यह भारत को दुनिया की सबसे सशक्त और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों वाले देशों की कतार में खड़ा करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मोदी सरकार की यह पहल स्पष्ट करती है कि भारत अब अपराध और आतंकवाद के खिलाफ रक्षात्मक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आक्रामक रणनीति अपना चुका है। ओसीएनडी न केवल मौजूदा सिंडिकेट्स को ध्वस्त करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित राष्ट्र की नींव रखेगा। अमित शाह की प्रशासनिक दूरदृष्टि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में एनआईए ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार किया है। आने वाले समय में “</span>360 <span lang="hi" xml:lang="hi">डिग्री असॉल्ट” रणनीति इसे और अधिक प्रभावी बनाएगी। राज्य पुलिस बलों का इसे पूरी निष्ठा से अपनाना विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा। ओसीएनडी अपराधियों के लिए चेतावनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनके पूरे नेटवर्क के अंत की घोषणा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके साथ ही मोदी सरकार ने एंटी-टेरर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कॉमन एटीएस स्ट्रक्चर और अभेद्य सुरक्षा ग्रिड की परिकल्पना शामिल है। पहलगाम जैसे हमलों के बाद ऑपरेशन सिंदूर और महादेव जैसी कार्रवाइयों ने यह सिद्ध किया है कि भारत की जवाबी क्षमता पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है। ओसीएनडी इन अभियानों को डेटा और विश्लेषण का मजबूत आधार प्रदान करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आतंक की योजना बनाने वालों से लेकर उसे अंजाम देने वालों तक सभी पर शिकंजा कसेगा। यह व्यवस्था न केवल अपराध पर ब्रेक लगाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत को आतंकमुक्त और समृद्ध राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगी। वैश्विक स्तर पर भी इस मॉडल की सराहना हो रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ओसीएनडी मोदी सरकार की आंतरिक सुरक्षा नीति का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह दर्शाता है कि भारत अब प्रतिक्रियात्मक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूर्णतः प्रोएक्टिव राष्ट्र बन चुका है। अमित शाह का यह एआई आधारित हथियार अपराधियों की जड़ों पर प्रहार करेगा और सहकारी संघवाद के माध्यम से सभी राज्यों को एक साझा सुरक्षा मंच पर लाएगा। यह विकसित भारत की मजबूत नींव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां कोई अपराधी या आतंकी सुरक्षित महसूस नहीं कर सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्थापित ये सुरक्षा मानक आने वाले दशकों तक देश को दिशा देंगे। ओसीएनडी केवल एक डेटाबेस नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्र की अटूट सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संप्रभुता और संकल्प का सशक्त प्रतीक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" xml:lang="en-in"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 20:32:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों के प्रवेश का फैसला क्यों ? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (15 दिसंबर) को लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया, जो परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत के सख्त कानून को खत्म करने के साथ ही निजी कंपनियों को उस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है जो अब तक विशेष सार्वजनिक उद्यमों के लिए आरक्षित था.इस विधेयक के एक बार पारित होने के बाद निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन या बंद करने, परमाणु ईंधन के निर्माण (जिसमें यूरेनियम-235 का रूपांतरण, शोधन और संवर्धन शामिल है) या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163619/why-the-decision-to-enter-private-companies-in-nuclear-energy"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/download5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (15 दिसंबर) को लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया, जो परमाणु दुर्घटनाओं की स्थिति में आपूर्तिकर्ताओं के लिए भारत के सख्त कानून को खत्म करने के साथ ही निजी कंपनियों को उस क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति देता है जो अब तक विशेष सार्वजनिक उद्यमों के लिए आरक्षित था.इस विधेयक के एक बार पारित होने के बाद निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन या बंद करने, परमाणु ईंधन के निर्माण (जिसमें यूरेनियम-235 का रूपांतरण, शोधन और संवर्धन शामिल है) या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य निर्धारित पदार्थ के उत्पादन, उपयोग, प्रसंस्करण या निपटान के लिए लाइसेंस प्रदान किए जाएंगे.परमाणु उर्जा का क्षेत्र देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है इस लिए इस पर बहुत सोच विचार कर निर्णय लेने की जरूरत है। अभी यह भी समीक्षा का विषय है कि सरकार यह फैसला बिना किसी दबाव के जरूरत में ले रही है या इसके पीछे कोई मजबूरी छिपी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि लोकसभा में सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके जरिए सरकार अब परमाणु ऊर्जा पर सरकार का एकाधिकार खत्म करने की तैयारी कर रही है। अगर मौजूदा कानून को बदलने के लिए लाया गया विधेयक स्वीकार होता है तो आने वाले दिनों में भारत में निजी कंपनियां और यहां तक कि आम आदमी भी परमाणु संयंत्र के निर्माण और इसके संचालन जैसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। केंद्रीय विज्ञान-तकनीक मामलों के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में इससे जुडा विधेयक पेश किया। बुधवार को इस पर चर्चा शुरू हुई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया गया है कि इस विधेयक को कानून बनवाकर सरकार 2047 तक कुल 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इस विधेयक में क्या प्रस्ताव हैं, जिन्हें लेकर देशभर में चर्चाएं जारी हैं? इससे परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल के नियम किस तरह बदल जाएंगे? अगर निजी और आम लोगों को परमाणु उपकरण के इस्तेमाल की इजाजत होगी तो इसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? अगर ऐसे में कोई हादसा हो जाता है तो इससे कैसे निपटा जाएगा? इसके अलावा सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण क्यों है? सिविल न्यूक्लियर कानून में बदलाव के लिए जो विधेयक लाया गया है, उसे सस्टेनेबल हानेंसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (एसएचएएनटीआई यानि शांति), 2025 नाम दिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके जरिए सरकार परमाणु ऊर्जा कानून (एटॉमिक एनर्जी एक्ट), 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को वापस ले लेगी। मौजूदा समय में भारत में परमाणु पदार्थों, ऊर्जा और उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर यही दोनों कानून दिशा-निर्देश तय करते हैं। शांति, 2025 विधेयक में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, इस्तेमाल और नियमन के लिए एक नया वैध ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा रेडिएशन के मानकों को लेकर भी इस विधेयक में कई नियम शामिल किए गए हैं। विधेयक में कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा भारत की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी अहम है। खासकर जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग वाली तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डाटा सेंटर्स और उत्पादन की मांग बढ़ती जा रही है। विधेयक में कहा गया है कि सभी परमाणु और इससे होने वाले उत्सर्जन से जुड़ी गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) से सुरक्षा मंजूरियां लेनी होंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस विधेयक के जरिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की शक्तियां बदल दी गई हैं। अब एईआरबी सुरक्षा, रेडिएशन, परमाणु कचरे के प्रबंधन, जांच और आपात स्थिति को लेकर ज्यादा शक्तिशाली होगा। सरकार के पास रेडियोएक्टिव पदार्थों या रेडिएशन से जुड़े उपकरणों के नियंत्रण का भी अधिकार होगा, ताकि किसी सुरक्षा खतरे की स्थिति में सरकार खुद व्यवस्था को अपने हाथ में ले सके। परमाणु ऊर्जा अगर भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक है तो इसका गलत प्रबंधन हादसों को भी बुलावा दे सकता है। ऐसे में सरकार ने विधेयक में परमाणु हादसों को ध्यान में रखते हुए कुछ नियम बनाए हैं। इसके तहत किसी भी दुर्घटना की स्थिति में परमाणु ऊर्जा से जुड़े केंद्र के संचालक को सबसे पहले घटना के लिए जिम्मेदार माना जाएगा और उसे नुकसान की भरपाई करनी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें कहा गया है कि परमाणु केंद्र का संचालक हर तरह के नुकसान और तबाही के लिए जिम्मेदार होगा, सिवाय किसी खतरनाक प्राकृक्तिक आपदा से हुई तबाही के। यानी अगर कोई प्राकृतिक आपदा ऐसी है, जिसमें तमाम सुरक्षा मानकों का पालन करने के बावजूद नुकसान को नहीं रोका जा सकता, उस स्थिति में संचालक की जिम्मेदारी सीमित या नहीं होगी। इसके अलावा सशस्त्र संघर्ष, गृह युद्ध, आतंकवाद की घटना या विद्रोह की स्थिति में भी परमाणु इंस्टॉलेशन के संचालक की जिम्मेदारी सीमित या तय होगी। विधेयक में यह भी कहा गया है कि अगर नुकसान का मुआवजा संचालक की तय जिम्मेदारी से ज्यादा है तो अतिरिक्त मुआवजे के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार ने साफ किया किया है है कि परमाणु ऊर्जा के लिए इससे जुड़े पदार्थ और उपकरणों का इस्तेमाल करने वाली निजी कंपनियों लोगों को बीमा और वित्तीय सुरक्षा का प्रबंधन करना जरूरी होगा, ताकि किसी संभावित नुकसान की स्थिति में उसकी भरपाई की जा सके। विधेयक में कहा गया है कि किसी हादसे की स्थिति में परमाणु नुकसान के दावों से जुड़े आयोग का गठन किया जाएगा, जो कि मुआवजे को लेकर फैसला करेगा। मौजूदा समय में भारत का परमाणु बीमा पूल (आईएनआईपी) किसी परमाणु संचालक और सप्लायर को परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 के तहत 1500 करोड़ का कवरेज मुहैया कराता है। इस विधेयक की एक खास बात यह है कि इसमें कंपनियों को लाइसेंस पाने के लिए अनुसंधान और नवाचार से जुड़ी गतिविधियां दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों को लाइसेंस के लिए इन दोनों ही मानकों को दिखाना होगा। भारत के परमाणु ऊर्जा से सशक बनने के बाद से ही इस पर सरकार का एकाधिकार रहा है। सरकार के नियंत्रण में भारत का परमाणु ऊर्जा बेस काफी संतुलित रहा है। देश में 23 परमाणु रिएक्टर हैं, जिन्हें सरकार ही प्रबंधित करती है और इनकी पूरी जिम्मेदारी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के पास है। इन सभी के जरिए भारत हर वर्ष करीब 8.8 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करता है। हालांकि, सरकार ने 2032 तक 22 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य रखा है, जिसे 2047 तक बढ़ाकर 100 गीगवॉट पहुंचाने की मंशा जताई गई है। ऐसे में सरकार निजी कंपनियों के लिए भी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलने के लिए तैयार है, ताकि इन लक्ष्यों को जल्द हासिल किया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधेयक में सरकार ने निजी कंपनियों के लिए न सिर्फ रास्ते खोले हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी नियमों को आसान बनाया है। खासकर किसी हादसे की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी का नियम हटाकर। रिपोर्ट्स की मानें तो पूरे विधेयक में कहीं भी परमाणु पदार्थों या इससे जुड़े उपकरणों को भेजने वाली कंपनियों को हादसे के लिए उत्तरदायी ठहराने का जिक्र नहीं है। ऐसे में उनके पदार्थों या उपकरण की गड़‌बड़ी से हुए हादसे के लिए सप्लायर जिम्मेदार नहीं होंगे। बीते कई वर्षों से परमाणु पदार्थ और उपकरण भेजने वाली विदेशी कंपनियां भारत से इसी तरह की छूट की मांग भी कर रही थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इससे पहले परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 में सप्लायर्स को उत्तरदायी बनाने का भी जिक्र था। इसे तब भाजपा के दबाव में कांग्रेस ने ही कानून में शामिल किया था। इसके तहत कुछ मामलों में भारत की सिविल कोर्ट में सप्लायर्स के खिलाफ भी वाद दाखिल किया जा सकता है। हालांकि, तब फ्रांस की अरेवा कंपनी और अमेरिका की वेस्टिंग हाउस ने इसका विरोध किया था और भारत के साथ परमाणु संयंत्र बनाने का ज्ञापन समझौता होने के बावजूद दोनों ही कंपनियां इससे पीछे हट गई थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्षी सदस्यों ने प्रस्तावन चरण के दौरान ही आपत्तियां उठाईं.कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘अत्यधिक खतरनाक परमाणु गतिविधियों में लाभ कमाने वाली निजी भागीदारी की अनुमति देना, साथ ही दायित्व को सीमित करना, वैधानिक छूट प्रदान करना और न्यायिक उपायों को प्रतिबंधित करना, जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति राज्य के अप्रतिनिधित्व योग्य सार्वजनिक विश्वास दायित्वों को कमजोर करता है.’प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले विधेयक कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में सदन में लाए गए थे. यह विधेयक उसी नियामक संरचना को बनाए रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड जो सुरक्षा प्राधिकरण प्रदान करेगा। लेकिन विवादों के निवारण के लिए एक परमाणु ऊर्जा निवारण सलाहकार परिषद को भी शामिल करता है बहरहाल यह राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है इस के परिणाम कोई अमंगलकारी हालात भी पैदा कर सकते हैं इस लिए विशेष सतर्कता और परिणामों  पर बिना राजनीतिक दुराग्रह पूर्वाग्रह के विचार करना चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 17:08:07 +0530</pubDate>
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                <title>संसद सत्र समयावधि घटाना मोदी सरकार का अक्षम्य अलोकतांत्रिक कदम - प्रमोद तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने संसद के आगामी सत्र संचालन की समयावधि घटाये जाने को लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता करार दिया है। उन्होने कहा कि एक दिसंबर से मोदी सरकार ने महज तीन सप्ताह का संसद सत्र आहूत कर महत्वपूर्ण मुद्दो पर चर्चा कराने को लेकर गैरजवाबदेही का परिचय दिया है। उन्होने कहा कि संसदीय परंपरा रही है कि संसद की कार्यवाही छः सप्ताह हुआ करती थी। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि इधर कई वर्षों से संसद का सत्र चार सप्ताह रहा है। उन्होने कहा कि चिंताजनक है कि इस बार मोदी सरकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159485/reducing-the-duration-of-parliament-session-is-an-unforgivable-anti-democratic"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/img-20251019-wa0067.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने संसद के आगामी सत्र संचालन की समयावधि घटाये जाने को लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता करार दिया है। उन्होने कहा कि एक दिसंबर से मोदी सरकार ने महज तीन सप्ताह का संसद सत्र आहूत कर महत्वपूर्ण मुद्दो पर चर्चा कराने को लेकर गैरजवाबदेही का परिचय दिया है। उन्होने कहा कि संसदीय परंपरा रही है कि संसद की कार्यवाही छः सप्ताह हुआ करती थी। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि इधर कई वर्षों से संसद का सत्र चार सप्ताह रहा है। उन्होने कहा कि चिंताजनक है कि इस बार मोदी सरकार ने इसे महज तीन सप्ताह में सीमित कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 75 में प्रधानमंत्री व मंत्रिमंण्डल संसद के प्रति उत्तरदायी है। उन्होने कहा कि इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व जिम्मेदार केन्द्रीय मंत्री संसद की कार्यवाही में नजर नहीं आते हैं। उन्होने कहा कि पीएम मोदी लोकतंत्र की परिपाटी और सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्वांत का घोर उल्लंघन कर रहे हैं। सांसद प्रमोद तिवारी ने  कहा है कि संसद सत्र में विपक्ष लोकतंत्र में लोगों के वोट के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए एसआईआर पर मोदी सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करायेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि एसआईआर, अमेरिकी टैरिफ, एच - वन बीजा, मंहगाई,  कमजोर विदेश नीति जैसे ज्वलंत राष्ट्रीय मसलों पर संसद में चर्चा से बचने के लिए सत्र का समय घटाने का असंसदीय व गैर लोकतांत्रिक हथकंण्डा अख्तियार कर रही है। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी का बयान रविवार को मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ल के हवाले से निर्गत हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Nov 2025 18:46:11 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार : क्या यही है 'सुशासन' के दावों की हक़ीक़त ?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">बिहार विधानसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है। दावों प्रतिदावों और आरोपों व प्रत्यारोपों का दौर अपने चरम पर है। सत्ता की तरफ़ से चुनाव जीतने के लिये सबसे अधिक ज़ोर लगाया जा रहा है। हरियाणा सहित कई अन्य भाजपा शासित राज्यों से तो बिहारी मतदाताओं को विशेष ट्रेन्स द्वारा मतदान  करने हेतु बिहार भेजा जा रहा है। उधर भाजपा स्टार प्रचारक नीतीश सरकार को 'सुशासन' व भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के रूप में प्रचारित करते नहीं थक रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु सुशासन व भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के इन्हीं दावों के बीच कुछ ऐसे सनसनीख़ेज़ रहस्योद्घाटन हो रहे हैं व घटनायें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/159048/is-this-the-reality-of-claims-of-good-governance-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/rk-singh.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">बिहार विधानसभा चुनाव अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है। दावों प्रतिदावों और आरोपों व प्रत्यारोपों का दौर अपने चरम पर है। सत्ता की तरफ़ से चुनाव जीतने के लिये सबसे अधिक ज़ोर लगाया जा रहा है। हरियाणा सहित कई अन्य भाजपा शासित राज्यों से तो बिहारी मतदाताओं को विशेष ट्रेन्स द्वारा मतदान  करने हेतु बिहार भेजा जा रहा है। उधर भाजपा स्टार प्रचारक नीतीश सरकार को 'सुशासन' व भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के रूप में प्रचारित करते नहीं थक रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु सुशासन व भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के इन्हीं दावों के बीच कुछ ऐसे सनसनीख़ेज़ रहस्योद्घाटन हो रहे हैं व घटनायें घटित हो रही हैं जिन्होंने बिहार में 'सुशासन' व भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की क़लई खोल कर रख दी है। हैरानी की बात तो यह है कि इसतरह के खोखले दावों की हवा निकालने में किसी सत्ता विरोधी दल या विपक्ष की कोई भूमिका नहीं है बल्कि स्वयं भाजपा-जे डी यू के नेता ही इस 'क़लई खोल अभियान ' के मुख्य सूत्रधार हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे पहले तो ज़िक्र करते हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री  राजकुमार सिंह (आरके सिंह) के बयानों का। आर के सिंह  बिहार के आरा से दो बार सांसद रह चुके हैं और मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में वे ऊर्जा मंत्री थे। उनकी गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में होती है। सर्वप्रथम तो आर के सिंह ने चुनाव अभियान के बीच ही गत 20 अक्टूबर को एक वीडियो संदेश जारी कर मतदाताओं से अपील की थी कि वे अपराधी और भ्रष्ट छवि वाले उम्मीदवारों को वोट हरगिज़ न दें। उन्होंने विशेष रूप से जेडीयू के मोकामा से उम्मीदवार अनंत सिंह व भाजपा के तारापुर से उम्मीदवार व बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम लिया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उस सन्देश में सिंह ने यहां तक कहा था कि ऐसे उम्मीदवारों को वोट देना "चुल्लू भर पानी में डूब मरने" से भी बदतर है, क्योंकि ये "जनता का ख़ून चूस रहे हैं"। उन्होंने यह भी कहा था कि 'आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को हटाकर ही बिहार का विकास संभव है, और यदि सभी उम्मीदवार ऐसे हों तो मतदाता नोटा का विकल्प चुनें'। सिंह ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले इसी तरह के कुल 8 उम्मीदवारों के नाम लिए। अब आरके सिंह के इस बयान को भाजपा के अंदर सुलग रही बग़ावत की चिंगारी के रूप में देखा जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर के सिंह के उपरोक्त बयानों पर अभी चर्चा चल ही रही थी कि पिछले दिनों उन्होंने बिजली घोटाला सम्बन्धी एक और बड़ा धमाका कर दिया। उन्होंने बिहार की एनडीए सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। ये आरोप मुख्य रूप से बिहार में बिजली विभाग से जुड़े 62,000 करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित हैं, जो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के ठीक पहले यानी गत 4 नवंबर को सामने लाये गये हैं। इन आरोपों के अनुसार बिहार सरकार ने एक थर्मल पावर प्लांट के निर्माण के लिए अदानी ग्रुप से सम्बंधित एक कंपनी को अत्यधिक ऊंची क़ीमत पर अनुबंध दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अनुबंध के तहत कंपनी को 25 वर्षों के लिए बिजली की क़ीमत 6.075 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई, जो बाज़ार दर से काफ़ी अधिक है। इससे सरकार को पूंजी की वापसी के साथ-साथ अतिरिक्त लाभ होगा, जो कुल 62,000 करोड़ रुपये का नुक़्सान बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को पहुंचाएगा। उन्होंने बिहार सरकार के बिजली विभाग के कई अधिकारियों को इस घोटाले के लिये आरोपित करते हुये सीबीआई से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।  सिंह का आरोप है कि यह घोटाला सीधे तौर पर बिहार के लोगों को प्रभावित करेगा, क्योंकि बिजली के दाम बढ़ेंगे। इससे पहले भी आर के सिंह राज्य की 'सुशासन ' कही जाने वाली नीतीश सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगा चुके हैं। परन्तु चुनावों के बीच उनके द्वारा लगाये जा रहे उपरोक्त गंभीर आरोपों ने बिहार में कोहराम मचा दिया है। विपक्षी महागठबंधन इन आरोपों को अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी बड़ी घटना केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह से संबंधित है। गत 4 नवंबरको पटना ज़िला प्रशासन ने लल्लन सिंह के विरुद्ध एफ़ आई आर दर्ज की है। ललन सिंह ने मोकामा में जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह जोकि इस समय दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में बेऊर जेल में बंद हैं के समर्थन में किये जा रहे प्रचार के दौरान एक सभा में कहा कि "कुछ नेताओं को वोटिंग के दिन घर में बंद कर दो। घर से उसी को निकलने दो जो हमारे पक्ष में वोट करे। अगर ज़्यादा हाथ-पैर जोड़े तो अपने साथ ले जाकर वोट गिराने देना है।" ग़ौर तलब है कि अनंत सिंह की गिरफ़्तारी के बाद ललन सिंह ही उनके चुनाव प्रचार की कमान संभाल रहे थे। विपक्ष ने ललन सिंह के इस बयान को  "लोकतंत्र पर हमला" बताया और कहा कि यह ग़रीब वोटरों को डराने की साज़िश है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब इन घटनाओं व बयानों के सन्दर्भ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दावों का ज़िक्र भी ज़रूरी है। एक ओर तो आर के सिंह व ललन सिंह जैसे भाजपा-जे डी यू के केंद्रीय स्तर के नेताओं के बयान बिहार में भ्रष्टाचार, कुशासन व जंगल राज की तस्वीर पेश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ गृह मंत्री अमित शाह इन्हीं चुनाव प्रचार के दौरान जनसभाओं में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को 'भ्रष्टाचार मुक्त' सरकार का प्रमाणपत्र दे रहे हैं। शाह के अनुसार नीतीश कुमार पर " चवन्नी के भ्रष्टाचार' का भी आरोप नहीं लगा है"।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके अनुसार केवल नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार, जिन पर चार आने का भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है, वे ही बिहार का विकास कर सकते हैं।" वे केंद्र में मोदी सरकार के 11 वर्षों और बिहार में नीतीश के 20 वर्षों के शासन को "भ्रष्टाचार मुक्त" बताते हैं जबकि विपक्ष पर घोटालों का आरोप लगाने के साथ ही लालू यादव के 20 वर्ष पूर्व के कथित 'जंगल राज ' की भी याद दिलाना नहीं भूलते। ऐसे में आर के सिंह के व लल्लन सिंह जैसे सत्ता से जुड़े केंद्रीय नेताओं के ही बयान क्या यह सवाल नहीं खड़ा करते कि क्या यही है बिहार में 'सुशासन' के दावों की हक़ीक़त ? </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Nov 2025 17:40:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एलन मस्क की कंपनी 'एक्स' ने मोदी सरकार पर दर्ज कराया मुकदमा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>एलन मस्क की कंपनी एक्स ने केंद्र सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में एक केस दायर किया है। एक्स का कहना है कि भारत में आईटी एक्ट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। सरकार सहयोग पोर्टल के माध्यम से कंटेंट ब्लॉक कर रही है।</div>
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<div>अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की स्वामित्व वाली सोशल मीडिया कंपनी 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) ने भारत सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में एक वाद दायर करके कथित ‘‘गैरकानूनी सामग्री विनियमन और मनमाने सेंसरशिप’’ को चुनौती दी है।‘एक्स’ ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की केंद्र की व्याख्या, विशेष रूप से उसके द्वारा धारा 79(3)(बी) के उपयोग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150142/allen-musks-company-x-filed-suit-against-modi-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/images4.jpg" alt=""></a><br /><div>एलन मस्क की कंपनी एक्स ने केंद्र सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में एक केस दायर किया है। एक्स का कहना है कि भारत में आईटी एक्ट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। सरकार सहयोग पोर्टल के माध्यम से कंटेंट ब्लॉक कर रही है।</div>
<div> </div>
<div>अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की स्वामित्व वाली सोशल मीडिया कंपनी 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) ने भारत सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट में एक वाद दायर करके कथित ‘‘गैरकानूनी सामग्री विनियमन और मनमाने सेंसरशिप’’ को चुनौती दी है।‘एक्स’ ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की केंद्र की व्याख्या, विशेष रूप से उसके द्वारा धारा 79(3)(बी) के उपयोग पर चिंता जतायी, जिसके बारे में 'एक्स' ने दलील दी है कि यह उच्चतम न्यायालय के फैसलों का उल्लंघन है और डिजिटल मंच पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमतर करता है।</div>
<div> </div>
<div>वाद में आरोप लगाया गया है कि सरकार धारा 69ए में उल्लिखित कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए, एक समानांतर सामग्री अवरोधन तंत्र बनाने के लिए उक्त धारा का इस्तेमाल कर रही है।'एक्स' ने दावा किया कि यह दृष्टिकोण श्रेया सिंघल मामले में उच्चतम न्यायालय के 2015 के फैसले के विरोधाभासी है, जिसमें यह स्थापित किया गया था कि सामग्री को केवल उचित न्यायिक प्रक्रिया या धारा 69ए के तहत कानूनी रूप से परिभाषित माध्यम से ही अवरुद्ध किया जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div>सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, धारा 79(3)(बी) ऑनलाइन मंचों को अदालत के आदेश या सरकारी अधिसूचना द्वारा निर्देशित होने पर अवैध सामग्री को हटाना अनिवार्य करती है।मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई डिजिटल मंच 36 घंटे के भीतर अनुपालन करने में विफल रहता है, तो उसे धारा 79(1) के तहत संरक्षण गंवाने का जोखिम होता है और उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) सहित विभिन्न कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div>हालांकि, ‘एक्स’ ने इस व्याख्या को चुनौती दी है और दलील दी कि यह प्रावधान सरकार को सामग्री को ब्लॉक करने का स्वतंत्र अधिकार नहीं देता है। ‘एक्स’ ने प्राधिकारियों पर उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से सेंसरशिप लगाने के लिए कानून का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।</div>
<div> </div>
<div>आईटी अधिनियम की धारा 69ए के तहत, सरकार को डिजिटल सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने का अधिकार है, यदि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो। हालांकि, इस प्रक्रिया को 2009 के सूचना प्रौद्योगिकी (सार्वजनिक रूप से सूचना तक पहुंच को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियमों द्वारा विनियमित किया जाता है, जिसके तहत अवरुद्ध करने के निर्णय लेने से पहले एक समीक्षा प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।</div>
<div> </div>
<div>‘एक्स’ ने दलील दी है कि इन प्रक्रियाओं का पालन करने के बजाय, सरकार धारा 79(3)(बी) का उपयोग एक ‘शॉर्टकट’ उपाय के रूप में कर रही है, जिससे सामग्री को आवश्यक जांच के बिना हटाया जा सकता है। उसने कहा कि सोशल मीडिया मंच इसे उन कानूनी सुरक्षा उपायों के प्रत्यक्ष उल्लंघन के रूप में देखता है जो मनमाने सेंसरशिप को रोकने के लिए हैं।सोशल मीडिया मंच की कानूनी चुनौती में एक और प्रमुख बिंदु सरकार के ‘सहयोग’ पोर्टल का विरोध है।</div>
<div> </div>
<div>गृह मंत्रालय के तहत, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा स्थापित यह पोर्टल धारा 79(3)(बी) के तहत हटाने के अनुरोधों को कारगर बनाने और सोशल मीडिया मंच और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सीधे संवाद की सुविधा के लिए तैयार किया गया था। वाद में दलील दी गई है कि यह न्यायिक निगरानी के बिना ऑनलाइन मंचों पर विमर्श को नियंत्रित करने का सरकार का एक और प्रयास है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Mar 2025 13:49:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोली के घाव पर केवल मरहम पट्टी की गई,  आम बजट को लेकर मोदी सरकार पर बरसे- राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अर्थव्यस्था से जुड़े संकट -</strong> कांग्रेस ने शनिवार को केंद्रीय बजट में अर्थव्यस्था से जुड़े संकट के समाधान के लिए कुछ नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि गोली लगने के घाव पर मरहम पट्टी की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश किए गए आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में मोदी ने कहा कि आज देश ‘विकास भी, विरासत भी' के मंत्र को लेकर चल रहा है और इस बजट में इसके लिए बहुत महत्वपूर्ण और ठोस कदम उठाए गए हैं। बजट में नई कर व्यवस्था के तहत 12</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/148079/modi-government-lashed-out-at-the-only-ointment-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-02/17_03_55420747101023-7603c8526ced4e7aa0dc48892bcbb899--0--af65e9c8a4134769ab1fc398b8201f14.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अर्थव्यस्था से जुड़े संकट -</strong> कांग्रेस ने शनिवार को केंद्रीय बजट में अर्थव्यस्था से जुड़े संकट के समाधान के लिए कुछ नहीं होने का आरोप लगाया और कहा कि गोली लगने के घाव पर मरहम पट्टी की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश किए गए आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में मोदी ने कहा कि आज देश ‘विकास भी, विरासत भी' के मंत्र को लेकर चल रहा है और इस बजट में इसके लिए बहुत महत्वपूर्ण और ठोस कदम उठाए गए हैं। बजट में नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपए तक वार्षिक आय को कर के दायरे से मुक्त रखा गया है।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/17_04_546740194eee.jpg" alt="17_04_546740194eee" width="1920" height="1080"></img>जयराम रमेश ने क्या कहा </strong><br />जयराम रमेश ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘अर्थव्यवस्था इस समय स्थिर वास्तविक मजदूरी, सामूहिक उपभोग में उछाल की कमी, निजी निवेश की सुस्त दरें तथा जटिल और पेचीदा जीएसटी प्रणाली रूपी संकटों से घिरी हुई है। बजट में इन समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ नहीं है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि बिहार को घोषणाओं का खजाना मिल गया है। यह स्वाभाविक है क्योंकि साल के अंत में वहां चुनाव होने हैं।''</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-02/17_04_107975585venugopal.jpg" alt="17_04_107975585venugopal" width="640" height="420"></img>'गोली लगने के घाव के लिए एक मरहम पट्टी'<br /></strong>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘गोली लगने के घाव के लिए एक मरहम पट्टी!'' उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच, हमारे आर्थिक संकट को हल करने के लिए एक आदर्श बदलाव की आवश्यकता है, लेकिन यह सरकार विचारों को लेकर दिवालिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि केवल आयकरदाताओं के लिए राहत दी गई है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर इसका वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह देखना अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते बिहार के लिए कई घोषणाएं की गई हैं, जबकि आंध्र प्रदेश की अनदेखी की गई है।</p>
<p><strong>'रोजगार बढ़ाने के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं'</strong><br />कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘बजट भारत की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कुछ नहीं करेगा। सरकार ने समाज के गरीबों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए कोई दृष्टिकोण या राहत नहीं होने के कारण खोखले नारे देकर जनता को धोखा देने की कोशिश की है।'' उन्होंने दावा किया कि रोजगार सृजन के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं, भारत के निवेश माहौल में सुधार के लिए कुछ भी नहीं, किसानों के लिए कोई एमएसपी गारंटी नहीं और मध्यम वर्ग के परिवारों के बजट को नष्ट करने वाली भारी मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए कोई रणनीति नहीं।</p>
<p>वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह बजट मनरेगा को नष्ट करने का एक और प्रयास दर्शाता है क्योंकि केंद्र उस योजना के लिए आवंटित बजट को बढ़ाने में विफल रहा जो करोड़ों भारतीय नागरिकों को सुरक्षा कवच प्रदान करती है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बजट ने यह संदेश दिया है कि यह सरकार केवल अपनी राजनीति के लिए चुनावी हथकंडे अपनाने में सक्षम है, लेकिन आज देश भर में अनुभव किए जा रहे गंभीर आर्थिक संकट का समाधान नहीं कर सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 17:29:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के लिए नायडू ने केंद्र से 1 लाख करोड़ रुपये की सहायता मांगी।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div>मोदी सरकार के गठबंधन में प्रमुख सहयोगी एन चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार अपने राज्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की मांग कर रहे हैं। इन मांगों में नई राजधानी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए धन शामिल है।  तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को मोदी से मुलाकात की और राज्य में राजधानी शहर बनाने और अन्य परियोजनाओं के लिए 1 लाख करोड़ रुपये ($12 बिलियन) से अधिक की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। </div>
<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सहयोगी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142918/naidu-sought-assistance-of-rs-1-lakh-crore-from-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-07/आंध्र-प्रदेश-के-पुनर्निर्माण-के-लिए-नायडू-ने-केंद्र-से-1-लाख-करोड़-रुपये-की-सहायता-मांगी।.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div>मोदी सरकार के गठबंधन में प्रमुख सहयोगी एन चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार अपने राज्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की मांग कर रहे हैं। इन मांगों में नई राजधानी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण के लिए धन शामिल है।  तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को मोदी से मुलाकात की और राज्य में राजधानी शहर बनाने और अन्य परियोजनाओं के लिए 1 लाख करोड़ रुपये ($12 बिलियन) से अधिक की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। </div>
<div>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सहयोगी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दक्षिणी राज्य के "पुनर्निर्माण" में मदद के लिए  पर्याप्त वित्तीय सहायता की जरूरत बताया।</div>
<div> </div>
<div> नायडू ने पीएम से कहा गंभीर वित्तीय चुनौतियों और ठप पड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्टों का सामना कर रहा है। नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के 16 लोकसभा सांसद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन कर रहे हैं।वित्तीय सहायता की रूपरेखा - जिसका अनुमान कुल मिलाकर ₹1 लाख करोड़ से अधिक है - शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ नायडू की विभिन्न बैठकों में चर्चा के लिए आई। नायडू ने शुक्रवार को नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ अलग-अलग बैठकें कीं।</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने राजधानी के अपने मौजूदा दौरे के दौरान 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, छह अन्य केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। छह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री; नितिन गडकरी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री; पीयूष गोयल, वाणिज्य मंत्री; शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री और हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री थे। इस महीने के तीसरे सप्ताह में मोदी 3.0 सरकार के पहले बजट से पहले ये बैठकें महत्वपूर्ण हैं। सीतारमण के साथ बैठक में टीडीपी प्रमुख ने राज्य की नाजुक वित्तीय स्थिति पर एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किय।</div>
<div> </div>
<div>नायडू की प्रमुख मांगों में आंध्र प्रदेश को राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत की राजकोषीय घाटे की सीमा को इस वित्तीय वर्ष में 0.5 प्रतिशत तक बढ़ाकर अधिक उधार लेने की अनुमति देना, अमरावती में नई राजधानी बनाने के लिए लगभग 50,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत समर्थन और पोलावरम सिंचाई परियोजना के लिए 12,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता शामिल है। ऐसा माना जा रहा है कि नायडू ने आंध्र प्रदेश में दुग्गीराजुपटनम बंदरगाह के विकास के लिए केंद्र से सहयोग मांगा है। </div>
<div> </div>
<div>नायडू ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत अतिरिक्त आवंटन की मांग की है, जिसमें सड़क, पुल, सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं जैसे आवश्यक क्षेत्रों को लक्षित किया गया है। बुंदेलखंड पैकेज की तर्ज पर आंध्र प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों के लिए भी सहायता चाहते हैं।पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ बैठक के दौरान नायडू ने आंध्र प्रदेश में और अधिक तेल रिफाइनरियां स्थापित करने का मामला उठाया नायडू ने सीतारमण से मुलाकात के बाद मीडिया से कहा, पिछले पांच सालों में राज्य को अपूरणीय क्षति हुई है।"</div>
<div> </div>
<div>इस बीच, टीडीपी सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में स्थायी विधानसभा, सचिवालय और उच्च न्यायालय भवनों का निर्माण पूरा कर लेगी।नायडू ने घरेलू और वैश्विक निवेशकों को आश्वासन दिया कि उनकी सरकार राज्य में व्यापार अनुकूल माहौल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।</div>
<div>अपनी यात्रा के अंत में मीडिया से बातचीत करते हुए नायडू ने यह भी कहा कि वह राज्य में निवेशकों को आमंत्रित करने तथा इसके आर्थिक पुनरुत्थान को गति देने के लिए दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेंगे।अंतर-राज्यीय संबंधों पर नायडू ने 7 जुलाई को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ होने वाली बैठक का जिक्र किया। नायडू ने कहा, "हम दोनों राज्यों के हित में काम करेंगे।"</div>
<div> </div>
<div>भारतीय जनता पार्टी हाल ही में हुए राष्ट्रीय चुनावों में एक दशक में पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल करने में विफल रही, और सरकार चलाने के लिए नायडू की टीडीपी और एक अन्य गठबंधन पार्टी - जनता दल (यूनाइटेड) पर निर्भर है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू भी पूर्वी राज्य बिहार के लिए विशेष वित्तीय सहायता पैकेज की मांग कर रही है, जिस पर वह शासन करते हैं। मोदी सरकार द्वारा जुलाई के अंत में अपना राष्ट्रीय बजट पेश करने की उम्मीद है।</div>
<div> </div>
<div>टीडीपी के अनुसार, आंध्र प्रदेश सरकार गंभीर वित्तीय तनाव का सामना कर रही है, वेतन, पेंशन और ऋण सेवा जैसे खर्च राज्य के राजस्व से अधिक हैं। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 के वित्तीय वर्ष के अंत में राज्य का सार्वजनिक ऋण उसके सकल घरेलू उत्पाद का 33% था, जो चार साल पहले 31% था।टीडीपी ने गुरुवार को एक बयान में कहा, "केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता के अलावा ऐसी चुनौतियों का सामना करने का कोई और तरीका नहीं है।"</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 17:08:53 +0530</pubDate>
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