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                <title>prashasan maun - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>prashasan maun RSS Feed</description>
                
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                <title>भूमाफियाओं ने पटपर जलप्रपात मार्ग किया बंद, मारपीट करने के बाद भी पुलिस-प्रशासन मौन!</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong>  यमुनानगर (बारा)कौंधियारा क्षेत्र का ऐतिहासिक,धार्मिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण पटपर जलप्रपात मार्ग पर भूमाफियाओं और दबंगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। सोढ़ियां गांव स्थित टोंस नदी के तट पर बसे इस प्राचीन पर्यटन स्थल तक पहुंचने वाले एकमात्र रास्ते को गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा जोत दिया गया है।परिणामस्वरूप, श्रद्धालुओं,सैलानियों और ग्रामीणों का आवागमन पूर्णतया अवरुद्ध है,लेकिन पुलिस-प्रशासन मौन धारण कर लिया है। ग्रामीणों का मानना है कि गांव के ही राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय उर्फ कल्लू और उनके ही बेटों ने करीब 50 मीटर तक उस रास्ते पर अपना कब्जा कर लिया</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/164376/land-mafia-closed-patpar-falls-road-police-and-administration-remained"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img-20251225-wa0261.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज।</strong> यमुनानगर (बारा)कौंधियारा क्षेत्र का ऐतिहासिक,धार्मिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण पटपर जलप्रपात मार्ग पर भूमाफियाओं और दबंगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। सोढ़ियां गांव स्थित टोंस नदी के तट पर बसे इस प्राचीन पर्यटन स्थल तक पहुंचने वाले एकमात्र रास्ते को गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा जोत दिया गया है।परिणामस्वरूप, श्रद्धालुओं,सैलानियों और ग्रामीणों का आवागमन पूर्णतया अवरुद्ध है,लेकिन पुलिस-प्रशासन मौन धारण कर लिया है। ग्रामीणों का मानना है कि गांव के ही राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय उर्फ कल्लू और उनके ही बेटों ने करीब 50 मीटर तक उस रास्ते पर अपना कब्जा कर लिया है। जबकि उस चकमार्ग को तीन साल पहले मनरेगा योजना से बनवाया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही मार्ग पाटलेश्वर महादेव जलप्रपात और पटपर पिकनिक स्पॉट तक पहुंचने का एकमात्र विकल्प है। रास्ता बन्द होने से ग्रामीणों की आस्था,पर्यटन और रोजी-रोटी पर सीधा आघात हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले को लेकर बीते वर्ष दो पक्षों में भिड़ंत हुई थी। इस दौरान आधा दर्जन से ज्यादा प्यार लोगों को चोटें आई थीं। मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था लेकिन पुलिस ने इसे कभी संज्ञान में नहीं लिया था। दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अभी भी चकमार्ग को अवरुद्ध कर दिए हैं और प्रशासन को चेतावनी देते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर एसडीएम करछना, खंड विकास अधिकारी कौंधियारा सहित कई अधिकारियों को सूचित किया गया।25 सितंबर को दिए गए प्रार्थना पत्र में तत्कालीन एसडीएम करछना तपन मिश्रा ने बीडीओ को जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए थे, लेकिन महीनों बीतने के बावजूद अभी तक न तो जांच पूरी हुई, और न ही अवैध कब्जा हटाया गया। अब स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है, जबकि एक किमी दूर पर ही दबंगों द्वारा वाहन रोक दिए जाते हैं। राहगीरों और सैलानियों के साथ मारपीट,छिनैती, छेड़खानी और धमकी देने जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 17:26:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नहीं रुक रहा है ओवरलोड ओवर हाइट गन्ना ट्रकों का संचालन कभी घट सकती है बड़ी दुर्घटना प्रशासन मौन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले मेंगन्ना सीजन शुरू होते ही ओवरलोडिंग और ओवरहाइटिंग करने वाले ट्रकों की दौड़ एक बार फिर सड़कों पर खतरनाक गति से लौट आई है।फुटहिया पर हुई दुर्घटना के बाद होश में आये पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा तीन से चार दिनों तक चलाए गए संयुक्त अभियान के बाद कुछ समय के लिए स्थिति सुधरती दिखी थी, लेकिन अब अभियान धीमा पड़ते ही चालकों की मनमानी दोबारा चरम पर पहुंच गई है। ट्रकों की ओवरलोडिंग जहां सड़क सुरक्षा को चुनौती दे रही है, वहीं ओवरहाइटिंग के कारण हाईवे पर लगे बैरिकेड, तार और बिजली के तारों को भी लगातार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163200/operation-of-overloaded-and-over-height-sugarcane-trucks-is-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img-20251211-wa0283-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिले मेंगन्ना सीजन शुरू होते ही ओवरलोडिंग और ओवरहाइटिंग करने वाले ट्रकों की दौड़ एक बार फिर सड़कों पर खतरनाक गति से लौट आई है।फुटहिया पर हुई दुर्घटना के बाद होश में आये पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा तीन से चार दिनों तक चलाए गए संयुक्त अभियान के बाद कुछ समय के लिए स्थिति सुधरती दिखी थी, लेकिन अब अभियान धीमा पड़ते ही चालकों की मनमानी दोबारा चरम पर पहुंच गई है। ट्रकों की ओवरलोडिंग जहां सड़क सुरक्षा को चुनौती दे रही है, वहीं ओवरहाइटिंग के कारण हाईवे पर लगे बैरिकेड, तार और बिजली के तारों को भी लगातार नुकसान पहुंच रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोगों का कहना है कि पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा चलाया गया अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया। परिवहन विभाग ने कुछ ट्रकों का चालान काटकर खानापूर्ति तो कर दी इससे ट्रक चालकों में यह संदेश गया कि सख्ती अस्थायी है और जैसे ही अभियान धीमा हुआ, ओवरलोड और ओवरहाइट ट्रकों की लाइनें फिर सड़कों पर दिखने लगीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चालकों को पता है कब नहीं होगी चेकिंग, उसी हिसाब से चल रही ढुलाई गन्ना ढुलाई करने वाले चालकों ने भी प्रशासन की इस कमजोर व्यवस्था को समझते हुए अपनी रणनीति तय कर ली है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि उन्हें पता है कि अभियान अधिकतर रात 9 बजे से 12 बजे तक ही चलता है। इसलिए वे ओवरलोड ट्रक सुरक्षित समय में दो शिफ्टों में चलाते हैं—पहली शिफ्ट दोपहर से रात 9 बजे तक और दूसरी शिफ्ट रात 1 बजे से सुबह 10 बजे तक। इस दौरान सड़कों पर ट्रक बेखौफ रफ्तार से दौड़ते हैं, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना, लेकिन प्रशासन में सन्नाटा</strong></div>
<div style="text-align:justify;">ओवरलोड ट्रकों की वजह से हाईवे की हालत पहले ही खराब है, ऊपर से ओवरहाइटिंग के कारण पुलों, बिजली लाइनों और सड़क किनारे बने ढांचों को भारी नुकसान होता है। कई बार इन ट्रकों की ऊंचाई इतनी ज्यादा होती है कि बैरिकेड तक टूट जाते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई केवल चंद दिनों तक सीमित रहती है, जिसके बाद सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर आ जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, तभी स्थायी और सख्त कार्रवाई होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले दिनों ओवरलोड ट्रकों के कारण कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इससे कोई सीख नहीं ली जा रही। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत के कारण भी यह अवैध ढुलाई जारी रहती है, क्योंकि अभियान बंद होते ही ट्रकों का रुतबा पहले जैसा हो जाता है।अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर कोई लंबी अवधि का ठोस समाधान तैयार करेगा या फिर गन्ना सीजन भर लोगों की जान इसी तरह खतरे में पड़ी रहेगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 17:25:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टोंस नदी पर बालू माफियाओं का कब्जा! प्रशासन मौन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>खीरी, प्रयागराज।</strong>  यमुनापार क्षेत्र के खीरी थाना अंतर्गत कचरा चौकी के पास स्थित पिपरहटा घाट इन दिनों बालू माफियाओं के कब्जे में है। टोंस नदी से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन नावों के जरिए दिन-रात किया जा रहा है। बावजूद इसके, प्रशासन और पुलिस खामोश हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से देर रात तक नावें बालू से लदी नदी से बाहर निकलती रहती हैं। घाट पर ट्रैक्टर और ट्रक कतारबद्ध खड़े रहते हैं। बालू माफिया खुलेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिकायत</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/157334/tons-river-captured-by-sand-mafia-administration-silent"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/img-20251014-wa0112.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>खीरी, प्रयागराज।</strong> यमुनापार क्षेत्र के खीरी थाना अंतर्गत कचरा चौकी के पास स्थित पिपरहटा घाट इन दिनों बालू माफियाओं के कब्जे में है। टोंस नदी से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन नावों के जरिए दिन-रात किया जा रहा है। बावजूद इसके, प्रशासन और पुलिस खामोश हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से देर रात तक नावें बालू से लदी नदी से बाहर निकलती रहती हैं। घाट पर ट्रैक्टर और ट्रक कतारबद्ध खड़े रहते हैं। बालू माफिया खुलेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही खनन विभाग ने रोक लगाने की कोशिश की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह कारोबार फल-फूल रहा है। जब खनन अधिकारी वैभव सोनी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने “मीटिंग में व्यस्त” बताकर फोन काट दिया। इस रवैये से ग्रामीणों में और आक्रोश फैल गया। अवैध खनन के कारण टोंस नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है। नदी की गहराई बढ़ने से तटबंध कमजोर पड़ रहे हैं। बरसात में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीण किसानों का कहना है कि खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह रही है, जिससे उनकी जमीनें बर्बाद हो रही हैं। क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी और खनन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने चेतावनी दी है “अगर कुछ दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा गांव सड़क पर उतरकर विरोध करेगा।” ग्रामीणों ने कहा कि वे टोंस नदी की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे, चाहे धरना देना पड़े या गिरफ्तारी झेलनी पड़े। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में खनन होते हुए भी अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ती? क्या प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के दबाव में है? क्या नदी की रेत की लूट में अंदरखाने कोई सांठगांठ है।पिपरहटा घाट पर तत्काल छापेमारी कर अवैध खनन रोका जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए। घाट पर स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की जाए। पर्यावरण को बचाने के लिए नियमित निगरानी टीम गठित की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">“नदी हमारी जान है, इसे बर्बाद नहीं होने देंगे” ग्रामीण खीरी और आसपास के गांवों में अब माहौल गर्म है। लोग बालू माफियाओं से नाराज हैं। एक बुजुर्ग किसान ने कहा “नदी हमारी जान है। इसे बचाने के लिए हम आखिरी दम तक लड़ेंगे।” टोंस नदी की रेत लूटने वालों पर शिकंजा कसने की जरूरत है, वरना आने वाले दिनों में यह नदी नहीं, सूखी नाली बनकर रह जाएगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 17:39:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अवैध खनन का खेल: बालू माफियाओं का तांडव,प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>राजापुर,चित्रकूट।</strong> थाना क्षेत्र के बरुआ तीरमऊ बालू खदान में अवैध खनन का काला कारोबार फिर से जोर पकड़ चुका है। बरसात के समय पिच गीली होने से खनन ठप हो जाता है, लेकिन अब बालू से भरे ओवरलोड ट्रक बिना रवन्ना दौड़ रहे हैं।अवैध खनन पर खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। खनिज अधिकारी सुधाकर सिंह पर आरोप है कि वह ईमानदार छवि के जिलाधिकारी को गुमराह कर अवैध खनन करवा रहे हैं। वही स्थानीय जनता का कहना है कि बालू माफिया खुलेआम योगी सरकार को चुनौती दे रहे हैं।बालू माफियाओं ने पत्रकारिता के नाम पर कई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146875/the-game-of-illegal-mining-orgy-of-sand-mafia-questions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-12/screenshot_2024-12-08-19-31-04-52_6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>राजापुर,चित्रकूट।</strong> थाना क्षेत्र के बरुआ तीरमऊ बालू खदान में अवैध खनन का काला कारोबार फिर से जोर पकड़ चुका है। बरसात के समय पिच गीली होने से खनन ठप हो जाता है, लेकिन अब बालू से भरे ओवरलोड ट्रक बिना रवन्ना दौड़ रहे हैं।अवैध खनन पर खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। खनिज अधिकारी सुधाकर सिंह पर आरोप है कि वह ईमानदार छवि के जिलाधिकारी को गुमराह कर अवैध खनन करवा रहे हैं। वही स्थानीय जनता का कहना है कि बालू माफिया खुलेआम योगी सरकार को चुनौती दे रहे हैं।बालू माफियाओं ने पत्रकारिता के नाम पर कई व्यक्तियों को जोड़कर मोटी रकम वसूलने का खेल शुरू कर दिया है।</div>
<div> </div>
<div>संगठन में जोड़े गए पत्रकारों को मामूली एक से दो हजार रुपये दिए जाते हैं, जबकि लाखों रुपये की वसूली बालू माफियाओं से होती है। कई पत्रकारों को यह भी नहीं पता कि उनके नाम का इस्तेमाल कर कौन पैसा कमा रहा है।अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन जानबूझकर सरकार को बदनाम कर रहा है, या फिर बालू माफियाओं के दबाव में है? क्षेत्रीय जनता और सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। वही जब राजापुर थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मुझे अवैध बालू खनन को लेकर के कोई जानकारी नहीं है और न हीं अभी किसी प्रकार का पट्टा हुआ है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Dec 2024 16:30:41 +0530</pubDate>
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