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                <title>Arunachal Pradesh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Arunachal Pradesh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मॉनसून का करिश्माई रूप और कुदरत की विराट शक्ति के सामने इंसान की सीमाएं तथा असम की बाढ़ से मिला प्रकृति का बड़ा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">असम में मॉनसून की पहली बड़ी बाढ़ ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि प्रकृति जब अपना स्वरूप बदलती है तब इंसान की सारी योजनाएं और सारी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं। जून का अधिकांश समय देश के अनेक हिस्सों में लोग बारिश का इंतजार करते रहे। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। कहीं खेत सूखे रहे तो कहीं जलाशय खाली दिखाई दिए। ऐसा लग रहा था कि इस बार मॉनसून सामान्य समय से पीछे चल रहा है। लेकिन जून के अंतिम दिनों में जैसे ही पूर्वोत्तर भारत में बादलों ने डेरा डाला वैसे ही असम</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182342/the-charismatic-form-of-monsoon-and-the-limitations-of-humans"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas26.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">असम में मॉनसून की पहली बड़ी बाढ़ ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि प्रकृति जब अपना स्वरूप बदलती है तब इंसान की सारी योजनाएं और सारी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं। जून का अधिकांश समय देश के अनेक हिस्सों में लोग बारिश का इंतजार करते रहे। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। कहीं खेत सूखे रहे तो कहीं जलाशय खाली दिखाई दिए। ऐसा लग रहा था कि इस बार मॉनसून सामान्य समय से पीछे चल रहा है। लेकिन जून के अंतिम दिनों में जैसे ही पूर्वोत्तर भारत में बादलों ने डेरा डाला वैसे ही असम और अरुणाचल प्रदेश में बारिश ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते नदियां उफान पर आ गईं और हजारों परिवार बाढ़ की चपेट में आ गए। यह दृश्य केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं बल्कि यह संदेश भी है कि प्रकृति के अपने नियम हैं और उसके सामने मनुष्य की शक्ति सीमित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम के अनेक जिलों में हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों गांव पानी में घिर गए हैं। खेतों में खड़ी फसलें डूब गई हैं। पशुधन भी संकट में है। रेल संपर्क बाधित हो गया है और लोगों का सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। यह केवल असम की समस्या नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है क्योंकि प्राकृतिक आपदाएं किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहतीं। कभी पहाड़ों में बादल फटते हैं तो कभी मैदानों में नदियां उफान पर आ जाती हैं। कहीं समुद्र तूफान लेकर आता है तो कहीं सूखा लोगों की जिंदगी कठिन बना देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा ने भी स्थिति को गंभीर बना दिया है। पहाड़ों से उतरने वाला पानी असम की नदियों में पहुंचा और बाढ़ का स्वरूप और भी भयावह हो गया। यह प्रकृति का वही चक्र है जिसे मनुष्य पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकता। विज्ञान ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन आज भी बादलों को आदेश नहीं दिया जा सकता कि वे कहां बरसें और कितनी देर तक बरसें। यही कारण है कि कुदरत के सामने हर व्यक्ति समान रूप से असहाय दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मॉनसून भारत की जीवनरेखा माना जाता है। देश की कृषि का बड़ा हिस्सा आज भी वर्षा पर निर्भर है। अच्छी बारिश होती है तो खेतों में हरियाली छा जाती है और किसानों के चेहरे खिल उठते हैं। लेकिन यही बारिश जब सीमा से अधिक हो जाती है तब वही जीवनदायिनी जलधारा विनाश का कारण बन जाती है। इस बार भी यही देखने को मिला। जहां देश के कई हिस्सों में लोग बारिश का इंतजार करते रहे वहीं असम में इतनी अधिक वर्षा हुई कि लोगों के घर और खेत पानी में डूब गए। प्रकृति का यही विरोधाभास उसे रहस्यमयी और करिश्माई बनाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">देश के अनेक किसान इस समय कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। कहीं बारिश नहीं होने से बुवाई प्रभावित हुई है तो कहीं अत्यधिक वर्षा ने तैयारियां बिगाड़ दी हैं। खेती पूरी तरह मौसम पर आधारित है और मौसम का मिजाज हर वर्ष बदलता रहता है। किसान मेहनत करता है लेकिन अंतिम निर्णय प्रकृति के हाथ में होता है। यही कारण है कि भारतीय किसान सदियों से धरती और आकाश दोनों को समान श्रद्धा से देखता आया है। उसे पता है कि मेहनत उसकी है लेकिन सफलता का आशीर्वाद प्रकृति देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष अधिक मास के कारण लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि मॉनसून देर से आया। चाहे इसके धार्मिक या सांस्कृतिक संदर्भ अलग हों लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से मॉनसून का आगमन समुद्री हवाओं तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिर भी भारतीय समाज में प्रकृति और आस्था का गहरा संबंध रहा है। लोग वर्षा को केवल मौसम नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा भी मानते हैं। जब समय पर बारिश होती है तो खुशियां आती हैं और जब अत्यधिक या कम वर्षा होती है तो चिंता बढ़ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम की बाढ़ ने यह भी सिखाया है कि प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से भी संभव है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलना चाहिए। प्रभावित परिवारों तक भोजन दवाइयां और सुरक्षित आश्रय पहुंचाना सबसे पहली जिम्मेदारी है। बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। जिन किसानों की फसलें और पशुधन प्रभावित हुए हैं उन्हें आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए ताकि वे दोबारा अपने जीवन को संभाल सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा राज्य सरकार से लगातार संपर्क बनाए रखना और राहत कार्यों की समीक्षा करना सकारात्मक पहल है। ऐसे समय में राजनीति से ऊपर उठकर केवल मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए। प्राकृतिक आपदा किसी दल या क्षेत्र को देखकर नहीं आती। उसका सामना पूरे समाज को मिलकर करना पड़ता है। यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत भी है कि संकट की घड़ी में लोग एक दूसरे का हाथ थाम लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल राहत पहुंचाने की नहीं बल्कि भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने की भी है। नदियों के किनारे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जल निकासी की प्रभावी योजना समय पर चेतावनी प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण जैसे उपाय भविष्य में नुकसान कम कर सकते हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के असंतुलित दोहन ने भी कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को बढ़ाया है। यदि मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलेगा तो आपदाओं की तीव्रता को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुदरत का अपना अद्भुत स्वभाव है। वही धरती को हरियाली देती है वही नदियों को जीवन देती है वही अन्न उपजाती है और वही कभी कभी अपनी अपार शक्ति का परिचय भी देती है। मनुष्य ने ऊंची इमारतें बना लीं आधुनिक तकनीक विकसित कर ली और अंतरिक्ष तक पहुंच गया लेकिन बादलों की चाल और नदियों के वेग के सामने आज भी उसकी सीमाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। यही प्रकृति का सबसे बड़ा करिश्मा है कि वह जीवन भी देती है और समय आने पर विनम्रता का पाठ भी पढ़ाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम की बाढ़ केवल एक समाचार नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी और सीख है। हमें प्रकृति का सम्मान करना होगा उसके संतुलन को बनाए रखना होगा और आपदाओं से निपटने की तैयारी को मजबूत करना होगा। बारिश जीवन का उत्सव भी है और जिम्मेदारी की परीक्षा भी। जब तक संतुलन बना रहता है तब तक वर्षा अमृत बनकर बरसती है लेकिन जब संतुलन बिगड़ता है तब वही जल प्रलय का रूप ले लेता है। इसलिए आवश्यक है कि हम प्रकृति को जीतने का नहीं बल्कि उसके साथ सामंजस्य बनाकर चलने का प्रयास करें क्योंकि कुदरत के विराट स्वरूप के सामने अंततः हर मनुष्य विनम्र और लाचार ही दिखाई देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>          *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
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</div>
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</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:09:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का दावा- तिब्बत की 30 जगहों के नाम बदलेगा;  चीन ने अरुणाचल के इलाकों के 7 साल में 4 बार बदले नाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयशंकर ने पद संभालते ही भारत ने चीन के खिलाफ बड़ा कदम</strong><br />लोकसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के पद संभालते ही भारत ने चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को काउंटर करने के लिए भारत अब तिब्बत की 30 से ज्यादा जगहों के नाम बदलने जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय सेना जल्द ही जगहों की लिस्ट के साथ LAC का नया मैप जारी करेगी। दरअसल, चीन ने अप्रैल में अरुणाचल प्रदेश की 30 जगहों के नाम बदले थे। चीन की सरकार इन इलाकों को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142165/indias-claim-names-of-30-places-in-tibet-will-be"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/dsfgs.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>International Desk</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयशंकर ने पद संभालते ही भारत ने चीन के खिलाफ बड़ा कदम</strong><br />लोकसभा चुनाव में NDA की जीत के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के पद संभालते ही भारत ने चीन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को काउंटर करने के लिए भारत अब तिब्बत की 30 से ज्यादा जगहों के नाम बदलने जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय सेना जल्द ही जगहों की लिस्ट के साथ LAC का नया मैप जारी करेगी। दरअसल, चीन ने अप्रैल में अरुणाचल प्रदेश की 30 जगहों के नाम बदले थे। चीन की सरकार इन इलाकों को अपना क्षेत्र बताती है। ड्रैगन की इसी हरकत का जवाब देने के लिए भारत सरकार ने यह फैसला लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चीन ने अरुणाचल प्रदेश की 30 जगहों के नाम बदले थे</strong><br />चीन ने 1 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताकर वहां की 30 जगहों के नाम बदल दिए थे। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, इनमें 11 रिहायशी इलाके, 12 पर्वत, 4 नदियां, एक तालाब और एक पहाड़ों से निकलने वाला रास्ता था। हालांकि, इन जगहों के नाम क्या रखे गए हैं, इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। इन नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले 7 सालों में ऐसा चौथी बार हुआ था जब चीन ने अरुणाचल की जगहों का नाम बदले। चीन ने अप्रैल 2023 में अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नाम बदल दिए थे। इसके पहले 2021 में चीन ने 15 जगहों और 2017 में 6 जगहों के नाम बदले थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अरुणाचल में बढ़ते चीनी दखल और यहां की जगहों के नाम बदले जाने पर भारत कहता आया है कि अरुणाचल हमारा हिस्सा है। अप्रैल 2023 में विदेश मंत्रालय ने कहा था- हमारे सामने चीन की इस तरह की हरकतों की रिपोर्ट्स पहले भी आई हैं। हम इन नए नामों को सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का आतंरिक हिस्सा था, हिस्सा है और रहेगा। इस तरह से नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भारत की भाषा में पुराने नामों के आधार पर बदले नाम</strong><br />तिब्बत के इलाकों का नाम बदलने के लिए काफी रिसर्च की गई थी। इस दौरान इन जगहों के भारत की भाषा में पुराने नामों को आधार बनाकर नए नाम रखे गए हैं। भारतीय सेना की इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर डिविजन को इलाकों के नाम बदलने का जिम्मा सौंपा गया था। यह वही डिविजन है, जो गहरी रिसर्च के बाद चीन की तरफ से रखे गए अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नए नामों को भी खारिज करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए नामों की लिस्ट को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना ने पिछले कुछ हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के उन इलाकों का दौरा भी किया, जिन्हें चीन अपना बताता है। इस दौरान पत्रकारों के जरिए क्षेत्रीय लोगों से भी बात की गई। उन्होंने चीन के दावों को खारिज करते हुए खुद को भारतीय नागरिक कहा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>चीन का क्या दावा है नाम बदलने के पीछे ...</strong><br />दरअसल, चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को भारत के राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी। वो अरुणाचल को ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता है। उसका आरोप है कि भारत ने उसके तिब्बती इलाके पर कब्जा करके उसे अरुणाचल प्रदेश बना दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन अरुणाचल के इलाकों के नाम क्यों बदलता है इसका अंदाजा वहां के एक रिसर्चर के बयान से लगाया जा सकता है। 2015 में चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंस के रिसर्चर झांग योंगपान ने ग्लोबल टाइम्स को कहा था, ''जिन जगहों के नाम बदले गए हैं वो कई सौ सालों से हैं। चीन का इन जगहों का नाम बदलना बिल्कुल जायज है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुराने समय में जांगनान ( चीन में अरुणाचल को दिया नाम) के इलाकों के नाम केंद्रीय या स्थानीय सरकारें ही रखती थीं। इसके अलावा इलाके के जातीय समुदाय जैसे तिब्बती, लाहोबा, मोंबा भी अपने अनुसार जगहों के नाम बदलते रहते थे। जब जैंगनेम पर भारत ने गैर कानूनी तरीके से कब्जा जमाया तो वहां की सरकार ने गैर कानूनी तरीकों से जगहों के नाम भी बदल दिए।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 18:05:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गृह मंत्री अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश दौरे को लेकर खफा चीन </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>National: </strong>  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर पहुंचे हैं। अमित शाह के इस दौरे से चीन बौखला गया है। चीन का कहना है कि भारत के गृह मंत्री के अरुणाचल प्रदेश दौरे से उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है। चीन ने अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश दौरे की आलोचना भी की है। चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि चीन भारत के गृह मंत्री की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा का दृढ़ता से विरोध कर रहा है और क्षेत्र में उनकी गतिविधियों को बीजिंग की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन</p>
<p>शाह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/128673/china-upset-over-home-minister-amit-shahs-visit-to-arunachal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-04/1111111111.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>National: </strong> केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर पहुंचे हैं। अमित शाह के इस दौरे से चीन बौखला गया है। चीन का कहना है कि भारत के गृह मंत्री के अरुणाचल प्रदेश दौरे से उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है। चीन ने अमित शाह के अरुणाचल प्रदेश दौरे की आलोचना भी की है। चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि चीन भारत के गृह मंत्री की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा का दृढ़ता से विरोध कर रहा है और क्षेत्र में उनकी गतिविधियों को बीजिंग की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।</p>
<p>शाह ने अरुणाचल के किबिथू इलाके में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की शुरूआत की। इससे सीमावर्ती गावों में रहने वाले लोगों के जीवन में गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही पलायन रोकने और सीमा सुरक्षा को मजूबत करने के लिहाज से भी वाइब्रेंट ‘विलेज प्रोग्राम’ काफी अहम माना जा रहा है। बता दें कि अरुणाचल का किबिथू गांव चीन से सटा हुआ है। अमित शाह की वाइब्रेंट विलेज योजना पर  4800 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनका दौरा काफी अहम माना जा राह है क्योंकि हाल में चीन ने अरुणाचल के 11 स्थानों के नाम बदल दिए थे।</p>
<p>बता दें कि चीन ने हाल ही में कुछ स्थानों का नाम बदल दिया है, जिसे भारत अपने पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के रूप में मानता है। लेकिन चीन उन इलाकों पर अपना दावा करता है। भारतीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा पर एक सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, 'जंगनान चीन का क्षेत्र है। भारतीय अधिकारी की जंगनान यात्रा चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन करती है और सीमा की स्थिति और शांति के लिए अनुकूल नहीं है।‘</p>
<p>उसी जगह पहुंचे अमित शाह जिसपर चीन करता है अपना दावा<br />गृह मंत्री अमित शाह की यह यात्रा अरुणाचल प्रदेश में चीन के मंसूबों का जवाब है क्योंकि यह उसी क्षेत्र में है जिस पर चीन आए दिन अपना दावा करता है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य उत्तरी सीमा के अपने हिस्से में स्थायी गांवों को प्रोत्साहित करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 18:09:59 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी संसद में आया प्रस्ताव, अरुणाचल प्रदेश को बताया भारत का अभिन्न अंग</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>अमेरिकी आसमान में चीन के 'जासूसी गुब्बारा' दिखने के बाद से ही अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। वहीं अमेरिका ने अब एक ऐसा कदम उठाया है जिससे चीन की तिलमिलाहट बढ़ सकती है। दरअसल अमेरिका की संसद (Senate) में एक बिल लाया गया है, अगर यह पास हो जाता है तो भारत के लिए यह बेहद फायदेमंद साबित होगा। अमेरिका के सांसद अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग घोषित करने के लिए अमेरिकी संसद में बिल लेकर आए हैं।</p>
<p>ओरेगन के सीनेटर जेफ मर्कले ने एजेंसी को बताया कि वे अरुणाचल प्रदेश को भारत का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127413/resolution-came-in-the-us-parliament-told-arunachal-pradesh-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/149.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>अमेरिकी आसमान में चीन के 'जासूसी गुब्बारा' दिखने के बाद से ही अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाया हुआ है। वहीं अमेरिका ने अब एक ऐसा कदम उठाया है जिससे चीन की तिलमिलाहट बढ़ सकती है। दरअसल अमेरिका की संसद (Senate) में एक बिल लाया गया है, अगर यह पास हो जाता है तो भारत के लिए यह बेहद फायदेमंद साबित होगा। अमेरिका के सांसद अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग घोषित करने के लिए अमेरिकी संसद में बिल लेकर आए हैं।</p>
<p>ओरेगन के सीनेटर जेफ मर्कले ने एजेंसी को बताया कि वे अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं, इसलिए वे इस पर अमेरिकी संसद में बिल लाए हैं। इस बिल पर सीनेटर मर्कले का साथ सीनेटर बिल हेगर्टी ने दिया है। सीनेट हेगर्टी ने कहा कि चीन भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, ऐसे में अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि इस बिल को लाने का मकसद यह है कि आधिकारिक तौर पर अमेरिका अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा मानने लगे।</p>
<p>उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की बढ़ती आक्रामकता की भी निंदा की। भारत-चीन के बीच 3,500 किलोमीटर की एक लंबी सीमा है। अरुणाचल और सिक्किम वाला पूर्वी हिस्सा कहलाता है, वहीं उत्तराखंड और हिमाचल वाले हिस्से को मध्य भाग कहा जाता है। वहीं लद्दाख वाले इलाके से जुड़ी सीमाओं को पश्चिमी भाग का हिस्सा माना जाता है। इस लंबी सीमा पर कई ऐसे इलाके हैं जहां पर चीन और भारत के बीच में जबरदस्त तकरार है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी चीन के दावे बड़े हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत मानता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:43:57 +0530</pubDate>
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