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                <title>National Security - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>National Security RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>युवाओं को नशे के चंगुल से बचाना राष्ट्रीय संकल्प देश की शक्ति और भविष्य की रक्षा का सबसे बड़ा अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी है। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी शिक्षा उद्योग खेल और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि यही युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में चला जाए तो यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं रहती बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184621/national-resolution-to-save-youth-from-the-clutches-of-drugs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002107399.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी है। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी शिक्षा उद्योग खेल और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि यही युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में चला जाए तो यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं रहती बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को नशे के चंगुल में फंसाने के पीछे देश विरोधी ताकतों की साजिश भी हो सकती है। उनका यह संदेश केवल चेतावनी नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए जागने का आह्वान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नशा आज केवल शराब या तंबाकू तक सीमित नहीं है। सिंथेटिक ड्रग्स हेरोइन कोकीन चरस गांजा और कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ तेजी से युवाओं तक पहुंच रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से भी नशे का जाल फैलाने की कोशिशें हो रही हैं। कई बार युवाओं को आधुनिक जीवनशैली या फैशन के नाम पर नशे की ओर आकर्षित किया जाता है। शुरुआत शौक के रूप में होती है लेकिन धीरे धीरे यह लत बन जाती है और फिर व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">नशे का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह मस्तिष्क हृदय फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है। मानसिक तनाव अवसाद चिंता और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होती है। नौकरी करने वाले युवाओं की कार्यक्षमता घट जाती है। कई बार नशे की लत अपराध हिंसा सड़क दुर्घटनाओं और पारिवारिक विवादों का कारण भी बनती है। इस प्रकार नशा केवल व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य अंधकारमय बना देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे देश में जहां युवाओं से विकसित भारत का सपना जुड़ा है वहां नशे की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। देश की अर्थव्यवस्था उद्योग कृषि रक्षा विज्ञान और तकनीक सभी क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। यदि बड़ी संख्या में युवा नशे के शिकार होंगे तो देश की उत्पादक क्षमता और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यही कारण है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल स्वास्थ्य अभियान नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दें। उन्होंने यह भी कहा कि नशे के कारोबार से जुड़ा धन कई बार देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। सीमा पार से होने वाली ड्रग्स की तस्करी केवल अवैध व्यापार नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। इसलिए नशे के खिलाफ संघर्ष कानून व्यवस्था का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय है।</div>
<div style="text-align:justify;">देश में केंद्र और राज्य सरकारें नशे की रोकथाम के लिए अनेक कदम उठा रही हैं। सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ड्रग्स माफिया के नेटवर्क को तोड़ने में लगी हैं। स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवा शुरुआत में ही इस खतरे को समझ सकें। इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से उपचार और परामर्श की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। माता पिता को अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना उन्हें समय देना और उनकी समस्याओं को समझना आवश्यक है। कई बार अकेलापन तनाव असफलता या गलत संगति युवाओं को नशे की ओर ले जाती है। यदि परिवार समय रहते सहयोग और मार्गदर्शन दे तो अनेक युवा इस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के स्थान भी हैं। यहां खेल सांस्कृतिक गतिविधियां योग ध्यान और नैतिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक वातावरण दिया जा सकता है। यदि युवाओं की ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में लगेगी तो उनके नशे की ओर आकर्षित होने की संभावना कम होगी।</div>
<div style="text-align:justify;">समाज को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। धार्मिक संस्थाएं सामाजिक संगठन स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर जागरूकता अभियान चला सकते हैं। नशे को सामाजिक प्रतिष्ठा या आधुनिकता का प्रतीक मानने की गलत सोच को बदलना होगा। फिल्मों सोशल मीडिया और मनोरंजन के अन्य माध्यमों को भी जिम्मेदारी के साथ सकारात्मक संदेश देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को स्वयं भी यह समझना होगा कि जीवन की वास्तविक सफलता नशे में नहीं बल्कि ज्ञान मेहनत अनुशासन और आत्मविश्वास में है। खेल संगीत साहित्य विज्ञान और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उपयोग करके वे अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी नशे का सहारा लेने के बजाय परिवार मित्रों शिक्षकों और विशेषज्ञों से सलाह लेना अधिक उचित मार्ग है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने आज दुनिया में अपनी नई पहचान बनाई है। अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक तक हर क्षेत्र में देश आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा स्वस्थ शिक्षित आत्मविश्वासी और नशामुक्त होगा। इसलिए नशे के खिलाफ अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जन आंदोलन बनना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को यह संकल्प लेना होगा कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को नशे से बचाना केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की रक्षा का संकल्प है। जब युवा स्वस्थ होंगे तभी परिवार मजबूत होंगे समाज सुरक्षित होगा और भारत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। यही समय है कि पूरा देश एकजुट होकर नशे के विरुद्ध आवाज उठाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित स्वस्थ और सशक्त भारत का निर्माण करे।</div>
<div style="text-align:justify;">        *कांतिलाल मांडोत</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:09:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रक्षा मंत्री ने लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (केंद्रीय कमान) में डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ-</strong> उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (केंद्रीय कमान) में डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है।  इस पहल का उद्देश्य युद्धकालीन चिकित्सा तैयारियों व अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वदेशी सिद्धांतों का विकास करना और भविष्य के <span>युद्धक्षेत्रों</span>  और मानवीय आपात स्थितियों के लिए <span>विशेषज्ञता</span>  का सृजन करना है। चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (सेना) के तत्वावधान में स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (एएफएमएस) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img class="CToWUd a6T" src="https://ci3.googleusercontent.com/meips/ADKq_NbvrwM5Q4uO5jYctT_1tZ426FSb6_eAZKTRtHXRb8jceF-nRsMKEXT25jvrDVE0kXr_m_z7M1xKS0JnJbw_Hpw3TG3Ct20Mz27DpbghXcg9llwKvnMblbSyZ2Y=s0-d-e1-ft#https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PIC2KEYS.jpeg" alt="PIC2KEYS.jpeg" /></p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184279/defense-minister-virtually-inaugurated-the-department-of-military-medicine-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/unnamed2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ-</strong> उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (केंद्रीय कमान) में डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है।  इस पहल का उद्देश्य युद्धकालीन चिकित्सा तैयारियों व अनुसंधान को बढ़ावा देना, स्वदेशी सिद्धांतों का विकास करना और भविष्य के <span>युद्धक्षेत्रों</span> और मानवीय आपात स्थितियों के लिए <span>विशेषज्ञता</span> का सृजन करना है। चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (सेना) के तत्वावधान में स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (एएफएमएस) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img class="CToWUd a6T" src="https://ci3.googleusercontent.com/meips/ADKq_NbvrwM5Q4uO5jYctT_1tZ426FSb6_eAZKTRtHXRb8jceF-nRsMKEXT25jvrDVE0kXr_m_z7M1xKS0JnJbw_Hpw3TG3Ct20Mz27DpbghXcg9llwKvnMblbSyZ2Y=s0-d-e1-ft#https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PIC2KEYS.jpeg" alt="PIC2KEYS.jpeg"></img></p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक और सामाजिक विकास राष्ट्र निर्माण के आवश्यक पहलू हैं, लेकिन किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल में निहित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री मेडिसिन सैनिकों को उन्नत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करके राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा और साथ ही सैनिकों को यह भरोसा <span>दिलाएगा</span> कि जरूरत पड़ने पर उन्हें देखभाल और सहायता मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह विभाग सैन्य संबंधी आघात एवं क्षति नियंत्रण, युद्ध मनोचिकित्सा एवं दृढ़ता, पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा, सैन्य चिकित्सा रसद, रासायनिक, जैविक, विकिरणीय, परमाणु एवं विस्फोटक (<span>सीबीआरएनई</span>) चिकित्सा <span>प्रतिक्रिया</span>, आपातकालीन चिकित्सा एवं गहन देखभाल, आपदा चिकित्सा एवं मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) के साथ-साथ अनुसंधान, लेखापरीक्षा एवं डेटा विश्लेषण जैसे प्रमुख विषयों पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह प्रौद्योगिकी-आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, दीर्घकालिक फील्ड देखभाल और चिकित्सा निर्णय सहायता में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रमों की स्थापना और इन्हें शुरू के जाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके बाद एचएडीआर और <span>सीबीआरएनई</span> चिकित्सा में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की जाएगी और अंततः यह सैन्य चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में विकसित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री राजनाथ सिंह ने सैन्य चिकित्सा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार अंतरिक्ष चिकित्सा निम्न पृथ्वी कक्षा में पायलटों और अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान मानव शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक तनावों का अध्ययन करती है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक दुनिया के कुछ सबसे जटिल क्षेत्रों और कठोरतम जलवायु में तैनात हैं, जहां उन्हें विविध चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह नया विभाग इन परिचालन वातावरणों के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ वर्तमान युग में सामूहिक विनाश के हथियारों का खतरा भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यह विभाग अनुसंधान और विकास के केंद्र के रूप में कार्य करेगा और तेजी से हो रहे तकनीकी विकास से उत्पन्न होने वाले नए खतरों से निपटने में राष्ट्र को सक्षम बनाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे अधिक सैन्य योगदान देने वाले देशों में से एक है, और रक्षा बल राष्ट्रीय सीमाओं से परे आपदा जोखिम प्रबंधन (एचएडीआर) अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। यह सैन्य चिकित्सा विभाग आपदा प्रतिक्रिया, क्षेत्रीय अस्पताल तैनाती, सामूहिक हताहत प्रबंधन और महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विभाग की परिकल्पना सैन्य चिकित्सा के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में की गई है और यह सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के प्रमुख शैक्षणिक, अनुसंधान और सैद्धांतिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यह सैन्य और परिचालन चिकित्सा में शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करेगा, युद्ध चिकित्सा, युद्ध शल्य चिकित्सा और आघात देखभाल जैसे क्षेत्रों में स्नातकोत्तर कार्यक्रमों को सुगम <span>बनाएगा</span> और भारत की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग सेना चिकित्सा कोर के युवा डॉक्टरों के लिए युद्धक्षेत्र नर्सिंग और जीवन रक्षक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि यह विभाग युवा चिकित्सा पेशेवरों के लिए करियर का एक नया मार्ग खोलेगा। छात्र अब सैन्य चिकित्सा में विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे। इससे न केवल सेना के भीतर बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा अनुसंधान में भारत की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री राजनाथ सिंह ने निवारक स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसे वास्तविक उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने एक ऐसी प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया जो रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से प्रारंभिक चरण में ही स्वास्थ्य जोखिम की पहचान कर उसे कम कर सके। उन्होंने कहा कि निवारक स्वास्थ्य सेवा सीधे तौर पर युद्ध की तैयारी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), पहनने योग्य उपकरणों, भविष्यसूचक विश्लेषण और उन्नत <span>निदान</span> जैसी तकनीकों का लाभ उठाकर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की शीघ्र पहचान कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए इस नए सैन्य चिकित्सा विभाग को राष्ट्र की सैन्य मानसिकता में क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हमें मिलकर इस विभाग को विश्व के सर्वश्रेष्ठ 'युद्धक्षेत्र चिकित्सा अनुसंधान केंद्र में बदलना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><img class="CToWUd a6T" src="https://ci3.googleusercontent.com/meips/ADKq_NahY58_vliBabl2mt1eAENKgFaJdeGMmXynoSIaOXKHfFp3dhg0HgoFpos02Dof_Eh9eb0SvSx86Gs3_3vxeO_hLJhIZEgz0PUwABszF9Vf7jXhXu2zAPpB1FM=s0-d-e1-ft#https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PIC2K3P8.jpeg" alt="PIC2K3P8.jpeg"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता, सेना चिकित्सा कोर के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल <span>वीपीएस</span> कौशिक और सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशक एवं सेना चिकित्सा कोर के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल सीजी मुरलीधरन, रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री मनीष त्रिपाठी, कमांड अस्पताल (केंद्रीय कमान), लखनऊ के कमांडेंट मेजर जनरल आलोक भल्ला और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विभाग की स्थापना स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और रक्षा बलों की परिचालन तत्परता बढ़ाने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप की गई है। यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित वैश्विक सैन्य चिकित्सा केंद्र का भी पूरक है। इसका उद्घाटन एएफएमएस को एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन की दृष्टि से प्रासंगिक और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में परिवर्तित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, साथ ही यह भविष्य की <span>रक्षा</span> और राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए भारत की तत्परता को भी मजबूत करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:01:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारतीय वायुसेना की बढ़ती ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr"><p align="right" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p><p align="right" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय वायुसेना को लेकर हाल ही में सामने आई विश्व स्तर की रैंकिंग ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की संख्या से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनकी गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संचालन क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी दक्षता और रणनीतिक तैयारी से जीते जाते हैं। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट यानी </span>WDMMA <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा जारी नवीनतम ग्लोबल एयर पावर रैंकिंग में भारत को चीन से ऊपर स्थान दिया गया है। यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग भर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पिछले कई वर्षों से भारतीय वायुसेना द्वारा किए जा रहे आधुनिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर</span></p></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183026/the-increasing-strength-of-the-indian-air-force"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/amid-the-growing-air-power-of-india-china-pakistan-a-committee-has-been-formed-to-increase-the-capacity-of-the-indian-air-force_v_jpg--1280x720-4g.webp" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div dir="ltr"><p align="right" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तिवारी</span></strong></p><p align="right" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय वायुसेना को लेकर हाल ही में सामने आई विश्व स्तर की रैंकिंग ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की संख्या से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनकी गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संचालन क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी दक्षता और रणनीतिक तैयारी से जीते जाते हैं। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट यानी </span>WDMMA <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा जारी नवीनतम ग्लोबल एयर पावर रैंकिंग में भारत को चीन से ऊपर स्थान दिया गया है। यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग भर नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पिछले कई वर्षों से भारतीय वायुसेना द्वारा किए जा रहे आधुनिकीकरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेहतर प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी उन्नयन और परिचालन क्षमता में निरंतर सुधार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता भी है।</span></p><p align="right" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>WDMMA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने </span>103<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों की </span>129<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैन्य वायु इकाइयों तथा लगभग </span>48,082<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैन्य विमानों का अध्ययन करके यह मूल्यांकन तैयार किया है। इसमें केवल विमानों की संख्या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उनकी वास्तविक युद्ध क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रखरखाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उपलब्धता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी स्तर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हथियार प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लॉजिस्टिक सहायता और भविष्य की क्षमता जैसे अनेक पहलुओं को शामिल किया गया है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रैंकिंग में अमेरिका की वायुसेना पहले स्थान पर है और उसके बाद अमेरिकी नौसेना तथा रूस की वायुसेना का स्थान आता है। इसके बाद अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स की विमानन शाखाएं हैं। भारतीय वायुसेना छठे स्थान पर है जबकि चीन की वायुसेना सातवें स्थान पर है। पहली नजर में यह परिणाम कई लोगों को चौंकाने वाला लग सकता है क्योंकि चीन के पास भारत की तुलना में कहीं अधिक संख्या में सैन्य विमान हैं। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी भारत को आगे रखा गया है। इसका कारण यह है कि आधुनिक सैन्य मूल्यांकन में केवल संख्या निर्णायक नहीं होती। किसी भी वायुसेना की वास्तविक ताकत इस बात से तय होती है कि वह अपने विमानों का कितनी प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पायलट कितने प्रशिक्षित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी युद्धक रणनीति कितनी मजबूत है और वह किसी भी संकट की स्थिति में कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी विशेषता उसका व्यापक परिचालन अनुभव है। स्वतंत्रता के बाद से भारत ने अनेक युद्धों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमित सैन्य अभियानों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा मानवीय राहत कार्यों में अपनी वायु शक्ति का सफल उपयोग किया है। चाहे </span>1971<span lang="hi" xml:lang="hi"> का युद्ध हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कारगिल संघर्ष हो या हाल के वर्षों में सीमा पर उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय वायुसेना ने समय पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सटीक और प्रभावी कार्रवाई करके अपनी क्षमता का परिचय दिया है। इस लंबे अनुभव ने उसे केवल तकनीकी रूप से ही नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी अधिक परिपक्व बनाया है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत ने पिछले एक दशक में वायुसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया है। आधुनिक लड़ाकू विमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लंबी दूरी की मिसाइलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत रडार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी तकनीकों का बढ़ता उपयोग और निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय सुधार ने भारतीय वायुसेना को नई शक्ति प्रदान की है। फ्रांस से प्राप्त राफेल लड़ाकू विमानों ने भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। इनके साथ आधुनिक मिसाइल प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली भी जुड़ी हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे किसी भी संभावित संघर्ष में भारत की प्रतिक्रिया क्षमता पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है। साथ ही तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की भौगोलिक स्थिति भी उसकी वायु रणनीति को विशेष महत्व देती है। एक ओर पाकिस्तान की सीमा है तो दूसरी ओर चीन जैसी बड़ी सैन्य शक्ति। उत्तर में ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम में रेगिस्तान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वोत्तर के कठिन पर्वतीय इलाके और दक्षिण में विशाल समुद्री क्षेत्र भारतीय वायुसेना के सामने विविध प्रकार की चुनौतियां प्रस्तुत करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसी भी वायुसेना को बहुआयामी क्षमता विकसित करनी पड़ती है। भारतीय वायुसेना ने इन सभी परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण और संसाधनों का विकास किया है। यही कारण है कि उसकी परिचालन क्षमता को विश्व स्तर पर सराहा जा रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन के पास विमानों की संख्या अधिक होने के बावजूद भारत का आगे आना यह भी दर्शाता है कि आधुनिक युद्ध में गुणवत्ता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। किसी देश के पास हजारों विमान होने से वह स्वतः सबसे शक्तिशाली नहीं बन जाता। यदि उन विमानों का रखरखाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी उन्नयन और युद्ध के समय उनका समन्वित उपयोग प्रभावी नहीं है तो संख्या का लाभ सीमित हो जाता है। </span>WDMMA <span lang="hi" xml:lang="hi">का मूल्यांकन इसी व्यापक दृष्टिकोण पर आधारित है। इसी कारण भारतीय वायुसेना को उसके वास्तविक परिचालन प्रदर्शन और समग्र युद्ध क्षमता के आधार पर बेहतर स्थान मिला है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारत के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने स्वीकृत लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या से कम स्क्वाड्रनों के साथ कार्य कर रही है। पुराने लड़ाकू विमानों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाया जा रहा है और उनकी जगह नए विमानों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है। आने वाले वर्षों में तेजस के नए संस्करण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम और पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना जैसे कार्यक्रमों की सफलता भारत की वायु शक्ति को और अधिक मजबूत बनाएगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य के युद्धों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब केवल लड़ाकू विमान ही निर्णायक नहीं होंगे बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानव रहित विमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वार्म ड्रोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर युद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष आधारित निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नेटवर्क आधारित कमान प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी तकनीकें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। भारत इन क्षेत्रों में भी तेजी से निवेश कर रहा है। रक्षा अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योगों की भागीदारी बढ़ने से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में सुधार हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत रक्षा उपकरणों का स्वदेशी निर्माण भविष्य में भारत की सामरिक स्वतंत्रता को और मजबूत करेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय वायुसेना केवल युद्ध लड़ने वाली संस्था नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूकंप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महामारी और अन्य संकटों के समय भी उसने हजारों लोगों की जान बचाई है। राहत सामग्री पहुंचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदराज के क्षेत्रों से नागरिकों को निकालना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों से भारतीयों की सुरक्षित वापसी और मानवीय सहायता पहुंचाना उसके नियमित कार्यों का हिस्सा बन चुका है। इस कारण भारतीय वायुसेना की छवि केवल एक सैन्य शक्ति की नहीं बल्कि राष्ट्रीय सेवा के विश्वसनीय संगठन की भी है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज दुनिया में सैन्य शक्ति का अर्थ केवल आक्रमण की क्षमता नहीं बल्कि प्रभावी प्रतिरोध की क्षमता भी है। मजबूत वायुसेना किसी भी देश के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है। यदि किसी देश की वायु शक्ति सक्षम होती है तो संभावित विरोधी भी आक्रामक कदम उठाने से पहले कई बार सोचने को विवश होता है। भारत की बढ़ती वायु शक्ति इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को मजबूत करती है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की उपलब्धि का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इससे देश के रक्षा उद्योग और वैज्ञानिक समुदाय का मनोबल बढ़ेगा। स्वदेशी तकनीकों के विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसंधान और नवाचार को नई गति मिलेगी। इससे रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल सैन्य आवश्यकता नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी वैश्विक रैंकिंग को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। विभिन्न संस्थाएं अलग</span>-<span lang="hi" xml:lang="hi">अलग मानकों के आधार पर मूल्यांकन करती हैं और उनके निष्कर्ष भी अलग हो सकते हैं। फिर भी यदि किसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा भारत की वायु शक्ति को चीन से बेहतर आंका गया है तो यह भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता का महत्वपूर्ण संकेत अवश्य है। यह उपलब्धि संतोष का विषय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसे अंतिम लक्ष्य मानने के बजाय आगे की तैयारी का आधार बनाया जाना चाहिए।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आने वाले वर्षों में भारत को अपने लड़ाकू विमान बेड़े का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक मिसाइल प्रणालियों का समावेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी विमान निर्माण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणाली और अंतरिक्ष आधारित सैन्य क्षमताओं पर निरंतर निवेश करना होगा। यदि यह गति बनी रहती है तो भारतीय वायुसेना न केवल एशिया बल्कि विश्व की सबसे प्रभावशाली वायु सेनाओं में और मजबूत स्थान प्राप्त कर सकती है। वर्तमान रैंकिंग यह संदेश देती है कि आधुनिक युद्ध की दुनिया में केवल संसाधनों का आकार नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीतिक सोच और निरंतर नवाचार ही किसी राष्ट्र को वास्तविक शक्ति प्रदान करते हैं। भारत ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं और यही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।</span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 21:37:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीमा पर अविश्वास, बाज़ार में विश्वास — कितना उचित?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है। भारत सरकार द्वारा</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों</span>  (<span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भारत में विनिर्माण इकाइयाँ हैं) को</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में दो वर्ष के लिए बोली लगाने की अनुमति ऐसा ही एक निर्णय है। इसे महज़ व्यापारिक उदारीकरण मानना भूल होगी। यह उस द्वंद्व का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का अटल दायित्व। गलवान की रक्तरंजित स्मृतियाँ आज भी राष्ट्रीय चेतना</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182830/distrust-at-the-border-trust-in-the-market-%E2%80%93-how"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि किसी राष्ट्र की दिशा केवल युद्धक्षेत्रों से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नीतिगत निर्णयों से भी तय होती है। भारत सरकार द्वारा</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चार चीनी-लिंक्ड पावर उपकरण कंपनियों</span> (<span lang="hi" xml:lang="hi">जिनकी भारत में विनिर्माण इकाइयाँ हैं) को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में दो वर्ष के लिए बोली लगाने की अनुमति ऐसा ही एक निर्णय है। इसे महज़ व्यापारिक उदारीकरण मानना भूल होगी। यह उस द्वंद्व का प्रतीक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक ओर आर्थिक विकास की आवश्यकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा का अटल दायित्व। गलवान की रक्तरंजित स्मृतियाँ आज भी राष्ट्रीय चेतना में अंकित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूर्ण डी-एस्केलेशन अभी बाकी है</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और दोनों देशों के बीच विश्वास अब भी अधूरा है। फिर भी आर्थिक आवश्यकताओं ने संवाद के द्वार फिर खटखटाए हैं। प्रश्न केवल चीनी कंपनियों की वापसी का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या भारत इसे अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप नियंत्रित कर पाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या आर्थिक आवश्यकता धीरे-धीरे रणनीतिक निर्भरता में बदल जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर बड़े राष्ट्रीय निर्णय के पीछे आर्थिक यथार्थ की कठोर परत होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। भारत ऊर्जा संक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उच्च गति रेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं के निर्णायक दौर में है। इनके लिए भारी निवेश के साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्नत तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीव्र निष्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धी लागत आवश्यक है। वैश्विक स्तर पर कई चीनी कंपनियाँ कम समय और लागत में विशाल परियोजनाएँ पूरी करने में सक्षम हैं। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिमी कंपनियाँ अपेक्षाकृत महँगी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि भारतीय उद्योग अभी सभी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर नहीं हैं। ऐसे में सस्ता और सक्षम विकल्प आकर्षित करता है। किंतु इतिहास चेतावनी देता है कि आज का आर्थिक लाभ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि दूरदृष्टि न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल रणनीतिक स्वतंत्रता पर बोझ बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं आर्थिक आवश्यकता और राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे कठिन टकराव सामने आता है। सुरक्षा एजेंसियों की आशंकाएँ पूर्वाग्रह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक अनुभवों पर आधारित हैं। अनेक चीनी कंपनियों और उनकी सरकार के निकट संबंधों को लेकर कई देश चिंता जता चुके हैं। यदि ऐसी कंपनियों की पहुँच बिजली ग्रिड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेलवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बंदरगाह और डिजिटल अवसंरचना जैसे</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तक होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डेटा संग्रह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर निगरानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभावित बैकडोर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और लॉजिस्टिक नियंत्रण के जोखिम बढ़ जाते हैं। आज युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि डेटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल नेटवर्क और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं पर भी लड़े जाते हैं। ऐसे में प्रश्न यही है कि क्या औपचारिक सुरक्षा जाँच और कागजी मंजूरियाँ इन अदृश्य खतरों से देश की रक्षा कर पाएँगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या यही ढील भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे महँगी कीमत बन जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि जब विश्व आर्थिक संतुलन की नई दिशा तय कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत एक अलग द्वंद्व से गुजर रहा है। आज विश्व </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चीन प्लस वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">रणनीति के तहत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में चीन पर निर्भरता घटाकर भारत जैसे देशों की ओर आशा से देख रहा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु इसी समय भारत चीनी कंपनियों के लिए नए आर्थिक द्वार खोल रहा है। यह हमारी दोहरी वास्तविकता को उजागर करता है। एक ओर आत्मनिर्भर भारत का संकल्प है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर वैश्विक उत्पादन व्यवस्था की जटिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ पूर्ण आर्थिक पृथक्करण व्यवहारिक नहीं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि राष्ट्रीय हितों पर आधारित स्पष्ट शर्तों के बिना यह खुलापन तकनीकी निर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी नियंत्रण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर्थिक दबाव और ऋण-जाल जैसी चुनौतियाँ बढ़ा सकता है। इसलिए निवेश का स्वागत तभी उचित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब वह भारत को सशक्त बनाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्भर नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">स्पष्ट है कि इस चुनौती का उत्तर न अतिवादी विरोध में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न बिना शर्त स्वीकार्यता में। भारत को विवेकपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नियंत्रित और राष्ट्रीय सुरक्षा-आधारित सहयोग की नीति अपनानी होगी। चीनी कंपनियों की भागीदारी केवल गैर-संवेदनशील क्षेत्रों तक सीमित रहे। प्रत्येक परियोजना में डेटा लोकलाइजेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी हस्तांतरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय सामग्री और भारतीय साझेदारी सुनिश्चित हो तथा हर चरण में कठोर साइबर सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। साथ ही घरेलू उद्योगों को अनुसंधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवाचार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वित्तीय सहयोग और तकनीकी प्रोत्साहन मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि दीर्घकाल में भारत बाहरी तकनीकी निर्भरता से मुक्त हो सके। यदि सस्ती परियोजनाओं के आकर्षण में इन सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आज का आर्थिक लाभ कल की रणनीतिक कमजोरी बन सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस निर्णय की कूटनीतिक गूँज भी इसके आर्थिक प्रभावों जितनी दूरगामी है। लद्दाख में सैन्य और राजनयिक वार्ताएँ जारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किंतु विश्वास की पुनर्स्थापना अब भी अधूरी है। ऐसे समय में चीनी कंपनियों की वापसी का संदेश केवल बीजिंग ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरा विश्व देख रहा है। इसे एक ओर संतुलित और नियंत्रित सहयोग की नीति माना जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर यह आशंका भी है कि भारत अनजाने में अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी को आर्थिक अवसर दे रहा है। परिपक्व कूटनीति का अर्थ स्थायी शत्रुता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राष्ट्रीय हितों के अनुरूप संतुलित संवाद है। किंतु यह तभी सार्थक होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी नींव समानता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता और पारस्परिक उत्तरदायित्व पर टिकी हो। आर्थिक संबंध किसी भी स्थिति में ऐसी निर्भरता में न बदलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भविष्य में भारत की निर्णय-स्वतंत्रता को प्रभावित करे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविक कसौटी चीनी कंपनियों की वापसी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की रणनीतिक दूरदृष्टि और नीति-परिपक्वता है। न भावनात्मक चीन-विरोध आर्थिक उन्नति का आधार बन सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की उपेक्षा की जा सकती है। भारत को ऐसा संतुलन स्थापित करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक निवेश और राष्ट्रीय सुरक्षा साथ-साथ आगे बढ़ें। विवेकपूर्ण संतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अटूट सुरक्षा-सतर्कता और स्वदेशी क्षमता निर्माण ही सशक्त भारत की नींव हैं। यदि भारत यह संतुलन साध लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सीमित छूट</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल आर्थिक आवश्यकता का प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस परिपक्व राष्ट्र की पहचान बनेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैश्विक अवसरों का स्वागत करते हुए अपनी संप्रभुता की रक्षा भी करता है। अंततः इतिहास सम्मान उन्हीं राष्ट्रों को देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो क्षणिक लाभ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दूरदृष्टि से अपना भविष्य गढ़ते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182830/distrust-at-the-border-trust-in-the-market-%E2%80%93-how</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 21:53:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात ATS ने जैश-ए-मोहम्मद के कथित मॉड्यूल का किया भंडाफोड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अहमदाबाद।</span></strong></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (</span>ATS) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से जुड़े कथित मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। एजेंसी ने गुजरात और मध्य प्रदेश में संयुक्त कार्रवाई के दौरान आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। एटीएस का आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग संगठन के स्लीपर सेल के रूप में कार्य कर रहे थे और राज्य में आतंकी नेटवर्क का विस्तार करने के प्रयास में जुटे थे।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एटीएस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे मामले का खुलासा एक गोपनीय सूचना के आधार पर शुरू हुई जांच के दौरान हुआ। बताया गया</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182672/gujarat-ats-busts-alleged-module-of-jaish-e-mohammed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/image002.jpg" alt=""></a><br /><p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अहमदाबाद।</span></strong></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (</span>ATS) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से जुड़े कथित मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। एजेंसी ने गुजरात और मध्य प्रदेश में संयुक्त कार्रवाई के दौरान आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। एटीएस का आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग संगठन के स्लीपर सेल के रूप में कार्य कर रहे थे और राज्य में आतंकी नेटवर्क का विस्तार करने के प्रयास में जुटे थे।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एटीएस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे मामले का खुलासा एक गोपनीय सूचना के आधार पर शुरू हुई जांच के दौरान हुआ। बताया गया कि डिप्टी एसपी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">हर्ष उपाध्याय</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को जैश-ए-मोहम्मद के नाम पर संदिग्ध गतिविधियां संचालित किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद तकनीकी और स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके आधार पर गुजरात के बनासकांठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नवसारी और पाटन जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के देवास में संयुक्त छापेमारी की गई।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसी का दावा है कि संदिग्धों ने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong>'</strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद</span>'</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से एक स्थानीय मॉड्यूल तैयार किया था। आरोप है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से नए लोगों से संपर्क स्थापित किया जाता था और संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। एटीएस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस मॉड्यूल को लगभग तीन लाख रुपये की फंडिंग भी प्राप्त हुई थी।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने एक पुरानी कार खरीदकर उसका स्वामित्व अपने नाम स्थानांतरित नहीं कराया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी प्रकार का संदेह न हो। एजेंसी का कहना है कि इस वाहन का उपयोग कथित तौर पर विभिन्न गतिविधियों के संचालन में किया जाता था।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एटीएस का आरोप है कि कुछ स्थानीय मदरसों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong>'</strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">दावत</span>'</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से अभियान चलाकर नए लोगों तक पहुंचने और उन्हें संगठन की विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच के बाद ही होगा।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कार्रवाई के दौरान तीन संदिग्धों को सिद्धपुर स्थित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जामिया अबुल हसन मदरसा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तथा एक अन्य संदिग्ध को</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जामिया रहमानिया मदरसा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अहमद अब्दुल्लाह गाजीवाला</span>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा</span>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला</span>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">जकारिया दुर्रा</span>, </strong><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मोहम्मद आमिर घाघा और मुफ्ती फौजान इस्माइल दौवा</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सहित कुल आठ लोग शामिल हैं।</span></p>
<p class="m_-9148880386454094366isselectedend" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एटीएस के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तलाशी के दौरान </span>254 <span lang="hi" xml:lang="hi">पृष्ठों का कथित प्रचार सामग्री</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान में प्रकाशित कुछ पुस्तकें तथा आतंकी संगठन के सरगना</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">मसूद अजहर</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को संबोधित बताए जा रहे कुछ पत्र भी बरामद किए गए हैं। बरामद सामग्री की फोरेंसिक एवं तकनीकी जांच कराई जा रही है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जांच एजेंसी ने कहा है कि पूरे नेटवर्क के अन्य संभावित संपर्कों और वित्तीय स्रोतों की भी गहन जांच की जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 22:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिरोजपुर से लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रही 21 सिख रेजिमेंट का MLA लालपुरा ने किया गर्मजोशी से स्वागत*</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>तरनतारन, </strong> फिरोजपुर से अपनी अगली तैनाती के लिए लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रहे 21 सिख रेजिमेंट के ऑफिसर और सैनिक हल्का खडूर साहिब के रसूलपुर नहरों पर कबीला रेस्टोरेंट पहुंचे। इस मौके पर, हल्का खडूर साहिब के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा, जो 21 सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं, ने सभी मिलिट्री ऑफिसर, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान, पूर्व सैनिकों और अभी सेवा दे रहे सैनिकों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं। इस मौके पर, सभी सैनिकों ने एक साथ बैठकर लंच किया। इस मौके पर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181552/mla-lalpura-warmly-welcomed-the-21-sikh-regiment-leaving-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000910053.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>तरनतारन, </strong> फिरोजपुर से अपनी अगली तैनाती के लिए लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रहे 21 सिख रेजिमेंट के ऑफिसर और सैनिक हल्का खडूर साहिब के रसूलपुर नहरों पर कबीला रेस्टोरेंट पहुंचे। इस मौके पर, हल्का खडूर साहिब के MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा, जो 21 सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं, ने सभी मिलिट्री ऑफिसर, सैनिकों और पूर्व सैनिकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान, पूर्व सैनिकों और अभी सेवा दे रहे सैनिकों ने एक-दूसरे से मिलकर पुरानी यादें ताजा कीं। इस मौके पर, सभी सैनिकों ने एक साथ बैठकर लंच किया। इस मौके पर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO) अरज बेनीवाल, कई JCO और दूसरे मिलिट्री ऑफिसर खास तौर पर मौजूद थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर 21 सिख रेजिमेंट के सभी एक्स-सर्विसमैन ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेका और रुमाला साहिब भेंट किया। MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा और एक्स-सर्विसमैन ने ऑफिसर्स को श्री हरमंदिर साहिब का सुंदर मॉडल देकर सम्मानित किया। इस दौरान यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर (CO) अरज बेनीवाल और दूसरे मिलिट्री ऑफिसर्स ने MLA लालपुरा को खास तौर पर मोमेंटो देकर सम्मानित किया और उनका धन्यवाद किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा ने इस मौके पर कहा कि 21 सिख रेजिमेंट के साथ बिताया गया समय उनकी ज़िंदगी का गर्व भरा चैप्टर है। उन्होंने कहा कि मिलिट्री कम्युनिटी की एकता, डिसिप्लिन और देशभक्ति हर युवा के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स है। उन्होंने देश की रक्षा के लिए सभी सर्विंग और रिटायर्ड सैनिकों के योगदान को सलाम किया, लेह-लद्दाख के लिए रवाना हो रही पूरी यूनिट को शुभकामनाएं दीं और उनकी सुरक्षित और सफल सर्विस के लिए प्रार्थना की। इस मौके पर कैप्टन दयाल सिंह, कैप्टन कुलदीप सिंह, निरवाल सिंह रटोके, धीरा सिंह, कुलदीप सिंह फेलके आदि मौजूद थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फोटो कैप्शन:</div>
<div style="text-align:justify;">- MLA मनजिंदर सिंह लालपुरा 21 सिख रेजिमेंट के अधिकारियों को सम्मानित करते हुए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:18:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंडो-नेपाल बॉर्डर पर पुलिस व एसएसबी की संयुक्त गश्त, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong>    जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से मंगलवार को पुलिस एवं एसएसबी की संयुक्त टीम ने इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाते हुए व्यापक पैदल गश्त की। अभियान के दौरान सीमावर्ती गांवों, संवेदनशील स्थलों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान के दौरान सीमा क्षेत्र में होने वाली असामाजिक गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई। संयुक्त टीम ने नेपाल</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181359/joint-patrolling-of-police-and-ssb-on-indo-nepal-border-keeping"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260616-wa0528.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर।</strong>  जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से मंगलवार को पुलिस एवं एसएसबी की संयुक्त टीम ने इंडो-नेपाल सीमा क्षेत्र में विशेष चेकिंग अभियान चलाते हुए व्यापक पैदल गश्त की। अभियान के दौरान सीमावर्ती गांवों, संवेदनशील स्थलों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक बलरामपुर विकास कुमार के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान के दौरान सीमा क्षेत्र में होने वाली असामाजिक गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई। संयुक्त टीम ने नेपाल सीमा से जुड़े गांवों में भ्रमण कर लोगों से संवाद स्थापित किया तथा सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी साझा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस एवं एसएसबी के अधिकारियों ने ग्राम सुरक्षा समितियों एवं क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों को मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, गौ तस्करी, अवैध कटान तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम में सहयोग करने की अपील की। साथ ही लोगों को जागरूक करते हुए कहा गया कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वाहन अथवा गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस प्रकार के संयुक्त अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। पुलिस और एसएसबी की सतर्कता से सीमा पार होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिल रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाई गई चौकसी, पुलिस-एसएसबी की संयुक्त कार्रवाई से असामाजिक तत्वों में हड़कंप का माहौल है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181359/joint-patrolling-of-police-and-ssb-on-indo-nepal-border-keeping</link>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 20:14:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक ऑपरेशन जिसने बदल दी युद्ध की तस्वीर: ऑपरेशन सिंदूर और दो सेनाओं के बीच तकनीकी अंतर</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178485/an-operation-that-changed-the-face-of-war-operation-sindoor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/whatsapp-image-2026-05-07-at-19.11.42.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>भारत </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>सुधांशु कुमार द्वारा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> </strong>7 मई 2025 की रात भारत ने सिर्फ 23 मिनट में ऐसा सैन्य अभियान पूरा किया जिसने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक सोच बदल दी। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए। इन हमलों में आधुनिक मिसाइलें, सैटेलाइट-निर्देशित हथियार और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। सबसे अहम बात यह रही कि भारत ने पाकिस्तान की चीनी तकनीक वाली एयर डिफेंस प्रणाली को निष्क्रिय करते हुए मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दो दिन के भीतर दुनिया के सामने सैटेलाइट तस्वीरें आ गईं। Maxar, KawaSpace और MizarVision जैसी कंपनियों द्वारा जारी तस्वीरों में साफ दिखा कि किन ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ। शाहबाज एयरबेस का हैंगर पूरी तरह तबाह दिखाई दिया, जबकि कई एयरबेस की रनवे और रडार सिस्टम भी क्षतिग्रस्त मिले। इन तस्वीरों ने भारत के दावों को मजबूत प्रमाण दे दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फर्क सिर्फ हमले का नहीं, सोच का था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारत ने अपने हर हमले का प्रमाण दुनिया के सामने रखा। यही सबसे बड़ा अंतर था। आधुनिक युद्ध में केवल हमला करना काफी नहीं होता, यह भी जरूरी है कि दुनिया देख सके कि हमला किस पर हुआ और क्यों हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अलग थी। सीमा पार से भारी गोलाबारी हुई, जिसमें मंदिर, गुरुद्वारे और नागरिक इलाके प्रभावित हुए। पुंछ, राजौरी और कश्मीर के कई इलाकों में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। कई लोगों की जान गई और घर तबाह हुए। इन हमलों का कोई स्पष्ट सैन्य लक्ष्य दिखाई नहीं दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से दोनों देशों की सैन्य क्षमता और तकनीकी सोच का अंतर साफ हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भारत का युद्ध मॉडल पूरी तरह तकनीक आधारित था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन से पहले भारत की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया। सैटेलाइट निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और रियल टाइम इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़कर लक्ष्य तय किए गए। हर जानकारी सीधे सेना और वायुसेना के कमांडरों तक पहुंच रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का संयुक्त इस्तेमाल था। भारत ने भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि डेटा और सटीक जानकारी के आधार पर कार्रवाई की।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए कई हथियार और ड्रोन भारत में बने या भारत के सहयोग से विकसित किए गए थे। ब्रह्मोस, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, स्काईस्ट्राइकर और नागास्त्र जैसे सिस्टम भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का उदाहरण बने।</p>
<p style="text-align:justify;">इन हथियारों का सफल इस्तेमाल केवल सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी बड़ी सफलता है। इससे आने वाले समय में रिसर्च और निवेश दोनों बढ़ेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके विपरीत पाकिस्तान का रक्षा ढांचा बड़े पैमाने पर विदेशी हथियारों पर निर्भर है। ऐसे में किसी बड़े नुकसान के बाद उसकी भरपाई आसान नहीं होती।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सैटेलाइट तस्वीरों ने बदल दिया प्रचार का खेल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक इलाकों पर हमला किया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने इन दावों को कमजोर कर दिया। आधुनिक दौर में अब केवल बयान देकर सच नहीं बदला जा सकता। कुछ ही घंटों में सैटेलाइट तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने वास्तविक स्थिति ला देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही आधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी ताकत है — पारदर्शिता।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>परमाणु हथियारों की रणनीति पर असर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई वर्षों तक पाकिस्तान की रणनीति यह रही कि परमाणु हथियारों के डर से भारत बड़े सैन्य कदम नहीं उठाएगा। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने यह धारणा बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने यह दिखाया कि सीमित, सटीक और नियंत्रित सैन्य कार्रवाई संभव है, बिना युद्ध को बड़े स्तर तक ले जाए। भारत ने केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तानी सेना या नागरिकों को।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पाकिस्तान की पुरानी रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ती दिखाई दी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ड्रोन युद्ध का नया दौर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार था जब दो परमाणु संपन्न देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। भारत ने सटीक निशाना लगाने वाले ड्रोन इस्तेमाल किए, जबकि पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में ड्रोन भेजकर दबाव बनाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की एयर डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश ड्रोन को रास्ते में ही रोक दिया। इससे साफ हुआ कि भविष्य के युद्धों में केवल हथियारों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता ज्यादा मायने रखेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बदलते युद्ध का नया संदेश</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध केवल ताकत से नहीं, बल्कि तकनीक, सटीकता और जवाबदेही से तय होंगे। भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सैन्य क्षमता।</p>
<p style="text-align:justify;">सैटेलाइट लगातार देख रहे हैं, तकनीक सब रिकॉर्ड कर रही है और अब सच को लंबे समय तक छिपाना आसान नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 19:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शांति की बातें, युद्ध की तैयारी: सभ्यता का दोहरा चेहरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p align="right" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आसमान अभी भी धुंध और धुएँ से भरा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हमारी आँखें टीवी स्क्रीन पर चमकते लाल ब्लॉकों में फँस गईं। एक पल पहले तक यह सिर्फ़ खबरें थीं—और अगले ही पल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी ज़िन्दगी बन गई। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया। </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को की। इस खबर ने दुनिया को झकझोर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमारे भीतर का झटका और भी गहरा था। यह कोई दूर की लड़ाई</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172185/talks-of-peace-preparation-for-war-the-double-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><p align="right" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आसमान अभी भी धुंध और धुएँ से भरा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हमारी आँखें टीवी स्क्रीन पर चमकते लाल ब्लॉकों में फँस गईं। एक पल पहले तक यह सिर्फ़ खबरें थीं—और अगले ही पल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी ज़िन्दगी बन गई। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया। </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">फरवरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी पुष्टि ईरानी राज्य मीडिया ने </span>1 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को की। इस खबर ने दुनिया को झकझोर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमारे भीतर का झटका और भी गहरा था। यह कोई दूर की लड़ाई नहीं थी—यह हमारी किताबों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी दीवारों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सांसों में उतर गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल की किताबें अब कागज़ नहीं रह गई थीं। वे बम के टुकड़ों में बदल गई थीं। हर पन्ना खून से सना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर अध्याय मौत की कहानी कहता था। बच्चे अब पढ़ेंगे कि छिपना और बचना ही उनका पाठ बन गया। हमारी पीढ़ी ने उन्हें विरासत दी है—एक ऐसी विरासत जिसमें ज्ञान और भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों सिखाए जाते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने शांति की बातें कीं। “डिप्लोमेसी चलेगी</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा। लेकिन </span>28 <span lang="hi" xml:lang="hi">फ़रवरी</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">को ऑपरेशन शुरू हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी आँखें फिर अंधेरी हो गईं। टीवी बंद हुआ। सोशल मीडिया को स्क्रॉल करते हुए सोचा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी दुनिया से दूर है।” लेकिन यह सच नहीं था। ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इज़राइल पर मिसाइलें गिरीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिज़्बुल्लाह सक्रिय हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और गल्फ़ में तेल सुविधाओं और जहाजों पर हमले हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आग और विस्फोट की खबरें आईं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और हम</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हम खून से सनी किताबें तैयार कर रहे हैं। किताबें जो नई पीढ़ी को पढ़ाएंगी कि उनका भविष्य किस तरह जलता रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उनकी आवाज़ कहाँ गुम हो गई। यह हमारी सच्चाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी चुप्पी—सबसे बड़ा अपराध।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह युद्ध नया नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हमने इसे अपनी विरासत बना लिया है। </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब इज़राइल ने ईरान पर हमला किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने इसे सिर्फ़ “सीमित संघर्ष” कहकर नजरअंदाज किया। जब ट्रंप ने घोषणा की कि “ईरान को न्यूक्लियर हथियार नहीं मिलेंगे</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने उसकी चेतावनी को हँसी में उड़ा दिया। लेकिन अब</span>, 2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ख़ामेनेई की मौत के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेहरान में नागरिक क्षेत्र प्रभावित हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पतालों और स्कूलों पर असर की खबरें</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सामने आ रही हैं। हमारी पीढ़ी ने चुन लिया है – बच्चों को खून भरी किताबें थमाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हथियार बेचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और तेल के लिए आंखें मूंद लेना। और वही बच्चे अब पढ़ेंगे – हर अध्याय में मौत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर पन्ने पर खून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जिन किताबों में जीवन का कोई पाठ नहीं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक बच्चा अपनी माँ से पूछेगा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">माँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह किताब क्यों लाल है</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">और जवाब नहीं मिलेगा। क्योंकि यह लाल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह खून से सनी थी। हमारी पीढ़ी ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">हम लड़ रहे हैं ताकि तुम सुरक्षित रहो</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लड़ाई किससे थी – खुद से</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हमने घृणा बोई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नफ़रत उगाई। “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” की छाया में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार का बोझ बच्चों पर पड़ा। युद्ध की छाया में रेडिएशन का खतरा मंडरा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैंसर और बीमारियाँ पीढ़ियों को प्रभावित कर सकती हैं। हमने उन्हें क्या विरासत दी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी किताबें जिनमें हर जन्म मौत की सज़ा पढ़ाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जिनमें जीवन का कोई पाठ नहीं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ़ मिडिल ईस्ट की समस्या नहीं है। वर्ल्ड वॉर थ्री की आहट अब हर दिशा में गूँज रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर ख़बर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर रेडियो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर स्क्रीन पर इसकी गूंज सुनाई देती है। पोल्स चीख रहे हैं – अमेरिका में </span>46%, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिटेन में </span>43%, <span lang="hi" xml:lang="hi">फ्रांस में उच्च प्रतिशत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि जर्मनी में कम लोग अगले पाँच साल में ग्लोबल वॉर को संभावित मानते हैं। लेकिन हम सुन नहीं रहे। हम अपनी आँखें बंद करके नई पीढ़ी के लिए खून से सनी किताबें तैयार कर रहे हैं। बच्चे पढ़ेंगे – ऐसी किताबें जो न्यूक्लियर विंटर की कहानियाँ कहेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ सूरज छिपा रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ फसलें उगना भूल जाएँगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और भूख ही मृत्यु का दूसरा नाम बन जाएगी। यह हमारी विरासत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके साए में बढ़ती हर पीढ़ी अपनी पहली और आखिरी पाठशाला में मौत और विनाश ही देखेगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने जलवायु परिवर्तन को अनदेखा किया। हमने युद्ध को सामान्य मान लिया। अब इसकी कीमत चुकाने वाली नई पीढ़ी होगी। उनकी पहली किताब विस्फोट की होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी आखिरी राख की। उनका डीएनए बदल चुका होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका बचपन डर और सायरन की चीखों में बीतेगा। उनके खेल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि खतरे की घंटियों की गूँज उनके कानों में गूँजेगी। हमारी पीढ़ी का सबसे बड़ा अपराध यही है – युद्ध को अपनी विरासत बनाना। हमने किताबें लिखीं – खून से। लेकिन अब वही किताबें उनकी पहली और आखिरी पढ़ाई बन चुकी हैं। नई पीढ़ी पढ़ेगी और समझेगी कि हमने क्या किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यह समझ उन्हें हमारे फैसलों की कीमत बतलाएगी।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब जागने का वक्त है – इससे पहले कि खून से सनी किताबें बच्चों की पहली और आखिरी पढ़ाई बन जाएँ। जागो। बदलो। लड़ो। क्योंकि अगर हमने अभी नहीं बदला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नई पीढ़ी सिर्फ़ खून के पन्ने पलटेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हर सवाल के जवाब के लिए हमारी चुप्पी ही रह जाएगी। बच्चे पूछेंगे</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">तुमने हमें क्यों मारा</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारे पास कोई उत्तर नहीं होगा। अब मौका है – युद्ध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शांति की विरासत देने का। हमारी जिम्मेदारी अब तक़दीर बदलने की है। नई पीढ़ी के लिए खून नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा छोड़ो। यही हमारी अंतिम लड़ाई है – आखिरी मौका सुधार का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आखिरी मौका यह दिखाने का कि हम अभी भी अपने कर्मों के प्रभारी हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">युद्ध नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह हमारी विरासत है। हमने बच्चों को किताबें सौंप दी हैं – खून से सनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आँसुओं से भरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पीढ़ियों तक उठती चोटों की गूँज समेटे। यह हमारी चुप्पी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी उदासीनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी लालच का सजीव प्रमाण है। अब समय है कि हम बदलें। हमें नई पीढ़ी को देने वाली किताबों से खून हटाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें केवल शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांति और आशा की विरासत देनी होगी। यही हमारी अंतिम मौका है – अगर हमने अब कदम नहीं उठाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कल का सूरज कभी नई पीढ़ी के लिए पूरी तरह चमकेगा ही नहीं। यह हमारी जिम्मेदारी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हमारी चेतावनी भी – बदलाव अब अनिवार्य है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:11:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने दिया पाकिस्तान को झटका, टीटीपी और हिज्बुल मुजाहिदीन बने रहेंगे ग्लोबल आतंकी संगठन</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक समीक्षा बैठक के बाद कहा कि पाकिस्तान स्थित कश्मीर केंद्रित हिज्बुल मुजाहिदीन और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) वैश्विक आतंकवादी संगठन बने रहेंगे और उनके दर्जे में बदलाव का कोई कारण नजर नहीं आता। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, हिज्बुल मुजाहिदीन और आर्मी ऑफ इस्लाम (एवं अन्य सहयोगी संगठनों) के विदेशी आतंकवादी संगठन के दर्जे पर समीक्षा बैठक के बाद गुरुवार को संघीय रजिस्टर में ब्लिंकन का बयान दर्ज किया गया।</p>
<p>ब्लिंकन ने कहा कि प्रशासनिक रिकॉर्ड की ‘‘समीक्षा'' और अटॉर्नी जनरल तथा वित्त मंत्री से विचार विमर्श के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/127411/america-gave-blow-to-pakistan-ttp-and-hizbul-mujahideen-will"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-02/147.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक समीक्षा बैठक के बाद कहा कि पाकिस्तान स्थित कश्मीर केंद्रित हिज्बुल मुजाहिदीन और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) वैश्विक आतंकवादी संगठन बने रहेंगे और उनके दर्जे में बदलाव का कोई कारण नजर नहीं आता। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, हिज्बुल मुजाहिदीन और आर्मी ऑफ इस्लाम (एवं अन्य सहयोगी संगठनों) के विदेशी आतंकवादी संगठन के दर्जे पर समीक्षा बैठक के बाद गुरुवार को संघीय रजिस्टर में ब्लिंकन का बयान दर्ज किया गया।</p>
<p>ब्लिंकन ने कहा कि प्रशासनिक रिकॉर्ड की ‘‘समीक्षा'' और अटॉर्नी जनरल तथा वित्त मंत्री से विचार विमर्श के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि जिन परिस्थितियों के आधार पर इन्हें विदेश आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था वे अब भी नहीं बदली हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा इनके दर्जे में बदलाव की अनुमति नहीं देती।'' ब्लिंकन ने कहा कि इसलिए मैं इन संगठनों का विदेशी आतंकवादी संगठन का दर्जे बनाए रखने की मंजूरी देता हूं।</p>
<p>आम तौर पर पाकिस्तान तालिबान के नाम से मशहूर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को एक सितंबर, 2010 को आतंकवादी संगठन के तौर पर नामित किया गया था। इसके नेताओं हकीमुल्ला महसूद और वली उर-रहमान का नाम भी विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी की सूची में शामिल है। कश्मीर केंद्रित हिज्बुल मुजाहिदीन को अमेरिका, कनाडा, भारत और यूरोपीय संघ ने वैश्विक आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:28:13 +0530</pubDate>
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