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                <title>criminal justice system - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>criminal justice system RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, पचपेड़वा पुलिस की त्वरित कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>पचपेड़वा थाना क्षेत्र में नाबालिग एवं मंदबुद्धि किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, थाना पचपेड़वा क्षेत्र की एक महिला ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग एवं मंदबुद्धि ननद के साथ गांव वीरपुर सेमरा निवासी राधेश्याम यादव उर्फ राजू ने दुष्कर्म किया है। शिकायत के आधार पर थाना पचपेड़वा में मुकदमा संख्या 95/2026 धारा 137(2)/64(2)K बीएनएस, 5K/6 पॉक्सो</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181505/accused-of-raping-a-minor-arrested-quick-action-by-pachpedwa"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0704.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>पचपेड़वा थाना क्षेत्र में नाबालिग एवं मंदबुद्धि किशोरी के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, थाना पचपेड़वा क्षेत्र की एक महिला ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग एवं मंदबुद्धि ननद के साथ गांव वीरपुर सेमरा निवासी राधेश्याम यादव उर्फ राजू ने दुष्कर्म किया है। शिकायत के आधार पर थाना पचपेड़वा में मुकदमा संख्या 95/2026 धारा 137(2)/64(2)K बीएनएस, 5K/6 पॉक्सो एक्ट तथा 3(2)V एससी/एसटी एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक तथा क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर के पर्यवेक्षण में थाना पचपेड़वा पुलिस टीम ने जांच और गिरफ्तारी अभियान तेज किया। प्रभारी निरीक्षक ओम प्रकाश चौहान के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी राधेश्याम यादव उर्फ राजू पुत्र राम समुझ निवासी ग्राम वीरपुर सेमरा, थाना पचपेड़वा को गिरफ्तार कर लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता को आवश्यक चिकित्सीय एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा मामले की विवेचना नियमानुसार की जा रही है। आरोपी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।</div>
</div>
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<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:31:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह बर्बरता भरी जहरीली मानसिकता कहां से जन्म लेती है? </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180375/where-does-this-barbaric-poisonous-mentality-originate-from"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/6a19794db4168-tension-in-the-area-following-the-murder-of-17-year-old-surya-chauhan-photo-itg-293224395-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के  गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और कलेजा कँपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खोड़ा थाना क्षेत्र में बकरीद के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर, सूर्या चौहान की उसके ही पूर्व परिचित मुस्लिम दोस्तों ने बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले कट्टरपंथी हमलावरों ने पीड़ित से पूछा, “क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप है कि यह कहते ही उन्होंने सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान तड़प-तड़प कर इस हिंदू लड़के ने दम तोड़ दिया। पुलिस की प्राथमिकी इस पूरी खौफनाक साजिश की गवाही दे रही है। पुलिस ने रविवार के तड़के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है इस से पहले 3 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया और 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें मृतक सूर्या चौहान मूल रूप से एटा का रहने वाला था। वह नवनीत विहार, खोड़ा में अपनी माँ, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता कौशलेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूर्या 11वीं कक्षा का छात्र था। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से किसी बात पर मामूली विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए असद ने बकरीद के पवित्र दिन को चुना। 28 मई की दोपहर को असद ने सूर्या को फोन किया। उसने सूर्या को बकरीद की पार्टी के बहाने मिलने के लिए चौधरी स्कूल के पास वाली गली नंबर 2 में बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ असद से मिलने पहुँचा था। विक्की और आयुष ने आँखों देखा हाल बताते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। विक्की ने बताया कि जैसे ही वे गली में पहुँचे, वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत 5 से 6 मुस्लिम युवक हथियारों के साथ घात लगाकर बैठे थे बताया जा रहा है कि आते ही उन्होंने सूर्या को चारों तरफ से दबोच लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक और हिंसक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? चश्मदीदों के मुताबिक, आरोपितों ने चिल्लाते हुए कहा कि आज बकरीद है और आज कुर्बानी इस हिंदू लड़के की देंगे। यह कहते ही सभी आरोपितों ने सूर्या पर बड़े चाकुओं से हमला बोल दिया। उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ कई वार किए। हमला इतना बर्बर था कि चाकुओं की गोदने की वजह से सूर्या की आंतें तक बाहर आ गईं।मौके पर चीख-पुकार और शोर मच गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शोर सुनकर पास ही मौजूद सूर्या का भाई यश चौहान और उसकी माँ दौड़ते हुए घटना स्थल की तरफ भागे। परिजनों को अपनी तरफ आता देख सभी मुस्लिम हमलावर खून से लथपथ सूर्या को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गएपरिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सूर्या को नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अगले दिन यानी 29 मई को दोपहर करीब 12 बजे सूर्या ने दम तोड़ दिया। सूर्या की मौत की खबर जैसे ही खोड़ा इलाके में फैली, वहाँ भारी रोष और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार अपने बेटे को याद कर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। खोड़ा नगर पालिका की पूर्व अध्यक्ष रीना भाटी और विभिन्न हिंदू संगठनों के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए मृतक के भाई यश चौहान द्वारा दी गई तहरीर जानलेवा हमला कर हत्या करने के प्रयास के संबंध में दर्ज कराई गई थी प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 28 मई को दोपहर करीब 3:30 बजे शिकायतकर्ता का भाई सूर्या अपने दोस्त आयुष (पुत्र मनोज भारती, निवासी नवनीत विहार, खोड़ा) के साथ जा रहा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तभी खोड़ा की शर्मा डेरी वाली गली में लोकप्रिय विहार का रहने वाला अशद (पुत्र नवाब) मिला।अशद ने अचानक सूर्या के साथ गाली-गलौज करते हुए झगड़ा शुरू कर दिया और फिर जान से मारने की नीयत से उसके पेट में चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस जानलेवा हमले में सूर्या गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस से इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना स्थल पर मौजूद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं में इस हत्या को लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन से माँग की है कि सभी फरार आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। हिंदू समाज का कहना है कि यह केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। विभिन्न संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्य आरोपित असद समेत सभी दोषियों के घरों पर तुरंत बुलडोजर नहीं चलाया गया और उन्हें सख्त सजा नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में बता रही है और मुख्य आरोपित की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि यूपी के गाजियाबाद और इस से सटे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों में हत्या के कुछ हालिया मामलों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्टों में इन घटनाओं को सुनियोजित या समुदाय-विशिष्ट घृणा  के बजाय मुख्य रूप से आकस्मिक विवादों, पुरानी दुश्मनी या आपसी रंजिश का परिणाम बताया गया है।आपको दो माह पहले जेजे कालोनी उत्तम नगर की नृशंसता भरी वारदात याद होगी यहां हिन्दू त्योहार होली के दिन रंग-बिरंगे पानी के छींटे पड़ने और गुब्बारा लगने को लेकर दो समुदाय से जुड़े परिवारों के बीच विवाद हुआ था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटना में 26 वर्षीय तरुण कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी दिन यानि होली के दिन ही सिगरेट के विवाद में सूरज नामक 26 वर्षीय हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सादिक नामक आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की। और अब दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बकरीद के दिन एक 16 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की उसके ही परिचित दोस्त अशद ने साथियों के साथ मिलकर चाकू गोदकर हत्या कर दी गई है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यकीनन मौजूदा वारदात नाबालिग में लड़के सूर्या की बकरीद के दिन जिस तरह आतातायी हमलावरों ने हत्या की है वह अराजक व कम्युनल अपराधियों के बढ़ते हौसले का सबूत है घटना पर दुख जताते हुए और पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए मृतक की मां ने कहा, "मैं घर पर नहीं थी, ड्यूटी पर थी। किसी ने मुझे फोन करके बताया कि मेरे बेटे को चाकू मार दिया गया है। जब मैं आई, तो मैंने शाम 7 बजे के करीब अपने बेटे का चेहरा देखा।  मुझे इंसाफ़ चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक न्यूज रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल पहुंचने के बाद जो कुछ देखा, उसे याद करते हुए मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, "मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सवाल यह है कि इस तरह की दरिंदगी और बर्बरता की सोच को कौन उकसा रहा है? बकरीद से दो दिन पहले ही गाजियाबाद से सटे हापुड़ जनपद के पिलखुवा में एक शनिदेव प्रतिमा को एक समुदाय विशेष के एक जेहादी ने तोड़ दिया बाद में सीसीटीवी कैमरे के जरिए मिले सबूत से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी मनमानी घृणा और विद्वेष की बातें बहुलता से वायरल हो रहीं हैं यह एक स्वस्थ समाज की संरचना को तोड़ रहा है और परस्पर जहरीली सोच तैयार कर रहा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और इस जहर की फसल को बीजनाश करनी चाहिए ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>9 साल हिरासत में रहने के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोपी को ज़मानत दी, जिसने हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में लगभग नौ साल बिताए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के 'जल्द सुनवाई के मौलिक अधिकार' को समझने में नाकाम रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ज़मानत न देने के आदेश पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। बेंच ने इस मामले को "बहुत चौंकाने वाला" और विवादित आदेश को "बहुत निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल खत्म हुए</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177861/allahabad-high-court-did-not-grant-bail-despite-being-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(3)3.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोपी को ज़मानत दी, जिसने हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में लगभग नौ साल बिताए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के 'जल्द सुनवाई के मौलिक अधिकार' को समझने में नाकाम रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ज़मानत न देने के आदेश पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। बेंच ने इस मामले को "बहुत चौंकाने वाला" और विवादित आदेश को "बहुत निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल खत्म हुए बिना याचिकाकर्ता को इतने लंबे समय तक जेल में रखना, 'जल्द सुनवाई के अधिकार' का घोर उल्लंघन है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार नहीं है जब जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने ज़मानत के मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट की आलोचना की। हाल ही में, बेंच की ऐसी ही एक आलोचना के बाद हाईकोर्ट के जज ने अनुरोध किया था कि उन्हें ज़मानत से जुड़े मामलों की लिस्ट (रोस्टर) से हटा दिया जाए। पिछले साल, जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने निर्देश दिया था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक और जज को आपराधिक मामलों की लिस्ट से हटा दिया जाए। इस आदेश को बाद में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के अनुरोध पर वापस ले लिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता वैभव सिंह को 7 मार्च, 2017 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर गोरखपुर के कैंट पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 120-B और 302 के तहत अपराधों का आरोप है। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और मामला सेशंस कोर्ट को सौंप दिया गया, जहां ट्रायल अभी भी चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबे समय तक हिरासत में रहने की बात पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता लगभग नौ सालों से एक विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले में गलती पाई, जिसमें उसने ट्रायल शुरू होने के बाद ज़मानत न देने के लिए 'X बनाम राजस्थान राज्य' (2024 INSC 909) मामले के पिछले फैसले का हवाला दिया था। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि एक बार ट्रायल शुरू हो जाने के बाद आम तौर पर ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए और उस चरण में सबूतों में मौजूद कमियों पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बेंच ने माना कि हाई कोर्ट, जिस फैसले का हवाला दिया गया, उसका असली मतलब समझने में नाकाम रहा और उसने याचिकाकर्ता के लगातार जेल में रहने की मुख्य बात को नज़रअंदाज़ किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि हाईकोर्ट को हिरासत की अवधि और जल्द सुनवाई के संवैधानिक आदेश पर विचार करना चाहिए था। कानून के स्थापित सिद्धांतों पर ज़ोर देते हुए बेंच ने दोहराया कि सिर्फ़ अपराध की गंभीरता के आधार पर किसी को अनिश्चित काल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब मुक़दमे में बेवजह देरी हो रही हो।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा, “अपने कई फ़ैसलों में और कई मौकों पर हमने साफ़ शब्दों में कहा है कि अपराध चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, लेकिन अगर आरोपी को जल्द सुनवाई का उसका अधिकार नहीं मिलता है और वह अपनी किसी भी गलती के बिना सालों से जेल में सड़ रहा है तो उसे अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।”</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने आगे कहा कि यह मामला ऐसी स्थिति दिखाता है, जहां अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन साफ़ तौर पर रिकॉर्ड में दिख रहा था। इसलिए राहत देने से पहले राज्य के जवाब का इंतज़ार करना ज़रूरी नहीं था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">तदनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तुरंत ज़मानत पर रिहा किया जाए, बशर्ते उस पर ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तें लागू होंगी। साथ ही अगर किसी अन्य मामले में उसकी ज़रूरत न हो</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>संपत्तियों का विध्वंस पर: सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय दिशा-निर्देश जारी किए।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे तय न करें कि दोषी कौन है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ  ने ये भी कहा कि 15 दिन के नोटिस के बगैर निर्माण गिराया तो अफसर के खर्च पर दोबारा बनाना पड़ेगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती और उसके घर को ध्वस्त नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान और आपराधिक कानून के तहत आरोपी और दोषी को कुछ अधिकार और सुरक्षा मिली हुई</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146238/supreme-court-issues-all-india-guidelines-on-demolition-of-properties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/download5.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे तय न करें कि दोषी कौन है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ  ने ये भी कहा कि 15 दिन के नोटिस के बगैर निर्माण गिराया तो अफसर के खर्च पर दोबारा बनाना पड़ेगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती और उसके घर को ध्वस्त नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान और आपराधिक कानून के तहत आरोपी और दोषी को कुछ अधिकार और सुरक्षा मिली हुई है। राज्य द्वारा इस तरह की मनमानी का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है तथा इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div><strong>अदालत ने 15 गाइडलाइंस भी जारी की।</strong></div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 नवंबर, 2024) को निजी संपत्ति, आरोपी व्यक्तियों के घरों के अवैध विध्वंस पर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि अवैध विध्वंस के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।</div>
<div> </div>
<div>इससे पहले, निर्णय के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए  न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने वादा किया था कि वे दोषी अपराधियों को भी उनकी वैध निजी संपत्ति के राज्य प्रायोजित दंडात्मक विध्वंस से बचाएंगे।सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितंबर को एक आदेश में देश भर में अवैध ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य न्यायिक कार्यों में हस्तक्षेप करके किसी व्यक्ति को न्यायालय में मुकदमा चलाए जाने से पहले ही दोषी ठहराने के लिए न्यायाधीश नहीं बन सकता।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक औसत नागरिक के लिए घर का निर्माण वर्षों की आकांक्षा, सुरक्षा के सपनों का प्रतीक है। अभियुक्तों के निजी घरों को अवैध रूप से गिराना एक मनमानी कार्रवाई है और “जो ताकत है वही अधिकार है” की नीति का खुला प्रदर्शन है।</div>
<div> </div>
<div>पीठ ने आगे कहा कि निर्णय का संरक्षण सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण या अनधिकृत संरचनाओं तक विस्तारित नहीं होगा।पीठ ने कहा, "नागरिकों की सुरक्षा के लिए बाध्य कार्यपालिका और उसके पदाधिकारी स्वयं को न्यायाधीश नहीं मान सकते जो किसी आरोपी को दोषी ठहराते हैं और मनमाने, अत्याचारी और भेदभावपूर्ण तरीके से उसके घर और संपत्ति को ध्वस्त कर देते हैं।"</div>
<div> </div>
<div>जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बेघर नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि “विध्वंस की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए और इसकी वैधता को चुनौती दिए जाने की स्थिति में इसे सबूत के तौर पर पेश किया जाना चाहिए।”</div>
<div> </div>
<div>सर्वोच्च न्यायालय ने अनधिकृत ढांचों को ध्वस्त करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए, जिनमें निवासियों को रहने के लिए दूसरा स्थान ढूंढने के लिए 15 दिन का नोटिस देना भी शामिल है । दिशा-निर्देशमें कहा गया है कि-</div>
<div>1. अगर बुलडोजर एक्शन का ऑर्डर दिया जाता है तो इसके खिलाफ अपील करने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए।</div>
<div>2. रातोंरात घर गिरा दिए जाने पर महिलाएं-बच्चे सड़कों पर आ जाते हैं, ये अच्छा दृश्य नहीं होता। उन्हें अपील का वक्त नहीं मिलता।</div>
<div>3. हमारी गाइडलाइन अवैध अतिक्रमण, जैसे सड़कों या नदी के किनारे पर किए गए अवैध निर्माण के लिए नहीं है।</div>
<div>4. शो कॉज नोटिस के बिना कोई निर्माण नहीं गिराया जाएगा। </div>
<div>5. रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए कंस्ट्रक्शन के मालिक को नोटिस भेजा जाएगा और इसे दीवार पर भी चिपकाया जाए।</div>
<div>6. नोटिस भेजे जाने के बाद 15 दिन का समय दिया जाए।</div>
<div>7. कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भी जानकारी दी जाए।</div>
<div>8. डीएम और कलेक्टर ऐसी कार्रवाई पर नजर रखने के लिए नोडल अफसर की नियुक्ति करें।</div>
<div>9. नोटिस में बताया जाए कि निर्माण क्यों गिराया जा रहा है, इसकी सुनवाई कब होगी, किसके सामने होगी। एक डिजिटल पोर्टल हो, जहां नोटिस और ऑर्डर की पूरी जानकारी हो।</div>
<div>10. अधिकारी पर्सनल हियरिंग करें और इसकी रिकॉर्डिंग की जाए। फाइनल ऑर्डर पास किए जाएं और इसमें बताया जाए कि निर्माण गिराने की कार्रवाई जरूरी है या नहीं। साथ ही यह भी कि निर्माण को गिराया जाना ही आखिरी रास्ता है।</div>
<div>11. ऑर्डर को डिजिटल पोर्टल पर दिखाया जाए।</div>
<div>12. अवैध निर्माण गिराने का ऑर्डर दिए जाने के बाद व्यक्ति को 15 दिन का मौका दिया जाए, ताकि वह खुद अवैध निर्माण गिरा सके या हटा सके। अगर इस ऑर्डर पर स्टे नहीं लगाया गया है, तब ही बुलडोजर एक्शन लिया जाएगा।</div>
<div>13. निर्माण गिराए जाने की कार्रवाई की वीडियोग्राफी की जाए। इसे सुरक्षित रखा जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट म्युनिसिपल कमिश्नर को भेजी जाए।</div>
<div>14. गाइडलाइन का पालन न करना कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी। इसका जिम्मेदार अधिकारी को माना जाएगा और उसे गिराए गए निर्माण को दोबारा अपने खर्च पर बनाना होगा और मुआवजा भी देना होगा।</div>
<div>15. हमारे डायरेक्शन सभी मुख्य सचिवों को भेज दिए जाएं।</div>
<div> </div>
<div> कोर्ट ने कहा कि आरोपी के मामले में पूर्वाग्रह में ग्रसित नहीं हो सकते। सरकारी ताकत का बेवजह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। कोई भी अधिकारी मनमाने तरीके से काम नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने कवि प्रदीप की एक कविता का हवाला दिया और कहा कि घर सपना है, जो कभी न टूटे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हमने सभी दलीलों को सुना है। लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर विचार किया। न्याय के सिद्धांतों पर विचार किया। इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण, जस्टिस पुत्तास्वामी जैसे फैसलों में तय सिद्धान्तों पर विचार किया। सरकार की जिम्मेदारी है कि कानून का शासन बना रहे, लेकिन इसके साथ ही नागरिक अधिकारों की रक्षा संवैधानिक लोकतंत्र में जरूरी है।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनमाने तरीके से काम करने वाले अधिकारियों को इस काम के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। अधिकारियों को यह दिखाना होगा कि संरचना अवैध है और अपराध को कम करने या केवल एक हिस्से को ध्वस्त करने की कोई संभावना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस में बुलडोजर चलाने का कारण, सुनवाई की तारीख बताना जरूरी होगी। इस कार्रवाई के लिए 3 महीने में एक डिजिटल पोर्टल भी बनाया जाएगा जिसमें नोटिस की जानकारी और संरचना के पास सार्वजनिक स्थान पर नोटिस प्रदर्शित करने की तारीख बताई गई है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर अवैध तरीके से इमारत गिराई गई है तो अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए उन्हें हर्जाना भी देना होगा। नोटिस में अधिकारियों को बुलडोजर एक्शन की वजह का भी जिक्र करना होगा। किसी भी इमारत को लेकर तब गिराया जा सकता है जब अनधिकृत संरचना सार्वजनिक सड़क/रेलवे ट्रैक/जल निकाय पर हो।</div>
<div> </div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुद्दा आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्षता से संबंधित है, जो यह अनिवार्य करता है कि कानूनी प्रक्रिया आरोपी के अपराध के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित न हो। ऐसे मामले में आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं? ऐसे तमाम सवालों पर हम फैसला देंगे, क्योंकि यह अधिकार से जुड़ा मसला है। सुप्रीम कोर्ट राजस्थान और मध्य प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा किए गए मकानों को गिराए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। दोनों मामलों में, मुस्लिम किरायेदारों द्वारा कथित तौर पर अपराध किए जाने के बाद मकानों को गिराया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ।</div>
<div> </div>
<div>इन आवेदनों को जमीयत-उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिका के साथ टैग किया गया था, जिसमें 2022 में दिल्ली के जहांगीरपुरी में किए गए विध्वंस को चुनौती दी गई थी। तब से, अन्य राज्यों में किए गए विध्वंस अभियानों को भी चुनौती दी गई है। इन राज्यों में स्थानीय कानून विध्वंस के बारे में यही कहते हैं।</div>
<div>इसके पहले  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि -</div>
<div> -17 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को कहा था 1 अक्टूबर तक बुलडोजर एक्शन नहीं होगा। अगली सुनवाई तक देश में एक भी बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। जब केंद्र ने इस ऑर्डर पर सवाल उठाया कि संवैधानिक संस्थाओं के हाथ इस तरह नहीं बांधे जा सकते हैं तब जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा- अगर कार्रवाई दो हफ्ते रोक दी तो आसमान नहीं फट पड़ेगा। </div>
<div> </div>
<div>-12 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट कहा था कि बुलडोजर एक्शन देश के कानूनों पर बुलडोजर चलाने जैसा है। मामला जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच में था। दरअसल, गुजरात में नगरपालिका की तरफ से एक परिवार को बुलडोजर एक्शन की धमकी दी गई थी। याचिका लगाने वाला खेड़ा जिले के कठलाल में एक जमीन का सह-मालिक है। </div>
<div>-2 सितंबर: कोर्ट ने कहा था कहा था कि भले ही कोई दोषी क्यों न हो, फिर भी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। हालांकि पीठ  ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी तरह अतिक्रमण को संरक्षण नहीं देगा।</div>
</div>
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<div></div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 16:58:59 +0530</pubDate>
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