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                <title>bulldozer action - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>bulldozer action RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर, मामा-भांजा तालाब व डांडी में हटाया गया अवैध कब्जा</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात   </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार के निर्देश पर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुपालन में तहसील प्रशासन सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में बुधवार को उप जिलाधिकारी करछना तपन मिश्रा पुलिस बल के साथ नैनी क्षेत्र स्थित मामा-भांजा तालाब पहुंचे। यहां कुछ लोगों द्वारा पावर हाउस की सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया था। उप जिलाधिकारी की मौजूदगी में तहसील प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया और सरकारी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182954/bulldozer-on-government-land-illegal-encroachment-removed-in-mama-bhanja-pond"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260708-wa0147.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात   </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदेश सरकार के निर्देश पर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुपालन में तहसील प्रशासन सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में बुधवार को उप जिलाधिकारी करछना तपन मिश्रा पुलिस बल के साथ नैनी क्षेत्र स्थित मामा-भांजा तालाब पहुंचे। यहां कुछ लोगों द्वारा पावर हाउस की सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया था। उप जिलाधिकारी की मौजूदगी में तहसील प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया और सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके बाद प्रशासनिक टीम डांडी क्षेत्र पहुंची, जहां चारागाह की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को जेसीबी मशीन की सहायता से हटाकर जमीन को खाली कराया गया। पूरे अभियान के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा और कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।उप जिलाधिकारी तपन मिश्रा ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशानुसार अतिक्रमण हटाने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पूर्व भी तहसील प्रशासन ने करछना गांव में सरकारी भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भूमि को कब्जा </div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 19:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तम नगर हत्याकांड के आरोपियों पर दिल्ली सरकार की कठोर कार्यवाही सराहनीय – विश्व हिन्दू परिषद</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><br /><div><strong>स्वतंत्र सिंह भुल्लर </strong></div><div><strong>नई दिल्लीः</strong></div><div><br /></div><div><br /></div><div>उत्तम नगर में निर्दोष युवक तरुण की घेर कर की गई निर्मम हत्या के मामले में दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई कठोर कार्यवाही का विश्व हिन्दू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत ने स्वागत किया है विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि इस जघन्य घटना से समाज में गहरा आक्रोश और पीड़ा व्याप्त थी।</div><div><br /></div><div>ऐसे समय में दिल्ली सरकार द्वारा अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और सख्त कदम उठाना सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा कानून व्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि आरोपियों के अवैध निर्माणों पर पी डब्ल्यू</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172852/delhi-governments-strict-action-against-the-accused-of-uttam-nagar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20251115-wa0003.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><br /><div><strong>स्वतंत्र सिंह भुल्लर </strong></div><div><strong>नई दिल्लीः</strong></div><div><br /></div><div><br /></div><div>उत्तम नगर में निर्दोष युवक तरुण की घेर कर की गई निर्मम हत्या के मामले में दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की गई कठोर कार्यवाही का विश्व हिन्दू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत ने स्वागत किया है विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि इस जघन्य घटना से समाज में गहरा आक्रोश और पीड़ा व्याप्त थी।</div><div><br /></div><div>ऐसे समय में दिल्ली सरकार द्वारा अपराधियों के विरुद्ध त्वरित और सख्त कदम उठाना सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा कानून व्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि आरोपियों के अवैध निर्माणों पर पी डब्ल्यू डी एवं एमसीडी द्वारा बुलडोजर कार्यवाही प्रारंभ किया जाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि दिल्ली में अपराध और हिंसा को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जाएगा। इस प्रकार की निर्णायक कार्यवाही से भविष्य में अपराधियों और असामाजिक तत्वों के मन में कानून का भय स्थापित होगा।</div><div><br /></div><div><br /></div><div>विश्व हिन्दू परिषद ने यह भी मांग की है कि इस जघन्य अपराध में शामिल आरोपियों को मिलने वाले सभी प्रकार के सरकारी अनुदान और सुविधाओं को तत्काल समाप्त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जानी चाहिए, ताकि अपराधियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण न मिले।</div><div><br /></div><div><br /></div><div>सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि इस घटना से पीड़ित परिवार अत्यंत दुख और आघात की स्थिति में है। दिल्ली सरकार को चाहिए कि पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता और आवश्यक सरकारी सहयोग प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें कुछ राहत और संबल मिल सके विश्व हिन्दू परिषद, इंद्रप्रस्थ प्रांत इस मामले में दिल्ली सरकार द्वारा की जा रही कठोर और निर्णायक कार्यवाही का समर्थन करता है तथा अपेक्षा करता है कि दोषियों को शीघ्र और कठोर दंड मिले, जिससे समाज में न्याय और कानून के प्रति विश्वास और मजबूत हो।</div></div><div class="yj6qo"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:11:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'बुलडोज़र कार्रवाई ' न्याय नहीं नफ़रत व कुंठा की पराकाष्ठा </title>
                                    <description><![CDATA[<div>भारतीय राजनीति का स्वरूप अब बदल चुका है। अब हाथ जोड़कर विनम्रता प्रदर्शित करते नेताओं का युग शायद चला गया। कम से कम आज के दौर के नेताओं के तेवर उनके मुंह से निकलने वाले ज़हरीले शब्द बाणों, उनकी नीयत व कार्यशैली आदि को देखकर तो यही लगता है।</div><div><br /></div><div> ख़ासतौर पर गत एक दशक से जब से दक्षिणपंथी शक्तियों के हाथों में देश की सत्ता आई है तब से केंद्र व अनेक राज्य सरकारों द्वारा कई ऐसे फ़ैसले लिये गये जिनके कारण देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय तर्ज़-ए-सियासत की ख़ूब आलोचना हुई। भारतीय जनता पार्टी शासित विभिन्न</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146336/bulldozer-action-is-not-justice-but-the-height-of-hatred"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/210.jpg" alt=""></a><br /><div>भारतीय राजनीति का स्वरूप अब बदल चुका है। अब हाथ जोड़कर विनम्रता प्रदर्शित करते नेताओं का युग शायद चला गया। कम से कम आज के दौर के नेताओं के तेवर उनके मुंह से निकलने वाले ज़हरीले शब्द बाणों, उनकी नीयत व कार्यशैली आदि को देखकर तो यही लगता है।</div><div><br /></div><div> ख़ासतौर पर गत एक दशक से जब से दक्षिणपंथी शक्तियों के हाथों में देश की सत्ता आई है तब से केंद्र व अनेक राज्य सरकारों द्वारा कई ऐसे फ़ैसले लिये गये जिनके कारण देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय तर्ज़-ए-सियासत की ख़ूब आलोचना हुई। भारतीय जनता पार्टी शासित विभिन्न राज्य सरकारों का ऐसा ही एक मनमाना व अमानवीय निर्णय था 'बुलडोज़र न्याय '। </div><div><br /></div><div>हालांकि देश की विभिन्न अदालतों द्वारा पहले भी इस विषय पर संज्ञान लिया जा चुका है। परन्तु पिछले दिनों देश के सर्वोच्च न्यायलय ने इस सम्बन्ध में नये व सख़्त  दिशा-निर्देश के जारी किये और कहा कि उसका यह आदेश हर राज्य में भेजा जाए और सारे अधिकारियों को इसके बारे में बताया जाए। </div><div><div dir="ltr"><br /></div><div dir="ltr">सर्वोच्च न्यायालय की जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की दो जजों की पीठ ने कहा है कि किसी व्यक्ति के घर या संपत्ति को केवल इसलिए तोड़ना कि वह अपराधी है या उन पर अपराध के आरोप हैं, क़ानून के ख़िलाफ़ है। न्यायालय ने कहा कि घर या कोई जायदाद तोड़ने से पहले कम से कम 15 दिन का नोटिस देना होगा। अगर किसी राज्य के क़ानून में इससे लंबे नोटिस का प्रावधान हो तो उसका पालन करना होगा।</div><div dir="ltr"><br /></div><div dir="ltr"> यह नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट से देना होगा। इसके साथ ही कथित ग़ैर क़ानूनी ढांचे पर भी इस नोटिस को चिपकाना होगा।  नोटिस पर पहले की तारीख़ न दी जाए। इसके लिए नोटिस की एक कॉपी कलेक्टर/ ज़िला मजिस्ट्रेट को भी ईमेल पर भेजनी होगी। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश में कहा गया है कि नोटिस में ये भी लिखना होगा कि कौन से क़ानून का उल्लंघन हुआ है,इस मामले में सुनवाई कब होगी। और जब सुनवाई हो तो उसका पूरा विवरण भी रिकॉर्ड करना होगा। </div><div dir="ltr"><br /></div><div dir="ltr">न्यायालय के दिशा-निर्देश में यह भी कहा गया है कि सुनवाई करने के बाद अधिकारियों को अपने आदेश में वजह भी बतानी होगी। इसमें ये भी देखना होगा कि किसी संपत्ति का एक हिस्सा ग़ैर क़ानूनी है या पूरी संपत्ति ही ग़ैर क़ानूनी है। न्यायालय के अनुसार यदि तोड़-फोड़ की जगह, जुर्माना या और कोई दंड दिया जा सकता है तो वह दिया जाएगा। और यदि क़ानून में संपत्ति तोड़ने या गिराने के आदेश के ख़िलाफ़ कोर्ट में अपील करने का प्रावधान है तो उसका पालन किया जाना चाहिए।  दिशा-निर्देश के मुताबिक़ अगर ऐसा प्रावधान नहीं भी है, तो आदेश आने के बाद संपत्ति के मालिक/मालकिन को 15 दिन का समय मिलेगा ताकि वे स्वयं ही ग़ैर क़ानूनी ढाँचे को सही कर लें।</div><div dir="ltr"><br /></div><div dir="ltr"> यदि ऐसा नहीं हो, तब ही इसे तोड़ने की कार्रवाई की जा सकती है। 'बुलडोज़र न्याय ' को लेकर आये सर्वोच्च न्यायालय के इन राहत भरे निर्देशों के बाद अब यह माना जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण फ़ैसले से बुलडोज़र से की जा रही वि‍ध्‍वंस की ग़ैर-क़ानूनी कार्रवाइयों पर अब रोक लगेगी। </div></div><div><br /></div><div>ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, हरियाणा जैसे अनेक भाजपा शासित राज्यों में गत एक दशक के दौरान सैकड़ों घरों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बुलडोज़र न्याय के नाम पर ज़मींदोज़ किया जा चुका है। सरकारें व प्रशासन ख़ुद ही न्यायलय की भूमिका अदा करता रहा है। किसी के मकान को इसलिये ध्वस्त कर दिया गया कि वह किसी आरोपी का मकान है। तो किसी मकान या भवन को इसलिये गिरा दिया गया कि वह अनधिकृत निर्माण है,उसके पास नक़्शा व निर्माण की अनुमति नहीं है,आदि।</div><div><br /></div><div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-11/110.jpg" alt="1" width="638" height="433"></img> दरअसल इस तरह की कार्रवाई से पहले मौजूदा सत्ताधीश के तेवर व उनके शब्दों पर यदि ग़ौर करें तो स्वयं ही साफ़ हो जाता है कि सरकार व प्रशासन द्वारा बुलडोज़र कार्रवाई कोई न्याय की मिसाल क़ायम करने के लिये नहीं की जाती थी। बल्कि इसके पीछे साम्प्रदायिक व जातिवादी कुंठा काम कर रही थी। यही वजह है कि पूरे देश में अब तक जितनी भी बुलडोज़र कार्रवाइयां हुई हैं उनमें सबसे अधिक भवनों का ध्वस्तीकरण एक ही समुदाय के लोगों का ही हुआ है। हद तो यह है कि मध्य प्रदेश में एक घटना तो ऐसी भी हुई कि एक आरोपी किसी किराये के मकान में रहता था। परन्तु इस कुंठाग्रस्त सरकार व प्रशासन ने नफ़रत की आग में जलते हुये उस मकान को भी ध्वस्त कर दिया। </div><div><br /></div><div>जहाँ तक अवैध निर्माण बताकर किसी भवन को गिराने का विषय है तो इस सम्बन्ध में समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश विधान सभा में उठाये गये इस सवाल की भी अनदेखी नहीं की जा सकती जिसमें वे कई बार पूछ चुके हैं कि क्या उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री निवास का नक़्शा पारित है ? यदि है तो कहाँ है,किसके पास है,किसने देखा है ? अखिलेश के कहने का मतलब साफ़ है कि जिस भवन में बैठकर लोगों के भवन अवैध बताकर गिरवाये जा रहे हैं वही भवन अवैध रूप से निर्मित है। परन्तु दरअसल बुलडोज़र न्याय के पीछे मक़सद न्याय का हरगिज़ नहीं बल्कि यह कार्रवाई सत्ताधीशों के मुंह से समय समय पर निकलने वाले उनके शब्द बाणों को ही अमल में लाने का एक तरीक़ा है। अन्यथा आज तक इतिहास में किसी मुख्यमंत्री ने 'हम मिट्टी में मिला देंगे, ठोक देंगे,गर्मी उतार देंगे,बक्कल उतार देंगे,बंटेंगे तो कटेंगे  जैसे निम्नस्तरीय शब्दों का प्रयोग नहीं किया।   </div><div><br /></div><div>अब जबकि अदालत स्वयं यह कह चुकी है कि - किसी भी सभ्य समाज में बुलडोज़र के ज़रिए इंसाफ़ नहीं होना चाहिए, ऐसे में सत्ताधीशों को भी सोचना पड़ेगा कि वे भी स्वयं को एक सभ्य समाज के सभ्य नेता के रूप में पेश करें। धर्म जाति के अनुसार या इसके मद्देनज़र पक्षपात पूर्ण या विद्वेषपूर्ण फ़ैसले लेना निष्चित रूप से किसी सभ्य समाज के सभ्य नेता की पहचान हरगिज़ नहीं। सर्वोच्च न्यायायलय के फ़ैसले से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि  'बुलडोज़र कार्रवाई ' न्याय के लिये नहीं बल्कि यह नफ़रत व कुंठा की पराकाष्ठा है। </div><div><br /></div><div><strong><span style="font-size:large;">तनवीर जाफ़री </span></strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Nov 2024 17:28:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपत्तियों का विध्वंस पर: सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय दिशा-निर्देश जारी किए।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="adn ads">
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<div>
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<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे तय न करें कि दोषी कौन है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ  ने ये भी कहा कि 15 दिन के नोटिस के बगैर निर्माण गिराया तो अफसर के खर्च पर दोबारा बनाना पड़ेगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती और उसके घर को ध्वस्त नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान और आपराधिक कानून के तहत आरोपी और दोषी को कुछ अधिकार और सुरक्षा मिली हुई</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146238/supreme-court-issues-all-india-guidelines-on-demolition-of-properties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/download5.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>नई दिल्ली। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बुलडोजर एक्शन पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अफसर जज नहीं बन सकते। वे तय न करें कि दोषी कौन है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ  ने ये भी कहा कि 15 दिन के नोटिस के बगैर निर्माण गिराया तो अफसर के खर्च पर दोबारा बनाना पड़ेगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती और उसके घर को ध्वस्त नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान और आपराधिक कानून के तहत आरोपी और दोषी को कुछ अधिकार और सुरक्षा मिली हुई है। राज्य द्वारा इस तरह की मनमानी का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है तथा इससे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।</div>
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<div><strong>अदालत ने 15 गाइडलाइंस भी जारी की।</strong></div>
<div>सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 नवंबर, 2024) को निजी संपत्ति, आरोपी व्यक्तियों के घरों के अवैध विध्वंस पर कड़ी फटकार लगाई और कहा कि अवैध विध्वंस के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।</div>
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<div>इससे पहले, निर्णय के लिए स्वत: संज्ञान लेते हुए  न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने वादा किया था कि वे दोषी अपराधियों को भी उनकी वैध निजी संपत्ति के राज्य प्रायोजित दंडात्मक विध्वंस से बचाएंगे।सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितंबर को एक आदेश में देश भर में अवैध ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी।</div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य न्यायिक कार्यों में हस्तक्षेप करके किसी व्यक्ति को न्यायालय में मुकदमा चलाए जाने से पहले ही दोषी ठहराने के लिए न्यायाधीश नहीं बन सकता।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक औसत नागरिक के लिए घर का निर्माण वर्षों की आकांक्षा, सुरक्षा के सपनों का प्रतीक है। अभियुक्तों के निजी घरों को अवैध रूप से गिराना एक मनमानी कार्रवाई है और “जो ताकत है वही अधिकार है” की नीति का खुला प्रदर्शन है।</div>
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<div>पीठ ने आगे कहा कि निर्णय का संरक्षण सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण या अनधिकृत संरचनाओं तक विस्तारित नहीं होगा।पीठ ने कहा, "नागरिकों की सुरक्षा के लिए बाध्य कार्यपालिका और उसके पदाधिकारी स्वयं को न्यायाधीश नहीं मान सकते जो किसी आरोपी को दोषी ठहराते हैं और मनमाने, अत्याचारी और भेदभावपूर्ण तरीके से उसके घर और संपत्ति को ध्वस्त कर देते हैं।"</div>
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<div>जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बेघर नहीं किया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि “विध्वंस की वीडियोग्राफी की जानी चाहिए और इसकी वैधता को चुनौती दिए जाने की स्थिति में इसे सबूत के तौर पर पेश किया जाना चाहिए।”</div>
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<div>सर्वोच्च न्यायालय ने अनधिकृत ढांचों को ध्वस्त करने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए, जिनमें निवासियों को रहने के लिए दूसरा स्थान ढूंढने के लिए 15 दिन का नोटिस देना भी शामिल है । दिशा-निर्देशमें कहा गया है कि-</div>
<div>1. अगर बुलडोजर एक्शन का ऑर्डर दिया जाता है तो इसके खिलाफ अपील करने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए।</div>
<div>2. रातोंरात घर गिरा दिए जाने पर महिलाएं-बच्चे सड़कों पर आ जाते हैं, ये अच्छा दृश्य नहीं होता। उन्हें अपील का वक्त नहीं मिलता।</div>
<div>3. हमारी गाइडलाइन अवैध अतिक्रमण, जैसे सड़कों या नदी के किनारे पर किए गए अवैध निर्माण के लिए नहीं है।</div>
<div>4. शो कॉज नोटिस के बिना कोई निर्माण नहीं गिराया जाएगा। </div>
<div>5. रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए कंस्ट्रक्शन के मालिक को नोटिस भेजा जाएगा और इसे दीवार पर भी चिपकाया जाए।</div>
<div>6. नोटिस भेजे जाने के बाद 15 दिन का समय दिया जाए।</div>
<div>7. कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भी जानकारी दी जाए।</div>
<div>8. डीएम और कलेक्टर ऐसी कार्रवाई पर नजर रखने के लिए नोडल अफसर की नियुक्ति करें।</div>
<div>9. नोटिस में बताया जाए कि निर्माण क्यों गिराया जा रहा है, इसकी सुनवाई कब होगी, किसके सामने होगी। एक डिजिटल पोर्टल हो, जहां नोटिस और ऑर्डर की पूरी जानकारी हो।</div>
<div>10. अधिकारी पर्सनल हियरिंग करें और इसकी रिकॉर्डिंग की जाए। फाइनल ऑर्डर पास किए जाएं और इसमें बताया जाए कि निर्माण गिराने की कार्रवाई जरूरी है या नहीं। साथ ही यह भी कि निर्माण को गिराया जाना ही आखिरी रास्ता है।</div>
<div>11. ऑर्डर को डिजिटल पोर्टल पर दिखाया जाए।</div>
<div>12. अवैध निर्माण गिराने का ऑर्डर दिए जाने के बाद व्यक्ति को 15 दिन का मौका दिया जाए, ताकि वह खुद अवैध निर्माण गिरा सके या हटा सके। अगर इस ऑर्डर पर स्टे नहीं लगाया गया है, तब ही बुलडोजर एक्शन लिया जाएगा।</div>
<div>13. निर्माण गिराए जाने की कार्रवाई की वीडियोग्राफी की जाए। इसे सुरक्षित रखा जाए और कार्रवाई की रिपोर्ट म्युनिसिपल कमिश्नर को भेजी जाए।</div>
<div>14. गाइडलाइन का पालन न करना कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी। इसका जिम्मेदार अधिकारी को माना जाएगा और उसे गिराए गए निर्माण को दोबारा अपने खर्च पर बनाना होगा और मुआवजा भी देना होगा।</div>
<div>15. हमारे डायरेक्शन सभी मुख्य सचिवों को भेज दिए जाएं।</div>
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<div> कोर्ट ने कहा कि आरोपी के मामले में पूर्वाग्रह में ग्रसित नहीं हो सकते। सरकारी ताकत का बेवजह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। कोई भी अधिकारी मनमाने तरीके से काम नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने कवि प्रदीप की एक कविता का हवाला दिया और कहा कि घर सपना है, जो कभी न टूटे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हमने सभी दलीलों को सुना है। लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर विचार किया। न्याय के सिद्धांतों पर विचार किया। इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण, जस्टिस पुत्तास्वामी जैसे फैसलों में तय सिद्धान्तों पर विचार किया। सरकार की जिम्मेदारी है कि कानून का शासन बना रहे, लेकिन इसके साथ ही नागरिक अधिकारों की रक्षा संवैधानिक लोकतंत्र में जरूरी है।</div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनमाने तरीके से काम करने वाले अधिकारियों को इस काम के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। अधिकारियों को यह दिखाना होगा कि संरचना अवैध है और अपराध को कम करने या केवल एक हिस्से को ध्वस्त करने की कोई संभावना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस में बुलडोजर चलाने का कारण, सुनवाई की तारीख बताना जरूरी होगी। इस कार्रवाई के लिए 3 महीने में एक डिजिटल पोर्टल भी बनाया जाएगा जिसमें नोटिस की जानकारी और संरचना के पास सार्वजनिक स्थान पर नोटिस प्रदर्शित करने की तारीख बताई गई है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर अवैध तरीके से इमारत गिराई गई है तो अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए उन्हें हर्जाना भी देना होगा। नोटिस में अधिकारियों को बुलडोजर एक्शन की वजह का भी जिक्र करना होगा। किसी भी इमारत को लेकर तब गिराया जा सकता है जब अनधिकृत संरचना सार्वजनिक सड़क/रेलवे ट्रैक/जल निकाय पर हो।</div>
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<div>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुद्दा आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्षता से संबंधित है, जो यह अनिवार्य करता है कि कानूनी प्रक्रिया आरोपी के अपराध के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित न हो। ऐसे मामले में आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं? ऐसे तमाम सवालों पर हम फैसला देंगे, क्योंकि यह अधिकार से जुड़ा मसला है। सुप्रीम कोर्ट राजस्थान और मध्य प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा किए गए मकानों को गिराए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। दोनों मामलों में, मुस्लिम किरायेदारों द्वारा कथित तौर पर अपराध किए जाने के बाद मकानों को गिराया गया, जिससे सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ।</div>
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<div>इन आवेदनों को जमीयत-उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिका के साथ टैग किया गया था, जिसमें 2022 में दिल्ली के जहांगीरपुरी में किए गए विध्वंस को चुनौती दी गई थी। तब से, अन्य राज्यों में किए गए विध्वंस अभियानों को भी चुनौती दी गई है। इन राज्यों में स्थानीय कानून विध्वंस के बारे में यही कहते हैं।</div>
<div>इसके पहले  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि -</div>
<div> -17 सितंबर : सुप्रीम कोर्ट ने 17 सितंबर को कहा था 1 अक्टूबर तक बुलडोजर एक्शन नहीं होगा। अगली सुनवाई तक देश में एक भी बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। जब केंद्र ने इस ऑर्डर पर सवाल उठाया कि संवैधानिक संस्थाओं के हाथ इस तरह नहीं बांधे जा सकते हैं तब जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा- अगर कार्रवाई दो हफ्ते रोक दी तो आसमान नहीं फट पड़ेगा। </div>
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<div>-12 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट कहा था कि बुलडोजर एक्शन देश के कानूनों पर बुलडोजर चलाने जैसा है। मामला जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच में था। दरअसल, गुजरात में नगरपालिका की तरफ से एक परिवार को बुलडोजर एक्शन की धमकी दी गई थी। याचिका लगाने वाला खेड़ा जिले के कठलाल में एक जमीन का सह-मालिक है। </div>
<div>-2 सितंबर: कोर्ट ने कहा था कहा था कि भले ही कोई दोषी क्यों न हो, फिर भी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। हालांकि पीठ  ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी तरह अतिक्रमण को संरक्षण नहीं देगा।</div>
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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 16:58:59 +0530</pubDate>
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