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                            <item>
                <title>स्टिंग ऑपरेशन के बाद दर्ज रंगदारी केस में हाईकोर्ट से पत्रकारों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> </p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देवास में कथित भ्रूण लिंग परीक्षण, अवैध गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या के खुलासे से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन के बाद दर्ज रंगदारी के मामले में पत्रकारों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। न्यायालय ने <strong>तहलका डिजिटल न्यूज</strong> के पत्रकार <strong>विनय अरोड़ा</strong> को अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) मंजूर कर दी है। इससे पहले 25 जून को इसी मामले में सह-आरोपी पत्रकार <strong>रजनी</strong> को नियमित जमानत मिल चुकी थी।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों मामलों की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति <strong>पवन कुमार द्विवेदी</strong> ने की। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करते हुए पाया कि स्टिंग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182652/big-relief-to-journalists-from-high-court-in-extortion-case"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/476977-madhya-pradesh-high-court-gwalior-bench.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>भोपाल।</strong> </p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देवास में कथित भ्रूण लिंग परीक्षण, अवैध गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या के खुलासे से जुड़े स्टिंग ऑपरेशन के बाद दर्ज रंगदारी के मामले में पत्रकारों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। न्यायालय ने <strong>तहलका डिजिटल न्यूज</strong> के पत्रकार <strong>विनय अरोड़ा</strong> को अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) मंजूर कर दी है। इससे पहले 25 जून को इसी मामले में सह-आरोपी पत्रकार <strong>रजनी</strong> को नियमित जमानत मिल चुकी थी।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों मामलों की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति <strong>पवन कुमार द्विवेदी</strong> ने की। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करते हुए पाया कि स्टिंग ऑपरेशन के दौरान तैयार किए गए वीडियो एफआईआर दर्ज होने से पहले ही राज्य एवं केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों को भेजे जा चुके थे। अदालत ने प्रथम दृष्टया इसी तथ्य को राहत दिए जाने का महत्वपूर्ण आधार माना।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>एफआईआर से पहले अधिकारियों को भेजे गए थे वीडियो</strong></h3><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2 जुलाई को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि 6 अप्रैल 2026 को स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की अध्यक्ष, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा देवास के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को भेजे गए थे। इसके अतिरिक्त 6 और 7 अप्रैल को भी संबंधित अधिकारियों को वीडियो उपलब्ध कराए गए। इसके बाद 7 अप्रैल को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विनय अरोड़ा को अग्रिम जमानत प्रदान की। इससे पहले पत्रकार रजनी को जमानत देते समय भी न्यायालय ने इसी प्रकार की परिस्थितियों का उल्लेख किया था।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है पूरा मामला</strong></h3><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देवास के कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि पत्रकार विनय अरोड़ा, रजनी और अन्य लोगों ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो के आधार पर शिकायतकर्ता से रंगदारी वसूलने और दबाव बनाने का प्रयास किया।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(5) एवं 308(6) (रंगदारी), धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) तथा धारा 3(5) (समान उद्देश्य) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>पत्रकारों का पक्ष</strong></h3><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पत्रकारों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि स्टिंग ऑपरेशन का उद्देश्य समाज में चल रही कथित अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश करना था। उनके अनुसार, स्टिंग के दौरान <strong>पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994</strong> तथा <strong>मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अधिनियम, 1971</strong> के उल्लंघन से जुड़े कथित अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण, गैरकानूनी गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या के मामलों का खुलासा किया गया था।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो एफआईआर दर्ज होने से पहले ही संबंधित सरकारी अधिकारियों को सौंप दिए गए थे। ऐसे में रंगदारी के आरोप निराधार हैं और यह कार्रवाई कथित अवैध गतिविधियों के खुलासे के बाद प्रतिशोध स्वरूप की गई है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>राज्य सरकार ने जताया विरोध</strong></h3><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। सरकारी पक्ष का तर्क था कि पत्रकारों ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को ब्लैकमेल करने और दबाव बनाने के लिए किया।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की जा रही है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोनों पत्रकारों को कानून के अनुरूप राहत प्रदान की गई है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>जमानत की शर्तें</strong></h3><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने अपने 2 जुलाई के आदेश में निर्देश दिया कि यदि विनय अरोड़ा को इस मामले में गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा किया जाए।</p><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं, 25 जून को पारित आदेश में पत्रकार रजनी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके एवं एक सक्षम जमानतदार पर नियमित जमानत देने का निर्देश दिया गया था। साथ ही उन्हें ट्रायल कोर्ट में नियमित रूप से उपस्थित रहने की शर्त का पालन करने को कहा गया है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष</strong></h3><p style="text-align:justify;">मामले में पत्रकारों की ओर से अधिवक्ता <strong>अमन मालवीय</strong> ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता <strong>सुरेंद्र सिंह अलावा</strong> एवं <strong>हेमंत शर्मा</strong> ने न्यायालय में अपना पक्ष रखा। अब मामले की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:04:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रशासन और जनता के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है मीडिया - जिलाधिकारी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने आज 16 नवंबर – राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर समस्त पत्रकार बंधुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएँ  देते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो समाज को सही दिशा देने, जनता की समस्याओं को सामने लाने तथा प्रशासन और जनता के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने अपने संदेश में कहा कि भारत में हर वर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। यह दिन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के गठन की तिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, क्योंकि 16 नवंबर 1966 को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/160539/media-is-a-powerful-medium-of-communication-between-administration-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1001369356.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने आज 16 नवंबर – राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर समस्त पत्रकार बंधुओं एवं मीडिया प्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनाएँ  देते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो समाज को सही दिशा देने, जनता की समस्याओं को सामने लाने तथा प्रशासन और जनता के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने अपने संदेश में कहा कि भारत में हर वर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। यह दिन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के गठन की तिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, क्योंकि 16 नवंबर 1966 को PCI की स्थापना हुई थी। प्रेस काउंसिल निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि आज का दिन पत्रकारिता की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, जिम्मेदारी, और नैतिक पत्रकारिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है। पत्रकार समाज का दर्पण होते हैं, और उनकी मेहनत, समर्पण एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग प्रशासन को सही दिशा देने में सहायक होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने जनपद के सभी पत्रकारों की सराहना करते हुए कहा कि जिले के विकास कार्यों, जनहितकारी योजनाओं तथा आम जनता की बात को प्रभावी रूप में सामने लाने में मीडिया की भूमिका सराहनीय रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी पत्रकार इसी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ जनपद की प्रगति में सहयोग करते रहेंगे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Nov 2025 18:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पत्रकार पर तीसरी एफआईआर! कलम से क्यों डर रही सरकार?</title>
                                    <description><![CDATA[हजरतगंज थाने में दर्ज केस, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/155308/why-is-the-government-afraid-of-the-third-fir-pen"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/1000031022.png" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div style="text-align:justify;">
<div><strong>संवाददाता - विपिन शुक्ला</strong> </div>
<div> </div>
<div><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पत्रकारिता और सत्ता के टकराव ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। हजरतगंज थाने में वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने गोरखपुर में पशु तस्करों के हाथों मारे गए 19 वर्षीय युवक दीपक गुप्ता की मौत से जुड़े मामले में भड़काऊ रिपोर्टिंग की।</div>
<div> </div>
<div>पत्रकार का कहना है कि उन्होंने केवल वही तथ्य रिपोर्ट किए जो मृतक के परिजनों ने मीडिया कैमरों के सामने रखे थे। इसके बावजूद उन पर दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दिया गया।</div>
<div> </div>
<div>पत्रकार ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए तीखा हमला बोला।</div>
<div> </div>
<div><strong>उन्होंने कहा –</strong> “कलम की धार से इतना डर लगता है योगी जी? अगर लड़ाई लड़नी है तो सामने से लड़िए, अनाम शिकायतकर्ताओं के सहारे नहीं।”</div>
<div> </div>
<div>उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर में सत्ता से जुड़े और प्रभावशाली लोग तो बचा लिए जाते हैं, गोरखपुर वाले कांड में कई अखबारों की कटिंग शेयर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ने दिखाया कि यही ख़बर उन्होंने भी चलाया है लेकिन हर बार की तरह उन्हें ही सिर्फ़ निशाना बनाया गया। सरकार का ये क़दम स्वस्थ पत्रकारिता का गला घोंटने जैसा है।सच्चाई दिखाने वाले पत्रकारों को लगातार निशाना बनाना ठीक नहीं है।</div>
<div> </div>
<div><strong>पत्रकार ने तीखे शब्दों में कहा –</strong></div>
<div>&gt; “एफआईआर से डर मुझे नहीं, उन लोगों को होना चाहिए जो घोटालों, भ्रष्टाचार और सत्ता संरक्षण में शामिल हैं। मेरी रिपोर्टिंग से परेशान होकर ही मुझे टारगेट किया जा रहा है।”</div>
<div>इससे पहले भी हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “ईश्वर” बताया गया था।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस पर पत्रकार ने सवाल उठाया –</strong></div>
<div>&gt; “क्या ईश्वर इतना कमजोर होता है कि वो छाया और अनाम लोगों के सहारे वार करे?”</div>
<div> </div>
<div>पत्रकार ने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि सरकार को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी ही है तो अगली एफआईआर सीधे मुख्यमंत्री के नाम से दर्ज कराई जाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए सुझाव दिया कि अगली एफआईआर मानहानि की मेरे ऊपर दर्ज़ कराइए क्योंकि मुख्यमंत्री से श्रेष्ठ मैंने ईश्वर को  बता दिया है। </div>
<div> </div>
<div>पत्रकार के खिलाफ दर्ज होती लगातार एफआईआर ने न सिर्फ पत्रकार संगठनों बल्कि बुद्धिजीवियों और राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार पर इसका असर गंभीर माना जा रहा है।</div>
<div>लखनऊ से उठी यह नई जंग केवल एक पत्रकार और सरकार के बीच का टकराव नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की स्वतंत्रता बनाम सत्ता की ताक़त का अहम सवाल भी खड़ा कर रही है।</div>
<div> </div>
<div><br />
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<div class="adL"><br /><br /></div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
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<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
<div class="ajx" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="gA gt acV">
<div class="gB xu">
<div class="mVCoBd" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="ip iq">
<div class="bJvOmf"> </div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Sep 2025 18:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सही नपे जस्टिन ट्रूडो</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  जस्टिन ट्रूडो ने 06 जनवरी 2025 को कनाडा के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जस्टिन ट्रूडो लगभग 9 साल तक कनाडा के प्रधानमंत्री रहे। उनका कार्यकाल भारत और कनाडा के संबंधो का सबसे खराब दौर रहा। वे भारत विरोधी बयान बाजी और खालिस्तानियों का साथ देने के चक्कर में अपनी राजनीति चौपट कर बैठे। 2015 में सत्ता संभालते वक्त जस्टिन ट्रूडो को एक उदारवादी और प्रगतिशील नेता के रूप में देखा जाता था परन्तु उनकी नीतियों और फैसलों ने कनाडा के भीतर और बाहर ट्रूडो को बेहद खराब राजनेता के रूप में कुख्यात कर दिया। जून 2023 में</div>
<div> </div>
<div>वे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147397/justin-trudeau-measured-right"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><div> जस्टिन ट्रूडो ने 06 जनवरी 2025 को कनाडा के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जस्टिन ट्रूडो लगभग 9 साल तक कनाडा के प्रधानमंत्री रहे। उनका कार्यकाल भारत और कनाडा के संबंधो का सबसे खराब दौर रहा। वे भारत विरोधी बयान बाजी और खालिस्तानियों का साथ देने के चक्कर में अपनी राजनीति चौपट कर बैठे। 2015 में सत्ता संभालते वक्त जस्टिन ट्रूडो को एक उदारवादी और प्रगतिशील नेता के रूप में देखा जाता था परन्तु उनकी नीतियों और फैसलों ने कनाडा के भीतर और बाहर ट्रूडो को बेहद खराब राजनेता के रूप में कुख्यात कर दिया। जून 2023 में जब भारत के खालिस्तान आंतकवादी हरदीप सिंह निज्जर की बंदूकधारियों ने कनाडा के वैंकूवर के पास हत्या कर दी तो ट्रूडो ने इस हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप कनाडा की संसद में जाकर लगाया था परन्तु अपने दावे को सिद्ध करने के लिए उनके पास कोई सबूत नहीं था।</div>
<div> </div>
<div>वे मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों से भारत के खिलाफ जहर उगलते रहे, जिससे दोनों देशों के रिश्ते गर्त में गिरते चले गए। पिछले कुछ सालों से कनाडा की राजनीति में काफी अस्थिरता रही है। 2019 में कनाडा में हुए आम चुनावों में 338 सदस्यों वाले हाउस ऑफ कॉमंस में 18 सिख सांसद चुनकर आए थे। कनाडा में रह रहे सिखों में से कुछ खालिस्तान की मांग का मुद्दा उठाते रहते है। जिन्हे आईएसआई समेत दूसरी एजेंसियों की शह है। वोट बैंक की राजनीति के कारण कनाडा के राजनीतिक दल भी इन्हें सपोर्ट करते हैं।</div>
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<div>ट्रूडो  कट्टरपंथी सिख नेता और न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के चीफ जगमीत सिंह के समर्थन से सरकार चला रहे थे। असल में 2019 के चुनाव में ट्रूडो को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था और उन्हें जगमीत सिंह का समर्थन लेना पड़ा था। जगमीत सिंह के खालिस्तानी एजेंडे में ट्रूडो उसका साथ और भारत विरोधी बयान देते रहे। कनाडा में खालिस्तान की पैरवी करने वाले जस्टिन ट्रूडो को बड़ा झटका तब लगा जब खालिस्तान समर्थक  जगमीत सिंह ने ट्रूडो सरकार से अपना समर्थन वापिस ले लिया। जगमीत सिंह ने आरोप लगाया कि ट्रूडो सरकार कॉर्पोरेट के लालच में आ चुकी है।</div>
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<div>इसलिए हम ट्रूडो के साथ किए गए समझौते को खत्म करते हैं। ट्रूडो का इस्तीफा भारत-कनाडा के बिगड़ते संबंधों को स्थिर करने का मौका है। कनाडा एकमात्र पश्चिमी देश है, जिसके भारत के साथ संबंध लगातार खराब हुए हैं। भारतीय लोगों के कनाडाई वीजा लेने पर सख्ती, कनाडा में भारतीय छात्रों के विरुद्ध नए नियमों को लागू करने से भी भारत के साथ कनाडा के रिश्तों पर असर पड़ा, जिसका कनाडा के घरेलू राजनीति में भी विरोध किया गया। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और घरेलू राजनीतिक संकट के कारण बढ़ रहा अविश्वास ट्रूडो की बिदाई का प्रमुख कारण रहे। ट्रूडो टैरिफ वाले मामले में ट्रंप को उचित उत्तर नही दे पाए। रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा ही कुछ मानना सिर्फ ट्रूडो की पार्टी के नेताओं का ही नहीं बल्कि बडी संख्या में कनाडा के आम नागरिकों का भी है।</div>
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<div> दरअसल वर्तमान में कनाडा की अर्थव्यवस्था अच्छी हालत में नहीं है। कनाडा में एक तरफ लगातार महंगाई बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी भी तेजी से बढ़ रही है। ट्रूडो की लिबरल पार्टी के खिलाफ कंजरवेटिव पार्टी ने इसे बड़ा मुद्दा भी बनाया हुआ है। कनाडा में कोविड के बाद बेरोजगारी दर लगभग 6.5 फीसदी तक पहुंच गई है। कनाडा में घरों की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है, जिसने आम लोगों को ट्रूडो के खिलाफ खड़ा कर दिया है। अगर ट्रंप सत्ता में आने के बाद सच में 25 फीसदी टैरिफ लगा देते हैं तो इससे हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। इसी वजह से कनाडा के लोगों चाहते है कि देश की कमा कोई ऐसा नेता संभाले जो मजबूती के साथ ट्रंप के साथ बातचीत कर पाए जो कि ट्रूडो नहीं कर पा रहे थे।</div>
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<div>जस्टिन ट्रूडो 11 सालों से लिबरल पार्टी के नेता और करीब 9 सालों से कनाडा के प्रधानमंत्री थे। वह डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों से लेकर प्रमुख मंत्रियों के इस्तीफे और जनमत सर्वेक्षणों तक कई संकटों का सामना कर रहे थे। जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि संसद की कार्यवाही 24 मार्च तक स्थगित रहेगी। ट्रूडो ने सोमवार को ओटावा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह देश अगले चुनाव में एक वास्तविक विकल्प का हकदार है, और यह मेरे लिए स्पष्ट हो गया है कि अगर मुझे आंतरिक लड़ाई लड़नी पड़ रही है तो मैं चुनाव में सबसे अच्छा विकल्प नही हो सकता। उन्होनें कहा कि नया प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी का नेता अगले चुनाव में अपने मूल्यों और आदर्शों को लेकर जाएगा।</div>
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<div>मैं आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को देखने के लिए उत्साहित हूं। सच तो यह है कि इस पर काम करने के तमाम कोशिशों के बावजूद, संसद महीनों से पैरालाइज्ड बना हुआ है। मसलन, वह विपक्षी सांसदों के हंगामे की तरफ इशारा कर रहे थे, जहां लगातार उनके इस्तीफे की मांग उठ रही थी। जस्टिन ट्रूडो ने बताया कि उन्होंने गवर्नर से मुलाकात की और उन्हें अपनी अगली योजना के बारे में बताया था। अब कनाडाई संसद की कार्यवाही 27 जनवरी को फिर से शुरू होनी थी और विपक्षी दलों ने सरकार को जल्द से जल्द गिराने की कोशिश में थी। मसलन विपक्षी पार्टियां ट्रूडो की लिबरल पार्टी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी, लेकिन अगर संसद 24 मार्च तक स्थगित रहता है तो विपक्षी पार्टियां मई महीने तक संसद में अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है।</div>
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<div>कनाडा में सभी तीन मुख्य विपक्षी दलों ने कहा है कि मार्च के अंत में जब संसद दोबारा शुरू होगी तो वे अविश्वास प्रस्ताव के जरिए लिबरल पार्टी को गिराने की योजना बना रहे हैं, जबकि अक्टूबर महीने तक कनाडा में आम चुनाव हो सकते हैं।</div>
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                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2025 17:14:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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                <title>मीडिया में आने से पहले समाज से परिचित होना जरूरीः फलक नाज</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>अयोध्या।</strong> डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में सोमवार को सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय न्यूज चैनल की पत्रकार एवं विभाग की पुरातन छात्रा और मिस यूपी का खिताब जीती फलक नाज रही। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को बताया कि समाज की वजह से आप अपने फैसले न बदले बल्कि आप अपने फैसलों से समाज को बदलें।</div>
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<div>उन्होंने बताया कि वर्तमान में मीडिया की भूमिका बढ़ गई हैं। इस क्षेत्र में महिलांए बढ़चढ कर आ रही है। अपनी रिपोर्टिग की बदौलत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145682/it-is-important-to-be-familiar-with-the-society-before"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/news-001.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>अयोध्या।</strong> डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में सोमवार को सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की बतौर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय न्यूज चैनल की पत्रकार एवं विभाग की पुरातन छात्रा और मिस यूपी का खिताब जीती फलक नाज रही। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को बताया कि समाज की वजह से आप अपने फैसले न बदले बल्कि आप अपने फैसलों से समाज को बदलें।</div>
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<div>उन्होंने बताया कि वर्तमान में मीडिया की भूमिका बढ़ गई हैं। इस क्षेत्र में महिलांए बढ़चढ कर आ रही है। अपनी रिपोर्टिग की बदौलत समाज को एक नई दिशा प्रदान कर रही है। उन्होंने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मीडिया में आने से पहले समाज के बीच जाकर समस्याओं से परिचित होना बहुत जरूरी है। इससे रिपोर्टिग के समय सही समस्याओं का आकलन करना आसान होता है और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनती है।</div>
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<div>   कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एमसीजे समन्वयक डाॅ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी ने बताया कि फलक शुरू से ही बहुत ही जुझारू और मेहनती लड़की रही है। उनकी मेहनत और लगन ही है जिसकी वजह से आज वह नेशनल न्यूज चैनल में काम करने के साथ-साथ मिस यूपी का खिताब हासिल की है। कार्यक्रम में समन्वयक व विभाग के शिक्षक डाॅ. राज नारायण पांडेय और डॉ अनिल विश्वा द्वारा फलक नाज को अंग वस्त्रम भेंटकर सम्मानित किया गया।</div>
<div> </div>
<div>संगोष्ठी का संचालन डाॅ0 चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर सुगन्धा त्रिपाठी, आदित्य शुुक्ला, अश्वनी पाण्डेय, दिवाकर चैरसिया, कामिनी चैरसिया, अनुश्री यादव, कल्यानी त्रिपाठी, गौरव त्रिपाठी, सृष्टि त्रिपाठी, विवेक वर्मा, शिवांग चतुर्वेदी, आदर्श चैधरी, करन दूबे, निहारिका सिंह, सृष्टि कौशल, अदिति साम्भवी, सोनिया, सौरभ मिश्रा सहित अन्य मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 16:58:23 +0530</pubDate>
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