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                <title>private hospital - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>private hospital RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डॉक्टर डे: सफेद कोट में भगवान, धड़कनों के रखवाले को हजार सलाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182495/doctors-day-a-thousand-salutes-to-the-god-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p>1 जुलाई को भारत में 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' मनाया जाता है। ये दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। ये उस भरोसे का दिन है जो एक मरीज सबसे ज्यादा दर्द में भी एक अजनबी पर करता है। उस अजनबी का नाम है: डॉक्टर।<br />ये दिन क्यों ? डॉ. बिधान चंद्र रॉय की विरासत</p>
<p><br />डॉक्टर डे भारत में हर साल 1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और महान चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती और पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। डॉ. रॉय MBBS, MRCP और FRCS थे। उन्होंने बिना फीस लिए हजारों मरीजों का इलाज किया। राजनीति में आने के बाद भी वो रोज सुबह 4 बजे उठकर मरीज देखते थे। उनके लिए मरीज भगवान था और सेवा धर्म। इसी सोच को सलाम करने के लिए 1991 से 1 जुलाई को डॉक्टर डे घोषित हुआ। सफेद कोट के पीछे छुपी जिंदगी</p>
<p><br />हम डॉक्टर को सिर्फ OPD में 5 मिनट देखते हैं। पर उसके पीछे क्या है? नींद की कुर्बानी: 36 घंटे की ड्यूटी, इमरजेंसी कॉल, रात 2 बजे उठकर ICU दौड़ना। त्योहार, जन्मदिन, शादी सब हॉस्पिटल की ड्यूटी के आगे सेकेंड पर आ जाता है।</p>
<p><br />दिमाग का बोझ: एक गलत दवा, एक छूटा हुआ लक्षण, और किसी की पूरी दुनिया उजड़ सकती है। इसलिए हर केस में 100% दिमाग लगाना पड़ता है। डिप्रेशन और बर्नआउट डॉक्टरों में सबसे ज्यादा है।</p>
<p><br />जोखिम उठाकर सेवा: कोविड-19 में PPE किट पहनकर 12 घंटे काम करना, संक्रामक बीमारियों के बीच खड़े रहना, कभी-कभी मरीजों के परिजनों का गुस्सा झेलना। फिर भी वो भागते नहीं हैं। यही है मानव सेवा। किताबों से नहीं, जिगर से की जाने वाली सेवा। डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो उम्मीद देते हैं। गांव का डॉक्टर : जहां MRI-CT नहीं, वहां स्टेथोस्कोप से बीमारी पकड़ लेता है। 50 रुपये फीस में 1 घंटे समझाता है। सर्जन: 8 घंटे टेबल पर झुका रहता है, ताकि किसी और को जिंदगी मिल जाए। बाल रोग विशेषज्ञ : रोते हुए बच्चे को चॉकलेट देकर इंजेक्शन लगाता है, और मां को हिम्मत देता है।</p>
<p><br />ग्रामीण MBBS डॉक्टर: बाढ़, महामारी, एक्सीडेंट में सबसे पहले वही पहुंचता है, एंबुलेंस से पहले। कोविड से लेकर डेंगू, हार्ट अटैक से लेकर डिलीवरी तक, हर संकट में सबसे आगे वो सफेद कोट ही खड़ा मिला। डॉक्टर भगवान नहीं हैं। वो इंसान हैं। उनसे गलती हो सकती है, वो थक सकते हैं। पर इरादा उनका हमेशा सेवा का ही होता है। भरोसा रखिए, सवाल पूछिए : गूगल डॉक्टर से पहले असली डॉक्टर की सुनिए। इज्जत दीजिए: इमरजेंसी में गाली की जगह धन्यवाद दीजिए। वो भी आपके जैसा इंसान है। सेल्फ-केयर : डॉक्टर को भी आराम, सम्मान और सुरक्षित माहौल चाहिए। हिंसा से उनका मनोबल टूटता है, इलाज नहीं सुधरता। निष्कर्ष: हजार सलाम कम हैं। डॉक्टर वो पुल है जो 'बीमारी' और 'जिंदगी' के बीच बना है। वो रात-रात भर जागकर हमारे अपनों की सांसें गिनते हैं। फीस लेते हैं, पर कई बार उम्मीद फ्री में दे देते हैं। इस 1 जुलाई को अपने फैमिली डॉक्टर, अपने शहर के उस सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर, या उस जूनियर रेजिडेंट को एक मैसेज कर दीजिए। कहिए: "डॉक्टर साहब, आपकी मानव सेवा को हजार सलाम।" क्योंकि जब सब थक जाते हैं, तब भी धड़कन चलती रहती है। और उस धड़कन को चलाने वाला सफेद कोट होता है। लेकिन हम इसे भी नजरंदाज नहीं कर सकते कि चिकित्सा सेवा का व्यवसायीकरण हो चुका है और आम जनता का कहीं कहीं शोषण भी हो रहा है। आज इलाज मानव सेवा न रहकर बेहद महंगा व्यापार बन चुका है। अत्यधिक व्यवसायीकरण के समय में आज कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम लाभ कमाने का केंद्र बन गए हैं। मरीजों को अनावश्यक रूप से महंगी जांचें और दवाइयां लिखी जातीं हैं, जिससे आम आदमी बहुत परेशान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती जनपद में मौतों के मामले में निजी अस्पताल हो रहे ब्लैकमेल , आईएमए बना तमाशगीर </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">  <strong>बस्ती।</strong> जनपद के प्राइवेट अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों और उन पर हो रही ब्लैकमेलिंग से जनपदीय प्राइवेट स्वास्थ्य महकमा हड़बड़ा सा गया है । जनपद के प्राइवेट अस्पतालों में मौतों को लेकर आईएमए की सुस्ती ने अस्पताल प्रशासकों की और बेचैनी बढ़ा दिया है है , दबी जुमान ही सही प्राइवेट अस्पताल संचालक आईएमए को कोश रहे हैं ।मिली जानकारी के अनुसार केवल जनपद मुख्यालय पर दर्जनों से ज्यादा पंजीकृत प्राइवेट अस्पताल संचालित हैं और प्रतिदिन सैकड़ों ओपीडी लगभग सभी अस्पतालों पर हो रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन्हीं रोगियों में से कुछ की मौत अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/163129/private-hospitals-are-being-blackmailed-in-case-of-deaths-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-12/img-20251210-wa0037-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"> <strong>बस्ती।</strong> जनपद के प्राइवेट अस्पतालों में लगातार हो रही मौतों और उन पर हो रही ब्लैकमेलिंग से जनपदीय प्राइवेट स्वास्थ्य महकमा हड़बड़ा सा गया है । जनपद के प्राइवेट अस्पतालों में मौतों को लेकर आईएमए की सुस्ती ने अस्पताल प्रशासकों की और बेचैनी बढ़ा दिया है है , दबी जुमान ही सही प्राइवेट अस्पताल संचालक आईएमए को कोश रहे हैं ।मिली जानकारी के अनुसार केवल जनपद मुख्यालय पर दर्जनों से ज्यादा पंजीकृत प्राइवेट अस्पताल संचालित हैं और प्रतिदिन सैकड़ों ओपीडी लगभग सभी अस्पतालों पर हो रही है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन्हीं रोगियों में से कुछ की मौत अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से हो रही है परन्तु ज्यादातर मामलों में रोगियों की मौंते प्राकृतिक तरीके अथवा बीमारी की गम्भीरता से हो रही हैं क्योंकि कोई भी प्राइवेट अस्पताल संचालक यह नहीं चाहेगा कि किसी भी रोगी की मौत उसके अस्पताल में हो और उसके संस्थान की बदनामी हो । इन सबके बावजूद कुछ मरीजों के परिजन मौत का ठीकरा अस्पताल प्रशासन पर फोड़ते हुए उनके संचालकों को ब्लैकमेल करते हुए मोटी फिरौती की माँग करते हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभी इसका ताजा उदाहरण पीएमसी अस्पताल व डाक्टर तारिक का मामला जनपद में चल रहा है । यहाँ यह भी उल्लेखनीय हो जाता है कि प्राइवेट अस्पतालों के इतनी आपदा के बावजूद इनको संजीवनी देने का काम करने वाली संस्था आईएमए मूकदर्शक बनी हुई है । बस्ती में आईएमए के कर्णधार डा0 अनिल श्रीवास्तव जिनका एसोशिएसन पर दशकों से कब्जा है वे भी शायद मौत और ब्लैकमेलिंग की घटनाओं से अंजान बने रहते हैं । सूत्रों ने तो यहाँ तक बताया है कि बस्ती में आईएमए केवल चंदा वसूली तक सीमित होकर रह गयी है । अस्पताल प्रशासकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जो संस्था हमारे सुख दुःख में काम नहीं आ रही ऐसी दिखावा की संस्था का क्या औचित्य है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 16:51:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती जनपद में डा० सरफराज व डा० शिबा खान के रसूख के आगे बौने पड़े सीएमओ </title>
                                    <description><![CDATA[- आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित कर डा० सरफराज ने खड़ा किया अपना काला साम्राज्य]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150398/cmo-in-front-of-dr-sarfaraz-and-dr-shiba-khans"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250325-wa0226-(2).jpg" alt=""></a><br /><div><strong>- जनपदीय स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डा0 सरफराज के आगे टेक चुके हैं घुटने</strong></div>
<div> </div>
<div><strong> बस्ती। </strong>बस्ती जनपद के जिला अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डा० सरफराज व उनकी पत्नी डा० शिबा खान की नियम विरुद्ध तैनाती व इनके सरकारी नौकरी के साथ प्राइवेट प्रैक्टिस का मामला इन दिनों मीडिया में सुर्खियां बना हुआ है । दाम्पत्य नीति की चादर ओढ़ डाक्टर दाम्पत्य सरकारी सेवा के साथ - साथ निजी अस्पताल संचालित कर शासनादेश को तार- तार कर रहे हैं और जिम्मेदार कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं ।</div>
<div> </div>
<div>मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में मामूली सी गल्ती करने वालों पर बुल्डोजर गरज रहा है जबकि जिला अस्पताल में तैनात डा० सरफराज व उनकी पत्नी शिबा खान सरकारी सेवा के साथ-साथ प्राइवेट अस्पताल चलाकर काली कमाई को अंजाम दे रहें हैं । सूत्रों ने तो यहाँ तक बताया है कि डा० सरफराज ने अपने निजी अस्पताल तक मरीज पहुंचाने के लिए जिला अस्पताल में अपने चहेते आदमी पाल रखे हैं जो जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को डा० सरफराज के निजी अस्पताल तक पहुंचाते हैं ।</div>
<div> </div>
<div>सरकारी सेवक रहते हुए निजी अस्पताल चलाना वैसे ही कानूनी रूप से जुर्म है ऊपर से डाक्टर दाम्पत्य की काली कमाई के चलते डाक्टर दाम्पत्य ने अपना काला साम्राज्य स्थापित कर लिया है । डाक्टरों की काली कमाई का डा० सरफराज नाम केवल एक नमूना नहीं हैं बल्कि जनपद मुख्यालय पर ऐसी काली कमाई करने वालों की संख्या दर्जन पार कर जायेगी जिनकी जाँच व बुल्डोजर की कार्यवाही जनहित में जरूरी हो गयी है । वैसे अभी शासन स्तर से ऐसी सूची तलब की गयी थी जो डाक्टर सरकारी सेवा के साथ ही साथ प्राइवेट प्रैक्टिस में संलिप्त हैं परन्तु जिले के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा शासन को गुमराह कर वह सूची प्रेषित नहीं की गयी नहीं तो अभी तक भ्रष्टाचार में संलिप्त कई डाक्टर सलाखों के पीछे होते ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/150398/cmo-in-front-of-dr-sarfaraz-and-dr-shiba-khans</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 13:53:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आखिरकार मौत के सौदागर अस्पताल संचालक ने फिर ले ली एक बेकसूर मरीज की जान</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>कौशाम्बी। </strong>जनपद मुख्यालय मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में कथित डॉक्टरों की लापरवाही के चलते फिर एक बेकसूर मरीज की मौत हो गई है बड़ा मर्ज बता करके इलाज के नाम पर अस्पताल संचालकों ने मोटी रकम वसूली है लेकिन उसके बाद मरीज को नहीं बचा सके हैं मरीज की मौत होने के बाद आधी रात को संचालकों ने पुलिस बुला करके मरीज के परिवार के लोगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और 12 बजे रात में ही मृत मरीज को जबरन एम्बुलेन्स में रखकर परिजनों को सौंप दिया गया।</div>
<div>  </div>
<div>बताया जाता है कि मंझनपुर मुख्यालय के ओसा रोड</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149627/finally-the-merchant-hospital-operator-again-killed-an-innocent-patient"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/img-20250308-wa0632.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>कौशाम्बी। </strong>जनपद मुख्यालय मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में कथित डॉक्टरों की लापरवाही के चलते फिर एक बेकसूर मरीज की मौत हो गई है बड़ा मर्ज बता करके इलाज के नाम पर अस्पताल संचालकों ने मोटी रकम वसूली है लेकिन उसके बाद मरीज को नहीं बचा सके हैं मरीज की मौत होने के बाद आधी रात को संचालकों ने पुलिस बुला करके मरीज के परिवार के लोगों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और 12 बजे रात में ही मृत मरीज को जबरन एम्बुलेन्स में रखकर परिजनों को सौंप दिया गया।</div>
<div> </div>
<div>बताया जाता है कि मंझनपुर मुख्यालय के ओसा रोड में संचालित जन सेवा अस्पताल में 3 मार्च को मामूली मर्ज पर मनोज मरीज को भर्ती किया गया था जहां इलाज के नाम पर तीन दिनों तक अस्पताल में मरीज का इलाज आयोग्य,कम पढ़े-लिखे  लोगों द्वारा गलत किया गया अस्पताल में योग्य चिकित्सक मौजूद नहीं थे उल्टी सीधी दवा मरीज को दे देते हैं जिसके चलते मरीज की मौत हो गई है मरीज को दवा दिए जाने का लेखा-जोखा भी अस्पताल संचालक दिखाने को बताने तैयार नहीं है।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/img-20250308-wa0666.jpg" alt="IMG-20250308-WA0666" width="540" height="1202"></img></div>
<div>परिवार वाले लोगों ने अस्पताल संचालक पर मरीज की मौत में लापरवाही का आरोप लगाया है इसके पहले भी कई अस्पतालों में लापरवाही के चलते मरीजों की मौत हो चुकी है सवाल यह उठता है कि कब तक कम पढ़े-लिखे लोगों के हाथ कौशाम्बी जिले के मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ होता रहेगा और बिना मानक पूरा करने वाले अस्पताल का संचालन स्वास्थ्य विभाग के रहमों करम पर चलता रहेगा। इस बावत जब जिला मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ0 संजय कुमार से बात की गयी तो उन्होने कहा कि इसकी त्रिस्तरीय जाँच होगी जाँच में दोषी पाया गया तो कड़ी कार्यवाही होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Mar 2025 12:38:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजी अस्पतालों की लापरवाही से नहीं थम रहा मौत का सिलसिला, फिर लापरवाही से गई जान</title>
                                    <description><![CDATA[भ्रष्टाचार की दलदल से कब उबरेगा स्वास्थ्य विभाग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146708/the-series-of-deaths-is-not-stopping-due-to-negligence"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/0.00420.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>अम्बेडकरनगर। </strong>स्वास्थ्य विभाग के तमाम दावों के बावजूद निजी अस्पतालों की मनमानी थम नहीं रही है. जरूरी सुविधाएं न होने के बावजूद अस्पताल संचालक मनमानी तरीके से मरीजों को भर्ती करके इलाज कर रहे हैं. इससे अक्सर मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है. कुछ ऐसा है मामला जनपद अंबेडकर नगर के राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के मदैनिया निजी अस्पताल में हुआ जिसमें महिला को इंजेक्शन लगाने के पश्चात उसकी स्थिति और बिगड़ गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।निजी अस्पतालों की लापरवाही से मरीजों की मौत के मामले अकसर सामने आते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों को लेकर सख्त नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>इस घटना ने एक बार फिर से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा को उजागर किया है। लोगों का आरोप है कि नगर में दर्जनों फर्जी अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। लगातार हो रही मौतों के बावजूद विभाग की चुप्पी पर लोग सवाल उठा रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते विभाग ने इन फर्जी अस्पतालों पर कार्रवाई की होती, तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।फिलहाल पुलिस द्वारा इस मामले में कार्रवाई जारी है, लेकिन यह घटना निजी अस्पतालों में हो रही लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी की ओर इशारा करती है।</div>
<div> </div>
<div>अब देखना यह होगा कि जांच में क्या खुलासा होता है और दोषियों को कब तक सजा मिल पाती है।बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे अस्पतालों से स्वास्थ्य महकमे और जिला प्रशासन ने आंख मूंद ली है. निजी अस्पतालों में मरीजों के साथ अनहोनी की घटना सामने आने पर भी कार्रवाई नहीं होती. इसलिए अस्पताल संचालकों का मन बढ़ा रहता है.हैरानी की बात यह है कि जनपद मुख्यालय पर बिना रजिस्ट्रेशन के कई दर्जन निजी अस्पताल चलाया जा रहा है। जबकि जनपद मुख्यालय पर जिले के उच्च अधिकारी अधिकारियों की नजर उन पर पड़ती है परंतु इन निजी अस्पतालों पर जिनका ना तो रजिस्ट्रेशन है ना ही किसी मानक को वह पूरा करते हैं फिर भी उन पर स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन की कृपा बरस रही है।</div>
<div> </div>
<div>सीएमओ राजकुमार से वार्ता करने के पश्चात मीडिया कर्मियों से महज यह कहकर बात टाल दिया जाता है की रजिस्टर्ड अस्पतालों और पैथोलॉजी डायग्नोस्टिक सेंटर की सूची हम सार्वजनिक नहीं कर सकते यह गोपनीय रखा जाता है। जिम्मेदार अधिकारी द्वारा महज नोटिस काटकर इती श्री ले लिया जाता है कहने के लिए कुछ पर कार्यवाही कर दी जाती है कुछ लोगों द्वारा यह भी कहा जाता है की जिनसे इनका निजी स्वार्थ नहीं सिद्ध होता उसे निजी अस्पताल पर कार्यवाही की जाती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 17:01:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> जाँच में खराब मिले पांच निजी अस्पतालों में लगे फायर सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>अंबेडकरनगर। </strong>सीएमओ और अपर सीएमओ ने सोमवार को कई निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। पांच अस्पतालों में आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। व्यवस्था सही न मिलने पर नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।सीएमओ डॉ. राजकुमार व डिप्टी सीएमओ आशुतोष सिंह ने इल्तिफातगंज के फरहात व जुबैर अस्पताल का निरीक्षण किया। दोनोंं जगह फायर सिस्टम सही नहीं पाए गए। दोनों अस्पताल के संचालकों को नाेटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया। कहा कि लाइसेंस के दौरान सभी मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है।</div>
<div>  </div>
<div>ऐसे में मानक की अनदेखी कर अस्पताल का संचालन घोर अपराध है।अपर सीएमओ डाॅ. रामानंद</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146486/fire-systems-installed-in-five-private-hospitals-found-faulty-during"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/hindi-divas20.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>अंबेडकरनगर। </strong>सीएमओ और अपर सीएमओ ने सोमवार को कई निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। पांच अस्पतालों में आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। व्यवस्था सही न मिलने पर नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।सीएमओ डॉ. राजकुमार व डिप्टी सीएमओ आशुतोष सिंह ने इल्तिफातगंज के फरहात व जुबैर अस्पताल का निरीक्षण किया। दोनोंं जगह फायर सिस्टम सही नहीं पाए गए। दोनों अस्पताल के संचालकों को नाेटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया। कहा कि लाइसेंस के दौरान सभी मानकों को पूरा करना अनिवार्य होता है।</div>
<div> </div>
<div>ऐसे में मानक की अनदेखी कर अस्पताल का संचालन घोर अपराध है।अपर सीएमओ डाॅ. रामानंद सिद्धार्थ ने इल्तिफातगंज के हबीब अस्पताल, सिफा अस्पताल व साविरा हेल्थ सेंटर का औचक निरीक्षण किया। किसी में भी फायर सिस्टम सही नहीं पाए गए। अपर सीएमओ ने बताया कि सभी अस्पताल संचालकों को नोटिस देकर मंगलवार तक सारे उपकरणों के कागजात व तैनात डाॅक्टर के नाम और पद सहित रिपोर्ट लाने का निर्देश दिया गया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Nov 2024 17:01:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साहब!सुपर हॉस्पिटल संचालक की लापरवाही से हुई शिशु की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[एजेंट आशा बहू ने जिला अस्पताल न ले जाकर प्रसव पीड़िता को प्राइवेट हॉस्पिटल में कराया भर्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146415/sir-baby-died-due-to-negligence-of-super-hospital-operator"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/img-20241118-wa0357.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>लालगंज (रायबरेली)सरेनी।</strong> बीती रात थाना क्षेत्र के एक प्राइवेट अस्पताल में प्रसव के लिए आई महिला के नवजात शिशु की मौत हो गई।परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाकर सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर हॉस्पिटल के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।थाना क्षेत्र के छमनी खेड़ा मजरे मुर्दीपुर मझिगवां गांव के रहने वाले विजय कुमार पुत्र सतान की पत्नी नीतू को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई तो वह पत्नी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया।लेकिन महिला की गंभीर हालत देखकर डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।इस बीच प्राइवेट अस्पताल की एक एजेंट आशा बहू ने उसे उसके बताए एक अस्पताल में भर्ती करवा दिया।</div>
<div> </div>
<div>जहां पहुंचते ही विजय से 15 हजार रुपये की मांग की गई।तत्काल विजय कुमार ने अस्पताल संचालक को 9 हजार रुपये दिए और शेष सुबह देने का वादा कर लिया। संचालक ने कहा डॉक्टर को बुलाया गया है उसके आते ही प्रसव करा दिया जाएगा।इस बीच विजय कुमार से और पैसों की मांग की गई तो उसने 10 हजार रुपये और दिया लेकिन डॉक्टर के ना आने से प्रसव पीड़िता दर्द से कराहती रही।5 घंटे बाद जब डॉक्टर आया और प्रसव कराया तो नवजात शिशु की मौत हो गई।अस्पताल ने मृत शिशु को पिता के हाथों में थमा दिया।विजय कुमार का आरोप है कि अस्पताल संचालक की लापरवाही से शिशु की मौत हुई है।उसने सीएचसी अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।</div>
<div> </div>
<div><strong>इनकी भी सुनिए</strong></div>
<div> सीएचसी अधीक्षक राजेश गौतम का कहना है कि शिकायती पत्र मिला है।नोटिस देकर आरोपी को बुलाया जाएगा और अभिलेख भी देखे जाएंगे।कड़ी कार्यवाही की जाएगी।  </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 19:13:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अलर्ट : जिलेभर में सरकारी, निजी अस्पतालों में अफसरों ने परखी अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[सीडीओ संग सीएमओ, सीएफओ ने भी देखे सुरक्षा इंतजाम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/146382/alert-officers-tested-fire-safety-arrangements-in-government-private-hospitals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-11/04....jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>लखीमपुर खीरी ।</strong> चिकित्सालयो में विद्युत सुरक्षा और फायर सेफ्टी प्रबंध को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रविवार को सीडीओ अभिषेक कुमार ने सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता, सीएफओ डॉ एआर शर्मा संग जिला अस्पताल मोतीपुर (ओयल) एवं सभी एसडीएम, एमओआईसी ने अपने तहसील क्षेत्र के सरकारी और निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा के इंतजामों को परखा। </div>
<div> </div>
<div>रविवार को सीडीओ अभिषेक कुमार पूरे दलबल के साथ अचानक जिला चिकित्सालय पहुंचे, अस्पताल में सीडीओ के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने आग से निपटने के लिए लगाए गए फायर यंत्रों की जांच की। सीडीओ ने खुद अस्पताल में लगे सेंट्रल फायर सिस्टम को चेक किया और उचित दिशा निर्देश दिए। इसके अलावा वार्डों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की भी जांच की गई और जिसमें उनके एक्सपायरी भी देखी गई। </div>
<div> </div>
<div>सीडीओ अभिषेक कुमार ने सीएमएस को निर्देशित किया कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों, इमरजेंसी हालात से निपटने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। अधिकारियों ने अस्पतालों में आग बुझाने संबंधी व्यवस्थाओं का लिया जायजा लेकर पैरामेडिकल स्टाफ को समय समय पर अग्निशमन यंत्र से आग बुझाने का प्रशिक्षण प्रदान किए जाने के निर्देश दिए।</div>
<div> </div>
<div>सीडीओ ने जिला चिकित्सालय में 02 दिन के भीतर फायर सेफ्टी ड्रिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्रमशः एनआरसी, चिल्ड्रन वार्ड, पीकू वार्ड में विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की पड़ताल की। उन्होंने भर्ती बच्चों के संबंध में तिमारदारों एवं प्रभारी सीएमएस डॉ आरपी वर्मा से जानकारी ली। उन्होंने फायर पंप का भी जायजा लिया। निर्देश दिए कि पंप चलाकर जहां-जहां लीकेज आदि की समस्या दिखे उसे तत्काल दुरुस्त कराए। इस कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चिकित्सालय में फायर सेफ्टी के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की क्रियाशीलता को भविष्य में भी सुनिश्चित रखा जाए।</div>
<div> </div>
<div>जिलेभर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं निजी चिकित्सालय में एसडीएम की अगुवाई में एमओआईसी, अग्निशमन विभाग के उत्तरदाई अफसरो ने विद्युत एवं फायर सेफ्टी प्रबंधन की जमीनी हकीकत जानी और संबंधित को जरूरी दिशा निर्देश दिए। वही उप जिलाधिकारी सदर अश्विनी कुमार सिंह ने सीएफओ के साथ निजी चिकित्सालय अनुपम नर्सिंग होम गुप्ता नर्सिंग होम सृजन नर्सिंग होम सहित अन्य चिकित्सालयों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों के संबंध में गहन पड़ताल की।</div>
<div> </div>
<div>एसडीएम की अध्यक्षता में तहसील स्तर पर टीमें गठित, करेंगी फॉयर एवं विद्युत ऑडिट डीएम ने जनपद लखीमपुर-खीरी के समस्त सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों का फॉयर एवं विद्युत ऑडिट कराये जाने के उद्देश्य से उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रत्येक तहसील स्तर पर टीमें गठित की गई है। इस टीम मेंअधिशासी अभियन्ता, विद्युत वितरण खण्ड (संबंधित तहसील) मुख्य अग्निशमन अधिकारी / अग्निशमन अधिकारी (संबंधित तहसील) शामिल है।</div>
</div>
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</div>
</div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 16:40:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत परिजनों ने अस्पताल के बाहर किया हंगामा पुलिस बल मौजूद </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>कानपुर।</strong> कानपुर नगर के न्यूरी गांव के रहने वाले अनूप के अनुसार वह अपनी माता शांति देवी उम्र 37 वर्ष  को उजियारा चौराहा स्थित आयुष हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। सुबह पेट में गैस बन रही थी।  उसने बताया कि अस्पताल में योग्य एवं अनुभवी डाक्टर न मौजूद होने की बजाय से उसकी मां की मौत हुई है। मृतका के पुत्र ने बताया कि इलाज गार्ड के द्वारा किया जा रहा था। मुझे यह तब पता चला जब वह इंजेक्शन लग रहा था तो मैंने पूछा तुम कौन डॉक्टर कहां है तो बोला मैं गार्ड हूं मैं ज्यादा कुछ नहीं</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145607/woman-dies-during-treatment-in-private-hospital-family-members-create"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/img_20241018_142109.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div><strong>कानपुर।</strong> कानपुर नगर के न्यूरी गांव के रहने वाले अनूप के अनुसार वह अपनी माता शांति देवी उम्र 37 वर्ष  को उजियारा चौराहा स्थित आयुष हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। सुबह पेट में गैस बन रही थी।  उसने बताया कि अस्पताल में योग्य एवं अनुभवी डाक्टर न मौजूद होने की बजाय से उसकी मां की मौत हुई है। मृतका के पुत्र ने बताया कि इलाज गार्ड के द्वारा किया जा रहा था। मुझे यह तब पता चला जब वह इंजेक्शन लग रहा था तो मैंने पूछा तुम कौन डॉक्टर कहां है तो बोला मैं गार्ड हूं मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। मैंने मना किया कहा डॉक्टर को बुलाओ। </div>
<div> </div>
<div>लेकिन कोई डॉक्टर की टीम नहीं आई स्वयं अनट्रेंड लोग इलाज करने लगे जो की अनूप साहू के द्वारा बताया गया सही इलाज न मिलने के अभाव में मम्मी की हालत बिगड़ती गई और दम तोड़ दिया।अनूप ने बताया कि पिता राम किशोर साहू चाट का ठेला लगाते है और मैं पढ़ाई करता हूं।अस्पताल प्रशासन पर योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों द्वारा सही एवं उचित इलाज न मिलने पर मम्मी दुनियां में नहीं रही कहकर फफक फफक रो पड़ा।</div>
<div> </div>
<div>वहीं मौके पर सेन पश्चिम पारा थाने की फोर्स मौके पर पहुंची परिजनों को समझा बुझाती रही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सच्चाई का खुलासा हो सकता है। परिवार में अनूप एवं उसकी एक बहन है जो पढ़ाई कर रही है वहीं परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। वहीं अस्पताल संचालक से संपर्क करने की कोशिश की गई उन्होंने बताया मैं भोपाल में हूं उनका भी कहना पोस्टमार्टम के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।</div>
</div>
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                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 16:45:06 +0530</pubDate>
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