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                <title>digital india - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>लू की हवा का प्रकोप, कैसे सांस लेंगे हम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177276/how-will-we-breathe-the-wrath-of-heat-wave"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/154169033.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बेरहम तथा अप्राकृतिक प्रकृति के दोहन का परिणाम अब अपने चरम परिणामों के साथ हमारे सामने खड़ा है। आने वाले महीनों में मौसम वैज्ञानिकों ने जिस तीव्र गर्मी की आशंका जताई है, वह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि दशकों से जारी प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इंटरगवर्नमेंटल क्लाइमेटिक चेंज स्टडीज की नवीनतम रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति के बाद लगभग 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और यदि वर्तमान उत्सर्जन दर जारी रही तो 2030 के दशक में यह 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ल्ड मेटियोरोलिजकल ऑर्गेनाइजेशन ने हाल ही में चेतावनी दी है कि पिछले आठ वर्ष मानव इतिहास के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं और दक्षिण एशिया विशेष रूप से चरम हीटवेव की चपेट में है। जब हम अपने विकास का इतिहास देखते हैं तो ब्रिटिश सत्ता के दौरान हमारे संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हुआ, परंतु विडंबना यह है कि स्वतंत्रता के बाद भी हमने उसी मॉडल को और तीव्र रूप में अपनाया, परिणामस्वरूप मनुष्य तो स्वतंत्र हुआ पर प्रकृति आज भी बंधनों में जकड़ी रही। यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंटल एजेंसी के अनुसार दुनिया हर वर्ष लगभग 1 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र खो रही है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है, जहाँ शहरीकरण और औद्योगीकरण की तेज रफ्तार ने जंगलों, जलस्रोतों और जैव विविधता पर गंभीर दबाव डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमूमन हमारी जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान और जल की थी, किंतु हमने विकास को उपभोग और विस्तार की अंधी दौड़ बना दिया, मशीनें जितनी विशाल होती गईं, मनुष्य उतना ही प्रकृति से दूर और बौना होता गया। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से विश्व की लगभग 33 प्रतिशत भूमि की उर्वरता प्रभावित हुई है, भारत में भी कई क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है और भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे जा रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ जल संकट तेजी से गहराता जा रहा है और 2030 तक देश की जल मांग उपलब्ध संसाधनों से दोगुनी हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब से हमने विकास के नाम पर उद्योगों की चिमनियाँ ऊँची कीं, मोबाइल क्रांति का बटन दबाया और डिजिटल संसार में प्रवेश किया, तब से प्रकृति की ध्वनियाँ धीमी पड़ती चली गईं, झरनों का कलकल स्वर, पक्षियों का कलरव और नदियों की जीवनदायिनी धारा जैसे विलुप्त होती जा रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार भारत के कई प्रमुख शहरों की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुमान है कि वायु प्रदूषण के कारण हर वर्ष लाखों समयपूर्व मृत्यु हो रही हैं। अब प्रश्न यह है कि विकास के नाम पर हमें केवल डिजिटल इंडिया चाहिए या हरित भारत की भी आवश्यकता है, क्या बच्चों के हाथ में केवल इंटरनेट देकर हम भविष्य सुरक्षित कर लेंगे या उन्हें स्वच्छ हवा, जल और हरियाली भी देनी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हरा-भरा हिंदुस्तान और डिजिटल इंडिया विरोधी नहीं बल्कि पूरक हो सकते हैं, बशर्ते हम संतुलन बनाना सीखें। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ी से बढ़ना ही जलवायु संकट से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय है और भारत ने सौर तथा पवन ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति भी की है, फिर भी यह प्रयास पर्याप्त नहीं है जब तक कि हम उपभोग की प्रवृत्ति को नियंत्रित न करें। महात्मा गांधी का यह कथन आज और भी प्रासंगिक हो उठता है कि पृथ्वी सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, किंतु किसी एक के लालच को नहीं। भारत की विडंबना यह है कि एक ओर महानगरों की चकाचौंध, मेट्रो, डिजिटल नेटवर्क और ऊँची इमारतें हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण भारत में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, किसान पसीना बहा रहा है और बच्चे दीपक या कैरोसिन की रोशनी में पढ़ रहे हैं, यह असमानता केवल आर्थिक नहीं बल्कि विकास के असंतुलित मॉडल की भी देन है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीति आयोग की रिपोर्टों में भी जल संकट, कृषि संकट और पर्यावरणीय असंतुलन को गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि विकास का रास्ता हरित क्रांति, सतत संसाधन उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से होकर ही गुजरता है, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस, ज्वार-भाटा ऊर्जा जैसे विकल्प केवल विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं। यदि जल, खनिज और प्राकृतिक संसाधन ही समाप्त हो गए तो न तो उद्योग चलेंगे, न ऊर्जा उत्पादन होगा और न ही डिजिटल इंडिया का सपना साकार होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी कवि की पंक्ति आज सच लगती है कि यदि घर बनाओ तो एक पेड़ भी लगा लेना, क्योंकि वही पेड़ आने वाली पीढ़ियों की सांसों का आधार बनेगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम विकास की परिभाषा को पुनः परिभाषित करें, उसे केवल आर्थिक प्रगति नहीं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, सामाजिक समानता और मानवीय संवेदनाओं के साथ जोड़ें, तभी हम अपनी 141 करोड़ जनसंख्या को स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित भविष्य दे पाएंगे और एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकेंगे जहाँ हरित क्रांति और डिजिटल प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ें, न कि एक-दूसरे के विकल्प बनकर खड़े हों।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 17:29:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दो साल से बिना तौल मशीन के चल रहा खरगूपुर डाकघर  किराना दुकानों पर तौल रहा सरकारी सिस्टम! ‘डिजिटल इंडिया’ की हकीकत </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोंडा। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन और स्मार्ट पोस्ट ऑफिस की चमकदार योजनाओं के बीच गोंडा जिले का खरगूपुर उपडाकघर सरकारी लापरवाही की मिसाल बन गया है। यहां पिछले दो वर्षों से डिजिटल तौल मशीन नहीं है, जिसके कारण पत्र, रजिस्ट्री और पार्सल का वजन कराने के लिए ग्राहकों को पास की किराना दुकानों पर जाना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>किराना दुकानों पर तौल, डाकघर में सिर्फ रसीद!</strong></div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि डाकघर में जब वजन की सुविधा नहीं होती, तो कर्मचारी खुद कहते हैं कि "पास की दुकान पर वजन करा लीजिए, तब टिकट लगेगा"। गांव के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158895/khargupur-post-office-has-been-running-without-weighing-machine-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-11/1006677034-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोंडा। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन और स्मार्ट पोस्ट ऑफिस की चमकदार योजनाओं के बीच गोंडा जिले का खरगूपुर उपडाकघर सरकारी लापरवाही की मिसाल बन गया है। यहां पिछले दो वर्षों से डिजिटल तौल मशीन नहीं है, जिसके कारण पत्र, रजिस्ट्री और पार्सल का वजन कराने के लिए ग्राहकों को पास की किराना दुकानों पर जाना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>किराना दुकानों पर तौल, डाकघर में सिर्फ रसीद!</strong></div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि डाकघर में जब वजन की सुविधा नहीं होती, तो कर्मचारी खुद कहते हैं कि "पास की दुकान पर वजन करा लीजिए, तब टिकट लगेगा"। गांव के निवासी राजेश सिंह बताते हैं — “यह तो सरकारी सेवा का मजाक है। हर महीने लोग दर्जनों पार्सल भेजते हैं, लेकिन वजन बाहर करना पड़ता है। दो साल से कोई देखने तक नहीं आया।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> सरकार के नियम साफ, अमल नदारद</strong></div>
<div style="text-align:justify;">भारत सरकार के डाक विभाग (Department of Posts) ने 2019 में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे कि हर उपडाकघर में कम से कम दो डिजिटल वेइंग मशीनें अनिवार्य होंगी। ये मशीनें भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणित होंगी और ऑनलाइन शुल्क प्रणाली से जुड़ी रहेंगी, ताकि ग्राहक से लिए गए शुल्क में पारदर्शिता बनी रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही हर छह माह में निरीक्षक द्वारा उपकरणों का परीक्षण भी अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन खरगूपुर डाकघर में न मशीन है, न निरीक्षण हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> डाकघर प्रभारी बोले — "तीन माह पहले आया हूं"</strong></div>
<div style="text-align:justify;">डाकघर के प्रभारी प्रशांत ने बताया — “हमें यहां कार्यभार संभाले करीब तीन महीने हुए हैं। मशीन की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन इस विषय में उच्च अधिकारियों को सूचना दी जाएगी।” उनका जवाब यह स्पष्ट करता है कि विभागीय समन्वय और निरीक्षण व्यवस्था पूरी तरह ढीली है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ग्रामीण बोले — डिजिटल इंडिया बस पोस्टरों में</strong></div>
<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि डाकघर जैसी संवेदनशील संस्था में यह स्थिति शर्मनाक है। मनीराम ने तंज कसते हुए कहा —</div>
<div style="text-align:justify;">“सरकार डिजिटल इंडिया की बात करती है, लेकिन यहां तो सरकारी सिस्टम ही किराना दुकान पर तौल करा रहा है। ये है डिजिटल इंडिया की असलियत।” लोगों ने कहा कि डाकघर में बैंकिंग, बीमा, पेंशन और मनीऑर्डर जैसी सेवाएँ चलती हैं, ऐसे में अगर वजन जैसी बुनियादी सुविधा ही गायब हो, तो जनता का भरोसा कैसे बनेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> विभागीय निगरानी पर सवाल, कार्रवाई की मांग</strong></div>
<div style="text-align:justify;">सूत्र बताते हैं कि यह मामला कई बार उच्च अधिकारियों तक मौखिक रूप से पहुंचाया गया, लेकिन अब तक न कोई जांच हुई, न सुधार। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने डाक अधीक्षक गोंडा से तत्काल नई डिजिटल तौल मशीन की आपूर्ति और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> जनता का सवाल — अगर डिजिटल इंडिया सशक्त है, तो जमीनी डाकघर इतने निर्बल क्यों?</strong></div>
<div style="text-align:justify;">यह सवाल सिर्फ खरगूपुर का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर चोट करता है। अगर दो साल तक किसी डाकघर में डिजिटल मशीन न हो, तो यह लापरवाही नहीं, बल्कि प्रणालीगत विफलता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 19:35:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रॉपर्टी डील से लेकर बिल पेमेंट तक इन 10 ट्रांजैक्शन पर IT की नजर, आपको भी लग सकता है भारी जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><b>IT Department Scrutiny: </b>क्या आप जानते है की आप जो ट्रांजैक्शन या प्रॉपर्टी डील या अन्य कोई काम कर रहे है और आपको लग रहा है की किसी को भी कुछ पत्ता नहीं नहीं लग रहा है तो आप बिल्कुल गलत सो रहें है क्यों IT की इन सभी ट्रांजैक्शन और सभी कामों पर खास नजर रहने वाली है।</p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, IT Deraprtemnt की नजर आपके हर बड़े ट्रांजैक्शन पर है? चाहे वो कैश जमा हो, क्रेडिट कार्ड बिल हो या फिर प्रॉपर्टी डील। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, डिजिटल इंडिया के इस दौर में IT ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158147/from-property-deal-to-bill-payment-keep-an-eye-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-24t094402.207.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><b>IT Department Scrutiny: </b>क्या आप जानते है की आप जो ट्रांजैक्शन या प्रॉपर्टी डील या अन्य कोई काम कर रहे है और आपको लग रहा है की किसी को भी कुछ पत्ता नहीं नहीं लग रहा है तो आप बिल्कुल गलत सो रहें है क्यों IT की इन सभी ट्रांजैक्शन और सभी कामों पर खास नजर रहने वाली है।</p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, IT Deraprtemnt की नजर आपके हर बड़े ट्रांजैक्शन पर है? चाहे वो कैश जमा हो, क्रेडिट कार्ड बिल हो या फिर प्रॉपर्टी डील। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, डिजिटल इंडिया के इस दौर में IT ने अपनी निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह हाईटेक बना लिया है। अब बैंक, म्यूचुअल फंड पोस्ट ऑफिस और रजिस्ट्री विभाग हर साल ऐसी रिपोर्ट भेजते हैं, जिससे पता चल सके कि कहां से कितना पैसा आया और कहां गया। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;">जाने कौन से हैं वो ट्रांजैक्शन? चलिए देखें...</p><p style="text-align:justify;">इन 10 मामलों पर विभाग की नजर Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>बिल का भुगतान</strong></p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, कम आय पर लगातार बड़े क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने से आप आयकर विभाग की नजर में आ सकते हैं। ITR में सही कमाई दिखाएं। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>ज्यादा कैश जमा</strong></p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, एक वित्तीय वर्ष में अगर आपने 10 लाख रुपए या उससे ज्यादा नकद जमा किए हैं तो बैंक यह SFT रिपोर्ट में भेजता है। यह गैरकानूनी नहीं है। पर स्रोत बताने होंगे। इसलिए सभी रसीदें संभालकर रखें। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>खाते से लेन-देन</strong></p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, किसी तीसरे के नाम पर ट्रांजैक्शन बेनामी या मनी-लॉन्ड्रिंग मान लिया जाता है। जिस पर भारत सरकार सख्त है और ऐसे मामलों पर आईटी डिपार्टमेंट पैनी नजर रखता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>भारी कैश विड्रॉल</strong></p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, अचानक बड़ी निकासी या बार-बार बड़ी राशि निकालना संदिग्ध दिखता है। यह आपकी इनकम से मेल नहीं बैठे तो जवाब देना पड़ सकता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>खाते और छिपाया ब्याज</strong></p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, अकाउंट छिपाने की कोशिश अब मुश्किल है। पैनक कार्ड और आधार कार्ड (PAN-Aadhaar) लिंकिंग से ट्रैक हो जाता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>बड़ी रकम</strong></p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, दोस्तों के गिफ्ट, उधार या घर की बचत, अगर दस्तावेज नहीं हैं तो समस्या बन सकती है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>अधिक की प्रॉपर्टी डील</strong></p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्रार प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन रिपोर्ट करता है। 30 लाख या फिर उससे बड़ी डीलों (property deals) पर टैक्स विभाग पूछताछ कर सकता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>बड़ी लेन-देन</strong></p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, फॉरेन कार्ड या विदेश खर्च में ₹10 लाख से अधिक होना निगरानी में आता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>बड़ी एंट्री</strong></p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, पुराने अकाउंट में अचानक बड़ी जमा या ट्रांसफर संदिग्ध माना जाता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>रिपोर्ट में अंतर</strong></p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, म्यूचुअल फंड या बैंक जो ब्याज और डिविडेंड रिपोर्ट करते हैं, वह ITR से मैच होता है। मेल न खाने पर नोटिस आता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>कैसे पकड़ता डिमार्टमेंट?</strong></p><p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक, बैंक, म्यूचुअल फंड, पोस्ट ऑफिस और रजिस्ट्रार सालाना SFT रिपोर्ट भेजते हैं। ये रिपोर्ट PAN और Aadhaar से लिंक कर मिलाई जाती है। असामान्य पैटर्न मिलने पर ऑटो-मैचिंग से नोटिस निकलता है। Income tax Department</p><p style="text-align:justify;"><strong>क्या करें?</strong></p><p style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार, बड़ी रकम की रसीदें संभाल कर रखें। गिफ्ट, प्रॉपर्टी सेल या बिजनेस इनकम के सबूत रखें। ITR सही और समय पर भरें। PAN-Aadhaar लिंक रखें। संकोच हो तो सलाहकार से बात करें। कयोंकि, सावधानी ही सबसे बढ़िया बचाव है।</p><p style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Oct 2025 09:44:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेटवर्क काटने से दंगा शांत नहीं होता है </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी भी राष्ट्र की असली परीक्षा तब होती है जब उसकी सड़कों पर अराजकता का शोर हो और सत्ता के गलियारों में निर्णयों की बेचैनी। भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे लोकतंत्र में जब भी कहीं हिंसा, दंगा या तनाव की आग भड़कती है, तब प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया होती है इंटरनेट बंद कर दो। यह निर्णय अब लगभग एक यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका है, जैसे हर संकट का यही सार्वभौमिक इलाज हो। पर वास्तव में यह सवाल बार-बार उठाया जाना चाहिए कि क्या इंटरनेट बंद कर देना शांति का रास्ता है, या यह उस समाज की थकान और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156866/network-cutting-does-not-calm-the-riot"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी भी राष्ट्र की असली परीक्षा तब होती है जब उसकी सड़कों पर अराजकता का शोर हो और सत्ता के गलियारों में निर्णयों की बेचैनी। भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे लोकतंत्र में जब भी कहीं हिंसा, दंगा या तनाव की आग भड़कती है, तब प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया होती है इंटरनेट बंद कर दो। यह निर्णय अब लगभग एक यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका है, जैसे हर संकट का यही सार्वभौमिक इलाज हो। पर वास्तव में यह सवाल बार-बार उठाया जाना चाहिए कि क्या इंटरनेट बंद कर देना शांति का रास्ता है, या यह उस समाज की थकान और शासन की असहायता का प्रतीक है जो संवाद के बजाय मौन को सुरक्षा समझ बैठा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंटरनेट आज केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की बुनियादी धारा बन चुका है। यह शिक्षा का माध्यम है, व्यापार का आधार है, शासन का औज़ार है, और सबसे बढ़कर यह नागरिकता का दर्पण है। किसी नागरिक का बैंक खाता, राशन कार्ड, आधार प्रमाणीकरण, अस्पताल का अपॉइंटमेंट, स्कूल की परीक्षा, नौकरी की तलाश सब कुछ इसी डिजिटल ताने-बाने में जुड़ा है। जब किसी राज्य या जिले में इंटरनेट सस्पेंड कर दिया जाता है, तो यह केवल नेटवर्क का बटन बंद नहीं होता, बल्कि लाखों-करोड़ों जीवनों का प्रवाह रुक जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह निर्णय एक साथ संवाद, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और नागरिकता सब पर विराम लगा देता है। प्रशासनिक पक्ष का तर्क हमेशा यही रहता है कि इंटरनेट से अफवाहें फैलती हैं, गलत सूचनाएं फैलाकर भीड़ भड़काई जाती है, और इसलिए नेटवर्क बंद करना ज़रूरी है। यह तर्क सुनने में उचित लगता है, लेकिन असल में यह लोकतांत्रिक समाज की आत्मा पर अविश्वास का बयान है। क्योंकि यदि कोई शासन यह मान ले कि उसके नागरिक इतने असंवेदनशील हैं कि केवल कुछ झूठे संदेशों से हिंसा पर उतर आएंगे, तो यह न केवल जनता की परिपक्वता पर, बल्कि शासन की नीतियों पर भी प्रश्नचिह्न है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इंटरनेट बंद करना अफवाहों का इलाज नहीं, बल्कि संवाद के पुल तोड़ देना है। यह उस विश्वास को तोड़ देता है जो किसी लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है राज्य और नागरिक के बीच भरोसे का रिश्ता। भारत अब दुनिया का वह देश बन गया है जहां सबसे अधिक बार इंटरनेट बंद किया जाता है। यह विडंबना ही है कि वही भारत जो डिजिटल इंडिया के नाम पर गर्व करता है, स्टार्टअप्स की राजधानी बनने का सपना देखता है, वही भारत डिजिटल अंधकार का सबसे बड़ा क्षेत्र भी बन चुका है। कहीं परीक्षा लीक के नाम पर, कहीं चुनावी अशांति के डर से, कहीं किसानों के आंदोलन के समय, तो कहीं किसी दंगे के बहाने नेटवर्क काट देना एक आसान प्रशासनिक आदत बन गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह सुविधा भले ही तत्कालिक राहत देती हो, पर यह लोकतंत्र के उस मूल विचार पर चोट करती है कि जनता को शासन में सक्रिय, जागरूक और संवादशील रहना चाहिए। दंगे या हिंसा के समय इंटरनेट बंद कर देना एक प्रकार का डिजिटल आपातकाल है। यह कदम उस संवैधानिक भावना के विपरीत है जो नागरिक को अभिव्यक्ति, सूचना और भागीदारी का अधिकार देती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में स्पष्ट कहा था कि इंटरनेट आज नागरिक के मूल अधिकारों का हिस्सा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक जिला अधिकारी या गृह सचिव का एक आदेश पूरे राज्य की आवाज़ बंद कर सकता है। यह असंतुलन बताता है कि तकनीकी युग में भी लोकतंत्र के भीतर सत्ता और अधिकार के बीच कितना असमान समीकरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब इंटरनेट बंद होता है, तब केवल अफवाहें नहीं रुकतीं, बल्कि सच भी बंद हो जाता है। मीडिया की आवाज़ थम जाती है, नागरिक समाज की रिपोर्टें रुक जाती हैं, और जो घटनाएं धरातल पर घट रही होती हैं, उनका कोई दस्तावेज़ नहीं बन पाता। इस स्थिति में जो सबसे बड़ी हानि होती है, वह है सत्य का अभाव। अफवाहें तब और अधिक प्रबल हो जाती हैं क्योंकि लोग अनुमान, भय और कल्पनाओं से अपनी कहानियां गढ़ने लगते हैं। इंटरनेट बंद कर देने से अफवाहें खत्म नहीं होतीं, बल्कि उनका रूप और भी अमूर्त और खतरनाक हो जाता है वे बिना प्रमाण के, बिना जवाबदेही के फैलती हैं। दरअसल हिंसा की जड़ किसी एक वायरल वीडियो या संदेश में नहीं होती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उसकी जड़ समाज के भीतर दशकों से पल रहे असमानता, भेदभाव और अविश्वास में होती है। इंटरनेट उस आग की चिंगारी हो सकता है, पर बारूद तो पहले से जमा होता है। शासन का कर्तव्य उस बारूद को हटाना है, न कि हवा रोक देना। जब प्रशासन इंटरनेट बंद करता है, तो वह इस सच्चाई से मुंह मोड़ लेता है कि हिंसा रोकने का उपाय तकनीकी नहीं, सामाजिक है। यह उपाय संवाद, शिक्षा, और पारदर्शिता से आता है, दमन से नहीं। कई बार यह भी देखा गया है कि इंटरनेट शटडाउन का निर्णय राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो जाता है। जब सरकारें चाहती हैं कि जनता को कुछ न दिखे, न सुने, न बोले, तब इंटरनेट बंद कर देना सबसे प्रभावी उपाय बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह दंगों तक सीमित नहीं रहा। अब यह विरोध प्रदर्शनों, आंदोलनों और कभी-कभी लोकतांत्रिक असहमति के समय भी लागू किया जाने लगा है। यह प्रवृत्ति बताती है कि सत्ता धीरे-धीरे सूचना पर नियंत्रण को शासन का पर्याय मानने लगी है। यह खतरनाक संकेत है, क्योंकि लोकतंत्र का सार ही सूचना की स्वतंत्रता और विचारों की बहुलता है। जब विचारों की आवाज़ें बंद होंगी, तब हिंसा सड़कों पर नहीं, समाज के भीतर होगी मौन और अनकही। आर्थिक दृष्टि से भी इसका दुष्परिणाम व्यापक है। प्रत्येक घंटे का इंटरनेट शटडाउन करोड़ों की हानि लाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">छोटे व्यापारी, ऑनलाइन सेवाएं, छात्र, चिकित्सक, किसान सब प्रभावित होते हैं। सबसे अधिक असर गरीब वर्ग पर पड़ता है जो सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और नौकरी की जानकारी के लिए मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर है। इंटरनेट बंद करना इसलिए केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है, क्योंकि यह सबसे कमजोर को सबसे पहले चोट पहुंचाता है। इंटरनेट बंद करने की प्रवृत्ति को समझने के लिए हमें सत्ता की मानसिकता को समझना होगा। सत्ता के लिए नियंत्रण हमेशा सुरक्षा जैसा दिखता है, जबकि नागरिक के लिए वही नियंत्रण भय बन जाता है। जब शासन यह मान ले कि सुरक्षा का अर्थ संवाद को रोकना है, तब वह धीरे-धीरे उस औपनिवेशिक मानसिकता में लौट आता है जो जनता को शासित वर्ग मानती थी, सहभागी नहीं। स्वतंत्र भारत के लिए यह सबसे बड़ा नैतिक पतन होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज में शांति लाने का असली उपाय यह नहीं कि हम नेटवर्क काट दें, बल्कि यह कि हम सामाजिक नेटवर्क मजबूत करें। विश्वास, शिक्षा और आपसी संवाद के पुल बनाएं। शासन को तकनीकी दमन नहीं, बल्कि सूचना की साक्षरता पर ध्यान देना चाहिए। यदि जनता डिजिटल मीडिया की कार्यप्रणाली समझे, यदि लोग जानें कि फर्जी खबरों की पहचान कैसे करें, तो किसी भी अफवाह का असर सीमित रहेगा। इसी तरह, सरकार को भी तकनीकी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। पूरे नेटवर्क पर प्रतिबंध के बजाय केवल उन विशेष प्लेटफार्मों या खातों को चिन्हित किया जाए जो हिंसा भड़काने में भूमिका निभा रहे हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह उपाय नियंत्रण और स्वतंत्रता दोनों के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है। दंगे और हिंसा से निपटने में प्रशासन को डर नहीं, विश्वास के साथ काम करना चाहिए। नागरिकों से संवाद करें, मीडिया को सही जानकारी दें, और सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहों का प्रतिवाद करें। सरकार चाहे तो इंटरनेट को बंद करने के बजाय उसे शांति का औज़ार बना सकती है‌ सही सूचनाएं प्रसारित करके, अफवाहों का तुरंत खंडन करके और जनता को सच से जोड़कर। यही तकनीकी युग की सबसे बड़ी ताकत है, और यही वह रास्ता है जो समाज को अंधकार से बाहर ला सकता है। यह भी स्मरण रहे कि हर बार जब इंटरनेट बंद किया जाता है, तब लोकतंत्र की सांसें कुछ पल के लिए थम जाती हैं। संवाद से ही समाज जीवित रहता है, और जब संवाद बंद होता है, तब भय और नफरत का शोर बढ़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसी लोकतांत्रिक शासन का यह दायित्व है कि वह भय से नहीं, विश्वास से शासन करे; दमन से नहीं, संवाद से व्यवस्था बनाए। इंटरनेट सस्पेंड करना आसान है, पर शांति बनाना कठिन है। और शासन की असली परिपक्वता उसी कठिनाई को स्वीकार करने में है। इसलिए अब समय है कि भारत इंटरनेट शटडाउन की अपनी नीति पर पुनर्विचार करे। उसे यह मानना होगा कि शांति नेटवर्क बंद करने से नहीं, नेटवर्क जोड़ने से आती है। हमें ऐसी शासन संस्कृति चाहिए जो सूचना से नहीं डरती, बल्कि उसे जिम्मेदारी से प्रयोग करना सिखाती है। हमें ऐसे नागरिक चाहिए जो तकनीक को नफरत का नहीं, समझ का माध्यम बनाएं। तभी डिजिटल इंडिया वाकई लोकतांत्रिक इंडिया बन पाएगा। अंततः प्रश्न यही है कि क्या हिंसा का जवाब मौन से दिया जा सकता है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या शांति तब आएगी जब हर मोबाइल सिग्नल बंद कर दिया जाए, हर स्क्रीन अंधेरी कर दी जाए, हर नागरिक को चुप करा दिया जाए? नहीं शांति तब आएगी जब सच बोले जाने की हिम्मत होगी, जब संवाद बचेगा, जब लोग एक-दूसरे की बात सुन सकेंगे। इंटरनेट उस संवाद का सबसे बड़ा पुल है। उसे तोड़ देना शांति नहीं लाता, केवल अंधकार बढ़ाता है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति की आवाज़ महत्वपूर्ण है। इंटरनेट उन आवाज़ों को जोड़ता है, उन्हें समाज के केंद्र में लाता है। जब किसी दंगे के समय यह आवाज़ बंद कर दी जाती है, तो हम न केवल संचार का रास्ता काटते हैं, बल्कि नागरिकता की आत्मा को भी मौन कर देते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एक मौन समाज, चाहे वह कितना भी सुरक्षित दिखे, भीतर से हमेशा असुरक्षित होता है। इसलिए यह कहना नितांत आवश्यक है कि दंगे की आग बुझाने का उपाय नेटवर्क काटना नहीं, संवाद जलाए रखना है। इंटरनेट सस्पेंड कर देना समाधान नहीं, बल्कि उस बीमारी की स्वीकारोक्ति है जिसे हम ठीक करना ही नहीं चाहते। लोकतंत्र की सांसें तभी चलेंगी जब हर नागरिक, हर नेटवर्क और हर आवाज़ खुली रहेगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Oct 2025 15:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा क्षेत्र में BSNL इंटरनेट सेवा नहीं मिलना से ग्राहकों ने नाराजगी जाहिर की।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>असम श्रीभूमि (करीमगंज)- </strong>वर्तमान डबल इंजन सरकार विकास के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उन्नति के लिए और जनता के लाभ के लिए डिजिटल इंडिया में विभिन्न प्रक्रियाओं को अपना रही है ताकि हर जगह इंटरनेट सेवा हाई स्पीड के माध्यम से ग्राहकों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। लेकिन वर्तमान सरकार के शासन में इस डिजिटल इंडिया के माध्यम से BSNL 2जी-3जी-4जी इंटरनेट सेवा पूरी तरह से बंद होने से असम श्रम में जिले के दुल्लभछड़ा क्षेत्र में ग्राहकों की शिकायतें करते हुए नाराजगी जाहिर की।</div>
<div>  </div>
<div>दुल्लभछड़ा के क्षेत्र में कई महीनों से BSNL इंटरनेट सेवा देने के</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/149872/customers-expressed-their-displeasure-over-not-getting-bsnl-internet-service"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/22iwv17gvd0swxvlfhgenpuv5eaaymq8j2rft9iw.webp" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div><strong>असम श्रीभूमि (करीमगंज)- </strong>वर्तमान डबल इंजन सरकार विकास के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उन्नति के लिए और जनता के लाभ के लिए डिजिटल इंडिया में विभिन्न प्रक्रियाओं को अपना रही है ताकि हर जगह इंटरनेट सेवा हाई स्पीड के माध्यम से ग्राहकों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। लेकिन वर्तमान सरकार के शासन में इस डिजिटल इंडिया के माध्यम से BSNL 2जी-3जी-4जी इंटरनेट सेवा पूरी तरह से बंद होने से असम श्रम में जिले के दुल्लभछड़ा क्षेत्र में ग्राहकों की शिकायतें करते हुए नाराजगी जाहिर की।</div>
<div> </div>
<div>दुल्लभछड़ा के क्षेत्र में कई महीनों से BSNL इंटरनेट सेवा देने के नाम पर ग्राहकों के साथ छुपाछुपी का खेल खेला जा रहा है और ग्राहक रिचार्ज करने के बावजूद बात नहीं कर पा रहे हैं और इंटरनेट सेवा से वंचित हो रहे हैं। इस विषय पर ग्राहकों ने बीएसएनएल के ग्राहक कॉल सेंटर मोबाइल के माध्यम से सेवा की शिकायत की है, फिर भी आज तक कोई सही कदम नहीं उठाया गया है विभाग की ओर से। श्रीभूमि जिले के बीएसएनएल विभाग के अधिकारी सब कुछ जानकर भी चुप्पी साधे हुए हैं, इसीलिए ग्राहक बीएसएनएल पर निर्भर नहीं रह पा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>बीएसएनएल सेवा बहुत पुरानी और लोकप्रिय थी, लेकिन इस सेवा क्यों ठीक नहीं हो पा रही है. ग्राहक समझ नहीं पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दूर-दूर के परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क में रहने और इंटरनेट की बेहतर नेटवर्क सेवा के लिए ग्राहक निर्भर हो गए थे। क्योंकि आवश्यकताओं की सूची में संपर्क के साथ इंटरनेट की अपार भूमिका थी। इसके अलावा, कई ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक 3 से 6 महीने या साल भर का नेट पैक रिचार्ज करते हैं। इससे बीएसएनएल सेवाओं का लाभ हो रहा है।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन ग्राहकों को सेवा के नाम पर पैसे गंवाने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, दुल्लभछड़ा पोस्ट ऑफिस के पोस्ट मास्टर ने कहा कि बीएसएनएल नेटवर्क न होने के कारण ऑफिस के विभिन्न कामकाज करने में कई समस्याएं आ रही हैं। इस मामले में श्रीभूमि जिले के दुल्लभछड़ा क्षेत्र में सही सेवा के लिए ग्राहकों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित टेलीकम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का ध्यान आकर्षित किया। ताकि इस BSNL इंटरनेट की समस्या जितनी जल्दी हो सके समाधान की जाए और हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाए।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 15:50:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश की पहली मुफ्त वाई-फाई पालिका बनेगी मीरजापुर</title>
                                    <description><![CDATA[जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन भी रही मौजूद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/145550/mirzapur-will-become-the-first-free-wi-fi-municipality-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-10/8......jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मीरजापुर।</strong> नगर पालिका अध्यक्ष श्यामसुंदर केशरी ने पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया को साकार करने के लिए नगर में ट्रायल रन के लिए पद यात्रा कर मुफ्त वाई-फाई सुविधा का शुभारंभ किया है।पद यात्रा के दौरान विभिन्न चौराहे पर इस सुविधा के लिए,अधिवक्तागण,पालिका के सभासदों एवं स्थानीय लोगों ने नपाध्यक्ष को माल्यार्पण कर स्वागत किया।बता दे मीरजापुर नगर पालिका प्रदेश के पहली ऐसी निकाय बनेगी जहां पालिका द्वारा नगर की जनता को मुफ्त वाई-फाई सुविधा का लाभ मिलेगा।नगर के सिटी क्लब में नपाध्यक्ष ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान बताया कि अभी नगर के दो किलामीटर एरिया में मुफ्त वाई फाई की सुविधा का ट्रायल रन किया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>जिसमें जिला न्यायालय,जिला अस्पताल,संकटमोचन,वासलीगंज,पुलिस चौकी बरियाघाट,खजांची का चौराहा,गिरधर का चौराहा एवं घंटाघर तक लोग क्यूआर कोड स्कैन कर मुफ्त वाई-फाई से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगें।आगे चलकर नगर क्षेत्र के अन्य प्रमुख स्थानों को भी वाई-फाई से जोड़ा जाएगा।इन इलाकों में प्रतिदिन एक घंटे तक पांच जीबी फ्री इंटरनेट मिलेगा,पांच जीबी उपयोग के उपरांत यदि और डाटा की जरूरत पर उसे मात्र दस रुपए में सात जीबी इंटरनेट की सुविधा प्राप्त होगी।</div>
<div> </div>
<div>इस योजना से समाज के अंतिम व्यक्ति के लोगो,हॉस्पिटल के तिमारदारों,जिला न्यायालय आने वाले वादकारी,अधिवक्तागण के साथ छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंटरनेट की जरूरतों को पूरा करेगा।नगर पालिका ने बीते महीनों में पालिका के डिजलिटीकरण,घंटाघर की घड़ी, ट्राई लाइट,पार्कों एवं तालाबों का सुंदरीकरण,मीरजापुर को स्वच्छ बनाने के लिए इंदौर की बेसिक्स टीम को भी लगाया है।कई ऐसे विकास कार्य कराए गए है जो पालिका को प्रदेश में अग्रसर कर रही है।</div>
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<div>इस मौके पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री मा.नरेंद्र मोदी महोदय का लक्ष्य है डिजिटल इंडिया अभियान,जहा सारे लेन-देन हो वो डिजिटल माध्यम से हो।जिससे स्ट्रीट वेंडर,सब्जी विक्रेता,पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं सहित आमजनों को मुफ्त वाई-फाई से एक घंटा मुफ्त में इंटरनेट मिल सकेगा।आने वाले समय में पालिका द्वारा इसे वर्किंग आवर्स के लिए बढ़ाया जाए,जिससे रेहड़ी पटरी के व्यापारी दुकानदारों,विद्यार्थियों को लाभ मिल सकेगा।</div>
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<div>आज के युग में इंटरनेट और मोबाइल हमारे जीवन एक हिस्सा बन चुका है,यदि एक घंटे के लिए मोबाइल से नेटवर्क बाधित हो जाता तो लोगो को लगता है वो दुनिया से कट गए है।इसलिए बैंकिंग से लेकर तमाम क्षेत्रों में इंटरनेट की भूमिका अहम हो जाती है।नेट लाइफ नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड से विमल गुप्ता ने बताया है कि यह उत्तर प्रदेश की पहली दो किलोमीटर की रोड वाई-फाई होगी।जिसमे एक साथ एक बार में दो हजार लोग कनेक्ट होंगे,पालिका के साथ अभी तीन साल का अनुबंध किया गया है।ट्रायल रन में  लोगो को बेहतर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।इस मौके पर पालिका के सभासद,व्यापारी समाज के लोग,अन्य गणमान्य व्यक्ति,अधिकारी एवं कर्मचारीगण मौजूद रहे।</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 16:31:21 +0530</pubDate>
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